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                <title>अध्यात्म - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी फरमाते हैं... इस संसार में कौन लोग भाग्यशाली होते हैं!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस संसार में वो लोग भाग्यशाली हैं, जो संतों की बात सुनकर उस पर अमल कर लिया करते हैं। आज मनमते लोग अपने-अपने काम-धंधों में लगे हुए हैं और अपनी ही वजह से दु:खी हैं। दूसरों को दोष देना सही नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-says-who-are-the-lucky/article-88733"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan)फरमाते हैं कि इस संसार में वो लोग भाग्यशाली हैं, जो संतों की बात सुनकर उस पर अमल कर लिया करते हैं। आज मनमते लोग अपने-अपने काम-धंधों में लगे हुए हैं और अपनी ही वजह से दु:खी हैं। दूसरों को दोष देना सही नहीं है। आप कोई ऐसे कर्म कर बैठते हैं, कार्य में लीन हो जाते हैं, जो गुनाह बन जाता है और जब उसका फल भुगतना पड़ता है तब आप सोचते हैं कि मैंने यह कर्म नहीं किया, मैंने तो ऐसा सोचकर नहीं किया था। आपके सोचने से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि आपने कैसा कर्म किया है, यह देखने वाली बात है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए इन्सान को बुरे कर्म नहीं करने चाहिए। आप जी फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर समझाते हैं, माफ करते हैं लेकिन आगे तो अल्लाह, राम के हाथ में होता है। संत ने तो दुआ करनी होती है, वो कबूल  करता है या नहीं, यह उसकी मर्जी है। इसलिए आप उस परमपिता, परमात्मा का सुमिरन करते रहो। अपने आपको बुराइयों से बचाकर रखो। अगर बुराई के हाथों में अपना दामन दे दिया तो तड़पने के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप जानते हैं कि अच्छाई क्या है और बुराई क्या है। इसलिए जितना हो सके उतना बुराई से दूर रहो और यह संभव है क्योंकि हमारे संस्कार ऐसे ही हैं। हम एक धार्मिक देश में रहते हैं। यहां धर्म का लालन-पालन होता है। इसलिए और कुछ नहीं तो संस्कारों का तो पता चलता ही है। इसलिए बुराई से दूर रहो।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को इस तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए कि कौन, कैसा कर रहा है? इससे आपको क्या मतलब? बस, आप अपने आप को सुधार कर रखो। जो अपनी जगह पर सही है वो ही मालिक की खुशियां प्राप्त करता है। इस संसार से सभी ने एक दिन जाना है। जो अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम लेकर जाते हैं वो दोनों जहान में अमर हो जाते हैं और जो पाप-कर्म करके जाते हैं उनका कोई नाम तक लेना पसंद नहीं करता। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 09:15:15 +0530</pubDate>
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                <title>Anmol Vachan: ये काम करने से आपके जन्मों-जन्मों के पाप, मालिक खत्म कर सकते हैं!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि बार-बार गलती करना शैतानियत का काम है, पशुपन है। आप से कोई भूल हो गई, गलत सोच दिमाग में आ जाए तो सुमिरन करो भक्ति करो, वचनों में अगर पहली बार गलती हुई है तो साध-संगत के सामने बेझिझक माफी लें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-by-doing-these-things-you-can-eliminate-the/article-88681"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/naamcharcha2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि बार-बार गलती करना शैतानियत का काम है, पशुपन है। आप से कोई भूल हो गई, गलत सोच दिमाग में आ जाए तो सुमिरन करो भक्ति करो, वचनों में अगर पहली बार गलती हुई है तो साध-संगत के सामने बेझिझक माफी लें। