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                <title>कृषि - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Agricultural Training Camp: गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी व तेला से बचाव के विशेषज्ञों ने बताए उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय पुरानी अनाज मंडी में किसानों के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज चयन, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर फसल उत्पादन बढ़ाने तथा खेती की लागत कम करने के प्रति जागरूक करना था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-training-camp-experts-told-measures-to-protect-against-pink/article-88846"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/agricultural-training-camp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Agricultural Training Camp: सरसा, (सच कहूँ न्यूज)। स्थानीय पुरानी अनाज मंडी में किसानों के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज चयन, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर फसल उत्पादन बढ़ाने तथा खेती की लागत कम करने के प्रति जागरूक करना था। Agricultural News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कपास (नरमा) की फसल में रोग एवं कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों से अवगत कराया और समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम में किसानों को फसल सुरक्षा, उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। </p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों ने विशेष रूप से कपास की फसल में गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी और तेला जैसे प्रमुख कीटों के प्रकोप की पहचान, समय पर रोकथाम तथा वैज्ञानिक उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग से बचते हुए समेकित कीट प्रबंधन अपनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र, सरसा के वैज्ञानिक डॉ. सतीश सेन, चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के डॉ. पंकज गिल, सुनील लांबा, डॉ. कुबेर सिंह, मार्केट कमेटी के वाइस चेयरमैन मनोज खुराना तथा सचिव रामजीलाल सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। Agricultural News</p>
<h3 style="text-align:justify;">मृदा परीक्षण के आधार पर करें उर्वरकों का प्रयोग: डॉ. पंकज गिल</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. पंकज गिल ने किसानों से कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने किसानों को जैविक उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए हरी खाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हरी खाद के प्रयोग से भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होती है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर मृदा स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का आह्वान किया। Agricultural News</p>
<h3 style="text-align:justify;">नियमित फसल निरीक्षण से कम होगा नुकसान: डॉ. सतीश सेन</h3>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य वक्ता केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सतीश सेन ने कपास की फसल में आने वाली प्रमुख समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने गुलाबी सुंडी, नेमाटोड और उखेड़ा रोग की पहचान, रोकथाम तथा वैज्ञानिक उपचार के उपाय बताते हुए समय पर समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि किसान नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लें, जिससे फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपनी-अपनी फसलों से जुड़ी समस्याओं को कृषि विशेषज्ञों के समक्ष रखा और उनका वैज्ञानिक समाधान प्राप्त किया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की। Agricultural News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:41:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खजूर से बढ़ेगी किसानों की आय! प्रशिक्षण में सिखाए गए लड्डू, शरबत, अचार, माउथ फ्रेशनर, केक, बिस्कुट आदि बनाने के गुर</title>
                                    <description><![CDATA[दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को खजूर से लड्डू, शरबत, अचार, केक, बिस्कुट सहित कई वैल्यू एडेड उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। उद्देश्य किसानों की आय और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/dates-will-increase-farmers-income-modern-methods-of-making-laddu/article-88825"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/palm-training.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीकानेर (हि.स.)। खजूर उत्पादकों और उद्यमिता से जुड़ने के इच्छुक प्रतिभागियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को खजूर के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़े विभिन्न उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे कृषि उत्पादों का बेहतर उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया। Agricultural Training</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में 37 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें खजूर से लड्डू, शरबत, अचार, माउथ फ्रेशनर, बिस्कुट, केक, छुहारा, पिंड सहित अनेक मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की व्यवहारिक तकनीक सिखाई गई। विशेषज्ञों ने उत्पाद निर्माण के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार की संभावनाओं की भी जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">समापन समारोह में अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में खजूर की खेती का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और प्राकृतिक जोखिमों को देखते हुए किसानों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना समय की आवश्यकता है। Agricultural Training</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अलग-अलग उत्पादों के निर्माण की तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को खाद्य सुरक्षा मानकों और