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                <title>आध्यात्मिक - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>3 in 1 MSG Bhandara: ऐसे बेमिसाल वचन, जिनसे यह साफ जाहिर होता है&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/such-incomparable-words-from-which-it-becomes-abundantly-clear/article-83551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/3-in-1-msg-bhandara-26.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर का हर कदम न सिर्फ उनके श्रद्धालुओं/मुरीदों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण कायनात की भलाई के लिए होता है। 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>सच्चे सतगुरु और डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज और सच्चे दाता रहबर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने डेरे के बारे में, साध-संगत और गुरगद्दी के बारे में ऐसे बेमिसाल वचन फरमाए, जिनसे यह साफ जाहिर होता है कि तीनों बॉडियां एक ही रूहानी ज्योत हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां इसी महान परोपकार को थ्री-इन-वन और एमएसजी का नाम देते हैं। वैसे भी रूहानियत का संदेश यह है कि सतगुरु कहीं जाता ही नहीं, वह सदा है, बस चोला बदलता है, ज्योत वही काम करती है।</p>
<h3>18 अप्रैल, 1960 को पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने मानवता का उद्धार करना शुरू किया</h3>
<p>18 अप्रैल, 1960 को सच्चे मुर्शिदे कामिल पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने नूरी चोला बदलकर पूजनीय बेपरवाह शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में मानवता का उद्धार करना शुरू किया और तीसरी बॉडी के बारे में भी वचन फरमाए कि सात साल (1967) बाद तीसरी बॉडी के रूप में आएंगे। गुरगद्दी की बख्शीश के बाद भी पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ”आपां” और ”आपणा” शब्द ही इस्तेमाल करते थे, न कि ”तुम” या ‘हम”! पूजनीय परम पिता जी ने चोला बदलते समय भी पूज्य हजूर पिता जी की छाती पर अपने पावन कर-कमल बार-बार लगाकर वचन फरमाए, ”हम कहीं नहीं चले, तेरे यहाँ (दिल) रहेंगे।”</p>
<p>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने थ्री-इन-वन के महान परोपकार को ”एमएसजी” का रूप दिया है। आप जी फरमाते हैं कि आज भी सब कुछ ”शाह मस्ताना जी, शाह सतनाम जी” ही कर रहे हैं। पूज्य हजूर पिता जी इसी अभेदता को इन शब्दों के माध्यम से भी कलमबद्ध करते हैं:</p>
<h3>”खुद ही सजदा करूं, खुद ही कबूल करूं” | 3 in 1 MSG Bhandara</h3>
<p>इसी तरह, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के वचन पूज्य हजूर पिता जी की दया-मेहर के रूप में स्पष्ट नजर आ रहे हैं। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने यह भी फरमाया कि ”सरसा-नेजिया एक हो जाएगा, संगत ही संगत होगी, थाली फैंकी जाएगी तो थाली नीचे नहीं गिरेगी।” भंडारों के दौरान साध-संगत के इक्ट्ठ से वचन हुबहु पूरे होते देखे जाते हैं।</p>
<p>प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं।यह भी तथ्य हैं कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने पूज्य हजूर पिता जी को गुरगद्दी की बख्शीश से पहले ही स्पष्ट इशारा कर दिया था कि परम पिता जी ही हजूर पिता जी के रूप में काम करेंगे। पूजनीय परम पिता जी को जब यह बताया गया कि श्री गुरुसर मोडिया वाले नंबरदार का लड़का (पूज्य हजूर पिता जी) हर सत्संग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में साध-संगत को लेकर जाता है, तो पूजनीय परम पिता जी ने आप जी से बातचीत करते हुए वचन फरमाए, ”अपना तो फिर काम यही है।’ 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज के बहुत सारे वचन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में पूरे हुए और बहुत सारे वचन पूज्य हजूर पिता जी के रूप में पूरे हो रहे हैं। करोड़ों साध-संगत अपने दाता सतगुरु एमएसजी को थ्री-इन-वन दिवस पर करोड़ों बार सजदा और धन्यवाद करती है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 11:23:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘मन के मते चलो मत कोई,  गुरु कहे करो तुम सोई&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस कलियुग में सत्संग इन्सानियत के लिए जलते हुए भट्ठ में एक संजीवनी के समान है। क्योंकि गमों, दुखों, परेशानियों में इन्सान जल रहे हैं, इनसे बचने का एकमात्र उपाय सत्संग को सुनकर उस पर अमल कमाना है। जिस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/true-spiritual-guide-respected-guru-saint-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan/article-83429"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/saint-dr-msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस कलियुग में सत्संग इन्सानियत के लिए जलते हुए भट्ठ में एक संजीवनी के समान है। क्योंकि गमों, दुखों, परेशानियों में इन्सान जल रहे हैं, इनसे बचने का एकमात्र उपाय सत्संग को सुनकर उस पर अमल कमाना है। जिस तरह जलते हुए शरीर में बर्फ की ठंडक असर करती है उससे सैकड़ों, हजारों गुणा अधिक असर सत्संग में आने से तड़पते हुए जीव व जीवात्माओं