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर एक बार अनजाने में गलती हो जाती है तो उसकी माफी जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि शर्माने-शर्माने में सारी जिंदगी खराब और सारी खुशियां बर्बाद। परम पिता परमात्मा से इन्सान कोई बात छुपा नहीं सकता, इसलिए अच्छे कर्म करो, बुरे कर्म न करो। नेक कर्म करो ताकि मालिक की दया मेहर, रहमत के काबिल आप बनते चले जाएं। उसकी वो तमाम खुशियां हासिल करें जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">वो तमाम लज्जतें मिलें, तमाम आनंद मिले, यह संभव है अगर आप मालिक के नाम का जाप करते हैं, परमात्मा की भक्ति-इबादत करते हैं। तो आपके जन्मों-जन्मों के पाप, मालिक खत्म कर सकते हैं। इसलिए भावना से, लगन से, बिना दिखावे के उस परमपिता परमात्मा का शुक्राना करो जो सारी खुशियां देने वाला है। </p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि अहंकार न करो, खुदी न करो, उसकी रहमतों को, दातों को सिर माथे लगाओ, लेकिन उस दाता को कभी भूलो न जिसकी सब दातें हैं। इसके लिए सत्संग में आना, सुनना, अमल करना अति जरूरी है। तभी इन्सान को वो तमाम खुशियां मिलती हैं, बरकतें मिलती हैं, या यूं कहें कि वो खुशियां, बरकतें बरकरार रहती हैं, अगर इन्सान सत्संग में आता है सुनता है और वचनों पर अमल कमाता है, तो कोई भी किसी भी तरह की कमी अंदर बाहर नहीं रहा करती। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 09:12:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Anmol Vachan: गुरु-संत गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियों से मुक्ति का रास्ता बताने वाले गाईड होते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर उन्हें कहा जाता है जो इन्सान को सच से जोड़ देते हैं, मालिक का पैगाम जन-जन तक पहुंचाते हैं, उस प्रभु के संदेश की चर्चा करते रहते हैं, जिससे आत्मा, परमपिता परमात्मा से मिल जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-guru-saints-are-guides-who-show-the-path-to/article-88601"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर उन्हें कहा जाता है जो इन्सान को सच से जोड़ देते हैं, मालिक का पैगाम जन-जन तक पहुंचाते हैं, उस प्रभु के संदेश की चर्चा करते रहते हैं, जिससे आत्मा, परमपिता परमात्मा से मिल जाए। गुरु, मुर्शिद-कामिल, संत वो गाईड होते हैं, जो जीते-जी गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियों से मुक्ति का रास्ता बताते हैं और मरणोपरांत आवागमन से कैसे आत्मा मुक्त हो, ये तरीका समझाते हैं। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संतों का काम कोई मेला, तमाशा करना नहीं होता, बल्कि उनके हर कार्य में हर किसी का भला छुपा होता है। उनका कोई निजी मकसद नहीं होता कि वो खुद के लिए कुछ बनाएं। ‘तरूवर फल नहीं खात है, सरवर पीव न नीर। परमार्थ के कारणे संतन भयो शरीर।।’ जिस तरह पेड़-पौधों पर जितने भी फल लग जाएं, वो फल खुद नहीं खाते। समुद्र, नदियां कभी अपना पानी आप नहीं पीते। इसलिए संत, पीर-फकीर दुनिया के लिए आते हैं। उनका अपना निजी मकसद नहीं होता। उनका हर कर्म, हर किसी के भले के लिए होता है। दुआ के लिए हाथ उठते हैं, दुआ के लिए अंदर सोच चलती है और दुआ के लिए ही वो बने होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि जिस तरह आप घर के मुखिया हैं, तो आपको घर का फिक्र होता है, बाल-बच्चे, परिवार का फिक्र होता है। उसके लिए आप कितना कुछ करते रहते हैं। उसी तरह संत, पीर-फकीर पूरी सृष्टि के लिए आते हैं। उनको सारे समाज का, सारी सृष्टि का फिक्र रहता है, क्योंकि भगवान की तरफ से उनकी यह ड्यूटी होती है कि पूरी सृष्टि में तालमेल बना रहे और इन्सान के रूप में जो आत्मा इस धरती पे है, वो परमपिता परमात्मा से मिल जाए। इसके लिए संत सत्संग करते हैं, हर कर्म करते हैं, जिससे इन्सान बुराई छोड़कर मालिक की तरफ लग जाए और खुशियों से मालामाल हो जाए। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 09:15:18 +0530</pubDate>
