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                <title>स्वास्थ्य - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>AC Side Effects: AC की ठंडक में छुपा खतरा, ज्यादा इस्तेमाल से बिगड़ सकती है सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[AC Side Effects:  देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच एयर कंडीशनर (AC) अब लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। घर हो, ऑफिस, गाड़ी या मॉल—हर जगह लोग लंबे समय तक AC में समय बिता रहे हैं। जहां एक तरफ यह भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं डॉक्टरों के मुताबिक इसका जरूरत से ज्यादा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-hidden-danger-in-the-coolness-of-ac-excessive-use-can-harm-your-health/article-83834"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/ac-side-effects.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">AC Side Effects:  देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच एयर कंडीशनर (AC) अब लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। घर हो, ऑफिस, गाड़ी या मॉल—हर जगह लोग लंबे समय तक AC में समय बिता रहे हैं। जहां एक तरफ यह भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं डॉक्टरों के मुताबिक इसका जरूरत से ज्यादा और लगातार इस्तेमाल सेहत पर धीरे-धीरे असर डाल सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शरीर को बिना बताए डिहाइड्रेट करता है AC AC Side Effects</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>AC हवा की नमी को कम कर देता है, जिससे वातावरण ठंडा तो हो जाता है लेकिन काफी ड्राई भी हो जाता है। इस वजह से शरीर धीरे-धीरे पानी खोने लगता है। ठंडे माहौल में प्यास कम लगती है, इसलिए लोग कम पानी पीते हैं।</li>
<li>इसके कारण सिरदर्द, थकान, स्किन का सूखना और ध्यान में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। लंबे समय तक ऐसा रहने पर शरीर की ऊर्जा और सामान्य स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">सांस से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>लगातार AC में रहने से श्वसन तंत्र भी प्रभावित होता है। ठंडी और सूखी हवा के कारण गला सूखना, खांसी, नाक बंद होना और सांस की नलियों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</li>
<li>जिन लोगों को <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">अस्थमा</span></span> या साइनस की समस्या है, उनके लिए यह परेशानी और बढ़ सकती है। अगर AC की समय-समय पर सफाई नहीं होती, तो उसमें जमा धूल और बैक्टीरिया हवा के साथ फैलकर संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">बार-बार तापमान बदलने से होता है “टेंपरेचर शॉक”</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>डॉक्टरों के अनुसार एक और बड़ा खतरा “टेंपरेचर शॉक” है। जब कोई व्यक्ति बाहर की तेज गर्मी और अंदर के ठंडे AC माहौल के बीच बार-बार आता-जाता है, तो शरीर को इस बदलाव के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी होती है।</li>
<li>इससे सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में जकड़न और इम्यूनिटी कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर शरीर संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे करें AC का सुरक्षित इस्तेमाल</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टरों का कहना है कि AC को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>तापमान 24–26 डिग्री के बीच रखें</li>
<li>प्यास न लगे तब भी नियमित रूप से पानी पीते रहें</li>
<li>सीधे AC की हवा के नीचे बैठने से बचें</li>
<li>बीच-बीच में बाहर निकलकर शरीर को सामान्य तापमान में आने दें</li>
<li>AC की नियमित सफाई और सर्विसिंग कराएं</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों में AC राहत का सबसे बड़ा साधन है, खासकर हीट वेव के दौरान। लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल धीरे-धीरे सेहत पर असर डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम संतुलित तरीके से AC का उपयोग करें, ताकि ठंडक भी मिले और स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-hidden-danger-in-the-coolness-of-ac-excessive-use-can-harm-your-health/article-83834</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 12:10:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Fake Weight Loss Injection: नकली वेट लॉस इंजेक्शन का बढ़ता खतरा, जानिए सच और बचाव के तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[Fake Weight Loss Injection:  देशभर में तेजी से पॉपुलर हो रहे वेट लॉस इंजेक्शन अब एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं। हाल ही में गुरुग्राम में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की कार्रवाई ने एक बड़े नकली इंजेक्शन रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें करीब 70 लाख रुपये के फर्जी इंजेक्शन बरामद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-growing-threat-of-fake-weight-loss-injections-know-the-facts-and-how-to-protect-yourself/article-83793"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/fake-weight-loss-injection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">Fake Weight Loss Injection:  देशभर में तेजी से पॉपुलर हो रहे वेट लॉस इंजेक्शन अब एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं। हाल ही में गुरुग्राम में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की कार्रवाई ने एक बड़े नकली इंजेक्शन रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें करीब 70 लाख रुपये के फर्जी इंजेक्शन बरामद किए गए। जांच में पता चला कि आरोपी किराए के फ्लैट में ही नकली इंजेक्शन तैयार कर रहे थे और चीन से मंगाए गए सस्ते केमिकल, सिरिंज और पैकेजिंग की मदद से इन्हें असली जैसा बना रहे थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मौनजारो इंजेक्शन और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग? Fake Weight Loss Injection</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौनजारो (Mounjaro) एक एंटी-डायबिटिक दवा है, जिसका उपयोग डॉक्टर की सलाह पर वजन घटाने के लिए भी किया जाता है। सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी ट्रेंड और तेजी से स्लिम होने की चाहत ने इसकी मांग को तेजी से बढ़ा दिया है। इसी बढ़ती डिमांड का फायदा उठाकर नकली दवाओं का कारोबार भी फैलता जा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नकली इंजेक्शन से क्या हो सकते हैं खतरे?</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार नकली वेट लॉस इंजेक्शन बेहद खतरनाक हो सकते हैं। इनमें या तो असली दवा का सक्रिय तत्व नहीं होता या फिर हानिकारक केमिकल मिलाए जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>इलाज का कोई असर नहीं होता</li>
<li>शरीर में टॉक्सिक रिएक्शन हो सकते हैं</li>
<li>गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है</li>