पर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं सत्संग में आने के पश्चात ही इन्सान को यह मालूम पड़ता है कि उसके द्वारा कौन सा कार्य किया जाना चाहिए व कौन सा नहीं। जो जीव वचनों को सुनकर मान लिया करते हैं उन पर परमानंद की बरसात होती है, और जो मनमते चलते हैं वो अपने कर्मों की स्वयं ही रूपरेखा तैयार करके खुद ही पूरी जिंदगी उसमें उलझे रहते हैं। सत्संग में आने से ही इन्सान के जन्मों-जन्म के पापकर्म व जीते-जी भी जो कर्म भोगने हैं वो भी पहाड़ से राई में बदल जाया करते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब इन्सान सत्संग को सुनकर उसे माने व वचनों पर अमल करे। जब तक इन्सान वचनों पर अमल नहीं करता तब तक वह खोखला है, बिल्कुल खाली है तथा खुशियों से महरूम रहता है। इसलिए वचन सुनकर उन पर अमल करो, लेकिन मन के कहेअनुसार न चलो।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संत पिछले कितने वर्षों से ही कहते आ रहे हैं कि ‘मन के मते चलो मत कोई, गुरु कहे करो तुम सोई। ये भव में गोते खिलवाए, ये गुरु से बेमुख करवाए’ अर्थात् मन बहुत बुरी बला है। ये इन्सान को इस तरह से गुमराह करता है कि उसकी हिलने तक की मजाल भी नहीं होती। उसको कोई भी जंजीर व बेड़ियां नजर नहीं आती व न कोई जाल होता है, लेकिन मन उसे अपनी गिरफ्त में ऐसा लेता है कि आदमी की उसके चंगुल से निकलने की मजाल तक नहीं होती। उससे निकलने का एकमात्र उपाय है केवल सत्संग। संतों के वचन पर अमल कमाना ही एकमात्र उपाय ऐसा है जिससे आदमी मन के चंगुल से निकल सकता है। लेकिन जब इन्सान का सतगुरु, मौला पर विश्वास न रहे तो उसके लिए सत्संग सुनना या न सुनना एक समान है तथा अगर हर समय उसके मन की तार बजती रहे तो आप समझ लीजिए मन उसका बेड़ा गरक करने वाला है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 10:59:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>‘बुरे विचारों से कमजोर होती है सोचने की शक्ति’</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम जपने से आत्मा बलवान होती है और मन दबता चला जाता है। अगर आप सुमिरन करने का नियम नहीं रखते, सुबह-शाम मालिक को नियमानुसार याद नहीं करते तो आपके मन के विचार आप पर हमेशा हावी रहेंगे। पूज्य गुरु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/negative-thoughts-weaken-the-power-of-thinking/article-83392"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/sirsa-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम जपने से आत्मा बलवान होती है और मन दबता चला जाता है। अगर आप सुमिरन करने का नियम नहीं रखते, सुबह-शाम मालिक को नियमानुसार याद नहीं करते तो आपके मन के विचार आप पर हमेशा हावी रहेंगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंदर जो बुरे विचार आते हैं, वो सब मन की देन हैं और जो अच्छे विचार आते हैं, वो आत्मिक विचार हैं। बुरे विचारों से इन्सान के शरीर पर हर तरह का असर होता है। शारीरिक शक्ति का नाश होता है, दिमाग के सोचने की शक्ति कम हो जाती है और बुरे विचारों का ताना-बाना बुनते रहने से इन्सान का आत्मबल कम होता चला जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन का नियम बनाना चाहिए। जैसे आप सुबह तैयार होते हैं, नाश्ता लेते हैं, पढ़ने जाते हैं, दफ्तर जाते हैं, खेती-बाड़ी आदि काम-धंधे पर जाते हैं। ऐसे ही सुबह उठकर हाथ-मुंह धो लें, ताकि नींद उड़ जाए। अगर आपको यह मुश्किल लगता है तो चलो, लेटे-लेटे ही सुमिरन कर लें। क्योंकि यह सुमिरन बिल्कुल ही न करने से लाख गुणा बेहतर है।</p>
<p style="text-align:justify;">
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप लगातार दो महीने सुबह-शाम 15-15 मिनट सुमिरन करके देख लें, अगर 1-1 घंटा करो तो कहना ही क्या। फिर तो हम भी गारंटी दे सकते हैं कि 100 प्रतिशत आपके अंदर मालिक के नजारे आएंगे ही आएंगे। अगर दो महीनों के घंटों को जोड़ो तो सिर्फ 5 दिन-रात बनते हैं। तो कितना आसान है कि आप अपने अंदर के आत्मबल को कैसे जगा सकते हैं और दुनिया के हर क्षेत्र में आत्मविश्वास अति जरूरी है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संसार का मानना है कि इन्सान अपने दिमाग को 15-20 प्रतिशत तक ही इस्तेमाल में लाता है, जोकि रूहानियत की नजर से भी सच है। जो लोग रिसर्च करते हैं, सारा-सारा दिन या 18-20 घंटे काम करते हैं, वो 15-20 प्रतिशत और आम इन्सान 10-15 प्रतिशत ही अपना दिमाग इस्तेमाल करते हैं। सुपर कम्प्यूटर इसी दिमाग से निकला हुआ छोटा सा अंश है। वैज्ञानिकों ने भी आज माना है कि अगर आप आत्मबल चाहते हैं, तो सुबह-सवेरे 2 से 5 बजे के बीच में एक घंटा ध्यान में जाओ। उससे आपका आत्मबल बढ़ेगा, उस आत्मबल से आप दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे और इसके ज्यादा इस्तेमाल से आप परेशानियों से आजाद होते जाएंगे। इसलिए आत्मबल जागना बहुत ही जरूरी है और आत्मबल सुमिरन से आता है। सुमिरन करने में इतने फायदे हैं कि सारे गिनवाये नहीं जा सकते। आप सुमिरन करके देखें, अभ्यास करें तो आपको मालूम जरूर हो जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 13:12:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रभु की नूरे किरण कण-कण में मौजूद: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जब इंसान