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                <title>स्वास्थ्य - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Hair Care Tips: बाल झड़ने से हैं परेशान, तो जान लें समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[बालों में तेल कितनी देर तक लगाना चाहिए? जानिए विशेषज्ञों के अनुसार सही समय, लंबे समय तक तेल रखने के फायदे, नुकसान और सही हेयर केयर टिप्स।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/hair-care-tips-if-you-are-troubled-by-hair-fall/article-88743"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/healthy-hair-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Healthy Hair: नई दिल्ली (एजेंसी)। स्वस्थ, घने और चमकदार बाल हर किसी की चाहत होते हैं। इसी वजह से लोग बालों की देखभाल के लिए कई घरेलू और पारंपरिक उपाय अपनाते हैं, जिनमें तेल लगाना सबसे आम और पुराना तरीका माना जाता है। हालांकि, अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या बालों में लंबे समय तक तेल लगाए रखना वास्तव में लाभदायक है या इससे नुकसान भी हो सकता है। Hair Care Tips</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि बालों की संरचना मुख्य रूप से केराटिन प्रोटीन से बनी होती है। जब बाल बार-बार पानी के संपर्क में आते हैं, तो उनकी बाहरी परत नमी को सोख लेती है। यह प्रक्रिया लगातार दोहराने से बालों की मजबूती प्रभावित हो सकती है, जिससे वे रूखे, कमजोर और दोमुंहे होने लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में बाल धोने से पहले हल्की मात्रा में तेल लगाने से बालों के ऊपर एक सुरक्षात्मक परत बन जाती है। यह परत अतिरिक्त नमी को बालों में प्रवेश करने से रोकती है और शैंपू में मौजूद रसायनों के सीधे प्रभाव को भी कम करती है। परिणामस्वरूप बालों की प्राकृतिक नमी बनी रहती है और वे अधिक मुलायम महसूस होते हैं। Hair Care Tips</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, पूरी रात या कई घंटों तक बालों में तेल लगाए रखना हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। जिन लोगों की स्कैल्प पहले से तैलीय होती है, उनके लिए लंबे समय तक तेल लगा रहने से फंगल संक्रमण, डैंड्रफ, खुजली और जलन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। स्कैल्प पर बनने वाला प्राकृतिक तेल (सीबम) और अतिरिक्त तेल मिलकर त्वचा की सामान्य स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों की सलाह है कि बाल धोने से 15 से 30 मिनट पहले तेल लगाना सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान हल्के हाथों से स्कैल्प की मालिश करने से रक्त संचार बेहतर हो सकता है और मानसिक आराम भी मिलता है। हालांकि, केवल तेल लगाने से बाल झड़ने की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वस्थ बालों के लिए पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और नियमित हेयर केयर भी उतने ही आवश्यक हैं। यदि बाल लगातार झड़ रहे हों, स्कैल्प में संक्रमण हो या असामान्य खुजली महसूस हो रही हो, तो स्वयं उपचार करने के बजाय त्वचा एवं बाल विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित रहता है। Hair Care Tips</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:47:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>FSSAI News: चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[एफएसएसएआई ने चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की पेंट्री कार में मानक से कम गुणवत्ता का दूध मिलने के बाद खाद्य सेवा प्रदाता पर कार्रवाई की। जानिए जांच और नियामक के फैसले की पूरी जानकारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/major-action-by-fssai-in-chandigarh-dibrugarh-express/article-88702"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/fssai-pic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Chandigarh-Dibrugarh Express: नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की पेंट्री कार में खाद्य गुणवत्ता संबंधी अनियमितता पाए जाने पर खाद्य सेवा प्रदाता सोपन रेस्टोरेंट के विरुद्ध कार्रवाई की है। जांच में दूध का नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने के बाद संबंधित संस्था पर जुर्माना लगाया गया। एफएसएसएआई द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, ट्रेन की पेंट्री कार से नोवा फ्लेवर्ड डबल टोंड मिल्क का नमूना परीक्षण के लिए लिया गया था। इस नमूने की जांच असम की राज्य जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला में कराई गई, जहां परीक्षण रिपोर्ट में इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुरूप गुणवत्ता मानकों से कम पाया गया। FSSAI News</p>
<h3 style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के नामित खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने संबंधित निर्माता और अन्य पक्षों को जांच निष्कर्ष भेजे। इसके बाद अलीपुरद्वार के निर्णयन अधिकारी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 68 के तहत विधिक प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए नोटिस जारी किया। सुनवाई और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित अधिकृत प्रतिनिधि पर मानक से कम गुणवत्ता वाला खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के मामले में आर्थिक दंड लगाने का आदेश जारी किया गया। हालांकि, नियामक संस्था ने जुर्माने की राशि सार्वजनिक नहीं की है। FSSAI News</p>
<h3 style="text-align:justify;">देशभर में जारी है गुणवत्ता जांच अभियान</h3>
<p style="text-align:justify;">एफएसएसएआई इन दिनों खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर देशव्यापी निगरानी अभियान चला रहा है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में हाल ही में पंजाब स्थित एक हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स निर्माण इकाई का लाइसेंस भी निलंबित किया गया था। निरीक्षण के दौरान वहां कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर उत्पादन गतिविधियां अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश दिए गए थे। नियामक ने स्पष्ट किया है कि सभी कमियों को दूर करने और सक्षम प्राधिकारी के सत्यापन के बाद ही उत्पादन दोबारा शुरू किया जा सकेगा। FSSAI News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 15:15:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Mann Ki Baat: सब जानते हैं मेरा चाय से क्या रिश्ता: पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में बिजनौर की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार ‘विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी’ की सराहना की। जानिए कैसे एक लाख रुपये से शुरू हुई पहल राष्ट्रीय पहचान तक पहुंची।