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                <title>सच कहूँ विशेष स्टोरी - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>सच कहूँ विशेष स्टोरी RSS Feed</description>
                
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                <title>Railways News: ट्रेन में सामान छूट गया? घबराएं नहीं, ऐसे पाएं अपना खोया सामान वापस</title>
                                    <description><![CDATA[Railways News: हर दिन लाखों लोग भारतीय रेलवे की ट्रेनों में सफर करते हैं। सफर के दौरान कई बार जल्दबाजी या लापरवाही में सामान ट्रेन में ही छूट जाता है या चोरी हो जाता है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रेलवे ने इसके लिए आसान और असरदार व्यवस्था बना रखी है। सही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/left-your-luggage-on-the-train-dont-panic-heres-how-to-get-your-lost-belongings-back/article-83745"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/raolway-news.jpg" alt=""></a><br /><p>Railways News: हर दिन लाखों लोग <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारतीय रेलवे</span></span> की ट्रेनों में सफर करते हैं। सफर के दौरान कई बार जल्दबाजी या लापरवाही में सामान ट्रेन में ही छूट जाता है या चोरी हो जाता है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रेलवे ने इसके लिए आसान और असरदार व्यवस्था बना रखी है। सही समय पर शिकायत दर्ज कर आप अपना सामान वापस पा सकते हैं।</p>
<h3>कैसे मिलेगा आपका छूटा हुआ सामान? Railways News</h3>
<p>अगर आपका सामान ट्रेन में छूट गया है, तो सबसे पहले रेलवे को इसकी जानकारी देना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Rail Madad</span></span> ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।</p>
<h4><strong>स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:</strong></h4>
<ul>
<li>ऐप खोलें और अपना PNR नंबर दर्ज करें</li>
<li>सामान से जुड़ी पूरी जानकारी भरें</li>
<li>शिकायत दर्ज करें</li>
</ul>
<p>अगर आप ऐप इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Rail Madad Portal</span></span> पर जाकर भी ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं।<br />👉 ध्यान रखें: जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, उतनी जल्दी आपका सामान ढूंढने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।</p>
<h3>दूसरा तरीका भी है मददगार</h3>
<p>आप उस स्टेशन पर भी जा सकते हैं जहां ट्रेन रुकी थी या अगले बड़े स्टेशन पर जाकर स्टेशन मास्टर या लॉस्ट प्रॉपर्टी काउंटर से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p>साथ ही <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Railway Protection Force</span></span> (RPF) को सूचना देना भी जरूरी होता है।<br />अगर सामान तुरंत नहीं मिलता, तो RPF में FIR दर्ज करानी होती है, जिसके बाद रेलवे पूरे रूट पर सर्च ऑपरेशन शुरू करता है। ज्यादातर मामलों में सामान मिल भी जाता है।</p>
<h3> Rail Madad ऐप के फायदे</h3>
<ul>
<li>24/7 शिकायत दर्ज करने की सुविधा</li>
<li>टिकट, सुरक्षा, सफाई जैसी सभी समस्याओं का समाधान</li>
<li>शिकायत के बाद ACTION और FEEDBACK सिस्टम</li>
</ul>
<p>ट्रेन में सामान छूट जाना आम बात है, लेकिन सही जानकारी और तुरंत कार्रवाई से आप अपना खोया सामान आसानी से वापस पा सकते हैं। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Rail Madad</span></span> जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस प्रक्रिया को और भी आसान बना दिया है। इसलिए अगली बार ऐसी स्थिति आए, तो घबराने के बजाय सही कदम उठाएं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 12:19:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bird Nurturing Campaign: पूज्य गुरुजी की पावन प्रेरणा से संगरिया में परिंडा अभियान का शंखनाद</title>
                                    <description><![CDATA[सेवादारों ने ली जीव रक्षा की शपथ Bird Nurturing Campaign: संगरिया (सच कहूँ/सुरेंद्र जग्गा)। आसमान से बरसती आग और भीषण लू के थपेड़ों के बीच जहाँ इंसान पानी के लिए व्याकुल है, वहीं मूक पक्षियों के लिए प्यास बुझाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी मानवीय संवेदना को समझते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/the-launch-of-the-parinda-abhiyan-bird-feeder-campaign-in-sangaria-inspired-by-the-holy-guidance-of-pujya-guruji/article-83626"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/bird-rescue-campaign.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<h3>सेवादारों ने ली जीव रक्षा की शपथ</h3>
<p>Bird Nurturing Campaign: संगरिया (सच कहूँ/सुरेंद्र जग्गा)। आसमान से बरसती आग और भीषण लू के थपेड़ों के बीच जहाँ इंसान पानी के लिए व्याकुल है, वहीं मूक पक्षियों के लिए प्यास बुझाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी मानवीय संवेदना को समझते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी (इकाई संगरिया) के सेवादारों ने एक अनूठी पहल की है। ‘पक्षियोद्धार’ मुहिम के तहत सेवादारों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में परिंडे लगाकर विभिन्न पक्षियों के लिए शीतल जल की व्यवस्था की। Sangaria News</p>
<p>अभियान की शुरूआत रविवार प्रात: टिब्बी बस स्टैंड के पास बलजीत इन्सां के निवास से हुई। यहाँ सेवादारों ने पूरी श्रद्धा के साथ विनती का भजन बोला और पक्षियों की रक्षा का संकल्प लिया। सेवादारों ने न केवल परिंडे टांगे, बल्कि उनमें रोजाना ताजा पानी भरने और साफ-सफाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी उठाई। कार्यक्रम में पहुंचे समाजसेवी ओम प्रकाश करवा ने सेवादारों के जज्बे को सलाम करते हुए कहा, “भीषण गर्मी में प्यासे पक्षियों को पानी उपलब्ध कराना जीवदया का सबसे उत्तम कार्य है।</p>
