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                <title>कृषि - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>कृषि RSS Feed</description>
                
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                <title>Indore BRICS Meeting: ''इंदौर में BRICS कृषि महाकुंभ 2026 में ब्रिक्स देश 5 दिन करेंगे खेती-किसानी पर मंथन'' </title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश के इंदौर में 9 से 13 जून तक BRICS कृषि मंत्रियों और कृषि कार्य समूह की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। खाद्य सुरक्षा, छोटे किसानों का सशक्तिकरण, जलवायु अनुकूल कृषि और कृषि नवाचार प्रमुख मुद्दे रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/indore-brics-meeting-in-indore-brics-krishi-mahakumbh-2026-brics/article-86074"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/shivraj-chauhan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">BRICS Agriculture Summit 2026: भोपाल। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में पांच दिवसीय ब्रिक्स देशों का कृषि महाकुंभ होने जा रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बैठक का मुख्य फोकस लघु और सीमांत किसानों पर रहेगा। शिवराज सिंह चौहान ने संवाददाता का सम्मेलन बताया कि 9 से 13 जून तक मध्य प्रदेश वैश्विक कृषि कूटनीति का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है, जहां ब्रिक्स कृषि कार्य समूह और सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होगी। Indore BRICS Meeting</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह आयोजन खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि, छोटे किसानों के सशक्तिकरण और कृषि नवाचार जैसे वैश्विक मुद्दों पर ठोस दिशा तय करेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देश विश्व के विकासशील देशों की एक प्रभावशाली आवाज हैं। इन देशों के पास दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि है और वैश्विक कृषि उत्पादन में भी इनकी हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व के करीब 58 करोड़ किसानों में से लगभग 70 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान ब्रिक्स देशों में रहते हैं। ऐसे में इन देशों के बीच होने वाला कृषि संवाद न केवल सदस्य देशों बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सोच कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसका दायरा खाद्य और पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि, रोजगार सृजन और सतत विकास तक विस्तारित है। Indore BRICS Meeting</p>
<p style="text-align:justify;">शिवराज सिंह ने बताया कि बैठक का मुख्य फोकस लघु और सीमांत किसानों पर रहेगा। छोटे किसानों के सामने जोत का छोटा आकार, सीमित संसाधन और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाने, अनुसंधान के लाभों को किसानों तक पहुंचाने, कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बाजार कनेक्टिविटी मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को भी प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि कृषि कार्यबल में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जबकि युवा नई तकनीकों और नवाचार को तेजी से अपनाने में सक्षम हैं। 12 जून को महिलाओं और युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा विषय पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताओं में खाद्य सुरक्षा और पोषण, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि तथा नवाचार और अनुसंधान साझेदारी शामिल हैं। बढ़ती आबादी और बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और बाजार पहुंच को बढ़ाना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन को कृषि के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा और अत्यधिक वर्षा जैसी स्थितियां किसानों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में रीजनरेटिव फार्मिंग, क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि मिट्टी और पर्यावरण की गुणवत्ता भविष्य के लिए सुरक्षित रह सके। खाद्य अपव्यय को भी एक बड़ी वैश्विक समस्या बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर वर्ष लगभग एक अरब टन खाद्यान्न बर्बाद होता है, जो न केवल संसाधनों की हानि है बल्कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का भी एक प्रमुख कारण है। इस दिशा में भंडारण, परिवहन और सप्लाई चेन में सुधार के उपायों पर चर्चा होगी। Indore BRICS Meeting</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:33:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Tea Farming: ऐसे करें चाय की खेती, किसानों हो जाएंगे मालोमाल!, जानिये कैसे</title>
                                    <description><![CDATA[Tea Farming: चाय की खेती कैसे की जाती है और किस समय पर ये उगाई जाती है जानिये यहां पर सब कुछ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/tea-farming-do-tea-farming-like-this-farmers-will-become/article-86033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/tea-farming.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">Tea Farming: चाय झाड़ी की सूखी पत्ती होती है और उसमें धीन होता है और दूध और चीनी के साथ उबलते पानी में डालने पर यह एक सुगंधित और उत्तेजक पेय देता है। चाय भारत में सबसे महत्वपूर्ण पेय फसलों में से एक है। इसे चाय के नाम से भी जाना जाता है। चाय के बागान केवल ऊपरी असम तक ही सीमित थे लेकिन बाद में, निचले असम और दार्जिलिंग जैसे नए क्षेत्रों को भी चाय की खेती के लिए खोल दिया गया, अकेले असम में 35 चाय बागान थे। बाद में दक्षिण भारत की नीलगिरी पहाड़ियों हिमालय की तलहटी में तराई और हिमाचल प्रदेश और मेघालय के कुछ क्षेत्रों में चाय की खेती शुरू हुई।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय के स्वास्थ्य लाभ: चाम के कुछ स्वास्थ्य लाभ नीचे सूचीबद्ध है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">कॉफी की तुलना में चाय में कैफीन कम होता है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय प्रतिरक्षा प्रणाली में मदद कर सकती है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाप कैंसर से बचा सकती है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय की खेती के लिए कृषि जलवायु स्थितियां:</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय बागान के लिए मध्यम आई और गर्म और जलवायु की स्थिति की आवश्यकता होती है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय के बागान उमस भरे गर्म मौसम की स्थिति में अच्छी तरह से पनपते हैं। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">जलवायु फसल की उपज फसल की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, चाप बागान के लिए स्थानीय जलवायु पर विचार करना चाहिए। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय के पौधों की वृद्धि के लिए इष्टतम तापमान सीमा 20 से 33°C है और 35°C से ऊपर और 10°C से कम तापमान बाप के पौधों की वृद्धि को नुकसान पहुंचा सकता।</p>
</li>
</ul>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय बागान के लिए पूरे वर्ष 150 सेमी से 300 सेमी तक अच्छी तरह से वितरित वर्षा की आवश्यकता होती है। चाय बागान एक छायादार पौधा है और जब इसे सायादार वृक्ष क्षेत्रों के साथ लगाया जाता है तो यह अधिक तेजी से बढ़ता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><br /></strong>चाय की खेती में मिट्टी की आवश्यकताः Tea Farming<strong><br /></strong></h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय के बागान गहरी, अच्छी जल निकासी वाली, भुरभुरी दामट मिट्टी में अच्छी तरह पनपते हैं। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">हयूमस और आयरन से भरपूर कुंवारी वन मिट्टी चाय बागानों के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी है और मुख्य मिट्टी में पोटाश और फास्फोरस का एक बड़ा अनुपात चाय को एक विशेष स्वाद देता है जैसा कि दार्जिलिंग में होता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">जलभराव से पौधों को नुकसान होगा, इसलिए सुनिश्चित करें कि मिट्टी को निकालने का एक आसान तरीका है। चाय बागान में मिट्टी /भूमि की तैयारी के हिस्से के रूप में अमोनियम सल्फेट और जोड़ी इडा (खत उर्वरकों की एक अच्छी मात्रा को मिट्टी में जोड़ा जाना चाहिए। मिट्टी का अम्लीय पीएच 45 से 55 के बीच होना चाहिए।</p>
