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                <title>संस्कृति एवं समाज - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>संस्कृति एवं समाज RSS Feed</description>
                
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                <title>Haridwar News: इन दो श्रवण कुमारों की कांवड़ यात्रा बनी चर्चा का विषय, समाज के लिए प्रेरणादायक मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[हरिद्वार से दो भाइयों ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर बागपत के लिए यात्रा शुरू की। उनकी सेवा-भावना और संस्कारों की इस अनूठी मिसाल की हर ओर सराहना हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/kanwar-yatra-of-these-two-shravan-kumars-became-a-topic/article-88823"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/shrvan-kumar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हरिद्वार। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच जहां कई लोग अपने परिवार और विशेष रूप से माता-पिता के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते, वहीं दो भाइयों ने अपनी सेवा-भावना से समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। हरिद्वार से बागपत की ओर निकली उनकी कांवड़ यात्रा इन दिनों श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। Haridwar News</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को संजीव कुमार और अनिल कुमार ने अपने माता-पिता को कांवड़ में सम्मानपूर्वक बैठाकर यात्रा का शुभारंभ किया। यह भावुक दृश्य देखकर लोगों को पौराणिक चरित्र श्रवण कुमार की याद ताजा हो गई, जिन्होंने अपने माता-पिता की सेवा को जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य माना था।</p>
<p style="text-align:justify;">यात्रा के दौरान दोनों भाइयों ने कहा कि उनके लिए माता-पिता की सेवा किसी भी पूजा-पाठ से बढ़कर है। उनका मानना है कि माता-पिता का स्नेह और आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है तथा उनकी खुशी में ही सच्ची सफलता और संतोष निहित है। रास्ते भर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने दोनों भाइयों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनकी इस अनूठी पहल की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">अनेक लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी प्रेरक घटनाएं समाज में बुजुर्गों के सम्मान और सेवा की भावना को मजबूत करती हैं। यात्रा के दौरान यह दृश्य देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती रही। कई श्रद्धालुओं ने दोनों भाइयों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं और उनके सेवा भाव की प्रशंसा की।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों भाइयों की यह पहल केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है कि माता-पिता की सेवा, सम्मान और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। ऐसे कार्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कारों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के महत्व का एहसास कराते हैं। Haridwar News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:58:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Paid Tribute: श्री जलालआणा साहिब की सचखंडवासी शरणप्रीत इन्सां को भावभीनी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[गांव श्री जलालआणा साहिब निवासी प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां की बेटी सचखंडवासी शरणप्रीत कौर इन्सां के नमित बीते दिवस एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र मौज-मस्त पुरा धाम में नामचर्चा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी गई। नामचर्चा में ब्लॉक श्री जलालआणा साहिब के अलावा ब्लॉक चोरमार, देसूजोधा, दारेवाला से बड़ी संख्या में साध संगत व सच्चे नम्र सेवादार तथा गणमान्य लोग मौजूद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/paid-tribute-shri-jalal-aana-sahibs-heartfelt-tribute-to-sachkhand/article-88254"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/sharanpreet-insan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ओढ़ां, (सच कहूँ/राजू)। गांव श्री जलालआणा साहिब निवासी प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां की बेटी सचखंडवासी शरणप्रीत कौर इन्सां के नमित बीते दिवस एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र मौज-मस्त पुरा धाम में नामचर्चा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी गई। नामचर्चा में ब्लॉक श्री जलालआणा साहिब के अलावा ब्लॉक चोरमार, देसूजोधा, दारेवाला से बड़ी संख्या में साध संगत व सच्चे नम्र सेवादार तथा गणमान्य लोग मौजूद रहे। 26 वर्षीय शरणप्रीत कौर इन्सां बीती 7 जुलाई को अचानक सचखंड बिराजी थी। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">नामचर्चा की शुरूआत प्रेमी ओमप्रकाश इन्सां कालांवाली ने विनती भजन के साथ कार्रवाई। तदोपरांत कविराजों ने नाम एवं चेतावनी प्रथाए भजनों के माध्यम से यह बताया कि मनुष्य जन्म बेशकीमती है। इंसान इस जन्म में प्रभु परमात्मा की भक्ति करके भवसागर से पार हो सकता है। सचखंडवासी को श्रद्धांजलि देते हुए प्रेमी ओम प्रकाश इन्सां ने कहा कि प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां का परिवार बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के समय से जुड़ा हुआ है। पूरा परिवार सेवा सुमिरन में अग्रणी रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा की शरणप्रीत कौर इन्सां के चले जाने से परिवार को जो अपूर्णीय क्षति हुई है उसकी कभी भी पूर्ति नहीं हो सकती, लेकिन जो जख्म देता है वो मरहम भी जरूर देता है। दुख की इस घड़ी में समस्त साध संगत उक्त परिवार के साथ खडी है। नामचर्चा के समापन अवसर पर पूज्य गुरु जी का