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                <title>Anmol Vachan: आत्मबल, रूहानी शक्ति पाने के लिए एक ही जगह है!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि एक राम-नाम ही ऐसी ताकत है, जिसका जाप करने से इन्सान के अंदर आत्मबल आता है, जिसके द्वारा इन्सान बड़े से बड़े काम में भी परेशान नहीं होता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-there-is-only-one-place-to-get-self-confidence/article-88550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/budharwali-naamcharcha-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को भुलाए बैठा है। उसको भूलने से इन्सान के अंदर गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियां बढ़ती जाती हैं और इन्सान आत्मिक कमजोरी की वजह से हमेशा दु:खी व परेशान रहने लगता है। जिनके अंदर आत्मिक कमजोरी होती है, कोई भी बात उन्हें सहन नहीं हो पाती। बात-बात पे तुनक मिजाज, बात-बात पे गुस्सा करना आम बात हो जाती है। एक राम-नाम ही ऐसी ताकत है, जिसका जाप करने से इन्सान के अंदर आत्मबल आता है, जिसके द्वारा इन्सान बड़े से बड़े काम में भी परेशान नहीं होता। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंदर जब आत्मिक कमजोरी आ जाती है, तो लोग बेवजह ही उलझे रहते हैं, बिना वजह लड़ते रहते हैं। आप जी फरमाते हैं कि आत्मबल, रूहानी शक्ति पाने के लिए सत्संग ही एक ऐसी जगह है, जहां एक अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब का नाम लिया जाता है,  एक मालिक की चर्चा होती है, इन्सान वहां आकर बैठे, तो उसे पता चलता है कि सब कुछ उसके अंदर है, फिर भी वो कंगाल है। जो ब्रह्मांड में है, वो इन्सान के शरीर में है, जो राम का नाम जपेगा, वही सब कुछ हासिल कर सकता है। उसे ही सब कुछ मिलता है, वरना जैसे लोग आते हैं, वैसे ही वापिस चले जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खाली हाथ आए, खाली हाथ लौट जाते हैं, लेकिन जो लोग सत्संग सुनते हैं, राम-नाम का जाप करते हैं, भक्ति करते हैं, वो ही उस परमात्मा की खुशियां हासिल करते हैं और वो मालिक के रहमो-कर्म को हासिल करके तमाम खुशियां पाकर इस कलियुग, मृतलोक में भी परमानन्द की प्राप्ति कर लिया करते हैं। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 09:22:51 +0530</pubDate>
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                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी फरमाते हैं... खुशियों से मालामाल होने का जबरदस्त तरीका!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दूसरों की गलतियां देखने की बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों की तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनकी गलतियां देखता है, जबकि उसे चाहिए कि वह अपने अंदर निगाह मारकर देखे। अगर इन्सान दूसरों की बुराई करने की बजाय अपने बुरे विचारों को त्याग दे, तो मालिक जरूर उसे खुशियों से मालामाल कर देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-says-that-there-is-a/article-88506"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan)फरमाते हैं कि दूसरों की गलतियां देखने की बजाय इन्सान को अपने अंदर निगाह जरूर मारनी चाहिए। इन्सान दूसरों की तरफ तो हर समय निगाह मारता है और उनकी गलतियां देखता है, जबकि उसे चाहिए कि वह अपने अंदर निगाह मारकर देखे। अगर इन्सान दूसरों की बुराई करने की बजाय अपने बुरे विचारों को त्याग दे, तो मालिक जरूर उसे खुशियों से मालामाल कर देता है। Anmol Vachan</p>