</li>
</ul>
<h4 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की बुवाई</h4>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">यह एक बहुत ही नाजुक ऑपरेशन है और इसके लिए पर्याप्त योजना और उचित पर्यवेक्षण की आवश्यकता है। सही ढंग से लगाए गए चाय के पौधे जल्दी से खेत में स्थापित हो जाते हैं, तेजी से बढ़ते है और पहले पूर्ण फल देने लगते हैं। दूसरी ओर, रोपण के दौरान थोड़ी सी त्रुटि से पौधों की मृत्यु दर का उच्च प्रतिशत या पौधों को स्थायी झटका लग सकता है।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय बोने का समयः रोपण अप्रैल-जून और सितंबर-अक्टूबर या अक्टूबर-नवंबर में पर्याप्त सिचाई के साथ किया जा सकता है। भारी बारिश की अवधि से बचना चाहिए।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">रोपण के लिए प्रयुक्त पौधों के प्रकारः</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">कम से कम 12 अच्छी परिपक पत्तियों और पेंसिल (0.5 सेमी) मोटाई (कॉलर पर) के साथ 40 सेमी से 60 सेमी ऊंचे स्वस्थ पौधों को ही खेत में लगाने के लिए लिया जाना चाहिए।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">सामान्य तौर पर 9-12 महीने के पौधे इस अवस्था को प्राप्त करते हैं। घटिया पौधों को हटा देना चाहिए। नर्सरी से पोधों को निकालने से पहले उन्हें धीरे-धीरे पूर्ण सूर्य के संपर्क में आने से कठोर होना चाहिए। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">खेत में रोपण स्थल तक पौधों का परिवहन अत्यधिक सावधानी से और उचित लेबलिंग के बाद ही किया जाना चाहिए।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय रोपण का प्रकार:</p>
</li>
</ul>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">रोपण दो प्रकार के होते हैं </p>
<ol style="text-align:justify;">
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">गड्डा रोपण </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">ट्रेच रोपण।</p>
</li>
</ol>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong></p>
<h4 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती के गड़े रोपण:</h4>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इस विधि का पालन तब किया जाता है जब पौधों के बीच की दूरी पर्याप्त चौड़ी होती है जिससे उचित आकार के अलग- अलग गड्ढे खोदे जा सकें और बिना किसी कठिनाई के गड्ढे लगभग 45 सेंटीमीटर चौड़े और 45 सेंटीमीटर गहरे, गोलाकार और सीधी दीवार वाले होने चाहिए। </p>
<ul style="text-align:justify;">
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">छोटे गड्ढे जड़ों की वृद्धि को रोकते हैं और टहनियों की वृद्धि और विकास को धीमा कर देते हैं। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">खुदाई की गई मिट्टी को 4-5 किलोग्राम अच्छी तरह से सड़ी हुई पशु खाद या 150-200 ग्राम अच्छी तरह से सड़ी हुई खली में मिलाकर मिट्टी को गड्ढों में वापस कर दिया जाता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">रोपण के समय 30 ग्राम रॉक फॉस्फेट ओर 30 ग्राम एसएसपी के अलावा किसी अन्य खाद का उपयोग नहीं किया जाता है।</p>
</li>
</ul>
<h4 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती की खाई रोपण:</h4>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">यह विधि निकट दूरी ओर भारी मिट्टी में अपनाई जाती है। पंक्तियों के साथ 30 सेंटीमीटर चौड़ी और 45 सेंटीमीटर गहरी खाई खोदी जाती है। खोदी गई मिट्टी को कंडीशन किया जाता है और गड्ढ़ों के मामले में वापस लौटा दिया जाता है और चाय को सीधे खाइयों पर लगाया जाता है।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">बोने की विधि:</p>
</li>
</ul>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">नर्सरी क्यारियों में उगाए गए पौधों के लिए रोपण की दो विधियों है। वे हैं भेटी प्लांटिंग और स्टंप प्लॉटिंग।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">भाटी रोपण</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">यहां, पौधों को भेटी के साथ उठाया जाता है और नर्सरी बेड से जड़ों को बरकरार रखा जाता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">यह पॉलीथिन आस्तीन में उगाए जाने वाले पोधों के साथ सुविधाजनक है, जो परिवहन में कठिनाई को कम करता है, जड़ की क्षति को कम करता है। और जीवित रहने का प्रतिशत बहुत अधिक देता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">ट्यूब में चीरा लगाकर पॉलिथीन को सावधानी से हटा दिया जाता है। ओर भेटी को कंडीशन्ड मिट्टी से आधे भरे हुए गड्ढे में इस तरह रखा जाता है कि भेटी का ऊपरी हिस्सा जमीन की सतह से चिपक जाता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">भेटी के तल में 30 ग्राम रॉक फास्फेट डाला जाता है और गड्ढे को पर्याप्त रेमिंग के साथ मिट्टी से भर दिया जाता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">लगभग 5 सेमी गहराई पर 30 ग्राम एसएसपी भेटी के चारों ओर डाला जाता है और गड्ढे को पौधे के कॉलर तक मिट्टी से भर दिया जाता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">गड्ढे के स्तर को बाद में डूबने से रोकने के लिए पर्याप्त रेमिंग आवश्यक है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव हो जाएगा।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">स्टंप रोपण:</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">जड़ों के आस-पास कोई मिट्टी न होने के कारण पौधों को नर्सरी बेड से उठा लिया जाता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">शूट का हिस्सा कॉलर से 15- 20 सेमी काट दिया जाता है और गड्ढों में डालने से पहले अतिरिक्त जड़ों को काट दिया जाता है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">यह विधि आम तौर पर अतिवृष्टि वाले नर्सरी पोधों द्वारा अपनाई जाती है और इसमें आसान परिवहन का लाभ होता है और रोपण के बाद मुरझाने की संभावना कम हो जाती है। </p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">हालांकि, जीवित रहने का प्रतिशत भेटी रोपण की तुलना में बहुत कम है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">चाय की खेती में अंतर:</p>
</li>
</ul>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">प्रति हेक्टेयर लगभग 14000-16000 (पहाड़ी क्षेत्रों में 17000 तक) पौधों को एक आदर्श झाड़ी आबादी के रूप में पाया गया है जिसमें पंक्तियों के बीच 105-110 सेमी और पौधों के बीच 60-75 सेमी की दूरी होती है। रोपण या तो सिंगल या डबल हेज के रूप में किया जा सकता है।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती की विधि:</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">आमतौर पर, चाय के बागान/बाग साफ पहाड़ी ढलानों पर स्थापित किए जाते हैं जहां पहले से ही छायादार पेड़ लगाए जाते हैं। चाय के बीजों को अंकुरण क्यारियों में बोया जाता है और पौधों को बगीचे में प्रत्यारोपित किया जाता है। </p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय के बागान में नियमित रूप से निराई-गुड़ाई की जाती है ताकि चाय की झाड़ी बिना किसी बाधा के बढ़ती रहे। चाय बागानों में, खाद और उर्वरकों का उपयोग एक आम प्रथा है और इसकी खेती में खली और हरी खाद का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती में छंटाई:</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">छंटाई एक महत्वपूर्ण कार्य है और इसे लगभग उसी व्यास के साथ लगभग मीटर की ऊंचाई तक चाय की झाड़ी के उचित आकार को बनाए रखने के लिए किया जाना चाहिए। छटाई का उद्देश्य पर्याप्त मात्रा में नरम चाय की पत्तियों वाले नए अंकुर प्राप्त करना और जमीन से चाय की पत्तियों को आराम से तोड़ना है।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती में सिंचाई:</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">स्प्रिंकलर सिंचाई उत्तर पूर्व भारत के चाय बागानों में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली विधि है। ड्रिप सिंचाई बीज बरी तक ही सीमित है।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की पत्तियों की कटाई</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय के बागान में चाय की पत्तियों को तोड़ने के लिए गहन श्रम की आवश्यकता होती है, इस फसल की कटाई के लिए कुछ सस्ते मजदूर प्राप्त करें।</p>
