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अब की होली, कौन उड़ाएगा गुलाल, किसके चेहरे का उड़ेगा रंग

Punjab Election 2017
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राजनीति दंगल| 13 मार्च की होली और चार फरवरी को विधानसभा चुनावों के नतीजे आएंगे
ChandiGarh/Sirsa, Mandeep Singh: देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे रंगों के त्योहार होली से पहले आ जाने के कारण कई पार्टियों की होली रंगीन हो जाएगी तो कुछ के लिए यह फीकी भी रह जाएगी। अंतिम चरण के चुनाव प्रचार में भी होली का रंग देखने को मिल सकता है। लोकतंत्र के इस महापर्व में सारी पार्टियां जोशो-खरोश के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगी, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि इन राज्यों के मतदाता उनकी किस्मत का फैसला किस तरह करते हैं। जीत और हार इस लोकतांत्रिक पर्व का हिस्सा है लेकिन असल होली वही मनाएगा जिसके सिर पर ताज होगा। आपको बतां दे कि 14 फरवरी को होली का त्यौहार है और चार फरवरी को पंजाब विधानसभा के चुनावों का ऐलान होगा।

टिकटों में पिछड़ी भाजपा
कांग्रेस की कमान पिछले चुनाव की तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह तथा अकाली भाजपा गठबंधन की मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और आप पार्टी की दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हाथों में है।
इस बार के चुनाव में इन तीनों नेताओें की प्रतिष्ठा दांव पर है। हालांकि कांग्रेस को अभी 40 उम्मीदवारोें का एलान करना है। आप अपने सभी उम्मीदवारोें का एलान कर चुकी है तथा अकाली दल ने भी ज्यादातर सीटोें पर उम्मीदवारोें का एलान कर दिया है। भाजपा को अभी उम्मीदवारों की घोषणा करनी है। दोनों पार्टियों के लिए ‘आप’ चिंतित राज्य में बादल से लेकर अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने भाषणोें में आप को कोसते नजर आते हैं। उनकी बातोें से स्पष्ट है कि दोेनोें मुख्य दलोें की टक्कर आप पार्टी से है। इसी रणनीति के तहत चुनाव प्रचार, लोगों से संपर्क और अन्य तरीके अपना रहे हैं। रैलियां, रोड शो के अलावा ज्यादा जोर जन संपर्क पर है ।

रोचक मुकाबले: दौड़ में तीन पार्टियां
पंजाब में इस बार सबसे रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा, क्योंकि तीन पार्टियां शिरोमणी अकाली दल-भाजपा, आम आदमी पार्टी व कांग्रेस चुनावी मैदान में हैं। लोगोें का मानना है कि इस बार कोई भी पार्टी बहुमत से सरकार नहीं बनाएगी। यदि अकाली दल की बात करें तो तीन साल लगातार सत्तापक्ष में रहने के बाद अब चौथी बार सरकार बनाने के लिए जोर लगाएंगे, लेकिन जनता की चर्चाओं से एहसास हुआ है कि अकाली दल इस बार सत्ता में नहीं आएगी। लोग अकाली सरकार को नशे के मुद्दे, बेरोजगारी के मुद्दे पर कोसते हुए देखे गए। चौपालों में चर्चा है तो आम आदमी पार्टी व कांग्रेस की।

एसवाईएल पर राजनीति
अकाली दल का आरोप है कि राज्य में आतंकवाद तथा एसवाईएल नहर की आधारशिला कांग्रेस की देन है। जबकि कांग्रेस एसवाईएल मामले को अकाली दल की देन बताकर किसानोें को अपनी ओर आकर्षित करने के प्रयास में है। दोेनों आप पर दोष मंढ रहे हैं कि केजरीवाल ने एसवाईएल मुद्दे पर राज्य के हितों का विरोध किया। इसलिये पंजाबी आप को वोट नहीं देंगे।

‘आप’ का अपना स्टैंड
आप ने हाल में एसवार्ईएल मुद्दे पर अपना स्टैंड साफ करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वह पंजाब का पानी किसी को देने के हक में नहीं हैं। पानी ज्यादा नहीं है तो पंजाब का पानी पंजाब को ही मिलना चाहिए। आप ने नहर निर्माण के लिए अकाली तथा कांग्रेस को ही दोषी बताते हुये कहा कि दोनों पार्टी लोगोें को मूर्ख बनाकर वोट हासिल करने के लिये प्रपंच रच रही हैं।

मुद्दों का आभाव
राजनीतिक पर्यवेक्षकोें के अनुसार सत्तारूढ़ दल के पास केन्द्र की भाजपा सरकार के सहयोग से प्रदेश में विकास के अलावा कोई ठोस मुद्दा नहीं है। पिछले चुनावोें में भी किसानों को लुभाने के लिये मुफ्त बिजली तथा नहरी पानी देने के वादे के साथ सत्ता में आया था लेकिन कृषि तथा आर्थिक स्तर पर राज्य की हालत खराब है जिससे बेरोजगारी, उद्योगोें का पलायन, निवेश न होना, कर्मचारियोें को समय पर वेतन न मिलना आदि कई समस्यायें हैं और सत्ता विरोधी का खामियाजा अकाली दल को भुगतना होगा।

अकाली दल ने इन हलकों में खपाया पैसा
लंबी तथा भटिंडा हलके में सारा पैसा विकास पर खर्च किया और अन्य हलकों से भेदभाव किया है। आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से लगे सीमावर्ती इलाकोें में बुनियादी जरूरतोें की ओर कोर्ई ध्यान नहीं दिया तथा किसानों की हालत खराब है। उन्हें खराब फसलोें की अनुग्रह राशि भी नहीं मिली।

इन मुद्दों पर उतरी पार्टियां
आप पार्टी नशा, किसान आत्महत्या, माफिया, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी के मुद्दे पर चुनाव मैदान में आ डटी है तथा कांग्रेस के पास कोर्ई खास मुद्दा नहीं है लेकिन अकाली सरकार की विफलता, नशा, कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव में उतरी है और अकाली गठबंधन का चुनाव एजेंडा विकास तथा राज्य में शांति और भार्ईचारा कायम रखना है। वह विकास के मुद्दे पर दावे से कहती है कि इससे पहले कभी इतने विकास काम नहीं हुए जितने अकाली सरकार में हुए।

अकालियों पर भारी पड़ेंगे किसान
कृषि अर्थशास्त्री मानते हैं कि अकाली सरकार से किसान संतुष्ट नहीं है। किसानों की सामाजिक आर्थिक समस्याएं हल करने के लिये ठोेस कदम नहीं उठाए। कांग्रेस का दावा है कि बादल ने विकास का पैसा संगत दर्शन के जरिये अनुदानों में दिया।

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