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                <title>सच कहूँ विशेष स्टोरी - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>सच कहूँ विशेष स्टोरी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Arunima Sinha Story: अरुणिमा सिन्हा के बुलंद हौसलों के आगे मुश्किल हालात भी रोक नहीं पाए कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अरुणिमा सिन्हा ने ट्रेन हादसे में एक पैर खोने के बाद हार नहीं मानी और 2013 में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय दिव्यांग महिला बनकर इतिहास रच दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/arunima-sinha-story-even-difficult-circumstances-could-not-stop-arunima/article-88374"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/arunima-sinha.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Success Story: नई दिल्ली (सच कहूँ )। 11 अप्रैल 2011 की वो रात, जिसने एक होनहार खिलाड़ी की जिंदगी बदल दी। लगभग मौत को छूकर लौटने के बाद इस खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और फिर ऐसा इतिहास रच दिया, जिसकी कल्पना कर पाना हर किसी के लिए असंभव है। यह कहानी है भारत की उस दिव्यांग खिलाड़ी की, जिसने बुलंद हौसलों और इरादे के साथ अपने कृत्रिम पैरों से विश्व की सबसे ऊंची चोटी को भी छोटा साबित कर दिया। बात हो रही है माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा की। Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">20 जुलाई 1989 को जन्मी अरुणिमा सिन्हा की कहानी सिर्फ एक पर्वतारोही की विजय गाथा नहीं बल्कि दृढ़ निश्चय, साहस और आत्मविश्वास की एक मिसाल है। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में पड़ने वाले पंडाटोला में उनका जन्म हुआ। खेलकूद का शौक था, जैसे हर बच्चे में होता है, लेकिन उनके इरादे औरों से कहीं अधिक बुलंद थे। वॉलीबॉल खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा के बल पर पहचान बनाई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, अरुणिमा की जिंदगी में एक बहुत ही दर्दनाक मोड़ तब आया, जब अप्रैल 2011 में वह लखनऊ से दिल्ली की यात्रा कर रही थीं। एक सोने की चेन के लिए कुछ बदमाशों ने उन्हें चलती ट्रेन से फेंक दिया था। वह पूरी रात पटरी पर पड़ी रहीं और 48 ट्रेनें उनके पास से गुजरती रहीं। रेलवे ट्रैक का वह मंजर भी उनके लिए एक डरावने सपने जैसा था। हादसे में दोनों पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे। Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">अरुणिमा सिन्हा ने 2011 की उस घटना के बारे में एक इंटरव्यू में कहा, "यह मेरी जिंदगी का यू-टर्न था। दिल्ली में एक जॉब इंटरव्यू था, इसलिए लखनऊ से ट्रेन के जरिए आ रही थी। कुछ लोगों ने ट्रेन में लूटपाट शुरू की। मैं एक खिलाड़ी थी तो उसी के अनुरूप एक भावना उठी और मैंने अपनी सोने की चेन को बचाने की कोशिश की। हाथापाई हुई और लुटेरों ने चलती ट्रेन से उन्हें नीचे फेंक दिया।"</p>
<p style="text-align:justify;">अरुणिमा सिन्हा ने बताया था, "मैं ट्रैक पर पड़ी रही और ट्रेनें गुजरती रहीं। यहां तक कि ट्रेन जब गुजरती थी तो लोगों का टॉयलेट भी उस समय शरीर पर गिरता था। मैं उठने की कोशिश कर रही थी लेकिन उठ नहीं पा रही थी। एक पैर कट चुका था और दूसरे पैर की हड्डियां टूटकर बाहर आ चुकी थीं।" हालांकि, अगली सुबह सूरज के उगने के साथ ही इंसानियत भी जागी और गांववालों का एक समूह उनकी मदद के लिए आगे आया। उन्होंने उन्हें पटरी से उठाया और बरेली के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में इलाज के लिए व्यवस्थाएं नहीं थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अरुणिमा सिन्हा बताती हैं, "मैं डॉक्टरों की आवाज सुन पा रही थी लेकिन उस समय देख नहीं पा रही थी। मैंने बोला कि मैं कई घंटों से रेलवे ट्रैक पर थी, तो आप मेरा पैर काटेंगे तो अच्छे के लिए क्योंकि दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था।" डॉक्टरों को मजबूरन उनका एक पैर काटना पड़ा। उनकी जगह कृत्रिम पैर लगाया गया। बहुत मुश्किल हालात का सामना करने के बावजूद अरुणिमा सिन्हा ने इस त्रासदी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया और इसके बजाय अपने पर्वतारोहण के सपने को पूरा करने का रास्ता चुना। Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">वह इस बात में विश्वास रखती हैं कि, "जो आप नहीं कर सकते, उसे उस काम के आड़े न आने दें जो आप कर सकते हैं।" अरुणिमा के मन में उस एक अनजान रास्ते से एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने का विचार आया। सिर्फ अपने मजबूत इरादे और कभी न हार मानने वाले जज्बे के साथ, वह एक ऐसी यात्रा पर निकल पड़ीं जो उनकी हिम्मत की कड़ी परीक्षा लेने वाली थी। अरुणिमा उत्तरकाशी में टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के कैंप में शामिल हुईं, जहां उन्हें माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल ने ट्रेनिंग दी।</p>
<p style="text-align:justify;">तमाम मुश्किलों के बावजूद वह माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचीं और 2013 में यह अद्भुत कारनामा करने वाली पहली दिव्यांग महिला बनीं। 52 दिनों की कड़ी मेहनत, मजबूत इरादे और हिम्मत के बाद वह चोटी पर पहुंचीं। माउंट एवरेस्ट फतह और बाधाओं को पार करने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। Delhi News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 18:51:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक कमरे से शुरू हुई फैक्ट्री, आज 15 राज्यों और नेपाल तक 'बिग स्टोन' की धमक</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व युवा कौशल दिवस: संघर्ष से सफलता तक की कहानी
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/factory-started-from-one-room-today-big-stones-threat-reaches/article-88120"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/hansi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हांसी, सच कहूँ/मुकेश।</strong> कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है। हांसी के रहने वाले नवीन ठाकुर ने इस कहावत को अपने जीवन में सच साबित किया है। धागा मिल में नौकरी करने वाले पिता के घर जन्मे नवीन ने आर्थिक तंगी के दौर में पढ़ाई के साथ कमाई शुरू की और आज उनका बनाया 'बिग स्टोन' ब्रांड देश के 15 से अधिक राज्यों के साथ-साथ नेपाल तक अपनी पहचान बना चुका है। एक कमरे से शुरू हुआ उनका छोटा-सा उद्योग आज दर्जनों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार बन गया है।<br />    15 जुलाई 1978 को जन्मे नवीन ठाकुर ने ग्रेजुएशन तक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता धागा मिल में नौकरी करते थे, लेकिन मिल बंद होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। घर की जिम्मेदारियां सबसे बड़े बेटे नवीन के कंधों पर आ गईं। ऐसे समय में उन्होंने हालात के सामने हार मानने के बजाय संघर्ष को अपना साथी बनाया।</p>
<h5 style="text-align:justify;">पढ़ाई भी, कारोबार भी</h5>
