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                <title>बच्चों का कोना - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>बच्चों का कोना RSS Feed</description>
                
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                <title>खेल-खेल में स्कूल का जादू</title>
                                    <description><![CDATA[कोमल सांखला।  एक छोटे से गांव में स्वीटी नाम की एक प्यारी-सी लड़की रहती थी। स्वीटी ने अभी-अभी स्कूल जाना शुरू किया था। पहले तो वह डरती थी। ‘स्कूल में तो बस किताबें पढ़नी पड़ेंगी, लिखना पड़ेगा। खेलना कौन सिखाएगा?’ वह अपनी मां से कहती। लेकिन स्वीटी का स्कूल जादुई था। वहां टीचर आंटी सब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-magic-of-school-through-play/article-83594"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/untitled-8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोमल सांखला। </strong> एक छोटे से गांव में स्वीटी नाम की एक प्यारी-सी लड़की रहती थी। स्वीटी ने अभी-अभी स्कूल जाना शुरू किया था। पहले तो वह डरती थी। ‘स्कूल में तो बस किताबें पढ़नी पड़ेंगी, लिखना पड़ेगा। खेलना कौन सिखाएगा?’ वह अपनी मां से कहती। लेकिन स्वीटी का स्कूल जादुई था। वहां टीचर आंटी सब कुछ खेल-खेल में सिखाती थीं। पहले दिन स्वीटी क्लास में घुसते ही चौंक गई। कक्षा में कोई बेंच-टेबल नहीं थे। बच्चे जमीन पर चटाई बिछाकर बैठे थे। टीचर आंटी ने कहा, ‘आज हम अक्षरों का खेल खेलेंगे!’</p>
<p style="text-align:justify;">सब बच्चों ने हंसते-हंसते एक सर्कल बनाया। आंटी ने एक गेंद दी। गेंद पकड़ने वाला बच्चा ‘अ’ कहता और अगले को गेंद फेंकता। अगला ‘आ’ बोलता। स्वीटी को गेंद मिली तो वह चिल्लाई, ‘इ!’ सब हंस पड़े। खेलते-खेलते ‘अ’ से ‘ज्ञ’ तक के अक्षर सीख गए। स्वीटी सोचने लगी, ‘अरे वाह! पढ़ाई तो खेल बन गई!’ अगले दिन गणित का समय आया। टीचर आंटी ने कहा, ‘चलो, बाजार का खेल खेलें!’ बच्चे दो ग्रुप में बंट गए। एक ग्रुप दुकानदार बना, दूसरा ग्राहक। स्वीटी दुकानदार बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">‘दो सेब दो रुपये के, चार सेब कितने?’ ग्राहक ने कहा, ‘आठ रुपये!’ गलत जवाब पर सब हंसते, और सही करने पर ताली बजाते। खेल खत्म होने पर सब जोड़-घटाव सीख चुके थे। स्वीटी घर लौटकर मां को बोली, ‘मां, स्कूल में गणित बाजार खोलकर सिखाया!’ धीरे-धीरे स्वीटी को स्कूल इतना पसंद आने लगा कि वह रोज उत्साहित हो जाती। कभी जानवरों के नाम सीखने के लिए ‘शेर-हाथी’ का नाटक होता। स्वीटी शेर बनी, दहाड़ती—‘मैं शेर हूं, जंगल का राजा!’ सबको जानवरों के नाम और उनकी आवाजें याद हो जातीं। कभी रंगों का खेल होता—लाल सेब ढूंढो, नीला आकाश दिखाओ। स्वीटी की सहेली रानी पहले स्कूल से डरती थी। स्वीटी ने उसे गली में बुलाया- ‘देख रानी, स्कूल में ऐसे खेल होते हैं! आ जा न!’ एक दिन गली के बच्चे इकट्ठा हुए। स्वीटी ने कहा, ‘चलो, घर पर भी खेल-खेल में पढ़ाई करें!’</p>
<p style="text-align:justify;">सबने सर्कल बनाया, गेंद घुमाई और अक्षर बोले। फिर पेड़-पौधों का खेल हुआ- ‘यह पेड़ कौन सा है? पत्ते गिनो!’ छोटू ने कहा, ‘नीम का पेड़, दस पत्ते!’ सब खुश हो गए। रानी बोली, ‘स्वीटी, तुम्हारा स्कूल कमाल का है। खेल-खेल में सब सीख जाते हैं।’ लेकिन एक समस्या आ गई। गांव के कुछ बड़े लोग कहने लगे, ‘स्कूल में खेल? यह कैसी पढ़ाई है? किताबें खोलो!’ स्वीटी उदास हो गई। उसने टीचर को बताया। आंटी मुस्कुराईं- ‘चिंता मत करो, हम सबको समझा देंगे।’ अगले दिन पेरेंट्स मीटिंग हुई। बच्चों ने आगे आकर अपने-अपने खेल दिखाए। स्वीटी ने गेंद वाला अक्षर खेल दिखाया। छोटू ने बाजार का खेल समझाया। सब माता-पिता दंग रह गए—‘वाह! बच्चे खुश भी हैं और सीख भी रहे हैं!’ टीचर आंटी ने समझाया, ‘बच्चों का दिमाग खेल में ज्यादा लगता है। खेल से चीजें जल्दी याद रहती हैं। आजकल दुनिया भर में ‘प्ले-वे मेथड’ अपनाया जा रहा है। भारत में भी एनसीईआरटी इसे बढ़ावा देता है। इससे बच्चे एक्टिव और क्रिएटिव बनते हैं।’ सब सहमत हो गए। स्वीटी ने ताली बजाई—‘हिप-हिप हुर्रे!’ अब स्वीटी गली के सभी बच्चों को स्कूल बुलाती है- ‘आओ, खेलो और सीखो!’ सब कहते, ‘हां स्वीटी दीदी, खेल-खेल में पढ़ाई सबसे मजेदार है!’ स्वीटी समझ गई—स्कूल सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जिंदगी का एक खूबसूरत खेल है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:21:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अवनी को लगा जैसे चूड़ियां गा रही हों&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[कोमल सांखला अवनी एक प्यारी-सी छह साल की बच्ची थी। उसके पापा ट्रक ड्राइवर थे। हर रोज सुबह-सुबह वे शहर से गांवों तक सामान ले जाते थे। अवनी को पापा की गाड़ी से बहुत प्यार था। कभी-कभी छुट्टी के दिन वह पापा के साथ बैठती और लंबी यात्रा पर निकल पड़ती। खासकर नाना-नानी के घर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/avni-felt-as-though-the-bangles-were-singing/article-83431"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/clinking-bangles.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोमल सांखला<br />
अवनी एक प्यारी-सी छह साल की बच्ची थी। उसके पापा ट्रक ड्राइवर थे। हर रोज सुबह-सुबह वे शहर से गांवों तक सामान ले जाते थे। अवनी को पापा की गाड़ी से बहुत प्यार था। कभी-कभी छुट्टी के दिन वह पापा के साथ बैठती और लंबी यात्रा पर निकल पड़ती। खासकर नाना-नानी के घर जाने पर तो अवनी हमेशा साथ होती। रास्ते में हरी-भरी फसलें, बहते नाले और दूर पहाड़ियां देखकर उसकी आंखें चमक उठतीं। एक दिन नाना के घर जाते समय अवनी ने अपनी पसंदीदा चूड़ियां निकालीं। वे रंग-बिरंगी थीं- लाल, हरी, पीली। चमकदार काँच की बनी हुई, जो धूप में जगमगा उठती थीं।<br />
‘पापा, इन्हें स्टेयरिंग पर टांग दो न!’ अवनी ने कहा।<br />
पापा मुस्कुराए, ‘अच्छा, लेकिन सावधानी से।’<br />
अवनी ने चूड़ियों को स्टेयरिंग के ऊपर एक डोर से बांध दिया। गाड़ी स्टार्ट हुई तो चूड़ियां हिलने लगीं- खन-खन, टन-टन! उनकी मधुर आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी।<br />
‘वाह! कितनी अच्छी आवाज आ रही है!’ अवनी ने ताली बजाई।<br />
गाड़ी जैसे जादू की तरह चल पड़ी। रास्ते में हर मोड़ पर चूड़ियां झूलतीं, नाचतीं- कभी तेज खनक, कभी धीमी। अवनी को लगा जैसे चूड़ियां गा रही हों।<br />
‘पापा, ये तो मेरी दोस्त हैं! ये गाड़ी को और तेज चला रही हैं,’ वह हंसते हुए बोली।<br />
पापा ने कहा, ‘हां बेटी, तेरी खुशी ही तो हमारी ताकत है।’<br />
रास्ता लंबा था। बीच में एक बड़ा जंगल आया। अचानक गाड़ी से आवाज आना बंद हो गई। पापा ने देखा कि इंजन में कुछ खराबी आ गई है। गाड़ी रुक गई। आसपास घना जंगल था, कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था। पापा परेशान हो गए, ‘अब क्या करें? अवनी के नाना का घर अभी दूर है।’ अवनी थोड़ी डर गई, लेकिन उसने चूड़ियों की ओर देखा। वे अभी भी हल्के-हल्के हिल रही थीं- खन-खन! अवनी ने सोचा, ‘मेरी चूड़ियां तो हमेशा खुश रहती हैं, मैं भी खुश रहूंगी।’<br />
उसने गाना गाना शुरू किया-<br />
‘खनकती चूड़ियां, नाचो-नाचो!<br />
गाड़ी को ले चलो, नाना के पास!’<br />
