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                <title>कृषि - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>कृषि RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Kisan Credit Card Loan Limit: किसान क्रेडिट कार्ड के नियम बदल गए! अब कितना लोन मिलेगा, जानिए पूरी डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[आज के समय में खेती-किसानी के बढ़ते खर्च किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) ने इस परेशानी को काफी हद तक आसान बना दिया है। यह योजना किसानों को कम ब्याज दर पर आसानी से कर्ज उपलब्ध कराती है, जिससे वे अपनी खेती से जुड़ी जरूरतों को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/kisan-credit-card-loan-limit/article-83877"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/kisan-credit-card-loan-limit.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज के समय में खेती-किसानी के बढ़ते खर्च किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) ने इस परेशानी को काफी हद तक आसान बना दिया है। यह योजना किसानों को कम ब्याज दर पर आसानी से कर्ज उपलब्ध कराती है, जिससे वे अपनी खेती से जुड़ी जरूरतों को बिना किसी आर्थिक दबाव के पूरा कर सकें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">💰 अब 5 लाख रुपये तक का लोन</h3>
<p style="text-align:justify;">इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी बढ़ी हुई लोन लिमिट है।<br />
पहले जहां किसानों को अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ही कर्ज मिलता था, वहीं अब यह सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने और बड़े स्तर पर खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">🔓 बिना गारंटी भी मिल सकता है कर्ज</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान बिना किसी गारंटी के 1.60 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं।<br />
अगर ज्यादा राशि की जरूरत हो, तो जमीन के दस्तावेज दिखाकर 5 लाख रुपये तक का कर्ज हासिल किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे छोटे और मध्यम किसानों को भी बड़ी राहत मिलती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">📉 ब्याज दर में जबरदस्त छूट</h3>
<p style="text-align:justify;">KCC की सबसे आकर्षक बात इसकी कम ब्याज दर है:</p>
<p style="text-align:justify;">सामान्य ब्याज दर: लगभग 9%<br />
सरकार की सब्सिडी: 2% छूट<br />
समय पर भुगतान करने पर: 3% अतिरिक्त छूट</p>
<h3 style="text-align:justify;">👉 यानी अगर किसान समय पर कर्ज चुका देते हैं, तो उन्हें सिर्फ 4% सालाना ब्याज देना पड़ता है, जो बाजार में सबसे सस्ता विकल्प माना जाता है।</h3>
<p style="text-align:justify;">🐄 खेती के साथ पशुपालन भी शामिल</p>
<p style="text-align:justify;">अब KCC का दायरा सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहा। इसमें शामिल हैं:</p>
<p style="text-align:justify;">पशुपालन (गाय, भैंस आदि)<br />
इससे किसान अपनी आमदनी के नए स्रोत भी विकसित कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">🏦 आसान आवेदन प्रक्रिया</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना बेहद आसान है:</p>
<p style="text-align:justify;">आधार कार्ड<br />
पैन कार्ड<br />
जमीन के दस्तावेज</p>
<p style="text-align:justify;">इनके साथ नजदीकी बैंक शाखा में आवेदन किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">👉 एक बार कार्ड बन जाने के बाद यह 5 साल तक वैध रहता है और हर साल बैंक आपकी जरूरत के अनुसार क्रेडिट लिमिट की समीक्षा करता है।</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>✅ क्यों है KCC किसानों के लिए वरदान?</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कम ब्याज दर पर कर्ज<br />
आसान और तेज प्रक्रिया<br />
बिना गारंटी लोन की सुविधा<br />
खेती के साथ अन्य कृषि गतिविधियों को भी समर्थन</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="समय पर पहचान ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार: डॉ. तरुण तोमर" href="https://www.sachkahoon.com/timely-identification-is-the-biggest-weapon-of-protection-dr-tarun-tomar/">समय पर पहचान ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार: डॉ. तरुण तोमर</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:28:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Summer Plant Tips: गर्मियों में पौधों को कब और कैसे दें पानी, जानिये यहां सब कुछ</title>
                                    <description><![CDATA[Summer Plant Tips: गर्मियों की चिलचिलाती धूप में अक्सर हमें लगता है कि हमारे पौधे प्यास से तड़प रहे होंगे। इसी सोच में हम बार-बार उन्हें पानी देते रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जरूरत से ज्यादा पानी देना, यानी ओवरवॉटरिंग, पौधों के लिए उतना ही खतरनाक है जितना पानी की कमी। अगर आप […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/summer-plant-tips/article-83709"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/summer-plant-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Summer Plant Tips: गर्मियों की चिलचिलाती धूप में अक्सर हमें लगता है कि हमारे पौधे प्यास से तड़प रहे होंगे। इसी सोच में हम बार-बार उन्हें पानी देते रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जरूरत से ज्यादा पानी देना, यानी ओवरवॉटरिंग, पौधों के लिए उतना ही खतरनाक है जितना पानी की कमी। अगर आप अपने होम गार्डन या बालकनी के पौधों को स्वस्थ और हरा-भरा रखना चाहते हैं, तो पानी देने का सही तरीका और समय समझना बेहद जरूरी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ओवरवॉटरिंग: छुपा हुआ खतरा | Summer Plant Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">अधिक पानी देने का सबसे बुरा असर पौधों की जड़ों पर पड़ता है। जब मिट्टी लगातार गीली रहती है, तो उसमें ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे जड़ें “घुटने” लगती हैं और धीरे-धीरे सड़ने लगती हैं, जिसे रूट रॉट कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पहचान के संकेत:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>पत्तियों का पीला पड़ना</li>
<li>तने का नरम होना</li>
<li>पौधे का मुरझाना, भले ही मिट्टी गीली हो</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">👉 ऐसे में लोग और ज्यादा पानी दे देते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> पानी देने का सही तरीका</h3>