<h3>भीषण गर्मी में बेजुबानों का सहारा बने डेरा सच्चा सौदा के सेवादार, पक्षियों के लिए लगाए परिंडे</h3>
<p>गुरुजी ने समाज को जो राह दिखाई है, वह मानवता और प्रकृति के संरक्षण के लिए अतुलनीय है। इस पुनीत कार्य में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के जिम्मेवार भाई लालचंद इन्सां, सच्चे प्रेमी सेवक जसविंदर इन्सां, सच्चे नम्र सेवादार कृष्ण सोनी इन्सां, बलजीत सिंह इन्सां, सच्ची प्रेमी समिति सेवादार सुरजीत खोसा इन्सां, गुरचरण खोसा इन्सां, हरचंद इन्सां, लवली गर्ग इन्सां, निंदी सोनी इन्सां, गिरधारी लाल इन्सां, ब्रिज लाल इन्सां, अमर ग्रोवर इन्सां, पवन सिंगला इन्सां, कृष्ण गर्ग इन्सां, महेश गोयल इन्सां, सुरेश इन्सां, शंकर लाल इन्सां, अक्षित इन्सां, सुरजभान इन्सां, सुभाष गोदारा इन्सां, भरत इन्सां व अमन इन्सां ने सहयोग किया।</p>
<h3>मानवता भलाई कार्यों की कड़ी में एक और कदम | Sangaria News</h3>
<p>कमेटी के जिम्मेवार लाल चंद इन्सां, कृष्ण सोनी और बलजीत इन्सां ने बताया कि डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे 175 मानवता भलाई कार्यों के अंतर्गत यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मनुष्य तो बोलकर पानी मांग सकता है, लेकिन ये जीव अपनी पीड़ा नहीं कह सकते। हमारा कर्तव्य है कि हम अपने घरों की छतों पर सकोरे बांधें।” संगरिया जागृति संस्था के अध्यक्ष अमरनाथ पेंटर ने सेवादारों की इस भावना की प्रशंसा की। अभियान के दौरान आमजन को भी प्रेरित किया गया कि वे अपने घर के बाहर या छत पर कम से कम एक परिंडा जरूर लगाएं ताकि इस तपती गर्मी में कोई पक्षी प्यास से दम न तोड़े।</p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:50:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मां ने कहा, मेरा बेटा एक दिन कुछ बड़ा करेगा, आज बनाई अन्तरराष्ट्रीय पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। विश्व कला दिवस हर वर्ष 15 अप्रैल को महान कलाकार लियोनार्डो दि विंची के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। यह दिन कला की शक्ति, रचनात्मकता और समाज में उसके योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है। इस विशेष अवसर पर हम बात कर रहे हैं एक ऐसे भारतीय कलाकार की, जिन्होंने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mother-said-my-son-will-do-something-great-one-day-today-he-has-forged-an-international-identity/article-83461"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/bhiwani.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> विश्व कला दिवस हर वर्ष 15 अप्रैल को महान कलाकार लियोनार्डो दि विंची के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। यह दिन कला की शक्ति, रचनात्मकता और समाज में उसके योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है। इस विशेष अवसर पर हम बात कर रहे हैं एक ऐसे भारतीय कलाकार की, जिन्होंने गांव की सादगी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई, कलाकार हरिओम बावा पुत्र रामनिवास वाल्मीकि। संघर्ष से शुरू हुई कला यात्रा हरिओम बावा का जन्म हरियाणा बवानीखेड़ा कस्बे के एक साधारण परिवार में हुआ, जहाँ आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उनके पिता मजदूरी करते थे, और घर की जिम्मेदारियाँ बहुत जल्दी उनके कंधों पर आ गई। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, उनके भीतर कला के प्रति जुनून कभी कम नहीं हुआ। उनकी कला यात्रा सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन है, पर्यावरण और समाज को जागरूक करने का मिशन। उन्होंने अपनी परफॉर्मिंग आर्ट और ईको-फ्रेंडली स्कल्पचर के माध्यम से लोगों को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास किया। हरिओम बावा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बीएफए (स्कल्पचर) की पढ़ाई कॉलेज आर्ट यूनिवसिर्टी आॅफ दिल्ली से पूरी की। फिर मास्टर आॅफ फाइन आर्ट की डिग्री अमरावती (नागपुर) से प्राप्त की। यह शिक्षा उनके लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि उनके सपनों को आकार देने का माध्यम बनी। हरिओम बावा की सफलता के पीछे उनकी मां का सबसे बड़ा योगदान रहा। उनकी मां हमेशा कहती थीं कि मेरा बेटा एक दिन कुछ बड़ा करेगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बीएफए के अंतिम वर्ष में उनकी मां का देहांत हो गया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका था। आज भी हरिओम बावा अपनी हर कला, हर उपलब्धि को अपनी मां को समर्पित करते हैं। उनकी कला में जो संवेदनशीलता और भावनात्मक गहराई है, वह इसी रिश्ते की देन है। जीवन साथी का सहयोग आज उनकी पत्नी रिंकी बावा उनके जीवन और कला यात्रा में एक मजबूत सहारा हैं। हर कठिन समय में उन्होंने हरिओम का साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। एक कलाकार के लिए भावनात्मक सहयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है, और रिंकी बावा इस भूमिका को पूरी निष्ठा से निभा रही हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">गांव से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक की कहानी</h4>