व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन की आवश्यक जानकारी भी दी गई, ताकि वे भविष्य में इसे स्वरोजगार के रूप में विकसित कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">उद्यान विभाग के अधिकारियों ने कहा कि खजूर आधारित आकर्षक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के विकास के साथ यदि प्रभावी विपणन रणनीति अपनाई जाए तो किसानों और स्वयं सहायता समूहों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजीविका से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण महिलाओं, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को लघु उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने, फसल की बर्बादी कम करने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। Agricultural Training</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 17:14:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए बड़ी राहत! सोलर पंप लगवाने पर सरकार दे रही भारी सब्सिडी, ऐसे घटेगा आपका खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों के लिए बड़ी राहत! सोलर पंप लगवाने पर सरकार दे रही भारी सब्सिडी, ऐसे घटेगा आपका खर्च]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/big-relief-for-farmers-government-is-giving-huge-subsidy-on/article-88791"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/solar-pumps.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। आज भी देश की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से समय-समय पर कई योजनाएं चलाई जाती हैं। खेती में सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। इसके लिए किसानों को बिजली या डीजल पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। वहीं कई इलाकों में बिजली की कटौती और आपूर्ति की समस्या के कारण किसानों को फसलों की समय पर सिंचाई करने में परेशानी होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसानों की इसी समस्या को कम करने और खेती में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार <strong>प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM)</strong> योजना चला रही है। इस योजना के तहत किसानों को सोलर कृषि पंप लगाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। इससे किसान सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं और बिजली या डीजल पर निर्भरता कम कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सोलर पंप पर कितनी मिलती है सब्सिडी?</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">PM-KUSUM योजना के तहत सोलर पंप लगाने के लिए सामान्य राज्यों में केंद्र सरकार की ओर से <strong>बेंचमार्क लागत या टेंडर लागत, जो भी कम हो, उसका 30% केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA)</strong> दी जाती है। इसके अलावा राज्य सरकार को कम से कम 30% सब्सिडी देनी होती है। इस तरह कुल मिलाकर सामान्य स्थिति में कम से कम 60% सहायता उपलब्ध हो सकती है। शेष अधिकतम 40% हिस्सा किसान को देना होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसान अपने हिस्से की रकम के लिए बैंक से वित्तीय सहायता यानी लोन भी ले सकता है। ऐसी स्थिति में किसान को शुरुआत में लागत का केवल <strong>10% हिस्सा</strong> देना पड़ सकता है, जबकि शेष 30% तक रकम बैंक लोन के जरिए पूरी की जा सकती है। हालांकि वास्तविक किसान अंशदान और सब्सिडी राज्य की नीति, पंप की लागत और स्वीकृत परियोजना के अनुसार अलग हो सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इन राज्यों और क्षेत्रों में ज्यादा केंद्रीय सहायता</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के कुछ विशेष क्षेत्रों में केंद्र सरकार की सहायता सामान्य राज्यों से अधिक है। <strong>पूर्वोत्तर राज्य, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लक्षद्वीप तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह</strong> में स्टैंडअलोन सोलर कृषि पंप के लिए केंद्र की CFA <strong>50% तक</strong> हो सकती है। इन क्षेत्रों में राज्य सरकार की ओर से कम से कम 30% सहायता का प्रावधान है और किसान का हिस्सा अधिकतम 20% तक रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अगर किसी राज्य सरकार की ओर से निर्धारित 30% से ज्यादा सब्सिडी दी जाती है, तो किसान का हिस्सा और कम हो सकता है। इसलिए किसी किसान को आवेदन करने से पहले अपने राज्य में लागू सब्सिडी और नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">7.5 HP तक के सोलर पंप पर मिलती है मदद</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">PM-KUSUM के <strong>Component-B</strong> के तहत उन ऑफ-ग्रिड इलाकों में किसानों को स्टैंडअलोन सोलर कृषि पंप लगाने के लिए सहायता दी जाती है, जहां ग्रिड बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस घटक के तहत <strong>7.5 HP तक</strong> की क्षमता वाले सोलर कृषि पंप लगाए जा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे किसानों को सिंचाई के लिए बिजली कटौती या डीजल की उपलब्धता पर कम निर्भर रहना पड़ता है। सौर ऊर्जा से चलने वाला पंप दिन के समय खेतों की सिंचाई के लिए उपयोग किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कितना खर्च आएगा?</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोलर पंप की कीमत उसकी क्षमता, मॉडल, कंपनी, राज्य में लागू दर और टेंडर के अनुसार अलग-अलग होती है। इसलिए सभी किसानों के लिए एक निश्चित कीमत बताना संभव नहीं है। सरकार की सब्सिडी भी <strong>बेंचमार्क लागत या टेंडर लागत, जो भी कम हो</strong>, उसके आधार पर तय की जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उदाहरण के तौर पर अगर किसी स्वीकृत सोलर पंप की पात्र लागत <strong>₹2 लाख</strong> है और उस पर कुल 60% सहायता मिलती है, तो करीब <strong>₹1.20 लाख</strong> की राशि सहायता के रूप में हो सकती है। ऐसे में बाकी <strong>₹80,000</strong> किसान का हिस्सा होगा। यदि बैंक से 30% तक वित्त मिलता है, तो किसान को शुरुआत में करीब <strong>₹20,000</strong> यानी 10% राशि देनी पड़ सकती है और शेष राशि लोन के जरिए पूरी की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ध्यान