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                <title>सच कहूँ विशेष स्टोरी - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Sach Kahoon 24th Anniversary: जसपाल के जज़्बे को सलाम! दोनों हाथ गंवाने के बाद भी हौसला कम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[हरमन प्यारा समाचार पत्र सच-कहूँ आज वीरवार को अपनी 24वीं वर्षगांठ मना रहा है। सच-कहूँ के प्रचार-प्रसार में जितना सच-कहूँ टीम का योगदान है उतना ही वितरक सेवादारों व पाठकों का है। आज हम एक ऐसे होनहार वितरक सेवादार से आपको रू-ब-रू  करवा रहे हैं जिसकी सेवा का जज्बा सुनकर आप सब भी हैरान रह जाएंगे। सच-कहूँ अपने इस वितरक सेवादार को दिल से सलाम करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sach-kahoon-24th-anniversary-salute-to-the-spirit-of-jaspal/article-86187"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/jaspal-insan-malikpura.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sach Kahoon 24th Anniversary: ओढ़ां, (राजू)। हरमन प्यारा समाचार पत्र सच-कहूँ आज वीरवार को अपनी 24वीं वर्षगांठ मना रहा है। सच-कहूँ के प्रचार-प्रसार में जितना सच-कहूँ टीम का योगदान है उतना ही वितरक सेवादारों व पाठकों का है। आज हम एक ऐसे होनहार वितरक सेवादार से आपको रू-ब-रू  करवा रहे हैं जिसकी सेवा का जज्बा सुनकर आप सब भी हैरान रह जाएंगे। सच-कहूँ अपने इस वितरक सेवादार को दिल से सलाम करता है। हम बात कर रहे हैं सरसा जिला के गांव मलिकपुरा निवासी जसपाल इन्सां की, जिसने 22 वर्ष पूर्व एक हादसे में दोनों हाथ खो दिए, लेकिन हौसला नहीं खोया। हौसले व आत्मविश्वास को जसपाल ने ऐसे समेटा की दिव्यांगता भी उसके सामने नतमस्तक हो गई। </p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जसपाल इन्सां के साथ करीब 22 वर्ष की उम्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ। इस हादसे ने उसके दोनों हाथ छीन लिए। हादसे के बाद उसे ये समझ नहीं आ रहा था किवह दोनों हाथों के बगैर अब कैसे जीएगा, कैसे उसकी जिंदगी कटेगी, कौन उसकी संभाल करेगा। इन तमाम सवालों के भंवर में फंसे जसपाल के लिए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन वचन नई उम्मीद की किरण साबित हुए। इस उम्मीद की किरण को जसपाल ने ऐसा ढाल बनाया कि आज वह लगभग सभी कार्य स्वयं ही कर लेता है। जसपाल का कहना है कि उसे अब जिंदगी से कोई शिकवा नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोई परेशानी नहीं :- </h3>
<p style="text-align:justify;">जसपाल एक अलग ही जोश के साथ सच-कहूँ वितरण की सेवा करता है। जसपाल ने पूछे जाने पर बताया कि उसे सच-कहूँ वितरण में कोई परेशानी नहीं। उसे ये हौसला उसके गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने दिया है। वह जो भी कुछ कर रहा है वो पूज्य गुरु जी की रहमत से ही संभव हो पा रहा है। गांव के पाठकों के मुताबिक गांव में सुबह समय पर अखबार का वितरण समय पर हो रहा है। पाठकों ने जसपाल के जज्बे को सलाम करते हुए उसकी सराहना की है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">22 वर्ष पूर्व खो दिए थे दोनों हाथ </h3>
<p style="text-align:justify;">करीब 22 वर्ष पूर्व घर के निकट ट्रांसफार्मर पर फ्यूज लगाते समय जसपाल को अचानक करंट लग गया था। इस हादसे में उसे कोहनी से ऊपर तक दोनों हाथ खोने पड़े। हादसे के 2 दिन बाद परिजनों ने जसपाल की शादी के विषय में बातचीत करने जाना था। लेकिन शायद नियति को ये स्वीकार न था। जसपाल ने बताया कि उसे जिंदगी से अब कोई गिला नहीं है। जो लोग कई बार विकट परिस्थितियां आने के बाद हौसला छोड़ देते हैं उन लोगोंं से जसपाल ने अपील करते हुए कहा कि हौसला न छोड़ें। हिम्मत-हौसला है तो सब-कुछ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">5 वर्षों से दे रहा है निरंतर सेवा, बना रखा है स्पेशल थैला </h3>
<p style="text-align:justify;">जसपाल ने जिस दिन से गांव में सच-कहूँ वितरण की सेवा संभाली है तब से वह पिछले निरंतर 15 वर्षों से सराहनीय सेवा दे रहा है। पहले सच-कहूँ नेशनल हाईवे पर गांव मिठड़ी में उतरता था जो उनके गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर पड़ता है। अलसुबह उठकर नारा लगाकर वह पैदल ही सच-कहूँ लेने चला जाता। लेकिन कुछ समय बाद अखबार का बंडल उसके घर आना शुरू हो गया। सुबह करीब साढ़े 5 बजे जसपाल के पास सच-कहूँ का बंडल पहुंच जाता है। जसपाल ने अपनी सुविधा के अनुसार स्पेशल थैला बना रखा है। जिसमें अखबार डालकर वह पैदल ही गांव में वितरण के लिए निकल जाता है। जसपाल करीब एक घंटे में ये सेवा पूरी कर लेता है। जसपाल गले में डाले गए स्पेशल थैले से मुंह से अखबार निकालता है और अपने कटे हुए दोनों हाथों से सत्कार से पाठक को दे देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 10:45:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व नेत्रदान दिवस विशेष: पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से लौटी हजारों जिंदगियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[करीब आठ महीने पहले तक फतेहाबाद निवासी 28 वर्षीय भारती पत्नी सोनू की जिंदगी अंधेरे में डूबी हुई थी। दोनों आंखों की रोशनी चली जाने के कारण उनके लिए जीवन की राह मुश्किल हो गई थी। उम्मीद की किरण के साथ भारती सरसा स्थित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचीं। यहां पूज्य माता करतार कौर जी इंटरनेशनल आई बैंक के माध्यम से उनकी दोनों आंखों का सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/world-eye-donation-day-special-the-light-of-thousands-of/article-86140"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/eye-donation-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">World Eye Donation Day 2026: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा/विनोद शर्मा )। करीब आठ महीने पहले तक फतेहाबाद निवासी 28 वर्षीय भारती पत्नी सोनू की जिंदगी अंधेरे में डूबी हुई थी। दोनों आंखों की रोशनी चली जाने के कारण उनके लिए जीवन की राह मुश्किल हो गई थी। घर का कामकाज हो, खाना खाना हो या कहीं आना-जाना, हर छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें दूसरों का सहारा लेना पड़ता था। कई अस्पतालों और चिकित्सकों से उपचार कराने के बावजूद कोई लाभ नहीं हुआ। Fatehabad News</p><p style="text-align:justify;">ऐसे में चिकित्सकों ने उन्हें कॉर्निया प्रत्यारोपण (पेनिट्रेटिंग केराटोप्लास्टी) की सलाह दी। उम्मीद की इसी किरण के साथ भारती सरसा स्थित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचीं। यहां पूज्य माता करतार कौर जी इंटरनेशनल आई बैंक (Pujya Mata Kartar Kaur Ji International Eye Bank) के माध्यम से उनकी दोनों आंखों का सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन के बाद जब भारती ने दोबारा इस खूबसूरत दुनिया को देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जो जिंदगी कभी अंधेरे में खो चुकी थी, वह फिर से रोशनी, आत्मविश्वास और नई उम्मीदों से भर उठी।