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                <title>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>इजरायल ने सोमालीलैंड के लिए अपना पहला राजदूत किया नियुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[यरूशलम/हरगेसा। सोमालीलैंड के साथ अपने राजनयिक संबंधों को प्रगाढ़ करते हुए इजराइल ने आधिकारिक तौर पर इस आंशिक रूप से मान्यता प्राप्त देश के लिए अपना पहला राजदूत नियुक्त किया है। इजरायल के इस कदम की सोमालिया ने कड़ी निंदा की है और इसे ‘अनधिकृत घुसपैठ’ करार दिया है। इजरायल पिछले साल दिसंबर में सोमालीलैंड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/israel-appoints-its-first-ambassador-to-somaliland/article-83901"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/jerusalem.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>यरूशलम/हरगेसा।</strong> सोमालीलैंड के साथ अपने राजनयिक संबंधों को प्रगाढ़ करते हुए इजराइल ने आधिकारिक तौर पर इस आंशिक रूप से मान्यता प्राप्त देश के लिए अपना पहला राजदूत नियुक्त किया है। इजरायल के इस कदम की सोमालिया ने कड़ी निंदा की है और इसे ‘अनधिकृत घुसपैठ’ करार दिया है। इजरायल पिछले साल दिसंबर में सोमालीलैंड के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। सोमालीलैंड ने 1991 में गृहयुद्ध के बाद सोमालिया से अलग होकर खुद को एक स्वतंत्र राज्य घोषित किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इजरायली विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में अफ्रीका के लिए आर्थिक राजदूत के रूप में कार्यरत माइकल लोटेम सोमालीलैंड में इजरायल के राजदूत का पद संभालेंगे। इजरायल का सोमालीलैंड को मान्यता देने का निर्णय उसकी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। दरअसल, तीन दशकों से अधिक समय से अपनी स्वयं की सरकार, मुद्रा, सेना और पासपोर्ट प्रणाली होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोमालीलैंड को मान्यता नहीं मिली थी।<br />
इजरायली राजदूत की यह नियुक्ति दोनों पक्षों के बीच संबंधों को औपचारिक बनाने की दिशा में उठाए गए सिलसिलेवार कदमों का हिस्सा है। इससे पहले जनवरी में इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने सोमालीलैंड का दौरा किया था, वहीं सोमालीलैंड ने फरवरी में मोहम्मद हागी को यरूशलम में अपना राजदूत नामित किया था। रणनीतिक रूप से सोमालीलैंड की स्थिति अदन की खाड़ी के पास होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री नौवहन गलियारों में से एक है। विशेष रूप से वहां का बरबेरा बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 10:54:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Bahrain News: बहरीन में दिखा डेरा सच्चा सौदा सेवादारों में मानवता की सेवा के प्रति भारी उत्साह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्तदान कैंप लगाकर किया 24 यूनिट रक्त दान Blood Donation: बहरीन (सच कहूँ न्यूज)। डेरा सच्चा सौदा की ओर से चलाई जा रही मानवता भलाई की शिक्षाओं पर चलते हुए 24 अप्रैल को सलमानिया हॉस्पिटल मनामा, बहरीन में रक्तदान कैंप लगाया गया। कैंप में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के वॉलेंटियर्स द्वारा 24 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/immense-enthusiasm-for-humanitarian-service-witnessed-among-dera-sacha-sauda-volunteers-in-bahrain/article-83900"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/bahrain-welfare.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<h3>रक्तदान कैंप लगाकर किया 24 यूनिट रक्त दान</h3>
<p>Blood Donation: बहरीन (सच कहूँ न्यूज)। डेरा सच्चा सौदा की ओर से चलाई जा रही मानवता भलाई की शिक्षाओं पर चलते हुए 24 अप्रैल को सलमानिया हॉस्पिटल मनामा, बहरीन में रक्तदान कैंप लगाया गया। कैंप में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के वॉलेंटियर्स द्वारा 24 यूनिट रक्तदान किया। रक्तदानियों में हरजिंदर इन्सां प्रेमी सेवक, विजय कुमार 15 मेंबर, परमवीर सिंह 15 मेंबर, राजवीर सिंह, रमन कुमार, जगदेव सिंह, प्रदीप सिंह, सुखप्रीत सिंह, सुखमंदर सिंह, बलदेव सिंह, शमशेर सिंह, आशू इन्सां, गुरप्रीत सिंह, सरवन कुमार, हरजिंदर सिंह, दीदार सिंह, दिलवीर राम, राजीव कुमार, सुमित कुमार, पूजा रानी 15 मेंबर, राजविंदर कौर, मनप्रीत कौर, परमजीत कौर, दीक्षा रानी शामिल थे। इस दौरान रक्तदानियों में भारी उत्साह देखा गया। दूर-दूर से आए वॉलेंटियर्स ने हॉस्पिटल में पहुंचकर रक्तदान किया। Bahrain News</p>
<p>स्थानीय अधिकारियों ने रक्तदानियों की प्रशंसा करते हुए डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का धन्यवाद किया। रक्तदान के दौरान मौजूद अधिकारियों ने कहा कि धन्य हैं उनके गुरु जिनकी शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के वॉलेंटियर्स विदेशों में भी भलाई कार्यों की अलख जगाए हुए हैं। प्रेमी सेवक हरजिंदर इन्सां ने बताया कि साध-संगतं समय-समय पर रक्तदान करती रही है। उनकी ओर से अब तक 43 यूनिट रक्तदान किया जा चुका है और हर बार रक्तदान  करने के बाद उन्हें खुशी का अनुभव होता है। Bahrain News</p>