<li>लंबे समय में अंगों को नुकसान पहुंच सकता है</li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों का कहना है कि गलत दवा मिलने से पूरा इलाज फेल हो सकता है। साथ ही, अधूरी या गलत दवा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ाती है, जिससे भविष्य में इलाज और मुश्किल हो जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत में क्यों बढ़ रहा है नकली दवाओं का खतरा?</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत में नकली दवाओं की समस्या पुरानी है, लेकिन अब इसका दायरा काफी बढ़ चुका है। इसके पीछे कई कारण हैं:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>नियमों का कमजोर पालन</li>
<li>सप्लाई चेन में खामियां</li>
<li>ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनियंत्रित बिक्री</li>
<li>तेजी से बढ़ती डिमांड</li>
</ul>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन कारणों से नकली दवाएं आसानी से बाजार में पहुंच रही हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे करें नकली इंजेक्शन की पहचान?</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नकली इंजेक्शन से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>हमेशा लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें</li>
<li>बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के इंजेक्शन न लें</li>
<li>पैकेजिंग को ध्यान से जांचें (स्पेलिंग मिस्टेक, टूटी सील, अजीब लेबल से सावधान रहें)</li>
<li>बॉक्स पर दिए गए QR कोड को जरूर स्कैन कर वेरिफाई करें</li>
<li>सोशल मीडिया या अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दवा खरीदने से बचें</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">वजन घटाने की जल्दी में अपनी सेहत को खतरे में डालना समझदारी नहीं है। नकली वेट लॉस इंजेक्शन न सिर्फ बेअसर होते हैं बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। इसलिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें और केवल विश्वसनीय स्रोत से ही दवाएं खरीदें। जागरूकता ही इस खतरे से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-growing-threat-of-fake-weight-loss-injections-know-the-facts-and-how-to-protect-yourself/article-83793</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:23:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kanchanar Guggulu Benefits: कंचनार गुग्गुलु! थायराइड, हार्मोन असंतुलन व शरीर की गांठों में है बेहद असरकारक</title>
                                    <description><![CDATA[Benefits of Kanchanar Guggulu: नई दिल्ली। सदियों से हमारे देश में जड़ी-बूटियों से रोगों का निदान किया जा रहा है। कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो संजीवनी की तरह काम करती हैं और शरीर को रोग मुक्त करने में मदद करती हैं। कंचनार गुग्गुलु भी आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है, जिसका इस्तेमाल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/kanchanar-guggulu-highly-effective-for-thyroid-issues-hormonal-imbalances-and-bodily-lumps/article-83668"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/thyroid-issues.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Benefits of Kanchanar Guggulu: नई दिल्ली। सदियों से हमारे देश में जड़ी-बूटियों से रोगों का निदान किया जा रहा है। कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो संजीवनी की तरह काम करती हैं और शरीर को रोग मुक्त करने में मदद करती हैं। कंचनार गुग्गुलु भी आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है, जिसका इस्तेमाल शरीर की सूजन और गांठों को कम करने में होता आया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कंचनार गुग्गुलु से थायराइड (Thyroid issues) को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। Kanchanar Guggulu Benefits</p>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को मुख्य औषधि का दर्जा दिया गया है। यह शरीर में गांठों, पीसीओएस, गर्भाशय फाइब्रॉएड और ग्रंथियों की सूजन के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। यह शरीर में कफ और मेद धातु को भी संतुलित करने में मदद करती है लेकिन अगर थायराइड में इसे चिकित्सक की सलाह के साथ इस्तेमाल किया जाए तो उसके हैरान कर देने वाले फायदे देखने को मिलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद मानता है कि अगर शरीर में टॉक्सिन जमा हो रहे हैं, तो शरीर में गांठ बनने की संभावना अधिक होती है और हॉर्मोन का असंतुलन भी होता है, जिससे गर्भाशय से जुड़े रोग और थायराइड की परेशानी शरीर में बनना शुरू हो जाती है। ऐसे में कंचनार गुग्गुलु का सेवन किया जाए, तो शरीर से टॉक्सिन आसानी से बाहर निकल जाते हैं और कफ और वात दोष भी संतुलित रहते हैं। Kanchanar Guggulu Benefits</p>
<h3>कंचनार में एंटी-इंफ्लेमेटरी और शरीर को डिटॉक्स करने वाले गुण होते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">कंचनार में एंटी-इंफ्लेमेटरी और शरीर को डिटॉक्स करने वाले गुण होते हैं, और गुग्गुलु मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त बनाए रखने में मदद करता है। इससे शरीर का पूरा पाचन सिस्टम साफ होना शुरू कर देता है। बाजार में आसानी से कंचनार गुग्गुलु पाउडर और गोली के रूप में मिल जाते हैं, लेकिन सही मात्रा और सही बीमारी में सेवन के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें।</p>
<p style="text-align:justify;">कंचनार गुग्गुलु के साथ जीवनशैली में बदलाव करना भी उतना ही जरूरी है। आहार में जंक फूड और मीठे का सेवन कम करें। रिफाइंड चीनी से बने उत्पाद पीसीओडी और थायराइड दोनों को बुरी तरीके से प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं। रोजाना सैर पर जएं और हल्का फुल्का वॉक करें। इसके साथ ही रात के समय हल्दी वाला दूध लेना न भलें। इससे थायराइड ग्रांथि से जुड़े हॉर्मोन संतुलित रहते हैं। सुबह की शुरुआत धनिए से करें। जितना हो सकते हरे धनिए का सेवन करें। यह थायराइड के हार्मोन को संतुलित करने में मदद करेगा। Kanchanar Guggulu Benefits</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:23:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Liver Health: जंक फूड खाने से होती है फैटी लिवर की बीमारी?जानें कितनी खतरनाक है ये बीमारी</title>