अल्लाह-वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम से जुड़ जाता है तो उसके विचारों में तबदीली आती है, उसकी राह बदल जाती है और गुजरे हुए रास्तों को जब वो याद करता है तो वैराग्य आता है कि हे रहबर, मुझे पहले ही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/the-divine-ray-of-the-lord-is-present-in-every-particle-revered-guru-ji/article-83273"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/sirsa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जब इंसान अल्लाह-वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम से जुड़ जाता है तो उसके विचारों में तबदीली आती है, उसकी राह बदल जाती है और गुजरे हुए रास्तों को जब वो याद करता है तो वैराग्य आता है कि हे रहबर, मुझे पहले ही यह रास्ता क्यों नहीं मिला। फिर सतगुरु समझाता है कि तेरे कर्म या कर्मों का सिलसिला जब खत्म होता है, इंसान खुदमुख्त्यारी का इस्तेमाल करता है तो अल्लाह-वाहेगुरु का वो नाम सुनने को मिलता है और सच्ची सत्संग नसीब होती है। फिर वो जीवात्मा कहती है कि हे प्रभु, तेरे प्यार-मोहब्बत को पाकर मुझे समझ आई है कि आपकी ही नूरे-किरण कण-कण, जर्रे-जर्रे में मौजूद है। सब अपने हैं, कोई दूजा नहीं, कोई वैरी-बेगाना तो है ही नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं जिधर नजर मारती हूँ, पलक उठाती हूँ, बस! तू ही तू नजर आता है। हर किसी में तू समाया है और मुझे तेरे बिना कुछ और नहीं भाया। बस तू चाहिए, तू चाहिए रहबर, बस तू चाहिए। तेरे प्यार-मोहब्बत में जो लज्जत है, जो सुकून है, वो कहने-सुनने से परे है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि एक जीवात्मा कहती है कि मेरी पहचान के लिए मेरे शरीर का नाम रखा जाता है और उस नाम से दुनिया पुकारती है, पहचान बनती है। पता नहीं कितने लोग उस नाम को लेते रहते हैं, बस यह होता है कि मुझे बुलाया गया है। पर हे प्रभु, जब तू उस नाम को पुकारता है तो दिलो-दिमाग में ताजगी छा जाती है, एक लज्जत छा जाती है, एक नशा हो जाता है। एहसास होता है कि वास्तव में तू ही बुलाने के काबिल है, पर मैं बोलने के काबिल नहीं थी क्योंकि सतगुरु-दाता जब जीवात्मा को बुलाते हैं, आदमी का नाम लेते हैं तो जीवात्मा को भी खींचते हैं सिर्फ शरीर को नहीं। दुनिया में नाम शरीर की पहचान करते हैं। संत-फकीर नाम के द्वारा आत्मा की पहचान करते हैं और उसे प्यार-मोहब्बत से नवाज देते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:24:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एमएसजी गुरुमंत्र भंडारा को लेकर आई बड़ी जानकारी, जल्द पढ़ें</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। सभी साध-संगत को बड़े हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि दिनांक 25 मार्च 2026 को पावन धाम शाह सतनाम जी- शाह मस्ताना जी धाम, डेरा सच्चा सौदा में एमएसजी गुरुमंत्र भंडारा दिवस अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर भंडारे का शुभ आरंभ प्रात: 9:00 बजे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/anmol-vachan/msg-gurmantar-bhandara-news/article-82651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/msg-gurmantar-bhandara-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> सभी साध-संगत को बड़े हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि दिनांक 25 मार्च 2026 को पावन धाम शाह सतनाम जी- शाह मस्ताना जी धाम, डेरा सच्चा सौदा में एमएसजी गुरुमंत्र भंडारा दिवस अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर भंडारे का शुभ आरंभ प्रात: 9:00 बजे किया जाएगा।</p>
<p>25 मार्च 1973 को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज ने गुरुमंत्र की अनमोल दात बख्शी थी। इसी तरह डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने भी इसी मार्च महीने में गुरुमंत्र की दात प्राप्त की थी। इसलिए देश विदेश की करोड़ों साध-संगत इस पूरे माह को पावन एमएसजी गुरुमंत्र भंडारा माह के रूप में मानवता भलाई के 175 कार्य करके मनाती है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:26:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशा छुड़वाने के लिए, बुराइयां छुड़वाने के लिए सत्संग करते ही रहेंगे: पूज्य गुरू जी</title>
                                    <description><![CDATA[MSG Gurumantra Bhandara Month: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) ने पावन अनमोल वचनों में फरमाया कि ये सब उनका (पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज का) प्रताप है। आपजी ने फरमाया कि क्या उन्होंने अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/we-will-continue-to-conduct-satsang-to-help-people-get-rid-of-addiction-and-evil-respected-guru-ji/article-82113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/msg-16-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>MSG Gurumantra Bhandara Month: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) ने पावन अनमोल वचनों में फरमाया कि ये सब उनका (पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज का) प्रताप है। आपजी ने फरमाया कि क्या उन्होंने अपने शिष्यों की संख्या बढ़ाने के लिए या मुरीदों का नंबर ज्यादा करने के लिए सत्संगें की या कर रहे हैं? जी नहीं, नशा छुड़वाने के लिए, बुराइयां छुड़वाने के लिए, गंदी आदतों को बंदा अपने आप बदल सके उसे जगाने के लिए और बंदे से रब्ब तक का सफर कैसे तय हो सकता है बंदे को ये समझाने के लिए सच्चे दाता रहबर ने सत्संग किए, कर रहे हैं और करते ही रहेंगे।</p>