<h4 dir="ltr" style="text-align:justify;">देखभाल करने वाला</h4>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">पोधों की बेहतर वृद्धि और अच्छे उत्पादन के लिए भी चाय के पौधों को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। यहां हम वाणिज्यिक चाय खेती व्यवसाय के लिए सामान्य देखभाल प्रक्रिया के बारे में अधिक वर्णन करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">निषेचन</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">अधिकांश मामलों में अतिरिक्त उर्वरकों के प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती है। यदि आपको कोई सहायता चाहिए तो आप अपने स्थानीय कृषि विस्तार कार्यालय से परामर्श कर सकते हैं।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती की सिंचाई / सिंचाई</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">उत्तरी क्षेत्र के चाय बागानों में स्प्रिंकलर सिंचाई सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली विधि है। बूंद सिंचाई बीज बेरी तक ही सीमित है।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">पलवार</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">मल्चिंग मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है। आप मल्चिंग के लिए जैविक सामग्री का उपयोग कर सकते हैं।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती में खरपतवार नियंत्रण</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">मल्चिंग से अधिकांश खरपतवारों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। आप अतिरिक्त खरपतवारों को या तो हाथ से या औजारों से हटा सकते हैं।</p>
<h3 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती की छंटाई</h3>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">छंटाई एक महत्वपूर्ण कार्य है और इसे लगभग उसी व्यास के साथ लगभग 1 मीटर की ऊंचाई तक चाय की झाड़ी के उचित आकार को बनाए रखने के लिए किया जाना चाहिए। छंटाई का उद्देश्य पर्याप्त मात्रा में नरम चाय की पत्तियों वाले नए अंकुर प्राप्त करना और जमीन से चाय की पत्तियों को आराम से तोड़ना है।</p>
<h4 dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की खेती में कीट और रोग</h4>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">कीट जो चाय के पोधों को पीड़ित कर सकते हैं उनमें मच्छर के कीड़े, जीनस हेलोपेल्टिस शामिल हैं, जो असली कीड़े हैं और फैमिली कुलीसिडे (मच्छर) के डिप्टेरस कीड़ों के साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">मच्छर के कीट पौधों की सामग्री को चूसकर और पौधे के भीतर अंडे देकर (ओविपोजिशन) दोनों तरीकों से पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सिंथेटिक कीटनाशकों का छिड़काव उचित समझा जा सकता है। अन्य कीट लेपिडोप्टेरान लीफ फीडर और विभिन्न चाय रोग है।</p>
<h4 dir="ltr" style="text-align:justify;">फसल काटने वाले</h4>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय की पत्तियों की कटाई के लिए चाय की पत्तियों को तोड़ने के लिए गहन श्रम की आवश्यकता होती है। यदि आप इस फसल की कटाई के लिए सस्ते श्रम का उपयोग कर सकते हैं तो आपका व्यवसाय बहुत लाभदायक होगा ।</p>
<h4 dir="ltr">चाय की खेती में उपज</h4>
<p>सही आंकड़ा बता पाना बहुत मुश्किल है। लेकिन एक एकड़ जमीन से औसतन 1.5 टन ग्रीन टी की पत्तियों का उत्पादन किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> </strong>चाय की खेती की विपणन</h4>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">यह वाणिज्यिक चाय की खेती का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि आप अपने उत्पादों का अच्छी तरह से विपणन नहीं कर सकते हैं तो आपका व्यवसाय लाभदायक नहीं होगा। इसलिए, इस व्यवसाय को शुरू करने से पहले अपनी मार्केटिंग रणनीतियों का निर्धारण करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong> </strong>चाय की खेती के व्यवसाय के फायदे</h3>
<ul>
<li dir="ltr" style="text-align:justify;">
<p dir="ltr">चाय की उच्च मांग और मूल्य व्यावसायिक चाय की खेती के व्यवसाय का मुख्य लाभ है। चाय दुनिया में पानी के बाद दूसरा सबसे लोकप्रिय पेय है। व्यावसायिक या बड़े पैमाने पर चाय की खेती एक स्थापित व्यवसाय है ओर बहुत से लोग पहले से ही लाभ कमाने के लिए इस व्यवसाय को कर रहे हैं।</p>
</li>
<li dir="ltr" style="text-align:justify;">
<p dir="ltr">यह एक पुराना और लाभदायक व्यवसाय है, इसलिए आपको इस व्यवसाय को शुरू करने और संचालित करने के बारे में ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। </p>
</li>
<li dir="ltr" style="text-align:justify;">
<p dir="ltr">वाणिज्यिक चाय की खेती में प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता बहुत अधिक होती है। लेकिन एक बार स्थापित होने के बाद आप अपने व्यवसाय से अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे। </p>
</li>
<li dir="ltr" style="text-align:justify;">
<p dir="ltr">बाजार में चाय की काफी मांग और कीमत है। इसलिए, आपको अपने उत्पादों के विपणन के बारे में अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।</p>
</li>
<li dir="ltr" style="text-align:justify;">
<p dir="ltr">चाय के पौधे आम तौर पर बहुत मजबूत और कठोर होते हैं, और उन्हें कम देखभाल और अन्य प्रबंधन की आवश्यकता होती है। चाय के पौधों की देखभाल करना बहुत ही आसान और सरल है।</p>
</li>
<li dir="ltr" style="text-align:justify;">
<p dir="ltr">वाणिज्यिक चाय की खेती एक स्थापित व्यवसाय है और यह बहुत लाभदायक है। तो, यह लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा स्रोत हो सकता है, खासकर शिक्षित लेकिन बेरोजगार लोगों के लिए।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">चाय का सेवन करने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। और अगर आप अपना खुद का चाय उत्पादन व्यवसाय शुरू करते हैं तो आप ताजी चाय का आनंद ले सकते हैं।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/tea-farming-do-tea-farming-like-this-farmers-will-become/article-86033</link>
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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 15:03:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rainbow Mushrooms Growing Tips: घर बैठे उगाएं रंग-बिरंगे मशरूम, आसान तरीके से बनाएं अपना मिनी रेनबो गार्डन</title>
                                    <description><![CDATA[Rainbow Mushrooms Growing Tips: घर बैठे उगाएं रंग-बिरंगे मशरूम, आसान तरीके से बनाएं अपना मिनी रेनबो गार्डन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/grow-colorful-mushrooms-at-home-make-your-own-mini-rainbow/article-85969"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/rainbow-mushrooms-growing-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Rainbow Mushrooms Growing Tips: अनु सैनी। </strong>आज के समय में लोग घर की सजावट के साथ-साथ हेल्दी लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देने लगे हैं। इसी वजह से “रेनबो मशरूम” का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। ये अलग-अलग रंगों के खाने योग्य मशरूम होते हैं, जो न सिर्फ देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। खास बात यह है कि इन्हें उगाने के लिए न खेत की जरूरत होती है और न ही ज्यादा जगह की। घर के किसी छोटे से कोने, बालकनी या कमरे में भी इन्हें आसानी से उगाया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">क्या होते हैं रेनबो मशरूम | Rainbow Mushrooms Growing Tips</h5>
<p style="text-align:justify;">रेनबो मशरूम दरअसल अलग-अलग रंगों के ऑयस्टर मशरूम होते हैं, जैसे गुलाबी, पीले और हल्के नीले रंग के। जब इन्हें एक साथ उगाया जाता है, तो यह बिल्कुल इंद्रधनुष जैसा रंगीन लुक देते हैं, इसलिए इन्हें “रेनबो मशरूम” कहा जाता है। यही कारण है कि आजकल यह गार्डनिंग और होम डेकोरेशन दोनों के लिए लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">कम खर्च में शुरू करें घर पर मशरूम उगाना</h5>