उसकी मासूम आवाज के साथ चूड़ियां जैसे और जोर से खनकने लगीं। तभी दूर से एक चाचा जी की मोटरसाइकिल की आवाज आई। वे पास आकर रुके।<br />
‘क्या हुआ, भाई?’ उन्होंने पूछा।<br />
पापा ने सारी बात बताई। चाचा जी ने टूल बॉक्स निकाला और गाड़ी ठीक कर दी। वे हंसते हुए बोले, ‘लगता है बेटी की चूड़ियों की आवाज ने हमें बुला लिया!’ गाड़ी फिर चल पड़ी। चूड़ियां अब और तेज खनक रही थीं। नाना-नानी के घर पहुंचते ही सबने अवनी की कहानी सुनी। नानी ने मुस्कुराकर कहा, ‘बेटी, खुशी की आवाज कभी व्यर्थ नहीं जाती। वह मुश्किलों को दूर भगा देती है।’ अवनी ने चूड़ियां सबको दिखाईं। उस दिन से वह हर यात्रा में चूड़ियां साथ ले जाती। वे सिर्फ सजावट नहीं थीं, बल्कि खुशी की घंटी थीं। और अवनी समझ गई- सच्ची खुशी छोटी-छोटी चीजों में बसती है, बस उसे पहचानना आना चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 12:06:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पक्षियों की सभा और चतुर कौवा</title>
                                    <description><![CDATA[कोमल सांखला। Crow: एक घने जंगल में, जहाँ सूरज की किरणें पत्तियों के बीच से छन-छनकर आती थीं और हवा मधुर गीत गुनगुनाती थी, पक्षियों का एक खुशहाल परिवार रहता था। सफेद हंस अपनी गरिमा से तालाबों को सुंदर बनाता, रंगबिरंगा तोता चहक-चहककर सबको हँसाता, धैर्यवान बगुला शांत खड़ा विचार करता, कोयल अपनी मीठी कूक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/the-assembly-of-birds-and-the-clever-crow/article-83274"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/crow.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोमल सांखला।</strong> Crow: एक घने जंगल में, जहाँ सूरज की किरणें पत्तियों के बीच से छन-छनकर आती थीं और हवा मधुर गीत गुनगुनाती थी, पक्षियों का एक खुशहाल परिवार रहता था। सफेद हंस अपनी गरिमा से तालाबों को सुंदर बनाता, रंगबिरंगा तोता चहक-चहककर सबको हँसाता, धैर्यवान बगुला शांत खड़ा विचार करता, कोयल अपनी मीठी कूक से वसंत बुलाती, चातक बादलों की राह देखता, कोमल कबूतर शांति का पैगाम देता, मुर्गा सुबह का स्वागत करता और गंभीर उल्लू रात में जागकर पहरेदारी करता।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके शक्तिशाली राजा गरुड़ भगवान विष्णु की सेवा में इतने व्यस्त रहते कि छोटे-छोटे पक्षियों की रोज की परेशानियाँ — जैसे शिकारी जानवरों का डर, भोजन की तलाश या आपसी झगड़े — उन्हें दिखाई ही नहीं देते। धीरे-धीरे पक्षी बेचैन हो गए। एक दिन उन्होंने फैसला किया, ाअब हमें एक नया राजा चुनना चाहिए जो हमारे बीच रहे, हमारी बात सुने और हमारी मुश्किलें दूर करे।’</p>
<p style="text-align:justify;">वे एक विशाल पीपल के नीचे इकट्ठे हुए। कई दिनों तक चर्चा चली। आखिरकार सबकी राय एक हो गई — उल्लू को राजा बनाया जाए! उसकी बड़ी-बड़ी आँखें, गंभीर चेहरा और रात की तीखी नजर उन्हें बहुत प्रभावित कर गई थी। Crow</p>
<p style="text-align:justify;">राज्याभिषेक की धूमधाम शुरू हो गई। दूर-दूर से पवित्र जल लाया गया। सिंहासन को चमकते रत्नों और फूलों से सजाया गया। स्वर्ण कलशों में सुगंधित पानी भरा गया। पक्षी मंत्र पढ़ने लगे और पूरा जंगल उत्सव में डूब गया। उल्लू गर्व से सिंहासन की ओर बढ़ रहा था, उसकी आँखों में राजा बनने का सपना चमक रहा था। ठीक उसी पल, जब अभिषेक होने वाला था, अचानक एक काला-चमकदार कौवा वहाँ आ पहुँचा। उसने भव्य तैयारी देखी तो हैरान रह गया। पक्षी भी उसे देखकर चौंक गए  इसे तो किसी ने बुलाया भी नहीं था!’ कौवा बहुत चतुर था। वह शांत लेकिन मजबूत आवाज में बोला, मित्रों! रुक जाओ! तुम उल्लू को राजा बना रहे हो? सोचो तो जरा… यह तो सिर्फ़ रात में अच्छे से देख पाता है। दिन के तेज उजाले में इसकी आँखें धुंधली हो जाती हैं। अगर कोई शत्रु दिन में हमला कर दे, तो यह क्या करेगा? अंधा होकर छिप जाएगा? क्या हमारी प्रजा का भला ऐसे राजा से होगा?’ पूरी सभा सन्न रह गई। पक्षी सोच में पड़ गए। उल्लू का गुस्सा फूट पड़ा। उसने लाल आँखें करके कौवे को घूरा और गरजकर कहा, ाकौवे! तूने मेरे राज्याभिषेक में बाधा डाली है। अगर आज यह समारोह रुक गया, तो मैं तुझे और तेरे पूरे परिवार को कभी नहीं भूलूंगा और कभी माफ नहीं करूंगा!’</p>
<p style="text-align:justify;">कौवा हँसा और बोला, मैंने तो सिर्फ़ सच कहा है, मित्र। क्रोध मत करो।’ कहकर वह अपनी कर्कश आवाज में हँसता हुआ आसमान में उड़ गया। अभिषेक अधूरा रह गया। पक्षी बिना नए राजा के अपने घोंसलों को लौट गए, मन में नई उलझन लिए। उसी दिन से उल्लू और कौवों के बीच गहरा दुश्मनी का बीज बो दिया गया। अब रात में उल्लू कौवों पर हमला करता है, और दिन में कौवे उल्लुओं के घोंसलों को तोड़-फोड़ देते हैं। यह बैर आज भी जंगल में जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सीख:</strong> जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला कभी न लें। दूसरों की सलाह सुनना और सोच-समझकर विचार करना हमेशा फायदेमंद होता है। कभी-कभी कड़वी सच्चाई हमें बड़ी गलती से बचा लेती है। Crow</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:24:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Children Social Media: मोबाइल और सामाजिक माध्यमों का किशोर मन पर असर</title>
                                    <description><![CDATA[Children Social Media: अजीत कुमार, कैथल। समकालीन समय में तकनीक केवल सुविधा प्रदान करने वाला साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। विशेष रूप से मोबाइल फोन ने किशोरों के जीवन में गहरी पैठ बना ली है, जिसके कारण उनके बचपन और दिनचर्या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-impact-of-mobile-phones-and-social-media-on-the-adolescent-mind/article-82438"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/children-social-media.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Children Social Media: अजीत कुमार, कैथल।</strong> समकालीन समय में तकनीक केवल सुविधा प्रदान करने वाला साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। विशेष रूप से मोबाइल फोन ने किशोरों के जीवन में गहरी पैठ बना ली है, जिसके कारण उनके बचपन और दिनचर्या में बड़ा परिवर्तन दिखाई देता है। पहले बच्चे अपना अधिकांश समय परिवार, मित्रों और विद्यालय के बीच संतुलित रूप से बिताते थे, लेकिन अब उनका काफी समय आभासी दुनिया में गुजरने लगा है। यह आभासी संसार केवल मनोरंजन या बातचीत का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह किशोरों की सोच, व्यवहार और आत्मबोध को भी प्रभावित करने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज का किशोर घर और विद्यालय की सीमाओं से बाहर एक डिजिटल वातावरण में सक्रिय रहता है, जहाँ हर समय तुलना और प्रतिक्रिया का दबाव बना रहता है। सामाजिक मंचों पर मिलने वाली प्रशंसा या आलोचना उसके आत्मविश्वास को प्रभावित करती है। जब किसी व्यक्ति की स्वीकृति को पसंद, टिप्पणी या साझा किए जाने की संख्या से आँका जाने लगे, तो किशोरों का आत्मबोध भी बाहरी प्रतिक्रियाओं पर निर्भर होने लगता है। यही स्थिति कई बार मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना को जन्म देती है। वास्तव में संचार के नए माध्यम केवल सूचना के आदान-प्रदान की शैली नहीं बदलते, बल्कि वे एक नया वातावरण भी निर्मित करते हैं। मोबाइल