सत्संग साध संगत ने श्रवण किया। वहीं समस्त साध संगत ने नाम सुमिरन व इलाही नारे के साथ सचखंडवासी को श्रद्धांजलि दी। Sirsa News</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 16:11:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Widow Remarriage Act: 16 जुलाई स्पेशल, जब विधवा पुनर्विवाह अधिनियम ने बदली समाज की सोच</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय समाज सुधार के इतिहास में 16 जुलाई का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1856 में इसी दिन हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ, जिसके बाद पहली बार हिंदू समाज, विशेषकर ऊंची जातियों की विधवाओं को दोबारा विवाह करने का कानूनी अधिकार मिला। यह कानून भारतीय समाज में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/widow-remarriage-act-16-july-special-when-widow-remarriage-act/article-88180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/16-july-special.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Widow Remarriage Act 16 July Special: भारतीय समाज सुधार के इतिहास में 16 जुलाई का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1856 में इसी दिन हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ, जिसके बाद पहली बार हिंदू समाज, विशेषकर ऊंची जातियों की विधवाओं को दोबारा विवाह करने का कानूनी अधिकार मिला। यह कानून भारतीय समाज में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ। उस समय समाज में ऊंची जातियों की विधवाओं के पुनर्विवाह पर कठोर सामाजिक और धार्मिक प्रतिबंध थे। कम उम्र में विधवा हो जाने वाली महिलाओं को जीवनभर सामाजिक उपेक्षा और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे दौर में महान समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने इस कुरीति के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। Widow Remarriage Act</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यासागर ने धर्मग्रंथों का अध्ययन कर यह साबित करने का प्रयास किया कि विधवा विवाह हिंदू धर्म के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने हजारों लोगों के हस्ताक्षर के साथ तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को ज्ञापन सौंपा और विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए। उनकी मुहिम के परिणामस्वरूप तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में 16 जुलाई 1856 को यह कानून पारित हुआ। ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने केवल विचारों तक ही अपनी मुहिम सीमित नहीं रखी, बल्कि समाज के सामने उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने पुत्र का विवाह एक विधवा से करवाकर यह संदेश दिया कि सामाजिक परिवर्तन केवल कानून से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पहल और साहस से भी संभव है। Widow Remarriage Act</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 12:58:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttarakhand News: उत्तराखंड में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता 'हरेला'!</title>
                                    <description><![CDATA[ उत्तराखंड अपनी समृद्ध लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और प्रकृति से गहरे जुड़ाव के लिए जाना जाता है। राज्य के पारंपरिक त्योहार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश भी देते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/uttarakhand-news-harela-giving-message-of-gratitude-towards-nature-in/article-87870"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/harela-festival.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Uttarakhand Festival: देहरादून। उत्तराखंड अपनी समृद्ध लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और प्रकृति से गहरे जुड़ाव के लिए जाना जाता है। राज्य के पारंपरिक त्योहार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश भी देते हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख लोक पर्व 'हरेला' हरियाली, खुशहाली और नए कृषि सत्र की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह राज्य के सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक त्योहारों में से एक है। इस वर्ष हरेला पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा। Uttarakhand News</p>
<p style="text-align:justify;">सावन महीने की शुरुआत में मनाया जाने वाला हरेला पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। कुमाऊं क्षेत्र में लोग इस त्योहार को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह पर्व पर्यावरण संरक्षण, जंगलों की रक्षा, जैव विविधता को बचाने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश भी देता है। नैनीताल के डीएसबी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. ललित तिवारी ने कहा कि हरेला वृक्षों, जंगलों और पर्यावरण के प्रति स्नेह और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देता है। उनके अनुसार, यह त्योहार लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन में रहने का महत्व सिखाता है और समुदायों तथा उनके प्राकृतिक परिवेश के बीच संबंधों को मजबूत करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरेला पर्व की तैयारियां सावन शुरू होने से करीब नौ-दस दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं। इस दौरान परिवार रिंगल (स्थानीय बांस) से बनी टोकरियों या मिट्टी के बर्तनों में हरेला के बीज बोते हैं। बीज बोने से पहले टोकरियों में तिमिल और मालू के पत्तों की परत बिछाई जाती है, फिर उसमें मिट्टी भरकर बीज डाले जाते हैं। इसके बाद टोकरी में पांच या सात तरह के अनाज के बीज बोए जाते हैं। इनमें आमतौर पर जौ, गेहूं, धान, मक्का, गहत, सरसों, उड़द और भट्ट (काला सोयाबीन) शामिल होते हैं। कुछ ही दिनों में इन बीजों से हरे-भरे अंकुर निकल आते हैं। ये अंकुर अच्छी फसल, खुशहाली और उत्तराखंड की समृद्ध प्राकृतिक और जैव विविधता के प्रतीक माने जाते हैं। Uttarakhand News</p>