<p style="text-align:justify;">नवीन बताते हैं कि कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही उन्होंने व्यापार की शुरूआत कर दी थी। वह दिल्ली से स्पेयर पार्ट्स खरीदकर लाते और हरियाणा सहित आसपास के राज्यों में दुकानदारों से आॅर्डर लेकर माल की सप्लाई करते थे। बसों और ट्रेनों में सफर कर छोटे-छोटे आॅर्डर पूरे करने वाला यह युवा धीरे-धीरे व्यापार की बारीकियां सीखता गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एक कमरे से खड़ा किया ब्रांड</h4>
<p style="text-align:justify;">साल 1997 में व्यापार शुरू करने के बाद 2004 में उन्होंने रबर उद्योग में कदम रखा। एक कमरे में मशीन लगाकर पंचर रिपेयर पैच बनाने का काम शुरू किया। गुणवत्ता और भरोसे के दम पर उनका 'बिग स्टोन' ब्रांड बाजार में तेजी से पहचान बनाने लगा। आज यह ब्रांड ग्रामीण बाजार में विश्वसनीय नामों में शुमार है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नेपाल तक पहुंचा हांसी का नाम</h4>
<p style="text-align:justify;">आज बिग स्टोन के उत्पाद भारत के 15-16 राज्यों में सप्लाई किए जाते हैं। इतना ही नहीं, नेपाल में भी कंपनी का माल नियमित रूप से भेजा जाता है। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ कारोबार अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है। दो बहनों के बीच सबसे बड़े नवीन ठाकुर आज उद्योग जगत के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के कारण क्षेत्र में उनकी अलग पहचान है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">संघर्ष से मिली सीख</h4>
<p style="text-align:justify;">नवीन ठाकुर कहते हैं कि "सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। ईमानदारी, गुणवत्ता और लगातार मेहनत ही किसी भी व्यवसाय की सबसे बड़ी पूंजी होती है। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो छोटे से कमरे से शुरू हुआ काम भी एक दिन देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंच सकता है।" यह कहानी केवल एक सफल कारोबारी की नहीं, बल्कि उस युवा की है जिसने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया और हांसी का नाम देश-विदेश तक पहुंचा दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">असली सफलता लोगों को रोजगार देना: ठाकुर</h4>
<p style="text-align:justify;">नवीन ठाकुर का उद्योग आज करीब 20 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है। उनका मानना है कि किसी भी व्यवसाय की असली सफलता केवल मुनाफे में नहीं, बल्कि लोगों को रोजगार देने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 11:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Gurugram News: पूज्य गुरु जी को दिया मिस्टर इंडिया सीजन-4 के विजेता प्रोफेसर डॉ. संजय ने अपनी सफलता का श्रेय</title>
                                    <description><![CDATA[पेशे से प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार ने फैशन की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए मिस्टर इंडिया सीजन-4 का खिताब अपने नाम किया है। उदयपुर में आयोजित भव्य समारोह में डॉ. संजय को मिस्टर इंडिया सीजन-4 का विजेता घोषित किया गया। उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/gurugram-news-professor-dr-sanjay-winner-of-mr-india-season/article-87908"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/dr-sanjay-profesor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Mr. India Season 4: गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)। पेशे से प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार ने फैशन की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए मिस्टर इंडिया सीजन-4 का खिताब अपने नाम किया है। उदयपुर में आयोजित भव्य समारोह में डॉ. संजय को मिस्टर इंडिया सीजन-4 का विजेता घोषित किया गया। उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को दिया है। उनका आशीर्वाद ही उनके जीवन की हर उपलब्धि में सदैव फलता-फूलता है। कई वर्षों से उनका परिवार और वे स्वयं डेरा सच्चा सौदा से जुड़े हैं। Gurugram News</p>
<p style="text-align:justify;">मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ढलियारा गांव के मूल निवासी प्रोफेसर डॉ.संजय कुमार ने कहा कि पूज्य गुरु जी का उनके जीवन की हर सफलता में आशीर्वाद रहता है। डॉ. संजय कुमार ने ज्ञान के साथ फैशन में भी खुद को निखारा है। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से पीएचडी कर चुके डॉ. संजय मॉडलिंग की दुनिया में उच्च शिक्षा का दुर्लभ उदाहरण हैं। मिस्टर इंडिया सीजन-4 में शुरूआत से ही उनकी बौद्धिक क्षमता, शालीनता और आत्मविश्वास ने सबका ध्यान खींचा। फिनाले में रैंप वॉक, व्यक्तित्व और सवाल-जवाब में उन्होंने सटीक जवाबों और आत्मविश्वास से निर्णायकों एवं दर्शकों का दिल जीता। </p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. संजय कई राष्ट्रीय ब्रांड्स के विज्ञापनों का हिस्सा रह चुके हैं। देश के बड़े फैशन वीक्स में रैंप वॉक का लंबा अनुभव रखते हैं। मिस्टर एंड मिस इंडिया नेक्स्ट टॉप सुपर मॉडल सीजन-4 मॉडलिंग रिवोल्यूशन की तरफ से गीतांजलि रिजॉर्ट उदयपुर में आयोजित किया गया था। इस शो के आयोजक साहिल रघुवंशी और मयंक लालवानी हैं। इस शो में भारतभर से 25 युवक और 25 युवतियां ग्रैंड फिनाले के लिए चुने गए थे। डॉ. संजय सीनियर कैटेगरी में विनर रहे, मान्यता वैष्णव मिस कैटेगरी की विनर रहीं और प्रणजाल जूनियर कैटेगरी के विनर रहे। इस शो में डॉ. संजय को कैश प्राइज, दो एल्बम सॉन्ग और एक साल का मॉडलिंग कॉन्ट्रेक्ट मिला है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ढलियारा से मिस्टर इंडिया तक का सफर</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. संजय कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ढलियारा से प्राप्त की और फिर उच्च शिक्षा के लिए महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी गए, जहां से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की। वर्तमान में वे प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं और शिक्षा के क्षेत्र में भी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. संजय की यह जीत सिर्फ एक खिताब नहीं है। यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयासों से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। इस उपलब्धि को हासिल करके डॉ. संजय कुमार ने यह साबित कर दिया कि डिग्री और ड्रीम दोनों साथ चल सकते हैं। हिमाचल से उठकर राष्ट्रीय मंच परचम लहराने वाले इस प्रोफेसर पर पूरे प्रदेश को गर्व है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 12:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीवरेज जाम को लेकर नगर निगम कार्यालय पर जडा ताला, विधायक के आश्वासन पर खोला </title>