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/everyone-knows-my-relation-with-tea-pm-modi/article-88695"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/herbal-tea-bijnaur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के नवीनतम संस्करण में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की महिलाओं के आत्मनिर्भरता अभियान की सराहना की। उन्होंने लखीवाला गांव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही ‘विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी’ को ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण का प्रेरक उदाहरण बताया।<br /></p><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने उल्लेख किया कि देशभर में चाय लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का माध्यम रही है। इसी क्रम में उन्होंने बिजनौर की महिलाओं की उस पहल का उल्लेख किया, जिसने पारंपरिक ज्ञान को स्वरोजगार में बदल दिया।<br /></p><h3 style="text-align:justify;">औषधीय गुणों से भरपूर हर्बल चाय बनी पहचान<br /></h3><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और पारंपरिक औषधीय तत्वों से युक्त ‘विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी’ विकसित की है। इस हर्बल चाय में लेमनग्रास, गिलोय, तुलसी, मुलेठी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जो इसे विशिष्ट स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुण प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि कम समय में इस उत्पाद ने लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रयागराज महाकुंभ और दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खाद्य महोत्सव जैसे बड़े आयोजनों में इस हर्बल चाय को व्यापक सराहना मिली। विदेशी आगंतुकों ने भी इसमें विशेष रुचि दिखाई।<br /></p><h3 style="text-align:justify;">छोटी शुरुआत से बड़ी सफलता तक का सफर<br /></h3><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस पहल की सबसे प्रेरणादायक बात इसकी साधारण शुरुआत है। उन्होंने बताया कि यह उद्यम लगभग एक लाख रुपये की प्रारंभिक पूंजी से शुरू हुआ था। आज यह उत्पाद देश के कई प्रमुख संस्थानों तक अपनी पहुंच बना चुका है और महिलाओं के लिए आय का सशक्त माध्यम बन गया है।<br /></p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दर्शाता है कि जब स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और महिलाओं के आत्मविश्वास का समन्वय होता है, तो छोटे स्तर पर शुरू हुआ प्रयास भी बड़े सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का आधार बन सकता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी गति प्रदान करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
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                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 12:23:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालवा में अत्याधुनिक अस्पताल का मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किया उद्घाटन; गंभीर बीमारियों के इलाज का केंद्र बनने के लिए तैयार*</title>
                                    <description><![CDATA[मालवा क्षेत्र के मोगा जिले में यह पहला 120 बेड वाला एन.ए.बी.एच.-मान्यता प्राप्त मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल होगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/chief-minister-bhagwant-singh-mann-inaugurated-the-state-of-the-art-hospital-in/article-88689"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/moga1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मोगा।</strong> मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मोगा में 120 बेड वाले अत्याधुनिक 'कैपिटल अस्पताल' का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह सुविधा मालवा क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करेगी। इसे मोगा जिले का पहला नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एन.ए.बी.एच.)-मान्यता प्राप्त मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अस्पताल लोगों को उनके घरों के नजदीक ही गंभीर बीमारियों का विशेष इलाज मुहैया कराएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने बताया कि पात्र मरीज 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' और 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' के तहत कैशलेस इलाज का लाभ ले सकेंगे। इसके साथ ही पंजाब सरकार 1,090 आम आदमी क्लीनिकों के नेटवर्क के माध्यम से पूरे राज्य में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्विटर पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, "आज मैंने मोगा में 120 बेड वाला अत्याधुनिक कैपिटल अस्पताल पंजाब के लोगों को समर्पित किया है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस यह अस्पताल 'मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना' के तहत मुफ्त इलाज भी प्रदान करेगा। अब मालवा क्षेत्र के लोगों को मानक इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। हम हर पंजाबी के लिए किफायती, आधुनिक और उच्च मानक वाली स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "यह कोई राजनीतिक रैली नहीं है। यह पूरे पंजाब में विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए हमारे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा हमारी सरकार की दो सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं क्योंकि ये सर्वांगीण विकास के सबसे मजबूत स्तंभ हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा, "डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा मानवता की सेवा को समर्पित पेशे हैं। दुर्भाग्य से कुछ लोग इन पवित्र पेशों को बदनाम कर रहे हैं, लेकिन हमारी सरकार दोनों क्षेत्रों में लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।"</p>