<p style="text-align:justify;">सावन के पहले दिन, जब कोंपलें पूरी तरह से उग जाती हैं, तो हरेला की कटाई की जाती है। इसे सबसे पहले कुल देवता को कृतज्ञता और भक्ति के प्रतीक के रूप में अर्पित किया जाता है। इसके बाद, घर के बड़े-बुजुर्ग सभी परिवार के सदस्यों के लिए पारंपरिक हरेला अनुष्ठान करते हैं। कुमाऊं क्षेत्र में हरेला पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस अवसर पर परिवार के बुजुर्ग हरेला के हरे अंकुरों को पैरों से लेकर सिर और कानों तक हल्के से स्पर्श कराते हैं। इसके बाद वे इन अंकुरों को आशीर्वाद और शुभकामना के प्रतीक के रूप में कानों के पीछे लगा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अनुष्ठान के दौरान परिवार के बुजुर्ग पारंपरिक कुमाऊनी आशीर्वाद भी देते हैं। वे कामना करते हैं कि व्यक्ति लंबी उम्र पाए, हमेशा स्वस्थ और खुश रहे। उसकी जड़ें दुबक घास की तरह मजबूत हों, उसका जीवन पौल के पौधे की तरह फलता-फूलता रहे और उसमें सियार जैसी ताकत हो। साथ ही, वे आशीर्वाद देते हैं कि जब तक हिमालय पर बर्फ और गंगा में जल रहेगा, तब तक उसके जीवन में हरेला पर्व की खुशियां बनी रहें। यह आशीर्वाद लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाली, ज्ञान और समृद्धि की कामना का प्रतीक है। साथ ही, यह इस विश्वास को भी दर्शाता है कि जैसे हिमालय पर हमेशा बर्फ रहती है और गंगा निरंतर बहती है, वैसे ही हरेला पर्व की खुशियां भी पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के जीवन में बनी रहें। Uttarakhand News</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. तिवारी ने बताया कि हरेला पर्व का सीधा संबंध खेती और मिट्टी की उर्वरता से है। पारंपरिक मान्यता है कि हरेला के अंकुर जितने हरे-भरे और स्वस्थ होते हैं, आने वाले साल में फसल उतनी ही अच्छी होने की उम्मीद रहती है। पहाड़ी इलाकों के किसानों के लिए यह पर्व अच्छी पैदावार और जमीन की सेहत का शुभ संकेत माना जाता है। खेती से गहरे जुड़ाव के कारण हरेला केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है। यह सदियों पुरानी कृषि परंपराओं का प्रतीक है और हमें याद दिलाता है कि मानव जीवन स्वस्थ पर्यावरण, उपजाऊ मिट्टी और प्रकृति पर निर्भर है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरेला पर्व की सबसे खास परंपराओं में से एक छायादार और फलदार पेड़ लगाना है। पीढ़ियों से लोग इस अवसर पर पौधारोपण करते आ रहे हैं। यह परंपरा पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देने और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने का संदेश देती है। आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और जल संसाधनों की कमी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने हैं, तब हरेला पर्व का संदेश पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। यह त्योहार लोगों को याद दिलाता है कि जंगल, नदियां, मिट्टी और मानव जीवन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमाऊं की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हरेला पर्व लोगों को अपनी परंपराओं, खेती और प्रकृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व है। साथ ही, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य बनाने के सामूहिक संकल्प का भी प्रतीक है।  Uttarakhand News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Jammu Kashmir News: सोमनाथ के लिए पहली विशेष ट्रेन रवाना, श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर से पहली बार आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा-2026' का शुभारंभ सोमवार को उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। प्रदेश के परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने जम्मू रेलवे स्टेशन से विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/jammu-kashmir-news-first-special-train-leaves-for-somnath-atmosphere/article-87309"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/somnath-yatra-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Somnath Swabhiman Yatra: जम्मू। जम्मू-कश्मीर से पहली बार आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा-2026' का शुभारंभ सोमवार को उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। प्रदेश के परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने जम्मू रेलवे स्टेशन से विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। अनेक यात्रियों ने इसे अपने जीवन का एक यादगार अवसर बताते हुए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। Jammu Kashmir News</p>
<p style="text-align:justify;">यात्रा पर रवाना हुईं श्रद्धालु गीता देवी ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन्हें सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा। उन्होंने बताया कि परिवार के सहयोग से आवेदन किया था और अब उनकी वर्षों पुरानी धार्मिक अभिलाषा पूरी होने जा रही है। एक अन्य यात्री वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा इस प्रकार की यात्रा की व्यवस्था किए जाने से सामान्य परिवारों के लिए भी देश के प्रमुख तीर्थस्थलों तक पहुंचना संभव हो गया है। उन्होंने इसे श्रद्धालुओं के लिए सराहनीय पहल बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रद्धालु जनक सिंह ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा उनके लिए किसी सपने के साकार होने जैसी है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में अन्य ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी ऐसी यात्राओं का आयोजन किया जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। Jammu Kashmir News</p>