                                    <description><![CDATA[Liver Health: तेजी से बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों ने हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। खासकर लिवर, जो शरीर का एक बेहद अहम अंग है, आज गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। लिवर न केवल भोजन को पचाने और पोषक तत्वों में बदलने का काम करता है, बल्कि शरीर से विषैले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/excessive-sugar-and-fast-food-are-increasing-the-risk-of-fatty-liver/article-83609"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/liver-health.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Liver Health: तेजी से बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों ने हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। खासकर लिवर, जो शरीर का एक बेहद अहम अंग है, आज गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। लिवर न केवल भोजन को पचाने और पोषक तत्वों में बदलने का काम करता है, बल्कि शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है, लेकिन हमारी रोजमर्रा की गलत आदतें इसे धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तेल का सेवन भी खतरनाक | Liver Health</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल शराब ही नहीं, बल्कि अधिक चीनी, फास्ट फूड और ज्यादा तेल का सेवन भी लिवर के लिए जहर के समान है। जब हम मीठे पेय, कोल्ड ड्रिंक्स, तले-भुने खाद्य पदार्थ और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करते हैं, तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है। यह अतिरिक्त वसा धीरे-धीरे लिवर में जमा होकर फैटी लिवर जैसी बीमारी को जन्म देती है, जो समय के साथ गंभीर रूप ले सकती है। आज के दौर में गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग तेजी से बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है। यह बीमारी उन लोगों को भी प्रभावित कर रही है जो शराब का सेवन नहीं करते। अधिक चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा लिवर में सूजन पैदा करती है, जिससे इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेलियर तक पहुंच सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">38 प्रतिशत लोग प्रभावित</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत में इस समस्या का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, हर चार में से एक वयस्क अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त है, और करीब 38 प्रतिशत लोग फैटी लिवर से प्रभावित हैं। यह खतरा अब बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिए एक गंभीर संकेत है। फास्ट फूड का बढ़ता चलन, फल-सब्जियों की कमी और शारीरिक निष्क्रियता इस स्थिति को और खराब कर रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि फैटी लिवर एक साइलेंट डिजीज है, जिसके शुरूआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर को नुकसान पहुंचता रहता है। यही कारण है कि अक्सर इस बीमारी का पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">स्वस्थ जीवशैली अपनाएं, रोजाना व्यायाम करें</h5>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इस खतरे से बचाव संभव है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लिवर को सुरक्षित रखा जा सकता है। मीठे पेय, अधिक चीनी और तैलीय भोजन से दूरी बनाना, साथ ही ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज को अपनी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जिनमें मोटापा, डायबिटीज या पारिवारिक इतिहास मौजूद है। –एजेंसी</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/excessive-sugar-and-fast-food-are-increasing-the-risk-of-fatty-liver/article-83609</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:21:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Summer Drinks Recipes: हीटवेव में भी रहेंगे तरोताजा,  घर पर बनाएं ये देसी ठंडाई</title>
                                    <description><![CDATA[Summer Drinks Recipes: ठंडाई एक पारंपरिक भारतीय पेय है, जो खासतौर पर गर्मियों में बहुत पसंद किया जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ स्वाद में भी बेहद लाजवाब होती है। घर पर बनी ठंडाई न केवल शुद्ध और हेल्दी होती है, बल्कि इसमें आप अपनी पसंद के अनुसार सामग्री भी डाल सकते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/summer-drinks-recipes/article-83590"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/summer-drinks-recipes.jpg" alt=""></a><br /><p>Summer Drinks Recipes: ठंडाई एक पारंपरिक भारतीय पेय है, जो खासतौर पर गर्मियों में बहुत पसंद किया जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ स्वाद में भी बेहद लाजवाब होती है। घर पर बनी ठंडाई न केवल शुद्ध और हेल्दी होती है, बल्कि इसमें आप अपनी पसंद के अनुसार सामग्री भी डाल सकते हैं। आइए जानते हैं घर पर ठंडाई बनाने की आसान विधि।</p>
<h3>ठंडाई बनाने की सामग्री | Summer Drinks Recipes</h3>
<ul>
<li>बादाम 20-25</li>
<li>काजू 10-12</li>
<li>पिस्ता 10-12</li>
<li>खसखस (पोस्त दाना) 2 चम्मच</li>
<li> सौंफ- 2 चम्मच</li>
<li>काली मिर्च 6-8 दाने</li>
<li>इलायची 4-5</li>
<li>गुलाब की पंखुड़ियां 2 चम्मच</li>
<li>दूध 1 लीटर</li>
<li>चीनी स्वादानुसार</li>
<li>केसर</li>
</ul>
<h4>बनाने की विधि</h4>
<p>सबसे पहले बादाम, काजू, पिस्ता, खसखस और सौंफ को 4-5 घंटे या रातभर पानी में भिगो दें। इससे ये सभी चीजें नरम हो जाती हैं और आसानी से पीसी जा सकती हैं। जब ये अच्छी तरह भीग जाएं, तो बादाम का छिलका उतार लें। अब भीगी हुई सारी सामग्री को मिक्सर में डालें और इसमें थोड़ी-सी काली मिर्च, इलायची और गुलाब की पंखुड़ियां भी मिलाएं। फिर थोड़ा पानी डालकर इसका बारीक पेस्ट तैयार कर लें। यह पेस्ट ठंडाई का बेस होता है, जिसमें सारे फ्लेवर मौजूद होते हैं। इसके बाद एक साफ कपड़े या छलनी की मदद से इस पेस्ट को छान लें, ताकि इसका स्मूद और महीन अर्क निकल जाए। अब एक बर्तन में ठंडा दूध लें और उसमें यह तैयार किया हुआ अर्क मिला दें। फिर स्वादानुसार चीनी डालें और अच्छे से मिला लें। अगर आप चाहें तो इसमें केसर डालकर कुछ देर के लिए रख सकते हैं, जिससे इसका रंग और सुगंध और भी आकर्षक हो जाएगी। अंत में ठंडाई को कुछ समय के लिए फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। ठंडी-ठंडी ठंडाई को गिलास में डालकर ऊपर से कटे हुए ड्राई फ्रूट्स से सजाएं और सर्व करें। घर की बनी ठंडाई न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि यह शरीर को ठंडक पहुंचाने, पाचन सुधारने और ऊर्जा देने में भी मदद करती है। गर्मियों में इसे पीने से लू से बचाव होता है और शरीर तरोताजा महसूस करता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/summer-drinks-recipes/article-83590</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 15:14:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Free Heart Check-up Camp: सरसा में नि:शुल्क हृदय रोग चेकअप व निवारण कैंप 18 को</title>
                                    <description><![CDATA[Free Heart Check-up Camp: सरसा। समाज सेवा और जनकल्याण के उद्देश्य से शाह सतनाम जी रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन, सरसा द्वारा एक विशेष नि:शुल्क हृदय रोग चेकअप व निवारण कैंप का आयोजन किया जा रहा है। फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह स्वास्थ्य शिविर 18 अप्रैल शनिवार को लगाया जाएगा। कैंप का समय सुबह 9:00 बजे से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/free-heart-disease-check-up-and-prevention-camp-in-sirsa-on-the-18th/article-83509"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/corona-infected-will-get-better-treatment-at-shah-satnam-ji-speciality-hospital.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Free Heart Check-up Camp: सरसा। समाज सेवा और जनकल्याण के उद्देश्य से शाह सतनाम जी रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन, सरसा द्वारा एक विशेष नि:शुल्क हृदय रोग चेकअप व निवारण कैंप का आयोजन किया जा रहा है। फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह स्वास्थ्य शिविर 18 अप्रैल शनिवार को लगाया जाएगा। कैंप का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस विशेष कैंप का आयोजन शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में किया जाएगा, जहां अनुभवी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपस्थित रहकर मरीजों की जांच करेगी। इस कैंप में आने वाले लोगों के हृदय संबंधी विभिन्न टैस्ट किए जाएंगे। शिविर में मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार उचित परामर्श और उपचार की सलाह भी दी जाएगी। Sirsa News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:16:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Blood Pressure: ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए लाभकारी है शीतकारी प्राणायाम</title>