फोन और सामाजिक माध्यमों ने किशोरों के लिए ऐसा ही एक संसार तैयार किया है, जहाँ लगातार उपस्थित रहने का दबाव बना रहता है और उससे दूर होने पर पीछे छूट जाने का भय भी महसूस होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े आँकड़े लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की रिपोर्टों में यह सामने आया है कि विद्यार्थियों और युवाओं के बीच आत्महत्या की घटनाओं में वृद्धि हुई है। यह समस्या सरल नहीं है, बल्कि कई कारणों से जुड़ी हुई है। पारिवारिक तनाव, पढ़ाई का बढ़ता दबाव, समाज की अपेक्षाएँ और मानसिक परेशानियाँ किशोरों के जीवन को प्रभावित करती हैं। हाल के वर्षों में यह भी देखा गया है कि डिजिटल माध्यमों का बढ़ता प्रभाव इस तनाव को और गहरा बना रहा है। सामाजिक माध्यमों पर अपमानजनक टिप्पणियाँ, दूसरों से लगातार तुलना और आभासी खेलों की लत किशोरों के मन को अस्थिर कर सकती है। आभासी दुनिया में होने वाले विवाद भी वास्तविक जीवन में मानसिक दबाव का कारण बन जाते हैं। जब कोई किशोर बार-बार नकारात्मक प्रतिक्रियाओं या उपहास का सामना करता है, तो उसका आत्मसम्मान गंभीर रूप से प्रभावित होता है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की दुखद मृत्यु ने पूरे समाज को झकझोर दिया। इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर किया कि किशोरों की भावनाओं को समझना कितना आवश्यक है। ऐसे मामलों में किसी एक कारण को दोष देना उचित नहीं, लेकिन यह स्पष्ट है कि डिजिटल वातावरण का दबाव भी कई बार उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस परिस्थिति में परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता को बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें समझ के साथ मार्गदर्शन देना चाहिए। साथ ही विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य और तकनीक के संतुलित उपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी समय की बड़ी आवश्यकता है। सरकार और नीति निर्धारकों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण विषय है। बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना समय की मांग बन चुका है। सामाजिक माध्यमों पर अपमान, धमकी या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी होगी। इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संसाधनों को सुलभ बनाया जाए। तकनीक का विरोध करना समाधान नहीं है, क्योंकि वह आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। आवश्यकता इस बात की है कि उसका उपयोग संतुलित और जिम्मेदारीपूर्ण ढंग से किया जाए। यदि परिवार, विद्यालय और समाज मिलकर इस दिशा में प्रयास करें तो तकनीक बच्चों के लिए खतरा बनने के स्थान पर उनके विकास का साधन बन सकती है।<br />
(यह लेखक के अपने विचार हैं)</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 12:00:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandra Grahan 2026: कुछ घंटों बाद शुरू होगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, नोट करें सही टाइम</title>
                                    <description><![CDATA[Chandra Grahan 2026: नई दिल्ली। आज, 3 मार्च 2026 को, साल का पहला चंद्र ग्रहण होने जा रहा है, जो भारत के अधिकांश हिस्सों में देखा जा सकेगा। यह एक विशेष खगोलीय घटना है, और इसका महत्त्व इसलिए भी है क्योंकि इस ग्रहण के दौरान सूतक काल भी लागू होगा, जो कई धार्मिक और सांस्कृतिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandra-grahan-2026-news/article-81906"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/chandra-grahan-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Chandra Grahan 2026: नई दिल्ली।</strong> आज, 3 मार्च 2026 को, साल का पहला चंद्र ग्रहण होने जा रहा है, जो भारत के अधिकांश हिस्सों में देखा जा सकेगा। यह एक विशेष खगोलीय घटना है, और इसका महत्त्व इसलिए भी है क्योंकि इस ग्रहण के दौरान सूतक काल भी लागू होगा, जो कई धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंद्र ग्रहण का समय: Chandra Grahan 2026</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><strong>शुरुआत</strong>: 3 मार्च, 2026, दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर</p>
</li>
<li>
<p><strong>समाप्ति</strong>: 3 मार्च, 2026, शाम 6 बजकर 46 मिनट पर</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">यह ग्रहण विशेष रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में देखा जाएगा, और इसके दृश्य प्रभाव का आनन्द लोग विशेष स्थानों से ले सकेंगे। जैसा कि हम जानते हैं, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सूतक काल और धार्मिक महत्त्व:</h3>
<p style="text-align:justify;">चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल होता है, जो एक निश्चित समय सीमा के भीतर लागू होता है। इसे आमतौर पर ग्रहण की शुरुआत से पहले माना जाता है और यह कुछ घंटों तक रहता है। इस काल में धार्मिक गतिविधियों को कुछ विशिष्ट नियमों के तहत किया जाता है। कई लोग इस समय को उपवासी रहते हुए ध्यान और साधना में बिताना पसंद करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या करें और क्या न करें:</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<p><strong>क्या करें</strong>: ग्रहण के समय विशेष पूजा, ध्यान या साधना की जा सकती है।</p>
</li>
<li>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्या न करें</strong>: इस समय में भोजन पकाने और खाने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, चंद्र ग्रहण के दौरान नज़रें रखना और मनन करना एक आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है।</p>
</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 10:42:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पसीने की कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[Kids Story: खुशहालपुर में नारायण नाम का एक अमीर साहूकार रहता था। उसका एक बेटा और एक बेटी थी। लड़की की शादी हुए तीन साल हो गये थे और वह अपने ससुराल में खुश थी। लड़का राजू गलत संगत में बिगड़ चुका था। अपने पिता के पास बहुत पैसा है यह उसे घमंड हो गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/kids-story-about-hard-work/article-81130"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/smiling-life-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Kids Story: खुशहालपुर में नारायण नाम का एक अमीर साहूकार रहता था। उसका एक बेटा और एक बेटी थी। लड़की की शादी हुए तीन साल हो गये थे और वह अपने ससुराल में खुश थी। लड़का राजू गलत संगत में बिगड़ चुका था। अपने पिता के पास बहुत पैसा है यह उसे घमंड हो गया था। दिनभर अपने आवारा दोस्तों के साथ घूमना फिरना ही उसे अच्छा लगता था। जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ पैसे खर्च करने की आदत बढ़ती गई और वह अपने दोस्तों के कहने पर पानी की तरह पैसा बहाने लगा। मेहनत की कमाई अपना बेटा ऐसे गंवा रहा है, यह देख पिता को चिंता होने लगी। उसकी इच्छा थी कि राजू बेटा बड़ा हो कर सब कारोबार संभाल ले और वह अपनी पत्नी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल जाये। अपने बेटे को समझ आने की आस लगाये बैठा नारायण बुढ़ापे की तरफ बढ़ रहा था। फिर उसने गांव के ही एक विद्वान गृहस्थ से सलाह लेने की सोची।