<p style="text-align:justify;">गांव से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक हरिओम बावा ने अपने गांव से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई। उनकी कला सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि एक संदेश देती है, प्रकृति को बचाओ, समाज को जगाओ। उनकी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में स्पेन में सिल्वर मेडल, बेल्जियम में सिल्वर मेडल, क्रोएशिया में ब्रॉन्ज मेडल, मिस्र में डॉ. मुस्तफा सादिक अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक जलवायु परिवर्तन पुरस्कार है। ये सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, संघर्ष और समर्पण की पहचान हैं। हरिओम बावा की विशेषता है उनकी परफॉर्मिंग आर्ट, जिसमें वे लाइव आर्ट के माध्यम से लोगों को पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर जागरूक करते हैं। वे बच्चों, युवाओं और आम जनता को यह संदेश देते हैं कि प्रकृति की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है, स्वच्छता और स्वांस्थ्य जीवन का आधार है, कला सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि समाज बदलने का माध्यम है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गोबर कला और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग</h3>
<p style="text-align:justify;">हरिओम बावा मुख्य रूप से गोबर कला और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करते हैं। यह न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि भारतीय परंपरा और लोक कला को भी जीवित रखता है। विश्व कला दिवस के इस अवसर पर, हरिओम बावा जैसे कलाकार हमें यह याद दिलाते हैं कि कला केवल रंगों और आकृतियों का खेल नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली माध्यम है जो दुनिया को बदल सकता है। गांव की मिट्टी से उठकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले हरिओम बावा आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:00:04 +0530</pubDate>
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                <title>&amp;#8216;किसमें कितना है दम&amp;#8217; में विवेक ने मारी बाजी, बेटियों ने भी बढ़ाया मान, गांव में पहुंचने पर हुआ स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[हनुमानगढ़। ‘किसमें कितना है दम’ सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में ग्राम पंचायत पन्नीवाली के प्रतिभाशाली विद्यार्थी विवेक जोशी ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर गांव, क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन किया है। डीडी पंजाबी की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में विवेक ने तहसील, जिला और राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/vivek-triumphs-in-kisme-kitna-hai-dam-daughters-also-bring-honor-warm-welcome-awaits-upon-return-to-village/article-82924"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/hanumangarh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हनुमानगढ़</strong>। ‘किसमें कितना है दम’ सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में ग्राम पंचायत पन्नीवाली के प्रतिभाशाली विद्यार्थी विवेक जोशी ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर गांव, क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन किया है। डीडी पंजाबी की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में विवेक ने तहसील, जिला और राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पूरे देश में एकमात्र विजेता बनने पर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने इसे गौरव का क्षण बताया। गांव की बेटियों ने भी शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया। कक्षा 10 की छात्रा शहनाज ने 79.17 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया, वहीं प्रतिज्ञा ने 79 प्रतिशत अंकों के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त कर गांव का मान बढ़ाया।</p>
<p>विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर मंगलवार को ग्राम पंचायत स्तर पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विवेक जोशी, शहनाज और प्रतिज्ञा को डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा भेंट कर व गुलाल लगाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर पंचायत प्रशासक सोनू चोपड़ा ने कहा कि यह पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता को उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम बताते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास सच्चे हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उन्होंने विद्यार्थियों के माता-पिता और गुरुजनों को भी बधाई देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है। कार्यक्रम में वार्ड पंच समेस्ता गोदारा, एएनएम विजेता सहू, ओमप्रकाश जोशी, एसएसएमसी सदस्य दयाराम गोदारा, कश्मीर सिंह, जफर अली, वीरपाल कौर, कृष्णलाल यादव, इमीलाल सुथार, जरीना, परमजीत कौर, लाजवंती वर्मा सहित कई गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/vivek-triumphs-in-kisme-kitna-hai-dam-daughters-also-bring-honor-warm-welcome-awaits-upon-return-to-village/article-82924</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 12:54:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोरीवाला के जीवनदास तनेजा ने दादी व माता-पिता के संस्कारों की बदौलत 30 साल तक बिना वेतन पढ़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[जीवनदास तनेजा का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज गोरीवाला (सच कहूँ/अनिल)। उपतहसील गोरीवाला के गांव गोदीकां से एक शिक्षक 30 मार्च को राजकीय विद्यालयों में लगभग 30 वर्ष का अवैतनिक कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। जिनका नाम है जीवनदास तनेजा। उन्होंने बिना किसी वेतन के उन सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/goriwalas-jeevandas-taneja-enters-the-india-book-of-records/article-82813"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/goriwala-jeevan-dass.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">जीवनदास तनेजा का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज</h3>