<p style="text-align:justify;">पौधों को उतना ही पानी दें जितना मिट्टी आराम से सोख सके। गमले में पानी जमा होना (वॉटर लॉगिंग) जड़ों के लिए जहर जैसा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ध्यान रखें:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत छूकर देखें</li>
<li>अगर मिट्टी गीली है, तो पानी न दें</li>
<li>ड्रेनेज होल वाला गमला इस्तेमाल करें</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">सही समय ही असली फर्क लाता है</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मी में पानी देने का समय बहुत मायने रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सबसे सही समय:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>🌅 सुबह (सूरज निकलने से पहले)</li>
<li>🌇 शाम (सूरज ढलने के बाद)</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्यों?</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सुबह पानी देने से पौधे दिनभर की गर्मी झेल पाते हैं</li>
<li>शाम को पानी देने से मिट्टी रातभर ठंडी रहती है</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">❌ दोपहर की तेज धूप में पानी देने से बचें—पानी जल्दी उड़ जाता है और पत्तियों को नुकसान हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मल्चिंग: कम पानी में ज्यादा फायदा</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आप चाहते हैं कि आपके पौधे कम पानी में भी ताजगी बनाए रखें, तो मल्चिंग अपनाएं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैसे करें:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>मिट्टी के ऊपर सूखी घास, पत्तियां या नारियल के छिलके बिछाएं</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>फायदे:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>नमी लंबे समय तक बनी रहती है</li>
<li>मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है</li>
<li>बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"> हर पौधे की जरूरत अलग होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">घर के अंदर रखे पौधों और बाहर धूप में रखे पौधों की पानी की जरूरत अलग-अलग होती है। इसलिए हर पौधे को उसकी जरूरत के अनुसार ही पानी दें। गर्मियों में सिर्फ ज्यादा पानी देना ही समाधान नहीं है। असली समझ यह है कि कब, कितना और कैसे पानी देना है। सही संतुलन बनाकर ही आप अपने पौधों को इस तपती गर्मी में भी हरा-भरा और जीवंत रख सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/summer-plant-tips/article-83709</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:53:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भरता की राह, युवाओं को मिला प्रशिक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[हिसार (सच कहूँ/मांंगे लाल)। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान में ह्यमशरूम उत्पादन तकनीकह्ण पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व हरियाणा से प्रतिभागियों ने भाग लिया। समापन पर मुख्य अतिथि डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि कम लागत व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/the-path-to-self-reliance-through-mushroom-cultivation-youth-receive-training/article-83601"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/hisar-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/मांंगे लाल)।</strong> चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान में ह्यमशरूम उत्पादन तकनीकह्ण पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व हरियाणा से प्रतिभागियों ने भाग लिया। समापन पर मुख्य अतिथि डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि कम लागत व पर्यावरण अनुकूल होने के कारण मशरूम उत्पादन युवाओं, विशेषकर भूमिहीनों के लिए बेहतर रोजगार विकल्प है। विशेषज्ञों ने मशरूम के पोषण, उत्पादन, प्रसंस्करण व विपणन की जानकारी दी तथा सरकारी योजनाओं से अवगत कराया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/the-path-to-self-reliance-through-mushroom-cultivation-youth-receive-training/article-83601</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:24:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कपास बुवाई में देरी पड़ेगी भारी, एचएयू विशेषज्ञ ने दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[हिसार (सच कहूँ/मुकेश)। कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कपास विशेषज्ञ डॉ. करमल सिंह मलिक ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसान बुवाई में देरी करते हैं, तो उन्हें उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान का सामना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/delay-in-cotton-sowing-will-prove-costly-hau-expert-warns/article-83427"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/hisar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/मुकेश)।</strong> कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कपास विशेषज्ञ डॉ. करमल सिंह मलिक ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसान बुवाई में देरी करते हैं, तो उन्हें उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि देसी कपास की बुवाई केवल अप्रैल माह तक ही करनी चाहिए, विशेषकर रेतीली मिट्टी वाले क्षेत्रों में। इसके बाद तापमान बढ़ने से पौधों के झुलसने और कमजोर बढ़वार की समस्या बढ़ जाती है। वहीं अमेरिकन कपास की बुवाई अप्रैल से मई के अंत तक की जा सकती है, लेकिन समय पर बुवाई ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बीज की मात्रा</h3>
