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                <title>विदेश - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>विदेश RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Nepal Indian Currency Rules 2026: नेपाल जाने वाले भारतीयों के लिए बड़ी राहत, ₹200 और ₹500 के नए नोटों पर हटा बैन; जानें पूरी डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल घूमने या कारोबार के सिलसिले में जाने वाले भारतीयों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नेपाल सरकार ने करीब एक दशक पुराने प्रतिबंध को हटाते हुए ₹200 और ₹500 मूल्यवर्ग के नए भारतीय नोटों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/big-relief-for-indians-going-to-nepal-ban-on-new/article-88705"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/nepal-indian-currency-rules-2026.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Nepal Indian Currency Rules 2026: नेपाल घूमने या कारोबार के सिलसिले में जाने वाले भारतीयों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नेपाल सरकार ने करीब एक दशक पुराने प्रतिबंध को हटाते हुए ₹200 और ₹500 मूल्यवर्ग के नए भारतीय नोटों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने 23 जुलाई 2026 को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फैसले के बाद अब भारतीय और नेपाली नागरिक ₹200 और ₹500 के नए भारतीय नोट नेपाल ले जा सकेंगे। हालांकि, इसके लिए नेपाल राष्ट्र बैंक ने कुछ नियम और सीमाएं भी तय की हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सिर्फ नए नोटों को मिली मंजूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">नेपाल के नए नियमों के मुताबिक, यह छूट 9 नवंबर 2016 के बाद जारी किए गए नए ₹200 और ₹500 के भारतीय नोटों पर लागू होगी। यानी नोटबंदी से पहले जारी किए गए पुराने ₹500 और ₹1,000 के नोट नेपाल में अब भी प्रतिबंधित रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका मतलब है कि नेपाल जाने वाले यात्रियों को पुराने भारतीय नोट साथ ले जाने से बचना होगा। केवल निर्धारित नियमों के तहत मान्य नए नोट ही नेपाल में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एक व्यक्ति अधिकतम ₹25,000 ले जा सकेगा</h4>
<p style="text-align:justify;">नेपाल राष्ट्र बैंक ने भारतीय मुद्रा ले जाने की सीमा भी तय की है। नए नियम के तहत एक व्यक्ति अधिकतम ₹25,000 तक की भारतीय करेंसी नेपाल ले जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह नेपाल से भारत लौटते समय भी यात्री अधिकतम ₹25,000 तक भारतीय मुद्रा अपने साथ ला सकते हैं। इससे नेपाल की यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों के लिए नकद लेन-देन पहले के मुकाबले आसान होने की उम्मीद है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तीसरे देश में ले जाना रहेगा गैरकानूनी</h4>
<p style="text-align:justify;">नए नियमों के बावजूद भारतीय मुद्रा को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रतिबंध बरकरार रहेगा। नेपाल से किसी तीसरे देश में भारतीय करेंसी ले जाना गैरकानूनी रहेगा। यानी यह सुविधा केवल भारत-नेपाल के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए निर्धारित सीमा तक ही लागू होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को होगा फायदा</h4>
<p style="text-align:justify;">नेपाल भारतीय पर्यटकों के लिए लोकप्रिय विदेशी पर्यटन स्थलों में शामिल है। बड़ी संख्या में भारतीय लोग धार्मिक यात्रा, पर्यटन और कारोबार के लिए नेपाल जाते हैं। ऐसे में ₹200 और ₹500 के नए नोटों को मंजूरी मिलने से यात्रियों को नकद लेन-देन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब एक दशक बाद भारतीय मुद्रा के इन नोटों को लेकर नियमों में बदलाव भारत-नेपाल के बीच पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों के लिए अहम कदम माना जा रहा है।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/nepal-indian-currency-rules-2026.jpeg" alt="Nepal Indian Currency Rules 2026" width="720" height="407"></img>
Nepal Indian Currency Rules 2026: नेपाल जाने वाले भारतीयों के लिए बड़ी राहत, ₹200 और ₹500 के नए नोटों पर हटा बैन; जानें पूरी डिटेल
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 15:18:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्लैक सी में बढ़ते खतरे के बीच सरकार ने भारतीय नाविकों को सतर्क रहने की दी सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[रूस-यूक्रेन संघर्ष के चलते ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरों को देखते हुए भारत सरकार ने भारतीय नाविकों और समुद्री पेशेवरों के लिए एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने रोजगार स्वीकार करने से पहले सभी जोखिमों का आकलन करने और आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से संपर्क रखने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/amid-increasing-danger-in-the-black-sea-the-government-advised/article-88699"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/black-sea-russia.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ ) : </strong> रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ब्लैक सी (काला सागर) क्षेत्र में लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने वहां कार्यरत या नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय नाविकों और समुद्री पेशेवरों के लिए विस्तृत सुरक्षा परामर्श जारी किया है। सरकार ने नागरिकों से इस क्षेत्र में रोजगार स्वीकार करने से पहले सभी संभावित जोखिमों का गंभीरता से आकलन करने की अपील की है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि ब्लैक सी और उससे जुड़े समुद्री मार्गों पर संचालित वाणिज्यिक जहाजों के लिए हाल के महीनों में खतरा काफी बढ़ गया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं में वृद्धि के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है और कई जहाज जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में परिचालन कर रहे हैं।</p>