</div>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 10:52:17 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को अरबों का नुकसान: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष के दौरान ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उपकरणों को ‘व्यापक’ नुकसान पहुँचाया है। एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए संयुक्त हमलों के बाद से उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/us-suffers-billions-in-losses-in-war-with-iran-report/article-83899"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/iran-war-cost-us.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तेहरान/वाशिंगटन।</strong> पश्चिम एशिया में इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष के दौरान ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उपकरणों को ‘व्यापक’ नुकसान पहुँचाया है। एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए संयुक्त हमलों के बाद से उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों और मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के हमलों से हुआ नुकसान सार्वजनिक रूप से स्वीकार किए गए आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर है। उन्नत और परिष्कृत रक्षा प्रणालियों के बावजूद, इन सैन्य ठिकानों की मरम्मत में अरबों डॉलर खर्च होने का अनुमान है। ईरान ने कथित तौर पर पश्चिम एशिया के कम से कम सात देशों में स्थित प्रमुख सैन्य स्थलों, गोदामों, कमांड सेंटरों, विमान हैंगरों, संचार उपकरणों और रडार प्रणालियों को निशाना बनाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक चौंकाने वाली घटना में, ईरान का एक पुराना एफ-5 लड़ाकू विमान अमेरिका की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने और हवाई हमला करने में सफल रहा। हालांकि इस हमले से हुआ नुकसान कम बताया जा रहा है, लेकिन अमेरिका की नवीनतम सैन्य तकनीक में सेंध लगाना ईरान के लिए एक बड़ी उपलब्धि और अमेरिका के लिए भारी शर्मिंदगी का सबब बन गया है। अमेरिकी युद्ध विभाग और सेंट्रल कमांड ने हालांकि अभी तक नुकसान के विवरण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिक पार्टी के कुछ सांसद युद्ध की दिशा और इस पर साधी गई चुप्पी से असंतुष्ट हैं। उन्होंने युद्ध विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नुकसान या मरम्मत की लागत की जानकारी साझा न करने पर नाराजगी जताई है। एक सांसद के अनुसार, युद्ध विभाग बजट की मांग कर रहा है, लेकिन हफ़्तों से पूछने के बावजूद नुकसान का कोई विशिष्ट विवरण नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि नुकसान का ब्यौरा सार्वजनिक होने से ईरान जैसे प्रतिद्वंद्वी के इतने करीब अमेरिकी ठिकाने बनाए रखने के नफे-नुकसान पर बहस तेज हो सकती है। युद्ध विभाग ने इस युद्ध के लिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर से अधिक की मांग की है। गौरतलब है कि अमेरिका युद्ध के पहले हफ्ते में ही 11 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है, जो इसे अमेरिका के लिए एक अत्यंत खचीर्ला युद्ध बना चुका है। अमेरिकी कांग्रेस पहले ही वर्ष 2026 के लिए 838.5 अरब डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे चुकी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 10:50:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Earthquake: जापान की प्रधानमंत्री ने किया अपने नागरिकों अलर्ट,  6.2 तीव्रता के भूकंप से सहमे जापानी</title>
                                    <description><![CDATA[टोक्यो। सोमवार प्रातःकाल उत्तरी जापान के क्षेत्र में मध्यम तीव्रता का भूकंप अनुभव किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर लगभग 6.2 आंकी गई। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार इस प्राकृतिक घटना से किसी प्रकार की जनहानि अथवा व्यापक संपत्ति-क्षति की पुष्टि नहीं हुई है, जो राहत की बात है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/japanese-prime-minister-alerts-citizens-japan-shaken-by-6-2-magnitude-earthquake/article-83897"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/earthquake1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">टोक्यो। सोमवार प्रातःकाल उत्तरी जापान के क्षेत्र में मध्यम तीव्रता का भूकंप अनुभव किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर लगभग 6.2 आंकी गई। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार इस प्राकृतिक घटना से किसी प्रकार की जनहानि अथवा व्यापक संपत्ति-क्षति की पुष्टि नहीं हुई है, जो राहत की बात है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने नागरिकों से सतर्क एवं सजग रहने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूकंप के उपरांत सरकार द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर दिया गया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन और आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जा सके। Earthquake</p>