<p style="text-align:justify;">निजी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "यह बहुत गर्व की बात है कि यहां आधुनिक मशीनों और प्रौद्योगिकी से लैस ऐसा अस्पताल बना है। विशेषज्ञ डॉक्टर लोगों को मानक इलाज देंगे। जब 2022 में हमारी सरकार ने बागडोर संभाली थी तो स्कूली शिक्षा में पंजाब 27वें स्थान पर था। आज निरंतर सुधारों और अथक प्रयासों के कारण पंजाब स्कूली शिक्षा में देश का नंबर एक राज्य बनकर उभरा है।"</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "एक समय था, जब सरकारी स्कूल सिर्फ गरीब बच्चों के लिए माने जाते थे और लोग उनका मजाक उड़ाते थे। हमने 'स्कूल्स ऑफ एमिनेंस' की स्थापना की और शिक्षा प्रणाली का कायाकल्प किया। आज पंजाब केरल को पछाड़कर स्कूली शिक्षा में देश का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य बन गया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा, "2022 में सरकारी स्कूलों के केवल 82 विद्यार्थियों ने नीट की परीक्षा पास की थी। इस साल सरकारी स्कूलों के 881 विद्यार्थियों ने नीट पास किया है, जो हमारी शिक्षा प्रणाली में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।"</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने बताया, "इस नए अस्पताल में पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' और केंद्र सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजनाएं दोनों उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को अधिकतम लाभ मिलेगा। हमारी सरकार ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और राज्यीय तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर कीमती जानें बचाने के लिए देश की पहली समर्पित 'सड़क सुरक्षा फोर्स' की शुरुआत की है। इस फोर्स में 1,597 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान और 144 अत्याधुनिक वाहन शामिल हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "पिछले साल फरवरी में अपनी शुरुआत से लेकर सड़क सुरक्षा फोर्स ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों को लगभग 50 प्रतिशत तक घटाया है, साथ ही हादसे के शिकार लोगों के कीमती सामान और पैसों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की है।"</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा, "पंजाब ने देश की पहली सर्व-व्यापी स्वास्थ्य सेवा योजना 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' भी शुरू की है, जो राज्य के हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मुहैया कराती है। पंजाब भारत का पहला राज्य है, जो ऐसी व्यापक स्वास्थ्य कवरेज मुहैया करा रहा है, जिससे मानक इलाज सुनिश्चित करते हुए लोगों पर वित्तीय बोझ काफी कम हुआ है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "यह ऐतिहासिक पहल सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। लोग इस योजना के तहत 650 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस इलाज प्राप्त कर चुके हैं और पंजाब स्वास्थ्य क्षेत्र में सफलता की नई इबारत लिख रहा है।"</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, "चेन्नई का अपोलो अस्पताल लिवर ट्रांसप्लांट के लिए जाना जाता है और उत्तरी भारत में ऐसी बहुत कम सुविधाएं हैं। पंजाब अब दिल्ली के बाद दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने मोहाली में लिवर ट्रांसप्लांट केंद्र स्थापित किया है। विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने और कीमती जानें बचाने की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/chief-minister-bhagwant-singh-mann-inaugurated-the-state-of-the-art-hospital-in/article-88689</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 11:01:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत पंजाब सरकार ने 8,069 कैंसर मरीज़ों के कैशलेस इलाज पर ₹20.22 करोड़ ख़र्च किए*</title>
                                    <description><![CDATA[’मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत इलाज करवाने वाले कैंसर मरीज़ों में आधे से अधिक की आयु 36 से 60 वर्ष के बीच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/under-mukhyamantri-sehat-yojana-punjab-government-spent-%E2%82%B92022-crore-on/article-88655"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/chandigarh26.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;"><strong>चंडीगढ़ ।</strong> </span>पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 8,069 कैंसर मरीज़ों के इलाज पर ₹20.22 करोड़ ख़र्च किए हैं। लाभार्थियों में आधे से अधिक मरीज़ 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के हैं; जून महीने में सबसे अधिक मरीज़ों का उपचार किया गया। कैंसर का पता चलना एक बेहद भयावह अनुभव होता है। कई परिवारों के लिए यह भय तब और गहरा हो जाता है, जब अगला सवाल केवल यह नहीं होता कि “क्या इस बीमारी का इलाज संभव है?”, बल्कि यह भी होता है कि “क्या हम इलाज का ख़र्च उठा पाएँगे?” भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना इसी चिंता को दूर करने का प्रयास कर रही है।</p>
<div>
<p style="text-align:justify;">राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, 18 जुलाई 2026 तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 8,069 कैंसर मरीज़ों को कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया, जिस पर सरकार ने कुल ₹20.22 करोड़ ख़र्च किए।</p>
<p style="text-align:justify;">इन आँकड़ों के पीछे हज़ारों ऐसे परिवार हैं, जिन्हें जीवन के सबसे कठिन दौर में महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं; जब इलाज में होने वाली हर देरी मरीज़ के जीवन पर भारी पड़ सकती है। आज कैंसर के उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी तथा टार्गेटेड थेरेपी जैसी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों ने मरीज़ों के स्वस्थ होने की संभावनाओं को पहले की तुलना में काफ़ी बढ़ा दिया है। लेकिन चिकित्सा में हुई यह प्रगति तभी सार्थक है, जब मरीज़ समय पर उपचार तक पहुँच सके।</p>
<p style="text-align:justify;">लाभार्थियों की आयु से जुड़ा आँकड़ा भी एक महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने लाता है। सामान्यतः कैंसर को वृद्धावस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन योजना के आँकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे मरीज़ हैं जो अपनी कार्यशील आयु में इस बीमारी से जूझ रहे हैं। योजना के तहत इलाज करवाने वाले 8,069 मरीज़ों में से 4,285 मरीज़ 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के थे, जो सबसे बड़ा वर्ग रहा। इसके अलावा 3,376 मरीज़ 60 वर्ष से अधिक आयु के, 399 मरीज़ 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के तथा 9 मरीज़ 17 वर्ष से कम आयु के थे।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी परिवार के लिए कैंसर का इलाज अचानक आर्थिक संकट का कारण बन सकता है। इस बीमारी के उपचार में बार-बार अस्पताल जाना, महँगी चिकित्सा प्रक्रियाएँ तथा लंबे समय तक देखभाल की आवश्यकता होती है। कई बार बीमारी का इलाज संभव होने के बावजूद भी ख़र्च ही यह तय करता है कि मरीज़ कितनी जल्दी उपचार शुरू कर पाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समाना निवासी दर्शन देवी ने भी इसी चिंता का सामना किया। बढ़ते दर्द के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी, लेकिन 4 से 5 लाख रुपये के अनुमानित ख़र्च ने उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मंज़ूरी मिलने के बाद उनकी कैंसर सर्जरी बिना किसी जेब से ख़र्च के संपन्न हुई। उनके लिए यह योजना केवल स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि इसने बीमारी की पहचान और समय पर उपचार के बीच खड़ी सबसे बड़ी बाधा—इलाज के ख़र्च—को दूर कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब में कैंसर उपचार के आँकड़े बताते हैं कि पूरे वर्ष कैंसर के उपचार की आवश्यकता लगातार बनी रही। जनवरी में 842 मरीज़ों का इलाज हुआ, जो फ़रवरी में बढ़कर 1,080, मार्च में 1,175 और अप्रैल में 1,350 हो गया। मई में यह संख्या थोड़ी घटकर 1,275 रही, लेकिन जून में सर्वाधिक 1,468 मरीज़ों का उपचार किया गया। जुलाई के पहले 18 दिनों में ही 879 मरीज़ इस योजना के तहत उपचार प्राप्त कर चुके थे।</p>
