Successful Story: जानें! घाटे की इस खेती से कैसे लाखों रुपए कमा रहा यह किसान?

Successful Story

Successful Story: देश में ज्यादातर किसानों की समस्या उनकी आमदनी से उनके खर्चे और जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं। इस बीच कुछ किसान ऐसे भी हैं जो कुछ नया कर रहे हैं, इनोवेशन के साथ खेती कर रहे हैं, प्रोसेसिंग से जुड़ रहे हैं और उनकी आय भी बढ़ रही है। महाराष्ट्र के जलगांव में रहने वाले अशोक प्रभाकर गाड़े भी उनमें से एक हैं। केले की खेती के साथ-साथ वो इसकी प्रोसेसिंग कर भी अच्छी कमाई कर रहे हैं। अशोक प्रभाकर गाड़े देश के प्रसिद्ध केला उत्पादक क्षेत्र जलगांव से आते हैं। उनका घर यावल तालुका में है, जहां केले की खेती सबसे ज्यादा होती है। वो केले की खेती के साथ-साथ उसका बिस्कुट, चॉकलेट और स्नैक्स भी बनाते हैं। Successful Story

वो दिन में 50 किलो केले के बिस्कुट बनाते हैं। बाजार में वो 600 रुपये किलो के हिसाब से बेचते हैं और खर्चा आता है 400 के आसपास। जबकि केले का दाम इस समय 30 से 50 रुपये किलो ही है। दूसरी ओर इसका बना चिप्स 300 रुपये किलो बेचते हैं और खर्च 200 रुपये से कम ही आता है। जो किसान इस बात से परेशान हैं कि उनकी आय नहीं बढ़ रही है उन्हें महाराष्ट्र के इस किसान से सीखना चाहिए। यावल तालुका में एक कृषक परिवार में जन्मे अशोक प्रभाकर गाड़े ने जलगांव में कानून की पढ़ाई की।

केले से बने प्रोडक्ट में वो 30 परसेंट का मुनाफा कमा लेते हैं

एलएलबी से स्नातक करने के बाद उन्होंने लगभग पांच वर्षों तक कानून का अभ्यास किया। हालांकि 1990 में उनके पिता के निधन के बाद उन्हें अपनी प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी। वो पहले सिर्फ केले की खेती करते थे, लेकिन इसमें अक्सर घाटा उठाना पड़ता था। इसलिए खुद के खेत में उगाए गए केले से कुछ बनाने का फैसला किया। खुद ऑर्गेनिक तरीके से केले की खेती की। उसकी प्रोसेसिंग करना शुरू किया। यह सिलसिला 2010 से चल रहा है। केले का बिस्कुट पहले किसी ने नहीं बनाया था इसलिए उन्हें इसके लिए पेटेंट मिला। किसी किसान के लिए यह बहुत बड़े गर्व की बात है।

केले से बने प्रोडक्ट में वो 30 परसेंट का मुनाफा कमा लेते हैं। उनके उत्पाद अब बेंगलुरु, मुंबई और इंदौर जैसे शहरों में सप्लाई होता है। खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग से जुड़ने के बाद वो इस काम में कई महिलाओं को रोजगार भी दे रहे हैं। केले का आटा, जाम और पापड़ जैसे आइटम भी अब उनके यहां बनने लगे हैं। अशोक प्रभाकर गाडे कहते हैं कि हमने उपभोक्ताओं और उत्पादन के बीच से बिचैलियों की चेन तोड़ने का काम किया।

इसलिए खाने और बनाने वाले दोनों को फायदा है। वो उपभोक्ताओं तक अपने प्रोडक्ट की डायरेक्ट सप्लाई करवाते हैं। वो इस समय तीन हेक्टेयर में केले की खेती करते हैं और उसकी प्रोसेसिंग करके बिस्कुट बनाते हैं। एक क्विंटल केले में 20 किलो बिस्कुट तैयार हो जाता है। पिछले तीन वर्षों से वो और उनकी पत्नी कुसुम स्थानीय स्तर पर केले के बिस्कुट का निर्माण और बिक्री कर रहे हैं। Successful Story

देवेन्द्रराज सुथार, स्वतंत्र एवं युवा लेखक 

यह भी पढ़ें:– BJP CM Name: छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री बन रहे विष्णु देव साय कौन हैं?