<p style="text-align:justify;">घर पर मशरूम उगाने के लिए बहुत ज्यादा खर्च या खास संसाधनों की जरूरत नहीं होती। इसके लिए आपको मशरूम स्पॉन (बीज), सूखा भूसा या लकड़ी का बुरादा, एक प्लास्टिक बैग या डिब्बा, पानी स्प्रे करने की बोतल और एक छायादार जगह चाहिए। मशरूम की सबसे खास बात यह है कि यह मिट्टी में नहीं बल्कि ऐसे ही ऑर्गेनिक बेस पर उगते हैं, जिससे इन्हें उगाना और भी आसान हो जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भूसे को सही तरीके से करें तैयार</h4>
<p style="text-align:justify;">मशरूम उगाने की शुरुआत भूसे को तैयार करने से होती है। सबसे पहले सूखे भूसे को गर्म पानी में कुछ समय तक भिगोया जाता है, ताकि उसमें मौजूद बैक्टीरिया और गंदगी खत्म हो जाए। इसके बाद भूसे को ठंडा करके इस्तेमाल किया जाता है। यह स्टेप बहुत जरूरी होता है क्योंकि साफ बेस पर ही मशरूम अच्छी तरह उगते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">लेयरिंग तकनीक से बढ़ेगी ग्रोथ</h5>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद प्लास्टिक बैग में भूसे और मशरूम स्पॉन की परतें लगाई जाती हैं। पहले भूसे की एक लेयर, फिर उस पर स्पॉन, फिर दोबारा भूसा—इस तरह 3 से 4 लेयर बनाई जाती हैं। यह प्रक्रिया मशरूम की ग्रोथ को तेज करती है और अच्छे रिजल्ट देती है। बैग को बांधकर उसमें छोटे-छोटे छेद कर दिए जाते हैं ताकि हवा का आना-जाना बना रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;">अंधेरे में रखें, तेजी से होगा विकास</h5>
<p style="text-align:justify;">अब इस बैग को कुछ दिनों के लिए अंधेरी और हल्की गर्म जगह पर रखा जाता है। इस दौरान बैग के अंदर सफेद जाल जैसा बनने लगता है, जिसे माइसीलियम कहते हैं। यही मशरूम की असली ग्रोथ का आधार होता है। लगभग 10 से 15 दिनों में यह पूरी तरह फैल जाता है और बैग सफेद नजर आने लगता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नमी और हल्की रोशनी है जरूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">जब बैग पूरी तरह तैयार हो जाए, तो उसे ऐसी जगह पर रखा जाता है जहां हल्की रोशनी और ताजी हवा मिल सके। अब रोज हल्का पानी स्प्रे करना होता है ताकि नमी बनी रहे। कुछ ही दिनों में छोटे-छोटे मशरूम निकलने लगते हैं और धीरे-धीरे बड़े हो जाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">समय पर करें कटाई</h4>
<p style="text-align:justify;">करीब 5 से 7 दिनों में मशरूम पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। इन्हें सावधानी से जड़ से घुमाकर निकालना चाहिए ताकि अगली बार फिर से मशरूम उग सकें। एक ही बैग से 2 से 3 बार मशरूम उगाए जा सकते हैं, जिससे यह काफी किफायती तरीका भी बन जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऐसे बनाएं गार्डन को रेनबो जैसा रंगीन</h4>
<p style="text-align:justify;">अगर आप अपने गार्डन को और ज्यादा आकर्षक बनाना चाहते हैं, तो अलग-अलग रंगों के मशरूम स्पॉन का इस्तेमाल करें। गुलाबी, पीले और नीले मशरूम को एक साथ उगाने से आपका छोटा सा गार्डन बिल्कुल रेनबो जैसा दिखने लगेगा। यह न सिर्फ देखने में अच्छा लगता है बल्कि मेहमानों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सही जगह का चयन जरूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">मशरूम को हमेशा ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां सीधी धूप न पड़े। किचन का कोना, बालकनी या घर का कोई नम और हवादार हिस्सा इसके लिए सबसे बेहतर होता है। साथ ही ध्यान रखें कि ज्यादा पानी न डालें, सिर्फ हल्का स्प्रे करें और साफ-सफाई बनाए रखें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कमाई का भी बन सकता है जरिया</h4>
<p style="text-align:justify;">आज के समय में मशरूम उगाना सिर्फ शौक नहीं रहा, बल्कि कमाई का जरिया भी बनता जा रहा है। अगर आप इसे बड़े स्तर पर शुरू करते हैं, तो इससे अच्छी आय भी की जा सकती है। बाजार में ऑर्गेनिक और रंगीन मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आसान तरीका, शानदार रिजल्ट</h4>
<p style="text-align:justify;">अंत में कहा जा सकता है कि रेनबो मशरूम उगाना बेहद आसान, सस्ता और फायदेमंद तरीका है। थोड़ी सी मेहनत और सही जानकारी के साथ आप अपने घर में ही एक खूबसूरत, रंगीन और हेल्दी मिनी गार्डन तैयार कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 11:21:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत का कृषि क्षेत्र नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर, एक दशक में दोगुने से अधिक बढ़कर 48.7 लाख करोड़ रुपये पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 2014-15 में 20.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2023-24 में 48.7 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जो कि देश के कुल जीवीए का करीब 18 प्रतिशत है। इसमें वृद्धि की वजह सरकारी निवेश बढ़ना और स्थिर नीति होना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/indias-agriculture-sector-moving-towards-new-heights-more-than-doubling/article-85925"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/agriculture-sector.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Agriculture GVA India: नई दिल्ली। भारत के कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 2014-15 में 20.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2023-24 में 48.7 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जो कि देश के कुल जीवीए का करीब 18 प्रतिशत है। इसमें वृद्धि की वजह सरकारी निवेश बढ़ना और स्थिर नीति होना है। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को दी गई।  समीक्षा अवधि में कृषि क्षेत्र ने मौजूदा कीमतों पर 8.83 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की और अकेले फसल का जीवीए 2014-15 में 12,92,874 करोड़ रुपए से बढ़कर 2023-24 में 26,52,891 करोड़ रुपए हो गया। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा गया है कि पिछले 12 वर्षों में, भारत के कृषि क्षेत्र में किसानों के सशक्तिकरण में व्यापक विस्तार हुआ है। इसमें फोकस कल्याणकारी सहायता से आगे बढ़कर उत्पादकता, आय सुरक्षा, बाजार पहुंच, बुनियादी ढांचे और संस्थागत लचीलेपन को मजबूत करने की ओर केंद्रित हो गया है। कृषि उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई व्यवस्था का विस्तार, ऋण तक बेहतर पहुंच, बीमा कवरेज में मजबूती और संबद्ध क्षेत्रों में वृद्धि ने इस परिवर्तन में योगदान दिया है। साथ ही, एमएसपी संचालन और खरीद प्रणालियों के विस्तार ने बाजार में स्थिरता को मजबूत किया है, लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों को समर्थन दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने बयान में आगे कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, सहकारी समितियां, खाद्य प्रसंस्करण और जलवायु-लचीली पहलों ने कृषि मूल्य श्रृंखला में नए अवसर पैदा किए हैं। ये विकास एक अधिक विविध, प्रौद्योगिकी-आधारित और किसान-केंद्रित कृषि प्रणाली की ओर क्रमिक बदलाव को दर्शाते हैं। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) ने सिंचाई कवरेज का विस्तार किया और जल उपयोग दक्षता को बढ़ावा दिया। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन को सक्षम बनाया, जबकि राष्ट्रीय गोकुल मिशन ने स्वदेशी नस्लों और दुग्ध उत्पादन को समर्थन दिया। कुल खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 में 265.05 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 357.73 मिलियन टन हो गया, जिसमें चावल का रिकॉर्ड उत्पादन 150.18 मिलियन टन और गेहूं का 117.94 मिलियन टन रहा, जो क्रमशः 42 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता 2015-16 में 63.