<p style="text-align:justify;">कैंसर उपचार की बढ़ती आवश्यकता देश के सामने मौजूद एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती को भी दर्शाती है। इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में लगभग 14.6 लाख नए कैंसर मामलों का अनुमान लगाया गया था और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। बदलती जीवनशैली, बढ़ती आयु तथा बेहतर जाँच सुविधाएँ इस बढ़ते बोझ के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि केवल आँकड़े पूरी तस्वीर नहीं बताते। कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसमें अक्सर समय ही उपचार के परिणाम तय करता है। यदि जाँच या उपचार में देरी हो जाए तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और इलाज अधिक जटिल एवं महँगा हो सकता है। ऐसे समय में पहले से मानसिक तनाव झेल रहे परिवारों के लिए इलाज का ख़र्च जुटाना एक अतिरिक्त संघर्ष बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">8 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री सेहत योजना शुरू होने के बाद से अब तक कुल 2,68,274 लाभार्थी योजना के तहत उपचार प्राप्त कर चुके हैं। इस दौरान योजना के अंतर्गत कुल 5,31,386 उपचार मामले दर्ज किए गए हैं। 20 जुलाई 2026 तक योजना के अंतर्गत उपलब्ध करवाए गए उपचार का कुल मूल्य ₹950.35 करोड़ तक पहुँच चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि भगवंत मान सरकार का उद्देश्य मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाई किसी भी मरीज़ के कैंसर उपचार में बाधा न बने। उन्होंने कहा, “कैंसर हमारे समय की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है। समय पर जाँच और शीघ्र उपचार से मरीज़ों के स्वस्थ होने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से पात्र मरीज़ों को गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है, ताकि उन्हें इलाज के ख़र्च की चिंता न करनी पड़े।”</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से अपील की कि वे शरीर में गाँठ, बिना किसी कारण वज़न कम होना, असामान्य रक्तस्राव, लंबे समय तक रहने वाली खाँसी अथवा मल-मूत्र की सामान्य प्रक्रिया में होने वाले बदलाव जैसे चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 10:03:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health News: मोटापा कम करने में मददगार है चिया सीड्स, जानिए इसे खाने के 5 आसान और हेल्दी तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापा तेजी से बढ़ती समस्या बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/chia-seeds-are-helpful-in-reducing-obesity-know-5-easy/article-88641"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/health-news.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापा तेजी से बढ़ती समस्या बन गया है। बढ़ा हुआ वजन न केवल शरीर की फिटनेस को प्रभावित करता है, बल्कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है। ऐसे में कई लोग वजन कम करने के लिए प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्प तलाशते हैं। इन्हीं में से एक है चिया सीड्स, जिसे सुपरफूड भी कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिया सीड्स में फाइबर, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है और वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, केवल चिया सीड्स खाने से वजन कम नहीं होता। इसके साथ संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चिया सीड्स खाने के आसान तरीके</strong></h4>
<h4 style="text-align:justify;">1. चिया सीड्स को पानी में भिगोकर पिएं</h4>
<p style="text-align:justify;">एक से दो चम्मच चिया सीड्स को एक गिलास पानी में 20-30 मिनट या रातभर भिगो दें। बीज फूलकर जेल जैसी बनावट में आ जाएंगे। इसे ऐसे ही पिया जा सकता है या स्वाद के लिए इसमें नींबू या संतरे का रस मिलाया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2. सलाद में मिलाकर खाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">यदि आप रोजाना सलाद खाते हैं, तो उसके ऊपर एक चम्मच चिया सीड्स छिड़क दें। इससे सलाद की पौष्टिकता बढ़ जाती है और पेट लंबे समय तक भरा रहने में मदद मिलती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. चिया सीड्स का पाउडर बनाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">चिया सीड्स को हल्का पीसकर पाउडर तैयार किया जा सकता है। इस पाउडर को दही, स्मूदी, दलिया या अन्य हेल्दी व्यंजनों में मिलाकर खाया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">4. चावल या क्विनोआ के साथ करें इस्तेमाल</h4>
<p style="text-align:justify;">आप चिया सीड्स को चावल, क्विनोआ या अन्य अनाज के साथ मिलाकर भी खा सकते हैं। इससे भोजन का पोषण मूल्य बढ़ जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">5. दलिया या ओट्स में मिलाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">नाश्ते में बनने वाले दलिया या ओट्स में एक चम्मच चिया सीड्स मिलाकर खाएं। यह फाइबर और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने का आसान तरीका है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">चिया सीड्स खाते समय रखें ये बातें</h4>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में कम मात्रा (1-2 चम्मच प्रतिदिन) से सेवन करें।<br />चिया सीड्स के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।<br />यदि आपको किसी प्रकार की एलर्जी, पाचन संबंधी समस्या है या आप कोई दवा ले रहे हैं, तो नियमित सेवन से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।<br />केवल चिया सीड्स के भरोसे वजन कम होने की उम्मीद न करें। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी उतने ही जरूरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नोट:</strong> यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए है। किसी भी डाइट या उपचार को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/health-news.jpeg" alt="Health News" width="718" height="415"></img>