<p style="text-align:justify;">वरिष्ठ नागरिक नीलम रानी ने कहा कि भगवान की कृपा और सरकार की पहल के कारण उन्हें पहली बार सोमनाथ धाम के दर्शन का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक पर्यटन कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर सरकार के संस्कृति विभाग के अंतर्गत कार्यरत जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा-2026' का आयोजन किया है। छह दिनों तक चलने वाली इस यात्रा का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के श्रद्धालुओं को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सुलभ अवसर उपलब्ध कराना है। इस वर्ष यात्रा के लिए केंद्र शासित प्रदेश से 140 श्रद्धालुओं का चयन किया गया है। Jammu Kashmir News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:56:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व रक्तदाता दिवस विशेष: ‘ट्रयू ब्लड पंप’ देश-दुनिया में जगाए हुए हैं जिंदगी की मशाल </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर जब पूरी दुनिया स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान दे रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/worlds-unique-blood-center-pujya-bapu-magghar-singh-ji-international/article-86313"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/world-blood-donor-day.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ/राजेश बैनीवाल/सुनील वर्मा)। </strong>World Blood Donor Day:<strong> </strong>आज का समय ऐसा है कि अपने ही अपनों के काम नहीं आते वो भी जरूरत पड़ने पर साथ छोड़ ही जाते हैं। लेकिन एक ऐसी संस्था आज इस दुनिया में मानवता की सेवा के लिए हर वक्त मौजूद है वहां के लोग दूसरों को भी अपना मान लेते हैं। और जरूरत पड़ने पर किसी भी मदद से पिछे हटना नहीं जानते। हम बात कर रहे हंै हरियाणा प्रदेश के जिला सरसा स्थित ‘डेरा सच्चा सौदा’ की। यहां पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां वैसे तो मानवता की भलाई के लिए सैकड़ों कार्य चलाए हुए हैं। परन्तु इसी में  28वां काम है ‘रक्तदान’। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार रक्तदान के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। इसीलिए पूज्य गुरु जी ने इन सेवादारों को ‘ट्रयू ब्लड पंप’ नाम दिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह ब्लड पंप एक आह्वान पर बच्चे -जवान ही नहीं बुजुर्ग भी बिना कुछ सोचे समझे रक्तदान करने के लिए जिद्द पर अड़ जाते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों द्वारा अब तक लगभग 24 लाख यूनिट खून दान किया जा चुका है।<br />डेरा सच्चा सौदा का नाम रक्तदान के क्षेत्र में 3 बार गिनिज वर्ल्ड, एशिया लिम्का, इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। यहां पर स्वस्थ, एवं स्वैच्छिक रक्तदाता हर समय देश-विदेश में रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं।  डेरा सच्चा सौदा ने स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में तीन विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। </p>
<h4 style="text-align:justify;">यूं बनते गए स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में रिकॉर्ड </h4>
<ul>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (7 दिसंबर 2003): मात्र 8 घंटों में 15,432 यूनिट रक्तदान कर पहली बार इतिहास रचा गया।</li>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (10 अक्टूबर 2004): राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक शिविर के दौरान 17,921 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।</li>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (8 अगस्त 2010): एक ही दिन में 43,732 यूनिट रक्तदान का सबसे बड़ा रिकॉर्ड।</li>
<li>एशिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स (23 सितंबर 2011): एक ही दिन में 61,752 लोगों द्वारा नियमित रक्तदान करने का संकल्प लेने का रिकॉर्ड दर्ज है।</li>
<li>भारतीय सेना, पुलिस, पत्रकार व थैलेसिमिया ग्रस्त मरीजों के लिए पूज्य गुरुजी द्वारा प्राथमिकता से व नि:शुल्क रक्त उपलब्ध करवाने का आहवान किया गया हैै।</li>
<li>दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 12 अपै्रल 2014 को 75,771 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया वो पल भी किसी कीर्तिमान से कम नहीं है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h4 style="text-align:justify;">क्यों मनाया जाता हैं विश्व रक्तदाता दिवस</h4>
<p style="text-align:justify;">हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। रक्तदान के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। पहली बार साल 2004 में मनाया गया था, जिसकी शुरूआत वर्ल्ड हेल्थ आॅर्गेनाइजेशन ने की थी। दरअसल, समय पर रक्त उपलब्ध न होने पर कई मरीज दम तोड़ देते हैं, ऐसे में रक्तदान ऐसे लोगों के लिए जीवनदान बन सकता है, इसलिए लोगों को इसके महत्व से रूबरू कराने के लिए वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दुनिया का अनोखा ब्लड सेंटर: पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर</h4>
</div>