रहे कि यह केवल समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक लागत और किसान का भुगतान राज्य की योजना, पंप की क्षमता, स्वीकृत दर और उपलब्ध सब्सिडी के आधार पर तय होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बिजली और डीजल के खर्च से मिल सकती है राहत</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोलर पंप लगने के बाद किसान सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकता है। इससे बिजली की उपलब्धता पर निर्भरता कम होती है और डीजल से चलने वाले पंप की स्थिति में ईंधन खर्च भी कम किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य भी कृषि क्षेत्र में डीजल की निर्भरता कम करना और किसानों की ऊर्जा जरूरतों को सौर ऊर्जा से पूरा करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा PM-KUSUM के अन्य घटकों के तहत ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरीकरण भी किया जाता है। ऐसे मामलों में किसान सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकता है और अतिरिक्त सौर बिजली को संबंधित DISCOM को बेचने का प्रावधान भी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">योजना के लिए कौन कर सकता है आवेदन?</h2>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">PM-KUSUM के अलग-अलग घटकों में किसानों के लिए अलग प्रावधान हैं। स्टैंडअलोन सोलर पंप के लिए मुख्य रूप से ऐसे किसान पात्र होते हैं जो ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में कृषि सिंचाई के लिए पंप लगाना चाहते हैं। वहीं ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंप वाले किसान Component-C के तहत अपने मौजूदा पंप का सौरीकरण करा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योजना का क्रियान्वयन संबंधित राज्य सरकार के विभागों के माध्यम से किया जाता है। इसलिए आवेदन की प्रक्रिया, उपलब्ध पंपों की संख्या, किसान का अंशदान और राज्य की अतिरिक्त सब्सिडी जैसी जानकारी राज्य के संबंधित विभाग या आधिकारिक पोर्टल से ही जांचनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">फर्जी वेबसाइट से रहें सावधान</h4>
<p style="text-align:justify;">PM-KUSUM योजना के नाम पर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए किसानों से आवेदन शुल्क या पंप की कीमत ऑनलाइन जमा कराने के मामले सामने आए हैं। आधिकारिक PM-KUSUM पोर्टल ने किसानों को ऐसी वेबसाइटों से सावधान रहने की सलाह दी है। इसलिए किसी अनजान वेबसाइट या व्यक्ति को पैसे देने से पहले उसकी आधिकारिकता जरूर जांच लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 10:48:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP Government Scheme: किसानों के खातों में 3,300 करोड़ ट्रांसफर, मुख्यमंत्री की बड़ी सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹3,300 करोड़ से ज्यादा की सहायता राशि हस्तांतरित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/mp-government-scheme-transfer-of-rs-3300-crore-to-farmers/article-88762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/mp-cm-saugat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Mukhyamantri Kisan Kalyan Yojana 2026: भोपाल/खंडवा। </strong>मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खंडवा जिले में आयोजित राज्यस्तरीय 'बलराम कृषि महोत्सव' के दौरान मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 82 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹3,300 करोड़ से अधिक की सहायता राशि डिजिटल माध्यम से हस्तांतरित की। MP Government Scheme</p>
<p style="text-align:justify;">नई कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक क्लिक के माध्यम से यह राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खेती को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है तथा किसानों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों में उपयोगी साबित होगी। MP Government Scheme</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान खंडवा जिले के कई प्रगतिशील किसानों को नवाचार, उत्कृष्ट उत्पादन और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग, उद्यानिकी, पशुपालन तथा अन्य विभागों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन भी किया और नई कृषि तकनीकों, आधुनिक उपकरणों तथा वैज्ञानिक खेती से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं। मुख्यमंत्री ने किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल उत्पादन बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं, मुख्यमंत्री के खंडवा दौरे के दौरान शहर के कुछ स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। MP Government Scheme</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 16:04:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agricultural News: जानें, बीज रहित बैंगन की खेती कैसे करें, किसानों को मिलेगा अधिक लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[पॉलीहाउस में बीज रहित बैंगन की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही है। जानें रोपाई का सही समय, सिंचाई, पोषण, कीट नियंत्रण और अधिक उत्पादन के वैज्ञानिक उपाय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/agricultural-news-know-how-to-cultivate-seedless-brinjal-farmers-will/article-88618"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/brinjal-farming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Seedless Brinjal Farming: हिसार। बदलते मौसम, अनिश्चित वर्षा और बढ़ती कृषि लागत के बीच पॉलीहाउस में बीज रहित बैंगन की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बनकर सामने आ रही है। संरक्षित वातावरण में की जाने वाली इस खेती से फसल को तेज गर्मी, अत्यधिक वर्षा, ठंडी हवाओं और अन्य प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से सुरक्षा मिलती है। Agricultural News</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान लंबे समय तक गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई और अगस्त में पौध रोपाई करने पर सितंबर-अक्टूबर में फूल आने शुरू हो जाते हैं, जबकि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से फल तुड़ाई शुरू हो जाती है। इसके बाद नवंबर से मार्च तक लगातार उत्पादन मिलने से किसानों को नियमित आमदनी प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बेहतर उत्पादन के लिए रोगमुक्त और मजबूत पौध तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए मिट्टी रहित माध्यम (Soilless Media) का उपयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है। उन्नत संकर किस्मों के पौधे लगभग एक माह में रोपाई योग्य हो जाते हैं। रोपाई से पहले जड़ों का जैविक फफूंदनाशकों से उपचार करने पर शुरुआती रोगों की संभावना काफी कम हो जाती है। Agricultural News</p>