<p style="text-align:justify;">जापान मौसम एजेंसी के अनुसार, इस भूकंप के पश्चात सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। वहीं अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि भूकंप का केंद्र होक्काइडो द्वीप के साराबेत्सु नगर से लगभग 18 किलोमीटर पश्चिम दिशा में, पृथ्वी की सतह से करीब 81 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक संदेश में बताया कि प्रातः लगभग 5:24 बजे आए इस भूकंप का प्रभाव विशेष रूप से टोकाची क्षेत्र के दक्षिणी भाग में अधिक महसूस किया गया।</p>
<h3>”आश्वस्त किया कि सुनामी का कोई खतरा नहीं”</h3>
<p style="text-align:justify;">कुछ स्थानों पर झटकों की तीव्रता जापानी भूकंपीय पैमाने पर मध्यम स्तर तक दर्ज की गई। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए “प्रधानमंत्री कार्यालय संकट प्रबंधन केंद्र” तथा “संचार कक्ष” को सक्रिय कर दिया है, ताकि सभी आवश्यक सूचनाएं शीघ्रता से आम जनता तक पहुंचाई जा सकें। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जिन क्षेत्रों में भूकंप के झटके अधिक तीव्र थे, वहां चट्टानों के खिसकने तथा भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। साथ ही, आगामी कुछ दिनों में इसी प्रकार के अन्य भूकंप आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि हाल ही में जापान के उत्तर-पूर्वी तटीय क्षेत्रों में इससे भी अधिक तीव्र भूकंपीय गतिविधि दर्ज की गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने संभावित बड़े भूकंप (मेगाक्वेक) के प्रति सतर्कता बढ़ा दी है। Earthquake</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 10:24:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका और ईरान के बीच क्यों हो रही है वार्ता फेल, ईरान ने दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद (एजेंसी)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को यहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात करने के बाद कहा कि बातचीत के दौरान संघर्ष को समाप्त करने पर ईरान के विचार और सुझाव साझा किये गये। माना जा रहा है कि इस बैठक में अमेरिका से संभावित समझौते से जुड़ा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/why-are-talks-between-the-us-and-iran-failing-iran-issues-warning/article-83873"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/islamabad-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को यहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात करने के बाद कहा कि बातचीत के दौरान संघर्ष को समाप्त करने पर ईरान के विचार और सुझाव साझा किये गये। माना जा रहा है कि इस बैठक में अमेरिका से संभावित समझौते से जुड़ा व्यापक प्रस्ताव शामिल था। उम्मीद है कि फील्ड मार्शल मुनीर इस संदेश को अमेरिका तक पहुंचायेंगे। पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता जारी रखने को लेकर अपनी तत्परता का संकेत दिया है। बैठक के बाद श्री अराघची ने बयान जारी कर पुष्टि की कि चर्चा ईरान-अमेरिका के बीच ‘युद्धविराम से संबंधित नवीनतम घटनाक्रमों’ पर केंद्रित थी। बयान के अनुसार, जनरल मुनीर ने मध्यस्थता के प्रयासों को जारी रखने की पाकिस्तान की इच्छा को दोहराया, जो ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम करने में पाकिस्तान की कूटनीतिक पुल के रूप में संभावित भूमिका का संकेत देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ह्वाइट हाउस ने पहले संकेत दिया था कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर चर्चा के लिए पाकिस्तान जायेगे, हालांकि अभी तक उनके रवाना होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा के लिए ईरानी विदेश मंत्री के साथ बैठक की। बैठक के दौरान विदेश मंत्री इशाक डार ने दोहराया कि पाकिस्तान इस क्षेत्र और उससे बाहर शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए ईरान-अमेरिका वार्ता की सुविधा प्रदान कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान इस संबंध में अपने प्रयास जारी रखेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">डार ने आगे इस बात पर जोर दिया कि ईरान-अमेरिका के बीच संपर्क को सुगम बनाने पर पाकिस्तान का आधिकारिक रुख केवल अधिकृत स्रोतों से जारी बयानों के माध्यम से ही झलकता है। उन्होंने कहा कि अनाम अधिकारियों के हवाले से की गयी टिप्पणियां देश की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। अलग से ईरान के ‘खातम अल-अम्बिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि क्षेत्र में जिसे वह ‘नाकाबंदी, डकैती और समुद्री डकैती’ कह रहा है, उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। कमांड ने कहा कि अमेरिका की निरंतर कार्रवाई ईरान के सशस्त्र बलों की प्रतिक्रिया को भड़का सकती है। बयान में हॉर्मुज जलडमरूमध्य सहित रणनीतिक जलमार्गों की निगरानी और नियंत्रण के लिए ईरान की तैयारी का भी जिक्र किया और चेतावनी दी कि यदि तनाव और बढ़ता है तो ‘भारी नुकसान’ होगा। श्री अराघची ने अपने इस्लामाबाद दौरे के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों के माध्यम से अमेरिकी रुख के संबंध में ईरान की चिंताओं और मांगों से अवगत कराया।</p>
