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रंग लाया संघर्ष, अब सुनेंगे स्वतंत्रता सेनानियों की पीड़ा

सच कहूँ इंपैक्ट

  • असर। हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति के चेयरमैन बने 96 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी ललती राम
  • सच कहूँ ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी खबर
  • प्रदेश सरकार ने मानी सभी मांगें

ChandiGarh, Anil Kakkar:  आखिर एक स्वतंत्रता सेनानी का संघर्ष रंग लाया और सच कहूँ समाचार पत्र की खबर का असर हुआ। दरअसल सच कहूँ ने अक्तूबर माह में एक वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी ललती राम जो कि काफी समय से अपनी मांगों के लिए सचिवालय के चक्कर लगाने को मजबूर था, की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जिसके फलस्वरूप सरकार ने संज्ञान लेते हुए गत दिवस ललती राम को न केवल सम्मान देते हुए उनकी कई मांगें स्वीकारी बल्कि उन्हें हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति का चेयरमैन भी बना दिया। बता दें कि सुभाष चंद्र बोस की फौज इंडियन नैशनल आर्मी के सदस्य रहे 96 वर्षीय ललती राम सुपुत्र जय लाल निवासी झज्जर को प्रदेश सरकार ने गत दिवस तुरंत प्रभाव से हरियाणा स्वतंत्रता सैनानी सम्मान समिति का चेयरमैन घोषित कर दिया। इस संबंध में आदेश विजेंद्र कुमार, सचिव हरियाणा सरकार ने आदेश जारी किए।

ये हैं ललती राम पर जिम्मेदारियां
इन्हीं आदेशों में ललती राम की जिम्मेवारियां भी तय की गई हैं जिनमें मुख्य तौर पर स्वतंत्रता सैनानियों/आईएनए के फौजियों को मिनिस्ट्री आॅफ होम अफेयर, भारत सरकार से ‘स्वतंत्रता सैनानी सम्मान पैंशन स्कीम-1980’ के तहत पैंशन जारी करवाना। यदि स्वतंत्रता सैनानी/आईएनए सदस्य स्वर्ग सिधार गए हैं तो उनकी पत्नियों, बेटियों या अविवाहित बेरोजगार लड़कों जिन्हें 75 फीसदी तक अपंगता हो, पैंशन दिलवाना। वहीं स्वतंत्रता सैनानी/आईएनए सदस्यों के परिवारों को जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता की सिफारिश करना। इसी के साथ ही स्वतंत्रता सैनानी/आईएनए सदस्यों से संबंधित अन्य किसी भी मामले की सुनवाई करना तथा उन्हें उनका बनता हक़ दिलवाना है।

ढ़ाई माह पूर्व किया था ये खुलासा
बता दें कि 27 अक्तूबर 2016 को सच कहूँ समाचार पत्र ने स्वतंत्रता सैनानी ललती राम से संबंधित समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसमें ललती राम ने सच कहूँ को अपनी मांगों तथा समस्याओं के बारे में बताया था। ललती राम कादयान ने नेता जी सुभाष चंद्र के बारे में बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस 18 अगस्त 1945 को जीवित थे तथा इंडियन नैशनल आर्मी (आईएनए) की एक बटालियन को थाइलैंड के एक तोपखाने में भाषण दे रहे थे। उनकी मृत्यु की घोषणा केवल राजनैतिक फायदों के लिए की गई थी। ललती राम ने कहा था कि वे 1942 में ही सुभाष चंद्र बोस से प्रभावित होकर उनकी फौज आईएनए में बतौर तोपची शामिल हो गए थे। वे अंग्रेजों से भारत का आजाद करवाना चाहते थे तथा सुभाष चंद्र बोस के विचारों से काफी प्रभावित थे। उन्होंने तब प्रदेश तथा केंद्र सरकार से मांग की थी कि नेता जी की मृत्यु संबंधी सच्चाई देश के सामने लाई जाए। उन्होंने मांग की कि आईएनए से जुड़े रिकॉर्ड दिल्ली में हैं तथा जापान, थाइलैंड आदि देशों से आया आईएनए का खजाना भी सार्वजनिक किया जाए तथा उस समय उस फौज में शामिल रहे फौजियों को आर्थिक मदद भी दी जाए।

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