                                    <description><![CDATA[सीवरेज जाम को लेकर नगर निगम कार्यालय पर जडा ताला, विधायक के आश्वासन पर खोला ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-lock-on-the-municipal-corporation-office-due-to-sewerage/article-87767"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/sonipat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सोनीपत सच कहूं। </strong> रेलवे रोड पर निगम कार्यालय के बाहर निगम पार्षदों और आम जनता ने जोरदार प्रदर्शन कर कार्यालय पर ताला जड दिया। भारी बरसात के बीच प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने उनके क्षेत्र में सीवरेज जाम और दूषित जलभराव की समस्या से निजात दिलाने की मांग की ।  प्रदर्शन की सूचना मिलने पर विधायक निखिल मदान मौके पर पहुंचे और निगम पार्षदों और आमजन से मुलाकात की। विधायक  ने निगम आयुक्त हर्षित कुमार को मौके पर ही बुलाया और निगम कार्यालय का ताला खुलवाया। साथ ही निगम आयुक्त को आम जनता की सीवरेज जाम और दूषित जल भराव की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके पश्चात विधायक  ने निगम कार्यालय में निगम आयुक्त, मेयर राजीव जैन, निगम पार्षदों और निगम अधिकारियों के साथ बैठक की।<br />इस दौरान विधायक  ने  अधिकारियों को विशेषकर लाइन पार के क्षेत्र में सीवरेज जाम की समस्या को तुरंत प्रभाव से दूर करने के दिशा निर्देश दिए। सीवरेज सफाई का कार्य देख रही एजेंसी पर संतोषजनक कार्य ना करने पर जुर्माना लगाने के भी आदेश दिए। इस अवसर पर निगम पार्षद प्रतिनिधि मुकेश सैनी, निगम पार्षद मुकेश बहमनीया, निगम पार्षद अनुराग जैन, निगम पार्षद राजेश मलिक, निगम पार्षद राजकुमार शर्मा, पार्षद प्रतिनिधि संजय बड़वासनिया, कार्यकारी अभियंता राहुल पूनिया, उपमंडल अधिकारी मनजीत दहिया आदि मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:11:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Happiness Report: दुनिया का सबसे खुशहाल और अनोखा देश, जहां न मच्छर हैं और न सांप, जानिए इसके पीछे की वजह</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में शामिल आइसलैंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ एक और अनोखी वजह से मशहूर है। जानिए क्यों इस देश में न मच्छर पाए जाते हैं और न ही सांप, और क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-happiest-and-unique-country-in-the-world-where-there/article-86915"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/world-happiness-report.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>World Happiness Report: नई दिल्ली:</strong> दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, अनोखे जीव-जंतुओं और खास जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। लेकिन एक ऐसा भी देश है, जिसे दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में गिना जाता है और जहां <strong>न तो सांप पाए जाते हैं और न ही मच्छर</strong>। यही वजह है कि यह देश पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता।</p><h4 style="text-align:justify;">आइसलैंड है दुनिया का अनोखा देश | World Happiness Report</h4><p style="text-align:justify;">यूरोप में स्थित <strong>आइसलैंड (Iceland)</strong> अपनी बर्फीली वादियों, ज्वालामुखियों, ग्लेशियरों और प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इसके अलावा, यह कई वर्षों से दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में भी शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है।</p><h4 style="text-align:justify;">यहां क्यों नहीं होते मच्छर?</h4><p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों के अनुसार, आइसलैंड की जलवायु बेहद ठंडी और लगातार बदलती रहती है। यहां सर्दियों और गर्मियों के बीच तापमान में तेजी से बदलाव होता है, जिससे मच्छरों का जीवन चक्र पूरा नहीं हो पाता। इसी कारण यहां प्राकृतिक रूप से मच्छरों की आबादी विकसित नहीं हो सकी। हालांकि, वैज्ञानिक यह भी बताते हैं कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण परिस्थितियां बदल सकती हैं।</p><h4 style="text-align:justify;">सांप भी नहीं पाए जाते</h4><p style="text-align:justify;">आइसलैंड में प्राकृतिक रूप से सांप नहीं पाए जाते। इसकी प्रमुख वजह देश का द्वीपीय (Island) होना और अत्यधिक ठंडा मौसम है। यहां का वातावरण सांपों के जीवित रहने और प्रजनन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।</p><h4 style="text-align:justify;">दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में शामिल</h4><p style="text-align:justify;">विश्व हैप्पीनेस रिपोर्ट के अनुसार, आइसलैंड लगातार दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में अपनी जगह बनाए रखता है। इसका कारण बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च जीवन स्तर, मजबूत सामाजिक सुरक्षा, कम अपराध दर और प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली है।</p><h4 style="text-align:justify;">पर्यटन का प्रमुख आकर्षण</h4><p style="text-align:justify;">आइसलैंड घूमने आने वाले पर्यटक यहां कई अद्भुत प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते हैं, जिनमें शामिल हैं—</p><ul><li style="text-align:justify;">ब्लू लैगून (Blue Lagoon)</li><li style="text-align:justify;">नॉर्दर्न लाइट्स (Aurora Borealis)</li><li style="text-align:justify;">गोल्डन सर्कल</li><li style="text-align:justify;">विशाल ग्लेशियर</li><li style="text-align:justify;">सक्रिय ज्वालामुखी</li><li style="text-align:justify;">झरने और काले रेत वाले समुद्र तट</li></ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:09:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पल-पल इन्सानियत को, सृष्टि के कल्याण को समर्पित पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के 30 दिन </title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी संतों के जीवन का हर क्षण मानवता की सेवा को समर्पित रहता है। वे हमेशा हर जीव-प्राणी के जीवन को खुशियों से भरने में तल्लीन रहते हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने सरसा निवास के दौरान अपने 30 दिनों को हर दिन, हर घंटे, हर पल सृष्टि के कल्याण को समर्पित किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/ram-rahim-devoted-every-moment-to-humanity-for-the-welfare/article-86908"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/30th-days-saint-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरसा (सच कहूँ न्यूज)। सच्चे रूहानी संतों के जीवन का हर क्षण मानवता की सेवा को समर्पित रहता है। वे हमेशा हर जीव-प्राणी के जीवन को खुशियों से भरने में तल्लीन रहते हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) ने सरसा निवास के दौरान अपने 30 दिनों को हर दिन, हर घंटे, हर पल सृष्टि के कल्याण को समर्पित किया। आपजी ने बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर 176वें मानवता भलाई कार्य का आगाज किया, जिसके तहत डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत ने संकल्प लिया कि वे बच्चों से मजदूरी नहीं करवाएंगे और अगर कोई बच्चा मजदूरी करता मिलता है