<p style="text-align:justify;">गोरीवाला (सच कहूँ/अनिल)। उपतहसील गोरीवाला के गांव गोदीकां से एक शिक्षक 30 मार्च को राजकीय विद्यालयों में लगभग 30 वर्ष का अवैतनिक कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। जिनका नाम है जीवनदास तनेजा। उन्होंने बिना किसी वेतन के उन सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षित करने में अपना जीवन समर्पित किया, जहां अध्यापकों की कमी थी। उनकी इस सेवा के लिए उनका नाम जेम्स बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। शिक्षक का सपना बच्चों को शिक्षित करना था, जो अब अपने अंतिम चरण में है। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह सामाजिक कार्य उनकी दादी और माता-पिता के अच्छे संस्कारों के कारण संभव हो पाया। उनके माता-पिता हमेशा कहते थे कि पैसा जिंदगी के लिए जरूरी है, पर सब कुछ नहीं है; अगर संभव हो तो जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए। इसी सीख से प्रेरित होकर उन्होंने शिक्षा की अत्यधिक आवश्यकता वाले स्थानों पर पढ़ाने का संकल्प लिया। शुरूआत में यह कार्य थोड़ा मुश्किल था, लेकिन उनके परिवार, मां, पत्नी, बच्चों और मित्रों ने इसमें बहुत सहयोग किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसी ने सराहा तो किसी ने कहा कर रहा अपना समय खराब: जीवनदास | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">जीवनदास तनेता कहते हैं कि इन 30 सालों में मेरी कोशिश यह रही कि मेरे कारण बच्चों को पढ़ाई में कोई परेशानी न झेलनी पड़े और बिना किसी जरूरी कार्य कि मैं घर पर न रहूं। इन वर्षों में बहुत से बुद्धिजीवी, शिक्षाविद साथियों से मिलन हुआ। जिन्होंने मुझे काफी प्रोत्साहित किया, परंतु कुछ ऐसे साथी भी मिले जिन्होंने मुझे अपना समय व्यर्थ करने की बात भी कही। अधिकतर अध्यापक साथियों का व्यवहार बहुत ही मैत्रीपूर्ण और सराहनीय रहा। विभिन्न ग्राम पंचायत, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं, क्लब व अकेडमी, एसडीएम डबवाली, उपायुक्त द्वारा विशेष अवसरों पर सम्मानित किया गया। विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से भी मेरा मनोबल को बढ़ाया गया। जिसमें सच कहूं का विशेष सहयोग रहा। मेरा मनोबल उसे समय काफी प्रफुल्लित हुआ जब मेरा नाम इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स व जेम्स बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।</p>
<h3 style="text-align:justify;">साक्षरता मिशन के तहत लिया मुफ्त पढ़ाने का निर्णय | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">जीवनदास तनेजा ने 1986 में नेशनल कॉलेज सरसा से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान साक्षरता मिशन की शुरूआत हुई, जिसमें उन्होंने बिना किसी मेहनताना के हिस्सा लेकर अपना मिशन शुरू किया। वर्ष 1996 में, राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय गोरीवाला में अध्यापकों की कमी के कारण उन्हें पढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने इस विद्यालय में लगातार नौ वर्षों तक लड़कियों को शिक्षा दी। इसके बाद उन्होंने छह महीने राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय कालुआना में और फिर तीन महीने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल अहमदपुर दारेवाला में अपनी सेवाएं दीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल 2006 से 7 मई 2017 तक,उन्होंने राजकीय प्राथमिक पाठशाला अहमदपुर दारेवाला में बच्चों को शिक्षा प्रदान की। 8 मई 2017 से, स्टाफ की कमी के कारण ग्राम पंचायत गोदिका के आग्रह पर,वे राजकीय प्राथमिक पाठशाला गोदिका में अवैतनिक सेवाएं दे रहे हैं। वे 20 मार्च 2026 को 62 वर्ष पूरे कर अपनी सेवा से सेवानिवृत्त होंगे। 31 मार्च 2026 तक निरंतर जारी रहेंगी। दूरस्थ शिक्षा से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। Sirsa News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 11:00:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेपला की चौपाल से दिल्ली के गलियारों तक, क्या पाइप वाली राजनीति अब पंचायत वाली जिम्मेदारी बनेगी?</title>
                                    <description><![CDATA[अंबाला (सच कहूँ ब्यूरो) अक्सर सरकारी योजनाओं का अंत एक शिलालेख या उद्घाटन पट्टी पर आकर रुक जाता है, लेकिन अंबाला के खंड साहा का गांव तेपला रविवार को एक अलग ही बदलाव का गवाह बना। विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित जल अर्पण दिवस केवल एक आयोजन भर नहीं था, बल्कि यह उस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/from-the-chaupal-of-tepla-to-the-streets-of-delhi/article-82606"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/ambala.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अंबाला (सच कहूँ ब्यूरो)</strong> अक्सर सरकारी योजनाओं का अंत एक शिलालेख या उद्घाटन पट्टी पर आकर रुक जाता है, लेकिन अंबाला के खंड साहा का गांव तेपला रविवार को एक अलग ही बदलाव का गवाह बना। विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित जल अर्पण दिवस केवल एक आयोजन भर नहीं था, बल्कि यह उस सरकारी व्यवस्था की विदाई थी जहाँ ग्रामीण पानी के लिए विभाग का मुँह ताकते थे। अब तेपला के तीन ट्यूबवेल, बिछी हुई पाइपलाइन और उनसे आने वाली हर बूंद की कमान ग्राम जल एवं सीवरेज समिति के हाथों में है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बदलाव की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली के वातानुकूलित कमरों से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री श्री वीरन्ना सोमन्ना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सीधे गांव की मिट्टी से जुड़े। संवाद के दौरान जब ग्रामीणों ने स्वच्छ पानी की सुचारू सप्लाई की पुष्टि की, तो सत्ता के गलियारों में बैठे मंत्रियों ने इसे जल जीवन मिशन की बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन इस डिजिटल संवाद के पीछे एक बड़ा सामाजिक सवाल भी छिपा है कि क्या हमारी पंचायतें तकनीकी रूप से इतनी सक्षम हो गई हैं कि वे विभाग की मदद के बिना इस जटिल तंत्र को संभाल सकें?