<p style="text-align:justify;">बीज मात्रा को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि देसी कपास के लिए 1 से 1.5 किलो रुई उतरा हुआ बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है, जबकि बिना रुई उतरे बीज के लिए 3 से 4 किलो मात्रा रखनी चाहिए। अमेरिकन कपास के लिए प्रति एकड़ दो पैकेट (450-450 ग्राम) बीज उपयुक्त हैं, जबकि मशीन से बुवाई करने वाले किसानों को ढाई पैकेट बीज का प्रयोग करना चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;">इन्तेर्क्रोपिंग भी बढ़िया विकल्प खाद प्रबंधन देगा ज्यादा फायदा</h5>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने संतुलित खाद प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि प्रति एकड़ एक कट्ठा डीएपी, एक कट्टा यूरिया और 15 से 20 किलो पोटाश का उपयोग फसल को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है और उत्पादन बढ़ाता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं और समय पर बुवाई करें। उन्होंने कहा कि कपास की खेती में सही समय, सही बीज और सही तकनीक ही सफलता की असली कुंजी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 10:28:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Smart Farming: स्मार्ट खेती का नवीनतम रूप है बटन मशरूम की खेती</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. संदीप सिंहमार। Button Mushroom Cultivation: आज के जमाने में खेती को केवल खेत-खलिहान, धूप-पसीना और बारिश के इंतजार तक सीमित रखना एक गलत धारणा है। अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, खासकर छोटे किसानों और युवाओं के लिए। घर के एक छोटे से कमरे में, एसी या नियंत्रित वातावरण में बैठकर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/button-mushroom-cultivation-is-the-latest-form-of-smart-farming/article-83041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/button-mushroom-ki-kheti.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong> Button Mushroom Cultivation: आज के जमाने में खेती को केवल खेत-खलिहान, धूप-पसीना और बारिश के इंतजार तक सीमित रखना एक गलत धारणा है। अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, खासकर छोटे किसानों और युवाओं के लिए। घर के एक छोटे से कमरे में, एसी या नियंत्रित वातावरण में बैठकर भी खेती करके लाखों रुपये का व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। इसी नई स्मार्ट खेती का सबसे आकर्षक उदाहरण है—बटन मशरूम की खेती। Button Mushroom ki Kheti</p>
<p style="text-align:justify;">यह न केवल जमीन पर कम निर्भर है, बल्कि पारंपरिक फसलों की तुलना में तेजी से आय देने वाला और कम जोखिम वाला व्यवसाय भी है। पारंपरिक खेती में आमतौर पर ट्रैक्टर, खेत, बारिश या नहर, घंटों की मेहनत और फिर भी बाजार भाव की अनिश्चितता बनी रहती है। इसके विपरीत, बटन मशरूम की खेती एक इनडोर और नियंत्रित वातावरण (कंट्रोल्ड एन्वायरनमेंट फार्मिंग) का रूप है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें मुख्यत: एक खाली कमरा या बेसमेंट, नमी और तापमान को नियंत्रित करने के लिए साधारण उपकरण तथा थोड़ी बेसिक ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है। इसके बाद लगभग 40-45 दिनों में पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है, और साल भर में 5-6 बार फसल ली जा सकती है। इतना तेज उत्पादन चक्र और कम जगह में अधिक आय इस खेती को आधुनिक किसानों के लिए अत्यंत आकर्षक बनाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तकनीक कैसे करती है काम | Button Mushroom ki Kheti</h3>
<p style="text-align:justify;">बटन मशरूम की खेती पारंपरिक खेती से बिल्कुल अलग है। इसके लिए उपजाऊ मिट्टी की जरूरत नहीं होती, बल्कि कंपोस्ट की आवश्यकता होती है, जो पराली, भूसे या अन्य कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कंपोस्ट में मशरूम के स्पॉन (बीज) मिलाए जाते हैं और इसे अंधेरे, ठंडे व नम कमरे में रखा जाता है। यहां मशरूम बिना सूर्य प्रकाश के विकसित होते हैं। केवल पर्याप्त नमी और सही तापमान बनाए रखना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल स्वचालित मिस्टिंग सिस्टम, थमार्मीटर और ह्यूमिडिटी मॉनिटर जैसे उपकरण इन परिस्थितियों को बनाए रखने में काफी सहायक होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वर्टिकल फार्मिंग, जगह की बचत</h3>
<p style="text-align:justify;">एक के ऊपर एक रैक लगाकर छोटी जगह में भी बड़ी मात्रा में मशरूम उत्पादन किया जा सकता है। जो उत्पादन एक बीघा खेत में होता है, वह एक या दो कमरों में भी संभव हो जाता है। यह बिल्कुल उसी तरह है जैसे बहुमंजिला इमारतों में ऊपर-नीचे फ्लैट बनाकर स्थान का अधिकतम उपयोग किया जाता है। इससे शहरों के आसपास या छोटे गांवों में रहने वाले लोग भी बिना अधिक जमीन के इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बाजार और लगातार मांग</h3>
<p style="text-align:justify;">बटन और आॅयस्टर मशरूम जैसी प्रजातियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बड़े शहरों में रेस्टोरेंट और बेकरी में इनका व्यापक उपयोग होता है। स्वस्थ आहार के बढ़ते चलन के कारण मशरूम अब घर-घर तक पहुंच चुके हैं, क्योंकि यह कम कैलोरी वाला, प्रोटीन युक्त और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी उपयुक्त खाद्य है। इसके कारण उत्पादकों को बाजार ढूंढने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती। आप स्थानीय रेस्टोरेंट, होटल या सब्जी विक्रेताओं से सीधा संपर्क करके नियमित आॅर्डर प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिक्री के नए रास्ते</h3>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल कनेक्टिविटी ने मशरूम की बिक्री को और आसान बना दिया है। आप अपनी सोसायटी के व्हाट्सऐप ग्रुप, स्थानीय फूड डिलीवरी ऐप्स या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ताजा मशरूम की आपूर्ति कर सकते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और उत्पादक को बेहतर मूल्य मिलता है। यदि पैकेजिंग आकर्षक, साफ-सुथरी और ब्रांडेड हो, तो सुपरमार्केट और हाइपरमार्केट में भी अपनी पहचान बनाई जा सकती है। Button Mushroom ki Kheti</p>
<h3 style="text-align:justify;">आॅर्गेनिक और वैल्यू-एडेड उत्पाद</h3>
<p style="text-align:justify;">आजकल उपभोक्ता केवल कीमत ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और स्वच्छता पर भी ध्यान देते हैं। यदि आप बिना रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के मशरूम तैयार करते हैं, तो इसे आॅर्गेनिक उत्पाद के रूप में बेचा जा सकता है। ऐसे उत्पादों पर आमतौर पर 20-30% तक अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, मशरूम की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इसे सुखाकर, पाउडर बनाकर या प्रोसेस करके मशरूम सॉस और मसाला जैसे वैल्यू-एडेड उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जोखिम कम और नियंत्रण अधिक</h3>