तो उसकी शिक्षा की व्यवस्था करेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">विश्व रक्तदाता दिवस पर पूज्य गुरु जी ने देश और दुनिया में थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को नियमित रक्त उपलब्ध करवाने के लिए विशेष अभियान का आगाज किया। पूज्य गुरु जी के आह्वान पर डेरा सच्चा सौदा (Dera Sacha Sauda) की साध-संगत ने लिखित रूप से फार्म भरकर इस कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का संकल्प लिया। इसके तहत साध-संगत ऐसे मरीजों को जरूरत के अनुसार समय-समय पर रक्तदान करेगी, ताकि किसी भी मरीज को रक्त की कमी के कारण परेशान न होना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">अभियान की शुरूआत पंजाब के पटियाला स्थित एमएसजी डेरा सच्चा सौदा एवं मानवता भलाई केंद्र शाह सतनाम जी नुरानी धाम तथा शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल (Shah Satnam Ji Specialty Hospital) में स्थापित पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर में आयोजित विशेष रक्तदान शिविरों (Blood Donation Camp) से हुई। इसके तहत पटियाला में 304 यूनिट रक्तदान हुआ। </p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि पूज्य गुरु जी के मार्गदर्शन में डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत अब तक 33 लाख यूनिट से अधिक रक्तदान कर मानवता सेवा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बना चुकी है। वहीं आप जी ने अपनी निजी कमाई में से पंजाब के जिला संगरूर के नजदीकी गांव कमोमाजरा कलां की 20 वर्षीय बेटी जसप्रीत कौर को 48 घंटों में कमरा, बरामदा, रसोई सहित पूरा मकान बनाकर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस बेटी के पिता का 2021 में निधन हो गया था और उसकी माँ दूसरों के घरों में काम करके परिवार का खर्च चलाने को मजबूर थी। इनका घर इतना जर्जर हो गया था कि बारिश के दिनों में उन्हें धर्मशाला या दूसरों के घरों में रहना पड़ता था। इसके साथ ही आपजी ने शाह मस्ताना शाह सतनाम जी धाम का नवनिर्माण करवाकर अनामी का नमूना बनाया, जो आमजन के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने नशों के खिलाफ चलाई मुहिम को इन 30 दिनों में इतनी गति दी कि बड़ी संख्या में लोगों ने नशा त्याग दिया। आप जी ने भयंकर नशे के शिकार लोगों को इस अभिशाप से बचाकर उन्हें पौष्टिक आहार देकर स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर किया जिससे उनके घरों में  पुन: खुशियां लौट आई। ग्राम पंचायतों के आग्रह पर पूज्य गुरु जी ने सरसा जिले के गांव केलनिया, अली मोहम्मद और सहारणी में सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता की सौगात दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 09:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Para-athlete Shashwati: बिना एक पैर के हौसलों से सपनों की उड़ान भर रही शाश्वती</title>
                                    <description><![CDATA[जिसके इरादे बुलंद हों, उसके लिए कोई कमी बाधा नहीं बनती। मूल रूप से नागपुर की शाश्वती विनायक इसी जज्बे की जीती-जागती मिसाल हैं। 21 साल की शाश्वती जन्म से ही जन्मजात विकृति होने की वजह से एक पैर से दिव्यांग हैं। बचपन में आॅपरेशन हुआ, लेकिन शाश्वती ने हार नहीं मानी। माता-पिता के हौसले और प्रेरणा से उन्होंने जीवन को नई दिशा दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/para-athlete-shashwati-shashwati-is-flying-dreams-with-courage-without-one/article-86802"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/shaswati-bhiwani.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Para-athlete Shashwati: भिवानी, (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। जिसके इरादे बुलंद हों, उसके लिए कोई कमी बाधा नहीं बनती। मूल रूप से नागपुर की शाश्वती विनायक इसी जज्बे की जीती-जागती मिसाल हैं। 21 साल की शाश्वती जन्म से ही जन्मजात विकृति होने की वजह से एक पैर से दिव्यांग हैं। बचपन में आॅपरेशन हुआ, लेकिन शाश्वती ने हार नहीं मानी। माता-पिता के हौसले और प्रेरणा से उन्होंने जीवन को नई दिशा दी। Bhiwani News</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 11 साल से शाश्वती स्विमिंग और साइक्लिंग कर रही हैं। पैरा खेलों में उन्होंने कई मेडल जीते हैं। वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि हौसले के आगे शरीर की कोई सीमा नहीं होती। आज शाश्वती भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। आने वाली 8 जुलाई से पहले वो वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वालीफायर के लिए पहले जर्मनी और फिर हंगरी जाएंगी। उनका सपना है, ओलंपिक में तिरंगे को गर्व से लहराना और देश के लिए पदक जीतना।</p>
<p style="text-align:justify;">शाश्वती का कृत्रिम पैर लोहे की छड़ से बना है, जिसे लगवाने के लिए उन्हें अमेरिका जाना पड़ा। इसकी कीमत 20 लाख रुपये थी। उनके जूते भी काफी महंगे हैं। लेकिन शाश्वती कहती हैं कि ये सब उनके सपने से छोटा है। भिवानी स्टेडियम में रोज सुबह 5 बजे शाश्वती कोच प्रशांत कर्माकर के साथ प्रैक्टिस करती हैं। Bhiwani News</p>
<p style="text-align:justify;">वो स्वस्थ खिलाड़ियों के साथ बराबरी से दौड़ती हैं। कोई भेदभाव नहीं, कोई रियायत नहीं। कोच कहते हैं, शाश्वती पढ़ाई में भी तेज हैं और आईएएस बनना चाहती हैं। शाश्वती उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो दिव्यांगता को अभिशाप मानकर टूट जाते हैं। एक पैर से वो कर दिखाती हैं, जो कई स्वस्थ खिलाड़ी भी नहीं कर पाते। </p>
<p style="text-align:justify;">शाश्वती कहती है कि मैं ओलंपिक में मेडल जीतना चाहती हूं। इसके लिए दिन-रात मेहनत कर रही हूं। खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी जारी है, ताकि आर्ईएएस बनकर देश की सेवा कर सकूं। शाश्वती पिछले 11 साल से लगातार मेहनत कर रही है। एक पैर न होने के बावजूद वो स्वस्थ बच्चों से मुकाबला करती है। मुझे पूरा भरोसा है कि वो ओलंपिक में मेडल लेकर आएगी। Bhiwani News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 10:37:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मानवता के पथ पर पूज्य गुरु जी की एक और मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां  ने पंजाब के संगरूर जिले के गांव कमोमाजरा के 20 वर्षीय जसप्रीत को बनाकर दिया पक्का मकान, सौंपी घर की चाबी सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। मानवता और जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार चलाए जा रहे कार्यों के तहत डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक बार फिर सेवा और परोपकार का उदाहरण प्रस्तुत किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/another-example-of-revered-guru-ji-on-the-path-of/article-86660"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/aashiyana-campaign-sangrur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Aashiyana Campaign: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां  ने पंजाब के संगरूर जिले के गांव कमोमाजरा के 20 वर्षीय जसप्रीत को बनाकर दिया पक्का मकान, सौंपी घर की चाबी सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। मानवता और जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार चलाए जा रहे कार्यों के तहत डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक बार फिर सेवा और परोपकार का उदाहरण प्रस्तुत किया है।  </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस और फादर्स डे के अवसर पर पूज्य गुरु जी ने समाज में सेवा, संस्कार और मानवता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। आपजी ने फरमाया कि समाज के सक्षम लोगों का यह नैतिक दायित्व है कि वे जरूरतमंदों और असहाय लोगों की सहायता के लिए आगे आएं। डैप्थ कार्यक्रम (नशा व बुराईयां छुड़वाने का कार्यक्रम) के दौरान महाराष्ट्र के सासावार स्थित ममता बाल सदन नामक एनजीओ द्वारा संचालित अनाथ आश्रम की प्रभारी स्मिता ने आश्रम में रह रहे बच्चों की शिक्षा और देखभाल को लेकर सहयोग की अपील की।  इस पर पूज्य गुरु जी ने आश्रम के बच्चों की पढ़ाई, पालन-पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और उनके विवाह तक का संपूर्ण खर्च वहन करने की घोषणा की। इस घोषणा का उपस्थित साध-संगत ने जोरदार समर्थन किया और मानवता भलाई के इस कार्य की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम का एक भावुक क्षण उस समय और देखने को मिला जब पंजाब के संगरूर जिले के गांव कमोमाजरा निवासी 20 वर्षीय जसप्रीत कौर को नए मकान की चाबी सौंपी गई। जसप्रीत कौर के पिता का वर्ष 2021 में निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार आर्थिक संकट से जूझने लगा। परिवार जिस मकान में रह रहा था, उसकी हालत बेहद खराब थी। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था और कई बार परिवार को पड़ोसियों के घरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ता था। परिवार की कठिन परिस्थितियों की जानकारी जब जसप्रीत कौर द्वारा पूज्य गुरु जी को दी गई तो तुरंत पूज्य गुरु जी ने उनके लिए नया मकान बनवाने का निर्णय लिया। इसके बाद पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा जसप्रीत कौर का पक्का मकान महज 48 घंटे में तैयार करवा दिया गया। मकान निर्माण का पूरा खर्च पूज्य गुरु जी ने वहन किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मकान की चाबी मिलते ही छलक पड़े खुशी के आंसू</h3>
<p style="text-align:justify;">नए घर की चाबी मिलने पर जसप्रीत कौर, उसकी माता और उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार ने भावुक होकर पूज्य गुरु जी और सेवा में जुटे सभी सेवादारों का आभार व्यक्त किया। स्थानीय निवासियों ने भी इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि जरूरतमंद परिवार को नया आशियाना मिलना उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 10:23:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरसा की बेटी नीतू वायु सेना में चयनित</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय वायुसेना में एयरोनॉटिकल इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक्स शाखा में चयनित नीतू का सरसा जिले के लुदेसर गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने स्वागत किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsas-daughter-neetu-selected-in-air-force/article-86587"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/nathusari-chopta-news1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नाथूसरी चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)।</strong> Nathusari Chopta News: भारतीय वायुसेना में एयरोनॉटिकल इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक्स शाखा में चयनित नीतू का सरसा जिले के लुदेसर गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने स्वागत किया। नीतू अपने ननिहाल गांव लुदेसर से बचपन से जुड़ी रही हैं, जहां उनका बचपन बीता। उनकी इस उपलब्धि पर गांव के युवा और बुजुर्गों ने गर्व व्यक्त किया है। नीतू ने भारतीय वायुसेना में अधिकारी बनने का अपना सपना साकार किया है। उन्होंने एएफसीएटी-2025 परीक्षा, एसएसबी इंटरव्यू और पायलट एप्टीट्यूड टेस्ट सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किए हैं। नीतू का पैतृक गांव राजस्थान का अनूपशहर है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके पिता सूबेदार वेद प्रकाश ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 25 ग्रेनेडियर्स यूनिट में सेवाएं दी हैं। नीतू की प्रारंभिक शिक्षा दयानंद स्कूल चौपटा और आर्मी पब्लिक स्कूल, श्रीगंगानगर से हुई। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से पूरी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने एनसीसी एयर विंग में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2023 की गणतंत्र दिवस परेड दिल्ली में उन्होंने अपने डायरेक्ट्रेट का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतिष्ठित कैंप में उन्होंने बेस्ट कैडेट कैटेगरी में हिस्सा लिया और पूरे देश में शीर्ष 7 कैडेट्स में अपनी जगह बनाई। उनके परनाना सूबेदार भीम सिंह गोदारा मूल रूप से गांव लुदेसर, जिला सरसा के निवासी थे। उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स में सेवा दी और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा मोर्चे पर बहादुरी से लड़ाई लड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें बर्मा स्टार सहित कई प्रतिष्ठित सैन्य पदकों से सम्मानित किया गया था। नीतू की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। विशेष बात यह है कि दादा रामस्वरूप कसवां के परिवार से एक साथ तीन युवाओं ने सैन्य सेवाओं में स्थान प्राप्त कर परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है। इनमें सुशील पूनिया का चयन टेरिटोरियल आर्मी में तथा रविंद्र गोदारा का चयन आर्मर्ड रेजिमेंट में हुआ है। परिवार और क्षेत्र के लोगों ने नीतू की इस सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि क्षेत्र की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। नीतू ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, एनसीसी प्रशिक्षण और परिवार की सैन्य विरासत को दिया है।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/nathusari-chopta-news1.jpg" alt="Nathusari Chopta News" width="1280" height="720"></img>
Nathusari Chopta News: वायु सेना में चयनित नीतू को बधाई देते महिलाएं हुए।

<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:00:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूज्य गुरु जी ने ऐसे सुनी एक बेटी की पुकार, एक साथ मनवा दिए जैसे सभी त्यौहार</title>