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बच्चों के लिए बेहतरीन मेमोरी गेम्स" href="http://10.0.0.122:1245/great-memory-games-for-kids/">बच्चों के लिए बेहतरीन मेमोरी गेम्स</a></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-align:justify;">दोनों ने मिलकर सलाह मशवरा किया। दूसरे दिन नारायण ने राजू को बुलाया और कहा ”बेटा राजू घर से बाहर जा कर शाम होने तक कुछ भी कमाई करके लाओगे तभी रात को खाना मिलेगा। राजू डर गया और रोने लग गया। उसे रोता देख मां की ममता आडेÞ आ गयी। मां ने राजू को एक रुपया निकालकर दिया। शाम को जब पिता ने राजू से पूछा तो उसने वह एक रुपया दिखाया। पिता ने वह रुपया राजू को कुएं में फेंकने के लिये कहा। राजू ने बिना हिचकिचाहट वह रूपया फेंक दिया। अब नारायण को अपनी पत्नी पर शक हुआ। उसने पत्नी को उसके भाई के यहां भेज दिया। दूसरे दिन राजू की वैसे ही परीक्षा ली गयी। अब राजू को पैसे देने के लिए मां भी नहीं थी, वह सारा दिन सोचता रहा। मेहनत करके पैसे कमाने के अलावा कोई हल नजर नहीं आ रहा था। भूख भी लगने लगी थी।</span></p>
<p style="text-align:justify;">रात का खाना बिना कमाई के मिलने वाला था नहीं। राजू काम ढूंढने निकल पड़ा। पीठ पर बोझा उठाकर दो घंटे मेहनत करने के बाद उसे 1 रुपया नसीब हुआ। भूख के मारे वह ज्यादा काम भी नहीं कर पा रहा था। शरीर भी थक कर जवाब देने लग गया था। सो पसीने से भीगा हुआ राजू 1 रुपया लेकर घर पहुंचा। उसे लग रहा था पिता को अपनी हालत पर तरस आयेगा। लेकिन नारायण ने उसे सबसे पहले कमाई के बारे में पूछा। राजू ने अपना एक रूपया जेब से निकाला। पहले के भांति नारायण ने एक रुपया कूएँ में फेंकने के लिये कहा। अब राजू छटपटाया। उसने अपने पिता से कहा ”आज मेरा कितना पसीना बहा है एक रूपया कमाने के लिये। इसे मैं नहीं फेंक सकता। जैसे ही ये शब्द उसके मुंह से निकले, उसे अपनी गलती का अहसास हो गया। अब राजू को पैसों की सही कीमत पता चल गई थी।<br />
<strong>                                                                                                                      -दीपिका जोशी</strong></p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/kids-story-about-hard-work/article-81130</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:02:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Parenting Tips: सोने से पहले बच्चों से रोज पूछें ये 6 सवाल, फिर देखना जिंदगी बदल जाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[Parenting Tips: अनु सैनी। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता और बच्चों के बीच बातचीत का समय धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। स्कूल, होमवर्क, मोबाइल और टीवी के बीच बच्चों की भावनाएं अक्सर अनकही रह जाती हैं। लेकिन पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर माता-पिता रोज सिर्फ 5 से 10 मिनट भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/six-questions-to-ask-your-children-every-day-before-bed/article-80890"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/parenting-tips.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Parenting Tips: अनु सैनी।</strong> आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता और बच्चों के बीच बातचीत का समय धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। स्कूल, होमवर्क, मोबाइल और टीवी के बीच बच्चों की भावनाएं अक्सर अनकही रह जाती हैं। लेकिन पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर माता-पिता रोज सिर्फ 5 से 10 मिनट भी अपने बच्चे के लिए निकाल लें, तो यह समय उनके रिश्ते को जिंदगी भर के लिए मजबूत बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी विषय पर पैरेंटिंग कोच संदीप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए माता-पिता को एक आसान लेकिन बेहद असरदार तरीका बताया है। वे सलाह देते हैं कि रोज रात को सोने से पहले बच्चों से 6 खास सवाल जरूर पूछे जाएं। उनके मुताबिक, ये सवाल न सिर्फ माता-पिता और बच्चे के बीच भरोसा बढ़ाते हैं, बल्कि बच्चे को भावनात्मक रूप से मजबूत, आत्मविश्वासी और समझदार भी बनाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आइए जानते हैं वे 6 सवाल कौन-से हैं और उनका बच्चों की मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ता है | Parenting Tips</h3>
<h3 style="text-align:justify;">1. आज तुम्हें सबसे ज्यादा खुशी किस बात से मिली?</h3>
<p style="text-align:justify;">यह सवाल बच्चे को दिनभर की अच्छी बातों को याद करने में मदद करता है। इससे वह समझता है कि खुशी सिर्फ बड़ी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी बातों से भी मिल सकती है। धीरे-धीरे बच्चे की सोच सकारात्मक बनने लगती है और वह जीवन को अच्छे नजरिए से देखने लगता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2. आज स्कूल या दिन में कोई परेशानी आई? तुमने उसे कैसे संभाला?</h3>
<p style="text-align:justify;">इस सवाल से बच्चे को अपनी चुनौतियों के बारे में खुलकर बात करने का मौका मिलता है। वह यह सीखता है कि मुश्किलें आना गलत नहीं है और हर समस्या का कोई न कोई हल होता है। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह समस्याओं से डरने के बजाय उन्हें सुलझाने की कोशिश करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">3. क्या आज तुमने किसी की मदद की या किसी ने तुम्हारी मदद की?</h3>
<p style="text-align:justify;">यह सवाल बच्चे में संवेदनशीलता, दया और सहानुभूति जैसे गुण विकसित करता है। बच्चा समझता है कि मदद करना और मदद स्वीकार करना दोनों ही अच्छी आदतें हैं। इससे उसके भीतर इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. आज ऐसा क्या था जो तुम्हें अच्छा नहीं लगा?</h3>
<p style="text-align:justify;">कई बार बच्चे अपनी नकारात्मक भावनाओं को मन में दबा लेते हैं, जिससे वे तनाव या डर महसूस करने लगते हैं। यह सवाल उन्हें अपनी नाराजगी, दुख या गुस्से को शब्दों में व्यक्त करने का मौका देता है। इससे बच्चे का मन हल्का होता है और वह भावनात्मक रूप से संतुलित रहता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">5. आज तुम्हें खुद पर किस बात का गर्व है?</h3>
<p style="text-align:justify;">यह सवाल बच्चे के आत्मसम्मान को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। जब बच्चा अपनी किसी अच्छी आदत, प्रयास या सफलता को पहचानता है, तो उसे खुद पर भरोसा होने लगता है। यह आत्मविश्वास आगे चलकर उसके व्यक्तित्व को मजबूत बनाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">6. कल के लिए तुम्हारा क्या प्लान है? तुम कल क्या अच्छा करना चाहते हो?</h3>