</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय की डिप्टी सेक्रेटरी डॉ. अंकिता चक्रवर्ती की मौजूदगी में समिति सदस्यों का सम्मान तो हुआ, लेकिन असली सम्मान तब होगा जब पाइपलाइन में आने वाली पहली लीकेज को ठीक करने के लिए पंचायत को सरकारी बजट का इंतज़ार न करना पड़े। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने जिला स्तर पर मिशन की सफलता के आंकड़े तो पेश किए, पर तेपला की चौपाल पर खड़े ग्रामीण नरेंद्र सिंह की बातों में व्यावहारिक भरोसा दिखा। उन्होंने साफ़ किया कि फिलहाल गांव के हर घर में नल है और सप्लाई का समय भी निर्धारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">
रिपोर्टों के अनुसार, गांव की इस समिति को अब न केवल पानी का वितरण करना है, बल्कि संसाधनों की सुरक्षा और भविष्य के प्रबंधन का जिम्मा भी उठाना है। यह प्रयोग अगर सफल रहता है, तो यह विकेंद्रीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण बनेगा। फिलहाल, तेपला में जल संरक्षण की शपथ ली जा चुकी है और उत्सव का माहौल है, लेकिन इस योजना की असली परीक्षा उन दिनों में होगी जब गर्मी अपने चरम पर होगी और जल स्तर नीचे जाएगा। तब देखना होगा कि जल अर्पण का यह संकल्प जमीनी धरातल पर कितना गहरा उतरता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:59:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Water Day: बूंद-बूंद बचाने की मुहिम में फतेहाबाद बना उदाहरण, जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली की पहल से बढ़ी जनभागीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[World Water Day:  सच कहूँ/विनोद शर्मा फतेहाबाद। जल ही जीवन है यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच फतेहाबाद जिले में जल संरक्षण की मुहिम को धरातल पर उतारने में जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली की भूमिका काफी अहम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/fatehabad-sets-an-example-in-the-campaign-to-save-every-drop-public-participation-boosts-thanks-to-the-initiative-of-district-advisor-sharma-chand-lali/article-82584"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/world-water-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>World Water Day:  सच कहूँ/विनोद शर्मा फतेहाबाद।</strong> जल ही जीवन है यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच फतेहाबाद जिले में जल संरक्षण की मुहिम को धरातल पर उतारने में जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली की भूमिका काफी अहम रही है। उनके प्रयासों से न केवल सरकारी योजनाएं गांवों तक पहुंचीं, बल्कि लोगों को भी पानी बचाने के लिए प्रेरित किया गया। दरअसल हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करना है। इसी कड़ी में फतेहाबाद जिले में भी जल संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हररड की भी अहम भूमिका | World Water Day</h4>
<p style="text-align:justify;">विश्व जल दिवस के अवसर पर हररड (वाटर एंड सैनिटेशन सपोर्ट आॅगेर्नाइजेशन) भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करता है। यह संस्था सरकार की योजनाओं और आम जनता के बीच एक कड़ी का काम करती है, जिससे जल प्रबंधन के प्रयासों को मजबूती मिलती है। जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली के मार्गदर्शन में जल संरक्षण के क्षेत्र में जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे आने वाले समय के लिए एक मजबूत नींव साबित हो सकते हैं। इन प्रयासों से न केवल वर्तमान पीढ़ी को लाभ मिल रहा है, बल्कि भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने की दिशा में भी जिले को मजबूती मिल रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">जल शक्ति अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया</h5>
<p style="text-align:justify;">जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, खासकर जल शक्ति अभियान, को प्रभावी तरीके से लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रशासन और आम जनता के बीच एक सेतु बनकर काम किया, ताकि जल संचयन की तकनीकें केवल कागजों तक सीमित न रहकर गांवों में व्यवहारिक रूप से अपनाई जा सकें। फतेहाबाद के कई क्षेत्र लगातार गिरते भू-जल स्तर के कारण ह्यडार्क जोनह्ण की श्रेणी में आ रहे थे। इस स्थिति को सुधारने के लिए लाली ने जल पुनर्भरण प्रणालियों को बढ़ावा दिया। साथ ही पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार और वर्षा जल संचयन के प्रयासों पर विशेष जोर दिया गया, जिससे भू-जल स्तर को संतुलित रखने में मदद मिल सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;">किसानों को दी नई तकनीकों की जानकारी</h5>