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 56.25 प्रतिशत हो गई, जो क्रमिक प्रगति का संकेत है। इस अवधि के दौरान, तिलहन के अंतर्गत क्षेत्रफल में 18 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। उत्पादन में लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उत्पादकता में लगभग 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बागवानी उत्पादन 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 369.05 मिलियन टन हो गया है। यह विस्तार बेहतर कृषि पद्धतियों और बाजार की मांग द्वारा समर्थित उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण को दर्शाता है। Agriculture News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/indias-agriculture-sector-moving-towards-new-heights-more-than-doubling/article-85925</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:34:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान की युवा व महिला शक्ति बनेगी विकास की धुरी, विकास योजनाओं के केन्द्र में युवा, महिला, किसान और गरीब: मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "विकसित भारत-विकसित राजस्थान" के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए आह्वान किया कि वे सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/youth-and-women-power-of-rajasthan-will-become-the-axis/article-85868"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/bhajan-lal-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "विकसित भारत-विकसित राजस्थान" के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए आह्वान किया कि वे सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। Rajasthan News</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने जयपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित कार्यक्रम में संबल सखी और माय भारत वॉलिंटियर्स से संवाद करते हुए कहा कि राजस्थान के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी निर्णायक साबित होगी। उन्होंने युवाओं से डिजिटल सेवाओं, ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने का आग्रह किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महिला सशक्तिकरण और युवा विकास पर विशेष फोकस</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रोत्साहन योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रही है, जिससे बेटियों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिल रहे हैं। Rajasthan News</p>
<h3 style="text-align:justify;">जल, ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में बड़े लक्ष्य</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीति तैयार की है। इसके तहत विभिन्न नदी जोड़ो परियोजनाओं, सिंचाई योजनाओं और नहरों के सुदृढ़ीकरण पर कार्य किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रही है। किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और कई जिलों में यह सुविधा शुरू की जा चुकी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोजगार और निवेश बढ़ाने पर सरकार का जोर</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को नियुक्तियां दी गई हैं। साथ ही, निवेश को बढ़ावा देने के लिए आयोजित राइजिंग राजस्थान अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में उद्योग, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन को नई गति मिली है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कृषि और डेयरी क्षेत्र में अवसर</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने युवाओं को कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और डेयरी क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान कृषि उत्पादन और दुग्ध उत्पादन दोनों क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उन्होंने किसानों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सम्मान निधि तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बोनस जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नशामुक्त और पर्यावरण-संरक्षित राजस्थान का संकल्प</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने युवाओं और महिलाओं से नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण को भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक बताते हुए व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया। Rajasthan News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 12:55:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयपुर बनेगा प्राकृतिक खेती का केंद्र, 12 जून को विशेष कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा राजस्थान की प्रदेश स्तरीय बैठक सोमवार को जयपुर स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित की गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/jaipur-will-become-a-center-of-natural-farming-special-program/article-85758"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/jaipur-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ/गुरजंट धालीवाल)।</strong> Jaipur News: भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा राजस्थान की प्रदेश स्तरीय बैठक सोमवार को जयपुर स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने की।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में 12 जून को जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की गई। कैलाश चौधरी ने बताया कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में विशेष पहचान रखने वाले आचार्य देवव्रत अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ कार्यक्रम में भाग लेंगे। उनकी टीम किसानों को जीवामृत निर्माण, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपाय तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की तकनीकों की जानकारी देगी। कार्यक्रम में हरिभाऊ बागड़े, भजनलाल शर्मा, मदन राठौड़ सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रत्येक मंडल से चुने जाएंगे पांच किसान</h4>
<p style="text-align:justify;">किसानों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक संगठनात्मक मंडल से पांच किसानों का चयन किया जाएगा। इन नामों के आधार पर प्रत्येक जिले से लगभग 150 किसानों की सूची तैयार कर प्रदेश कार्यालय को भेजी जाएगी। चयनित किसानों को जयपुर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। बैठक के दौरान कैलाश चौधरी ने प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग प्रभारियों और जिला अध्यक्षों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री ओपी यादव, रेवंत सिंह राजपुरोहित सहित किसान मोर्चा के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/jaipur-news.jpg" alt="Jaipur News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 20:33:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय में NABL प्रत्यायन विषयक प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के अनुसंधान निदेशालय द्वारा साबी में गुणवत्ता परिषद भारत (Quality Council of India) के सहयोग से विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं के NABL प्रत्यायन विषयक प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/training-cum-awareness-program-on-nabl-accreditation-organized-at-skn-agricultural-university/article-85630"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/nabl-jobner.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">SKN Agricultural University: श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के अनुसंधान निदेशालय द्वारा साबी में गुणवत्ता परिषद भारत (Quality Council of India) के सहयोग से विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं के NABL प्रत्यायन विषयक प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। SKN Agricultural University News</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं से जुड़े संकाय सदस्यों एवं तकनीकी कार्मिकों में NABL प्रत्यायन के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा प्रयोगशाला गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना रहा। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अधिष्ठाता एवं संकाय अध्यक्ष (कृषि) डॉ. डी. के. गोठवाल तथा अनुसंधान निदेशक डॉ. उम्मेद सिंह उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर डॉ. उम्मेद सिंह ने कहा कि एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं का प्रत्यायन गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला प्रथाओं, गुणवत्ता प्रबंधन एवं सुदृढ़ दस्तावेजीकरण प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं अनुसंधान एवं परीक्षण कार्यों की विश्वसनीयता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी। SKN Agricultural University News</p>