</p><p style="text-align:justify;">भारती की यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की दास्तान है, जिनके जीवन में नेत्रदान के माध्यम से उजाला लौटा है। यह संभव हुआ है डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से चलाए जा रहे मानवता भलाई के कार्यों के कारण।</p><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने हमेशा मानवता की सेवा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए जरूरतमंदों की सहायता के लिए समाज को प्रेरित किया है। ज्योतिदान यानी मरणोपरांत नेत्रदान भी उन्हीं 175 मानवता भलाई कार्यों में से एक है, जिसने हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी पहुंचाई है। पूज्य गुरु जी की प्रेरणा का ही परिणाम है कि डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायियों ने नेत्रदान को एक जनआंदोलन का रूप दिया है। अब तक 18,643 डेरा अनुयायियों की ओर से मरणोपरांत नेत्रदान किया जा चुका है। इनमें से 18,125 से अधिक नेत्रदान सरसा स्थित पूज्य माता करतार कौर जी इंटरनेशनल आई बैंक में दर्ज किए गए हैं, जबकि डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु अपनी मृत्यु के बाद नेत्रदान करने का लिखित संकल्प ले चुके हैं।</p><p style="text-align:justify;">शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञा डॉ. मोनिका गर्ग इन्सां के अनुसार किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी आंखों का कॉर्निया दो जरूरतमंद व्यक्तियों को रोशनी दे सकता है। यही कारण है कि नेत्रदान को महादान कहा जाता है। यह केवल आंखों का दान नहीं, बल्कि किसी की खो चुकी उम्मीदों, सपनों और आत्मविश्वास को वापस लौटाने का माध्यम है। जब कोई व्यक्ति इस दुनिया से विदा होने के बाद भी अपनी आंखें दान करता है, तो वह किसी दूसरे के जीवन में उजाला बनकर हमेशा जीवित रहता है।</p><h3 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी का संदेश: आंखें साथ नहीं जाती, किसी की जिंदगी रोशन कर जाती हैं</h3><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि कुछ लोग कहते हैं कि यदि आंखें किसी को दान कर दी जाएं तो अगले जन्म में आंखें नहीं मिलेंगी। इस पर पूज्य गुरु जी समझाते हैं कि क्या कोई अपनी आंखें अपने साथ लेकर जा सकता है? जब शरीर का अंतिम संस्कार किया जाता है तो आंखें भी उसी में नष्ट हो जाती हैं और यदि दफनाया जाता है तो वे मिट्टी में गल जाती हैं। ऐसे में बेहतर यही है कि इंसान जाते-जाते अपनी आंखें दान कर जाए, ताकि उसकी आंखों से कोई दृष्टिबाधित व्यक्ति इस संसार को देख सके। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जिन जरूरतमंदों को रोशनी मिलेगी, उनकी दुआएं दानदाता और उसकी आने वाली पीढ़ियों के लिए आशीर्वाद बनेंगी। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे नेक और मानवता भलाई के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/bharti-ftb.jpg" alt="Bharti-FTB" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
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                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:14:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आज भी साइकिल को स्वस्थ जीवन की पहचान मानते हैं बुजुर्ग</title>
                                    <description><![CDATA[साइकिलिंग बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी: डॉ. प्रवीण ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/even-today-the-elderly-consider-cycling-as-a-sign-of/article-85854"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/narayangarh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नारायणगढ़ सचकहूँ/सुरजीत कुराली।</strong> विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर क्षेत्र के ऐसे लोगों से बातचीत की गई जिन्होंने दशकों से साइकिल को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया हुआ है। लोगों का मानना है कि नियमित साइकिल चलाने की आदत ने उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और ऊजार्वान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं नागरिक अस्पताल नारायणगढ़ के एसएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने भी साइकिलिंग को बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी बताया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार नियमित रूप से साइकिल चलानी चाहिए। साइकिलिंग हृदय को मजबूत बनाती है, मांसपेशियों की शक्ति और लचीलेपन को बढ़ाती है तथा शरीर की सहनशक्ति में सुधार करती है। उन्होंने बताया कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के लिए भी नियमित साइकिलिंग लाभकारी साबित हो सकती है। इसके अलावा साइकिल चलाने से तनाव कम होता है, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अनुशासित दिनचर्या का प्रतीक है साइकिल </h4>
<p style="text-align:justify;">गांव बड़ी बस्सी के युवा सुरेंद्र राणा ने कहा कि साइकिल केवल एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, स्वच्छ पर्यावरण और अनुशासित दिनचर्या का प्रतीक है। आज के समय में जब लोग छोटी-छोटी दूरियों के लिए भी मोटर वाहनों का उपयोग करने लगे हैं, ऐसे में साइकिल का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">84 वर्षीय सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक बोले</h5>