<p style="text-align:justify;">खेती-प्रधान जिला होने के कारण यहां पानी की सबसे ज्यादा खपत सिंचाई में होती है। इसे ध्यान में रखते हुए किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों के बारे में जागरूक किया गया।किसानों को टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा कम पानी में पकने वाली फसलों जैसे मक्का और दलहन की खेती तथा धान की सीधी बिजाई तकनीक को बढ़ावा दिया गया, ताकि पानी की बचत हो सके। जल संरक्षण के इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत जनभागीदारी रही। स्कूलों, पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से ह्लपानी बचाओह्व का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इसे एक जन-आंदोलन का रूप देने की कोशिश की गई।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:12:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दुबई में की गई ब्लड देने की अपील, सैंकड़ों डेरा सच्चा सौदा सेवादारों की लग गई कतार</title>
                                    <description><![CDATA[दुबई ब्लड बैंक के अधिकारियों की अपील पर डेरा सच्चा सौदा सेवादारों ने किया 100 यूनिट रक्तदान Blood Donation: दुबई (यूएई)। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए डेरा सच्चा सौदा की शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों ने एक बार फिर निस्वार्थ सेवा की मिसाल पेश की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/responding-to-an-appeal-by-officials-from-the-dubai-blood-bank-dera-sacha-sauda-volunteers-donated-100-units-of-blood/article-82399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/dubai-blood-donation-start.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">दुबई ब्लड बैंक के अधिकारियों की अपील पर डेरा सच्चा सौदा सेवादारों ने किया 100 यूनिट रक्तदान</h3>
<p style="text-align:justify;">Blood Donation: दुबई (यूएई)। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए डेरा सच्चा सौदा की शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों ने एक बार फिर निस्वार्थ सेवा की मिसाल पेश की है। दुबई ब्लड बैंक के अधिकारियों द्वारा सहयोग की अपील किए जाने पर इन सेवादारों ने तत्परता दिखाते हुए 8 मार्च 2026 को 100 यूनिट रक्तदान किया। Dubai News</p>
<p style="text-align:justify;">जब ब्लड बैंक की ओर से इस पुनीत कार्य के लिए कमेटी को निमंत्रण मिला, तो यूएई के विभिन्न कोनों—फुजैराह, अबू धाबी, अजमान, उम्म अल क्वैन और शारजाह से शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर कमेटी के सदस्य एकजुट होकर दुबई पहुँचे। मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इन सेवादारों ने इस महत्वपूर्ण समय में अपना योगदान सुनिश्चित किया। इस रक्तदान शिविर की खास बात रही कि महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक रक्तदान किया और यह संदेश दिया कि वे समाज सेवा के हर कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि वे अपने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए मानवता की सेवा के लिए सदैव समर्पित रहते हैं। दुबई ब्लड बैंक के अधिकारियों ने सेवादारों के इस जज्बे की सराहना की और समय पर दिए गए इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। Dubai News</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/responding-to-an-appeal-by-officials-from-the-dubai-blood-bank-dera-sacha-sauda-volunteers-donated-100-units-of-blood/article-82399</link>
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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 11:05:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जसबीर सिंह राठी बने लेफ्टिनेंट, बहन व पिता भी हैं सेना में उच्च पदों पर</title>
                                    <description><![CDATA[परदादा, दादा-पिता सहित पूरा परिवार कर रहा है देश के लिए सेवा भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। Bhiwani: चेन्नई आर्मी ट्रेनिंग सेंटर से जसबीर सिंह राठी पास आउट हुए हैं और अब वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए हैं। पिछले वर्ष चेन्नई से ही जसबीर की बहन सिमरन राठी भी इसी सेंटर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/jasbir-singh-rathi-became-lieutenant/article-82178"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/bhiwani.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">परदादा, दादा-पिता सहित पूरा परिवार कर रहा है देश के लिए सेवा</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Bhiwani: चेन्नई आर्मी ट्रेनिंग सेंटर से जसबीर सिंह राठी पास आउट हुए हैं और अब वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए हैं। पिछले वर्ष चेन्नई से ही जसबीर की बहन सिमरन राठी भी इसी सेंटर से पास आउट हुई थी और गोल्ड मेडल जीता था। इन दोनों बहन-भाई के पिता जय भगवान सिंह राठी सेना में ब्रिगेडियर के पद पर हैं। इनका गांव राठीवास जिला गुडगांव में है और इन बच्चों के दादा कप्तान के पद से रिटार्य हुए थे और इनके परदादा हवलदार के पद से रिटार्य हुए थे। इन बच्चों की मां उर्मिला ग्रेवाल राठी भिवानी के गांव बामला में इश्वर सिंह ग्रेवाल की बेटी हैं। बामला गांव की बेटी उर्मिला का भी इन बच्चों की कामयाबी में बहुत बड़ा योगदान है। इन्होंने स्वयं भी कॉलेज में पढ़ते समय पूरे हरियाणा की एनसीसी की कमांड की थी। इनकी भी सेना में बहुत दिलचस्पी रही है और उर्मिला ग्रेवाल का बड़ा भाई करणबीर सिंह ग्रेवाल इस समय भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद पर हैं। Bhiwani</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rupee News: 10,20, 50 नोटों को लेकर केन्द्र सरकार का आया बड़ा बयान, जल्दी पढ़ेेंं" href="http://10.0.0.122:1245/central-governments-statement-on-rs-ten-twenty-and-fifty-notes/">Rupee News: 10,20, 50 नोटों को लेकर केन्द्र सरकार का आया बड़ा बयान, जल्दी पढ़ेेंं</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 14:51:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सम्भलहेडा के किसान हाजी महबूब की किस्मत चमकी, लकी ड्रॉ में जीता महिंद्रा 575 ट्रैक्टर</title>