                                    <description><![CDATA[Sheetkari Pranayama: आधुनिक जीवनशैली ने जहां सुविधाएं बढ़ गई हैं, वहीं स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर भी पड़ा है। अनियमित दिनचर्या, तनाव और असंतुलित खानपान के कारण हाई ब्लड प्रेशर आज एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। विश्व स्तर पर करोड़ों लोग इससे जूझ रहे हैं, जबकि भारत में यह हृदय रोग और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sheetkari-pranayama-is-beneficial-for-blood-pressure-patients/article-83415"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/sheetkari-pranayama.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sheetkari Pranayama: आधुनिक जीवनशैली ने जहां सुविधाएं बढ़ गई हैं, वहीं स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर भी पड़ा है। अनियमित दिनचर्या, तनाव और असंतुलित खानपान के कारण हाई ब्लड प्रेशर आज एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। विश्व स्तर पर करोड़ों लोग इससे जूझ रहे हैं, जबकि भारत में यह हृदय रोग और स्ट्रोक का प्रमुख कारण बनता जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दवाओं के साथ यदि जीवनशैली में सुधार और योग को अपनाया जाए, तो इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। ऐसे में शीतकारी प्राणायाम एक सरल और प्रभावी उपाय के रूप में उभर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">शीतकारी प्राणायाम योग की एक ऐसी श्वास तकनीक है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है। खासकर गर्मियों में इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया में मुंह से श्वास ली जाती है, जिससे शरीर के तापमान में संतुलन आता है। यह अभ्यास तनाव को कम करने में सहायक होता है और शरीर के आॅटोनॉमिक नर्वस सिस्टम को संतुलित करता है। परिणामस्वरूप, पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होकर शरीर को शांति और स्थिरता की अवस्था में लाता है, जिससे रक्तचाप पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिल से लेकर दिमाग तक असर | Sheetkari Pranayama</h3>
<p style="text-align:justify;">शीतकारी प्राणायाम केवल रक्तचाप को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई व्यापक स्वास्थ्य लाभ हैं। यह हृदय की धड़कन को स्थिर रखता है और तनाव व चिंता को कम करता है, जिससे मानसिक रूप से दिमाग को शांति मिलती है। शरीर में ठंडक पैदा कर यह पित्त दोष को संतुलित करता है और गर्मी से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है। इसके नियमित अभ्यास से श्वास दर नियंत्रित होती है, आॅक्सीजन का बेहतर उपयोग होता है और फेफड़ों की क्षमता में सुधार आता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक सुरक्षित अभ्यास है, जिसे दवाओं के साथ पूरक चिकित्सा के रूप में भी अपनाया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सही अभ्यास और सावधानियां</h3>
<p style="text-align:justify;">शीतकारी प्राणायाम के लिए शांत वातावरण में ध्यान मुद्रा में बैठना आवश्यक है। पीठ सीधी रखें, आंखें बंद करें और हाथों को घुटनों पर टिकाएं। दांतों को हल्का सा मिलाकर उनके बीच से धीरे-धीरे सांस अंदर लें और फिर मुंह बंद कर नाक से सांस बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को रोजाना लगभग 10 मिनट तक दोहराया जा सकता है। हालांकि, कुछ सावधानियां जरूरी हैं—हाई ब्लड प्रेशर के मरीज डॉक्टर की सलाह से ही इसे शुरू करें। सर्दी, साइनस या सांस संबंधी समस्याओं में सतर्क रहें, और गर्भवती महिलाओं या गंभीर रोगियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन लेना चाहिए। नियमित अभ्यास से यह प्राणायाम न केवल रक्तचाप को संतुलित करता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="भगवंत मान सरकार सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव के लिए पी.आर.टी.सी. और पनबस में 1,265 बसें करेगी शामिल: हरपाल सिंह चीमा" href="https://www.sachkahoon.com/kilometer-scheme-to-boost-employment-and-development-large-scale-expansion-of-bus-services-in-punjab-harpal-singh-cheema/">भगवंत मान सरकार सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव के लिए पी.आर.टी.सी. और पनबस में 1,265 बसें करेगी शामिल: हरपाल सिंह चीमा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/sheetkari-pranayama-is-beneficial-for-blood-pressure-patients/article-83415</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/sheetkari-pranayama-is-beneficial-for-blood-pressure-patients/article-83415</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 15:17:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health News: 30 की उम्र के बाद इन बीमारियों को पहचानना है अनिवार्य, शरीर देता है समय रहते संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/identifying-these-diseases-after-age-30-is-essential-the-body-gives-timely-warning-signs/article-83275"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/health-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि यही वह उम्र होती है, जब शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों की ओर बढ़ने लगता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो छोटी-छोटी समस्याएं आगे चलकर बड़ी और गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">हाई ब्लड प्रेशर: 30 की उम्र के बाद तनाव, नींद की कमी और खराब खानपान के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। अगर इसे लंबे समय तक कंट्रोल न किया जाए, तो यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। नियमित ब्लड प्रेशर चेक करना और नमक की मात्रा कम रखना इससे बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डायबिटीज: 30 के बाद शरीर का मेटाबोलिज्म धीमा होने लगता है, जिससे शुगर लेवल बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। अगर व्यक्ति ज्यादा मीठा, जंक फूड या प्रोसेस्ड खाना खाता है और शारीरिक गतिविधि कम करता है तो यह खतरा और बढ़ जाता है। डायबिटीज का असर आंखों, किडनी और नर्व्स पर भी पड़ सकता है। इसलिए नियमित ब्लड शुगर टेस्ट और संतुलित डाइट बहुत जरूरी है। Health News</p>