<p>पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि बुराइयां छोड़कर आज ये जीव जो बैठे हैं, साध-संगत हमारे बराबर में स्क्रीनों पर दिख रही है। ये अपने-अपने धर्मों को मानते हैं क्योंकि सच्चे दाता ने किसी भी धर्म को बदलने के लिए कभी नहीं कहा। यदि आप गरीब हैं तो इसका मतलब ये थोड़े ही है कि आप धर्म बदल लो। धर्म कोई पैसा नहीं देता, यदि कोई देता है तो वो धर्म पवित्रता की तरफ घट रहा है। क्योंकि अगर आप पैसे से किसी बंदे को खरीद कर उसका नाम बदल दोगे या धर्म बदल दोगे।</p>
<h3>”सभी धर्मों की इज्जत करो, सत्कार करो”</h3>
<p>पहले तो वो बंदा ही सही नहीं, क्योंकि उसकी खानदानी वो क्या बताएगा, कि तू किस खानदान का है भाई? सारा कुछ ही बदल दिया। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि अपने धर्म में रहो। अपने धर्म को मानो। ये तो रूहानियत, सूफियत है कि अगर आप गुरु की बात को मानते हो तो यकीन मानो आपको सभी धर्मों की समझ भी आने लग जाएगी। सभी धर्मों की इज्जत करो, सत्कार करो। डेरा सच्चा सौदा में यही सिखाया गया है और यही सिखाया जा रहा है और हमेशा यही सिखाया जाएगा। कोई ऊँच-नीच नहीं होती, कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। सभी से बेग़र्ज प्यार करो।</p>
<p>ये सतगुरु जी ने सिखाया, ये सतगुरु जी ने बताया, क्योंकि जितना उनका गुण गाएं उतना ही थोड़ा है। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत को अंधविश्वासों के प्रति जागरूक करते हुए फरमाया कि सत्संगी को जादू-टोना,ताबीज़, नज़र लगनी, भूत-प्रेत, जिन्न-चुड़ैल, श्याणे/चेले/ओझा/बेगे के चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। आपजी ने फरमाया कि इस धरती पर भूत-प्रेत होते ही नहीं हैं और ना ही कोई नज़र लगती है। खास कर माता-बहनें इन चक्करों में ज्यादा पड़ती हैं। आपजी ने फरमाया कि धर्मों के अनुसार सच्चा व्रत यही है कि 24 घंटे सिर्फ और सिर्फ पानी पर रहो। व्रत खोलने के बाद हल्का भोजन लो, इससे आप शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। इस बात को अब विज्ञान भी मानता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 10:28:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पूज्य गुरु जी की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के महिला उत्थान को 20 सराहनीय अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[International Women’s Day 2026: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji) सिंह जी इन्सां ने अपनी ओजस्वी वाणी में रूहानी सत्संगों के माध्यम से साढ़े सात करोड़ से अधिक लोगों के नशे और बुराइयां छुड़वाई, जिससे नरक की मानिंद हुए घर स्वर्ग बन गए हैं, और खुशियों से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/inspired-by-the-revered-guru-ji-dera-sacha-sauda-launched-20-commendable-initiatives-for-womens-empowerment/article-82076"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/women-work-by-guru-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">International Women’s Day 2026: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji) सिंह जी इन्सां ने अपनी ओजस्वी वाणी में रूहानी सत्संगों के माध्यम से साढ़े सात करोड़ से अधिक लोगों के नशे और बुराइयां छुड़वाई, जिससे नरक की मानिंद हुए घर स्वर्ग बन गए हैं, और खुशियों से भर गए हैं। जिन परिवारों में महिलाएं एक वक्त खून के आंसू रोती थी, पूज्य गुरुजी के सद्प्रयासों की बदौलत आज वो खुशहाल जीवन जी रही हैं। International Women’s Day</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने गाँवों, कस्बों, शहरों और महानगरों में रूहानी सत्संगों के माध्यम से आमजन को कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराइयां त्यागने का संकल्प करवाकर न जाने कितनी ही बेटियों को कोख में मरने से बचाया। पूज्य गुरुजी के बेहतरीन प्रयासों की बदौलत आज अनेक बेटियां शिक्षा, खेल, सेना, पुलिस व प्रशासनिक सेवाओं में बड़े पदों को सुशोभित कर रही हैं और अपनी बेहतरीन कार्यशैली से एक अलग छाप छोड़ रही हैं। पूज्य गुरु जी ने महिला उत्थान के लिए 175 मानवता भलाई कार्यों के तहत अनेक बेमिसाल मुहिम चलार्इं हैं, जो उन्हें संबल प्रदान कर रही हैं। आज महिला दिवस पर आपको रूबरू करवाते हैं इन मुहिमों से:-</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">1. शुभदेवी:- इस मुहिम के तहत पूज्य गुरु जी वेश्यावृत्ति की दलदल में फंसी लड़कियों को इससे बाहर निकालकर उनका उपचार करवाते हैं और अपनी बेटियां बनाकर उनकी अच्छे समृद्ध संपन्न परिवारों के भक्तयोद्धाओं से शादी करवाते हैं और एक पिता के रूप में अपना हर कर्तव्य निभाते हैं, जैसे त्योहार, खुशी के मौके बेटियों को उपहार देना इत्यादि। International Women’s Day</li>