Health News: मोटापा कम करने में मददगार है चिया सीड्स, जानिए इसे खाने के 5 आसान और हेल्दी तरीके
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:22:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डूबने से 3 लाख मौतें!  WHO ने जारी किए जान बचाने के 7 प्रभावी उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सात अहम सुरक्षा उपाय जारी किए हैं। जानें बच्चों और परिवारों के लिए जरूरी सुझाव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/3-lakh-deaths-due-to-drowning-who-issued-7-effective/article-88609"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/who-drowning-death.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">World Drowning Prevention Day: नई दिल्ली। जल दुर्घटनाएं आज भी वैश्विक स्तर पर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई हैं। प्रत्येक वर्ष विश्वभर में लगभग तीन लाख लोगों की जान डूबने की घटनाओं में चली जाती है। इन मृतकों में बड़ी संख्या बच्चों की होती है, जिससे यह समस्या और भी चिंताजनक बन जाती है। इसी खतरे को कम करने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 25 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व डूबने से बचाव दिवस से पहले एक नया तकनीकी दिशा-निर्देश जारी किया है। WHO News</p>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डूबने की अधिकांश घटनाएं नदियों, तालाबों, झीलों, कुओं, जलाशयों और स्विमिंग पूलों में होती हैं। निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में इस प्रकार की दुर्घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की जाती हैं, जहां वैश्विक स्तर पर होने वाली 90 प्रतिशत से अधिक घटनाएं सामने आती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सुरक्षा के लिए सात प्रमुख उपाय सुझाए | WHO News</h3>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएचओ ने 'प्रोटेक्ट' (PROTECT) नामक पहल के अंतर्गत सात ऐसे प्रभावी उपाय सुझाए हैं, जिनसे डूबने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जल स्रोतों के आसपास सुरक्षित अवसंरचना विकसित की जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">दुर्घटना की स्थिति में त्वरित बचाव, सीपीआर और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था मजबूत हो।</li>
<li style="text-align:justify;">जल क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">नाव, फेरी और अन्य जल परिवहन सेवाओं में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">विद्यालय स्तर पर बच्चों को तैराकी तथा जल सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">छोटे बच्चों की निगरानी और देखभाल की प्रभावी व्यवस्था हो।</li>
<li style="text-align:justify;">बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं से पहले व्यापक तैयारी और बचाव योजनाएं लागू की जाएं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा है जोखिम</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, तूफान और अत्यधिक गर्मी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। गर्म मौसम में लोग अधिक संख्या में जलाशयों और स्विमिंग पूलों की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार तापमान में वृद्धि के साथ डूबने की घटनाओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घाना से हुई अभियान की शुरुआत</h3>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष डब्ल्यूएचओ ने अपना नया तकनीकी पैकेज अफ्रीकी देश घाना में जारी किया है, जहां प्रतिवर्ष लगभग 1,100 लोगों की डूबने से मृत्यु होती है। इनमें बच्चों और युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। संगठन का मानना है कि यदि सुझाए गए उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो हजारों लोगों का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सामूहिक प्रयास से घटेंगी दुर्घटनाएं</h3>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष विश्व डूबने से बचाव दिवस की थीम "हालात बदलने के लिए एकजुट हों" रखी गई है। इसका उद्देश्य सरकार, स्थानीय प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और समाज को एक साथ जोड़कर जल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहिक प्रयासों और समय पर अपनाए गए सुरक्षा उपायों से हर वर्ष होने वाली हजारों जानलेवा जल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। WHO News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:48:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 50.3 लाख से अधिक ई-स्वास्थ्य कार्ड जारी- स्वास्थ्य मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[5.12 लाख लोगों को 914 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस मुफ्त इलाज उपलब्ध करवाकर वरदान साबित हुई ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’: डॉ. बलबीर सिंह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/more-than-503-lakh-e-health-cards-issued-under-chief-minister/article-88605"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/patiala.jpg" alt=""></a><br /><div>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़/पटियाला।</strong> पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ अपने केवल साढ़े छह महीनों में ही 5.12 लाख लोगों को 914 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस मुफ्त इलाज उपलब्ध करवाकर पंजाबियों के लिए वरदान साबित हुई है। पटियाला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आंकड़े जारी करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब तक 50.3 लाख से अधिक ई-स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस योजना ने मरीजों को बिना वित्तीय बोझ के जीवन रक्षक और महंगे इलाज प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार प्रत्येक योग्य परिवार तक आर्थिक परेशानी के बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि योग्य परिवारों को मुफ्त, कैशलेस और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने वाली इस योजना ने राज्य में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को मजबूत किया है, जिसके कारण इसे भारी जनसमर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत 733 मरीजों का कैंसर उपचार किया गया है, जबकि लोगों के घुटने बदलने, आंखों के ऑपरेशन और हृदय रोगों के इलाज भी किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि योजना के तहत सूचीबद्ध 868 सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीज कैशलेस इलाज प्राप्त कर रहे हैं। इस योजना से राज्य भर में 2,50,359 परिवारों को लाभ मिला है। इनमें से 1.65 लाख लाभार्थियों की सर्जरी इस योजना के तहत की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इस योजना ने सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच मजबूत साझेदारी को दर्शाया है। सरकारी अस्पतालों ने 2,29,551 इलाज (45 प्रतिशत) और निजी अस्पतालों ने 2,83,089 इलाज (55 प्रतिशत) उपलब्ध करवाए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की संतुलित भागीदारी से पंजाब भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में काफी सुधार हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जहां राज्य के निजी अस्पताल इस योजना के तहत सूचीबद्ध हो रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार द्वारा पीजीआई चंडीगढ़ को इस योजना से न जोड़ना पंजाबियों के साथ भेदभाव है। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार ने इस योजना के माध्यम से पंजाबियों को मानसिक, आर्थिक और कर्ज के दबाव से बचाया है। उन्होंने बताया कि इस योजना में पंजाब भर के 24,96,313 परिवार शामिल हैं। कुल लाभार्थियों में 24.3 लाख (48 प्रतिशत) पुरुष और 26 लाख (52 प्रतिशत) महिलाएं हैं। वहीं 34.2 लाख (68 प्रतिशत) लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से और 16.1 लाख (32 प्रतिशत) शहरी क्षेत्रों से हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जिलों में लुधियाना ने सबसे अधिक 5,46,380 ई-कार्ड जारी किए हैं, जिनमें 2,69,372 परिवार शामिल हैं। इसके बाद पटियाला ने 4,56,730 कार्ड जारी किए हैं, जिनमें 2,15,373 परिवार शामिल हैं। जालंधर में 3,69,335 कार्ड (1,85,285 परिवार) और होशियारपुर में 3,45,094 कार्ड (1,64,941 परिवार) जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इलाज के मामलों में पटियाला और बठिंडा अग्रणी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि योजना के तहत क्रॉनिक हीमोडायलिसिस, पशु काटने का इलाज (सांप के काटने को छोड़कर), घुटना प्रत्यारोपण, पित्ताशय की सर्जरी, एंजियोप्लास्टी, हिप रिप्लेसमेंट, किडनी संबंधी उपचार, बाईपास सर्जरी, नवजात शिशु देखभाल सहित कई गंभीर इलाज पैकेजों का लाभ मरीजों को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कैशलेस और निर्बाध डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध करवाकर यह योजना न केवल लोगों की जान बचा रही है, बल्कि परिवारों को भारी स्वास्थ्य खर्चों से भी बचा रही है। निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई संबंधी सवाल के जवाब में डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार ने अपनी ऑडिट प्रणाली को मजबूत किया है। जांच के दौरान 6 मरीजों को 2.98 लाख रुपये वापस करवाए गए हैं। इसके अलावा 14 अस्पतालों की जांच में गलत जानकारी अपडेट करने के मामले सामने आए, जिन पर 78 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जालंधर के सरबोधिया अस्पताल को योजना की सूची से हटा दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की कि यदि कोई अस्पताल कैशलेस इलाज के दौरान पैसे मांगता है, बाहर से सामान मंगवाने या टेस्ट करवाने के लिए कहता है तो इसकी शिकायत हेल्पलाइन नंबर 104 पर करें। इस अवसर पर स्टेट हेल्थ एजेंसी के डिप्टी सीईओ डॉ. अंदेश कंग, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अनुप्रिता जौहल और सिविल सर्जन डॉ. शैली जेतली भी मौजूद रहे।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:22:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश में बच्चों को डेंगू-मलेरिया से कैसे बचाएं? जानिए जरूरी सावधानियां और बचाव के आसान उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश में बच्चों को डेंगू-मलेरिया से कैसे बचाएं? जानिए जरूरी सावधानियां और बचाव के आसान उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-to-protect-children-from-dengue-and-malaria-in-the/article-88589"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/dengue1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक और हरियाली लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है, जिससे छोटे बच्चों के संक्रमित होने की आशंका अधिक रहती है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की तुलना में कम होती है, इसलिए माता-पिता को इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">घर के आसपास पानी जमा न होने दें</h4>
<p style="text-align:justify;">डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपते हैं। इसलिए घर और उसके आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, बाल्टी, पुराने टायर और छत पर रखे बर्तनों का पानी नियमित रूप से खाली करें। कूलर का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार बदलें और पानी की टंकियों को हमेशा ढककर रखें। साफ-सफाई रखने से मच्छरों की संख्या काफी हद तक कम की जा सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बच्चों को मच्छरों से बचाना सबसे जरूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">बारिश के मौसम में बच्चों को सुबह और शाम के समय फुल स्लीव कपड़े पहनाएं, ताकि शरीर का अधिक हिस्सा ढका रहे। यदि बच्चा बाहर खेलने जाता है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चों के लिए सुरक्षित मच्छर भगाने वाली क्रीम, रोल-ऑन या पैच का इस्तेमाल किया जा सकता है। रात में बच्चों को मच्छरदानी के अंदर सुलाएं और घर में मच्छर न पनपने दें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पौष्टिक खान-पान से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता</h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को हमेशा ताजा और स्वच्छ भोजन दें। खुले या बासी भोजन से बचाएं। उनकी डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं ताकि शरीर हाइड्रेट रहे। संतुलित आहार उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें</h4>
<p style="text-align:justify;">यदि बच्चे को तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, उल्टी, कमजोरी, आंखों के पीछे दर्द या त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दें, तो इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उनकी सलाह के बिना कोई भी दवा न दें। यदि बुखार दो से तीन दिन तक बना रहता है, तो डेंगू या मलेरिया की जांच जरूर कराएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बचाव ही सबसे बेहतर उपाय</h4>