<h3>लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">हाई कोलेस्ट्रॉल: ज्यादा तला-भुना और फैटी फूड, शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इससे खून की नलियों में रुकावट बनने लगती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचते रहना और हेल्दी फैट्स जैसे नट्स, बीज और हरी सब्जियों का सेवन करना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्टियोपोरोसिस: उम्र बढ़ने के साथ-साथ बोन डेंसिटी कम होने लगती है, खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। रोजाना धूप में समय बिताना, दूध और कैल्शियम युक्त आहार लेना इस समस्या से बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फैटी लिवर: लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है। जो न लोग ज्यादा तैलीय खाना खाते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है। उनमें किडनी से जुड़ी समस्याएं भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं, जिनका शुरुआती चरण में पता नहीं चलता। इसलिए डॉक्टर समय-समय पर लिवर फंक्शन और किडनी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि किसी भी समस्या को शुरुआत में ही रोका जा सके। Health News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:33:40 +0530</pubDate>
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                <title>Hair Care: बढ़ती गर्मी से बेजान हो सकते है आपके बाल अपनाएं एक्सपर्ट के ये टिप्स, चमक रहेगी बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[Hair Care:  अनु सैनी। फरवरी के बीतने के साथ मौसम में स्पष्ट बदलाव महसूस होने लगता है। ठंड धीरे-धीरे कम हो जाती है और गर्मी का असर बढ़ने लगता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और उड़ती धूल न सिर्फ त्वचा बल्कि बालों के लिए भी बड़ी समस्या बन जाती हैं। इस मौसम में बालों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/the-rising-heat-can-make-your-hair-dull-follow-these-expert-tips-to-keep-your-hair-shiny/article-83265"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/hair-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Hair Care:  अनु सैनी।</strong> फरवरी के बीतने के साथ मौसम में स्पष्ट बदलाव महसूस होने लगता है। ठंड धीरे-धीरे कम हो जाती है और गर्मी का असर बढ़ने लगता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और उड़ती धूल न सिर्फ त्वचा बल्कि बालों के लिए भी बड़ी समस्या बन जाती हैं। इस मौसम में बालों का रूखा होना, चमक कम होना, डैंड्रफ और हेयर फॉल जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। इसलिए समय रहते सही हेयर केयर रूटीन अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि बालों की सेहत और खूबसूरती दोनों बरकरार रह सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्यूटी एक्सपर्ट सविता मिश्रा के अनुसार, गर्मी की शुरुआत होते ही बालों की अतिरिक्त देखभाल जरूरी हो जाती है। यदि कुछ आसान आदतों को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर लिया जाए तो बालों को नुकसान से बचाया जा सकता है और उनकी प्राकृतिक चमक लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">गर्मी और धूल का बालों पर असर | <strong>Hair Care</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, स्कैल्प में पसीना ज्यादा बनने लगता है। पसीना, धूल और प्रदूषण मिलकर बालों की जड़ों को कमजोर कर देते हैं। इसके कारण बाल चिपचिपे, बेजान और टूटने वाले हो जाते हैं। तेज धूप बालों की नमी को खत्म कर देती है, जिससे बाल रूखे और दोमुंहे होने लगते हैं। कई लोगों को इस मौसम में खुजली और डैंड्रफ की समस्या भी होने लगती है। इसके अलावा लगातार धूप में रहने से बालों का प्राकृतिक रंग भी हल्का पड़ सकता है। यही वजह है कि बदलते मौसम में बालों की सुरक्षा और पोषण दोनों पर ध्यान देना जरूरी होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कंडीशनर का इस्तेमाल क्यों है जरूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में बालों की नमी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसलिए बाल धोने के बाद कंडीशनर का उपयोग करना बेहद जरूरी है। कंडीशनर बालों की बाहरी परत को स्मूद बनाता है और उन्हें रूखापन से बचाता है। इससे बाल मुलायम रहते हैं और उनमें उलझने की समस्या भी कम हो जाती है। नियमित रूप से कंडीशनर लगाने से बालों पर धूल और प्रदूषण का असर कम होता है तथा बालों में प्राकृतिक चमक बनी रहती है। खासतौर पर लंबे और ड्राई बालों वाले लोगों के लिए कंडीशनर एक जरूरी स्टेप माना जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">गीले बालों में बाहर निकलने से बचें</h4>
<p style="text-align:justify;">कई लोग बाल धोने के तुरंत बाद बाहर निकल जाते हैं, जो बालों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। गीले बाल ज्यादा संवेदनशील होते हैं और धूल को जल्दी आकर्षित करते हैं। इससे स्कैल्प में गंदगी जमा हो जाती है और बाल कमजोर होने लगते हैं। इसलिए कोशिश करें कि घर से बाहर निकलने से पहले बाल पूरी तरह सूख जाएं। यदि समय कम हो तो हेयर ड्रायर का हल्का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन अत्यधिक गर्म हवा से बचना चाहिए। प्राकृतिक तरीके से बाल सुखाना सबसे बेहतर माना जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">धूप से बचाव के लिए बालों को करें कवर</h4>
<p style="text-align:justify;">तेज धूप बालों की नमी को खत्म कर उन्हें बेजान बना देती है। लंबे समय तक धूप में रहने से बालों का रंग भी हल्का पड़ सकता है। इसलिए जब भी बाहर निकलें, सिर को गमछा, स्कार्फ, टोपी या छाते से ढकना एक अच्छी आदत हो सकती है। यह न केवल बालों को धूप से बचाता है बल्कि स्कैल्प को भी गर्मी से राहत देता है। विशेष रूप से दोपहर के समय धूप में निकलते समय सिर को कवर करना बेहद जरूरी माना जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ज्यादा कंघी करने से बचें</h4>
<p style="text-align:justify;">गर्मी में बाल पहले से ही कमजोर और संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसे में बार-बार कंघी करने से बाल टूटने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर धूप से आने के तुरंत बाद कंघी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उस समय बाल गर्म होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। यदि बाल उलझे हों तो चौड़े दांतों वाली कंघी का उपयोग करें और धीरे-धीरे सुलझाएं। इससे बालों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और टूटने की समस्या कम होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हाइड्रेशन और पोषण का रखें ध्यान</h4>
<p style="text-align:justify;">बालों की सेहत केवल बाहरी देखभाल पर ही निर्भर नहीं करती बल्कि सही खान-पान भी उतना ही जरूरी है। गर्मी में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है, जिसका असर बालों पर भी दिखाई देता है। पर्याप्त पानी पीने से स्कैल्प हाइड्रेट रहता है और बालों की जड़ें मजबूत बनी रहती हैं। इसके अलावा फल, हरी सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन युक्त आहार बालों के लिए फायदेमंद होते हैं। विटामिन और मिनरल से भरपूर भोजन बालों की ग्रोथ को बेहतर बनाता है और हेयर फॉल को कम करने में मदद करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नियमित तेल मालिश के फायदे</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मी में भी हल्की तेल मालिश बालों के लिए फायदेमंद होती है। नारियल तेल, बादाम तेल या आंवला तेल से सप्ताह में एक-दो बार हल्की मसाज करने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और रूखापन कम होता है। ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा तेल लगाकर धूप में न निकलें, क्योंकि इससे धूल और गंदगी चिपक सकती है। बेहतर होगा कि रात में तेल लगाएं और सुबह हल्के शैम्पू से बाल धो लें।</p>