                                    <description><![CDATA[ सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक जरूरतमंद बेटी की पुकार सुनते हुए उसके परिवार के लिए अपने निजी कमाई से पक्का घर बनवाकर दिया है। साध-संगत ने केवल 48 घंटों में मकान बनाकर जरूरतमंद परिवार को सौंप दिया, जिसमें कमरा, बरामदा, रसोई आदि शामिल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/respected-guru-ji-listened-to-the-call-of-a-daughter/article-86478"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/jaspreet-kaur-sangrur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Aashiyana Campaign: संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह/नरेश कुमार)। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक जरूरतमंद बेटी की पुकार सुनते हुए उसके परिवार के लिए अपने निजी कमाई से पक्का घर बनवाकर दिया है। साध-संगत ने केवल 48 घंटों में मकान बनाकर जरूरतमंद परिवार को सौंप दिया, जिसमें कमरा, बरामदा, रसोई आदि शामिल हैं। पूज्य गुरु जी के इस प्रयास की हर ओर सराहना हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि पंजाब के जिला संगरूर के नजदीकी गांव कमोमाजरा कलां की 20 वर्षीय बेटी जसप्रीत कौर ने डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से घर बनवाने की अर्ज़ की थी। उसने बताया कि उसके पिता का 2021 में निधन हो चुका है और उसकी माँ दूसरों के घरों में काम करके परिवार का खर्च चलाती है। उनका घर इतना जर्जर है कि बारिश के दिनों में उन्हें धर्मशाला या दूसरों के घरों में रहना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने इस बेटी की इस मुश्किल को समझते हुए कहा कि पावन वचन फरमाए कि हम अपनी निजी कमाई से दो दिनों के अंदर-अंदर पूरा घर बनाकर देंगे। इसके बाद ब्लॉक संगरूर, सुनाम, लड्डा, भलवान, महलां चौक, गोबिंदगढ़ जेजियां, लोंगोवाल सहित कई ब्लॉकों की साध संगत ने तय किया कि वे 48 घंटों में मकान निर्माण का कार्य पूरा करेंगे। साध-संगत बड़ी संख्या में गाँव कमोमाजरा पहुंची और देखते ही देखते गाँव में मेले जैसा माहौल बन गया। सबसे पहले साध-संगत ने पुराने जर्जर घर को पूरी तरह गिराया। कमरों की हालत इतनी खराब थी कि छत कभी भी गिर सकती थी। कमरे के अंदर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता था, जिसे सावधानीपूर्वक बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकाला गया। बाथरूम और शौचालय की स्थिति भी बहुत खराब थी।</p>
<p style="text-align:justify;">देखते ही देखते बड़ी संख्या में सेवादारों ने असंभव लगने वाले काम को कुछ ही घंटों में आगे बढ़ा दिया। कोई सीमेंट मिला रहा था, कोई र्इंटें लगा रहा था, कोई निर्माण कार्य में लगा हुआ था। साध संगत ने दिन-रात सेवा कर निर्धारित 48 घंटे से पहले ही घर का निर्माण कार्य पूरा कर दिया। अंत में साध-संगत ने एक कमरा, बरामदा, रसोई, बाथरूम, फर्श और रंग-रोगन सहित पूरा मकान परिवार को सौंप दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी बातचीत करते हुए सच्चे नम्र सेवादार हरिन्द्र मंगवाल ने कहा कि इस मकान का सारा खर्च पूज्य गुरु जी ने अपनी निजी कमाई किया है। उन्होंने कहा कि इस सेवा कार्य में संगरूर सहित कई ब्लॉकों की साध-संगत ने सेवा करके 48 घंटों में मकान बनाने के पूरे कार्य को पूरा किया है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">हमारे परिवार को ऐसा महसूस हो रहा है जैसे सभी त्योहार आज ही आ गए हों: जसप्रीत कौर</h3>
<p style="text-align:justify;">अपनी खुशी साझा करते हुए बेटी जसप्रीत कौर ने कहा कि उनके परिवार का सपना पूज्य गुरु जी ने पूरा किया है। पूरा परिवार पूज्य गुरु जी और साध-संगत का तहेदिल से धन्यवाद करता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जो सपना उनके परिवार द्वारा दशकों से देखा जा रहा था, वह कुछ ही घंटों में पूरा हो जाएगा। जसप्रीत कौर ने कहा कि आज का दिन उनके परिवार के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उनके जीवन के सभी त्योहार एक ही दिन में एक साथ आ गए हों। उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे वे नर्क जैसी जिंदगी से निकलकर स्वर्ग जैसे माहौल में आ गए हों।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बाबा जी का यह कार्य हम सब को सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा: चेयरमैन </h3>
<p style="text-align:justify;">मौके पर पहुंचे मार्केट कमेटी सूलर घराट के चेयरमैन हरविन्द्र सिंह ने कहा कि आज डेरा सच्चा सौदा वाले बाबा जी ने जो घर बनाकर दिया है, यह उनकी बहुत बड़ी सेवा है। इसके लिए वह बाबा जी और साध-संगत का बहुत धन्यवाद करते हैं। बाबा जी द्वारा अपनी खुद की कमाई में किया गया यह परोपकारी कार्य हम सभी को सेवा कार्य करने के लिए प्रेरित करता रहेगा। </p>
<h3 style="text-align:justify;">जरूरतमंद परिवार की मदद के लिए पूज्य गुरु जी का धन्यवाद : चेयरमैन मार्केट कमेटी संगरूर</h3>
<p style="text-align:justify;">साध-संगत की सेवा भावना को देखकर गदगद हुए मार्केेट कमेटी संगरूर के चेयरमैन अवतार सिंह ईलवाल ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि पूज्य गुरु जी की पावन रहनुमाई में गाँव कमोमाजरा कलां में डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत व सेवादारों द्वारा एक जरूरतमंद परिवार का घर बनाया जा रहा है, तो वे अपने सभी काम छोड़कर वहाँ पहुंचे। वहाँ पहुंचकर जब उन्होंने यह दृश्य देखा तो उनके रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में युवा सेवादार, मिस्त्री और साध-संगत मकान निर्माण कार्य में जुटी हुई थी। उन्होंने कुछ ही घंटों में घर बनाकर परिवार को सौंप दिया। यह बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा। इन सेवादारों का जज्बा देखकर उनके लिए सम्मान में सिर झुक जाता है। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी ने इस अत्यंत जरूरतमंद परिवार की मदद करके बहुत बड़ा परोपकार किया है, जिसके लिए हम कोटि-कोटि धन्यवाद करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गाँव कमोमाजरा कलां पूज्य गुरु जी का तहेदिल से धन्यवादी: पूर्व सरपंच </h3>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में बातचीत करते हुए समाजसेवी और गाँव कमोमाजरा के पूर्व सरपंच कुलविंदर सिंह किंदा ने कहा कि हमारे गाँव कमोमाजरा कलां की बेटी जसप्रीत कौर के परिवार को घर बनाकर देने के लिए हम समूह नगर की ओर से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां और साध-संगत का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/jaspreet-kaur-home.jpg" alt="Jaspreet-Kaur-Home" width="1000" height="449"></img>
जर्जर मकान में रहने को मजबूर था परिवार