<p style="text-align:justify;">डेंगू और मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना और बच्चों को उनके काटने से बचाना है। थोड़ी-सी सावधानी और साफ-सफाई की आदत अपनाकर इन गंभीर बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। <br /><strong>नोट:</strong> यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि बच्चे में तेज बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/how-to-protect-children-from-dengue-and-malaria-in-the/article-88589</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 17:44:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्षा ऋतु में बस्ति चिकित्सा से पाएं वात रोगों से राहत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर में वर्षा ऋतु विशेष निःशुल्क पंचकर्म शिविर शुरू किया गया है। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में वातजनित रोगों के लिए बस्ति चिकित्सा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/get-relief-from-rheumatic-diseases-through-basti-chikitsa-in-rainy/article-88583"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/jaipur-nia.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर, 23 जुलाई 2026। </strong>आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्वविद्यालय), जयपुर के पंचकर्म विभाग द्वारा आमजन के बेहतर स्वास्थ्य एवं वातजनित रोगों की रोकथाम के उद्देश्य से वर्षा ऋतु विशेष निःशुल्क पंचकर्म चिकित्सा शिविर आयोजित किया जा रहा है। शिविर में योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञों की देखरेख में बस्ति चिकित्सा निःशुल्क कि जायेगी । </p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान के कुलपति प्रो.संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में वर्षा ऋतु को बस्ति चिकित्सा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। यह चिकित्सा वात दोष के शमन, शरीर के शोधन तथा स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने आमजन से इस निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पंचकर्म विभागाध्यक्ष प्रो. गोपेश मंगल ने बताया कि वर्षा ऋतु में वात दोष के बढ़ने से कमर दर्द, पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द, शारीरिक जकड़न, थकान एवं दुर्बलता जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में बस्ति चिकित्सा इन समस्याओं के साथ-साथ वृद्धावस्था जनित विकारों की रोकथाम में भी लाभकारी मानी जाती है। शिविर में रोगियों का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण कर आवश्यकता अनुसार उपचार किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक पंचकर्म विभाग, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जौरावर सिंह गेट, आमेर रोड, जयपुर में पंजीकरण कर शिविर का लाभ ले सकते हैं। इस अवसर पर प्रो.पी हेमंता, प्रो.अनिता शर्मा, प्रो. सुरेन्द्र शर्मा, प्रो.महेन्द्र प्रजापति, डॉ. सर्वेश सिंह, डॉ. विपिन तंवर, डॉ. वैभव बापट, डॉ. अनुश्री डी., डॉ. लोकेश सहित पंचकर्म विभाग के समस्त चिकित्सक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 17:06:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tehdil Arora]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Baby Health: बच्चे के लिए कौन-सा दूध है बेहतर? गाय या भैंस, जानें सही विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[1 साल के बच्चे के लिए गाय का दूध बेहतर या भैंस का? जानिए डॉक्टरों की सलाह और सही तरीका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/which-milk-is-better-for-the-child-cow-or-buffalo/article-88561"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/baby-health.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">Baby Health:  बच्चे के जन्म के बाद पहले छह महीने तक उसे केवल मां का दूध ही पिलाने की सलाह दी जाती है। मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण आहार माना जाता है, क्योंकि इसमें सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यदि किसी कारणवश मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता, तो डॉक्टर की सलाह पर ही दूसरे विकल्प अपनाने चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">लेकिन जब बच्चा एक साल का हो जाता है और पहली बार उसे जानवर का दूध देने की बात आती है, तो ज्यादातर माता-पिता के मन में एक सवाल जरूर उठता है—<strong>क्या बच्चे के लिए गाय का दूध बेहतर है या भैंस का?</strong> आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय।</p>
<h2>गाय का दूध क्यों माना जाता है बेहतर? Baby Health</h2>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक साल की उम्र के बाद छोटे बच्चों के लिए <strong>गाय का दूध</strong> अधिक उपयुक्त माना जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गाय के दूध में फैट की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है और यह हल्का होता है। इसलिए बच्चे का पाचन तंत्र इसे आसानी से पचा लेता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अलावा गाय के दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12, पोटैशियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों, दांतों और शरीर के समग्र विकास में मदद करते हैं।</p>
<h2>भैंस का दूध कब दिया जा सकता है?</h2>
<p class="isSelectedEnd">भैंस के दूध में फैट और कैलोरी की मात्रा गाय के दूध की तुलना में अधिक होती है। यही वजह है कि यह थोड़ा भारी माना जाता है। छोटे बच्चों को इसे पचाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए अधिकांश डॉक्टर शुरुआत में गाय का दूध देने की सलाह देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि, हर बच्चे की सेहत और पोषण संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए बच्चे को भैंस का दूध देने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।</p>
<h2>पहली बार दूध पिलाते समय रखें इन बातों का ध्यान</h2>
<ul>
<li>शुरुआत में बच्चे को थोड़ी मात्रा में ही दूध दें।</li>
<li>दूध देने के बाद बच्चे की प्रतिक्रिया पर नजर रखें।</li>
<li>यदि उल्टी, दस्त, पेट दर्द, गैस, त्वचा पर चकत्ते या एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।</li>
<li>दूध हमेशा साफ और अच्छी तरह उबला हुआ ही दें।</li>
</ul>
<h2>सिर्फ दूध नहीं, संतुलित आहार भी है जरूरी</h2>
<p class="isSelectedEnd">एक साल के बाद बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। इसलिए केवल दूध पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। बच्चे की डाइट में फल, हरी सब्जियां, दालें, अनाज, दही, पनीर और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी शामिल करने चाहिए। संतुलित आहार से बच्चे का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास बेहतर होता है।</p>
<h2>डॉक्टर की सलाह क्यों है जरूरी?</h2>