<p style="text-align:justify;">84 वर्षीय सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक जगदीश चंद वर्मा ने बताया कि छात्र जीवन से लेकर सरकारी सेवा के अंतिम दिनों तक उन्होंने साइकिल का निरंतर उपयोग किया। विभिन्न विद्यालयों में नियुक्ति के दौरान वे प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर तक साइकिल चलाते थे। उनका कहना है कि नियमित साइकिलिंग ही उनके अच्छे स्वास्थ्य का प्रमुख आधार है। आज भी वे बाजार एवं अन्य दैनिक कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग करते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में साइकिल को स्थान दें और प्रतिदिन कुछ समय साइकिल चलाकर स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">71 की उम्र में भी साइकिल चलाते हैं रमा शंकर</h4>
<p style="text-align:justify;">नारायणगढ़ निवासी रमा शंकर ने बताया कि उनकी आयु लगभग 71 वर्ष है और वे वर्षों से नियमित रूप से साइकिल चला रहे हैं। वर्तमान में भी वे कालाआंब स्थित अपने कार्यस्थल तक साइकिल से ही आते-जाते हैं और प्रतिदिन लगभग 20 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उन्होंने बताया कि साइकिलिंग के साथ-साथ योगाभ्यास भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनका मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली, नशामुक्त जीवन और नियमित व्यायाम व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1977 में हुआ था साइकिल से लगाव आज तक बरकरार </h4>
<p style="text-align:justify;">गांव काठेमाजरा निवासी गुलजारा राम ने बताया कि वर्ष 1977 से उनका साइकिल से विशेष लगाव रहा है। स्कूल के दिनों में खरीदी गई पुरानी साइकिल से शुरू हुआ यह सफर आज भी जारी है। लगभग 64 वर्ष की आयु में भी वे प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी सेवा के दौरान भी वे साइकिल से ही कार्यालय आते-जाते थे। आज भी खेती-बाड़ी और पशुपालन से जुड़े कार्यों में साइकिल उनकी पहली पसंद है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:41:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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                <title>यहां फव्वारों से नहा रहे शेर, लंगूर खा रहे तरबूज-खीरा लेकिन...</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी अपना पूरा असर दिखा रही है। दोपहर के समय चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के कारण घर से निकलना भी मुश्किल हो रहा है। गर्मी के चलते चिड़िया घर में जानवरों को विशेष सुविधा दी जा रही है। जानवरों पर कहीं पानी बौछारों से गर्मी को कम करने का प्रयास किया जा रहा है, कहीं कूलरों के माध्यम से गर्मी से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/here-lions-are-bathing-in-fountains-langurs-are-eating-watermelon/article-85307"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/pipli-zoo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। गर्मी अपना पूरा असर दिखा रही है। दोपहर के समय चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के कारण घर से निकलना भी मुश्किल हो रहा है। गर्मी के चलते चिड़िया घर में जानवरों को विशेष सुविधा दी जा रही है। जानवरों पर कहीं पानी बौछारों से गर्मी को कम करने का प्रयास किया जा रहा है, कहीं कूलरों के माध्यम से गर्मी से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं जानवरों की डाइट भी मौसम के हिसाब से बदल दी गई है। भीषण गर्मी का असर चिड़ियाघर में आने वाले पर्यटकों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य दिनों में जहां हर रोज 700 से 1 हजार लोग पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 200 से 250 तक रह गई है। पिपली स्थित चिड़िया घर (Pipli Zoo) में शेर-शेरनी साक्षी और शिवा के साथ पेंथर रीना और रवि को गर्मी से बचाने के लिए लगातार पानी के फव्वारे चलाए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके बाड़ों के आसपास कूलर लगाए गए हैं ताकि तापमान कम रखा जा सके। हाइना समेत दूसरे जानवरों के लिए भी ठंडे माहौल की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा भी अन्य प्रयास किया जा रहे हैं, ताकि गर्मी को कम किसर जा सके। जानवरों के बाड़ों के ऊपर एग्रोनेट लगाई गई है ताकि सीधी धूप अंदर न पहुंचे। </p>
<h4 style="text-align:justify;">रोजाना बदला जा रहा तालाबों का पानी </h4>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया घर में पानी वाले जानवरों के लिए रोजाना तालाबों का पानी बदला जा रहा है। ताकि जानवर पानी पीने के साथ उसमें बैठकर गर्मी से राहत ले सकें। दोपहर के समय जानवर अपने बाड़े के अंदर ही रहते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ जानवरों के खानपान में भी बदलाव किया गया है, ताकि किसी भी जानवर की तबीयत पर असर न पड़े। गर्मी से राहत देने के लिए जानवरों के खाने में बदलाव किया गया है। लंगूरों और पक्षियों को तरबूज और खीरा दिया जा रहा है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। सांभर और काले हिरणों की डाइट में मिक्स मिनरल शामिल किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">14 प्रजातियों के 74 जानवर बढ़ा रहे चिड़िया घर की शोभा </h4>
<p style="text-align:justify;">वन्य प्राणी विभाग के इंचार्ज देवेंद्र कुमार ने बताया कि पिपली चिड़िया घर में इस समय 14 प्रजातियों के कुल 74 जानवर हैं। इनमें 31 नर और 31 मादा जानवर शामिल हैं, जबकि 12 बच्चे भी हैं। जू में शेर, पेंथर, हाइना, गीदड़, मगरमच्छ, घड़ियाल, जंगली मुर्गा, क्लीज, सांभर, काला हिरण, मोर, तीतर, दरियाई घोड़ा और लंगूर जैसे कई वन्य जीव मौजूद हैं। देवेंद्र के अनुसार जानवरों और पक्षियों के लिए हर जरूरी इंतजाम किए गए हैं। पेड़ों पर पानी से भरे सकोरे बांधे गए हैं और उनका पानी लगातार बदला जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 10:48:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Shah Satnam Ji Educational Institute Results: खेल और शिक्षा का अद्भुत संगम हैं शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान: डॉ नवजीत भुल्लर</title>