<p style="text-align:justify;">ये घटनाक्रम नाजुक क्षेत्रीय परिस्थितियों और ईरान-अमेरिका के बीच रुकी हुई सीधी बातचीत के बीच संभावित मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका की ओर इशारा करते हैं। ईरान के रुख में कोई खास बदलाव नहीं आया है। उसका कहना है कि वह दबाव में बातचीत नहीं करेगा और चाहता है कि किसी भी गंभीर चर्चा से पहले अमेरिकी प्रतिबंध हटाये जायें। साथ ही व्यापक क्षेत्रीय स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जहां हालिया सैन्य गतिविधियों ने कूटनीतिक संतुलन बनाये रखना और भी मुश्किल कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान इस मामले में काफी मशक्कत कर रहा है और एक तरह से ‘शटल डिप्लोमेसी’ (दौड़-धूप वाली कूटनीति) चला रहा है, ताकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहे, भले ही वे एक-दूसरे से सीधे बात न कर रहे हों।<br />
यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक ऊर्जा गलियारे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ को लेकर तनाव चरम पर है। हालिया शत्रुता के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर पारगमन टोल लगा दिया है। इस कदम ने खाड़ी देशों और उन अन्य राष्ट्रों की चिंता बढ़ा दी है, जो निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं। एक बड़ा पेच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फंसा है। जब से संघर्ष शुरू हुआ है, ईरान ने प्रभावी रूप से इस जलमार्ग को बंद कर दिया है, जहाजों पर हमले किये हैं और यातायात में 95 फीसदी की कमी आयी है। वहीं अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की जवाबी नाकाबंदी कर दी है, जिससे बातचीत और जटिल हो गयी है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक अन्य मुख्य मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका-इजरायल हथियारों की चिंता का हवाला देते हुए शून्य संवर्धन चाहते हैं, जबकि ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है और ‘परमाणु अप्रसार संधि’ के तहत सुरक्षित है। ईरान ने पहले 2015 के परमाणु समझौते के तहत संवर्धन को सीमित कर दिया था, लेकिन 2018 में अमेरिका के हटने के बाद तनाव बढ़ गया। हालांकि ईरान के पास अब उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्रीय तनाव लेबनान तक फैला हुआ है, जहां इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई एक नाजुक युद्धविराम के लिए खतरा बनी हुई है। ईरान का आग्रह है कि किसी भी शांति समझौते में लेबनान को शामिल किया जाना चाहिए और वह मांग करता है कि इजरायल अपना हमला रोके, लेकिन झड़पें जारी हैं, जिससे समझौता जोखिम में पड़ गया है। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं लगाना कभी अमेरिका की प्रमुख मांग हुआ करती थी, लेकिन हालिया बातचीत में यह मुद्दा पीछे छूट गया है, जो अमेरिका के बातचीत के रुख में संभावित बदलाव का संकेत देता है। इस बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि उनका मानना है कि मुख्य पेचीदा मुद्दे, विशेष रूप से परमाणु मुद्दों से संबंधित, अमेरिका-ईरान वार्ता के अगले दौर में सुलझाये जा सकते हैं। लंदन में बोलते हुए श्री फिदान ने उल्लेख किया कि तुर्की संबंधित पक्षों के साथ लगभग रोजाना संपर्क में है और उन्होंने युद्धविराम के लिए तुर्की के समर्थन की पुष्टि की, जिसे शुरू में दो सप्ताह के लिए तय किया गया था और अब बढ़ा दिया गया है।<br />
श्री फिदान ने कहा, “मुझे लगता है कि जो कुछ मुद्दे अटके हुए हैं, खासकर परमाणु मामलों में, उन्हें दूर किया जा सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि तुर्की सभी पक्षों को सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में प्रगति से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 11:20:30 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण लंबे समय तक चलने वाली मंदी की चपेट में आ सकता है वैश्विक व्यापार</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। पश्चिम एशिया का संघर्ष दुनिया भर के व्यवसायों को एक लंबे आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकता है। यह बात नेविगेटर प्रिंसिपल इन्वेस्टर्स कंपनी के निदेशक काइल शोस्टैक ने रूसी न्यूज एजेंसी आरआईए नोवोस्ती से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, “व्यवसायों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे खुद को अलग-अलग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/global-trade-could-be-gripped-by-a-prolonged-downturn-due-to-the-ongoing-conflict-in-west-asia/article-83872"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/washington-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> पश्चिम एशिया का संघर्ष दुनिया भर के व्यवसायों को एक लंबे आर्थिक मंदी की ओर धकेल सकता है। यह बात नेविगेटर प्रिंसिपल इन्वेस्टर्स कंपनी के निदेशक काइल शोस्टैक ने रूसी न्यूज एजेंसी आरआईए नोवोस्ती से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, “व्यवसायों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे खुद को अलग-अलग उद्योगों में एक लंबी आर्थिक मंदी की ओर फिसलते हुए देख रहे हैं। यह संघर्ष जितना लंबा चलेगा, व्यवसायों