<li style="text-align:justify;">4. जीएफबी गुरु फादर बेटियां:- पूज्य गुरु जी ने इस मुहिम के तहत ऐसी बेटियों को अपनाया, जिन्हें या तो गर्भ में मार दिया जाना था या अपने हाल पर कूड़े के ढेर पर फेंक देना था। ऐसी बच्चियों को पूज्य गुरु जी ने माता-पिता के रूप में अपना नाम दिया और इन बच्चियों को बेहतरीन शिक्षा के साथ खेलों और जीवन के हर नेक क्षेत्र में आगे बढ़ाया, जिससे ये बेटियां आज देश का नाम रोशन कर रही हैं। इसके साथ ही बालिग होने पर पूज्य गुरु जी इनमें से कई बेटियों की शादियां करवार्इं और पिता के रूप में स्वयं कन्यादान किया।</li>
<li style="text-align:justify;">25. आशीर्वाद- मुहिम के तहत पूज्य गुरु जी और डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत गरीब जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादियों में सहयोग देती है, जैसे घरेलू जरूरत का सामान, डबल बैड, बर्तन, सूट, मेज-कुर्सी, अलमारी इत्यादि के साथ यथासंभव शगुन, ताकि इन परिवारों को बेटियां बोझ न लगें और बिना परेशानी के उनकी शादी हो सके और वे खुशी-खुशी अपने ससुराल जा सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">42. अभिशाप मुक्ति:- मुहिम के तहत पूज्य गुरु जी द्वारा आमजन को शादियों में दहेज न लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। पूज्य गुरु जी के पावन सान्निध्य में डेरा सच्चा सौदा में ऐसी हजारों शादियां हो चुकी हैं और ये सिलसिला अनवरत जारी है। पूज्य गुरु जी की इस मुहिम से समाज के गरीब, जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिली है।</li>
<li style="text-align:justify;">44. गर्भ पवित्र:- मुहिम के तहत गर्भवती महिलाओं को सत्संग सुनने, भजन सुमिरन करने, योद्धा शूरवीरों की कहानियां पढ़ने व सुनने के लिए प्रेरित किया जाता है। ताकि उनका बच्चा बड़ा होकर बहादुर और देश का जिम्मेवार नागरिक बने और सद्गुणों से परिपूर्ण जीवन जीए।</li>
<li style="text-align:justify;">46. ज्ञानकली :- समाज में बेटियों की शिक्षा को लेकर कम रूझान को देखते हुए इस मुहिम का आगाज किया गया। इसके तहत माता-पिता और परिजनों को लड़कियों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बनें।</li>
<li style="text-align:justify;">61. जीवनआशा:- इस मुहिम के तहत छोटी उम्र में विधवा हो जाने वाली लड़कियों की शादी करवाई जाती है, ताकि समाज में उसे तिरस्कृत भाव से न देखा जाए और वो अपना जीवन सुखमय जी सके।</li>
<li style="text-align:justify;">63. नई सुबह:- अक्सर देखने में आता है कि तलाक के बाद युवतियां मानसिक परेशानी में फंस जाती हैं और जीवन उन्हें बोझ सा लगने लगता है और ऐसी स्थिति में वे समाज के तानों-उलाहनों के चलते घातक कदम तक उठा लेती हैं। इसी समस्या को समझते हुए इस मुहिम का आगाज किया गया। इसके तहत तलाकशुदा युवतियों की शादी करवाई जाती है, ताकि वो सामान्य जीवन जी सके।</li>
<li style="text-align:justify;">73. कुल का क्राउन :- समाज में ऐसी धारणा थी कि सिर्फ बेटों से ही वंश चलता है। इसी समस्या को देखते हुए पूज्य गुरु जी ने इस मुहिमे का आगाज किया। कुल का क्राउन मुहिम के तहत लड़की शादी करके दुल्हे को अपने घर लेकर जाती है और इस दंपत्ति से जो संतान होती है उसके नाम के साथ लड़की का गौत्र लगता है। इस तरह बेटी से वंश आगे बढ़ता है।</li>
<li style="text-align:justify;">74. लज्जा रक्षा:- मुहिम के तहत डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत द्वारा बेसहारा औरतों की यथासंभव मदद की जाती है, जैसे उन्हें राशन उपलब्ध करवाना, सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिलवाकर आत्मनिर्भर बनाना इत्यादि।</li>
<li style="text-align:justify;">79. सशक्त नारी:- मुहिम के तहत लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि मुश्किल वक्त में वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">92. जननी सत्कार:- मुहिम के तहत डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत द्वारा गरीब गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार दिया जाता है और जरूरत पड़ने पर उपचार भी करवाया जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">94. जननी-शिशु सुरक्षा:- मुहिम के तहत डेरा सच्चा सौदा की ओर से गरीब जच्चा-बच्चा के भरण-पोषण के लिए पौष्टिक आहार दिया जाता है ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।</li>
<li style="text-align:justify;">97. नई किरण:- इस मुहिम के तहत ऐसे परिवार जिनमें बेटे की मृत्यु के पश्चात विधवा बहु रह जाती है तो परिवार उस बहू को बेटी बनाकर उसकी शादी करवाता है जिससे वो अपना जीवन खुशहाली में जी सके।</li>
<li style="text-align:justify;">105. उड़ान आत्मबल की:- मुहिम के तहत ऐसी लड़कियां, जिनके ऊपर रंजिशवश तेजाब डाल दिया गया और उनका चेहरा खराब होने से शादी में दिक्कत आती है, उनका उपचार करवाया जाता है और उनकी शादी करवाई जाती है ताकि वे भी समाज का अभिन्न हिस्सा बनकर जीवन जी सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">106. उम्मीद से भी आगे : मुहिम के तहत दुराचार पीड़ित महिलाओं का समुचित उपचार करवाया जाता है और उनकी भक्त योद्धाओं से शादी करवाई जाती है ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">107. बे गम सफर :- कई बार बेटी के शारीरिक रूप से अपंग, फुलवैरी, हकलाने जैसी समस्याओं से ग्रस्त होने पर परिवार के सामने मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं और इन बेटियों की शादी में भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को समझते हुए इस मुहिम का आगाज किया गया, जिसके तहत ऐसी बेटियों की शादी समृद्ध-संपन्न परिवारों से संबंध रखने वाले भक्त योद्धाओं से करवाई जाती है ताकि वे बेटियां हीन भावना से बाहर निकलकर खुशहाल जीवन जीएं।</li>