<h3 style="text-align:justify;">जिग-जैग रोपाई और ड्रिप सिंचाई से बढ़ती है गुणवत्ता</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों की सलाह है कि उठी हुई क्यारियों में जिग-जैग पद्धति से पौध लगाने पर पौधों को पर्याप्त धूप और वायु मिलती है, जिससे रोगों का प्रकोप कम होता है और फल अधिक आकर्षक बनते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पॉलीहाउस में ड्रिप सिंचाई प्रणाली सबसे प्रभावी मानी जाती है। इसी माध्यम से पानी में घुलनशील उर्वरकों की आपूर्ति करने पर पौधों को संतुलित पोषण मिलता है। इससे फल का आकार, रंग और चमक बेहतर होती है, साथ ही पानी की बचत भी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर पुरानी, कमजोर और रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई करने से नई शाखाएं विकसित होती हैं। इससे पौधों की उत्पादक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है और लगातार तुड़ाई संभव होती है। Agricultural News</p>
<h3 style="text-align:justify;">कीट एवं रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान जरूरी</h3>
<p style="text-align:justify;">संरक्षित खेती में भी सफेद मक्खी तथा अन्य रस चूसने वाले कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके नियंत्रण के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप प्रभावी माने जाते हैं। इसके अलावा नियमित निरीक्षण, संक्रमित भागों को हटाना तथा जैविक नियंत्रण उपाय अपनाने से रासायनिक दवाओं की आवश्यकता कम हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीज रहित बैंगन की गुणवत्ता और बाजार में इसकी बढ़ती मांग के कारण किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। एक बार फसल स्थापित होने के बाद कई महीनों तक नियमित तुड़ाई होने से यह खेती कम समय में अधिक लाभ देने वाली तकनीकों में शामिल होती जा रही है। Agricultural News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:49:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bhilwara Rain: 35 साल बाद फूटा आस पहाड़ का झरना, किसानों के चेहरे खिले</title>
                                    <description><![CDATA[भीलवाड़ा में भारी बारिश के बाद 35 साल बाद आस पहाड़ का प्राकृतिक झरना पूरे वेग से बह निकला। कई क्षेत्रों में जलभराव हुआ, जबकि किसानों को खरीफ फसलों के लिए बड़ी राहत मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/bhilwara-rain-aas-mountain-waterfall-burst-after-35-years-faces/article-88567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/bhilwara-monsoon.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Rajasthan Weather Update: भीलवाड़ा (सच कहूँ/एजेंसी)। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में लगभग 18 दिनों के अंतराल के बाद मानसून ने जोरदार दस्तक देकर मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। मूसलाधार वर्षा से जहां कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ, वहीं लंबे समय बाद आस पहाड़ का प्राकृतिक झरना पूरे वेग के साथ बहने लगा। इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आसपास के क्षेत्रों से पहुंचने लगे। तेज बारिश के चलते बदनोर और आसींद क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बन गई। कई नदियां और बरसाती नाले उफान पर आ गए, जिससे कुछ पुलों पर आवागमन रोकना पड़ा। बाजारों और निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि कई सड़कों को भी नुकसान पहुंचा। Bhilwara Rain</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि आस पहाड़ का झरना इस तरह प्रचंड रूप में कई दशक बाद दिखाई दिया है। पहाड़ी से गिरती जलधारा ने पूरे क्षेत्र को आकर्षक प्राकृतिक स्थल का रूप दे दिया है। झरने की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं। झरने की जानकारी मिलते ही भीलवाड़ा, शाहपुरा, बदनोर, आसींद और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग वहां पहुंचने लगे। लोगों ने प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया और यादगार तस्वीरें व वीडियो भी बनाए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, लगातार हुई वर्षा के कारण नेखाड़ी नदी का जलस्तर बढ़ गया। कुछ पुल पानी में डूब गए, जिससे प्रशासन को सुरक्षा के मद्देनजर यातायात रोकना पड़ा। लोगों से अपील की गई है कि जलभराव वाले क्षेत्रों, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहें तथा प्रशासन की सलाह का पालन करें। बारिश ने आसींद कस्बे की जल निकासी व्यवस्था की भी परीक्षा ले ली। मुख्य बाजार सहित कई इलाकों में पानी भर जाने से दुकानों और मकानों में पानी प्रवेश कर गया, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने निकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाने की मांग की है। Bhilwara Rain</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान आसींद-बोजुंदा मार्ग पर एक निजी विद्यालय की बस सड़क पर बने गहरे गड्ढे में फंस गई। बस में सवार विद्यार्थियों को ग्रामीणों ने तत्काल सहायता पहुंचाते हुए सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। लगातार सूखे जैसे हालात से चिंतित किसानों के लिए यह वर्षा राहत लेकर आई है। खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचने से सोयाबीन, मक्का, उड़द सहित खरीफ की अन्य फसलों को नया जीवन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में भी हल्की वर्षा जारी रहती है तो फसलों की स्थिति