के लिए यह उतना ही अधिक कष्टदायक होगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि एशिया और अफ्रीका के उभरते बाजारों की कंपनियों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कंपनियों के पास जोखिम कम करने के लिए बहुत कम गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि वे अपनी ऊर्जा आपूर्ति, ग्राहक आधार और पूंजी के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “हालांकि, यह कहना आसान है, लेकिन करना मुश्किल।” गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में तेहरान सहित कई ठिकानों पर हमले किये, जिससे नुकसान हुआ और आम नागरिकों की जान गयी। ईरान ने इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका और ईरान सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की। इस तनाव बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही लगभग ठप हो गयी है। यह फारसी खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों तक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, और इसके कारण ईंधन की कीमतें बढ़ गयी हैं।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 11:09:53 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका के व्हाइट हाउस में अंधाधुंध गोलीबारी, बाल-बाल बचे ट्रम्प</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के वाशिंगट में व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानिया और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कई बडे़ अधिकारी मौजूद थे। गोलीबारी के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप और अन्य शीर्ष नेताओं को तत्काल बाहर निकाल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/indiscriminate-shooting-at-the-us-white-house-trump-narrowly-escapes/article-83868"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/washington-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के वाशिंगट में व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानिया और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कई बडे़ अधिकारी मौजूद थे। गोलीबारी के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप और अन्य शीर्ष नेताओं को तत्काल बाहर निकाल लिया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">शनिवार रात घटित हुई घटना के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ की। उन्होंने लिखा उन्होंने (सुरक्षा कर्मियों) तेजी से और बहादुरी से काम किया। ट्रंप ने फिर से कार्यक्रम में शामिल होने का इरादा जाहिर किया लेकिन कहा कि वह सुरक्षा अधिकारियों के निदेर्शों का पालन करेंगे। ट्रम्प ने लिखा, “हमलावर को पकड़ लिया गया है और मैंने सुझाव दिया है कि हम शो जारी रहने दें, लेकिन मैं पूरी तरह से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निदेर्शों का पालन करूंगा। वे जल्द ही कोई फैसला लेंगे। उनका फैसला चाहे जो भी हो, यह शाम वैसी नहीं होगी जैसी योजना बनाई गई थी। हमें बस इसे सीधे, फिर से करना होगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया में जारी वीडियो में दिखाई दे रहा है कि सीक्रेट सर्विस एजेंट ने राष्ट्रपति ट्रंप को घेर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति और वहां मौजूद लोग अपनी मेज के पीछे छिपते हुए दिखे, जबकि लोग चिल्ला रहे थे- नीचे झुक जाओ और नीचे ही रहो। इसके बाद सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स श्री ट्रंप को तेजी से मंच से दूर ले गये, जिसके बाद भारी हथियारों से लैस एजेंट्स ने स्टेज को घेर लिया। उल्लेखनीय है कि व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर एक ‘ब्लैक-टाई’ कार्यक्रम है, जिसकी मेजबानी उन पत्रकारों का संघ करता है जो अमेरिकी राष्ट्रपति को कवर करते हैं; यह कार्यक्रम हर साल वाशिंगटन हिल्टन के विशाल बॉलरूम में आयोजित किया जाता है।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 10:45:31 +0530</pubDate>
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                <title>Northern Japan Wildfires: जापान के जंगलों में तेजी से फैल रही आग, काबू पाना हो रहा काफी मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[करीब 1,200 हेक्टेयर जलकर राख Northern Japan Wildfires: टोक्यो। जापान के जंगलों में लगी भीषण आग पर काबू पाना काफी मुश्किल हो रहा है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार जापान के उत्तर-पूर्वी इलाके इवाते में लगी जंगल की आग पर अभी भी काबू नहीं पाया जा सका है। स्थायीन समय के हिसाब से शुक्रवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/wildfires-spreading-rapidly-in-japans-forests-bringing-them-under-control-proving-extremely-difficult/article-83808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/japan-forests-fire.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">करीब 1,200 हेक्टेयर जलकर राख</h3>