                                    <description><![CDATA[शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों  ने CBSE बोर्ड परिणाम 2025-26 में शानदार सफलता हासिल की। संस्थानों के विद्यार्थियों  ने खेलों के साथ-साथ पढ़ाई में भी  95% से अधिक अंक प्राप्त कर मिसाल पेश की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/shah-satnam-ji-educational-institute-results-shah-satnam-ji-educational/article-84846"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/shah-satnam-ji-boys-school.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shah Satnam Ji Educational Institute Results: सरसा। आज के समय में अक्सर यह धारणा सुनने को मिलती है कि जो बच्चे खेलों में अधिक रुचि लेते हैं, वे पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। लेकिन (Shah Satnam Ji Educational Institute) शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थानों (जोकि पूरे भारत में कई स्थानों पर स्थित हैं) ने इस धारणा को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। यह संस्थान न केवल विद्यार्थियों को खेलों में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर तक पहुंचा रहा है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। Students Success Story</p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान के टॉपर छात्र जोकि खिलाडी भी हैं-अभिषेक 96.80% (वाणिज्य), आर्यन 94.40% (आर्ट्स, राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी), पराग 93.80% (आर्ट्स, अंडर-19 एसोसिएशन राज्य स्वर्ण पदक (क्रिकेट), यशवर्धन 92.40% (विज्ञान) 90% से अधिक अंक, अवनीत इंसान 90.60% (विज्ञान), आर्यन 90.20% (आर्ट्स, वाणिज्य, राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी),  रवि कांत 90.00%, कक्षा - XII (2025-2026) में हमारे परिणाम- 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 7 छात्र, 80% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 45 छात्र, विशेष योग्यता (Distinction) वाले 75-80% 26 छात्र, 60% से अधिक अंक लेने वाले 68 छात्र हैं जो संस्थान की उपलब्धियों को दर्शाते हैं।  </p>
<p style="text-align:justify;">वहीं शाह सतनाम जी संस्थान के मुख्य कोच डॉ नवजीत भुल्लर ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2025-26 के घोषित परिणामों में विद्यालय के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि अनुशासन, सही मार्गदर्शन और मेहनत के बल पर खेल के साथ साथ पढ़ाई में भी उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है। विद्यालय का शत-प्रतिशत परिणाम इसकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने कहा है कि अमूमन लोग यह धारणा रखते हैं कि जो खिलाड़ी होते हैं वो पढाई में कमजोर रहते हैं लेकिन डेरा सच्चा सौदा के शिक्षण संस्थानों में पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन मार्गदर्शन में यहां के खिलाड़ी खेलों में परचम लहराने के साथ साथ शिक्षा में भी टॉप कर रहें हैं। विद्यालय के कई छात्र 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में शामिल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष बात यह रही कि इनमें कई विद्यार्थी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खिलाड़ी भी हैं। किसी ने वॉलीबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, तो किसी ने क्रिकेट और फुटबॉल में राज्य एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा में भी शानदार उपलब्धियां हासिल कर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि खेल बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करते हैं, जबकि शिक्षा उन्हें उज्ज्वल भविष्य की दिशा प्रदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही संतुलन शाह सतनाम जी बॉयज़ स्कूल को अन्य संस्थानों से अलग पहचान देता है। आज यह संस्थान उन अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो यह मानते हैं कि खेल और पढ़ाई एक साथ नहीं चल सकते। यहां के परिणाम स्पष्ट बताते हैं कि यदि सही वातावरण और मार्गदर्शन मिले, तो विद्यार्थी मैदान में भी जीत सकते हैं और परीक्षा में भी उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर सकते हैं। Students Success Story</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 11:52:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जींद: सात महीने में बर्बाद! खोखरी का पार्क अब बच्चों के लिए सांपों का अड्डा बन गया</title>
                                    <description><![CDATA[जींद: सात महीने में बर्बाद! खोखरी का पार्क अब बच्चों के लिए सांपों का अड्डा बन गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/jinds-khokri-park-which-was-ruined-in-seven-months-has/article-84723"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/jind.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जींद, गुलशन चावला।  </strong>हरियाणा के जींद जिले के गांव खोखरी में विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा बनाए गए पार्क का लोकार्पण 2 अक्टूबर 2025 को हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्डा ने किया था। उस समय पूरे गांव में उत्साह था और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि यह पार्क बच्चों का पसंदीदा खेल स्थल बनेगा। लेकिन महज सात महीने बाद पार्क की हालत बेहद खराब हो चुकी है। पार्क में अब घुटनों तक ऊंची घास-फूस उग आई है। चारों तरफ जंगली झाड़ियां फैल गई हैं। शाम होते ही यहां बच्चों का जमावड़ा लग जाता है, लेकिन साथ ही सांप, बिच्छू और कीड़ों-मकोड़ों का खतरा भी मंडराने लगा है। माता-पिता अब अपने बच्चों को पार्क भेजने में डर महसूस कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायत खोखरी के सरपंच प्रतिनिधि रामदर्शन से जब सफाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘पंचायत के पास अभी कोई पैसा नहीं है और ना ही कोई कमाई का साधन है। पहले मनरेगा के जरिए दो बार सफाई करवाई गई थी, लेकिन अब सरकार ने मनरेगा के तहत सफाई का काम बंद कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर ह्यजी राम जीह्ण किए जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं ब्लॉक समिति सदस्य प्रतिनिधि अमरजीत ने सफाई की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा, ‘पार्क की सफाई की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। हम इस दायरे में नहीं आते।ह्वसबसे चिंताजनक बात यह है कि पार्क की दीवारों पर ग्राम पंचायत और ब्लॉक समिति के प्रतिनिधियों ने अपने नाम बड़े-बड़े अक्षरों में लिखवा रखे हैं, लेकिन सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है। पार्क के बाहर मिट्टी और ईंटों का ढेर अभी भी पड़ा हुआ है। गांववासी अब सवाल कर रहे हैं कि जब लोकार्पण के समय इतना उत्साह था तो रखरखाव की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या यह पार्क सिर्फ फोटो खिंचवाने और नाम लिखवाने तक सीमित रह जाएगा? स्थानीय प्रशासन,जनप्रतिनिधियों और पंचायत से ग्रामीणों की मांग है कि पार्क की तुरंत सफाई करवाई जाए और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। खोखरी का यह पार्क फिलहाल राम भरोसे चल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 10:58:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश के बाद सरसा शहर में बढ़ी बदबू, कूड़े के ढेरों के पास से गुजरना हुआ मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश के बाद सरसा शहर में बढ़ी बदबू, कूड़े के ढेरों के पास से गुजरना हुआ मुश्किल