और बेहतर हो सकती है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान जिले के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की अपील की है। Bhilwara Rain</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 12:25:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agricultural News: मानसून की बढ़ती रफ्तार से किसानों के चेहरे खिले, रोपाई-बुआई ने भी पकड़ी रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में लगातार हो रही हल्की से मध्यम वर्षा ने खरीफ सीजन की खेती को नई ऊर्जा प्रदान की है। अनुकूल मौसम के कारण जिले के धमतरी, कुरूद, नगरी और मगरलोड विकासखंडों में कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं। खेतों में धान की रोपाई, जुताई और अन्य कृषि कार्य पूरे उत्साह के साथ किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेती का माहौल पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/agricultural-news-due-to-the-increasing-pace-of-monsoon-the/article-88519"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/buai-agriculture.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Farmers News: धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में लगातार हो रही हल्की से मध्यम वर्षा ने खरीफ सीजन की खेती को नई ऊर्जा प्रदान की है। अनुकूल मौसम के कारण जिले के धमतरी, कुरूद, नगरी और मगरलोड विकासखंडों में कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं। खेतों में धान की रोपाई, जुताई और अन्य कृषि कार्य पूरे उत्साह के साथ किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेती का माहौल पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहा है। Agricultural News</p>
<p style="text-align:justify;">दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता के चलते पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। पर्याप्त नमी मिलने से खेत रोपाई के लिए उपयुक्त हो गए हैं और किसान समय पर खेती का कार्य पूरा करने में जुटे हैं। मौसम की अनुकूलता को देखते हुए इस वर्ष अच्छी खरीफ फसल की उम्मीद भी बढ़ी है, हालांकि किसान अत्यधिक वर्षा की संभावना को लेकर सतर्क भी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्राम अमाली के किसान प्रवीण चंद साहू ने बताया कि उन्होंने लगभग पांच एकड़ भूमि में धान की रोपाई पूरी कर ली है। उनका कहना है कि वर्तमान मौसम फसल की बेहतर वृद्धि के लिए अनुकूल है और यदि वर्षा का क्रम संतुलित बना रहा तो उत्पादन अच्छा रहने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार किसान गुलजार कश्यप ने बताया कि वे ढाई एकड़ खेत में धान की रोपाई कर रहे हैं। लगातार हो रही वर्षा से रोपाई का कार्य आसान हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी समिति के माध्यम से आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं किसान आनंद राम यादव ने तीन एकड़ में रोपाई का कार्य पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया कि खेतों में खुले घूमने वाले मवेशियों से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने गांव में कांजी हाउस का संचालन दोबारा शुरू करने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुरूद क्षेत्र के किसान शेखर चंद्राकर का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी इसी प्रकार संतुलित वर्षा होती रही तो क्षेत्र में खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। फिलहाल पूरे जिले में कृषि कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और किसान अच्छे मौसम का पूरा लाभ उठा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 12:46:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Farmers Protest: भारत -अमेरिका ट्रेड डील किसानों का डेथ वारंट साबित होगा: बिजेंद्र सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; वेव सिटी बिल्डर, खाद, बिजली, आवारा पशु और गन्ना भुगतान के मुद्दों पर दी आंदोलन की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/india-us-trade-deal-will-prove-to-be-a-death-warrant/article-88469"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/farmers-protest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Farmers Protest:  गाजियाबाद।</strong> भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने मंगलवार  को राष्ट्रीय आह्वान पर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में जनपद के दर्जनों गांवों से किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों से कलेक्ट्रेट पहुंचे और कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ट्रेड डील) का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को पर्याप्त सुरक्षा के बिना विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोला गया तो इसका सबसे अधिक नुकसान देश के छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ेगा। भाकियू का कहना है कि विदेशी सब्सिडी प्राप्त कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय कृषि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद प्रणाली तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">भाकियू ने जनपद की स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया | Farmers Protest</h5>
<p style="text-align:justify;">ज्ञापन के साथ भाकियू ने जनपद की स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। संगठन ने किसानों को डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति में सुधार, गन्ना किसानों के लंबित भुगतान तथा वेव सिटी बिल्डर से प्रभावित किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की। साथ ही पूर्व में किसानों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर भी कड़ा रोष व्यक्त किया गया। भाकियू जिला अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि वेव सिटी बिल्डर और किसानों के बीच शीघ्र सकारात्मक वार्ता कर समाधान नहीं निकाला गया तो संगठन बिल्डर के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। आंदोलन की तिथि भाकियू की प्रशासनिक समिति तय करेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा:बिजेंद्र सिंह </h4>