<p style="text-align:justify;">Northern Japan Wildfires: टोक्यो। जापान के जंगलों में लगी भीषण आग पर काबू पाना काफी मुश्किल हो रहा है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार जापान के उत्तर-पूर्वी इलाके इवाते में लगी जंगल की आग पर अभी भी काबू नहीं पाया जा सका है। स्थायीन समय के हिसाब से शुक्रवार सुबह तक लगभग 1,200 हेक्टेयर इलाका जल गया है। जापान के क्योडो न्यूज के मुताबिक, ओत्सुची टाउन के पहाड़ी इलाके में बुधवार को लगी आग ने रिहायशी घरों समेत आठ बिल्डिंग्स को तबाह कर दिया है। ओत्सुची ने करीब 2,600 लोगों को खाली करने के ऑर्डर दिए हैं, जो शहर की आबादी का करीब एक चौथाई हिस्सा हैं। Japan Forests Fire</p>
<p style="text-align:justify;">आग पर काबू पाने के लिए इवाते प्रीफेक्चरल सरकार और सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के हेलीकॉप्टर को जंगल में पानी गिराने के काम के लिए लगाया गया था। पूरे इलाके में अग्निशमन विभाग के लोगों को तैनात किया गया था। होक्काइडो, यामागाटा, फुकुशिमा, तोचिगी और निगाटा इलाकों से भी आग बुझाने में मदद मांगी गई है। इसके अलावा, सोमवार को उत्तर-पूर्वी जापान में आए 7.7 मैग्नीट्यूड के भूकंप के बाद, जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इवाते समेत सात इलाकों की 182 नगर पालिकाओं के लिए एक हफ्ते का खास भूकंप अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आग पर काबू पाने के दौरान भूकंप के खतरों के लिए सावधान रहने की जरूरत है।</p>
<h3>जापान में वसंत की शुरुआत में मौसम काफी शुष्क रहता है</h3>
<p style="text-align:justify;">जापान में खास तौर पर सर्दियों के आखिर और वसंत की शुरुआत में मौसम काफी शुष्क रहता है। इस दौरान, पेड़-पौधे सूख जाते हैं, जिसकी वजह से जंगलों में बहुत ज्यादा आग पकड़ने की संभावना हो जाती है। शुष्क मौसम में नमी की मौजूदगी नाम मात्र भी नहीं होती है। इसकी वजह से जंगलों में आग के तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है। Japan Forests Fire</p>
<p style="text-align:justify;">जंगलों में आग लगने और तेजी से बढ़ने की एक और खास वजह जापान की जगह और पेड़-पौधे हैं। यहां का बड़ा हिस्सा जंगलों से ढका है, जिनमें से कई में देवदार और चीड़ जैसे शंकुधारी पेड़ हैं। इन पेड़ों में रेजिन होता है जो आसानी से जल जाता है, जिससे उनमें आग लगने और उसे झेलने का खतरा ज्यादा होता है। घने जंगल होने का मतलब यह भी है कि एक बार आग लगने के बाद, यह तेजी से लगातार पेड़-पौधों में फैल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, मानवीय चूक भी आग लगने की एक वजह हो सकती है। बिना देखरेख के कैंपफायर, खेती की चीजों में आग लगना, फेंकी हुई सिगरेट या इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण की चिंगारी भी आग लगने की वजह हो सकती है। जापान की ज्यादातर आबादी जंगल वाले इलाकों के पास रहती है, इसलिए इंसानों की बस्तियों और प्रकृति के बीच के कनेक्शन से आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। Japan Forests Fire</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/wildfires-spreading-rapidly-in-japans-forests-bringing-them-under-control-proving-extremely-difficult/article-83808</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:42:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूज्य गुरुजी के आशीर्वाद से ऑस्ट्रेलियाई सेवादार बजा रहे मानवता भलाई कार्यों का डंका</title>
                                    <description><![CDATA[Blood Donation Camp: मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत देश ही नहीं विदेशों में भी मानवता भलाई के कार्य बड़ी उत्सुकता के साथ कर रही है। इसी कड़ी में साध-संगत द्वारा ऑस्ट्रेलिया में एक ब्लड कैंप का आयोजन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/with-the-blessings-of-the-revered-guruji-australian-volunteers-have-sounded-the-trumpet-of-humanitarian-service/article-83730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/australia-blood-donation-camp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><img class="wp-image-367897 alignright" src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/west-melbourne-blood-donation-ledy.jpg" alt="" width="402" height="217"></img>Blood Donation Camp: मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत देश ही नहीं विदेशों में भी मानवता भलाई के कार्य बड़ी उत्सुकता के साथ कर रही है। इसी कड़ी में साध-संगत द्वारा ऑस्ट्रेलिया में एक ब्लड कैंप का आयोजन किया गया जिसमें 35 यूनिट ब्लड व प्लाज्मा डोनेट किया।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार मेलबर्न में यह कैंप मेलबर्न के नार्थ के एयरपोर्ट वेस्ट, साउथ मेलबर्न के फ्रेंकस्टीन और वेस्ट मेलबर्न के वेर्बी लाइफ ब्लड सेंटर में आयोजित किया गया। जिम्मेवार अश्व इन्सां ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य गुरुजी के आशीर्वाद से ऑस्ट्रेलिया में साध-संगत सेवा कार्यों में बढ़-चढ़ कर सहयोग दे रही है। Australia News</p>
<p><img class="aligncenter wp-image-367895 size-full" src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/west-melbourne-blood-donation.jpg" alt="" width="1000" height="563"></img></p>
