हनुमानगढ़ में लम्पी स्किन डिजीज से 408 गायों की मौत

हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। लम्पी स्किन डिजीज की चपेट में आने से हनुमानगढ़ जिले में भी अब तक सैकड़ों गायों की मौत हो चुकी है। हालांकि जिले में अभी स्थिति नियंत्रण में है। इस बीमारी से ग्रसित हजारों गाय ठीक हो चुकी हैं। अब तक जिले में इस बीमारी से कुल 408 गायों की मौत हुई है। इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए पशुपालन विभाग की टीम प्रतिदिन फील्ड में जाकर सर्वेक्षण का कार्य कर रही है। जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने बताया कि पिछले लम्पी स्किन डिजीज के बारे में 10-12 दिन पहले चर्चा चलने के समय ही जिले में तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। सभी टीमों को सर्वे करने व इस बीमारी को रोकने के संबंध में कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया था। साथ ही नगर पालिका ईओ व नगर परिषद आयुक्त को निर्देशित किया गया कि जहां इस बीमारी से पशुओं की मौत हो रही है, वहां जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉली नगर पालिका व नगर परिषद उपलब्ध करवाए।

किसी भी सार्वजनिक स्थान पर गहरा गड्ढा कर या हड्डारोडी में गड्ढा कर मृत पशुओं को दफनाया जाए ताकि मृत पशुओं के कारण कोई जिंदा पशु संक्रमित न हो। गत शुक्रवार को मुख्यमंत्री की ओर से भी वीसी के माध्यम से निर्देशित किया कि पशुपालकों को समस्याएं न हो और लम्पी स्किन डिजीज के बारे में अधिकतम लोग जागरूक हों, जो पशु इस बीमारी से मरे हैं उनका सही तरीके से निस्तारण हो, दवाइयों सहित अन्य किसी भी संसाधन भी कमी न हो। उसी अनुसरण में उपखण्ड अधिकारियों की ओर से शनिवार सुबह जिले के सभी पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ वीसी कर घर-घर व गोशाला जाकर सर्वे करने के लिए निर्देशित किया गया ताकि बड़ी संख्या में एकसाथ फैलनी वाली इस बीमारी को रोका जा सके।

इसके अलावा जहां दवाइयां कम थी, वहां दवाइयां पहुंचाई गई। नोहर, पीलीबंगा व भादरा विधायकों की ओर से 25 लाख रुपए इस बीमारी से लड़ने के लिए जिले को दिए गए हैं ताकि पशु चिकित्सकों को मूवमेंट करने के लिए वाहन, इस बीमारी के प्रचार-प्रसार के लिए पम्पलेट, अन्य सामग्री, दवाइयां और किसी भी प्रकार की कमी न आए। जिला कलक्टर ने बताया कि लोगों की भ्रांतियां समाप्त हों, इसके लिए अवेयरनेस के कैम्पेन लगातार चल रहे हैं। प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय पर इस बीमारी से बचाव के संबंध में जानकारी संबंधी एक-एक हजार पम्पलेट भेजे गए हैं। उनका वितरण किया जा रहा है। स्टाफ का इस तरह डेपुटेशन और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि जिले का कोई भी कोने या जगह पर रहने वाले पशुपालक दवाइयों और निरीक्षण से वंचित न रहें।

हर जगह प्रशासन का कोई अधिकारी या कर्मचारी वहां पहुंचे। पशुपालन विभाग की पूरी टीम ने भी आश्वस्त किया है कि जिस प्रकार कोरोना महामारी में सामान्य चिकित्सकों ने अच्छा कार्य किया है, गायों की इस लम्पी स्किन डिजीज की महामारी में उसी तरह सब मिलकर अच्छा कार्य करेंगे। डिडेल ने बताया कि अब तक जिले में 1 लाख 20 हजार पशुओं का सर्वेक्षण पशुपालन विभाग की ओर से किया जा चुका है। इस बीमारी से ग्रसित करीब 3700 गाय ठीक हो चुकी हैं। शेष को का उपचार किया जा रहा है ताकि उन्हें राहत मिले और धीरे-धीरे वह ठीक हों। इस बीमारी से रविवार शाम तक 408 गायों की मौत हो चुकी थी। जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने बताया कि प्रतिदिन पशुपालन विभाग की टीम फील्ड में जाकर पशुपालकों से मिल रही है। गोशालाओं में भी सर्वेक्षण किया जा रहा है ताकि लम्पी स्किन डिजीज को हनुमानगढ़ जिले में नियंत्रित किया जा सके।

निराश्रित गोवंश का कर रहे संरक्षण

जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने बताया कि निराश्रित व बेसहारा पशुओं के संबंध में भी निर्देशित किया गया है कि जो बड़ी गोशालाएं हैं वे अपनी गोशाला का एक हिस्सा पशु बाड़े के रूप में अलग से रखें ताकि लम्पी स्किन डिजीज से ग्रसित पशु के आने पर वहां उसका आइसोलेशन किया जा सके। इसके साथ ही ऐसे निराश्रित गोवंश जिनके संरक्षण की आवश्कता है उन्हें नजदीक की गोशालाओं में भेजा जा रहा है। क्योंकि मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस बार गायों के लिए गोशालाओं का अनुदान 6 माह से बढ़ाकर 9 माह का कर दिया है।

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