<p style="text-align:justify;">बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन पिछले चार दशकों से किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण संघर्ष करती रही है। वर्तमान समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। गन्ना भुगतान लंबित है, उर्वरकों की समय पर उपलब्धता नहीं हो पा रही है और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सी-2+50प्रतशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी</h4>
<p style="text-align:justify;">ज्ञापन में संगठन ने सभी फसलों पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2+50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, किसानों एवं कृषि मजदूरों की ऋणमाफी, कृषि के लिए निःशुल्क बिजली, ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, डीएपी-यूरिया की निर्बाध उपलब्धता, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा, फसल बीमा योजना में सुधार, भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का सख्ती से पालन तथा कृषि और डेयरी क्षेत्र को प्रभावित करने वाले किसी भी मुक्त व्यापार समझौते से बचने की मांग की। इसके अलावा डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीज क्षेत्र में बढ़ते एकाधिकार पर नियंत्रण, कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा प्रभावी एवं न्यायसंगत जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की भी मांग उठाई गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कृषि आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला:भाकियू</h4>
<p style="text-align:justify;">भाकियू नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कृषि केवल किसानों की आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। यदि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से 15 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 12:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agricultural News: एचएयू का फ्रूट फ्लाई ट्रैप: फल व सब्जियों को कीटों से बचाने की असरदार तकनीक</title>
                                    <description><![CDATA[चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) द्वारा विकसित फ्रूट फ्लाई ट्रैप फलदार फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खी के नियंत्रण में किसानों के लिए प्रभावी तकनीक साबित हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-news-hus-fruit-fly-trap-is-an-effective-technique/article-88451"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/hau-fruit-fly-trap.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हिसार, (सच कहूँ/मुकेश)। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) द्वारा विकसित फ्रूट फ्लाई ट्रैप फलदार फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खी के नियंत्रण में किसानों के लिए प्रभावी तकनीक साबित हो रहा है। वर्षा ऋतु में इस कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है, जिससे अमरूद, किन्नू, नाशपाती, आड़ू, आलूबुखारा और आम जैसी फलदार फसलों के साथ-साथ घीया, तोरी, खीरा, करेला, तरबूज, खरबूजा और कद्दू वर्गीय सब्जियों में 70 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका रहती है। Agricultural News</p>
<p style="text-align:justify;">एचएयू के कीट विज्ञान विभाग के अनुसार मादा फल मक्खी फलों की ऊपरी सतह के नीचे अंडे देती है। इन अंडों से निकलने वाले सफेद लार्वा फल के भीतर ही विकसित होकर उसे अंदर से सड़ा देते हैं। चूंकि कीट फल के अंदर रहता है, इसलिए सामान्य कीटनाशकों का प्रभाव सीमित रहता है। ऐसे में फ्रूट फ्लाई ट्रैप नर फल मक्खियों को आकर्षित कर उन्हें फंसा लेता है, जिससे उनका प्रजनन चक्र टूटता है और कीट की संख्या नियंत्रित रहती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संक्रमित फलों का करें सुरक्षित निस्तारण | Agricultural News</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. कम्बोज तथा अ­नुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने किसानों को सलाह दी है कि संक्रमित फलों को प्रतिदिन अथवा एक दिन छोड़कर एकत्रित करें और उन्हें कम से कम दो फीट गहरे गड्ढे में दबा दें। उन्होंने बताया कि गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करने से कीट की प्यूपा अवस्था नष्ट हो जाती है, जिससे अगले मौसम में इसका प्रकोप काफी कम हो जाता है। उन्होंने किसानों से फल बनने की अवस्था से पहले ट्रैप लगाने और उन्हें पेड़ की ऐसी शाखा पर टांगने की सलाह दी, जहां सीधी धूप कम पड़ती हो।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रति एकड़ 12 से 14 ट्रैप लगाने की सिफारिश</h3>
<p style="text-align:justify;">कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्षा डॉ. सुनीता यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित फ्रूट फ्लाई ट्रैप की कीमत 130 रुपये प्रति ट्रैप निर्धारित की गई है। किसानों को प्रति एकड़ 12 से 14 ट्रैप लगाने की सिफारिश की गई है। ट्रैप में प्रयुक्त आकर्षक पदार्थ लगभग 30 दिन तक प्रभावी रहता है, इसलिए 30 से 35 दिन बाद इसे दोबारा चार्ज करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसान यह ट्रैप चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कीट विज्ञान विभाग से प्राप्त कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान विश्वविद्यालय के टोल फ्री नंबर 1800-180-3001, दूरभाष 01662-255289 तथा मोबाइल 9729300525 पर संपर्क कर सकते हैं। Agricultural News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 21:45:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>White Gold News: भारत का 'सफेद सोना' बना अर्थव्यवस्था की ताकत, ग्लोबल फाइबर उत्पादन में करीब 19% रही हिस्सेदारी </title>