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 08:12:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विश्व रक्तदाता दिवस विशेष: ‘ट्रयू ब्लड पंप’ देश-दुनिया में जगाए हुए हैं जिंदगी की मशाल </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर जब पूरी दुनिया स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान दे रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/worlds-unique-blood-center-pujya-bapu-magghar-singh-ji-international/article-86313"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/world-blood-donor-day.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ/राजेश बैनीवाल/सुनील वर्मा)। </strong>World Blood Donor Day:<strong> </strong>आज का समय ऐसा है कि अपने ही अपनों के काम नहीं आते वो भी जरूरत पड़ने पर साथ छोड़ ही जाते हैं। लेकिन एक ऐसी संस्था आज इस दुनिया में मानवता की सेवा के लिए हर वक्त मौजूद है वहां के लोग दूसरों को भी अपना मान लेते हैं। और जरूरत पड़ने पर किसी भी मदद से पिछे हटना नहीं जानते। हम बात कर रहे हंै हरियाणा प्रदेश के जिला सरसा स्थित ‘डेरा सच्चा सौदा’ की। यहां पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां वैसे तो मानवता की भलाई के लिए सैकड़ों कार्य चलाए हुए हैं। परन्तु इसी में  28वां काम है ‘रक्तदान’। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार रक्तदान के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। इसीलिए पूज्य गुरु जी ने इन सेवादारों को ‘ट्रयू ब्लड पंप’ नाम दिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह ब्लड पंप एक आह्वान पर बच्चे -जवान ही नहीं बुजुर्ग भी बिना कुछ सोचे समझे रक्तदान करने के लिए जिद्द पर अड़ जाते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों द्वारा अब तक लगभग 24 लाख यूनिट खून दान किया जा चुका है।<br />डेरा सच्चा सौदा का नाम रक्तदान के क्षेत्र में 3 बार गिनिज वर्ल्ड, एशिया लिम्का, इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। यहां पर स्वस्थ, एवं स्वैच्छिक रक्तदाता हर समय देश-विदेश में रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं।  डेरा सच्चा सौदा ने स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में तीन विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। </p>
<h4 style="text-align:justify;">यूं बनते गए स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में रिकॉर्ड </h4>
<ul>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (7 दिसंबर 2003): मात्र 8 घंटों में 15,432 यूनिट रक्तदान कर पहली बार इतिहास रचा गया।</li>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (10 अक्टूबर 2004): राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक शिविर के दौरान 17,921 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।</li>
<li>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (8 अगस्त 2010): एक ही दिन में 43,732 यूनिट रक्तदान का सबसे बड़ा रिकॉर्ड।</li>
<li>एशिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स (23 सितंबर 2011): एक ही दिन में 61,752 लोगों द्वारा नियमित रक्तदान करने का संकल्प लेने का रिकॉर्ड दर्ज है।</li>
<li>भारतीय सेना, पुलिस, पत्रकार व थैलेसिमिया ग्रस्त मरीजों के लिए पूज्य गुरुजी द्वारा प्राथमिकता से व नि:शुल्क रक्त उपलब्ध करवाने का आहवान किया गया हैै।</li>
<li>दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 12 अपै्रल 2014 को 75,771 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया वो पल भी किसी कीर्तिमान से कम नहीं है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h4 style="text-align:justify;">क्यों मनाया जाता हैं विश्व रक्तदाता दिवस</h4>
<p style="text-align:justify;">हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। रक्तदान के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। पहली बार साल 2004 में मनाया गया था, जिसकी शुरूआत वर्ल्ड हेल्थ आॅर्गेनाइजेशन ने की थी। दरअसल, समय पर रक्त उपलब्ध न होने पर कई मरीज दम तोड़ देते हैं, ऐसे में रक्तदान ऐसे लोगों के लिए जीवनदान बन सकता है, इसलिए लोगों को इसके महत्व से रूबरू कराने के लिए वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दुनिया का अनोखा ब्लड सेंटर: पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर</h4>
</div>
<p style="text-align:justify;">विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर जब पूरी दुनिया स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मान दे रही है, तब सरसा स्थित शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल का पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर मानवता सेवा की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जो डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से स्थापित हुआ है। पूज्य गुरुजी द्वारा शुरू की गई रक्तदान मुहिम का ही परिणाम है कि पिछले करीब दो दशकों से यह ब्लड सेंटर जरूरतमंद मरीजों को बिना रिप्लेसमेंट डोनर के रक्त उपलब्ध करवा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/corona-infected-will-get-better-treatment-at-shah-satnam-ji-speciality-hospital.gif" alt="Corona-infected-will-get-better-treatment-at-Shah-Satnam-Ji-Speciality-Hospital" width="600" height="294"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं अपनी तरह के इस अनूठे ब्लड सेंटर में रक्तदान करने के लिए दानियों को इंतजार करना पड़ता है और रक्तदान के बाद वे चिकित्सकों का धन्यवाद कर लौटते हैं। वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक इस ब्लड सेंटर में 2 लाख 3 हजार 753 यूनिट रक्तदान हो चुका है। यहां से 52 हजार 608 यूनिट होल ब्लड, 1 लाख 33 हजार 304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स, 1 लाख 41 हजार 994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, 57 हजार 728 यूनिट प्लेटलेट्स तथा 6 हजार 556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आमतौर पर अस्पतालों में मरीज के परिजनों को रक्त लेने से पहले किसी अन्य व्यक्ति से रक्तदान करवाना पड़ता है, लेकिन यहां व्यवस्था बिल्कुल अलग है। डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं, जिसके कारण ब्लड सेंटर में रक्त की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहती है। यही वजह है कि दुर्घटना, आॅपरेशन अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों और उनके परिजनों को रक्त के लिए भटकना नहीं पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी ब्लड सेंटर की सबसे बड़ी पूंजी उसके नियमित रक्तदाता होते हैं और यही पूंजी इस ब्लड सेंटर को अलग पहचान दिलाती है। पूज्य गुरुजी की प्रेरणा से लाखों अनुयायी वर्षों से रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानते हुए इस अभियान से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि हजारों जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिल सका है और अनगिनत जिंदगियां बचाई जा चुकी हैं। आज जब देशभर में रक्त की मांग लगातार बढ़ रही है, तब सरसा का यह ब्लड सेंटर समाज को यह संदेश दे रहा है कि यदि लोग निस्वार्थ भाव से रक्तदान के लिए आगे आएं तो किसी भी व्यक्ति को रक्त के अभाव में अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी। यही विश्व रक्तदाता दिवस का वास्तविक संदेश है रक्तदान महादान, जीवनदान के समान।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वर्ष 2007 से 13 जून 2026 तक 2,03,753 यूनिट रक्तदान</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">52,608 यूनिट होल ब्लड वितरित</li>
<li style="text-align:justify;">1,33,304 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स उपलब्ध कराई</li>