<p style="text-align:justify;">इस सवाल से बच्चे में योजना बनाना और लक्ष्य तय करना सीखने की आदत पड़ती है। वह अपने आने वाले दिन के बारे में सोचता है और जिम्मेदारी को समझता है। यह आदत भविष्य में उसे अनुशासित और आत्मनिर्भर बनने में मदद करती है।रोज की बातचीत बन जाती है खास इन 6 आसान सवालों के जरिए माता-पिता और बच्चे के बीच रोज की बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं रहती, बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़ाव पैदा करती है। बच्चा महसूस करता है कि उसके माता-पिता उसे सच में सुनते हैं, समझते हैं और उसकी भावनाओं को महत्व देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पैरेंटिंग कोच का कहना है कि यह छोटा-सा अभ्यास बच्चों को मानसिक रूप से स्वस्थ, खुश और आत्मविश्वासी बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है। साथ ही माता-पिता और बच्चों के बीच भरोसे की नींव मजबूत होती है, जो जिंदगी भर कायम रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा खुलकर आपसे बात करे, अपनी भावनाएं साझा करे और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े, तो आज से ही सोने से पहले 5-10 मिनट निकालकर ये सवाल जरूर पूछें। यही छोटे-छोटे पल आपके रिश्ते को सबसे खूबसूरत बना सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/six-questions-to-ask-your-children-every-day-before-bed/article-80890</link>
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 15:42:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana Schools Closed for Winter: तगड़ी ठंड, स्कूल बंद को लेकर हरियाणा से आई बड़ी खबर</title>
                                    <description><![CDATA[Haryana Schools Closed for Winter: प्रतापनगर, राजेन्द्र कुमार। हरियाणा में कड़ाके की ठंड का प्रकोप लगातार जारी है। तापमान में लगातार गिरावट और शीतलहर के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। खासतौर पर सुबह और रात के समय ठंड का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा विद्यालय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-cold-wave-continues-in-haryana-and-school-holidays-are-likely-to-be-extended/article-80321"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/haryana-schools-closed-for-winter.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Haryana Schools Closed for Winter: प्रतापनगर, राजेन्द्र कुमार।</strong> हरियाणा में कड़ाके की ठंड का प्रकोप लगातार जारी है। तापमान में लगातार गिरावट और शीतलहर के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। खासतौर पर सुबह और रात के समय ठंड का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग स्कूलों में सर्दी की छुट्टियां बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Punjab Weather: बफीर्ली ठंड से कांपा हरियाणा-पंजाब, सरसा का तापमान जानकर आप भी हो जाओगे हैरान" href="http://10.0.0.122:1245/haryana-and-punjab-shivered-in-the-icy-cold-youll-be-surprised-to-know-the-temperature-in-sirsa/">Haryana Punjab Weather: बफीर्ली ठंड से कांपा हरियाणा-पंजाब, सरसा का तापमान जानकर आप भी हो जाओगे हैरान</a></p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 15 जनवरी तक सर्दी की छुट्टियां घोषित की गई हैं। लेकिन मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग इन छुट्टियों को आगे बढ़ा सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार स्कूलों को 17 जनवरी तक बंद रखने का फैसला लिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि 18 जनवरी को रविवार का अवकाश रहेगा। ऐसे में अगर छुट्टियां 17 जनवरी तक बढ़ाई जाती हैं, तो स्कूलों को दोबारा 19 जनवरी से खोलने की योजना बनाई जा रही है। इससे बच्चों को ठंड से राहत मिलेगी और उनकी सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव से भी बचाव हो सकेगा। अभिभावक और शिक्षक संघ भी बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छुट्टियां बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। छोटे बच्चों के लिए सुबह के समय स्कूल जाना इस ठंड में जोखिम भरा साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक छुट्टियां बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। अंतिम फैसला मौसम की स्थिति और प्रशासनिक समीक्षा के बाद लिया जाएगा। अभिभावकों और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे शिक्षा विभाग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">चंडीगढ़ में स्कूलों की सर्दियों की छुट्टियां 17 जनवरी तक बढ़ी</h4>
<p style="text-align:justify;">चंडीगढ़ में लगातार जारी ठंड और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों को लेकर एक अहम् फैसला किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी करते हुए स्कूलों के समय और विंटर वेकेशन से जुड़े नियमों को 17 जनवरी तक बढ़ा दिया है। पिछले आदेश में कहा गया था कि आठवीं तक और नान बोर्ड कक्षाएं 9वीं व 11वीं की पढ़ाई फिलहाल फिजिकल मोड में नहीं होगी। 10वीं, 12वीं की बोर्ड कक्षाएं तय कार्यक्रम के अनुसार चलेंगी। स्कूल इन कक्षाओं के लिए सुबह 9:30 बजे से पहले नहीं खुलेंगे और छुट्टी दोपहर 3:30 बजे होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 11:55:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Apni Value Karwana Seekho: अगर कोई आपकी वैल्यू ना समझे तो तुरंत करें ये काम</title>
                                    <description><![CDATA[अनु सैनी। Apni Value Karwana Seekho: आज के तेज रफ्तार और प्रतिस्पर्धा से भरे दौर में सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि हम कितना जानते हैं या कितना मेहनत करते हैं, बल्कि यह है कि लोग हमारी वैल्यू को किस नजर से देखते हैं। कई बार ऐसा होता है कि हम दिल से रिश्ते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/apni-value-karwana-seekho/article-79988"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/apni-value-karwana-seekho.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अनु सैनी।</strong> Apni Value Karwana Seekho: आज के तेज रफ्तार और प्रतिस्पर्धा से भरे दौर में सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि हम कितना जानते हैं या कितना मेहनत करते हैं, बल्कि यह है कि लोग हमारी वैल्यू को किस नजर से देखते हैं। कई बार ऐसा होता है कि हम दिल से रिश्ते निभाते हैं, पूरी ईमानदारी से काम करते हैं, लेकिन बदले में हमें सम्मान की जगह उपेक्षा मिलती है। धीरे-धीरे लोग हमें हल्के में लेने लगते हैं और हमारी मौजूदगी को ‘सामान्यह्व’समझने लगते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह स्थिति मानसिक रूप से बेहद तकलीफदेह होती है, लेकिन इसका समाधान शिकायत करना या खुद को दोषी ठहराना नहीं है। असल जरूरत है खुद को समझने और अपनी वैल्यू बनाना सीखने की। अगर कोई आपकी अहमियत नहीं समझ रहा, तो ये 5 काम आपकी सोच और स्थिति दोनों बदल सकते हैं—</p>
<h3 style="text-align:justify;">1. सबसे पहले खुद की कद्र करना सीखें | Apni Value Karwana Seekho</h3>
<p style="text-align:justify;">दुनिया का नियम बहुत सीधा है—लोग वही सीखते हैं, जो आप उन्हें सिखाते हैं। अगर आप खुद को कम आँकते हैं, हर बात पर समझौता करते हैं और अपनी भावनाओं को दबाकर रखते हैं, तो सामने वाला भी आपको गंभीरता से नहीं लेता।<br />
खुद की कद्र करने का मतलब घमंडी होना नहीं, बल्कि यह समझना है कि आपकी भी सीमाएँ हैं, आपकी भावनाएँ भी मायने रखती हैं और आपकी जिÞंदगी की भी एक कीमत है। जब आप खुद के लिए खड़े होना सीखते हैं, तभी लोग आपकी बात सुनने लगते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2. हर समय उपलब्ध रहना बंद करें</h3>