<h5 style="text-align:justify;">हीट स्टाइलिंग से रखें दूरी</h5>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में बाल पहले ही गर्मी और प्रदूषण से प्रभावित रहते हैं। ऐसे में स्ट्रेटनर, कर्लर और ब्लो ड्रायर का ज्यादा इस्तेमाल बालों को और कमजोर बना सकता है। कोशिश करें कि बालों को प्राकृतिक रूप में ही रहने दें और हीट स्टाइलिंग उपकरणों का उपयोग सीमित रखें। यदि स्टाइलिंग जरूरी हो तो हीट प्रोटेक्टेंट का इस्तेमाल करना न भूलें, ताकि बालों को अतिरिक्त नुकसान से बचाया जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;">सही शैम्पू का चुनाव भी है जरूरी</h5>
<p style="text-align:justify;">गर्मी में हल्के और माइल्ड शैम्पू का उपयोग करना बेहतर होता है। बहुत ज्यादा केमिकल वाले शैम्पू बालों की नमी छीन सकते हैं। सप्ताह में 2-3 बार बाल धोना पर्याप्त होता है, ताकि स्कैल्प साफ रहे और अतिरिक्त ऑयल जमा न हो। पसीना ज्यादा आने पर पानी से बाल धोना भी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन बार-बार शैम्पू करने से बचना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बदलते मौसम में बालों की देखभाल थोड़ी अतिरिक्त मेहनत मांगती है, लेकिन सही आदतें अपनाकर बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। कंडीशनर का नियमित उपयोग, धूप से बचाव, गीले बालों में बाहर न निकलना, संतुलित आहार और हल्की तेल मालिश जैसे छोटे-छोटे उपाय बड़े फायदे दे सकते हैं। यदि इन आसान टिप्स को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए तो गर्मी और धूल का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है। बालों की सही देखभाल न केवल उनकी खूबसूरती बढ़ाती है बल्कि आत्मविश्वास को भी मजबूत बनाती है।</p>
<p>नोट: आर्टिकल में बताई गई विधि, तरीके के और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए हंै, इन पर अमल करने से पहले आप डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।</p>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:20:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>World Health Day Special: स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाए रखने के लिए करें ये दो जरुरी काम</title>
                                    <description><![CDATA[मिलेट्स खाएं और प्रतिदिन करें सैर World Health Day Special: गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। विश्व स्वास्थ्य दिवस…। यह कहने, मानने या मनाने भर से ही कोई व्यक्ति सेहतमंद नहीं हो जाता। इसके लिए अपने जीवन में कुछ नियमों का पालन करना होगा। कुछ खास चीजों को खाने की आदत डालनी होगी। कुछ चीजों से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/perform-these-two-essential-tasks-to-maintain-good-health/article-83182"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/world-health-day-gurugram.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">मिलेट्स खाएं और प्रतिदिन करें सैर</h3>
<p style="text-align:justify;">World Health Day Special: गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। विश्व स्वास्थ्य दिवस…। यह कहने, मानने या मनाने भर से ही कोई व्यक्ति सेहतमंद नहीं हो जाता। इसके लिए अपने जीवन में कुछ नियमों का पालन करना होगा। कुछ खास चीजों को खाने की आदत डालनी होगी। कुछ चीजों से परहेज करना होगा और कुछ का व्रत करना होगा। अच्छी सेहत व स्वास्थ्य के लिए नियमित सैर करना जरूरी है। साथ ही मिलेट्स खाएं और मोबाइल फोन का व्रत करें। ऐसा करके आज के तनाव भरे जीवन में खुद को स्वस्थ बना सकते हंै। तभी विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्य भी पूरा होगा। भारत का संविधान जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसमें बुनियादी मानव अधिकार के रूप में स्वास्थ्य का अधिकार भी है। World Health Day</p>
<p style="text-align:justify;">ऐेसे में हमें ना केवल इस अधिकार की ही सुरक्षा चाहिए, बल्कि सेहतमंद रहकर हमें खुद को भी सुरक्षित रखना चाहिए। खुद को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहला नियम यही है कि व्यक्ति रात को समय से सोये और सुबह जल्दी उठकर सैर और व्यायाम को अपनी दिनचर्या बनाए। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए रोजाना 20 से 30 मिनट की सैर कर लेना काफी है। इससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) व कोलेस्ट्रोल नियंत्रित रहेगा। ऐसा करके हम ह्दय रोगों का खतरा काफी हद तक कम कर सकते हैं। सुबह की ताजी हवा और व्यायाम से एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होते हैं, जिनसे तनाव व चिंता कम होती है। पूरे दिन व्यक्ति ऊर्जावान रहता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खान-पान में दूध-दही व फास्टफूड के लाभ-हानि | World Health Day</h3>
<p style="text-align:justify;">आज के भागदौड़ भरे जीवन में हम अपने पौराणिक, पारंपरिक खान-पान से दूरी बना चुके हैं। यह दूरी हमारी सेहत के लिए हानिकारक होती जा रही है। सुबह से लेकर रात को सोते-सोते भी लोगों के खाने के मैन्यु में फास्टफूड होता है। खाने की यही आदत हमारे जीवन को जल्द समाप्ति की ओर ले जा रही है। असमय मौतों का कारण भी फास्टफूड है। अनेक बीमारियों व्यक्ति को फास्टफूड के कारण लग रही हैं। बड़े ही नहीं बच्चे भी फास्टफूड के कारण बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इसलिए खान-पान की इस आदत में बदलाव जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बात करें दूध की तो इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन-डी भरपूर मात्रा में होता है। यह हड्डियों एवं दांतों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही दूध मांसपेशियों के विकास, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने, अच्छी नींद और त्वचा बेहतर बनाता है। अगर हम रोजाना एक-दो गिलास गुनगुना दूध पीते हैं तो यह हमारी सेहत के लिए अमृत का काम करता है। दही की बात करें तो यह सच में एक स्वादिष्ट एवं सुपरफूड है। सुबह और दोपहर तक ही दही का सेवन करना लाभकारी होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सेहत सुधार सकता है ऑर्गेनिक, मिलेट्स का सेवन | World Health Day</h3>