                                    <description><![CDATA[भारत कपास के रकबे में दुनिया में पहले और उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। सरकार उत्पादकता बढ़ाने, निर्यात मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/white-gold-news-indias-white-gold-becomes-the-strength-of/article-88422"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/white-gold.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India's Cotton Production: नई दिल्ली। कपास उत्पादन और खेती के क्षेत्रफल के मामले में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश दुनिया में कपास के सर्वाधिक रकबे वाला देश है, जबकि उत्पादन और घरेलू खपत के मामले में दूसरा स्थान रखता है। कृषि और वस्त्र क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में कपास की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।  White Gold News</p>
<p style="text-align:justify;">आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में लगभग 290.91 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ, जबकि घरेलू उद्योगों की मांग 328 लाख गांठ तक पहुंच गई। वैश्विक फाइबर उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत आंकी गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने कपास क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनका उद्देश्य किसानों की उत्पादकता बढ़ाना, गुणवत्ता में सुधार करना, बाजार तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना तथा मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना है। बाजार में कीमतों में गिरावट आने पर किसानों को राहत देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खरीद अभियान भी संचालित किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन के माध्यम से वर्ष 2031 तक कपास उत्पादन को लगभग 498 लाख गांठ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग, डिजिटल खरीद व्यवस्था और उत्पाद की स्रोत-आधारित पहचान (ट्रेसबिलिटी) जैसी पहल भारतीय कपास की गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता को और मजबूत बना रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में कपास की खेती लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर भूमि पर की जाती है। इस फसल से करीब 60 लाख किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। वहीं कपास की प्रसंस्करण इकाइयों, वस्त्र उद्योग, व्यापार और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में 4 से 5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। यही कारण है कि कपास को देश की अर्थव्यवस्था में 'सफेद सोना' कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्यात के क्षेत्र में भी भारतीय कपास ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने लगभग 18 लाख गांठ कपास का निर्यात किया, जिससे वैश्विक कपास व्यापार में देश की महत्वपूर्ण भागीदारी बनी रही। कपास और उससे तैयार वस्त्रों के निर्यात से देश को 11.49 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कपास से निर्मित वस्त्रों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा विदेशी बाजार रहा। इसके अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात भी प्रमुख आयातक देशों में शामिल रहे। यह स्थिति दर्शाती है कि भारतीय कपास और उससे तैयार उत्पादों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में कपास का उत्पादन मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में होता है। इसके अतिरिक्त ओडिशा और तमिलनाडु में भी कपास की खेती की जाती है, जिससे यह फसल देश के कृषि एवं औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 17:25:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांगी बना हिमाचल का पहला प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल, सरकार ने बताया सतत विकास की मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश का पांगी राज्य का पहला प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल बन गया है। सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 5 करोड़ रुपये का फंड, जौ पर ₹60 प्रति किलो एमएसपी और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास हेतु कई नई योजनाओं की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/pangi-became-the-first-natural-farming-model-of-himachal-the/article-88380"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/pangi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शिमला, <strong>(सच कहूँ/डेस्क/एजेंसी)</strong> हिमाचल प्रदेश का दुर्गम पांगी घाटी क्षेत्र राज्य का पहला प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल बन गया है। राज्य सरकार ने रविवार को कहा कि यह पहल सतत विकास, रसायन मुक्त खेती और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने इस परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराया है। साथ ही प्राकृतिक तरीके से उगाई गई जौ (बार्ले) के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया गया है, ताकि किसानों को रसायन मुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का लक्ष्य लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है। इन इलाकों में कम आबादी, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और लंबी सर्दियों के कारण आवागमन और बुनियादी सेवाएं प्रभावित रहती हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, आजीविका और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में विशेष निवेश किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के अनुसार, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 42.49 प्रतिशत हिस्सा हैं, जबकि यहां केवल 3.92 लाख लोग रहते हैं, जो राज्य की कुल आबादी का 5.71 प्रतिशत हैं। इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व महज 7 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जबकि राज्य का औसत 123 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने सभी स्थायी और मौसमी जनजातीय बस्तियों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण और सुरक्षित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करने का दावा किया है। जनजातीय क्षेत्रों में 1,000 पुरुषों पर 1,018 महिलाओं का लिंगानुपात भी राज्य के औसत 972 से बेहतर बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने बताया कि जनजातीय उपयोजना (एसटीपी) के तहत हर वर्ष कुल विकास बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा इन क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया जाता है। वर्ष 2024-25 में इस मद में 890.28 करोड़ रुपये और 2025-26 के लिए अनुसूचित जनजाति घटक के तहत 638.