<p style="text-align:justify;">अधिष्ठाता एवं संकाय अध्यक्ष डॉ. डी. के. गोठवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता में सुधार से पीएचडी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को उच्च स्तरीय अध्ययन एवं अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने विश्वविद्यालय में आधुनिक एवं प्रमाणिक प्रयोगशाला व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया। कार्यक्रम में गुणवत्ता परिषद भारत, नई दिल्ली के विश्लेषक  मृणाल कक्कड़ ने NABL एवं QCI के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली का विस्तृत परिचय दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सीएफडब्ल्यूटी, मुंबई के संस्थापक एवं निदेशक नीरज कांत पाण्डेय ने ‘गुणवत्ता यात्रा’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत NABL प्रत्यायन से जुड़े विभिन्न पहलुओं, चुनौतियों, प्रक्रियाओं, लाभों एवं गुणवत्ता संबंधी मुद्दों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा NABL प्रत्यायन की प्रक्रिया, आवश्यक मानकों एवं गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रयोगशाला संचालन एवं गुणवत्ता मानकों से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर चर्चा हुई। डॉ. भूमि राज्यगुरु(संयुक्त निदेशक, एनएबीआई – क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI), उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. एन. के. गुप्ता,  डॉ. शैलेश गोदिका, डॉ. बी. एल. जाट, डॉ. रोशन चौधरी, डॉ. बसंत दादरवाल, महाविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, विभिन्न इकाइयों के प्रभारी अधिकारी, संकाय सदस्य एवं तकनीकी कर्मचारी उपस्थित रहे।  डॉ. हिना सहीवाला ने मंच संचालन किया। अंत में डॉ .एस एस शर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। SKN Agricultural University News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:54:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Vegetables: गर्मी से बचाव के लिए सब्जियों की तुड़ाई सुबह व शाम को करें: डॉ. सीबी सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी ने जहां आमजन को प्रभावित किया है, वहीं सब्जियों की फसलों पर भी गर्मी का असर साफ दिखने लगा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/to-protect-from-heat-dr-cb-singh-should-harvest-vegetables/article-85270"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/vegetables.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। </strong>Vegetables: गर्मी ने जहां आमजन को प्रभावित किया है, वहीं सब्जियों की फसलों पर भी गर्मी का असर साफ दिखने लगा है। गर्मी के चलते मार्किट में सब्जियों की कीमतों के दाम बढ रहे हैं। सब्जी की फसल को लेकर कृषि विशेषज्ञ डा. सीबी सिंह ने सब्जी उत्पादकों को सलाह दी है। डॉ. सीबी सिंह ने कहा कि आजकल गर्मी का मौसम तीव्रता की ओर है तो सब्जी उत्पादक किसानों को गर्मी से बचाव के लिए सब्जियों की तुड़ाई सुबह व शाम को करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र सहित हरियाणा के अन्य क्षेत्रों में बढ़ते तापमान के बीच सब्जी उत्पादक किसानों को फसल की तुड़ाई के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कृषि विशेषज्ञों की भी सलाह है कि किसान सुबह या शाम के समय ही सब्जियों की तुड़ाई करें, क्योंकि इस समय तापमान कम होता है। इस छोटे से उपाय से सब्जियों की ताजगी, गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ बरकरार रहती है।  डा. सिंह के अनुसार सब्जियां बहुत जल्दी खराब होने वाली होती हैं और गर्मी के प्रति संवेदनशील होती हैं। दोपहर की तेज धूप में तुड़ाई करने से सब्जियों में नमी की कमी हो सकती है, जिससे वे सिकुड़ जाती हैं और जल्दी खराब हो जाती हैं। इससे बाजार में उनकी कीमत कम मिलती है और फसल का नुकसान होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सुबह-शाम तुड़वाई करने से टमाटर, भिंडी, खीरा, बैंगन और हरी पत्तेदार सब्जियों में नमी बनी रहती है। तुड़ाई के बाद सब्जियों को छायादार जगह या ठंडे शेड में रखना चाहिए, ताकि वे सीधी धूप से बची रहें। खराब या अधिक पकी हुई सब्जियों को अलग कर देना चाहिए और अच्छी सब्जियों को नरम कपड़े से ढककर टोकरियों या बक्सों में रखना चाहिए। यदि भंडारण करना हो तो ठंडी और हवादार जगह का उपयोग करें या साधारण कूलिंग सिस्टम लगाएं। आने वाले दिनों में बढ़ता तापमान सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/vegetables.jpg" alt="Vegetables" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 15:38:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kisan Karj Mafi Yojana: कर्ज में डूबे किसानों को बड़ी राहत, इस तारीख तक किसानों का कर्ज होगा माफ! सरकार ने लिया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Kisan Karj Mafi Yojana: कर्ज में डूबे किसानों को बड़ी राहत, इस तारीख तक किसानों का कर्ज होगा माफ! सरकार ने लिया फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/kisan-karj-mafi-yojana-big-relief-to-debt-ridden-farmers-farmers/article-85253"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/kisan-karj-mafi-yojana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Kisan Karj Mafi Yojana: मुम्बई। </strong>महाराष्ट्र के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने कृषि ऋण माफी योजना को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए इसकी समयसीमा तय कर दी है। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने घोषणा की है कि सभी पात्र किसानों को 30 जून से पहले ऋण माफी का लाभ प्रदान कर दिया जाएगा। इससे किसानों को आगामी खरीफ सीजन के लिए नए कृषि ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">30 जून से पहले मिलेगी ऋण माफी | Kisan Karj Mafi Yojana</h4>
<p style="text-align:justify;">खरीफ सीजन की तैयारियों और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए ऋण माफी योजना को तय समय सीमा के भीतर लागू करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 30 जून से पहले सभी पात्र किसानों को कर्ज माफी का लाभ मिल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से ऋण माफी के क्रियान्वयन का इंतजार कर रहे थे। इससे नए फसल ऋण लेने का रास्ता भी साफ होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बैंकों को दिए सख्त निर्देश</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीयकृत बैंकों को कृषि ऋण वितरण को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी बैंक अपने निर्धारित कृषि ऋण लक्ष्यों का कम से कम 80 प्रतिशत हासिल करें। सरकार का मानना है कि किसानों तक समय पर ऋण पहुंचाना कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बेहद जरूरी है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में जिला सहकारी बैंक और ग्रामीण बैंक कुल कृषि ऋण का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा प्रदान कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रीयकृत बैंकों की हिस्सेदारी करीब 26 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से कृषि क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">फसल ऋण के लिए CIBIL Score जरूरी नहीं</h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने किसानों को राहत देते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया है कि फसल ऋण लेने के लिए CIBIL Score अनिवार्य नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी किसान को केवल सिबिल स्कोर के आधार पर फसल ऋण से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी शाखाओं को स्पष्ट सूचना जारी की जाए कि फसल ऋण के लिए सिबिल स्कोर की शर्त लागू नहीं होगी। इससे किसानों को ऋण प्राप्त करने में आने वाली परेशानियां कम होंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">RBI ने भी दिया भरोसा</h4>