<li style="text-align:justify;">123. डेप्थ :- इस मुहिम के तहत चरस, हेरोइन, स्मैक, चिट्टा सहित अन्य भयानक नशों की गिरफ्त में फंसी युवतियों का नशा छुड़वाया जाता है।]</li>
<li style="text-align:justify;">124. सेफ :- इस मुहिम के तहत नशा छोड़ने वाली युवतियों को काजू, बादाम सहित पौष्टिक आहार की किटें भी दी जाती हैं ताकि ऐसी युवतियां जल्दी स्वस्थ होकर समाज में सुखमय जीवन जी सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">164 : इस मुहिम के तहत अनाथ, जरूरतमंद, बुजुर्ग व विधवा बहनें जो बेसहारा हैं, उनको गोद लेकर उनकी सेवा, संभाल की जाती है, जैसे तनख्वाह पर उनकी सेवा के लिए सेवादार रखा जाता है और जरूरतानुसार ब्लॉक के साथ मिलकर उन्हें घर बनाकर दिया जाता है। International Women’s Day</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 09:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होली पर पूज्य गुरु जी के वचन</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि आज होली है सबको बहुत-बहुत मुबारक हो। होली में वो रंग जिससे आपकी कुलें रंग जाए, वो रंग जो तमाम बदरंगों को दूर कर दे, वो रंग जो काल-महाकाल के उतारने पर भी उतरे ना, वो रंग जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/respected-guru-ji-words-on-the-festival-of-holi/article-81948"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/holi-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि आज होली है सबको बहुत-बहुत मुबारक हो। होली में वो रंग जिससे आपकी कुलें रंग जाए, वो रंग जो तमाम बदरंगों को दूर कर दे, वो रंग जो काल-महाकाल के उतारने पर भी उतरे ना, वो रंग जो खुशियों से लबरेज कर दे, वो रंग जो प्यार मोहब्बत से मालामाल कर दे, वो सतगुरु, अल्लाह, वाहेगुरु का रंग आप पर चढ़ता जाए, बदरंग दूर होता जाए ये मालिक से दुआएं करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने फरमाया आमतौर पर ये सुना हमने जब होली आती है तो बड़ा शोर मचता है कि भई पानी की बर्बादी ना करो। पर कभी ध्यान दिया है कि शराब बनाने में कितना पानी प्रयोग हो रहा है? चमड़ा, जिससे जूते, बैग वगैरह बनाते हो, उसको धोने में, उसको साफ करने में कितना पानी बर्बाद हो रहा है? और भी कई फैक्टरियों में पानी बर्बाद होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तो कभी उस तरफ किसी का ध्यान गया? जाना चाहिए, सिर्फ एक हमारा त्यौहार है होली, हम नहीं कहते कि उसमें पानी बर्बाद करो, पर अगर थोड़ा सा पानी उसमें आप प्रयोग में लाएं तो त्यौहार भी मन जाए और पानी की बर्बादी भी ना हो। पर शोर उसी दिन क्यों मचता है? आम दिनों में क्यों नहीं बात उठती? कि भई शराब से इतना पानी बर्बाद हो रहा है, चमड़ा धोने में इतना पानी बर्बाद हो रहा है, फैक्टरियों में इतना पानी बर्बाद हो रहा है। कोई उठता है इस बारे में सोचता है। हर इन्सान को सोचना चाहिए, तभी तो समाज और देश का भला होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हर इन्सान समाज में से उठेगा, जागेगा तभी देश का भला होना है और तभी देश के जो राजा हैं वो आपका साथ दे पाएंगे। वो कितना भी कुछ करते फिरें, अगर आप साथ नहीं देते तो सुधार संभव नहीं, पानी की बर्बादी हो गई, जनसंख्या का विस्फोट हो गया, या यूं कह लीजिये बिजली की बर्बादी हो गई, ये तो आपके हाथ में है ना जी, कमरे से निकलते हैं बल्ब जल रहे हैं, एसी चलता छोड़ गए, कि आऊंगा तो कमरा बिल्कुल ठंडा मिलना चाहिए। पंखा चलता छोड़ गए, आपको लगता है कि छोटी सी चीज है, जी नहीं, ये बहुत बड़ी बर्बादी कर रहे हैं आप। क्या हर्ज कि अगर आप बंद करके जाएं कमरे की सारी लाइटें। जब आपने 12 घंटे, 8 घंटे बाहर रहना है। आप दफ्तर जा रहे हैं, आप खेत में जा रहे हैं, कॉलेज में जा रहे हैं, कहीं भी जा रहे हैं तो उस समय आपके घर में कोई नहीं है, आपके कमरे में कोई नहीं है, कम से कम उसकी लाइटें, पंखे, एसी जो भी आप चलाते हैं, वो तो बंद होने चाहिए। कौन इस तरफ ध्यान देता है। कौन माथापच्ची करे।</p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर ये सुना हमने जब होली आती है तो बड़ा शोर मचता है कि भई पानी की बर्बादी ना करो। पर कभी ध्यान दिया है कि शराब बनाने में कितना पानी प्रयोग हो रहा है? चमड़ा, जिससे जूते, बैग वगैरह बनाते हो, उसको धोने में, उसको साफ करने में कितना पानी बर्बाद हो रहा है? और भी कई फैक्टरियों में पानी बर्बाद होता है। तो कभी उस तरफ किसी का ध्यान गया? जाना चाहिए, सिर्फ एक हमारा त्यौहार है होली, हम नहीं कहते कि उसमें पानी बर्बाद करो, पर अगर थोड़ा सा पानी उसमें आप प्रयोग में लाएं तो त्यौहार भी मन जाए और पानी की बर्बादी भी ना हो। पर शोर उसी दिन क्यों मचता है? आम दिनों में क्यों नहंी बात उठती? कि भई शराब से इतना पानी बर्बाद हो रहा है, चमड़ा धोने में