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 के दौरान 3,361 जनजातीय छात्रों को प्री-मैट्रिक, 5,693 छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक और 304 छात्रों को मेधावी छात्रवृत्ति का लाभ मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में 2 जिला अस्पताल, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 568 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 5,084 अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों को पोषण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने लाहौल-स्पीति और भरमौर में आधुनिक सुविधाओं से लैस आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर, एमआरआई, सीटी स्कैन, प्रयोगशाला और पर्याप्त नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था की गई है। महिला सशक्तिकरण के तहत जनजातीय क्षेत्रों की 3,234 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और आजीविका कार्यक्रमों के जरिए 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। वहीं, इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है।]</p>
<p style="text-align:justify;">'राज्य सरकार ने पहली बार हिमाचल प्रदेश के 75 वर्षों के इतिहास में काजा में हिमाचल दिवस मनाने का निर्णय लिया है, जिसे जनजातीय क्षेत्रों तक सुशासन पहुंचाने और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इसके अलावा सरकार जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर आजीविका के नए अवसर भी विकसित कर रही है। होमस्टे स्थापित करने, विस्तार करने और उन्नयन के लिए 5 करोड़ रुपये तक के निवेश पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे रोजगार और आय के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 19:26:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Tehdil Arora]]></dc:creator>
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                <title>सीबीआई ने फर्जी कृषि भवन अधिकारी को किया गिरफ्तार, लोन आवेदकों से लेता था रिश्वत</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अधिकारी बनकर ऋण आवेदकों से रिश्वत मांगने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को कृषि भवन, नई दिल्ली स्थित विभाग का अधिकारी बताकर पशुपालन अवसंरचना विकास निधि के तहत ऋण लेने वाले लोगों से पैसे की मांग करता था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/cbi-arrested-fake-krishi-bhavan-officer-who-used-to-take/article-88366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/arrested9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली/देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अधिकारी बनकर ऋण आवेदकों से रिश्वत मांगने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को कृषि भवन, नई दिल्ली स्थित विभाग का अधिकारी बताकर पशुपालन अवसंरचना विकास निधि के तहत ऋण लेने वाले लोगों से पैसे की मांग करता था। Uttarakhand News</p><p style="text-align:justify;">सीबीआई के अनुसार, इस मामले में 29 जून को एंटी करप्शन ब्रांच देहरादून में मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर तहसील के लालपुर गांव में पोल्ट्री फार्म संचालित करता है। उसने पशुपालन अवसंरचना विकास निधि योजना के तहत उद्यमी मित्र पोर्टल के माध्यम से 22.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था।<br /></p><p style="text-align:justify;">जांच में सामने आया कि आरोपी ने खुद को विभाग का अधिकारी बताकर ऋण स्वीकृत कराने के नाम पर 45 हजार रुपए यानी ऋण राशि का 2 प्रतिशत रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने 29 जून को जाल बिछाया, जिसमें आरोपी ने शिकायतकर्ता से पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपए यूपीआई के जरिए भेजे गए। क्यूआर कोड और बैंक खाते की जानकारी के आधार पर सीबीआई ने 30 जून को एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, लेकिन पूछताछ में पता चला कि वह मुख्य आरोपी नहीं था। Uttarakhand News<br /></p><p style="text-align:justify;">जांच के दौरान सीबीआई को पता चला कि मुख्य आरोपी पशुपालन अवसंरचना विकास निधि के ऋण आवेदनों की जानकारी तक पहुंच रखता था। वह प्रतिदिन बड़ी संख्या में आवेदकों को फोन कर ऋण आवेदन खारिज होने, दोबारा आवेदन कराने या ऋण स्वीकृति दिलाने का झांसा देकर रिश्वत मांगता था। आरोपी यूपीआई के माध्यम से अलग-अलग लोगों के बैंक खातों में रकम मंगवाकर बाद में उसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर देता था।<br /></p><p style="text-align:justify;">मुख्य आरोपी की तलाश में सीबीआई ने दिल्ली, आगरा और आसपास के क्षेत्रों में लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच की। इस दौरान मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, संदिग्ध बैंक खातों, आईपी एड्रेस और संबंधित अधिकारियों व ऋण आवेदकों से पूछताछ की गई। डिजिटल सर्विलांस और खुफिया जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदल रहा था तथा आगरा, जयपुर और दिल्ली जैसे शहरों में छिपकर रह रहा था।<br /></p><p style="text-align:justify;">19 जुलाई को सीबीआई को सूचना मिली कि आरोपी अपने पैतृक गांव छोटा पूठा बिसराना, थाना दौकी, तहसील फतेहाबाद, जिला आगरा (उत्तर प्रदेश) लौटा है। इसके बाद सीबीआई की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने आरोपी के आवास पर तलाशी भी ली, जहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए। आरोपी को देहरादून की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा, फिलहाल मामले की जांच जारी है। Uttarakhand News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>Fraud Alert</category>
                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 17:43:22 +0530</pubDate>
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