<p style="text-align:justify;">बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया और स्पष्ट किया कि फसल ऋण प्रक्रिया में किसानों के सामने कोई अनावश्यक बाधा नहीं आने दी जाएगी। आरबीआई अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या होता है CIBIL Score?</h4>
<p style="text-align:justify;">सिबिल स्कोर एक तीन अंकों का क्रेडिट स्कोर होता है, जो किसी व्यक्ति की ऋण चुकाने की क्षमता और वित्तीय व्यवहार को दर्शाता है। बैंक और वित्तीय संस्थान आमतौर पर ऋण देने से पहले इस स्कोर का आकलन करते हैं। हालांकि अब फसल ऋण के मामलों में किसानों के लिए इसे अनिवार्य नहीं रखा गया है, जिससे अधिक किसानों को ऋण सुविधा का लाभ मिल सकेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मौसम को लेकर भी जताई चिंता</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने राज्य में संभावित कम वर्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष सामान्य से लगभग 88 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। वर्षा में कमी के कारण फसलों पर नमी का दबाव बढ़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं। जल संरक्षण अभियानों और ‘जलयुक्त शिवार’ जैसी योजनाओं को तेज गति से लागू करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।</p>
<h4 style="text-align:justify;">किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ</h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले से लाखों किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। ऋण माफी का लाभ मिलने के बाद किसान नए कृषि ऋण आसानी से प्राप्त कर सकेंगे और खरीफ सीजन की तैयारियां बिना किसी आर्थिक दबाव के कर पाएंगे। साथ ही फसल ऋण के लिए सिबिल स्कोर की अनिवार्यता खत्म होने से भी किसानों को राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, राज्य सरकार की यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/kisan-karj-mafi-yojana-big-relief-to-debt-ridden-farmers-farmers/article-85253</link>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Kisan की अगली किस्त से पहले पूरा कर लें ये काम, नहीं तो अटक सकते हैं ₹2000</title>
                                    <description><![CDATA[PM Kisan की अगली किस्त से पहले पूरा कर लें ये काम, नहीं तो अटक सकते हैं ₹2000]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/draft-add-your-title-complete-this-work-before-the-next/article-85099"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/pm-kisan-23rd-installment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi</span></span> योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए जरूरी खबर है। सरकार जल्द ही PM-KISAN की 23वीं किस्त जारी कर सकती है, लेकिन उससे पहले किसानों को कुछ जरूरी अपडेट पूरे करने होंगे। अगर e-KYC, आधार लिंकिंग या बैंक डिटेल्स में कोई गलती हुई, तो ₹2000 की किस्त रुक सकती है। सरकार ने साफ किया है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी जानकारी पूरी तरह अपडेट और सत्यापित होगी।</p>
<p><a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/summer-vacations-in-schools/article-85083">Summer Vacations In Schools: बच्चों के लिए छुट्टियों का ऐलान, स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किए आदेश!</a></p>
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<div></div>
</div>
</div>
<h4 style="text-align:justify;">e-KYC कराना क्यों जरूरी है?</h4>
<p style="text-align:justify;">PM-KISAN योजना के तहत e-KYC अनिवार्य कर दिया गया है। किसान इसे ऑनलाइन घर बैठे या नजदीकी CSC सेंटर जाकर पूरा कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऐसे करें ऑनलाइन e-KYC</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li>PM-KISAN की आधिकारिक वेबसाइट खोलें</li>
<li>Farmers Corner सेक्शन में जाएं</li>
<li>e-KYC विकल्प पर क्लिक करें</li>
<li>आधार नंबर दर्ज करें</li>
<li>आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP को भरें</li>
<li>प्रक्रिया पूरी होने पर e-KYC सफल हो जाएगा</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">अगर OTP नहीं आ रहा है या तकनीकी दिक्कत हो रही है, तो किसान CSC सेंटर जाकर बायोमेट्रिक e-KYC करवा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार किस्त सिर्फ बैंक जानकारी में गलती होने की वजह से रुक जाती है। किसानों को ये बातें जरूर जांच लेनी चाहिए—</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>बैंक खाता आधार से लिंक हो</li>
<li>DBT (Direct Benefit Transfer) सक्रिय हो</li>
<li>IFSC कोड सही दर्ज हो</li>
<li>नाम और अकाउंट नंबर में गलती न हो</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">जरूरत पड़ने पर बैंक शाखा जाकर जानकारी अपडेट करवाई जा सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऐसे चेक करें किस्त का स्टेटस</h4>
<p style="text-align:justify;">किसान घर बैठे अपनी किस्त की स्थिति भी देख सकते हैं—</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>PM-KISAN पोर्टल खोलें</li>
<li>Beneficiary Status विकल्प चुनें</li>
<li>आधार नंबर, मोबाइल नंबर या बैंक अकाउंट नंबर दर्ज करें</li>
<li>स्क्रीन पर किस्त की पूरी जानकारी दिखाई देगी</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">समय रहते करें जरूरी अपडेट</h4>
<div class="no-scrollbar flex min-h-36 flex-nowrap gap-0.5 overflow-auto sm:gap-1 sm:overflow-hidden xl:min-h-44 mt-1 mb-5 not-first:mt-4">
<div class="border-token-border-default relative w-32 shrink-0 overflow-hidden rounded-xl border-[0.5px] md:shrink max-h-64 sm:w-[calc((100%-0.5rem)/3)] rounded-s-xl">
<div class="group/search-image @container/search-image relative rounded-[inherit] h-full w-full">
<div style="text-align:justify;">अगर किसान समय पर e-KYC और बैंक अपडेट नहीं कराते हैं, तो 23वीं किस्त में देरी हो सकती है या भुगतान रुक सकता है। इसलिए किसानों को सलाह दी जा रही है कि जल्द से जल्द सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर लें, ताकि ₹2000 की राशि बिना किसी परेशानी के सीधे खाते में पहुंच सके।</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 16:31:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Guava Grow Guide: अमरूद के पेड़ पर नहीं आ रहे फल-फूल? अपनाएं ये सस्ता देसी उपाय, मिलेगा जबरदस्त फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[आज के समय में बागवानी फसलें किसानों और घरों में गार्डनिंग करने वालों के लिए कमाई और शौक दोनों का बेहतर जरिया बन चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/guava-tree-is-not-producing-fruits-and-flowers-adopt-this/article-85094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/guava-grow-guide.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Guava Grow Guide: आज के समय में बागवानी फसलें किसानों और घरों में गार्डनिंग करने वालों के लिए कमाई और शौक दोनों का बेहतर जरिया बन चुकी हैं। Guava यानी अमरूद की खेती भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इसकी बाजार में सालभर अच्छी मांग रहती है। लेकिन कई लोग शिकायत करते हैं कि पौधा अच्छा बढ़ता है, फिर भी उसमें फूल और फल नहीं आते। अगर आपके अमरूद के पौधे में भी फल-फूल कम आ रहे हैं, तो एक आसान और सस्ता घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्यों नहीं आते अमरूद के पेड़ में फल?</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों में पोषण की कमी, फंगल संक्रमण, कीटों का हमला और खराब मिट्टी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं। कई लोग महंगे रासायनिक खाद और दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन लंबे समय में इससे पौधों को नुकसान भी हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">फिटकरी का इस्तेमाल क्यों माना जाता है फायदेमंद?</h4>