<p>आप जी फरमाते हैं कि बुराई आपको हमेशा मुश्किलों, बीमारियों, टेंशन आदि की ओर ले जाने का काम करती है। भक्तजनों को चाहिए कि वे अपनी हर बुरी आदत को त्यागें तथा मालिक से नाता जोड़ें। मालिक को प्राप्त करने के लिए भक्त अपनी हर प्रिय वस्तु को छोड़ देता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ईश्वर का नाम सुखों का खजाना है। इन्सान में इतनी ताकत है कि वह सही तरीके से ईश्वर का नाम सुमिरन कर स्वयं इन्सान से भगवान बन सकता है और यह ताकत प्रत्येक व्यक्ति के पास है। आवश्यकता इस बात की है कि वह अपनी इस रूहानी ताकत को पहचाने और ईश्वर सुमिरन में अपना ध्यान लगाए। </p>
<p>आप जी फरमाते हैं कि मनुष्य को रोटी खाने में तो मेहनत करनी पड़ती है, जबकि सुमिरन करने के लिए तो कुछ भी करने की जरूरत नहीं होती। मन में केवल विचार आएं और जीभा को राम की तरफ हिलाएं, यही पर्याप्त है। यह नहीं हो सकता तो केवल ख्यालों से ही सुमिरन करें तो भी उत्तम है। हर भक्त को चाहिए कि वह बुराइयों को छोड़े, इसके लिए दृढ़ संकल्प की जरूरत है। एक दिन आएगा जब ईश्वर के नाम, सुमिरन से ही मनुष्य के सभी दु:ख दूर होकर वह खुशियों से मालामाल हो जाएगा। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 09:08:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Anmol Vachan: जब आप ये 'काम' करते हैं तो मालिक आपका भला जरूर करता है</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि खुद की वो बुरी आदतें, परेशानियां इस जन्म की हो सकती हैं, जन्म-जन्म के पाप-कर्म की हो सकती हैं। इन परेशानियों से अगर इन्सान बचना चाहे, तो वह अपने आत्म-विश्वास को बुलंद करे।  आत्मविश्वास अगर आपके अंदर है, तो आप अपने अंदर की तमाम बुरी आदतों, परेशानियों को पल में दूर कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-when-you-do-this-work-the-master-definitely/article-88452"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/nalagarg.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान इस संसार में अपने कर्मों की वजह से दु:खी, परेशान रहता है। खुद के पाप-कर्म, खुद की बुराइयां बढ़ती जाती हैं, तो इन्सान के दु:ख-परेशानियों में बढ़ोत्तरी होती चली जाती है। खुद की वो बुरी आदतें, परेशानियां इस जन्म की हो सकती हैं, जन्म-जन्म के पाप-कर्म की हो सकती हैं। इन परेशानियों से अगर इन्सान बचना चाहे, तो वह अपने आत्म-विश्वास को बुलंद करे। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आत्मविश्वास अगर आपके अंदर है, तो आप अपने अंदर की तमाम बुरी आदतों, परेशानियों को पल में दूर कर सकते हैं। आत्मविश्वास सबसे जल्दी अगर बढ़ता है, तो उसका एकमात्र उपाय सुमिरन है, भक्ति-इबादत है।  जब आप सुमिरन करेंगे, तो आपके अदंर सहनशक्ति बढ़ेगी। अगर सहनशक्ति बढ़ेगी, तो आप अंदर की बुराइयों पर जीत हासिल कर सकेंगे। कोई आपको बुरा कहता है, गाली देता है, तो सहनशक्ति बढ़ने से ही आप पर उसका असर नहीं होगा। वरना तो यूं लगता है जैसे नंगी तारों को छू लिया हो। जरा-सी बात किसी को कह दो, तो वह तमतमा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुस्से में बुरा हाल हो जाता है, क्योंकि आज आत्म-विश्वास किसी के अंदर है ही नहीं। उनके अंदर जरूर है, जिनको अपने सतगुरु, मौला पर दृढ़ विश्वास है। सुमिरन करते हैं, मां-बाप के अच्छे संस्कार हैं। उनके अंदर यह भावना रहती है कि वो अपने राम, अल्लाह-मौला के हुकमानुसार मालिक की भक्ति-इबादत करते हुए सबका भला मांगते रहते हैं। जब आप सबका भला मांगते हैं, तो मालिक आपका भला जरूर करता है, क्योंकि जैसी आपकी भावना है, वैसा आपको फल जरूर मिलेगा। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:08:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Anmol Vachan: अपनी हर जायज मांग पूरी करने के लिए ये काम करना जरुरी!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आमतौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करुंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना है, तो मालिक आपकी जायज मांग सुनते भी रहेंगे और पूरी भी करते रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-it-is-necessary-to-do-this-work-to/article-88279"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/satsang.