<p style="text-align:justify;">पारंपरिक खेती में कीट, रोग, अनिश्चित मौसम, सूखा या बाढ़ जैसे कारकों से भारी नुकसान हो सकता है। लेकिन मशरूम की स्मार्ट खेती में यह जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। इसमें तापमान, नमी, हवा और कच्चे माल की गुणवत्ता पर किसान का पूरा नियंत्रण होता है। कीटों का खतरा भी कम रहता है, क्योंकि यह नियंत्रित वातावरण में उगाई जाती है। इससे उत्पादन स्थिर रहता है और गुणवत्ता बनाए रखना भी आसान हो जाता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पासपोर्ट सेवाएं अब आपके द्वार: पश्चिमी यूपी में विशेष मोबाइल वैन अभियान " href="http://10.0.0.122:1245/passport-office-ghaziabad-has-started-mobile-van-campaign/">पासपोर्ट सेवाएं अब आपके द्वार: पश्चिमी यूपी में विशेष मोबाइल वैन अभियान </a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:49:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Lahsun ki Kheti: हरियाणा में किसानों का लहसुन की खेती की ओर बढ़ा रूझान, मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर बढ़ा क्षेत्रफल </title>
                                    <description><![CDATA[पारंपरिक खेती छोड़ सब्जी की खेती में रूचि ले रहे किसान, बढ़ा मुनाफा करनाल में सबसे ज्यादा उगाया गया लहसुन यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपतराय)। Lahsun ki Kheti: भले ही लहसुन में किसानों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती हैं व पैदावार से लेकर हार्वेस्ंिटग तक फसल के रखरखाव के लिए किसानों को काफी पसीना बहाना पड़ता है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-in-haryana-are-increasingly-turning-to-garlic-cultivation/article-82958"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/lahsun-ki-kheti.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पारंपरिक खेती छोड़ सब्जी की खेती में रूचि ले रहे किसान, बढ़ा मुनाफा</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>करनाल में सबसे ज्यादा उगाया गया लहसुन</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपतराय)।</strong> Lahsun ki Kheti: भले ही लहसुन में किसानों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती हैं व पैदावार से लेकर हार्वेस्ंिटग तक फसल के रखरखाव के लिए किसानों को काफी पसीना बहाना पड़ता है, बावजूद इसके किसानों में लहसुन की खेती की ओर काफी रूझान बढ़ा है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर 2024-25 वर्ष की अपेक्षा 2025-26 में 1627 एकड़ एरिया अधिक होने के साथ-साथ 1423 किसानोें की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में किसान धान व गेहूँ की फसल के अलावा अन्य फसलों में भी रूचि ले रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर 2024-25 में 4713 एकड़ में 3829 किसानों ने लहसुन रोपित किया था। जबकि वर्ष 2025-26 में 6340 एकड़ में 5251 किसानों ने लहसुन की खेती की है। बता दें कि करनाल जिले के इंद्री ब्लॉक व यमुनानगर जिले का रादौर ब्लॉक लहसुन की खेती का हब माना जाता है।  Lahsun ki Kheti</p>
<p style="text-align:justify;">मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के अनुसार प्रदेश में लहसुन उत्पादन में करनाल पहले स्थान पर है, जो 2949 एकड़ में 2318 किसानों को दर्शाया गया है। जबकि सत्यापित एक हजार है, वहीं दूसरे स्थान पर यमुनानगर जिला है, जो 1408 एकड़ में 1255 किसानों का आंकड़ा दर्शाया गया है जबकि सत्यापित 293 है। जिला सरसा तीसरे स्थान पर हैं, जिसका पोर्टल आंकड़ा 719 एकड़ व 481 किसान दर्शाए गए है जबकि सत्यापित 315 है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिनों लहसुन फसल की हार्वेस्ंिटग का कार्य जोरोें पर है। इसके लिए विशेषज्ञ किसानों को खेतों में जाकर हार्वेस्ंिटग के साथ-साथ फसल के स्टॉक के बारे में  विशेष रूप से जानकारी दे रहे हैं। ताकि किसान अपनी लहसुन की फसल को अच्छे से हार्वेस्ट कर सुरक्षित तकनीक के साथ सुरक्षित स्थान पर स्टॉक कर सकें व समय अनुसार फसल को बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">श्रमिकों की किल्लत का करना पड़ रहा सामना | Lahsun ki Kheti</h3>
<p style="text-align:justify;">यमुनानगर के गांव बुबका के किसान जोगिन्द्र, महिन्द्र व प्रवीन कुमार ने बताया कि वे हर साल लहसुन की खेती करते हैं। लहसुन को तैयार करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। उन्होेंने बताया कि आधुनिक युग मशीनी युग हैं। अधिकतर फसलों की कटाई व बुआई के लिए श्रमिकों की कम जरूरत पड़ती है, जबकि लहसुन की फसल को लगाने व कटाई दोनोें में सबसे अधिक मजदूरों की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होेंने बताया कि इन दिनों लहसुन फसल की हार्वेस्ंिटग जोरों पर हैं लेकिन आए दिन मौसम की बेरूखी भी फसल के लिए उनको नुकसान देने वाली बन रही है। विशेषज्ञों की मानें तो फसल को पूरी तरह से सुखा कर स्टॉक करना होता है। लेकिन मौसम है कि आए दिन बिगड़ रहा है जो उनकी परेशानी को बढ़ा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लहसुन को स्टॉक से पहले अच्छी तरह से  सुखाएं: डॉ. विमलेश</h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान सलारू करनाल के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. विमलेश कुमार ने लहसुन उत्पादक किसानों को लहसुन के स्टॉक की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि इन दिनों लहसुन की हार्वेस्ंिटग जोरो पर हैं। किसानों द्वारा हार्वेस्ंिटग की जा रही है। उन्होेंने किसानों को आह्वान कि वे लहसुन की फसल को सुरक्षित रखने के लिए स्टॉकिंग से पूर्व अच्छी तरह से सुखाएं, ताकि नमी के कारण फसल स्टॉक में खराब न हो ओर स्टॉक में लहसुन की गांठों को बाहर व तना अंदर की ओर रखते हुए शैड या खुले एवं हवादार कमरे में लगाएं।  दो स्टॉक के बीच कम से कम 2 फुट का अंतर रखें। उन्होेंने किसानों से कहा कि गीला लहसुन हल्की नमी से उखाडे। Lahsun ki Kheti</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Tirth Yatra Yojana: वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2025 की आखिरी ट्रेन हुई रवाना" href="http://10.0.0.122:1245/senior-citizen-pilgrimage-scheme-train-departs/">Tirth Yatra Yojana: वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2025 की आखिरी ट्रेन हुई रवाना</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:38:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरसा के किसान गुरप्रीत इन्सां प्रदेश स्तर पर हुए सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि मेले में रहे प्रथम ओढ़ां (सच कहूँ/राजू)। हिसार के चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय (Ch. Charan Singh University) में आयोजित 2 दिवसीय कृषि मेले के दौरान सरसा जिला के गांव मत्तड़ निवासी किसान गुरप्रीत इन्सां को खेती में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर पूरे प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/sirsa-farmer-gurpreet-insan-honored-at-the-state-level/article-82701"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/gurpreet-insan-odhan.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<h3>चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि मेले में रहे प्रथम</h3>