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/after-the-rain-the-smell-increased-in-sarsa-city-it/article-84655"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/sirsa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा सच कहूँ/सुनील वर्मा।</strong> शहर में सोमवार को हुई पांच से सात एमएम बारिश ने सफाई व्यवस्था की बदहाल तस्वीर और भी खराब कर दी। शहर के विभिन्न इलाकों में बने डंपिंग प्वाइंटों पर पड़े हजारों टन कचरे से उठ रही बदबू ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया। बारिश के बाद निकली तेज धूप और उमस के कारण हालात और गंभीर हो गए। लोग डंपिंग प्वाइंटों के आसपास से गुजरने से भी बचते नजर आए। शहर में आठ से अधिक स्थानों पर कचरे के बड़े ढेर लगे हुए हैं। बारिश के कारण कचरे के आसपास पानी जमा हो गया, जिससे दुर्गंध फैलने लगी। कई इलाकों में स्थिति इतनी खराब रही कि लोगों को नाक पर कपड़ा रखकर निकलना पड़ा। वहीं लंबे समय से जारी सफाई कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल अब 14 मई तक बढ़ा दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर 15 मई को मुख्यमंत्री के प्रस्तावित सरसा दौरे को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। खासकर बरनाला रोड को पूरी तरह साफ करवाने की तैयारी चल रही है। नगर परिषद प्रशासन ने पहले ही दो ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात कर दिए हैं। ऐसे में कभी भी विशेष सफाई अभियान शुरू किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन फिलहाल रणनीति बनाकर चुप्पी साधे हुए है और अचानक बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया जा सकता है। यदि इस बार अभियान सफल रहा तो हड़ताल का असर कम पड़ सकता है और प्रशासनिक स्तर पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। बताया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को हिरासत में भी लिया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">जिले में कचरे की स्थिति चिंताजनक</h5>
<p style="text-align:justify;">हड़ताल के चलते जिलेभर में हजारों टन कचरा जमा हो चुका है। अनुमानित स्थिति के अनुसार सरसा शहर में करीब 1350 टन, रानियां में 400 टन, ऐलनाबाद में 760 टन, कालांवाली में 550 टन और डबवाली में लगभग 880 टन कचरा जमा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"> लोगों को समझा रहे सफाई कर्मचारी</h4>
<p style="text-align:justify;">हड़ताल के चलते डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। इससे आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सफाई कर्मचारी यूनियन के सदस्य अब लोगों के बीच जाकर अपनी मांगों को समझाने में जुटे हैं। उनका कहना है कि उनका मकसद जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित मांगों को मनवाना है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2018 से उनकी मांगें लंबित हैं, लेकिन सरकार समाधान नहीं कर रही। उन्होंने दावा किया कि मांगें पूरी होते ही वे 24 घंटे के भीतर दिन-रात काम कर शहर को फिर से स्वच्छ बना देंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पहले भी चला था विशेष अभियान, 200 टन कचरा उठाया</h4>
<p style="text-align:justify;">चार दिन पहले नगर परिषद प्रशासन ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अगुवाई में विशेष अभियान चलाकर शहर के आठ डंपिंग प्वाइंटों से करीब 200 टन कचरा उठवाया था। इस दौरान 14 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था। अलसुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के जरिए प्रशासन ने संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:28:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Mother's Day 2026: सरसा के कंगनपुर की सतवीर कौर की कहानी हर किसी की आंखें नम कर देती है!</title>
                                    <description><![CDATA[मां अपने बच्चों के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष करती है। उनके सुख-दुख में खुद को भूल जाती है। लेकिन जब वही मां जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर अकेली रह जाए, तो उसका दर्द शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। सिरसा के निकटवर्ती गांव कंगनपुर की 68 वर्षीय सतवीर कौर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो मदर्स डे पर हर किसी की आंखें नम कर देती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/children-separated-relationships-broken-still-waiting-for-loved-ones-in/article-84525"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/rania-mother&#039;s-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Mother's Day: 2026: रानियां (सच कहूँ/राजेंद्र गाबा)। मां अपने बच्चों के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष करती है। उनके सुख-दुख में खुद को भूल जाती है। लेकिन जब वही मां जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर अकेली रह जाए, तो उसका दर्द शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। सिरसा के निकटवर्ती गांव कंगनपुर की 68 वर्षीय सतवीर कौर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो मदर्स डे पर हर किसी की आंखें नम कर देती है। कभी हंसते-खेलते परिवार की मुखिया रही सतवीर कौर आज अपने 70 वर्षीय पति सुखदेव सिंह के साथ रानियां स्थित मानव सेवा अनाथ व वृद्धा आश्रम में जीवन गुजार रही हैं। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">चेहरे पर झुर्रियां हैं, आंखों में अपनों के बिछड़ने का दर्द और दिल में अब भी परिवार लौट आने की एक छोटी सी उम्मीद बाकी है। आश्रम के एक कमरे में बैठी सतवीर कौर जब अपने अतीत को याद करती हैं तो उनकी आंखें भर आती हैं। कांपती आवाज में उन्होंने बताया कि उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी थी। दोनों शादीशुदा थे। घर में बहू, एक पौत्र और दो पौत्रियां थीं। परिवार खुशहाल था, लेकिन वक्त ने ऐसा करवट बदला कि सब कुछ बिखर गया। उन्होंने बताया कि बेटा नशे की गिरफ्त में आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">लाख समझाने और संभालने की कोशिशों के बावजूद वह इस लत से बाहर नहीं निकल पाया और एक दिन उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत का दुख परिवार अभी सह भी नहीं पाया था कि कुछ समय बाद उनकी इकलौती बेटी भी बीमारी के कारण दुनिया छोड़ गई। दोनों बच्चों की मौत के बाद पति-पत्नी पूरी तरह टूट गए। दुखों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। सतवीर कौर का आरोप है कि उनकी ननंद ने मकान और जायदाद पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वे अपनी विधवा बहू, एक पौत्र और दो पौत्रियों के साथ बेघर हो गए। हालात ऐसे बने कि उन्हें आश्रम का सहारा लेना पड़ा। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">करीब एक साल से सुखदेव सिंह और सतवीर कौर मानव सेवा अनाथ व वृद्धा आश्रम रानियां में रह रहे हैं। आश्रम ही अब उनका घर है। यहीं रहने-खाने से लेकर दवाइयों तक की व्यवस्था हो रही है। आश्रम संचालक बबलू प्रजापत बताते हैं कि बुजुर्ग दंपती बेहद शांत स्वभाव के हैं, लेकिन अपने परिवार को याद कर अक्सर भावुक हो जाते हैं। सतवीर कौर कहती हैं कि बीते एक साल में परिवार या रिश्तेदारी से कोई भी सदस्य उनसे मिलने नहीं आया। उन्हें अपने बहू, पौत्र और पौत्रियों की कोई खबर नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह दर्द उन्हें हर दिन अंदर से तोड़ता है। अपनी भीगी आंखों को पोंछते हुए सतवीर कौर ने कहा जब भगवान ही नाराज हो गया, तो अब अपनों से क्या गिला-शिकवा करें। मदर्स डे पर जहां दुनिया मां के त्याग और ममता को सलाम कर रही है, वहीं सतवीर कौर जैसी कई मांएं ऐसी भी हैं, जो जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर सिर्फ अपनापन और दो मीठे बोल सुनने की आस में दिन काट रही हैं। उनकी कहानी समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिन हाथों ने बच्चों को संभाला, क्या बुढ़ापे में उन हाथों को सहारे की जरूरत नहीं होती? Sirsa News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ambala: कागजों में नियम, हकीकत में अंधेरा, अंबाला के हॉस्टल में बंद कैमरे और टूटी ग्रिल बढ़ा रही चिंता।</title>
                                    <description><![CDATA[Ambala: प्रशासनिक पंजीकरण की सख्ती और एकेडमी की अनियमितताओं के बीच झूलती मासूमों की सुरक्षा पर एक विशेष रिपोर्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/rules-on-paper-darkness-in-reality-closed-cameras-and-broken/article-84361"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/ambala.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/ambala.jpg" alt="Ambala" width="628" height="357"></img>(सच कहूँ न्यूज़)।</strong> अंबाला जिला प्रशासन ने बाल देखभाल संस्थानों के लिए पंजीकरण की अनिवार्य शर्त लागू कर दी है। उपायुक्त अजय सिंह तोमर की अध्यक्षता में हुई बुधवार की समीक्षा बैठक में साफ किया गया कि किशोर न्याय अधिनियम-2015 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी संस्था चाहे वह धार्मिक हो या एनजीओ, बच्चों को आश्रय नहीं दे पाएगी। जिला बाल संरक्षण अधिकारी ममता रानी ने इसे कानूनी रूप से दंडनीय अपराध बताते हुए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। प्रशासन का यह कदम कागजों पर बेहद सुदृढ़ नजर आता है, लेकिन हालिया घटनाक्रम बताते हैं कि असली चुनौती रजिस्ट्रेशन नहीं, बल्कि रेगुलेशन है।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस सरकारी कवायद के बीच उगाला स्थित एक एकेडमी का मामला व्यवस्था की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यहाँ से 4 से 9 साल की तीन बच्चियां रात के अंधेरे में खिड़की की ग्रिल तोड़कर भाग निकली थीं। जोकि बदहवास हालत में रोड़ किनारे उगाला के पंच संजीव को यह केवल एक पलायन नहीं था, बल्कि उन सुरक्षा दावों की नाकामी थी जिन्हें प्रशासन अनिवार्य बता रहा है। डीएसपी बराडा सुरेश कौशिक की जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं। जांच के दौरान संस्थान के सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए। जब सुरक्षा की पहली दीवार यानी तकनीकी निगरानी ही ऑफ हो, तो वहां रहने वाले बच्चों की सुरक्षा केवल प्रबंधन की दया पर निर्भर रह जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"> भूखा रखने और प्रताड़ना के आरोप</h4>
<p style="text-align:justify;">             जांच में केवल बंद कैमरे ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रशासनिक अनियमितताएं भी पाई गई हैं। सवाल यह उठता है कि जिस संस्थान में मासूम बच्चियां शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगा रही हों, वहां पंजीकरण की औपचारिकता क्या वास्तव में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगी? कानून के अनुसार संस्थानों को बच्चों के लिए घर जैसा माहौल देना चाहिए, लेकिन ग्रिल तोड़कर भागने की मजबूरी कुछ और ही कहानी बयां करती है। क्षेत्र में यह सवाल भी गूंज रहा है कि डीएसपी की रिपोर्ट में अनियमितताएं उजागर होने के बाद अब तक संस्थान पर क्या ठोस कार्रवाई हुई है?</p>