<p style="text-align:justify;">अक्सर लोग सोचते हैं कि हमेशा मदद के लिए तैयार रहना एक अच्छी आदत है, लेकिन हकीकत यह है कि हर समय उपलब्ध रहना आपकी वैल्यू कम कर देता है। जब आप हर कॉल उठाते हैं, हर रिक्वेस्ट मान लेते हैं और हर किसी के लिए खुद को पीछे कर देते हैं, तो लोग इसे आपका फर्ज़ समझने लगते हैं। अपना समय और ऊर्जा सीमित करें। हर ‘हाँ’ की जगह कभी-कभी ‘नहीं’ कहना सीखें। जब लोग महसूस करेंगे कि आपकी मौजूदगी हर समय नहीं मिलती, तब वे उसकी कद्र करना सीखेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">3. आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखें</h3>
<p style="text-align:justify;">जो व्यक्ति अपनी बात साफ, शांत और आत्मविश्वास के साथ रखता है, उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होता। कई लोग सही होते हुए भी इसलिए अनसुने रह जाते हैं क्योंकि वे अपनी बात डर या झिझक के साथ कहते हैं। याद रखिए—आवाज ऊँची करना जरूरी नहीं, आत्मविश्वास जरूरी है। अपनी बात रखने के लिए सफाई देना बंद करें और यह मानकर चलें कि आपकी राय भी उतनी ही अहम है जितनी दूसरों की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. रिश्तों में सीमाएँ तय करें</h3>
<p style="text-align:justify;">हर रिश्ते की एक सीमा होती है। अगर कोई बार-बार आपकी भावनाओं को नजरअंदाज करता है, आपकी मेहनत को कम आंकता है या आपको हल्का महसूस कराता है, तो वहाँ सीमा खींचना जरूरी है। सीमाएँ बनाना रिश्ते तोड़ना नहीं होता, बल्कि रिश्तों को सम्मानजनक बनाना होता है। जो आपकी सीमाओं का सम्मान नहीं करता, वह आपकी वैल्यू भी नहीं समझ सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">5. खुद पर काम करें, खुद को मजबूत बनाएं</h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे प्रभावी तरीका अपनी वैल्यू बढ़ाने का है—खुद को बेहतर बनाना। जब आप अपने ज्ञान, कौशल, सोच और आत्मविश्वास पर काम करते हैं, तो लोग अपने आप आपकी ओर आकर्षित होते हैं। खुद को साबित करने के लिए शोर मचाने की जरूरत नहीं होती। खामोशी से आगे बढ़िए, सीखते रहिए और बेहतर बनते रहिए। सफलता और आत्मनिर्भरता सबसे बड़ा सम्मान दिलाती है। Apni Value Karwana Seekho</p>
<p style="text-align:justify;">अगर कोई आपकी वैल्यू नहीं समझ रहा, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कमजोर हैं। इसका मतलब यह है कि अब समय आ गया है खुद को नए तरीके से देखने का। जहाँ सम्मान न मिले, वहाँ ज्यादा रुकना खुद के साथ नाइंसाफी है।‌अपनी कीमत पहचानिए, खुद को प्राथमिकता दीजिए और याद रखिए, जो खुद की वैल्यू बनाना सीख लेता है, दुनिया उसे नजरअंदाज नहीं कर सकती।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Winter Anjeer Benefits: सर्दियों में अंजीर खाने से मिलते हैं ये बड़े फायदे, सेहत के लिए है किसी वरदान से कम नहीं" href="http://10.0.0.122:1245/eating-figs-in-winter-offers-these-great-benefits-its-nothing-short-of-a-blessing-for-your-health/">Winter Anjeer Benefits: सर्दियों में अंजीर खाने से मिलते हैं ये बड़े फायदे, सेहत के लिए है किसी वरदान से कम नहीं</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/apni-value-karwana-seekho/article-79988</link>
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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 14:39:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Winter Vacation 2025: उत्तर भारत में बढ़ती सर्दी, स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[Winter Vacation Haryana, Punjab, UP, Rajasthan 2025: नई दिल्ली/हिसार सच कहूँ/संदीप सिंहमार। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड, कोहरे और गिरते तापमान को देखते हुए कई राज्यों की सरकारों ने स्कूलों के लिए शीतकालीन अवकाश की घोषणा कर दी है। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और जम्मू‑कश्मीर ने अपने‑अपने अकादमिक कैलेंडर और स्थानीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/with-the-increasing-cold-in-north-india-winter-holidays-have-been-declared-in-schools/article-79212"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/winter-vacation-2025.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Winter Vacation Haryana, Punjab, UP, Rajasthan 2025: नई दिल्ली/हिसार सच कहूँ/संदीप सिंहमार। </strong>उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड, कोहरे और गिरते तापमान को देखते हुए कई राज्यों की सरकारों ने स्कूलों के लिए शीतकालीन अवकाश की घोषणा कर दी है। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और जम्मू‑कश्मीर ने अपने‑अपने अकादमिक कैलेंडर और स्थानीय मौसम के अनुसार अलग‑अलग तारीखों पर छुट्टियां तय की हैं। सरकारी, निजी एवं सहायता प्राप्त अधिकांश स्कूल इन आदेशों के दायरे में आएंगे। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक दिसंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर जनवरी के मध्य तक घना कोहरा, ठंडी हवाएं और पारा सामान्य से नीचे रहने की संभावना है। इसी संभावित ठंड लहर से बच्चों को बचाने के लिए सरकारें पहले से ही सत्र में बदलाव कर रही हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हरियाणा: नए साल के साथ शुरू होगा अवकाश | Winter Vacation 2025</h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में 1 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया है। इस अवधि में नर्सरी से लेकर 12वीं तक सभी कक्षाओं की नियमित पढ़ाई बंद रहेगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे छुट्टियों से पहले आवश्यक यूनिट टेस्ट और प्रैक्टिकल कार्य निपटा लें, ताकि पाठ्यक्रम पर असर कम से कम पड़े। शिक्षकों के लिए भी अधिकांश दिनों में अवकाश रहेगा, हालांकि प्रशासनिक कार्यों और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए कुछ स्कूलों में स्टाफ को रोस्टर के आधार पर बुलाया जा सकता है। विभाग ने यह भी साफ किया है कि तय तारीखों में ऑनलाइन कक्षाएं चलाने का निर्णय स्कूल प्रबंधन स्थानीय स्तर पर ले सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दिल्ली: हरियाणा की तर्ज पर 15 दिन की ठंडी छुट्टी</h4>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी शीतलहर और धुंध का असर देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने 1 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है। यह आदेश सरकारी, एडेड और अधिकांश निजी स्कूलों पर लागू होगा। दिल्ली में हर साल ठंड और प्रदूषण के दोहरे असर को देखते हुए सर्दियों में स्कूलों के समय में बदलाव और छुट्टियों की अवधि पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह‑सुबह की ठिठुरन बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकती है, इसलिए छुट्टियां या लेट स्टार्ट ही व्यावहारिक समाधान हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पंजाब: 22 दिसंबर से 10 जनवरी तक अवकाश</h4>