<p>हालिया घटनाओं के बाद बढ़ी चिंता सरकार के अनुसार, अप्रैल 2026 से इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमलों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इन घटनाओं में पांच भारतीय नागरिकों की मृत्यु भी हो चुकी है। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय नागरिकों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करने का आग्रह किया गया है।</p>
<p>नौकरी स्वीकार करने से पहले करें पूरी जांच विदेश मंत्रालय ने सलाह दी है कि ब्लैक सी क्षेत्र में कार्य करने से पहले भारतीय नागरिक संबंधित नियोक्ता, भर्ती एजेंसी और जहाज संचालक से जहाज के प्रस्तावित मार्ग, गंतव्य बंदरगाह, सुरक्षा प्रबंध, बीमा सुविधा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।</p>
<p>इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि रोजगार अनुबंध अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुरूप हो तथा उसमें चिकित्सा सहायता, आपातकालीन निकासी, स्वदेश वापसी और दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से शामिल हों।</p>
<p>परिवार से संपर्क बनाए रखने की सलाह सरकार ने भारतीय नागरिकों को अपने परिवार के साथ यात्रा और कार्यस्थल की जानकारी साझा करने तथा नियमित संपर्क बनाए रखने की भी सलाह दी है। साथ ही, समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों द्वारा समय-समय पर जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया गया है।</p>
<p>आपात स्थिति में दूतावास से करें संपर्क विदेश मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नागरिक संबंधित भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से तत्काल संपर्क करें, ताकि आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। सरकार ने दोहराया कि वर्तमान परिस्थितियों में ब्लैक सी क्षेत्र में कार्यरत प्रत्येक भारतीय नागरिक को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए और सभी आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 14:23:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tehdil Arora]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने के बाद अनाहत का आया बड़ा बयान </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय खिलाड़ी अनाहत सिंह ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। जानिए उनकी जीत की पूरी कहानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/anahats-big-statement-after-becoming-world-junior-squash-champion/article-88698"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/anahat-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">World Junior Squash Championship: ओंटारियो। भारतीय स्क्वैश की उभरती सितारा अनाहत सिंह ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर देश के खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ वह विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। खिताब जीतने के बाद उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनाहत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन के लिए संघर्ष कर रही थीं। कई बार अंतिम चार तक पहुंचने के बावजूद खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया था। ऐसे में जूनियर वर्ग के अपने अंतिम वर्ष में विश्व चैंपियन बनना उनके लिए बेहद भावुक और यादगार पल है। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने स्वयं पर अनावश्यक दबाव नहीं बनने दिया। उनका लक्ष्य केवल अपने खेल का आनंद लेना और प्रत्येक अंक पर पूरा ध्यान केंद्रित करना था। इसी सकारात्मक सोच ने उन्हें फाइनल तक पहुंचने और खिताब जीतने में मदद की।</p>
<p style="text-align:justify;">फाइनल में मिस्र की खिलाड़ी को हराकर जीता खिताब फाइनल मुकाबले में अनाहत सिंह ने मिस्र की मजबूत खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेमों में 11-3, 11-7 और 11-9 से पराजित किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने बेहतरीन लय बनाए रखी और किसी भी मुकाबले में दबाव को अपने प्रदर्शन पर हावी नहीं होने दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले वह विश्व जूनियर प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन इस बार उन्होंने अपने अनुभव का पूरा लाभ उठाते हुए स्वर्णिम सफलता हासिल की। वह वर्ष 2005 के बाद विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय भी बनीं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसआरएफआई) के महासचिव साइरस पोंचा ने अनाहत की जीत को भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत और सुनियोजित प्रशिक्षण का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि अनाहत आने वाले वर्षों में वरिष्ठ स्तर पर भी भारत का नाम विश्व मंच पर रोशन करेंगी। साइरस पोंचा ने यह भी कहा कि भारतीय स्क्वैश को व्यक्तिगत स्पर्धा में विश्व चैंपियन दिलाने का सपना अब साकार हो गया है, जो देश के खेल जगत के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 14:22:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी के बाद तनाव, नागरिक की मौत पर जांच की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[बलूचिस्तान के