<p style="text-align:justify;">          बाल कल्याण समिति की स्टेट चेयरपर्सन रंजीता मेहता ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए कहा, हमने उन तीनों बच्चियों की काउंसलिंग की थी, उस समय बच्चियों का हॉस्टल में मन नहीं लग रहा था। हम समय-समय पर औचक निरीक्षण और छापामार कार्रवाई करके वास्तविकता की जांच करते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए हमारा विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">             मेहता का यह बयान आश्वासन तो देता है, लेकिन छापामार कार्रवाई और वास्तविकता की जांच जैसे शब्दों की असली परीक्षा तब होगी, जब भविष्य में अंबाला का कोई भी बाल गृह बंद कैमरों और टूटी ग्रिलों की सुर्खियों से मुक्त होगा। फिलहाल, प्रशासन के सामने चुनौती केवल पंजीकरण की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन बंद कैमरों के पीछे छिपी अनियमितताओं को स्थायी रूप से बंद करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 10:39:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आलीशान कोठियों के लिए पक्की ईंटों  तैयार करने वाले मजदूरों के खुद के अरमान कच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[ आज के दौर में हर इन्सान आलीशान जिंदगी, महंगी कारों और ऊंची कोठियों के सपने देखता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-workers-who-prepare-baked-bricks-for-luxurious-mansions-have/article-84129"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/firozpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फिरोजपुर (सच कहूँ/जगदीप सिंह)। </strong>Firozpur News: आज के दौर में हर इन्सान आलीशान जिंदगी, महंगी कारों और ऊंची कोठियों के सपने देखता है। लेकिन इन आलीशान इमारतों की नींव में लगने वाली पक्की ईंटें तैयार करने वाले मजदूरों की हालत बेहद दयनीय है। दूसरों के लिए पक्के घरों का इंतजाम करने वाले ये मजदूर खुद कच्चे अरमानों और टूटी छतों के नीचे जिंदगी बसर करने के लिए मजबूर हैं। कई परिवार तो पीढ़ी दर पीढ़ी भट्ठों पर मिट्टी से मिट्टी हो रहे हैं, लेकिन उनकी आर्थिक हालत आज भी ज्यों की त्यों ही बनी हुई है। विभिन्न भट्ठों पर र्इंटें बनाने वाले मजदूरों से मिलने पर उनकी घरों की हालत देखी गई, जो उनके अपने भी नहीं थे।</p>
<p style="text-align:justify;">वे बेहद कठिन हालात में अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ भीषण गर्मी, सर्दी और मानसून की बारिश में रहते हैं। भट्ठों पर पंजाब के मजदूरों के अलावा, बहुत संख्या में प्रवासी मजदूर भी हैं, जो अपने बच्चों के साथ यहाँ रह रहे हैं और उनके भी अपने दु:ख हैं। बिहार के मजदूर अर्जुन ने बातचीत करते हुए बताया कि उसके चार बच्चे हैं और खुद पति-पत्नी मिलाकर कुल परिवार में छह लोग हैं। यदि छोटे बच्चे भी साथ लगते हैं, तो पूरे दिन में वे करीब 2000 कच्ची ईंटें निकालते हैं, जिनकी मजदूरी उन्हें सिर्फ 550 रुपये प्रति हजार र्इंट मिलती है। इतनी महंगाई में घर चलाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इन मजदूरों के बच्चों की हालत देखकर यह साफ दिखता है कि कई बच्चों के पैरों में न तो चप्पल हैं और कई बिना कपड़ों के भीषण गर्मी में तप रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, पंजाबी मजदूर गुरबख्श सिंह निवासी लक्खोके बहिराम ने बताया कि वह बचपन से ही र्इंटें निकाल रहे हैं। पहले वह घुबाया गाँव में रहते थे, फिर लक्खोके बहिराम के पास स्थित भट्ठे पर वह अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि भट्ठों पर मजदूरी करना बहुत मुश्किल है, गर्मी और सर्दी की परवाह किए बिना मिट्टी से मिट्टी होना पड़ता है। घर दूर होने के कारण रोजाना आना-जाना मुश्किल होता है, और अपने असल घरों से दूर रहकर ही भट्ठे पर बने कच्चे-पक्के क्वार्टर्स में रहकर परिवार का पालन पोषण करना पड़ता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ-साथ मजदूरी पर अधिक ध्यान</h4>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण, कुछ समय पहले तक दोनों अधिकारों से वंचित रहने वाले भट्ठा मजदूर अब पहले जैसे नहीं रहे। हालांकि, शिक्षा हासिल करने के लिए भट्ठा मजदूरों को अपने बच्चों के स्कूल समय-समय पर बदलने पड़ते हैं, लेकिन अब वे कोशिश करते हैं कि उनके प्रत्येक बच्चे की स्कूल हाजिÞरी सुनिश्चित हो, फिर भी घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए, छुट्टी वाले दिनों में ये बच्चे अपने माता-पिता के साथ र्इंटें निकालकर परिवार की मजदूरी बढ़ाने में मदद करते हैं। डिप्टी डीईओ डॉ. सतिन्द्र सिंह ने बताया कि इस प्रकार के माईग्रेट लेबर (प्रवासी मजदूरों) के बच्चों को स्कूलों में जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं, ताकि कोई शिक्षा से वंचित न रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">विकसित मशीनरी ने भट्ठा मजदूरों का काम तो आसान किया,  लेकिन उनका काम भी छीन लिया</h4>
<p style="text-align:justify;">भले ही खून-पसीना बहाकर भट्ठा मजदूर एक-एक र्इंट निकालने के लिए दिन भर मिट्टी से मिट्टी होते हैं, लेकिन मशीनरी के युग में नई-नई मशीनें उनके काम पर असर डाल रही हैं। मजदूरों को र्इंटें तैयार करने के लिए पहले गारा तैयार करने में काफी मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब मशीनों से गारा तैयार किया जाता है, जिससे मजदूरों का काम थोड़ा आसान हो गया है। लेकिन अब र्इंटें तैयार करने वाली मशीनों की संख्या भी बढ़ रही है, जिससे मजदूरों का काम कम हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भट्ठा मजदूरों के स्वास्थ्य संबंधित, स्वास्थ्य विभाग से मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर दर्शन लाल ने बताया कि कई बार ऐसा भी होता है कि ये मजदूर अपने स्वास्थ्य के जरूरी चैकअप करवाने के बजाय भट्ठे की मजदूरी छोड़ना उचित नहीं समझते। इसीलिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को खुद भट्ठों पर पहुंचकर इनके स्वास्थ्य की जांच करनी पड़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 15:51:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Railways News: ट्रेन में सामान छूट गया? घबराएं नहीं, ऐसे पाएं अपना खोया सामान वापस</title>
                                    <description><![CDATA[Railways News: हर दिन लाखों लोग भारतीय रेलवे की ट्रेनों में सफर करते हैं। सफर के दौरान कई बार जल्दबाजी या लापरवाही में सामान ट्रेन में ही छूट जाता है या चोरी हो जाता है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रेलवे ने इसके लिए आसान और असरदार व्यवस्था बना रखी है। सही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/left-your-luggage-on-the-train-dont-panic-heres-how-to-get-your-lost-belongings-back/article-83745"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/raolway-news.jpg" alt=""></a><br /><p>Railways News: हर दिन लाखों लोग <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारतीय रेलवे</span></span> की ट्रेनों में सफर करते हैं। सफर के दौरान कई बार जल्दबाजी या लापरवाही में सामान ट्रेन में ही छूट जाता है या चोरी हो जाता है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रेलवे ने इसके लिए आसान और असरदार व्यवस्था बना रखी है। सही समय पर शिकायत दर्ज कर आप अपना सामान वापस पा सकते हैं।</p>