<p style="text-align:justify;">आर्गेनिक और मिलेट्स (मोटा अनाज जैसे रागी, बाजरा, ज्वार) को भी व्यक्ति के खान-पान में उचित स्थान मिलना चाहिए। इसका सेवन पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट के कारण पाचन सुधारने, वजन घटाने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और दिल को स्वस्थ रखने में बेहद फायदेमंद है। ये उत्पाद ग्लूटेन मुक्त होते हैं। साथ ही रसायनों से मुक्त होने के कारण कैंसर जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं। मिलेट्स में उच्च फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है। पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और पेट के विकारों से बचाता है। डायबिटीज प्रबंधन की बात करें तो  इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। यह टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। कम कैलोरी और उच्च फाइबर के कारण ये लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गुरुग्राम के पार्कों में घूमकर, कसरत से सेहतमंद बनते हैं लोग</h3>
<p style="text-align:justify;">महानगर बन चुके गुरुग्राम में वैसे तो गगनचुंबी इमारतों के रूप में कंक्रीट के जंगल खड़े हो चुके हैं, इसके बावजूद यहां पर समाजसेवी संस्थाओं, आरडब्ल्यूए के स्तर पर हरियाली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सेक्टर्स व कॉलोनियों में पार्कों का रखरखाव करके लोगों की सुबह-शाम को बेहतर बनाया जाता है। गुरुग्राम में बड़े पार्कों में सेक्टर-29 लेजरवैली पार्क, सेक्टर-14 का सुभाष पार्क, सेक्टर-23 का ताऊ देवीलाल पार्क, सेक्टर-7 का पार्क, सेक्टर-10 का पार्क समेत अनेक ऐसे पार्क हैं, जहां लोग भ्रमण, कसरत करते हुए अपना समय व्यतीत करते हैं। इन पार्कों की स्थिति भी अच्छी है। गुरुग्राम का सबसे भव्य और विशाल पार्क सेक्टर-29 का पार्क है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मोबाइल की लत नुकसानदायक: अभय जैन | World Health Day</h3>
<p style="text-align:justify;">मानव आवाज संस्था के संयोजक अभय जैन एडवोकेट कहते हैं कि मोबाइल तब तक सही है, जब तक उसका सदुपयोग किया जाए। दुरुपयोग जब होता है तो बड़ी समस्या खड़ी होती है। उन्होंने कहा कि कोविड के समय से मोबाइल शैक्षणिक गतिविधियों में पहले से अधिक इस्तेमाल होने लगा है। मोबाइल को सूचनाओं का आदान-प्रदान और ज्ञान लेने तक उपयोग किया जाना सही है। इसके सभी पक्षधर हैं। लेकिन आज के समय में मोबाइल युवाओं और बच्चों के लिए लत बन गया है। जिस तरह से लोग अन्य नशे करते हैं, वैसे ही मोबाइल हो गया है। मानसिक अवसाद के साथ यह दुर्घटनाओं का भी कारण बन रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इंटरनेट मीडिया से अपराध की राह पकड़ रहे युवा: शील मधुर</h3>
<p style="text-align:justify;">पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शील मधुर ने कहा कि मोबाइल की लत एक गंभीर समस्या बन चुकी है। यह अपराध, वित्तीय हानि और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी है। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में साइबर बुलिंग, आत्महत्या के मामले और मानसिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इंटरनेट मीडिया पर बहुत सी ऐसी सामग्री परोसी जाती है, जिसे देखकर युवा भटक भी सकते हैं। अक्सर यह देखने में भी आता है कि अपराध करने पर पकड़े जाने वाले युवा इंटरनेट मीडिया पर वीडियो देखकर उस अपराध को करना स्वीकार करते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने बच्चों पर मोबाइल के उपयोग के समय नजर भी रखें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नवजात बच्चे भी मोबाइल के आदी, यह सही नहीं: डॉ. विजय</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षाविद् डॉ. विजय सिंह चौहान का कहना है कि आज के समय में नवजात बच्चों को भी मोबाइल की लत लगाई जा रही है, जो उनके जीवन के लिए नुकसानदायक है। छोटे बच्चों द्वारा मोबाइल चलाने को माता-पिता अपनी शान समझते हैं। आज की युवा पीढ़ी मोबाइल के चंगुल में फंसी हुई है। शैक्षणिक गतिविधियों के लिए तो मोबाइल ठीक है, लेकिन और भी बहुत सी ऐसी चीजें आज इंटरनेट के माध्यम से परोसी जा रही हैं, जो हमारे सभ्य समाज के लिए सही नहीं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मोबाइल की लत ना लगाएं, इसका सदुपयोग करें: डॉ. बजाज</h3>
<p style="text-align:justify;">बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हनीष बजाज कहते हैं कि बच्चे हो या बड़े, स्क्रीन टाइम जितना अधिक होगा, समस्याएं उतनी अधिक बढ़ेंगी। मोबाइल के उपयोग के समय स्क्रीन ब्रेक होना चाहिए। हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। यानी 20-20-20 का नियम अपनाएं। माता-पिता को बच्चों के साथ बिना स्क्रीन के समय बिताना चाहिए, इससे उनका ग्रोथ अच्छी होती है। परिवार में संबंध भी अच्छे रहते हैं। World Health Day</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 12:06:29 +0530</pubDate>
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                <title>Benefits Of Sleep: 7-8 घंटे की नींद क्यों है जरूरी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय और सेहत पर इसका असर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Benefits Of Sleep: 6-7 घंटे नींद लेना बहुत जरूरी है। नींद की कमी के कारण हमारे शरीर में कर्इं प्रकार की बीमारियां आ जाती है। आइये जानते हैं नींद कितनी जरूरी है। 1. नींद क्यों जरूरी है: नींद शरीर और दिमाग को रीसेट और रिफ्रेश करने का काम करती है। दिनभर की जानकारी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/why-sleep-is-important-experts-opinion/article-82993"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/benefits-of-sleep.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Benefits Of Sleep: 6-7 घंटे नींद लेना बहुत जरूरी है। नींद की कमी के कारण हमारे शरीर में कर्इं प्रकार की बीमारियां आ जाती है। आइये जानते हैं नींद कितनी जरूरी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">1. नींद क्यों जरूरी है:</h3>
<p style="text-align:justify;">नींद शरीर और दिमाग को रीसेट और रिफ्रेश करने का काम करती है।<br />
दिनभर की जानकारी और तनाव को दिमाग “साफ” करता है।<br />
याददाश्त, सीखने की क्षमता और इमोशन्स को नियंत्रित करती है।<br />
हार्मोन बैलेंस (भूख, मेटाबॉलिज्म, तनाव) को बनाए रखती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2. नींद की कमी के नुकसान | Benefits Of Sleep</h3>
<p style="text-align:justify;">थकान, ध्यान न लगना, चिड़चिड़ापन<br />
सोचने की गति धीमी होना<br />
मूड स्विंग्स और सिरदर्द<br />
शरीर का हार्मोन और स्ट्रेस बैलेंस बिगड़ना<br />
लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, इम्यून सिस्टम कमजोर होना और ज्यादा तनाव जैसी समस्याएं</p>
<h3 style="text-align:justify;">3. एक्सपर्ट्स की सलाह:</h3>
<p style="text-align:justify;">Dr. Prashant Makhija: नींद की कमी से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं।<br />
Dr. Dipesh Pimpale: 7–8 घंटे की नींद जरूरी है, यह शरीर और दिमाग को संतुलित रखती है।<br />
Dr. Aniruddha Vasant More: नींद से दिमाग यादों को प्रोसेस करता है और ऊर्जा स्टोर करता है। रोजाना एक ही समय पर सोना अच्छा रूटीन बनाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. कम नींद का ट्रेंड सेहत के लिए हानिकारक | Benefits Of Sleep</h3>
<p style="text-align:justify;">“हसल कल्चर” और कम नींद का ट्रेंड सेहत के लिए हानिकारक है।<br />
अपनी नींद से समझौता करना गलत और खतरनाक है।<br />