<p style="text-align:justify;">पंजाब सरकार ने इस बार अपेक्षाकृत लंबी शीतकालीन छुट्टी का ऐलान किया है। प्रदेश के स्कूल 22 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे। इससे विद्यार्थियों को क्रिसमस, नया साल और लोहड़ी से जुड़ी छुट्टियां एक साथ मिल जाएंगी। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि छुट्टियों से पहले अर्धवार्षिक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। विभाग यह भी देख रहा है कि बोर्ड कक्षाओं के पाठ्यक्रम में कोई कमी न रह जाए, इसलिए कई स्कूल छुट्टी के बाद विशेष रिवीजन क्लास और टेस्ट सीरीज़ चलाने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश: दिसंबर के तीसरे सप्ताह से 11 दिन की ठंडी छुट्टी</h3>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में सर्दी का प्रकोप आमतौर पर क्रिसमस के आसपास तेज हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 20 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित किया है। प्रदेश के कई जिलों में पहले से ही सुबह के समय कोहरा और शीत लहर देखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन को अधिकार दिया गया है कि अगर तापमान और गिरता है तो वे स्कूलों का समय बदल सकते हैं या छुट्टियों को कुछ दिनों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव भेज सकते हैं। फिलहाल निर्धारित कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी से कक्षाएं सामान्य रूप से शुरू कराई जाएंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राजस्थान: 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक बंद रहेंगे स्कूल</h3>
<p style="text-align:justify;">थार के रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी दिसंबर‑जनवरी में रात का तापमान तेजी से गिरने लगा है। इसे देखते हुए राजस्थान सरकार ने 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया है। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और अजमेर समेत अधिकांश संभागों के स्कूलों में यह आदेश लागू होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान किसी प्रकार की अनिवार्य शैक्षणिक गतिविधि नहीं कराई जाएगी। हालांकि, बोर्ड परीक्षाओं से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियों के लिए स्कूल मुख्यालय खुले रह सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">उत्तराखंड: मैदान और पहाड़ों के लिए अलग‑अलग शेड्यूल</h4>
<p style="text-align:justify;">भूगोल और ऊंचाई को देखते हुए उत्तराखंड में शीतकालीन अवकाश का कैलेंडर दो चरणों में बांटा गया है। मैदानी क्षेत्रों के कई स्कूलों में 1 से 13 जनवरी 2026 तक छुट्टी रहेगी,जबकि पहाड़ी जिलों में ठंड के लंबे और कड़े मौसम को देखते हुए 26 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक छुट्टियां प्रस्तावित हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, फिसलन और परिवहन की दिक्कतों के कारण स्कूलों का सुचारु संचालन मुश्किल होता है। ऐसे में लंबा अवकाश बच्चों के सुरक्षित घर पर रहने की दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है। विभाग ने ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म और वर्कशीट के माध्यम से पढ़ाई जारी रखने का सुझाव दिया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जम्मू‑कश्मीर: दिसंबर के पहले पखवाड़े में आंशिक अवकाश</h3>
<p style="text-align:justify;">जम्मू‑कश्मीर प्रशासन ने 8 से 14 दिसंबर 2025 तक शीतकालीन अवकाश का प्रथम चरण (आंशिक चरण) की घोषणा जा चुकी है। सर्दी के मौसम में यहां छुट्टियां आगे बढ़ाई जाएगी। घाटी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान शून्य से नीचे चला जाने के कारण बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना कठिन हो जाता है। आगे के चरणों में, मौसम की स्थिति के आधार पर जनवरी में भी अतिरिक्त अवकाश की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे छुट्टियों से पूर्व पाठ्यक्रम का मुख्य भाग पूरा कर लें और शीतकालीन अवकाश के दौरान छात्रों के लिए होम असाइनमेंट तैयार करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">छुट्टियां किन स्कूलों पर लागू, क्या रहेगा विशेष</h3>
<p style="text-align:justify;">इन राज्यों द्वारा जारी आदेश मुख्य रूप से तीन तरह के विद्यालयों पर लागू होते हैं। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल। मान्यता प्राप्त निजी स्कूल। कई जगह केंद्रीय/राष्ट्रीय बोर्ड से संबद्ध विद्यालय, जहां राज्य सरकार के निर्देशों का पालन किया जाता है। हालांकि, कुछ निजी या आवासीय स्कूल अपने आंतरिक कैलेंडर के अनुसार छुट्टियों की तिथियों में मामूली बदलाव कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को संबंधित स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट, नोटिस बोर्ड या मैसेज समूहों पर जारी सूचना को अंतिम मानना होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह: ठंड से बचाव के साथ पढ़ाई पर भी ध्यान</h3>
<p style="text-align:justify;">बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्ष भयाना का कहना है कि अत्यधिक ठंड में सुबह‑सुबह निकलने से बच्चों में सर्दी‑जुकाम, निमोनिया और फ्लू जैसे संक्रमण बढ़ जाते हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चों, अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित विद्यार्थियों के लिए यह मौसम जोखिम भरा होता है। इसलिए शीतकालीन अवकाश उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही, शिक्षा विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि अभिभावक छुट्टियों को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखें, बल्कि बच्चों को हल्की‑फुल्की पढ़ाई, पुस्तक‑पठन, क्रिएटिव गतिविधियों और खेलकूद के लिए प्रेरित करें। इससे वे नए सत्र में बिना किसी अंतराल के पढ़ाई पकड़ सकेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अभिभावकों के लिए उपयोगी सुझाव</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को मौसम के अनुकूल ऊनी कपड़े, टोपी, मफलर और दस्ताने पहनाकर ही बाहर भेजें। कोहरे और फिसलन वाले दिनों में अनावश्यक यात्रा से बचें, खासकर सुबह और देर शाम के समय। छुट्टियों के दौरान बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें और उन्हें इनडोर व आउटडोर दोनों तरह के खेलों में शामिल करें। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक हल्का‑फुल्का टाइम‑टेबल बनाकर नियमित अध्ययन की आदत बनवाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ठंड से सुरक्षा और शिक्षा के बीच संतुलन की कोशिश</h3>
<p style="text-align:justify;">उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों द्वारा घोषित शीतकालीन अवकाश यह दिखाता है कि सरकारें मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। अलग‑अलग राज्यों में तारीखें भले ही भिन्न हों, लेकिन उद्देश्य एक ही है। कड़ाके की ठंड में छात्रों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना। अभिभावकों और स्कूल प्रबंधनों की साझा जिम्मेदारी है कि वे इन छुट्टियों को सुरक्षित, उपयोगी और बच्चों के सर्वांगीण विकास के अनुकूल बनाने की दिशा में मिल‑जुलकर प्रयास करें।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Krishna Kumar Bedi: कैबिनेट मंत्री बेदी ने किया 9 गलियों का उद्घाटन और शिलान्यास" href="http://10.0.0.122:1245/cabinet-minister-bedi-inaugurated-and-laid-the-foundation-stone-of-nine-streets/">Krishna Kumar Bedi: कैबिनेट मंत्री बेदी ने किया 9 गलियों का उद्घाटन और शिलान्यास</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/with-the-increasing-cold-in-north-india-winter-holidays-have-been-declared-in-schools/article-79212</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 08:55:48 +0530</pubDate>