<h3>कैसे मिलेगा आपका छूटा हुआ सामान? Railways News</h3>
<p>अगर आपका सामान ट्रेन में छूट गया है, तो सबसे पहले रेलवे को इसकी जानकारी देना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Rail Madad</span></span> ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।</p>
<h4><strong>स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:</strong></h4>
<ul>
<li>ऐप खोलें और अपना PNR नंबर दर्ज करें</li>
<li>सामान से जुड़ी पूरी जानकारी भरें</li>
<li>शिकायत दर्ज करें</li>
</ul>
<p>अगर आप ऐप इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Rail Madad Portal</span></span> पर जाकर भी ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं।<br />👉 ध्यान रखें: जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, उतनी जल्दी आपका सामान ढूंढने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।</p>
<h3>दूसरा तरीका भी है मददगार</h3>
<p>आप उस स्टेशन पर भी जा सकते हैं जहां ट्रेन रुकी थी या अगले बड़े स्टेशन पर जाकर स्टेशन मास्टर या लॉस्ट प्रॉपर्टी काउंटर से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p>साथ ही <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Railway Protection Force</span></span> (RPF) को सूचना देना भी जरूरी होता है।<br />अगर सामान तुरंत नहीं मिलता, तो RPF में FIR दर्ज करानी होती है, जिसके बाद रेलवे पूरे रूट पर सर्च ऑपरेशन शुरू करता है। ज्यादातर मामलों में सामान मिल भी जाता है।</p>
<h3> Rail Madad ऐप के फायदे</h3>
<ul>
<li>24/7 शिकायत दर्ज करने की सुविधा</li>
<li>टिकट, सुरक्षा, सफाई जैसी सभी समस्याओं का समाधान</li>
<li>शिकायत के बाद ACTION और FEEDBACK सिस्टम</li>
</ul>
<p>ट्रेन में सामान छूट जाना आम बात है, लेकिन सही जानकारी और तुरंत कार्रवाई से आप अपना खोया सामान आसानी से वापस पा सकते हैं। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Rail Madad</span></span> जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस प्रक्रिया को और भी आसान बना दिया है। इसलिए अगली बार ऐसी स्थिति आए, तो घबराने के बजाय सही कदम उठाएं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/left-your-luggage-on-the-train-dont-panic-heres-how-to-get-your-lost-belongings-back/article-83745</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 12:19:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Bird Nurturing Campaign: पूज्य गुरुजी की पावन प्रेरणा से संगरिया में परिंडा अभियान का शंखनाद</title>
                                    <description><![CDATA[सेवादारों ने ली जीव रक्षा की शपथ Bird Nurturing Campaign: संगरिया (सच कहूँ/सुरेंद्र जग्गा)। आसमान से बरसती आग और भीषण लू के थपेड़ों के बीच जहाँ इंसान पानी के लिए व्याकुल है, वहीं मूक पक्षियों के लिए प्यास बुझाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी मानवीय संवेदना को समझते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-launch-of-the-parinda-abhiyan-bird-feeder-campaign-in-sangaria-inspired-by-the-holy-guidance-of-pujya-guruji/article-83626"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/bird-rescue-campaign.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<h3>सेवादारों ने ली जीव रक्षा की शपथ</h3>
<p>Bird Nurturing Campaign: संगरिया (सच कहूँ/सुरेंद्र जग्गा)। आसमान से बरसती आग और भीषण लू के थपेड़ों के बीच जहाँ इंसान पानी के लिए व्याकुल है, वहीं मूक पक्षियों के लिए प्यास बुझाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी मानवीय संवेदना को समझते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी (इकाई संगरिया) के सेवादारों ने एक अनूठी पहल की है। ‘पक्षियोद्धार’ मुहिम के तहत सेवादारों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में परिंडे लगाकर विभिन्न पक्षियों के लिए शीतल जल की व्यवस्था की। Sangaria News</p>
<p>अभियान की शुरूआत रविवार प्रात: टिब्बी बस स्टैंड के पास बलजीत इन्सां के निवास से हुई। यहाँ सेवादारों ने पूरी श्रद्धा के साथ विनती का भजन बोला और पक्षियों की रक्षा का संकल्प लिया। सेवादारों ने न केवल परिंडे टांगे, बल्कि उनमें रोजाना ताजा पानी भरने और साफ-सफाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी उठाई। कार्यक्रम में पहुंचे समाजसेवी ओम प्रकाश करवा ने सेवादारों के जज्बे को सलाम करते हुए कहा, “भीषण गर्मी में प्यासे पक्षियों को पानी उपलब्ध कराना जीवदया का सबसे उत्तम कार्य है।</p>
<h3>भीषण गर्मी में बेजुबानों का सहारा बने डेरा सच्चा सौदा के सेवादार, पक्षियों के लिए लगाए परिंडे</h3>
<p>गुरुजी ने समाज को जो राह दिखाई है, वह मानवता और प्रकृति के संरक्षण के लिए अतुलनीय है। इस पुनीत कार्य में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के जिम्मेवार भाई लालचंद इन्सां, सच्चे प्रेमी सेवक जसविंदर इन्सां, सच्चे नम्र सेवादार कृष्ण सोनी इन्सां, बलजीत सिंह इन्सां, सच्ची प्रेमी समिति सेवादार सुरजीत खोसा इन्सां, गुरचरण खोसा इन्सां, हरचंद इन्सां, लवली गर्ग इन्सां, निंदी सोनी इन्सां, गिरधारी लाल इन्सां, ब्रिज लाल इन्सां, अमर ग्रोवर इन्सां, पवन सिंगला इन्सां, कृष्ण गर्ग इन्सां, महेश गोयल इन्सां, सुरेश इन्सां, शंकर लाल इन्सां, अक्षित इन्सां, सुरजभान इन्सां, सुभाष गोदारा इन्सां, भरत इन्सां व अमन इन्सां ने सहयोग किया।</p>
<h3>मानवता भलाई कार्यों की कड़ी में एक और कदम | Sangaria News</h3>
<p>कमेटी के जिम्मेवार लाल चंद इन्सां, कृष्ण सोनी और बलजीत इन्सां ने बताया कि डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे 175 मानवता भलाई कार्यों के अंतर्गत यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मनुष्य तो बोलकर पानी मांग सकता है, लेकिन ये जीव अपनी पीड़ा नहीं कह सकते। हमारा कर्तव्य है कि हम अपने घरों की छतों पर सकोरे बांधें।” संगरिया जागृति संस्था के अध्यक्ष अमरनाथ पेंटर ने सेवादारों की इस भावना की प्रशंसा की। अभियान के दौरान आमजन को भी प्रेरित किया गया कि वे अपने घर के बाहर या छत पर कम से कम एक परिंडा जरूर लगाएं ताकि इस तपती गर्मी में कोई पक्षी प्यास से दम न तोड़े।</p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:50:06 +0530</pubDate>
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