<p style="text-align:justify;">घरेलू इस्तेमाल में आने वाली फिटकरी (Alum) को कई लोग पौधों की देखभाल में भी उपयोग करते हैं। माना जाता है कि इसमें मौजूद गुण मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और कुछ फंगल समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऐसे करें इस्तेमाल</strong><br />1 लीटर पानी लें<br />उसमें फिटकरी का छोटा टुकड़ा घोलें<br />इस पानी को पौधे की जड़ों में डालें<br />10-15 दिन में एक बार उपयोग करें</p>
<h4 style="text-align:justify;">यह उपाय पौधे की ग्रोथ बेहतर करने और मिट्टी को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>कीट और चींटियों से बचाने का देसी तरीका</strong><br />अगर पौधे में कीड़े या चींटियां लग रही हैं, तो हल्के चूने और पानी का घोल बनाकर तनों और आसपास की मिट्टी में छिड़काव किया जा सकता है। इससे कई छोटे कीट दूर रखने में मदद मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमरूद के पौधे की बेहतर देखभाल के लिए जरूरी बातें</strong><br />पौधे को रोज पर्याप्त धूप मिले<br />समय-समय पर छंटाई करें<br />ज्यादा पानी भराव से बचें<br />गोबर खाद या जैविक खाद का इस्तेमाल करें<br />पौधे में रोग दिखने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें<br />ध्यान रखें</p>
<p style="text-align:justify;">फिटकरी और घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में और सही अंतराल पर ही इसका प्रयोग करें।<br />सही देखभाल, पोषण और नियमित निगरानी से अमरूद का पौधा ज्यादा स्वस्थ, हरा-भरा और फलदार बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/guava-grow-guide.jpeg" alt="Guava Grow Guide" width="729" height="407"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:53:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिंडी की फसल में भंगरी रोग: खतरे की घंटी और किसानों के लिए कारगर निदान</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा सहित उत्तर भारत के किसान अब पारंपरिक अनाज की खेती से तौबा कर फल-सब्जी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/bhangri-disease-in-okra-crop-is-alarm-bell-and-effective/article-84867"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/bhindi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong> Bhindi ki Kheti: हरियाणा सहित उत्तर भारत के किसान अब पारंपरिक अनाज की खेती से तौबा कर फल-सब्जी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं। भिंडी जैसी नकदी वाली फसलें अच्छा मुनाफा देती हैं, लेकिन इनमें कीट-रोगों का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। इन दिनों भिंडी की फसलों में 'भंगरी' नामक बीमारी ने किसानों को परेशान कर दिया है। वैज्ञानिक भाषा में इसे येलो वेन मोजैक वायरस कहा जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">यह वायरल रोग फसल को बर्बाद कर देता है, जिससे उपज में 50-90 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। पानीपत, करनाल और सोनीपत जैसे जिलों के किसान इसकी चपेट में हैं, जहां भिंडी की खेती बड़े पैमाने पर होती है। अगर समय रहते सावधानी न बरती गई, तो यह आर्थिक तबाही ला सकता है। भंगरी रोग एक खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो भिंडी के पौधों को जड़ से कमजोर कर देता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी मुख्य रूप से व्हाइट फ्लाई (बेनिसिया टैबेसी) नामक सफेद मक्खी के माध्यम से फैलती है। यह छोटा सा कीट पौधे का रस चूसता है और वायरस को एक पौधे से दूसरे तक पहुंचा देता है। गर्मी और नमी भरी जलवायु में यह कीट तेजी से पनपता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, संक्रमित बीज, खरपतवार और आसपास की अन्य सब्जी फसलें जैसे भिंडी के बाद लगी टमाटर या चचिंडा भी रोग के वाहक बन जाती हैं। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पौधा रोग विशेषज्ञ के मुताबिक यह वायरस पौधे की कोशिकाओं में घुसकर क्लोरोफिल उत्पादन रोक देता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण बाधित हो जाता है। नतीजा- पौधा कमजोर पड़ जाता है और फलन क्षमता घट जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">शुरूआती लक्षण पहचानें</h4>
<p style="text-align:justify;">इस रोग के शुरूआती लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं। पौधे के निचले पत्ते सबसे पहले प्रभावित होते हैं। वे हल्के पीले रंग के हो जाते हैं और उनमें धारियां उभर आती हैं। नसें चमकीली पीली दिखाई देती हैं, जबकि पत्ती का बाकी हिस्सा हरा रहता है। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, पत्तियां मुरझा जाती हैं और कुरकुरी हो जाती हैं। पौधे की बढ़ोतरी रुक जाती है, डंठल पतले हो जाते हैं और फल छोटे, टेढ़े-मेढ़े तथा कम गुणवत्ता वाले बनते हैं। गंभीर मामलों में पूरा पौधा सूख जाता है। किसान भाई ध्यान दें, अगर खेत में 10-15 प्रतिशत पौधे प्रभावित हो जाएं, तो तुरंत कार्रवाई करें। देरी से उपज का 70 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पूरी तरह खत्म करना मुश्किल, पर सावधानी से किया जा सकता है उपचार</h4>
<p style="text-align:justify;">चूंकि यह वायरल रोग है, इसलिए इसे पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। रसायनों से वायरस मरता नहीं, बल्कि वाहक कीट को नियंत्रित करना पड़ता है। रोकथाम ही सबसे बड़ा निदान है। सबसे पहले, प्रमाणित और रोगमुक्त बीज चुनें। हरियाणा के किसान सरकारी कृषि केंद्रों से उपलब्ध हाइब्रिड किस्में जैसे आर्का अनामिका, परमनी या को-402 चुन सकते हैं, जो इस रोग के प्रति सहनशील हैं। बुवाई से पहले बीज को इमिडाक्लोप्रिड के 3 ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित करें। खेत की सफाई पर जोर दें- संक्रमित पौधों को उखाड़कर जला दें। खरपतवारों को नष्ट करें, क्योंकि वे व्हाइट फ्लाई को आश्रय देते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">कीट नियंत्रण के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाएं। जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए नीम आधारित उत्पाद सबसे सुरक्षित हैं। नीम तेल (0.5 प्रतिशत) या नीम साबुन का 300 लीटर पानी में घोल बनाकर सप्ताह में दो बार छिड़काव करें। इससे व्हाइट फ्लाई का प्रजनन रुक जाता है। खेत में पीले और नीले चिपचिपे ट्रैप (1 एकड़ में 50-60) लगाएं। ये ट्रैप कीटों को आकर्षित कर चिपका देते हैं। रासायनिक नियंत्रण जरूरी हो तो इमिडाक्लोप्रिड (कॉन्फिडोर 17.8 एस एल, 0.3 मिली/लीटर) या थायामेथॉक्सम (एक्टारा 25 डब्ल्यू जी, 0.2 ग्राम/लीटर) का इस्तेमाल करें। पहला छिड़काव बुवाई के 20-25 दिन बाद और दूसरा 10 दिन के अंतराल पर करें। </p>
<h4 style="text-align:justify;">दवा छिड़काव के बाद एक सप्ताह तक तोड़ाई करने से बचें</h4>
<p style="text-align:justify;">दवा छिड़काव के बाद कम से कम 7 दिन तक फल तोड़ाई न करें, क्योंकि अवशेष स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। किसानों को ऐसा करने से बचना चाहिए ताकि किसी के भी स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ना हो।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पिछले वर्ष भी हो चुका नुकसान </h4>
<p style="text-align:justify;">भंगरी रोग ने पिछले साल हरियाणा में भिंडी उत्पादकों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। लेकिन सतर्कता से इसे न्यूनतम किया जा सकता है। जैविक और एकीकृत तरीकों से न केवल फसल सुरक्षित रहेगी, बल्कि बाजार में जैविक भिंडी की मांग बढ़ रही है, जो ज्यादा दाम दिलाती है। किसान भाई, बीमारी को हल्के में न लें। समय पर निगरानी और सही उपाय अपनाकर आप अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं। स्वस्थ फसल, समृद्ध खेती-यही हमारा संकल्प हो।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/bhindi.jpg" alt="Bhindi" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/bhangri-disease-in-okra-crop-is-alarm-bell-and-effective/article-84867</link>
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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 14:35:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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