इतना पानी बर्बाद हो रहा है, फैक्टरियों में इतना पानी बर्बाद हो रहा है। कोई उठता है इस बारे में सोचता है। हर इन्सान को सोचना चाहिए, तभी तो समाज और देश का भला होगा। आपको बता दें कि पूज्य गुरु जी के ये वचन 7 मार्च 2023 के है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 09:34:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;हर व्यक्ति यहाँ का अधिकारी नहीं, यहाँ उसी को स्थान मिलता है, जिसे ऊपर से हुक्म होता है’&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: शाम को जुलूस की वापसी पर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने स्वयं गेट के बाहर खड़े होकर आप जी का और शहनशाही जुलूस का स्वागत किया और साध-संगत के बीच खड़े होकर यह वचन भी फरमाया कि हरबंस सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/only-those-who-receive-orders-from-above-are-granted-a-place-here/article-81750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-mahroom1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: शाम को जुलूस की वापसी पर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने स्वयं गेट के बाहर खड़े होकर आप जी का और शहनशाही जुलूस का स्वागत किया और साध-संगत के बीच खड़े होकर यह वचन भी फरमाया कि हरबंस सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) को आज ‘आत्मा से परमात्मा’ कर दिया है। यह इनकी बहुत बड़ी कुर्बानी है।’ MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी को नए-नए नोटों के हार पहनाकर पूजनीय बेपरवाह साईं जी स्वयं अपने साथ तेरावास में लेकर गए। तीन मंजिला तेरावास पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने आप जी की ही हवेली के मलबे अर्थात ईंटें, लकड़ी-बालों, गार्डरों आदि का उपयोग कर और स्वयं मिस्त्रियों के पास खड़े रहकर अपने निर्देशन में पूरी मजबूती से बनवाया था। पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने 28 फरवरी 1960 को जुलूस के बाद सुंदर तेरावास आप जी को उपहार स्वरूप भेंट की और इस संबंधी वचन फरमाए, ‘सतगुरु के हुक्म से यह गोल तेरावास बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सतनाम सिंह जी को पुरस्कार स्वरूप दी गई है।’ साथ ही फिर से स्पष्ट करते हुए फरमाया, ‘सतनाम सिंह जी का नाम पहले सरदार हरबंस सिंह जी था। यह ईश्वरी शक्ति श्री जलालआणा साहिब, जिला सरसा की रहने वाली है। राम-नाम को हासिल करने के लिए इन्होंने अपना घर-मकान तोड़ा। इसलिए यह तेरावास इन्हें इनाम में मिला है। हर व्यक्ति यहाँ स्थान लेने का अधिकारी नहीं है और यहाँ उसी को स्थान मिलता है, जिसे ऊपर से हुक्म होता है।’ MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 09:38:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;बहुत बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है&amp;#8221;!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) से घर-बार तुड़वाकर और सारा सामान साध-संगत में बंटवा देने के कुछ ही दिनों बाद पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा, सरसा (हरि.) के पंडाल में तीन मंजिला एक अत्यंत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/every-child-in-the-city-should-also-know-what-a-huge-sacrifice-satnam-singh-ji-has-made/article-81711"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-purpul-11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) से घर-बार तुड़वाकर और सारा सामान साध-संगत में बंटवा देने के कुछ ही दिनों बाद पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा, सरसा (हरि.) के पंडाल में तीन मंजिला एक अत्यंत सुंदर गोल तेरावास तैयार करवाया। इस तेरावास के निर्माण में आप जी द्वारा लाया गया सारा सामान, जैसे ईंटें, गार्डर आदि का ही उपयोग किया गया। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह जी ने विशेष संदेश भेजकर पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा से साध-संगत को 28 फरवरी 1960 के दिन डेरा सच्चा सौदा, सरसा बुला लिया। इसके बाद उसी दिन पूजनीय बेपरवाह जी के हुक्मानुसार आप जी को सिर से पांव तक सौ-सौ रुपये के नोटों के हार पहनाए गए। एक अत्यंत सुंदर बिना छत वाली जीप मंगवाई गई, जो चारों ओर से खूब सजाई गई थी।</p>
<h3>”सतनाम सिंह जी बहुत ही बहादुर हैं। इन्होंने इस मस्ताना गरीब के हुक्म को माना है”</h3>
<p>उस गाड़ी के अंदर एक सजी हुई आकर्षक कुर्सी पर आप जी को बिठाकर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने साध-संगत के मुखातिब होकर फरमाया, ”सतनाम सिंह जी बहुत ही बहादुर हैं। इन्होंने इस मस्ताना गरीब के हुक्म को माना है और बहुत बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है। आज से हमने इनको अपना वारिस, कुल मालिक बना दिया है। सारे शहर की हर गली व मोहल्ले में शोभा यात्रा निकालनी है, ताकि शहर के बच्चे-बच्चे को पता चल जाए कि सतनाम सिंह जी ने गरीब मस्ताने के लिए इतनी जबरदस्त कुर्बानी दी है और इनको सच्चे सौदे का वारिस बना दिया गया है।”</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह जी ने डेरे में आई हुई समस्त साध-संगत को शोभा यात्रा के साथ जाने की आज्ञा देते हुए वचन फरमाया, ”भाई, इस यात्रा में ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा जोर-शोर से लगाते हुए यह भी बताना है कि आज से साईं सावन शाह जी के हुक्म से सरदार सतनाम सिंह जी श्री जलालआणा साहिब वालों को डेरा सच्चा सौदा का गद्दीनशीन बना दिया गया है।”  जारी… MSG Maha Rahmokaram Month</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 09:34:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: पूजनीय सतगुरु जी की &amp;#8216;अनूठी लीला&amp;#8217;!</title>