खुजदार जिले में गोलीबारी की घटना के बाद एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है। स्थानीय संगठनों ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग उठाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/tension-after-pakistani-army-firing-in-balochistan-demand-for-investigation/article-88634"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/balochistan-attack-pak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Pakistani Army firing: क्वेटा (एजेंसी)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खुजदार जिले में गोलीबारी की एक घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि महिलाओं और बच्चों सहित कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध-प्रदर्शन करते हुए मुख्य मार्ग पर धरना दिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना खुजदार जिले के वाध क्षेत्र के ड्राखाला-गैसलाती इलाके में हुई। प्रदर्शनकारियों ने मृतक की पहचान अब्दुल कादिर के रूप में बताते हुए आरोप लगाया कि गोलीबारी आबादी वाले क्षेत्र में हुई। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध कार्रवाई और पारदर्शी जांच की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार समूहों के अनुसार, बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) के अध्यक्ष नसीम बलूच ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, स्वतंत्र मीडिया और मानवाधिकार संगठनों को क्षेत्र की स्थिति का आकलन करने की अनुमति दिए जाने की मांग भी उठाई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कर्फ्यू और प्रतिबंधों पर भी उठे सवाल</h3>
<p style="text-align:justify;">मानवाधिकार संगठन बलोच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने बलूचिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में लागू कर्फ्यू, इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और आवाजाही में लगाए गए नियंत्रणों पर भी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि इन प्रतिबंधों का असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। संगठन के अनुसार, लंबे समय तक प्रतिबंध लागू रहने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और स्थानीय व्यापार प्रभावित हो रहे हैं। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानवाधिकार संगठनों ने घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी राज्य की मूल जिम्मेदारी है। उन्होंने अपील की कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही या कानून का उल्लंघन हुआ है, तो जांच के बाद जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 16:34:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'ईरान नहीं बचेगा', ट्रम्प बोले- फ्रीज किए गए अरबों डॉलर से वसूला जाएगा हर्जाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान को चुकानी होगी भारी कीमत, फ्रीज की गई संपत्ति से जहाज के नुकसान की भरपाई करेगा अमेरिका: ट्रम्प]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/iran-will-not-be-saved-trump-said-damages-will/article-88616"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/washington1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान वाणिज्यिक जहाजों या कार्गो को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई अमेरिका के कब्जे में मौजूद ईरान की जब्त की गयी संपत्ति से की जाएगी। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका तुरंत युद्धविराम करने के बजाय ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर लिखा, "जहाजों या कार्गो को हुए किसी भी नुकसान का भुगतान ईरान के उस पैसे से किया जाएगा जो अमेरिका के कब्जे और नियंत्रण में है।" उन्होंने कहा, "ये नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है, लेकिन फिर भी, यही सही और उचित कदम है।" ट्रंप का यह बयान ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने के एक दिन बाद आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल हो गयी हैं। लाल सागर में जहाजों पर हुए हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों से पहले से ही पैदा हुई दिक्कतों को और बढ़ा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की अरबों डॉलर की जब्त की गयी संपत्ति का मामला लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच सबसे विवादित मुद्दों में से एक रहा है। जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते (एमओयू ) में इन संपत्तियों को जारी करना एक मुख्य बात थी, लेकिन तनाव बढ़ने और दोनों तरफ से सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होने के कारण वह समझौता असल में खत्म हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ तुरंत युद्धविराम की संभावना को भी खारिज कर दिया और कहा कि लगातार सैन्य दबाव बनाए रखना जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी में पत्रकारों से बात करते हुए श्री ट्रंप ने कहा, "हम ईरान के खिलाफ बहुत अच्छा कर रहे हैं, हम बहुत ही अच्छा कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "वे कुछ करना चाहते हैं, लेकिन मेरा कहना है कि वे अभी तैयार नहीं हैं। उन्हें अभी और दबाव की जरूरत है।" श्री ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर कुछ बुरे इरादे रखने का आरोप लगाया और अपनी पुरानी बात दोहराई कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिया जाएगा। ये बातें तब कही गईं जब अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हमले किए। अमेरिका के केंद्रीय कमान (सेंटकॉम ) ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि ताजा अभियान शाम 6:45 बजे शुरू हुआ और इसका मकसद ईरान को जवाबदेह ठहराना और वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से होने वाले खतरों को कम करना था।