<p>ओढ़ां (सच कहूँ/राजू)। हिसार के चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय (Ch. Charan Singh University) में आयोजित 2 दिवसीय कृषि मेले के दौरान सरसा जिला के गांव मत्तड़ निवासी किसान गुरप्रीत इन्सां को खेती में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर पूरे प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान पर रहने पर 5 प्रशस्ति पत्र एवं अवॉर्ड देकर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस मेले में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा विशेष रूप से उपस्थित रहे। किसान गुरप्रीत इन्सां को बीते 6 माह पूर्व भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सम्मानित किया गया था। Sirsa News</p>
<p>किसान गुरप्रीत सिंह पिछले करीब 30 वर्षों से फल-सब्जियों की आधुनिक ढंग से खेती कर मोटा मुनाफा कमाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन रहे हैं। गुरप्रीत इन्सां ने बताया कि उसके दादा बचन सिंह ने शुरूआत में थोड़ी सी जगह में सब्जियों की खेती शुरू की थी। जिसके बाद उसके पिता गुरचरण इन्सां ने इसे आगे बढ़ाया। फिर उसने इसमें कुछ नवाचार करते हुए दायरा बढ़ाया। उसने इस खेती में आधुनिक तकनीकों व कृषि यंत्रों का प्रयोग किया। इसके साथ-साथ उसने इसमें मल्चिंग, मचान व नेट विधि को भी शामिल किया।</p>
<h3>किसान ने तैयार कर रखी है देश एवं विदेशी किस्म की सब्जियों की 63 वैरायटियां | Sirsa News</h3>
<p>किसान गुरप्रीत इन्सां द्वारा 5 एकड़ में सब्जी की करीब 63 वैरायटियां तैयार की जा रही हैं। इनमें से कुछ वैरायटियां ऐसी हैं जो क्षेत्र में काफी कम पाई जाती हैं तथा कुछ विदेशी वैराटियां भी शामिल हैं। किसान गुरप्रीत इन्सां इस बार तरबूज व लोकी की एक नई वैरायटी शामिल की है। किसान गुरप्रीत इन्सां एक मध्यमवर्गीय किसान है। लेकिन वह कम जगह में भी सब्जी की अनेकों वैरायटियां उत्पन्न कर न केवल हर वर्ष मोटा मुनाफा कमा रहा है बल्कि लोगों को रोजगार भी दे रहा।</p>
<p>किसान गुरप्रीत इन्सां ने इस समय अपने खेत में सब्जी की 63 वैराटियां तैयार कर रखी हैं। जिनमें टमाटर की 5 वैरायटियां, इनमें चैरी, लाल, काला, पीला व नारंगी टमाटर, शिमला मिर्च में 5 वैरायटियां, इनमें हरी, लाल, पीली, पसपल व नारंगी शिमला मिर्च, गोभी में 7 वैरायटियां, इनमें सफेद, पीली, नारंगी, ब्रोकली, पत्ता, हरी, लाल व गांठ गोभी शामिल है। किसान गुरप्रीत इन्सां ने कहा कि किसान सामान्य खेती के साथ-साथ सब्जियों की खेती अपनाकर थोड़ी जगह से भी अच्छी आमदन ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मेहनत कुछ अधिक है, लेकिन मेहनत का फल अच्छा होता है।</p>
<p>किसान गुरप्रीत सिंह खेती में काफी अच्छा नवाचार कर रहे हैं। किसान ने जिला एवं प्रदेश स्तर पर अपने गांव का नाम रोशन किया है। हम अन्य किसानों से आह्वान करते हैं कि वे विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर फल-सब्जियों की खेती को बढ़ावा दें। Sirsa News<br />
<strong>– डॉ. दीन मोहम्मद, जिला उद्यान अधिकारी</strong></p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/sirsa-farmer-gurpreet-insan-honored-at-the-state-level/article-82701</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 12:08:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रानियां के किसान बुध सिंह गिल होंगे सम्मानित, सीएम नायब सैनी करेंगे सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। रानियां खंड के गांव संत नगर निवासी प्रगतिशील किसान बुध सिंह गिल को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्हें हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित कृषि मेले के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। बुध सिंह गिल को गेहूं व चावल की उन्नत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/rania-farmer-budh-singh-gill-to-be-honored-cm-nayab-saini-will-present-the-honor/article-82618"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/budh-singh-gil.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। रानियां खंड के गांव संत नगर निवासी प्रगतिशील किसान बुध सिंह गिल को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्हें हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित कृषि मेले के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। बुध सिंह गिल को गेहूं व चावल की उन्नत किस्म के बीज तैयार करने तथा खेती में नवाचार अपनाने के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। उनके पास करीब 40 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे पिछले 20 वर्षों से कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्नत खेती कर रहे हैं। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में वे एक-एक एकड़ में आॅर्गेनिक सरसों, गन्ना व चना तथा 2 एकड़ में पशुओं का चारा उगा रहे हैं, जबकि 35 एकड़ में विभिन्न किस्मों के गेहूं के बीज तैयार किए जा रहे हैं। बुध सिंह गिल को इससे पहले भी उन्नत खेती के लिए कृषि जागरण संस्था व इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट, वाराणसी द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। अपनी मेहनत और नवाचार के चलते वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। Sirsa News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 14:40:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कृषि संबंधित विभिन्न अनुदान योजनाओं में न्यूनतम 30 प्रतिशत महिला लाभुकों का हो रहा चयन</title>