                                    <description><![CDATA[मीरापुर।(सच कहूं/कोमल प्रजापति) क्षेत्र के गांव सम्भलहेडा के किसान हाजी महबूब की किस्मत उस समय चमक उठी जब उनका नाम लकी ड्रॉ में निकलकर सामने आया और उन्हें महिंद्रा 575 ट्रैक्टर पुरस्कार स्वरूप मिला। इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। जानकारी के अनुसार हाजी महबूब ने सितंबर माह में एग्रो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sambhalhera-farmer-haji-mehboobs-luck-shines-wins-mahindra-575-tractor-in-lucky-draw/article-81378"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/meerapur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मीरापुर।(सच कहूं/कोमल प्रजापति</strong>) क्षेत्र के गांव सम्भलहेडा के किसान हाजी महबूब की किस्मत उस समय चमक उठी जब उनका नाम लकी ड्रॉ में निकलकर सामने आया और उन्हें महिंद्रा 575 ट्रैक्टर पुरस्कार स्वरूप मिला। इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार हाजी महबूब ने सितंबर माह में एग्रो स्टार कंपनी के कैस्पर सरसों के एक-एक किलोग्राम के दो पैकेट बीज खरीदे थे। उस माह खरीदारी करने वाले किसानों के नाम लकी ड्रॉ योजना में शामिल किए गए थे। करीब 70 हजार किसानों ने इस योजना के तहत भाग लिया था। कंपनी द्वारा 13 जनवरी को पुणे स्थित मुख्यालय से ऑनलाइन लकी ड्रॉ निकाला गया, जिसमें सम्भलहेडा के किसान हाजी महबूब का नाम महिंद्रा 575 ट्रैक्टर के लिए घोषित हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही ट्रैक्टर निकलने की सूचना मिली, किसान हाजी महबूब खुशी से झूम उठे। देखते ही देखते यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई और ग्रामीणों ने उन्हें बधाइयां देना शुरू कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को कंपनी की ओर से सम्भलहेडा स्थित शिव फार्म हाउस पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में रीजनल मैनेजर राकेश सिंह, टेरिटरी मैनेजर कुलदीप सिंह, वरिष्ठ कृषि अधिकारी देवेंद्र त्रिपाठी तथा जानसठ के आदेश कुमार मौजूद रहे। अधिकारियों ने हाजी महबूब को सम्मानपूर्वक महिंद्रा 575 DI ट्रैक्टर की चाबी सौंपकर शुभकामनाएं दीं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कंपनी किसानों को बेहतर बीज और तकनीक उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। हाजी महबूब की सफलता ने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 12:24:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Fatehabad: नशामुक्ति अभियान की जीवंत मिसाल, नशे के दलदल से निकलकर इटली तक पहुंचा सोनू</title>
                                    <description><![CDATA[Fatehabad:  फतेहाबाद सच कहूँ/विनोद कुमार शर्मा। जब नेतृत्व संवेदनशील हो और संकल्प दृढ़, तो बदलाव अवश्यंभावी हो जाता है। फतेहाबाद जिले में पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन, आईपीएस की प्रेरणा और मानवीय सोच ने एक ऐसे युवक की जिंदगी को नई दिशा दी, जो कभी नशे की गिरफ्त में अपना भविष्य खो चुका था। आज वही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sonu-sood-a-living-example-of-the-anti-drug-campaign-escaped-the-quagmire-of-addiction-and-reached-italy/article-81198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/fatehabad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Fatehabad:  फतेहाबाद सच कहूँ/विनोद कुमार शर्मा।</strong> जब नेतृत्व संवेदनशील हो और संकल्प दृढ़, तो बदलाव अवश्यंभावी हो जाता है। फतेहाबाद जिले में पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन, आईपीएस की प्रेरणा और मानवीय सोच ने एक ऐसे युवक की जिंदगी को नई दिशा दी, जो कभी नशे की गिरफ्त में अपना भविष्य खो चुका था। आज वही युवक इटली में मेहनत कर सम्मानजनक जीवन जी रहा है और नशा मुक्ति अभियान की जीवंत मिसाल बन चुका है। टोहाना क्षेत्र के गांव रत्ताखेड़ा निवासी सोनू सिंह की जीवन यात्रा संघर्ष, भटकाव और फिर आत्मविश्वास के साथ खड़े होने की प्रेरक कहानी है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सोनू के जीवन में कठिनाइयाँ बचपन से ही शुरू हो गई थीं। मात्र 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई और उन्हें चौथी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कम उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझ उठाते हुए सोनू ने बाइक रिपेयरिंग का कार्य सीखा। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने टोहाना में खुद की वर्कशॉप स्थापित की। ईमानदारी और व्यवहार कुशलता के कारण उन्होंने क्षेत्र में अच्छी पहचान बना ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने सोनू की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया। कामकाज ठप हो गया, आमदनी रुक गई और मानसिक तनाव बढ़ने लगा। इसी दौरान गलत संगत में पड़कर नशे का सहारा लिया। शुरूआत में तनाव से राहत का माध्यम बना नशा धीरे-धीरे लत में बदल गया। मेहनत से कमाई प्रतिष्ठा धूमिल होने लगी और अंतत: रोजगार भी छिन गया। बेहतर भविष्य की तलाश में सोनू ने डंकी रूट के माध्यम से विदेश जाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें डिपोर्ट कर वापस भेज दिया गया। लगातार असफलताओं और नशे की लत ने उनके जीवन को लगभग तोड़ दिया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पुलिस की संवेदनशील पहल बनी मोड़</h3>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान फतेहाबाद पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नशामुक्ति अभियान की जानकारी गांव तक पहुंची। परिजनों ने थाना शहर टोहाना के माध्यम से अपनी व्यथा पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन तक पहुंचाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी जैन ने तुरंत संज्ञान लिया और नशा मुक्ति टीम प्रभारी सुन्दर लाल को गांव भेजकर संपर्क स्थापित कराया। एसपी सिद्धांत जैन ने कहा कि फतेहाबाद पुलिस का उद्देश्य केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना भी है। उन्होंने कहा, नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए संवेदनशील पुनर्वास, परिवार का सहयोग और सामाजिक सहभागिता आवश्यक है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नई दिशा, नई पहचान</h4>