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आमतौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करुंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना है, तो मालिक आपकी जायज मांग सुनते भी रहेंगे और पूरी भी करते रहेंगे। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हमेशा अपने दिल में ये श्रद्धा-भावना बैठा कर रखनी चाहिए कि मालिक का रहमो-कर्म तो बरसेगा ही बरसेगा। जब लोग चहूं ओर मालिक का रहमो-कर्म बरसते देख रहे हैं, तो नाम लेवा जीव को यह सोचना चाहिए कि मुझ पर मालिक का रहमो-कर्म क्यों नहीं बरस रहा।  </p>
<p style="text-align:justify;">फिर जीव को सोचना चाहिए कि मेरा काम है कि मैं नाम का सुमिरन करुं, भक्ति करुं।  आप जी फरमाते हैं कि इन्सान निंदा-चुगली, बुराइयों व झूठ-फरेब से जितना बच सकें, उतना ही अच्छा है। बेपरवाह सच्चे दाता-रहबर (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज व बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज) फरमाया करते कि निंदक की तो परछाई भी बुरी होती है, और लोग अपनी बुराइयां छुपाने के लिए ही दूसरों की निंदा करते हैं। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर आप जी फरमाते हैं कि अकबर-बीरबल के समय में एक बार किसी दरबारी ने कोई सामान चुरा लिया। बीरबल ने लोगों को इकट्ठा किया और बादशाह से कहा कि मुझे पता चल गया है कि चोर कौन है। बादशाह ने पूछा कि बताओ कौन है? तो बीरबल ने कहा कि बादशाह! आप निगाह मारो, चोर की दाढ़ी में तिनका है। इतने कहते ही जो चोर था, वो पहले ही अपनी दाढ़ी में हाथ मारकर देखने लगा कि कहीं मेरी दाढ़ी में तिनका तो नहीं लगा। बीरबल ने कहा कि ये रहा चोर। </p>
<p style="text-align:justify;">कहने का मतलब है कि जो निंदा-चुगली करते हैं, असल में वो खोखले होते हैं। वो अपने तिनके छुपाने के लिए दूसरों पर तिनकों की बौछार करते रहते हैं। इसलिए ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए। जो भी निंदा करता है, बुराई गाता है, उससे जितना कन्नी कतरा कर रहोगे, उतने की सुखी रहोगे। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आज घोर कलियुग का समय है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने मुंह से खुद अपनी बुराइयां, अपनी कमियां कोई नहीं गाता और जो लोग बुराई करने वालों के पीछे लगते हैं, उनका भी बुरा हाल होता है। इसलिए इन्सान को अपने गिरहेबान में निगाह मारनी चाहिए और अपने अंत:करण में जो कमियां नजर आती हैं, उन्हें राम-नाम के सुमिरन, परमार्थ के द्वारा निकाल डालो, तो यकीनन मालिक की दया-रहमत आप पर मूसलाधार बरसेगी ही बरसेगी। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:19:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: ''जिसके अंदर 'मैं' आ जाती है उसके अंदर 'गिरावट' शुरू हो जाती है''</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान उस परमपिता परमात्मा का जितना शुक्राना करे उतना कम है। अपनी जड़ों को कभी न भूलो। जो यह याद रखता है कि वो तो कुछ भी नहीं था, लेकिन परमपिता परमात्मा ने उसे क्या से क्या बना दिया और हमेशा बनता ही चला जाता है, कभी उसमें गिरावट नहीं आती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-the-one-inside-whom-i-come-the-decline/article-88218"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान उस परमपिता परमात्मा का जितना शुक्राना करे उतना कम है। अपनी जड़ों को कभी न भूलो। जो यह याद रखता है कि वो तो कुछ भी नहीं था, लेकिन परमपिता परमात्मा ने उसे क्या से क्या बना दिया और हमेशा बनता ही चला जाता है, कभी उसमें गिरावट नहीं आती। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं जिसके अंदर यह आ जाता है कि मैं कुछ बन गया हूं तो उसके बाद वो बनना बंद हो जाता है और गिरावट शुरू हो जाती है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि रूहानियत चीज ही ऐसी है, इसमें जो तैरने लग जाता है यानि अहंकार आ गया तो वो डूब जाता है और जिसमें दीनता, नम्रता आ गई तो मालिक उसे बांह पकड़ कर किनारे लगा देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए दीनता नम्रता का पल्ला कभी न छोड़ो, सुमिरन करो, मालिक से सच्चा नाता जोड़ो, अपने अंत:करण की सफाई करो, मालिक की भक्ति-इबादत से अंत:करण की सफाई होती चली जाएगी और आप परमपिता परमात्मा की खुशियों के हकदार जरूर बन पाओगे। आप जी फरमाते हैं कि अपने विचारों का शुद्धिकरण करना बहुत बड़ी बात है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">लोग कभी ये सोचते नहीं कि उनके अंदर कोई कमी है। हर कोई यही समझता है कि मैं तो प्रफैक्ट हूं, मैं तो सही हूं, मैं तो गलत हो नहीं सकता। ये काल की नगरी है ऐसा सोचना ठीक है, लेकिन यह नहीं हो सकता कि आपमें कोई कमी न हो, असंभव है। अगर आपका दसवां द्वार खुला हो, मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन होते हों तो बात अलग है, तो संभव हो सकता है। वरना हर इन्सान में कोई न कोई कमी है और जब वो अपनी कमियों की तौबा करता है, सच्चे दिल से, सच्ची भावना से सुमिरन करें, भक्ति करें तो मालिक के नजारे लूटने शुरू कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए दीनता नम्रता रखो, भावना शुद्ध रखो, सेवा सुमिरन करते रहो यकीनन मालिक के नजारे मिलेंगे। वो नजारे जिसकी कभी कल्पना नहीं की, वो खुशियां जो आपने कभी सोची नहीं वो परमानंद जो लिखा हुआ तो मिलता है, लेकिन जब महसूस कर लिया जाता है तो बताया नहीं जा सकता। उस परमानंद को महसूस करने के लिए सुमिरन अति जरूरी है और कोई तरीका नहीं है। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 09:09:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: आत्मा को बलवान बनाने और मन को दबाने के लिए करें ये काम!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम जपने से आत्मा बलवान होती है और मन दबता चला जाता है। अगर आप सुमिरन करने का नियम नहीं रखते, सुबह-शाम मालिक को नियमानुसार याद नहीं करते तो आपके मन के विचार आप पर हमेशा हावी रहेंगे। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंदर जो बुरे विचार आते हैं, वो सब मन की देन हैं और जो अच्छे विचार आते हैं, वो आत्मिक विचार हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-do-these-things-to-strengthen-the-soul-and/article-88162"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/namecharcha.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि राम का नाम जपने से आत्मा बलवान होती है और मन दबता चला जाता है। अगर आप सुमिरन करने का नियम नहीं रखते, सुबह-शाम मालिक को नियमानुसार याद नहीं करते तो आपके मन के विचार आप पर हमेशा हावी रहेंगे। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान के अंदर जो बुरे विचार आते हैं, वो सब मन की देन हैं और जो अच्छे विचार आते हैं, वो आत्मिक विचार हैं। बुरे विचारों से इन्सान के शरीर पर हर तरह का असर होता है। शारीरिक शक्ति का नाश होता है, दिमाग के सोचने की शक्ति कम हो जाती है और बुरे विचारों का ताना-बाना बुनते रहने से इन्सान का आत्मबल कम होता चला जाता है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन का नियम बनाना चाहिए। जैसे आप सुबह तैयार होते हैं, नाश्ता लेते हैं, पढ़ने जाते हैं, दफ्तर जाते हैं, खेती-बाड़ी आदि काम-धंधे पर जाते हैं। ऐसे ही सुबह उठकर हाथ-मुंह धो लें, ताकि नींद उड़ जाए। अगर आपको यह मुश्किल लगता है तो चलो, लेटे-लेटे ही सुमिरन कर लें, क्योंकि यह सुमिरन बिल्कुल ही न करने से लाख गुणा बेहतर है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप लगातार दो महीने सुबह-शाम 15-15 मिनट सुमिरन करके देख लें, अगर 1-1 घंटा करो तो कहना ही क्या।