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                <title>Haryana Holidays: हरियाणा के स्कूलों में तीन दिन का अवकाश</title>
                                    <description><![CDATA[Haryana Holidays: हिसार, सच कहूँ/संदीप सिंहमार। करवा चौथ, दूसरा शनिवार व रविवार के चलते विद्यार्थियों और शिक्षकों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलने जा रही है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार 10 अक्टूबर, शुक्रवार को करवा चौथ पर्व के उपलक्ष्य में हरियाणा के सभी सरकारी व निजी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/three-day-holiday-for-schools-in-haryana/article-76685"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/haryana-holidays.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Haryana Holidays: हिसार, सच कहूँ/संदीप सिंहमार।</strong> करवा चौथ, दूसरा शनिवार व रविवार के चलते विद्यार्थियों और शिक्षकों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलने जा रही है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार 10 अक्टूबर, शुक्रवार को करवा चौथ पर्व के उपलक्ष्य में हरियाणा के सभी सरकारी व निजी स्कूल बंद रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद 11 अक्टूबर को माह का दूसरा शनिवार होने के कारण स्कूलों में नियमित अवकाश रहेगा, जबकि 12 अक्टूबर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश रहेगा। इस तरह विद्यार्थियों और शिक्षकों को 10, 11 और 12 अक्टूबर को लगातार छुट्टियां मिलेंगी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/ups-biggest-expressway-will-start-from-here-people-of-these-districts-and-villages-are-in-for-a-treat/#google_vignette">UP Expressway: यहां से शुरू होगा यूपी का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे, इन जिलों और गांवों के लोगों की हो गई बल्ले-बल्ले…</a></p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग के अनुसार यह आदेश प्रदेश के सभी सरकारी, एडेड व प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा। लंबे सप्ताहांत की वजह से छात्र-छात्राएं और शिक्षक 13 अक्टूबर, सोमवार को ही विद्यालय लौटेंगे।</p>
<h3>घूमने या त्योहार की तैयारियों में करेंगे | <strong>Haryana Holidays</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">त्यौहार और साप्ताहिक छुट्टियों के मेल से बने इस अवकाश क्रम ने बच्चों और शिक्षकों में खासा उत्साह पैदा कर दिया है। कई परिवार इस अवसर का उपयोग रिश्तेदारों से मिलने, घूमने या त्योहार की तैयारियों में करेंगे। वहीं, अभिभावक भी इस अवकाश को परिवार संग आनंदपूर्वक बिताने की योजना बना रहे हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/three-day-holiday-for-schools-in-haryana/article-76685</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 10:49:28 +0530</pubDate>
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                <title>School Holidays: बच्चों की हो गई बल्ले-बल्ले, नवरात्र में यहां हुई पूरे 9 दिनों की छुट्टियां</title>
                                    <description><![CDATA[School Holidays: अनु सैनी। धनबाद में नवरात्र 22 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। इसके साथ ही पूरा जिला पूजोत्सव के रंग में रंगने लगा है। स्कूल-कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक ने दुर्गा पूजा को लेकर अवकाश की घोषणा कर दी है। निजी और सरकारी स्कूलों का शेड्यूल | School Holidays अधिकतर निजी स्कूलों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/children-are-in-for-a-treat-with-nine-days-of-navratri-holidays-here/article-75985"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/school-holidays.jpg" alt=""></a><br /><p>School Holidays: <strong>अनु सैनी।</strong> धनबाद में नवरात्र 22 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। इसके साथ ही पूरा जिला पूजोत्सव के रंग में रंगने लगा है। स्कूल-कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक ने दुर्गा पूजा को लेकर अवकाश की घोषणा कर दी है।</p>
<h3>निजी और सरकारी स्कूलों का शेड्यूल | School Holidays</h3>
<p>अधिकतर निजी स्कूलों में 27 सितंबर से 5 अक्टूबर तक छुट्टी रहेगी। रविवार को शामिल करने पर छात्रों को कुल नौ दिनों का अवकाश मिलेगा। वहीं, सरकारी स्कूलों में अपेक्षाकृत कम अवकाश दिया गया है। यहां 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक केवल चार दिनों की छुट्टी घोषित हुई है।</p>
<h4>आईसीएसई और अन्य स्कूल</h4>
<p>आईसीएसई से जुड़े स्कूलों ने 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक छह दिनों की छुट्टी का ऐलान किया है। अधिकांश निजी स्कूल 6 अक्टूबर को दोबारा खुल जाएंगे।</p>
<h4>विश्वविद्यालय का अवकाश</h4>
<p>बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU) ने भी पूजा अवकाश घोषित किया है। यहां 28 सितंबर से 3 अक्टूबर तक छुट्टी रहेगी। साथ ही, 22 सितंबर को कलश स्थापना के अवसर पर भी अवकाश रहेगा।<br />
प्रमुख स्कूलों में अवकाश की स्थिति<br />
दिल्ली पब्लिक स्कूल कार्मिक नगर : 27 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
डिनोबिली स्कूल सीएमआरआई : 27 सितंबर – 2 अक्टूबर<br />
कार्मेल स्कूल धनबाद : 27 सितंबर – 2 अक्टूबर<br />
धनबाद पब्लिक स्कूल (केजी आश्रम व हीरक ब्रांच) : 28 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
द्वारिक मेमोरियल फाउंडेशन एकेडमी बिशुनपुर : 28 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
केंद्रीय विद्यालय-एक विनोद नगर : 27 सितंबर – 6 अक्टूबर<br />
सरकारी स्कूल : 28 सितंबर – 2 अक्टूबर<br />
बड्स गार्डन स्कूल राजगंज : 28 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
क्रेडो वर्ल्ड स्कूल : 28 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
सिंबायोसिस पब्लिक स्कूल बरवाअड्डा : 27 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल बैंक मोड़ : 27 सितंबर – 2 अक्टूबर<br />
किड्स गार्डन स्कूल झरिया : 28 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
मोंटफोर्ट एकेडमी आमाघाटा : 27 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
श्रीश्री सूर्यदेव सिंह स्मृति गुरुकुलम सरायढेला : 27 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर : 28 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
डीएवी पब्लिक स्कूल कोयला नगर : 27 सितंबर – 5 अक्टूबर<br />
BBMKU : 28 सितंबर – 3 अक्टूबर</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Sep 2025 11:49:34 +0530</pubDate>
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