</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में, सेंटकॉम ने घोषणा की कि हमले रात नौ बजे खत्म हो गये। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य कमान केंद्रों , ड्रोन स्टोरेज केंद्रों , संचार नेटवर्क, तटीय निगरानी केंद्रों और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले आम नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए ईरान से होने वाले खतरे को और कम किया जा सके।" सेना ने निशाना बनाए गए ठिकानों की संख्या या नुकसान का कोई ब्योरा नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के ये ताजा अभियान एक हफ़्ते से ज्यादा समय से चल रहे लगातार हवाई हमलों के बाद हुए हैं। ये हमले तब शुरू हुए जब ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में ईरानी शिपिंग पर नौसैनिक नाकाबंदी भी फिर से लागू कर दी है, जिससे संघर्ष और बढ़ गया है। इलाके में बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। लाल सागर में हूती हमलों से तेल निर्यात के एक और अहम समुद्री रास्ते पर खतरा पैदा हो गया है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से पहले से ही हो रही रुकावटें और बढ़ गई हैं। इन हालात के चलते मई के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस टकराव की वजह से अमेरिका में भी राजनीतिक मतभेद पैदा हो गए हैं। अमेरिकी हाउस आॅफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। हालांकि सीनेट में ऐसा ही एक प्रस्ताव पास नहीं हो सका। भले ही ये वोट प्रशासन के लिए बाध्यकारी नहीं थे, लेकिन इनसे कुछ सांसदों के बीच ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति के युद्ध-संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंता जाहिर हुई। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के खतरे को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बावजूद, ट्रंप ने संकेत दिया कि तेहरान पर सैन्य दबाव कम नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए "तैयार नहीं" है और लगातार हमले करना ही अमेरिका का पसंदीदा रास्ता बना रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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                <title>पीओके में 30 से अधिक लोगों की मौत, बढ़ा तनाव, जेएसीसी के लिए 23 जुलाई का निर्णायक दिन</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी अशांति के बीच संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 23 जुलाई को निर्णायक दिन बताते हुए बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकार उल्लंघन और बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/more-than-30-people-died-in-pok-tension-increased-july/article-88490"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/kashmir-news-hng.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद, (एजेंसी) ।</strong> पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने मंगलवार को कहा कि स्वैच्छिक बंद और चक्का जाम हड़ताल जारी है। संगठन ने 23 जुलाई को बेहद महत्वपूर्ण दिन बताते हुए लोगों से बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की है। जेएएसी ने लोगों से अपनी मांगों के कार्यान्वयन की मांग को लेकर पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन में शामिल होने और आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">संगठन ने अधिकारियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग उन लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं, जिन्हें अपने अधिकारों की मांग करने पर मारा गया।जेएएसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "45 दिनों से जारी उत्पीड़न और क्रूरता, बड़े पैमाने पर हत्याओं और शासकों द्वारा बुनियादी मानवाधिकारों के उल्लंघन के बावजूद हम कश्मीर के लोगों की दृढ़ता को सलाम करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शासक उन लोगों के हत्यारे हैं, जिन्हें अपने अधिकारों की मांग करने के बदले में मार दिया गया। दर्जनों लोगों की हत्या की गई, लेकिन शासकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। इसका कारण उनकी सत्ता की लालसा है। हम अपने शहीदों के खून से कोई समझौता किए बिना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे इन चालाक और धोखेबाज शासकों के झूठे वादों में न आएं।"</p>
<p style="text-align:justify;">जेएएसी ने मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजन के लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करते हुए एक्स पर लिखा, "मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजन के लोग 23 जुलाई को पूरी ताकत के साथ विरोध प्रदर्शन करें। 23 जुलाई को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने और बंदूक की नोक पर फर्जी चुनावों के जरिए धोखेबाज, चालाक और पाखंडी लोगों को जनता पर थोपने के संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा की जाएगी।"</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य पोस्ट में जेएएसी ने बताया कि रावलकोट निवासी जिब्रान मुश्ताक फराम तारार, जिनका इस्लामाबाद में इलाज चल रहा था, उनकी मौत हो गई। संगठन के अनुसार, सुरक्षा बलों की गोली लगने से उसकी मौत हुई।  