                                    <description><![CDATA[सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहले वाला नाम) ने शनिवार रात डेरे के बाहर रखे सामान की निगरानी भी की। अगले दिन रविवार को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सत्संग फरमाया। सत्संग में दूर-दूर से साध-संगत बड़ी संख्या में उपस्थित हुई। पूजनीय बेपरवाह शाह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/unique-leela-of-revered-satguru-ji/article-81676"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-feild2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहले वाला नाम) ने शनिवार रात डेरे के बाहर रखे सामान की निगरानी भी की। अगले दिन रविवार को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सत्संग फरमाया। सत्संग में दूर-दूर से साध-संगत बड़ी संख्या में उपस्थित हुई। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के आदेशानुसार आपजी ने वह समस्त सामान अपने पवित्र कर-कमलों से एक-एक करके साध-संगत में वितरित कर दिया। किसी को मोटरसाइकिल दी गई, किसी को ऊंट की काठी, किसी को पानी की टंकी। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार दरियां, खेस, कंबल, गद्दे, सिरहाने, बिस्तर, कोट, जर्सियां, स्वेटर, ट्रंक-पेटियां, संदूक तथा घरेलू और कृषि कार्य में उपयोगी अन्य सामग्री भी प्रेमपूर्वक बांट दी। यह दृश्य अत्यंत भावविभोर कर देने वाला था। अपने पूजनीय सतगुरु जी की इस अनूठी लीला को उनका समस्त परिवार श्रद्धा और प्रेमभाव से निहारता रहा। अपने प्यारे सतगुरु पूजनीय बेपरवाह जी के आदेश पर अपना सर्वस्व अर्पित कर वे उनकी असीम कृपा के अधिकारी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इस महान बलिदान को देखकर पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज अत्यंत प्रसन्न हुए और करुणा से परिपूर्ण वचन फरमाए, ‘सरदार हरबंस सिंह जी ने अपने सतगुरु के नाम पर इतनी बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। इसके उपरांत पूजनीय बेपरवाह जी ने एक दर्जी से आप जी के लिए एक अत्यंत सुंदर कोट मंगवाया और स्वयं अपने हाथों से पहनाया। सतगुरु जी ने फरमाया ‘देखो भाई! सरदार हरबंस सिंह जी कितने सुंदर लगते हैं…’ जारी…..MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 09:43:46 +0530</pubDate>
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                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;किसी की भी आँख से एक आँसू निकला तो&amp;#8230;&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) के घर का सारा सामान रात के समय डेरा से बाहर रखवा दिया गया। साईं जी अपने भावी गद्दीनशीन की कड़ी परीक्षा ले रहे थे। सर्दी का मौसम था, हल्की बूंदाबांदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/it-is-impossible-to-find-such-an-example-of-obedience-to-the-beloved-satguru-ji/article-81639"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) के घर का सारा सामान रात के समय डेरा से बाहर रखवा दिया गया। साईं जी अपने भावी गद्दीनशीन की कड़ी परीक्षा ले रहे थे। सर्दी का मौसम था, हल्की बूंदाबांदी और ठंडी हवाएँ चल रही थीं। ऐसे में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूजनीय माता जी सहित पूरे परिवार ने पूरी रात सामान की निगरानी के लिए खुले आसमान के नीचे बिताई। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<h3>प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव</h3>
<p>अपने प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव है। परीक्षा और सख्त हो गई। सुबह सूरज निकलने के समय पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने तेरावास से बाहर आते ही पूछा, ”भाई श्री जलालआणा साहिब वाले सरदार हरबंस सिंह जी कहाँ हैं?” साध-संगत ने बताया, ”साईं जी, वे तो आपजी के हुक्मानुसार अपने सामान के पास बाहर बैठे हैं।”</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने आप जी को अपने पास बुलाकर फरमाया, ”भाई, यह सामान किसका है?” पूरा परिवार अपने प्यारे सतगुरु जी के चरणों में हाथ जोड़कर इस अलौकिक लीला को देख रहा था। सभी ने नम्रता से विनती की, ”साईं जी, यह सब आपका ही है।” तब पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने हुक्म फरमाया, ”यदि पूरे परिवार में से किसी की भी आँख से एक आँसू निकला तो सतगुरु इस सामान को स्वीकार नहीं करेंगे।”<br />
<strong>क्रमश:  स्रोत: भाग-2 सच्चे रूहानी रहबर | MSG Maha Rahmokaram Month</strong></p>
</div>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 09:20:32 +0530</pubDate>
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