<p style="text-align:justify;">लगातार प्रयासों और सकारात्मक वातावरण का परिणाम यह हुआ कि सोनू ने नशे को पूरी तरह त्याग दिया। उनका आत्मविश्वास लौटा और जीवन ने नई दिशा पकड़ ली। आज वह इटली में रहकर मेहनत कर रहे हैं और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। सोनू स्वीकार करते हैं कि यदि समय पर फतेहाबाद पुलिस और एसपी सिद्धांत जैन का सहयोग न मिलता, तो उनका जीवन शायद भटकाव में ही समाप्त हो जाता। वे युवाओं से अपील करते हैं कि नशे से दूर रहें और किसी भी समस्या में पुलिस से संपर्क करने में संकोच न करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:13:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>DEPTH Campaign: डेरा सच्चा सौदा की ‘डेप्थ मुहिम’ नशे की दलदल में फंसे युवाओं को दे रही नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[‘नशा तो बर्बादी का घर है, यह बात डेरा सच्चा सौदा में आकर समझ आई’ DEPTH Campaign: सरसा (सच कहूँ/रविंद्र शर्मा)। समाज को दीमक की तरह खा रहा नशा आज एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। गांवों से लेकर शहरों तक, युवा ही नहीं बल्कि बुजुर्ग और बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/dera-sacha-saudas-depth-campaign-is-giving-new-life-to-youth-trapped-in-the-quagmire-of-drugs/article-81161"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/depth-campaign-varinder-singh.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">‘नशा तो बर्बादी का घर है, यह बात डेरा सच्चा सौदा में आकर समझ आई’</h3>
<p style="text-align:justify;">DEPTH Campaign: सरसा (सच कहूँ/रविंद्र शर्मा)। समाज को दीमक की तरह खा रहा नशा आज एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। गांवों से लेकर शहरों तक, युवा ही नहीं बल्कि बुजुर्ग और बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। जिस घर में नशे रूपी अभिशाप ने कदम रखा, वहां खुशियां उजड़ गईं और परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गया। नशे के इस दानव पर नियंत्रण पाने के लिए डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाई जा रही डेप्थ मुहिम लगातार नशे से ग्रस्त लोगों के घरों में आशा की किरण जगा रही है। डेरा द्वारा लगाए जा रहे नशा छुड़ाओ कैंपों के माध्यम से लाखों लोग नशे की दलदल से बाहर निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">इसी मुहिम के तहत नशा छोड़कर स्वस्थ होकर घर लौट रहे जिला मानसा के एक गांव से आए वरिंदर सिंह (काल्पनिक नाम) ने बताया कि वह मेडिकल नशे का आदी हो गया था। मेहनत-मजदूरी कर परिवार पालने वाला यह युवक धीरे-धीरे अपने ही परिवार पर बोझ बन गया। वह रोजाना मेडिकल नशा करता था। वरिंदर सिंह ने बताया कि जब डेरा श्रद्धालुओं ने उसकी और उसके परिवार की दयनीय स्थिति देखी तो वे उसे डेरा सच्चा सौदा में चल रहे नशा छुड़ाओ कैंप में लेकर आए। यहां पहुंचने के बाद शुरूआती चार दिन तक उसे यह भी पता नहीं था कि वह कहां है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी के आशीर्वाद और सेवा-संभाल ने बदली जिंदगी | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान जरूरत पड़ने पर सेवादारों ने स्वयं चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई और उपचार कराया। जब उसे होश आया तो पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पवित्र वचनों के अनुसार उसे लंगर-प्रसाद ग्रहण कराया गया। उसने बताया कि यहां सेवादार बहुत अच्छे तरीके से सेवा-संभाल करते हैं। नशा छोड़ने वाले मरीजों को दूध, पौष्टिक आहार और प्रोटीनयुक्त भोजन दिया जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यहां घर जैसा माहौल मिलता है | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">वरिंदर सिंह ने कहा कि नशा तो बर्बादी का घर है, यह बात उसे डेरा सच्चा सौदा में आकर सही मायने में समझ आई। उसने कहा कि नशे से पीड़ित लोगों को अपना इलाज करवाने के लिए यहां जरूर आना चाहिए। यह कैंप सामान्य नशा छुड़ाओ केंद्रों से बिल्कुल अलग है, जहां आने पर घर जैसा वातावरण महसूस होता है। अच्छे खानपान, सेवा-संभाल और आध्यात्मिक माहौल में रहकर नशा छोड़ना कठिन नहीं लगता। उसने बताया कि जैसे-जैसे दिन बीतते गए, वह पूरी तरह स्वस्थ होता गया और अब नशे से पूरी तरह मुक्त होकर अपने घर लौट रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल युवा और छोटे-छोटे बच्चे नशे में डूबे पड़े हैं। दुख होता है जब कोई माँ रोती है जिसका बेटा नशे के कारण इस दुनिया से चला गया। नशे के राक्षस से समाज को बचाने की ओर किसी का ध्यान नहीं। अगर सब मिलकर प्रयास करें तो अकेला पंजाब या हरियाणा नहीं, पूरा देश और पूरा संसार नशे के इस राक्षस से बच सकता है। Sirsa News<br />
<strong>-पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, डेरा सच्चा सौदा, सरसा</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:08:11 +0530</pubDate>
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