इससे पहले पिछले सप्ताह पीओके में जारी अशांति में 30 से अधिक लोगों की मौत के बाद जेएएसी ने अपनी प्रस्तावित लंबी मार्च यात्रा को 21 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया था। संगठन ने पाकिस्तान सरकार को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए अंतिम अवसर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">14 जुलाई की समय सीमा खत्म होने के बाद जेएएसी ने मुजफ्फराबाद की ओर मार्च के लिए हजारों समर्थकों को जुटाया था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए थे। पूरे क्षेत्र से आए काफिले रावलाकोट और अन्य प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचे थे। हालांकि, पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद मार्च को स्थगित कर दिया गया। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च दोबारा शुरू किया जाएगा। वहीं, पीओके के विभिन्न हिस्सों में धरना प्रदर्शन जारी रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">17 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने पीओके में बढ़ती अशांति के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकारों के उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई। हालिया हिंसा में दर्जनों लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की खबर है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने बयान में कहा, "किसी नागरिक समाज संगठन को अपराधी घोषित करना और सार्वजनिक सभाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हिरासत में लिए गए जेएएसी नेताओं को कानूनी सहायता और अपने परिवारों से संपर्क का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही, उनके उचित कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।" बयान के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसा में हुई सभी मौतों की त्वरित, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने का भी आग्रह किया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवक्ता ने कहा कि पीओके में 27 जुलाई को होने वाले चुनाव से पहले बढ़े तनाव के कारण जून से अब तक कथित तौर पर कानून प्रवर्तन कर्मियों सहित दर्जनों नागरिक मारे गए हैं। विरोध पर पाकिस्तानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर गहरी चिंता जताते हुए, यूएन मानवाधिकार ऑफिस ने कहा, “जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) विरोध के पीछे का एक मूवमेंट है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें ट्रेडर्स, ट्रांसपोर्टर्स, स्टूडेंट्स, वकील, एक्टिविस्ट्स और दूसरे लोग शामिल हैं। इन पर पब्लिक ऑर्डर और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने का आरोप है और इन्हें एंटी-टेररिज्म कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया। ग्रुप के कुछ नेताओं को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:10:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tehdil Arora]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Petrol-Diesel Price Today: डीजल महंगा, पेट्रोल हुआ सस्ता, जानें नई कीमतें</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान सरकार ने हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 5.71 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी और पेट्रोल के दाम में मामूली कटौती की है। साथ ही अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रतिदिन तय करने की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/petrol-diesel-price-today-diesel-becomes-expensive-petrol-becomes-cheaper-know/article-88487"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/bokaro-police.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Pakistan Fuel Price Today: इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार ने ईंधन की कीमतों में नया संशोधन करते हुए हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि पेट्रोल की कीमत में मामूली कमी की घोषणा की है। सरकार के इस निर्णय के बाद देश में परिवहन और माल ढुलाई की लागत पर फिर से असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। Petrol-Diesel Price Today</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिसूचना के अनुसार, हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 5.71 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके बाद डीजल का नया मूल्य 360.06 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, पेट्रोल की कीमत में 35 पैसे प्रति लीटर की कमी की गई है, जिससे इसकी नई कीमत 315.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए ईंधन मूल्य निर्धारण की नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा नियमित अंतराल के बजाय प्रतिदिन की जाएगी। नई कीमतें वैश्विक बाजार में पिछले सात दिनों के औसत मूल्य के आधार पर तय की जाएंगी। Petrol-Diesel Price Today</p>
<p style="text-align:justify;">इस नई प्रणाली के तहत पाकिस्तान की ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (ओजीआरए) प्रतिदिन अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संशोधित दरें जारी करेगी। सरकार का कहना है कि इससे मूल्य निर्धारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा प्रभाव उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईंधन की कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव का असर सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई क्षेत्र पर पहले से दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में इस्लामाबाद और रावलपिंडी में बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए में वृद्धि की गई है। इसके अलावा माल परिवहन कंपनियों ने भी अपने शुल्क बढ़ा दिए हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों की लागत बढ़ने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवहन संगठनों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों में आगे भी इसी तरह बदलाव होता रहा तो किराए और माल ढुलाई शुल्क में समय-समय पर संशोधन किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति का प्रभाव महंगाई, रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों और आम उपभोक्ताओं के खर्च पर भी पड़ सकता है। Petrol-Diesel Price Today</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:05:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>USA-Iran News: अमेरिका के ईरान पर नए हमले! होर्मुज स्ट्रेट को किया टारगेट: सेंटकॉम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने नए अभियान शुरू किए, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया। जानिए पूरा घटनाक्रम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/usa-iran-news-americas-new-attacks-on-iran-centcom-targets-hormuz/article-88458"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/hormuz-strait-attacl.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाते हुए नए सैन्य अभियान शुरू किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन अभियानों का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित खतरों को कम करना है। USA-Iran News</p>
<p style="text-align:justify;">सेंटकॉम ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान से जुड़े रणनीतिक सैन्य ठिकानों और संसाधनों पर कार्रवाई की है। दावा किया गया कि इन अभियानों का लक्ष्य उन सैन्य व्यवस्थाओं को कमजोर करना है, जिनका उपयोग क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अरब सागर में बढ़ाई गई सैन्य गतिविधियां</h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना ने बताया कि अरब सागर में नौसेना और वायुसेना की तैनाती लगातार बढ़ाई जा रही है। समुद्री मार्गों की निगरानी के साथ-साथ ऐसे अभियानों को भी अंजाम दिया जा रहा है, जिनका उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री आवागमन पर नजर रखना है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कई वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला गया है, जबकि कुछ समुद्री गतिविधियों को भी रोका गया है। USA-Iran News</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। ईरानी पक्ष के अनुसार, इन हमलों में कुछ सैन्य उपकरणों और ढांचों को नुकसान पहुंचा है। आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान पर लगातार हो रहे अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लगातार जारी हैं सैन्य अभियान</h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेंटकॉम ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली, तटीय निगरानी केंद्र, मिसाइल एवं ड्रोन लॉन्चिंग ठिकानों तथा संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को मजबूत करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियां पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कच्चे तेल की कीमतों और समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है। USA-Iran News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 10:23:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Iran-US Tension: मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के सामने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा</title>
                                    <description><![CDATA[कतर, मिस्र, पाकिस्तान और क्षेत्र के अन्य मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के सामने दस दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है।
एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mediators-proposed-a-ceasefire-to-america-and-iran/article-88454"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/iran-us-tension.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="storydetails"><strong>वाशिंगटन।</strong> कतर, मिस्र, पाकिस्तान और क्षेत्र के अन्य मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के सामने दस दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है।<br />एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। सोमवार रात प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और उसने इज़रायल से ऐसे कदम न उठाने को कहा है जिनसे कूटनीति की गुंजाइश खत्म हो सकती है। हालांकि, साथ ही अमेरिका बातचीत के विफल होने की आशंका को देखते हुए भी तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इसी बीच इज़रायली सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और वह कुछ ही दिनों में युद्ध के बड़े और समन्वित अभियान में बदलने की संभावना के लिए तैयारी कर रही है।<br />रिपोर्ट के अनुसार युद्धविराम के इस नए प्रस्ताव में लड़ाई रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने और अमेरिका एवं ईरान के लिए आपसी समझौते को बचाने का मौका देने की बात शामिल है।<br /></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:46:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया में 'ग्रो वेस्ट' के अधिकारियों ने पूजनीय गुरु जी व शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों का किया धन्यवाद</title>