                                    <description><![CDATA[पटना (एजेंसी)। बिहार सरकार का कृषि विभाग अपनी योजनाओं में महिला किसानों की भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रहा है। विभाग की कोशिश है कि विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत मिलने वाले अनुदान का लाभ महिला किसानों को भी मिले। आज राज्य में करीब एक तिहाई महिलाएं कृषि में अपना योगदान दे रही हैं। विभाग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/at-least-30-percent-of-the-beneficiaries-selected-under-various-agriculture-related-subsidy-schemes-are-women/article-82435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/patna.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना (एजेंसी)।</strong> बिहार सरकार का कृषि विभाग अपनी योजनाओं में महिला किसानों की भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रहा है। विभाग की कोशिश है कि विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत मिलने वाले अनुदान का लाभ महिला किसानों को भी मिले। आज राज्य में करीब एक तिहाई महिलाएं कृषि में अपना योगदान दे रही हैं। विभाग की कई योजनाओं में महिलाओं की 30 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इन योजनाओं में मशरूम, मखाना, पपीता और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन की योजनाएं शामिल हैं। सरकार की इस पहल से कृषि में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, इसे इन आंकड़ों से भी समझ सकते हैं कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 86 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिल रहा है, जिनमें 26,37,646 महिलाएं शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य की कृषि में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से जहां एक ओर कृषि क्षेत्र का तेजी से विकास देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण भी हो रहा है। कृषि से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और सतत विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। मशरूम जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों से लेकर प्राकृतिक खेती तक, महिलाएं अब बिहार की कृषि की मजबूत स्तंभ बन चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
कृषि से जुड़ी विभिन्न अनुदान योजनाओं में महिला किसानों की भागीदारी न्यूनतम 30 प्रतिशत हो, इसकी लगातार कोशिश की जा रही है। उदाहरण के लिए ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के तहत अनुदान पाने वाले कुल लाभुकों में 30 प्रतिशत महिला किसान हों, इसका प्रयास हो रहा है। इसी तरह से एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत पपीता विकास योजना, आम एवं लीची के क्षेत्र विस्तार की योजना, राज्य योजना के तहत मुख्यमंत्री बागवानी मिशन अंतर्गत अंजीर फल विकास योजना, स्ट्रॉबेरी विकास योजना और क्लस्टर में बागवानी की योजना के तहत भी अनुदान दिया जाता है। इन सभी में अनुदान पाने वाले लाभुकों के चयन में महिला किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 11:28:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Farmers News: मार्च में किसान करें ये खेती, हो जाएंगे मालामाल, जानिये यहां पर</title>
                                    <description><![CDATA[Farmers News: भगत सिंह। मार्च का महीना कृषि के लिहाज से खास महत्व रखता है, क्योंकि यह जायद की फसलों की बुवाई के लिए उपयुक्त मौसम माना जाता है। हालांकि, इस वर्ष तेज गर्मी ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है, खासकर गेहूं की फसल को लेकर। सरकार ने गेहूं की फसल पर मौसम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/best-sowing-options-for-farmers-in-march-profitable-farming-methods/article-81956"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/farmers-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Farmers News: भगत सिंह। मार्च का महीना कृषि के लिहाज से खास महत्व रखता है, क्योंकि यह जायद की फसलों की बुवाई के लिए उपयुक्त मौसम माना जाता है। हालांकि, इस वर्ष तेज गर्मी ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है, खासकर गेहूं की फसल को लेकर। सरकार ने गेहूं की फसल पर मौसम के प्रभावों पर नजर रखने के लिए निगरानी कमेटी गठित की है, ताकि बंपर उत्पादन की उम्मीद को बनाए रखा जा सके। अगर आप मार्च में खेती करने की सोच रहे हैं तो जानिए कौन सी फसलें इस माह में सबसे उपयुक्त हैं, जो आपको बेहतर लाभ दे सकती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1. ग्वार फली की खेती | Farmers News</h4>
<p style="text-align:justify;">ग्वार फली की खेती मार्च माह में लाभकारी हो सकती है, क्योंकि इस महीने में इसकी बुवाई जायद की फसल के रूप में की जा सकती है। ग्वार की कई किस्में हैं जो अच्छे उत्पादन देती हैं, जैसे शरद बहार, पूसा नवबहार, दुर्गापुर सफेद, और मरू ग्वार। यह फसल विशेष रूप से शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में अच्छे परिणाम देती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2. लोबिया की खेती</h4>
<p style="text-align:justify;">लोबिया की खेती भी मार्च माह में की जा सकती है। इसके दाने, चारे और हरी फलियों के लिए अलग-अलग किस्में उपलब्ध हैं, जिनका चयन किसान अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकते हैं। प्रमुख किस्मों में सी-152, पूसा फाल्गुनी और जीएफसी-1 शामिल हैं। लोबिया की खेती से अच्छा मुनाफा मिल सकता है, क्योंकि इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. खीरा की खेती</h4>
<p style="text-align:justify;">खीरा की खेती एक और बेहतरीन विकल्प है। इसका बाजार में अच्छा दाम मिलता है और इसे सलाद के रूप में अधिक खाया जाता है। खीरे की उन्नत किस्मों में स्वर्ण अगती, पूसा उदय और जापानी लौंग ग्रीन शामिल हैं। किसान इन किस्मों की बुवाई करके अच्छा लाभ कमा सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">4. ककड़ी की खेती</h4>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में ककड़ी का सेवन शरीर को ठंडक प्रदान करता है। ककड़ी की खेती करके किसान अच्छे दाम पर इसे बेच सकते हैं। प्रमुख किस्मों में प्रिया, हाइब्रिड-1 और पंजाब स्पेशल शामिल हैं, जो अच्छा उत्पादन देती हैं। यह फसल जल्दी तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी डिमांड भी काफी रहती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">5. करेला की खेती</h4>