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर तो हम भी गारंटी दे सकते हैं कि 100 प्रतिशत आपके अंदर मालिक के नजारे आएंगे ही आएंगे। अगर दो महीनों के घंटों को जोड़ो तो सिर्फ 5 दिन-रात बनते हैं। तो कितना आसान है कि आप अपने अंदर के आत्मबल को कैसे जगा सकते हैं और दुनिया के हर क्षेत्र में आत्मविश्वास अति जरूरी है। जिनके अंदर आत्मविश्वास नहीं होता, वो जरा-जरा सी बात पर घबरा जाया करते हैं और अगर आत्मविश्वास हो तो छाती का जख्म भी लोग हंसते-हंसते सहन कर लिया करते हैं। आत्मविश्वास के बढ़ने से आपको हर अच्छे-नेक काम में तरक्की मिलती जाएगी। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 09:41:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी ने फ़रमाया...सुख-शांति पाने के लिए ये काम जरुरी!</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इस कलियुगी संसार में जीव सुख-शांति प्राप्त करना चाहता है तो उसके लिए इन्सान के अंदर आत्मविश्वास होना जरूरी है। जिस इन्सान में आत्मविश्वास होता है, वही बुलंदियों को छू सकता है और ये आत्मविश्वास किसी पैसे, कपड़े-लत्ते, मां-बाप या टीचर-मास्टर, लेक्चरार की शिक्षा से हासिल नहीं हो सकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-said-that-this-work-is/article-88110"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/dera-sacha-sauda-300x158.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि अगर इस कलियुगी संसार में जीव सुख-शांति प्राप्त करना चाहता है तो उसके लिए इन्सान के अंदर आत्मविश्वास होना जरूरी है। जिस इन्सान में आत्मविश्वास होता है, वही बुलंदियों को छू सकता है और ये आत्मविश्वास किसी पैसे, कपड़े-लत्ते, मां-बाप या टीचर-मास्टर, लेक्चरार की शिक्षा से हासिल नहीं हो सकता। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">इस आत्मबल को हासिल करने के लिए आत्मिक चिंतन जरूरी है और यह आत्मिक चिंतन केवल उस राम, ओऊम, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की भक्ति इबादत से हो सकता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो इन्सान मालिक का नाम जपा करते हैं, वही आत्मबल को हासिल कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आत्मिक चिंतन केवल सुमिरन के द्वारा ही संभव है, सुमिरन करने से ही आत्मबल में वृद्धि हो सकती है और जब जीव में आत्मबल आ जाता है तो उसकी सहनशक्ति स्वयं ही बढ़ जाती है। आत्मबल से जीव का मन फिजूल की बातों में आना बंद कर देता है और आत्मा का मालिक से प्रेम बढ़ने लगता है। ज्यों-ज्यों इन्सान सुमिरन करता जाता है आत्मा को खुराक मिलती जाती है और वो और अधिक बलवान होती जाती है। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 09:19:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: वो नजारे, वो लज्जत, वो खुशियां चाहते हैं, जिसकी कभी कल्पना नहीं की?</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को जब परमपिता परमात्मा निगाह दे देता है, तो उसे वो नजारे मिलते हैं, वो लज्जत मिलती है, जिसकी कभी कल्पना नहीं की होती। वो खुशियां मिलती हैं, जिनका लिख-बोल कर वर्णन नहीं किया जा सकता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-those-sights-that-shame-that-happiness-that-we/article-88056"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/hanumangarh-4-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान को जब परमपिता परमात्मा निगाह दे देता है, तो उसे वो नजारे मिलते हैं, वो लज्जत मिलती है, जिसकी कभी कल्पना नहीं की होती। वो खुशियां मिलती हैं, जिनका लिख-बोल कर वर्णन नहीं किया जा सकता। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि निगाह तो सबको है, सिवाए उनके जिनको मालिक ने नहीं दी, लेकिन इसी निगाह से जब उस परमपिता परमात्मा, सतगुरु, मौला का दीदार होता है तो ये निगाह उस निगाह जैसी हो जाती है, यानि इन्सान से भगवान का रूप इन्सान बनता चला जाता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि इन्सान भगवान बन जाता है। छोटी-छोटी नदियां-नाले अगर समुंद्र में गिर जाएं तो वो समुंद्र कहलाती हैं, उसी तरह जो आत्माएं परमपिता परमात्मा के नूरी स्वरूप को सुमिरन-भक्ति से पा जाती हैं, वो मालिक, परमात्मा का ही रूप बन जाती हैं। पर वो गाती नहीं, बल्कि उनके अंदर और दीनता-नम्रता आ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतिहास में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं, कि मालिक के प्यारे जिनको परमपिता परमात्मा स्वरूप के दर्शन होते हुए भी उनके अंदर दीनता-नम्रता हद से ज्यादा थी और जितनी दीनता-नम्रता होती है, उतनी ही मालिक की खुशियां जल्दी व ज्यादा मिला करती हैं। इसलिए अपने अंदर दीनता-नम्रता धारण करो, मालिक से मालिक को मांगो, मालिक के नाम का सुमिरन किया करो, कभी भी किसी का बुरा न सोचा करो, सबका भला मांगा करो और सबका भला किया करो। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 08:48:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी ने फ़रमाया...ऐसी ताकत है जिससे इन्सान खंडों, ब्रह्मंडों को पार कर सकता है!</title>
                                    <description><![CDATA[मालिक का नाम ऐसी ताकत है, जो इन्सान को अंदर से आत्मविश्वास, शक्ति देता है। जिसके द्वारा इन्सान खंडों, ब्रह्मंडों को पार करता हुआ मालिक की दया-मेहर, रहमत के काबिल बन जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में ऐसी शक्ति है, जो इन्सान को खस्ता कर देती है और मालिक से मिला देती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-said-that-there-is-such/article-87992"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/hanumangarh-naamcharcha.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान अगर मालिक का नाम जपे और उसकी बनाई सृष्टि से बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्रेम करे तो वह दोनों जहान की खुशियों का हकदार बन सकता है। इन्सान को इस घोर कलियुग में मालिक का नाम जपना, भक्ति-इबादत करना बड़ा मुश्किल लगता है। हालांकि ऐसा करना आसान काम है लेकिन इन्सान को सबसे मुश्किल काम प्रभु का नाम लेना लगता है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">मालिक का नाम जपने के लिए सिर्फ जिह्वा हिलानी होती है, लेकिन इन्सान मालिक का नाम नहीं लेना चाहता। मालिक का नाम ऐसी ताकत है, जो इन्सान को अंदर से आत्मविश्वास, शक्ति देता है। जिसके द्वारा इन्सान खंडों, ब्रह्मंडों को पार करता हुआ मालिक की दया-मेहर, रहमत के काबिल बन जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में ऐसी शक्ति है, जो इन्सान को खस्ता कर देती है और मालिक से मिला देती है। इसलिए किसी से भी नफरत नहीं करनी चाहिए। सभी से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करना चाहिए।  </p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप एक दिल को अपने अच्छे-नेक कार्यों से खुश कर लेते हैं तो वो 100 साल की बंदगी के बराबर है। इसलिए इन्सान को सभी से प्रेम करना चाहिए। किसी से भी तकरार, निंदा और कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। मालिक के प्यार में चलते हुए आप अगर बढ़ते  चलेंगे तो मालिक की कृपा-दृष्टि आप पर जरूर बरसेगी। Anmol Vachan</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/anmol-vachan-respected-guru-ji-said-that-there-is-such/article-87992</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 19:11:04 +0530</pubDate>
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