नियमित, पर्याप्त नींद लेना शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 11:40:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Benefits of Water: खाली पेट पानी पीने से शरीर को मिलते हैं ये अनमोल लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[Benefits of Water: अनु सैनी। सुबह उठते ही बिना कुल्ला किए या कुछ खाए-पीए एक गिलास पानी पीने की आदत को आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में बहुत लाभकारी माना गया है। इसे अक्सर “बासी मुंह पानी पीना” कहा जाता है। रात भर सोने के बाद हमारा शरीर 6–8 घंटे तक पानी नहीं लेता, इसलिए सुबह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/drinking-water-on-an-empty-stomach-offers-these-invaluable-benefits-to-the-body/article-82433"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/benefits-of-water.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Benefits of Water: अनु सैनी।</strong> सुबह उठते ही बिना कुल्ला किए या कुछ खाए-पीए एक गिलास पानी पीने की आदत को आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में बहुत लाभकारी माना गया है। इसे अक्सर “बासी मुंह पानी पीना” कहा जाता है। रात भर सोने के बाद हमारा शरीर 6–8 घंटे तक पानी नहीं लेता, इसलिए सुबह शरीर हल्की डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति में होता है। ऐसे में उठते ही पानी पीना शरीर की कई प्रक्रियाओं को सक्रिय कर देता है। यह एक सरल, सस्ती और प्रभावी आदत है जो लंबे समय में सेहत पर सकारात्मक असर डाल सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद | Benefits of Water</h4>
<p style="text-align:justify;">रात भर सांस लेने, पसीना आने और शरीर की आंतरिक प्रक्रियाओं के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। सुबह उठते ही पानी पीने से यह कमी तुरंत पूरी होती है। शरीर के अंग—जैसे दिमाग, हृदय, किडनी और मांसपेशियां—सही ढंग से काम करने लगते हैं। पर्याप्त पानी शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के संचार को बेहतर बनाता है। इससे दिनभर ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम महसूस होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दिमाग और एकाग्रता में सुधार</h4>
<p style="text-align:justify;">दिमाग का लगभग 70% हिस्सा पानी से बना होता है। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो सिरदर्द, चक्कर और ध्यान में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सुबह पानी पीने से दिमाग सक्रिय होता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। विद्यार्थियों और नौकरी करने वालों के लिए यह आदत विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है क्योंकि इससे एकाग्रता और कार्यक्षमता में सुधार होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पाचन तंत्र को मजबूत बनाना</h4>
<p style="text-align:justify;">सुबह बासी मुंह पानी पीना पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह आंतों को सक्रिय करता है और मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाता है। जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, उनके लिए यह आदत विशेष रूप से फायदेमंद है। पानी आंतों की सफाई में मदद करता है और पाचन रसों के स्राव को बढ़ाता है। इससे गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालना</h4>
<p style="text-align:justify;">रात के समय शरीर खुद को रिपेयर करता है और कई प्रकार के टॉक्सिन (विषैले तत्व) बनते हैं। सुबह पानी पीने से किडनी और लीवर को इन टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद मिलती है। अधिक पानी पीने से पेशाब के जरिए हानिकारक तत्व बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया शरीर को अंदर से साफ रखने में सहायक होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वजन नियंत्रित रखने में सहायक</h4>
<p style="text-align:justify;">यदि आप वजन कम करना चाहती हैं तो सुबह पानी पीने की आदत उपयोगी हो सकती है। पानी मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को तेज करता है जिससे शरीर कैलोरी अधिक प्रभावी ढंग से जलाता है। खाली पेट पानी पीने से भूख थोड़ी नियंत्रित रहती है और अनावश्यक ओवरईटिंग की संभावना कम होती है। कई लोग गुनगुना पानी या नींबू पानी का सेवन भी करते हैं, जिससे फैट बर्निंग प्रक्रिया को समर्थन मिलता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">त्वचा के लिए लाभकारी</h4>
<p style="text-align:justify;">सुबह पानी पीने से त्वचा पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। पर्याप्त पानी शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और त्वचा को प्राकृतिक नमी प्रदान करता है। इससे मुंहासे कम हो सकते हैं और त्वचा अधिक चमकदार व स्वस्थ दिखती है। डिहाइड्रेशन त्वचा को रूखा और बेजान बना देता है, इसलिए सुबह पानी पीना त्वचा की सुंदरता बनाए रखने में मददगार है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हृदय और किडनी के लिए लाभ</h4>
<p style="text-align:justify;">सुबह पानी पीने से रक्त गाढ़ा नहीं होता और रक्त प्रवाह बेहतर बना रहता है। इससे हृदय पर दबाव कम पड़ता है। पर्याप्त पानी किडनी को भी स्वस्थ रखता है और पथरी बनने की संभावना कम करता है। नियमित रूप से पानी पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन भी बना रहता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बासी मुंह पानी पीने का विशेष कारण</h4>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद में कहा गया है कि रात भर मुंह में जमा लार (सलाइवा) में कई उपयोगी एंजाइम होते हैं। जब हम सुबह बिना कुल्ला किए पानी पीते हैं तो ये एंजाइम पेट में पहुंचकर पाचन में सहायता करते हैं। हालांकि आधुनिक चिकित्सा में इस बात पर अलग-अलग मत हैं, फिर भी यह आदत नुकसानदायक नहीं मानी जाती, बशर्ते मुंह की स्वच्छता सही हो।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कैसे पिएं पानी?</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सुबह उठते ही 1–2 गिलास सामान्य या गुनगुना पानी पिएं।</li>
<li style="text-align:justify;">बहुत ठंडा पानी न पिएं, इससे पाचन पर असर पड़ सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">धीरे-धीरे घूंट-घूंट कर पिएं। इसके बाद 20–30 मिनट तक कुछ न खाएं।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;">किन बातों का रखें ध्यान</h5>
<p style="text-align:justify;">यदि आपको किडनी, हृदय या अन्य गंभीर बीमारी है तो डॉक्टर की सलाह से पानी की मात्रा तय करें। बहुत ज्यादा पानी एक साथ न पिएं, इससे असहजता हो सकती है। मुंह की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है। सुबह बासी मुंह पानी पीना एक सरल लेकिन प्रभावशाली स्वास्थ्य आदत है। यह शरीर को हाइड्रेट करता है, पाचन सुधारता है, टॉक्सिन बाहर निकालता है, त्वचा को निखारता है और वजन नियंत्रण में मदद करता है। हालांकि यह कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन नियमित रूप से अपनाने पर इसके सकारात्मक परिणाम जरूर मिल सकते हैं। यदि इसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद के साथ जोड़ा जाए तो यह समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 11:04:24 +0530</pubDate>
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