<p style="text-align:justify;">करेला की खेती भी किसानों के लिए लाभकारी हो सकती है, क्योंकि यह डायबिटीज के मरीजों के लिए औषधि का काम करता है। इसके अच्छे बाजार भाव के कारण किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्नत किस्मों में पूसा विशेष, कल्याणपुर बारहमासी और हिसार सलेक्शन प्रमुख हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">6. लौकी की खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">लौकी का सेवन पाचन के लिए लाभकारी होता है और यह सर्दियों और गर्मियों दोनों मौसमों में उगाई जा सकती है। लौकी की उन्नत किस्मों में अर्का नूतन, पूसा संतुष्टि और पूसा संदेश शामिल हैं। यह फसल जल्दी तैयार होती है और किसान इसे बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">7. तुरई (तोरई) की खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">तोरई की खेती में भी बहुत संभावनाएं हैं। यह फसल जल्दी तैयार होती है और इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। पूसा चिकनी, कल्याणपुर चिकनी और पूसा सुप्रिया जैसी किस्में इसके बेहतर उत्पादन देती हैं। किसान इन किस्मों की बुवाई कर अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">8. पालक की खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">पालक की खेती भी सर्दी और गर्मी दोनों में की जा सकती है और इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है। पालक की प्रमुख किस्में जैसे जोबनेर ग्रीन, पूसा पालक और पूसा ज्योति जल्दी तैयार हो जाती हैं। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ सलाद में भी उपयोगी होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">9. भिंडी की खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों में भिंडी की खेती एक बेहतरीन विकल्प है। भिंडी की बाजार में उच्च मांग रहती है, और इसके लिए कई किस्में उपलब्ध हैं जैसे अर्का अभय, हिसार उन्नत और परभानी क्रांति। इस फसल से अच्छा मुनाफा मिल सकता है, क्योंकि इसकी खेती और देखभाल आसान होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">10. पेठा की खेती</h4>
<p style="text-align:justify;">पेठा का सेवन शीतल और स्वादिष्ट होता है, और इसे मिठाई के रूप में बाजार में अच्छा दाम मिलता है। पेठा की खेती करने से भी किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकता है। इसके लिए पूसा हाइब्रिड1, पूसा विकास और काशी हरित कद्‌दू जैसी उन्नत किस्में उपयोगी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">11. तरबूज और खरबूजे की खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों में तरबूज और खरबूजे की मांग बाजार में बहुत अधिक रहती है। इनकी खेती से किसानों को बहुत अच्छा मुनाफा हो सकता है। तरबूज की किस्मों में शुगर बेबी, अर्का ज्योति और आशायी यामातो प्रमुख हैं। खरबूजे की उन्नत किस्में जैसे पूसा शरबती और हरा मधु किसानों के लिए लाभकारी हो सकती हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/best-sowing-options-for-farmers-in-march-profitable-farming-methods/article-81956</link>
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                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 12:43:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Shalgam: किचन गार्डन में ऑर्गेनिक तरीके से उगा ली 8 किलो की शलगम </title>
                                    <description><![CDATA[गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई रसायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक व ऑर्गेनिक तरीके से  खेती कर रहे कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Shalgam Ki Kheti: रसायनिक खेती छोड़कर अब प्राकृतिक व ऑर्गेनिक खेती अपनाना किसानों की जरूरत बनता जा रहा है। आजमन भी यही चाहने लगा है कि रासायनिक खेती कम हो, ताकि जहरमुक्त अन्न पैदा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/eight-kg-turnip-grown-organically-in-kitchen-garden/article-81489"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/shalgam.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई रसायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक व ऑर्गेनिक तरीके से  खेती कर रहे</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Shalgam Ki Kheti: रसायनिक खेती छोड़कर अब प्राकृतिक व ऑर्गेनिक खेती अपनाना किसानों की जरूरत बनता जा रहा है। आजमन भी यही चाहने लगा है कि रासायनिक खेती कम हो, ताकि जहरमुक्त अन्न पैदा हो सके। ऐसे ही कुरुक्षेत्र जिला के गांव अभिमन्युपुर के दो किसान भाई किचन गार्डन ऑर्गेनिक तरीके से  खेती कर रहे हैं। किसान भाईयों द्वारा 8 किलोग्राम वजनी शलगम उगाई है। इनकी शलगम सोशल मीडिया पर भी सुर्खियां बटौर रही हैं। अभिमन्युपुर गांव के किसान अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि वह खेती का शौक रखते हैं। पिछले 45 साल से वह अपने भाई के साथ मिलकर खेती कर रहे हैं। करीब 30 एकड़ में वह खेती कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ साथ अपने खेतों में उन्होंने ऑर्गेनिक किचन गार्डन बनाया हुआ है। यहां वे किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं करते। उन्होंने अपने इस किचन गार्डन में 8 किलोग्राम की शलगम तैयार की है, जिसका पत्तों के साथ 15 किलोग्राम वजन है। अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती का ही कमाल है जो इतनी बड़ी शलगम उनके खेत में तैयार हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अक्टूबर महीने में शलगम की बुआई की थी। इसमें पानी की लागत भी बहुत कम होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शलगम का वजन देख हर कोई रह गया दंग | Kurukshetra News</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान अश्वनी कुमार शर्मा के भाई राजीव शर्मा ने बताया कि उन्होने इस शलगम को अपने खेत से 9 फरवरी को उखाड़ा था। उस समय इसके पत्तों के साथ वजन 15 किलोग्राम था। पत्ते काटकर इसका वजन 8 किलोग्राम रह गया। हर कोई इसको देखकर हैरान है, वह खुद भी इसको देखकर हैरान थे जब रिश्तेदारों को इसकी बात पता चली तो उन्होंने कुरुक्षेत्र शहर में इसको देखने के लिए अपने घर पर मंगवाया और वहीं पर कुछ दिन रखा। उनके रिश्तेदारों के घर पर शहर में भी बहुत लोग उसको देखने के लिए आए थे। हालांकि करीब 10 दिन पहले इसको उखाड?