<p><img class="aligncenter wp-image-367896 size-full" src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/west-melbourne-blood-donation1.jpg" alt="" width="1001" height="579"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 10:41:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>US-Iran Ceasefire Update: नहीं निकला फिलहाल पश्चिम एशिया संकट का हल, आईडीएफ चीफ ने किया ये बड़ा ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली सेना हाई अलर्ट पर, हम लड़ने को तैयार US-Iran Ceasefire Update: तेल अवीव/तेहरान। पश्चिम एशिया संकट का हल फिलहाल नहीं निकला है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने 2 हफ्ते के अस्थायी संघर्ष विराम की मियाद को बढ़ा दिया है। ट्रंप ने बुधवार को इसका ऐलान किया कि ईरान की ओर से प्रस्ताव पेश किए जाने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/no-resolution-yet-to-west-asia-crisis-idf-chief-makes-major-announcement/article-83703"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/idf-chief.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">इजरायली सेना हाई अलर्ट पर, हम लड़ने को तैयार</h3>
<p style="text-align:justify;">US-Iran Ceasefire Update: तेल अवीव/तेहरान। पश्चिम एशिया संकट का हल फिलहाल नहीं निकला है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने 2 हफ्ते के अस्थायी संघर्ष विराम की मियाद को बढ़ा दिया है। ट्रंप ने बुधवार को इसका ऐलान किया कि ईरान की ओर से प्रस्ताव पेश किए जाने तक वो सीजफायर को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इसका क्रेडिट पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को दिया। इस सबके बीच आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने अपनी सेना को किसी भी परिस्थिति में तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि ईरान और लेबनान में नाज़ुक युद्धविराम के बीच, सेना हाई अलर्ट पर है और सभी मोर्चों पर लड़ाई के लिए तैयार है। US-Iran Ceasefire</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को राष्ट्रपति के घर पर इजरायली स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित किए गए 120 बेहतरीन सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “7 अक्टूबर की आग के बाद से, हम लगातार लड़ाई के जरिए अपनी सैन्य ताकत को फिर से बढ़ाने का काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि गाजा में, आईडीएफ “हमास के खिलाफ लड़ाई में जीती — और इस कमांड को बनाए रखा: ‘हमने किसी को नहीं बख्शा।'” सैनिकों का हौसला बढ़ाते हुए जमीर ने आगे कहा, “इस समय, हम उत्तरी समुदायों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लेबनान में जोरदार लड़ाई लड़ रहे हैं।” उन्होंने ईरान के साथ जून 2025 और हाल ही में हुए 40-दिन के संघर्ष के बारे में कहा, “ईरान के खिलाफ लड़ाई में भी ऐसा ही है। इस समय, आईडीएफ पूरी तरह अलर्ट और तैयार है, और सभी सेक्टरों में तुरंत और पूरी ताकत से लड़ने के लिए तत्पर है।”</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की स्थापना की वर्षगांठ पर ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ, मेजर जनरल अमीर हातामी ने भी संदेश जारी किया। अपनी सेना के शौर्य पराक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा, “आठ साल के ‘पवित्र’ युद्ध और इजरायली-अमेरिकी शासन की ओर से थोपी गई जंग में आईआरजीसी ने सशक्त भूमिका निभाई। इस दौरान संस्था की सेनाओं की क्षमता, बुद्धिमत्ता और जिहादी भावना को प्रदर्शित किया गया। इस भूमिका ने एक बार फिर दुनिया के सामने इस्लामिक गणराज्य ईरान की डिफेंस पावर को सिद्ध कर दिया है।” उन्होंने दावा किया कि आईआरजीसी सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर, अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई की कमान में इस्लामी सरजमीं की “क्षेत्रीय अखंडता को हर हाल में सुरक्षित रहने की गारंटी देती है।” US-Iran Ceasefire</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 14:57:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Germany Gurdwara Violence: गुरुद्वारे में चुनावों को लेकर हिंसक झड़प, मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[बर्लिन। जर्मन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जर्मनी के मोएर्स शहर के डुइसबर्ग इलाके में एक गुरुद्वारे के अंदर हिंसक झड़प होने से कम से कम 11 लोग घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की और विशेष सामरिक इकाइयों को तैनात किया। खबरों के मुताबिक, इस घटना में करीब 40 लोग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/violent-clashes-over-elections-at-gurdwara-spark-uproar/article-83670"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/gurudwara-clash.