<p>अगर आपका बच्चा <strong>एक साल से छोटा है</strong>, तो बिना डॉक्टर की सलाह के उसे गाय या भैंस का दूध नहीं देना चाहिए। वहीं, एक साल के बाद भी बच्चे की उम्र, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 10:58:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Diabetes: डायबिटीज मरीजों को बड़ी राहत! इस योजना के तहत होगा मुफ्त इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत छह महीनों में 2,300 डायबिटीज़ रोगियों का कैशलेस इलाज,₹6.5 करोड़ का उपचार कवर*]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/diabetes/article-88556"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/diabetes.jpg" alt=""></a><br /><div>
<p style="text-align:justify;"><strong>Diabetes: चंडीगढ़।</strong> डायबिटीज़ शायद ही कभी किसी चिकित्सीय आपात स्थिति के रूप में शुरू होता है। इसकी शुरुआत अक्सर बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होती है—बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखाई देना, बिना कारण अत्यधिक थकान महसूस होना, पैरों में सुन्नपन या ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो। इन शुरुआती संकेतों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जब तक कि स्थिति गंभीर होकर अस्पताल में भर्ती होने, गहन चिकित्सा (आईसीयू), सर्जरी या डायलिसिस की आवश्यकता तक न पहुँच जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के नवीनतम स्वास्थ्य आँकड़े बताते हैं कि डायबिटीज़ अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। यह तेज़ी से कामकाजी आयु वर्ग के लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे परिवारों, रोज़गार देने वालों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार बोझ बढ़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, असंतुलित खान-पान, जंक और प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, तंबाकू और शराब के सेवन के कारण दुनिया भर में डायबिटीज़ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे कार्य घंटे, पर्याप्त नींद का अभाव और लगातार तनाव ने भी इस बीमारी के ज़ोख़िम को और बढ़ा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही स्वास्थ्य योजना मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब, द्वारा 21 जुलाई 2026 तक साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, डायबिटीज़ से संबंधित 2,300 उपचार प्रकरणों पर लगभग ₹6.5 करोड़ (₹6,49,99,151.6) ख़र्च किए गए। इनमें 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों के 1,123 मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए, इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 तथा 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि डायबिटीज़ तेज़ी से पंजाब की आर्थिक रूप से उत्पादक आबादी को अपनी चपेट में ले रही है, जबकि इसका प्रभाव कम आयु वर्ग के लोगों पर भी दिखाई दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपचार संबंधी आँकड़े यह भी दर्शाते हैं कि अस्पताल पहुँचने वाले कई मरीज़ गंभीर अवस्था में थे। खून में शुगर का स्तर बेहद अनियंत्रित होने से होने वाली जानलेवा स्थिति ‘डायबिटिक कीटोएसिडोसिस’ के इलाज के सबसे अधिक दावे दर्ज किए गए। लंबे समय तक डायबिटीज़ के कारण नसों और रक्त वाहिकाओं को होने वाले नुकसान से उत्पन्न डायबिटिक फुट उपचार की दूसरी सबसे प्रमुख स्थिति के रूप में सामने आया। कई मरीज़ों को डायलिसिस, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, सीटी एवं एमआरआई जाँच, गहन चिकित्सा (आईसीयू) तथा डायबिटिक फुट सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, जो अस्पताल में भर्ती होने के समय बीमारी की गंभीर अवस्था को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ये आँकड़े हर परिवार के लिए एक चेतावनी हैं। उन्होंने कहा, “ये ऐसे लोग नहीं हैं जिन्होंने जीवन की अंतिम अवस्था में प्रवेश कर लिया है। ये राज्य की कार्यशील आबादी है—वे लोग जो परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं, व्यवसाय चला रहे हैं, ऋण (लोन) चुका रहे हैं और अपने बुज़ुर्ग माता-पिता का सहारा बने हुए हैं। जब डायबिटीज़ इस आयु वर्ग के लोगों को अस्पताल तक पहुँचा देता है, तो इसका प्रभाव केवल मरीज़ तक सीमित नहीं रहता।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जाँच करवाएँ। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “डायबिटीज़ की जटिलताओं का इलाज करवाने से कहीं आसान है इसकी रोकथाम। जटिलताएँ होने का इंतज़ार न करें। अस्पताल लोगों की जान बचा सकते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण खोए हुए साल वापस नहीं लौटा सकते।”</p>
<p style="text-align:justify;">जहाँ एक ओर पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना उपचार का ख़र्च वहन कर मरीज़ों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर जाँच, नियमित स्क्रीनिंग, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वज़न बनाए रखना तथा तंबाकू और हानिकारक स्तर पर शराब के सेवन से बचना डायबिटीज़ और उससे होने वाली गंभीर एवं अपंगता पैदा करने वाली जटिलताओं के ज़ोख़िम को काफ़ी हद तक कम कर सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">*डायबिटीज़ संबंधी आँकड़े क्या बताते हैं:*</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में डायबिटीज़ से संबंधित सबसे अधिक 1,123 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 तथा 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए।</li>
<li style="text-align:justify;">21 जुलाई 2026 तक पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत डायबिटीज़ से संबंधित 2,300 उपचार प्रकरणों पर लगभग ₹6.5 करोड़ (₹6,49,99,151.6) ख़र्च किए गए।</li>
<li style="text-align:justify;">अत्यधिक अनियंत्रित डायबिटीज़ की गंभीर स्थिति को दर्शाने वाला डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक दावा किया गया उपचार पैकेज रहा।</li>
<li style="text-align:justify;">लंबे समय से नसों और रक्त वाहिकाओं को हुए नुकसान का संकेत देने वाला डायबिटिक फुट दूसरी सबसे बड़ी जटिलता के रूप में सामने आया।</li>
<li style="text-align:justify;">अनेक मरीज़ों को डायलिसिस, आईसीयू उपचार, ब्लड ट्रांसफ्यूजन , सीटी/एमआरआई जाँच तथा डायबिटिक फुट सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता पड़ी।</li>
<li style="text-align:justify;">समय पर स्क्रीनिंग, स्वस्थ जीवनशैली और उचित प्रबंधन ही डायबिटीज़ की गंभीर जटिलताओं से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।</li>
</ul>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 10:25:52 +0530</pubDate>
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