े के बाद अब इसका एक किलोग्राम वजन कम हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किचन गार्डन में करते हैं अच्छी सब्जी तैयार</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान ने बताया कि वह अपने किचन गार्डन में हर मौसम की सब्जी लगाते हैं जो शुद्ध आॅर्गेनिक होती हैं। वह मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जी लगाते हैं। उन्होने इस किचन गार्डन में पहले भी करीब चार किलोग्राम का चुकंदर, 6 किलोग्राम की मूली, 3 किलोग्राम से ऊपर पत्ता गोभी और फूलगोभी भी अपने इस किचन गार्डन से ली हुई है। लेकिन अब इस शलगम ने उनको और भी ज्यादा मशहूर कर दिया है। क्योंकि आज तक कितनी बड़ी शलगम ना ही उन्होंने कभी देखी और ना ही सुनी है। उन्होंने कहा कि वह अपने खाने के लिए इस किचन गार्डन में गन्ना, हरी सब्जियां, प्याज, फल फू्रट सभी लगाए हुए हैं। उन्होंने अपने खेत में असम राज्य की एक वैरायटी का नींबू का पौधा भी लगाया हुआ है जिसकी ग्रोथ भी काफी अच्छी है और वह अभी बंपर पैदावार दे रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">25 सालों से कर रहे ऑर्गेनिक फार्मिंग</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान भाईयों ने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए वह खुद के खाने के लिए आॅर्गेनिक किचन गार्डनिंग कर रहे हैं। हालांकि बड़े स्तर पर ऑर्गेनिक खेती करना चाहते हैं लेकिन मार्केटिंग की समस्या की वजह से वह बड़े स्तर पर इसको नहीं कर पाते। इसलिए वह अपने खाने के लिए ऑर्गेनिक किचन गार्डन चला रहे हैं। उनको 25 साल हो गए इस किचन गार्डन में उन्होंने आज तक कभी रसायन नहीं डाला। Kurukshetra News</p>
<p style="text-align:justify;">वह इसमें गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं और अब उनकी पैदावार और उत्पादन भी और रसायन खेती से काफी अच्छा मिलता है। हालांकि शुरूआती कुछ सालों में उत्पादन कुछ काम रहता है लेकिन अब वह इससे अच्छा उत्पादन ले रहे हैं। किसानों ने बताया कि वह पहली बार 1995 में आॅर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए सरकारी कृषि संस्थान में गए थ। तब से ही वह इस खेती को करते आ रहे हैं। उसके लिए उनको कई बार सरकारी कार्यक्रमों में सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="HKRN: डीसी रेट कर्मचारियों को एचकेआरएन में भेजने के विरोध में बिजली निगम कर्मियों का प्रदर्शन" href="http://10.0.0.122:1245/electricity-corporation-employees-protest-against-sending-dc-rate-employees-to-hkrn/">HKRN: डीसी रेट कर्मचारियों को एचकेआरएन में भेजने के विरोध में बिजली निगम कर्मियों का प्रदर्शन</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 19:25:23 +0530</pubDate>
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                <title>Business Idea: इस खेती से हो रहा बड़ा मुनाफा, सिर्फ 2 महीने में कमा लेंगे लाखोें! जानिये</title>
                                    <description><![CDATA[Business Idea: अनु सैनी सर्दियों के मौसम में मशरूम की खेती किसानों के लिए तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल कम लागत में अच्छी पैदावार देती है। खास बात यह है कि मशरूम की खेती के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती, जिससे छोटे और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/this-farming-is-generating-huge-profits-you-can-earn-lakhs-in-just-2-months-find-out/article-81421"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/business-idea.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Business Idea: अनु सैनी सर्दियों के मौसम में मशरूम की खेती किसानों के लिए तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल कम लागत में अच्छी पैदावार देती है। खास बात यह है कि मशरूम की खेती के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी इससे अच्छी कमाई कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कम शेल्फ लाइफ बनती है किसानों की परेशानी</h4>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, मशरूम की खेती लाभकारी है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या इसकी कम शेल्फ लाइफ है। ताजा मशरूम केवल 1 से 2 दिन ही सुरक्षित रह पाता है। ऐसे में अगर मंडी में अचानक आवक बढ़ जाती है, तो किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। यही कारण है कि कई बार अच्छी पैदावार के बावजूद किसानों को अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पाता।</p>
<h5 style="text-align:justify;">एक्सपर्ट की सलाह: प्रोसेसिंग से बढ़ेगी कमाई</h5>
<p style="text-align:justify;">इस समस्या का समाधान बताते हुए सर्वोदय किसान प्रोड्यूसर कंपनी के डायरेक्टर और प्रगतिशील किसान प्रेम शंकर गंगवार कहते हैं कि किसान यदि ताजा मशरूम को सीधे मंडी में बेचने के बजाय उसका प्रोसेसिंग उत्पाद तैयार करें, तो उनका मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है। प्रोसेसिंग के जरिए मशरूम की उम्र बढ़ाई जा सकती है और बाजार में बेहतर दाम भी मिलते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मशरूम पाउडर और आचार की बढ़ती मांग</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रेम शंकर गंगवार के अनुसार, मशरूम से पाउडर और आचार जैसे उत्पाद तैयार कर किसान लंबे समय तक उसे सुरक्षित रख सकते हैं। जहां ताजा मशरूम 1–2 दिन में खराब हो जाता है, वहीं मशरूम पाउडर और आचार महीनों तक खराब नहीं होते। बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर शहरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3 से 4 गुना तक मिल सकता है बेहतर दाम</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रोसेस्ड मशरूम उत्पादों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके दाम ताजा मशरूम की तुलना में 3 से 4 गुना तक ज्यादा मिलते हैं। इससे किसान कम दाम में फसल बेचने की मजबूरी से बच जाते हैं और अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त कर पाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">खेती से बिजनेस की ओर कदम</h4>
<p style="text-align:justify;">मशरूम की प्रोसेसिंग अपनाकर किसान केवल खेती तक सीमित नहीं रहते, बल्कि एक स्मार्ट एग्री-बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ते हैं। सही पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए किसान अपने उत्पाद को बड़े बाजार तक पहुंचा सकते हैं और स्थायी आय का जरिया बना सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">किसानों के लिए सुनहरा अवसर</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान मशरूम की खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग को अपनाएं, तो यह खेती केवल मौसमी आमदनी का साधन नहीं, बल्कि लंबे समय तक मुनाफा देने वाला व्यवसाय बन सकती है। यह तरीका किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार साबित हो सकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 12:55:15 +0530</pubDate>
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