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बर्लिन। जर्मन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जर्मनी के मोएर्स शहर के डुइसबर्ग इलाके में एक गुरुद्वारे के अंदर हिंसक झड़प होने से कम से कम 11 लोग घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की और विशेष सामरिक इकाइयों को तैनात किया। खबरों के मुताबिक, इस घटना में करीब 40 लोग शामिल थे और यह धार्मिक परिसर के अंदर तेजी से एक हिंसक झड़प में बदल गई। Germany Gurdwara Violence</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे गुरुद्वारे के अंदर के हैं, उनमें दो गुटों के सदस्यों को हिंसक झड़प करते हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टों से पता चलता है कि झड़प के दौरान चाकू और कृपाण जैसे धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। कुछ खबरों में यह भी कहा गया है कि परिसर के अंदर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया गया और एक हथियार से गोली भी चलाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मन अखबार ‘बिल्ड’ ने बताया कि झड़प के सही कारण की जांच चल रही है, लेकिन शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि यह हिंसा गुरुद्वारा प्रबंधन बोर्ड के नए चुनाव को लेकर हुए विवादों से जुड़ी हो सकती है। माना जा रहा है कि इन अंदरूनी मतभेदों में गुरुद्वारे के फंड पर नियंत्रण का मामला भी शामिल है, जिसमें विरोधी गुट कथित तौर पर अधिकार और वित्तीय प्रबंधन को लेकर आपस में लड़ रहे हैं। Germany Gurdwara Violence</p>
<h3>हमलावरों के पास अचानक पेपर स्प्रे आ गया और उन्होंने अपने विरोधियों पर स्प्रे कर दिया</h3>
<p style="text-align:justify;">56 साल के एक चश्मदीद ने ‘बिल्ड’ को बताया कि यह जरूर पहले से प्लान किया गया होगा। सेवा शुरू होने से कुछ ही देर पहले, हमलावरों के पास अचानक पेपर स्प्रे आ गया और उन्होंने अपने विरोधियों पर स्प्रे कर दिया। फिर उनमें से एक ने पिस्तौल से गोली चलाई और मैंने चाकू भी देखे। चश्मदीद ने आगे बताया कि कुछ समय से तनाव बढ़ रहा था, जिसका मुख्य कारण प्रबंधन समिति के भीतर नेतृत्व और नियंत्रण से जुड़े मुद्दे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि हमले के दौरान गुरुद्वारे के अंदर अफरा-तफरी मच गई, जिससे कई लोगों को परिसर छोड़कर भागना पड़ा। चश्मदीद ने कहा कि नतीजे इससे भी ज्यादा बुरे हो सकते थे। शुक्र है कि किसी की जान खतरे में नहीं है। आपातकालीन सेवाओं ने मौके पर ही घायलों का इलाज किया, जबकि पुलिस ने पुष्टि की कि कम से कम एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है। अपराध विभाग के जांचकर्ता फिलहाल घटनाक्रम का पता लगाने और हिंसा में शामिल सभी लोगों की पहचान करने पर काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने यह भी बताया कि घटना में इस्तेमाल किया गया हथियार अभी तक बरामद नहीं हुआ है। हालांकि, शुरुआती फोरेंसिक नतीजों से पता चलता है कि यह एक ‘ब्लैंक-फायरिंग’ हथियार हो सकता है, क्योंकि मौके पर कारतूस के खाली खोल मिले हैं। जांच अभी भी जारी है। Germany Gurdwara Violence</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:45:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[ढाका (एजेंसी)। पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर बंगलादेश सरकार ने ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। बंगलादेशी समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार रात से इन नयी दरों को लागू होने के बाद पेट्रोल की कीमत 116 टका से बढ़कर 135 टका (करीब 1.10 डॉलर) प्रति लीटर हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/steep-hike-in-fuel-prices-in-bangladesh/article-83596"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/dhaka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका (एजेंसी)।</strong> पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर बंगलादेश सरकार ने ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। बंगलादेशी समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार रात से इन नयी दरों को लागू होने के बाद पेट्रोल की कीमत 116 टका से बढ़कर 135 टका (करीब 1.10 डॉलर) प्रति लीटर हो गयी है। इसी तरह डीजल 100 टका से बढ़कर 115 टका और केरोसिन 112 टका से बढ़कर 130 टका प्रति लीटर हो गया है। इस प्रकार कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक का इजाफा किया गया है, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2024 में वैश्विक बाजार के हिसाब से कीमतें तय करने की स्वचालित व्यवस्था शुरू होने के बाद से यह पहली बार है, जब कीमतों में इतनी भारी बढोतरी हुई है। ऊर्जा विभाग के प्रवक्ता मोनिर हुसैन चौधरी ने बताया कि सरकार ने आखिरी वक्त तक स्थानीय बाजार में कीमतें स्थिर रखने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण ऐसा करना नामुमकिन हो गया। चौधरी ने ‘द डेली स्टार’ से बातचीत में कहा, “दुनिया भर में कीमतें सुबह से शाम तक बदल रही हैं। हम स्थिरता चाहते थे, लेकिन मौजूदा अर्थव्यवस्था पर इसका बोझ और अधिक नहीं डाला जा सकता।” प्रवक्ता ने यह भी बताया कि ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ में अनिश्चितता की वजह से ईंधन के आयात में काफी बाधा आई है, जिसका असर देश की आपूर्ति पर पड़ रहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:37:04 +0530</pubDate>
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