<p style="text-align:justify;">विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर जब पूरी दुनिया स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान दे रही है, तब सरसा स्थित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल का पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर मानवता सेवा की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जो डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से स्थापित हुआ है। पूज्य गुरुजी द्वारा शुरू की गई रक्तदान मुहिम का ही परिणाम है कि पिछले करीब दो दशकों से यह ब्लड सेंटर जरूरतमंद मरीजों को बिना रिप्लेसमेंट डोनर के रक्त उपलब्ध करवा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/corona-infected-will-get-better-treatment-at-shah-satnam-ji-speciality-hospital.gif" alt="Corona-infected-will-get-better-treatment-at-Shah-Satnam-Ji-Speciality-Hospital" width="600" height="294"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं अपनी तरह के इस अनूठे ब्लड सेंटर में रक्तदान करने के लिए दानियों को इंतजार करना पड़ता है और रक्तदान के बाद वे चिकित्सकों का धन्यवाद कर लौटते हैं। वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक इस ब्लड सेंटर में 2 लाख 3 हजार 753 यूनिट रक्तदान हो चुका है। यहां से 52 हजार 608 यूनिट होल ब्लड, 1 लाख 33 हजार 304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स, 1 लाख 41 हजार 994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, 57 हजार 728 यूनिट प्लेटलेट्स तथा 6 हजार 556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आमतौर पर अस्पतालों में मरीज के परिजनों को रक्त लेने से पहले किसी अन्य व्यक्ति से रक्तदान करवाना पड़ता है, लेकिन यहां व्यवस्था बिल्कुल अलग है। डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं, जिसके कारण ब्लड सेंटर में रक्त की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहती है। यही वजह है कि दुर्घटना, आॅपरेशन अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों और उनके परिजनों को रक्त के लिए भटकना नहीं पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी ब्लड सेंटर की सबसे बड़ी पूंजी उसके नियमित रक्तदाता होते हैं और यही पूंजी इस ब्लड सेंटर को अलग पहचान दिलाती है। पूज्य गुरुजी की प्रेरणा से लाखों अनुयायी वर्षों से रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानते हुए इस अभियान से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि हजारों जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिल सका है और अनगिनत जिंदगियां बचाई जा चुकी हैं। आज जब देशभर में रक्त की मांग लगातार बढ़ रही है, तब सरसा का यह ब्लड सेंटर समाज को यह संदेश दे रहा है कि यदि लोग निस्वार्थ भाव से रक्तदान के लिए आगे आएं तो किसी भी व्यक्ति को रक्त के अभाव में अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी। यही विश्व रक्तदाता दिवस का वास्तविक संदेश है रक्तदान महादान, जीवनदान के समान।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक 2,03,753 यूनिट रक्तदान</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">52,608 यूनिट होल ब्लड वितरित</li>
<li style="text-align:justify;">1,33,304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स उपलब्ध कराई</li>
<li style="text-align:justify;">1,41,994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा वितरित</li>
<li style="text-align:justify;">57,728 यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई</li>
<li style="text-align:justify;">6,556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) मरीजों को दी गई</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h4 style="text-align:justify;">रक्तदान का कोई विकल्प नहीं</h4>
<p style="text-align:justify;">रक्तदान का कोई विकल्प नहीं है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों का जीवन बचाने में सहायक हो सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक करना और नियमित रक्तदाता बनने के लिए प्रेरित करना है।<br /><strong>— डॉ. प्रदीप अरोड़ा, बीटीओ, पूज्य बापू </strong><br /><strong>मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर सरसा। </strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">प्लेटलेट्स डोनेशन की भी आधुनिक सुविधा</h4>
<p style="text-align:justify;">यह ब्लड सेंटर केवल रक्त संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अत्याधुनिक एफेरेसिस मशीन भी उपलब्ध है। इस मशीन के माध्यम से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) तैयार किए जाते हैं। मशीन रक्त से केवल प्लेटलेट्स अलग कर लेती है और शेष रक्त दाता के शरीर में वापस पहुंचा देती है। डेंगू, कैंसर, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए प्लेटलेट्स जीवनरक्षक साबित होते हैं। विशेषकर डेंगू के मौसम में प्लेटलेट्स की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में एफेरेसिस मशीन के माध्यम से तैयार किए जाने वाले सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मरीजों के लिए संजीवनी साबित होते हैं और उन्हें प्लेटलेट्स की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/world-blood-donor-day.jpg" alt="World Blood Donor Day" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/worlds-unique-blood-center-pujya-bapu-magghar-singh-ji-international/article-86313</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 09:28:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समाज में उत्थान के लिए पंच परिवर्तन जरूरी: वीरेंद्र पाल</title>