                                    <description><![CDATA[ वर्ष के सबसे बड़े पौधरोपण समारोह के दौरान मेलबर्न की साध-संगत ने बड़ी संख्या में पौधे लगाकर ‘प्रकृति के संरक्षण के प्रति अपने कर्तव्य’ को निभाने के संकल्प को हकीकत में बदल कर दिखाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/grow-waste-officials-in-australia-thanked-the-servants-of-respected/article-88442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/melbourne-plant.work.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Tree Plantation: ऑस्ट्रेलिया (मेलबर्न), (सच कहूँ न्यूज)। वर्ष के सबसे बड़े पौधरोपण समारोह के दौरान मेलबर्न की साध-संगत ने बड़ी संख्या में पौधे लगाकर ‘प्रकृति के संरक्षण के प्रति अपने कर्तव्य’ को निभाने के संकल्प को हकीकत में बदल कर दिखाया। पूजनीय संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan)की पर्यावरण बचाओ मुहिम के तहत मेलबर्न की साध संगत ने "बाल्ड हिल रिजर्व" में स्थानीय लोगों के साथ मिलकर लगभग 3500 मूल प्रजातियों के पौधे लगाए। Australia News</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं, साध संगत ने पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल के लिए विशेष "पॉली" गार्ड भी लगाए ताकि पौधों को जंगली जानवरों या पक्षियों से सुरक्षित रखा जा सके। जानकारी के अनुसार, मेलबर्न की 'ग्रो वेस्ट' संस्था द्वारा यह विशेष कार्यक्रम डार्ले कस्बे में आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य मेलबर्न के पश्चिमी इलाके में बने इस पार्क को और सुंदर बनाना है ताकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को प्राकृतिक आकर्षण के और करीब लाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल होने वाले इस सबसे बड़े आयोजन में बड़ी संख्या में पहुंची साध संगत के साथ-साथ 200 से अधिक स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया। साध संगत को पौधे लगाने के लिए निर्धारित स्थान दिए गए थे, जहाँ पौधे लगाने के बाद सेवादारों ने यह भी सुनिश्चित किया कि पौधे सही तरीके से और बताए गए नियमों के तहत लगाए गए हैं। कार्यक्रम के अंत में 'ग्रो वेस्ट' के अधिकारियों ने पूजनीय गुरु जी और शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों का धन्यवाद किया तथा भविष्य में भी विक्टोरिया में प्राकृतिक सुंदरता के लिए चल रहे प्रोजेक्ट्स में सहयोग की उम्मीद जताई। Australia News</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/melbourne-plant-2.jpg" alt="Melbourne-Plant-2" width="2100" height="861"></img></p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/melbourne-plant.jpg" alt="Melbourne-Plant" width="2100" height="770"></img></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 20:25:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Russia-Ukraine War: जेलेंस्की का दावा, यूक्रेन ने रूसी सैन्य ठिकानों पर की जवाबी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेनी सेना ने रूस के कई महत्वपूर्ण सैन्य और रसद ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। वहीं रूस ने मॉस्को के आसपास ड्रोन हमलों का आरोप लगाते हुए दो ड्रोन मार गिराने की बात कही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/russia-ukraine-war-zelensky-claims-ukraine-retaliated-against-russian-military-bases/article-88437"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/zelenskyy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Russia-Ukraine War: नई दिल्ली , सच कहूँ </strong> रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि उनकी सेना ने रूस के भीतर स्थित कई महत्वपूर्ण सैन्य और रसद (लॉजिस्टिक्स) ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि रूस की ओर से होने वाले प्रत्येक हमले का यूक्रेन उचित और प्रभावी जवाब देता रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी अपने संदेश में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की लंबी दूरी तक मार करने वाली सैन्य क्षमता का प्रभाव अब स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, कार्रवाई के दौरान रूस के महत्वपूर्ण रसद केंद्रों और एक तेल भंडारण केंद्र को निशाना बनाया गया। उन्होंने इस अभियान में शामिल यूक्रेनी सशस्त्र बलों, खुफिया एजेंसियों, मिसाइल इकाइयों, तोपखाना बल और विशेष अभियान दल की भूमिका की सराहना भी की।</p>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेनी राष्ट्रपति का दावा है कि जिन लक्ष्यों पर हमला किया गया, वे यूक्रेन की सीमा से 400 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित थे। उन्होंने यह भी कहा कि काला सागर क्षेत्र में रूस से जुड़े दो तेल टैंकरों और चार मालवाहक जहाजों को भी निशाना बनाया गया। जेलेंस्की ने दोहराया कि युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ाना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, रूस ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन ने रविवार रात मॉस्को और उसके आसपास के क्षेत्रों पर ड्रोन हमले किए। रूसी अधिकारियों के अनुसार, वायु रक्षा प्रणाली ने दो ड्रोन को मार गिराया, लेकिन उनके गिरने से कुछ स्थानों पर नुकसान हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव ने बताया कि एक ड्रोन ओडिन्त्सोवो जिले के निकट और दूसरा क्रास्नोगोर्स्क क्षेत्र में गिरा। धमाके के कारण एक बहुमंजिला इमारत की खिड़कियों के शीशे टूट गए तथा आसपास खड़ी कुछ गाड़ियों को भी क्षति पहुंची। हालांकि, प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूसी प्रशासन ने बताया कि आपदा प्रबंधन और अन्य संबंधित एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है।  रूस और यूक्रेन दोनों की ओर से जारी इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। युद्ध के बीच दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक संसाधनों को निशाना बनाने के दावे करते रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/russia-ukraine-war-zelensky-claims-ukraine-retaliated-against-russian-military-bases/article-88437</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 19:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tehdil Arora]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Balochistan Dispute: बलूचिस्तान विवाद! इतिहास, संसाधन, संघर्ष और मौजूदा हालात की पूरी तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[बलूचिस्तान विवाद के इतिहास, राजनीतिक संघर्ष, प्राकृतिक संसाधनों, CPEC, मानवाधिकार और हालिया दावों की तथ्यपरक पड़ताल। जानिए पूरा परिदृश्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/balochistan-dispute-complete-picture-of-balochistan-dispute-history-resource-conflict/article-88435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/balochistan-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाल के दिनों में सामाजिक माध्यमों पर बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने संबंधी कुछ दावे और संदेश तेजी से प्रसारित हुए हैं। इनमें स्वयंभू प्रतिनिधियों की ओर से नए ध्वज, राष्ट्रगान और अंतरिम शासन की घोषणा का उल्लेख किया गया। हालांकि इन दावों को किसी भी देश या संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है। इसके बावजूद इन घटनाओं ने एक बार फिर बलूचिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष और पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। Balochistan Dispute</p>
<p style="text-align:justify;">बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो क्षेत्रफल के आधार पर लगभग 44 प्रतिशत भूभाग में फैला है। इसके पास प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना, कोयला और अन्य बहुमूल्य खनिजों के विशाल भंडार हैं। इसके बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय से विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझता रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी भूमि से मिलने वाली संपदा का लाभ उन्हें अपेक्षित रूप से नहीं मिलता। इसी असंतोष ने समय के साथ अलगाववादी आंदोलनों को भी बल दिया।बलूचिस्तान में कई दशकों से विभिन्न संगठनों द्वारा पाकिस्तान सरकार के विरुद्ध आंदोलन चलाए जाते रहे हैं। इनमें बलूचिस्तान मुक्ति सेना सबसे चर्चित संगठन माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जबकि यह स्वयं को बलूच अधिकारों के लिए संघर्षरत संगठन बताता है। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों और इस संगठन के बीच हिंसक घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। इन हमलों के बाद पाकिस्तान ने व्यापक सुरक्षा अभियान चलाए हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ाई हैं। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा अभियानों के दौरान आम नागरिक भी प्रभावित होते हैं और जबरन लापता किए जाने तथा हिरासत में उत्पीड़न जैसे आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी है। ग्वादर बंदरगाह और उससे जुड़े विकास कार्य इस परियोजना की धुरी हैं। पाकिस्तान इसे अपनी अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है, जबकि कई बलूच समूहों का आरोप है कि इन परियोजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी और हितों की पर्याप्त उपेक्षा हुई है। इसी कारण अनेक बार इन परियोजनाओं और उनसे जुड़े प्रतिष्ठानों पर हमले भी हुए हैं, जिससे सुरक्षा और निवेश दोनों प्रभावित हुए हैं। Balochistan Dispute</p>
<p style="text-align:justify;">बलूचिस्तान का इतिहास भी इस विवाद की पृष्ठभूमि तैयार करता है। विभाजन के समय कलात रियासत की राजनीतिक स्थिति को लेकर मतभेद रहे। बाद में मार्च उन्नीस सौ अड़तालीस में इसका पाकिस्तान में विलय हुआ, लेकिन अनेक बलूच नेताओं ने इस प्रक्रिया पर लगातार प्रश्न उठाए। इसके बाद अलग-अलग समय पर विद्रोह की कई लहरें सामने आईं। सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक वार्ता के बीच यह संघर्ष कभी शांत हुआ तो कभी फिर तेज हो गया। यही कारण है कि यह समस्या आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के भीतर भी अनेक राजनीतिक विश्लेषक स्वीकार करते हैं कि बलूचिस्तान की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वहां सुरक्षा व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता, सीमित राजनीतिक संवाद और विकास संबंधी असमानताओं ने लोगों में असंतोष बढ़ाया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का कहना है कि बाहरी शक्तियां इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। इन आरोपों के समर्थन में अब तक सार्वजनिक रूप से निर्णायक प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, इसलिए इन दावों को सावधानी से देखने की आवश्यकता है। Balochistan Dispute</p>
<p style="text-align:justify;">बलूचिस्तान का प्रश्न अब केवल पाकिस्तान का आंतरिक विषय नहीं रह गया है। मानवाधिकार, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा संसाधन और अंतरराष्ट्रीय निवेश जैसे अनेक पहलू इससे जुड़े हुए हैं। किसी भी स्थायी समाधान का आधार सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि विश्वास बहाली, राजनीतिक संवाद, न्यायपूर्ण विकास और स्थानीय लोगों की भागीदारी हो सकता है। यदि इन मूल प्रश्नों की अनदेखी जारी रहती है तो यह क्षेत्र आने वाले समय में भी दक्षिण एशिया की सबसे जटिल राजनीतिक चुनौतियों में शामिल रहेगा।                    <strong>प्रमोद भार्गव (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 19:02:12 +0530</pubDate>
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