<li style="text-align:justify;">1,41,994 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा वितरित</li>
<li style="text-align:justify;">57,728 यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई</li>
<li style="text-align:justify;">6,556 सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) मरीजों को दी गई</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h4 style="text-align:justify;">रक्तदान का कोई विकल्प नहीं</h4>
<p style="text-align:justify;">रक्तदान का कोई विकल्प नहीं है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों का जीवन बचाने में सहायक हो सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक करना और नियमित रक्तदाता बनने के लिए प्रेरित करना है।<br /><strong>— डॉ. प्रदीप अरोड़ा, बीटीओ, पूज्य बापू </strong><br /><strong>मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर सरसा। </strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">प्लेटलेट्स डोनेशन की भी आधुनिक सुविधा</h4>
<p style="text-align:justify;">यह ब्लड सेंटर केवल रक्त संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अत्याधुनिक एफेरेसिस मशीन भी उपलब्ध है। इस मशीन के माध्यम से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) तैयार किए जाते हैं। मशीन रक्त से केवल प्लेटलेट्स अलग कर लेती है और शेष रक्त दाता के शरीर में वापस पहुंचा देती है। डेंगू, कैंसर, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए प्लेटलेट्स जीवनरक्षक साबित होते हैं। विशेषकर डेंगू के मौसम में प्लेटलेट्स की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में एफेरेसिस मशीन के माध्यम से तैयार किए जाने वाले सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मरीजों के लिए संजीवनी साबित होते हैं और उन्हें प्लेटलेट्स की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/world-blood-donor-day.jpg" alt="World Blood Donor Day" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 09:28:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>Sach Kahoon 24th Anniversary: जसपाल के जज़्बे को सलाम! दोनों हाथ गंवाने के बाद भी हौसला कम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[हरमन प्यारा समाचार पत्र सच-कहूँ आज वीरवार को अपनी 24वीं वर्षगांठ मना रहा है। सच-कहूँ के प्रचार-प्रसार में जितना सच-कहूँ टीम का योगदान है उतना ही वितरक सेवादारों व पाठकों का है। आज हम एक ऐसे होनहार वितरक सेवादार से आपको रू-ब-रू  करवा रहे हैं जिसकी सेवा का जज्बा सुनकर आप सब भी हैरान रह जाएंगे। सच-कहूँ अपने इस वितरक सेवादार को दिल से सलाम करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sach-kahoon-24th-anniversary-salute-to-the-spirit-of-jaspal/article-86187"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/jaspal-insan-malikpura.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sach Kahoon 24th Anniversary: ओढ़ां, (राजू)। हरमन प्यारा समाचार पत्र सच-कहूँ आज वीरवार को अपनी 24वीं वर्षगांठ मना रहा है। सच-कहूँ के प्रचार-प्रसार में जितना सच-कहूँ टीम का योगदान है उतना ही वितरक सेवादारों व पाठकों का है। आज हम एक ऐसे होनहार वितरक सेवादार से आपको रू-ब-रू  करवा रहे हैं जिसकी सेवा का जज्बा सुनकर आप सब भी हैरान रह जाएंगे। सच-कहूँ अपने इस वितरक सेवादार को दिल से सलाम करता है। हम बात कर रहे हैं सरसा जिला के गांव मलिकपुरा निवासी जसपाल इन्सां की, जिसने 22 वर्ष पूर्व एक हादसे में दोनों हाथ खो दिए, लेकिन हौसला नहीं खोया। हौसले व आत्मविश्वास को जसपाल ने ऐसे समेटा की दिव्यांगता भी उसके सामने नतमस्तक हो गई। </p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जसपाल इन्सां के साथ करीब 22 वर्ष की उम्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ। इस हादसे ने उसके दोनों हाथ छीन लिए। हादसे के बाद उसे ये समझ नहीं आ रहा था किवह दोनों हाथों के बगैर अब कैसे जीएगा, कैसे उसकी जिंदगी कटेगी, कौन उसकी संभाल करेगा। इन तमाम सवालों के भंवर में फंसे जसपाल के लिए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन वचन नई उम्मीद की किरण साबित हुए। इस उम्मीद की किरण को जसपाल ने ऐसा ढाल बनाया कि आज वह लगभग सभी कार्य स्वयं ही कर लेता है। जसपाल का कहना है कि उसे अब जिंदगी से कोई शिकवा नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोई परेशानी नहीं :- </h3>
<p style="text-align:justify;">जसपाल एक अलग ही जोश के साथ सच-कहूँ वितरण की सेवा करता है। जसपाल ने पूछे जाने पर बताया कि उसे सच-कहूँ वितरण में कोई परेशानी नहीं। उसे ये हौसला उसके गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने दिया है। वह जो भी कुछ कर रहा है वो पूज्य गुरु जी की रहमत से ही संभव हो पा रहा है। गांव के पाठकों के मुताबिक गांव में सुबह समय पर अखबार का वितरण समय पर हो रहा है। पाठकों ने जसपाल के जज्बे को सलाम करते हुए उसकी सराहना की है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">22 वर्ष पूर्व खो दिए थे दोनों हाथ </h3>
<p style="text-align:justify;">करीब 22 वर्ष पूर्व घर के निकट ट्रांसफार्मर पर फ्यूज लगाते समय जसपाल को अचानक करंट लग गया था। इस हादसे में उसे कोहनी से ऊपर तक दोनों हाथ खोने पड़े। हादसे के 2 दिन बाद परिजनों ने जसपाल की शादी के विषय में बातचीत करने जाना था। लेकिन शायद नियति को ये स्वीकार न था। जसपाल ने बताया कि उसे जिंदगी से अब कोई गिला नहीं है। जो लोग कई बार विकट परिस्थितियां आने के बाद हौसला छोड़ देते हैं उन लोगोंं से जसपाल ने अपील करते हुए कहा कि हौसला न छोड़ें। हिम्मत-हौसला है तो सब-कुछ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">5 वर्षों से दे रहा है निरंतर सेवा, बना रखा है स्पेशल थैला </h3>
<p style="text-align:justify;">जसपाल ने जिस दिन से गांव में सच-कहूँ वितरण की सेवा संभाली है तब से वह पिछले निरंतर 15 वर्षों से सराहनीय सेवा दे रहा है। पहले सच-कहूँ नेशनल हाईवे पर गांव मिठड़ी में उतरता था जो उनके गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर पड़ता है। अलसुबह उठकर नारा लगाकर वह पैदल ही सच-कहूँ लेने चला जाता। लेकिन कुछ समय बाद अखबार का बंडल उसके घर आना शुरू हो गया। सुबह करीब साढ़े 5 बजे जसपाल के पास सच-कहूँ का बंडल पहुंच जाता है। जसपाल ने अपनी सुविधा के अनुसार स्पेशल थैला बना रखा है। जिसमें अखबार डालकर वह पैदल ही गांव में वितरण के लिए निकल जाता है। जसपाल करीब एक घंटे में ये सेवा पूरी कर लेता है। जसपाल गले में डाले गए स्पेशल थैले से मुंह से अखबार निकालता है और अपने कटे हुए दोनों हाथों से सत्कार से पाठक को दे देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sach-kahoon-24th-anniversary-salute-to-the-spirit-of-jaspal/article-86187</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 10:45:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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