                                    <description><![CDATA[कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुल सचिव वीरेंद्र सिंह पाल ने कहा कि समाज को सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए पत्रकारों को अपनी कलम का प्रयोग करना चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/virendra-pal-panch-parivartan-is-necessary-for-upliftment-in-the/article-85336"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/karnal-news1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>करनाल (सच कहूँ न्यूज़)। </strong>Karnal News: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुल सचिव वीरेंद्र सिंह पाल ने कहा कि समाज को सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए पत्रकारों को अपनी कलम का प्रयोग करना चाहिए। समाज के उत्थान के लिए पंच परिवर्तन जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज समाज जिस दिशा में जा रहा है वह चिंतनीय है। हमे पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन,स्व का भाव, नागरिक कर्तव्य के साथ-साथ सामाजिक समरसता और पर्यावरण की रक्षा का भाव जगाना चाहिए। वह आज करनाल के सेवाश्री आश्रम में विश्व समाज केंद्र द्वारा आयोजित नारद जयंती समारोह में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाहक धनेश डिमरी ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक सुधीर कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथियों ने नारद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में आए हुए अतिथियों का अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए वीरेंद्र पाल ने कहा कि आज पत्रकारों को समाज और राष्ट्र के हित में सकारात्मक मुद्दों को अपनी लेखन का विषय बनाना चाहिए। आज जिस प्रकार देश और समाज बदलाव के दौर से गुजर रहा है उसके चलते परिवार और समाज खतरे में है। आज देश वैश्विक चुनौतियों से भी जूझ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए हमें नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी के साथ-साथ स्व का बोध जैसे विषय उठाने होंगे और इन्हें समाज के सामने लाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ऐसी होनी चाहिए जो समाज को दिशा दे, न कि दिशाहीन करे। उन्होंने देवर्षि नारद को धरातल से जुड़े निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकार बताया, जो घटनाओं को बिना संशोधन के समाज के समक्ष रखते थे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में समाज हित व राष्ट्रहित का ध्यान रखना चाहिए और पत्रकारिता में तथ्यों की पूर्ण जानकारी रख उजागर करना चाहिए। उन्होंने पत्रकारिता में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को भी भविष्य में  आने वाली चुनोतियो के बारे में बताया और शुभकामनाएं दी। </p>
<p style="text-align:justify;">कुलसचिव ने कहा कि देवर्षि नारद ने कभी यश-अपयश की चिंता नहीं की। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारों को भी निडर होकर समाजहित में तथ्यपरक पत्रकारिता करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अध्ययनशील और विवेकी पत्रकार बनने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने उद्बोधन में वीरेंद्र पाल ने कहा कि एक पत्रकार को निडर और निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन जब राष्ट्रहित का प्रश्न हो, तो राष्ट्र को सर्वोपरि मानते हुए पत्रकारिता करनी चाहिए।  संगोष्ठी में जिले भर से पत्रकार,छायाकार व पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/karnal-news1.jpg" alt="Karnal News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 14:43:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समाज सेवा शिविरों में विद्यार्थियों ने दिया पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश, पक्षियों के लिए बांधे परिंडे</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लॉक के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे पंद्रह दिवसीय समाज सेवा शिविरों के दूसरे दिन विद्यार्थियों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/in-social-service-camps-students-gave-the-message-of-environment/article-85038"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/tibbi-news5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>टिब्बी (सच कहूँ/अंकित वधवा )। </strong>Tibbi News: ब्लॉक के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे पंद्रह दिवसीय समाज सेवा शिविरों के दूसरे दिन विद्यार्थियों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया। इन शिविरों के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने समाज को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और स्वच्छता के आदर्शों को जीवन में उतारने का कड़ा और सकारात्मक संदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">विभिन्न विद्यालयों में आयोजित इन शिविरों में विद्यार्थियों ने श्रमदान किया और समाज सेवा की विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सीबीईओ ने किया निरीक्षण, दिए महत्वपूर्ण निर्देश</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) राजेश अरोड़ा ने ग्राम पंचायत पन्नीवाली और टिब्बी के महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सहित विभिन्न शिविरों का निरीक्षण किया। पन्नीवाली में प्रधानाचार्य हरलाल ढाका और शिविर प्रभारी अंजू जैन की उपस्थिति में राजेश अरोड़ा ने विद्यार्थियों को आगामी दिनों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आपदा प्रबंधन के तहत अग्निशमन यंत्रों का उपयोग, फर्स्ट एड, सीपीआर (CPR) की जानकारी, गांवों में विभिन्न प्रकार के सर्वे, कंप्यूटर कार्य और उपयोगी वस्तुओं के निर्माण जैसे कौशल सीखने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">विभिन्न विद्यालयों में आयोजित प्रमुख गतिविधियां</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>ग्राम पंचायत पन्नीवाली:</strong> विद्यार्थियों ने किचन गार्डन, स्कूल पार्क और कक्षा-कक्षों में स्वच्छता अभियान चलाकर श्रमदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (टिब्बी):</strong> शिविर प्रभारी कमल कुमार के मार्गदर्शन में दिन की शुरुआत माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। यहाँ सार्वजनिक स्थलों की सफाई, पौधारोपण, पौध संरक्षण, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त समाज बनाने के लिए सामूहिक श्रमदान किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सलेमगढ़ मसानी:</strong> प्रधानाचार्य शिवकुमार बिश्नोई के नेतृत्व में पर्यावरण और जल संरक्षण के महत्व पर निबंध व अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बेजुबान पक्षियों के लिए पानी के परिंडे बांधे गए और विद्यार्थियों को योगाभ्यास करवाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>तंदूर वाली:</strong> प्रधानाचार्य मंजू सहारण के मार्गदर्शन में पेड़ों की ट्रिमिंग (कटाई-छंटाई), पौधों की देखभाल, कचरा निस्तारण और जल संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की गईं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डबली खुर्द:</strong> प्रधानाचार्य सतीश अरोड़ा के निर्देशन में विद्यार्थियों ने विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से आमजन को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ग्राम पंचायत 2 KSP:</strong> शिविर प्रभारी बलवीर तनान के मार्गदर्शन में द्वितीय दिवस पर पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके अलावा, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कुलचंद्र गुड़िया, बशीर, बालिका बशीर, रामपुरा उर्फ रामसरा आदि में भी शिविर प्रभारियों के निर्देशन में विद्यार्थियों ने समाज सेवा की विभिन्न गतिविधियों में पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। यह 15 दिवसीय शिविर विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/tibbi-news5.jpg" alt="Tibbi News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 16:27:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विद्यालयों में 15 दिवसीय समाज सेवा शिविरों का शानदार आगाज़, विद्यार्थियों ने श्रमदान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लॉक के विभिन्न विद्यालयों में 15 दिवसीय समाज सेवा शिविरों का उत्साहपूर्वक शुभारंभ हुआ। इन शिविरों के अंतर्गत विद्यार्थियों ने सामूहिक श्रमदान में बढ़-चढ़कर भाग लिया ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/great-start-of-15-day-social-service-camps-in-schools/article-84982"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/tibbi-news4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>​टिब्बी (सच कहूँ/अंकित वधवा)।</strong> Tibbi News: ब्लॉक के विभिन्न विद्यालयों में 15 दिवसीय समाज सेवा शिविरों का उत्साहपूर्वक शुभारंभ हुआ। इन शिविरों के अंतर्गत विद्यार्थियों ने सामूहिक श्रमदान में बढ़-चढ़कर भाग लिया और आमजन को पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छता के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। ​शिविर के प्रथम दिन ब्लॉक के अलग-अलग विद्यालयों में विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनका विवरण इस प्रकार है:</p>
<h4 style="text-align:justify;">​महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (टिब्बी नगरपालिका):</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानाचार्य जगदीश कुमार के मार्गदर्शन में शिविर की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। यहां विद्यार्थियों ने सार्वजनिक स्थलों की सफाई, पौधारोपण, पौधों का संरक्षण, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक श्रमदान कर जागरूकता फैलाई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">​राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (ग्राम पंचायत 4 KSP):</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानाचार्य कृष्णा चौधरी के नेतृत्व में शिविर का विधिवत शुभारंभ हुआ। शिविर के प्रथम दिवस पर विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में उत्साह के साथ भाग लिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">​राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (सिलवाला कलां):</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानाचार्य धर्मेंद्र सिंह के निर्देशन में विद्यार्थियों ने विविध प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया और श्रमदान के जरिए ग्रामीणों को पर्यावरण बचाने का प्रभावी संदेश दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">​राजकीय विद्यालय (तंदूरवाली):</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानाचार्य सुनील कुमार के मार्गदर्शन में विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पेड़ों की ट्रिमिंग (छंटाई), पौधों की देखभाल, कचरा निस्तारण और जल संरक्षण से जुड़ी विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">​राजकीय विद्यालय (सलेमगढ़ मसानी):</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानाचार्य शिवकुमार बिश्नोई के नेतृत्व में स्वच्छता और जल संरक्षण से संबंधित कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने पर्यावरण और जल को सहेजने के कार्यों में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।</p>
<p style="text-align:justify;">​इन 15 दिवसीय शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों में न केवल सेवा भाव का विकास हो रहा है, बल्कि वे समाज के लिए एक आदर्श भी प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इन शिविरों के तहत जन-जागरूकता के कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/tibbi-news4.jpg" alt="Tibbi News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:43:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असमाई मंदिर में भजन जैमिंग कार्यक्रम बना एकता और संस्कृति का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[यूनाइटेड किंगडम के जॉनसन स्ट्रीट स्थित असमाई मंदिर में आयोजित भजन जैमिंग एवं यूथ सम्मान समारोह ने भाईचारे, संस्कृति और युवा शक्ति की मिसाल पेश की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bhajan-jamming-program-in-asmai-temple-became-a-symbol-of/article-84933"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/pehowa-news1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पिहोवा (सच कहूँ न्यूज़)। </strong>Pehowa News: यूनाइटेड किंगडम के जॉनसन स्ट्रीट स्थित असमाई मंदिर में आयोजित भजन जैमिंग एवं यूथ सम्मान समारोह ने भाईचारे, संस्कृति और युवा शक्ति की मिसाल पेश की। कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक पंडित अभिषेक शर्मा और बैंड सदस्य धैर्य नायक की भक्तिमय प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अफगान हिंदू, सिख और मुस्लिम समुदाय सहित विभिन्न प्रोफेशनल्स, युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लेकर एकता का संदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद सिमा मल्होत्रा एवं विशेष अतिथि करिश्मा, विजय भी मौजूद रहीं। बीबीसी अपरेंटिस   2026 जीतने पर करिश्मा विजय और उनके परिवार को विशेष सम्मान दिया गया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पूरे आयोजन का संचालन मंदिर की युवा टीम ने मात्र दो सप्ताह में सफलतापूर्वक किया, जिसकी सभी अतिथियों ने सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान अफगान हिन्दू प्रोफेशनल नेटवर्क की भी शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य प्रोफेशनल्स को एक मंच पर जोड़कर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। आयोजकों ने कहा कि युवाओं के नेतृत्व में भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/pehowa-news1.jpg" alt="Pehowa News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bhajan-jamming-program-in-asmai-temple-became-a-symbol-of/article-84933</link>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 17:17:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर शिक्षकों का किया सम्मान </title>
                                    <description><![CDATA[शिकोहाबाद में नेशनल हाईवे स्थित रितु रेस्टोरेंट में संस्कृति विश्वविद्यालय मथुरा द्वारा शिक्षक सम्मान व अभिवादन कार्यक्रम का आयोजन किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sanskriti-university-honored-teachers-by-organizing-a-program/article-84637"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/firozabad-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फिरोजाबाद (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Firozabad News: शिकोहाबाद में नेशनल हाईवे स्थित रितु रेस्टोरेंट में संस्कृति विश्वविद्यालय मथुरा द्वारा शिक्षक सम्मान व अभिवादन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए कुछ शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में ज्ञानदीप सीनियर सेकेंडरी स्कूल की डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ रजनी यादव रही। कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले शिक्षक प्रहलादराय टीकमानी इंटर कॉलेज के उप प्रधानाचार्य अजय शर्मा, राधा मोहन फ़रसैय्या स्कूल के गिरिराज सिंह जादौन, रोहित यादव, सिरसागंज पब्लिक स्कूल के सुखेंद्र यादव समेत कुछ शिक्षकों को सम्मानित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों का स्थान सर्वोपरि होता है। एक शिक्षक ही होता है जो छात्र छात्राओं को अच्छा मुकाम हासिल करने की प्रेरणा देता है तथा अपनी शिक्षा के बल पर वो बच्चों को काफी ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करता है। ऐसे शिक्षकों का सम्मान होना गर्व की बात है । इस मौके पर अरुण यादव, कौशलेंद्र यादव, संस्कृति विश्वविद्यालय से एडमिशन मैनेजर जावेद अली, विजय सक्सेना, एडमिशन मैनेजर शिवांगी आदि मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/firozabad-news.jpg" alt="Firozabad News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:57:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोड़ी की साध-संगत ने पक्षियों के चोगे पानी के लिए किया समाज को प्रेरित</title>
                                    <description><![CDATA[ डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा शुरू की गई पक्षियों उद्धार मुहिम के तहत रोड़ी ब्लॉक की साध-संगत ने बप्पां में आयोजित नामचर्चा दौरान सैकड़ों पानी के सकोरे बांटते हुए पक्षियों के लिए चोगे पानी का प्रबंध करने का प्रण लिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/rodis-companionship-inspired-the-society-to-provide-water-for-the/article-84485"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/buppan-bird-welfare.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरसा (सच कहूँ/राजू)। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा शुरू की गई पक्षियों उद्धार मुहिम के तहत रोड़ी ब्लॉक की साध-संगत ने बप्पां में आयोजित नामचर्चा दौरान सैकड़ों पानी के सकोरे बांटते हुए पक्षियों के लिए चोगे पानी का प्रबंध करने का प्रण लिया। नामचर्चा की शुरूआत विनती भजन के साथ हुई। तदोपरांत कविराज ने मुर्शिद के प्रेम प्रथाए भजनों द्वारा साध-संगत को लाभांवित किया। नामचर्चा का लाभ उठाने के लिए भीषण गर्मी की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में साध-संगत मौजूद रही। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर ब्लॉक प्रेमी सेवक पवन इन्सां ने साध-संगत का इलाही नारा लगाकर नामचर्चा में पहुंचने पर स्वागत करते हुए कहा कि पूज्य गुरु जी ने हमें जो मानवता भलाई कार्य का रास्ता दिखाया है हमें उस पर चलते हुए अधिक से अधिक परहित के कार्य करने हैं। वहीं उन्होंने गर्मी के मौसम के मद्देनजर साध-संगत से आह्वान किया कि बेजुबान पशु पक्षियों के लिए अपने घरों के आसपास चोगे पानी का प्रबंध करें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि शाम को खेतों से लौटते समय कुछ पल के लिए बोरवेल जरूर चलाकर आएं ताकि रात के समय खेतों में रहने वाले जीव जंतु अपनी प्यास बुझा सकें। वहीं नामचर्चा में पहुंचे सच्चे नम्र सेवादार यादविंद्र इन्सां ने भी साध-संगत को मानवता भलाई कार्य करने के लिए प्रेरित किया। Sirsa News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 11:25:27 +0530</pubDate>
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