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                <title>सम्पादकीय - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>3 in 1 MSG Bhandara: ऐसे बेमिसाल वचन, जिनसे यह साफ जाहिर होता है&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/such-incomparable-words-from-which-it-becomes-abundantly-clear/article-83551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/3-in-1-msg-bhandara-26.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर का हर कदम न सिर्फ उनके श्रद्धालुओं/मुरीदों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण कायनात की भलाई के लिए होता है। 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>सच्चे सतगुरु और डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज और सच्चे दाता रहबर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने डेरे के बारे में, साध-संगत और गुरगद्दी के बारे में ऐसे बेमिसाल वचन फरमाए, जिनसे यह साफ जाहिर होता है कि तीनों बॉडियां एक ही रूहानी ज्योत हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां इसी महान परोपकार को थ्री-इन-वन और एमएसजी का नाम देते हैं। वैसे भी रूहानियत का संदेश यह है कि सतगुरु कहीं जाता ही नहीं, वह सदा है, बस चोला बदलता है, ज्योत वही काम करती है।</p>
<h3>18 अप्रैल, 1960 को पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने मानवता का उद्धार करना शुरू किया</h3>
<p>18 अप्रैल, 1960 को सच्चे मुर्शिदे कामिल पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने नूरी चोला बदलकर पूजनीय बेपरवाह शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में मानवता का उद्धार करना शुरू किया और तीसरी बॉडी के बारे में भी वचन फरमाए कि सात साल (1967) बाद तीसरी बॉडी के रूप में आएंगे। गुरगद्दी की बख्शीश के बाद भी पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ”आपां” और ”आपणा” शब्द ही इस्तेमाल करते थे, न कि ”तुम” या ‘हम”! पूजनीय परम पिता जी ने चोला बदलते समय भी पूज्य हजूर पिता जी की छाती पर अपने पावन कर-कमल बार-बार लगाकर वचन फरमाए, ”हम कहीं नहीं चले, तेरे यहाँ (दिल) रहेंगे।”</p>
<p>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने थ्री-इन-वन के महान परोपकार को ”एमएसजी” का रूप दिया है। आप जी फरमाते हैं कि आज भी सब कुछ ”शाह मस्ताना जी, शाह सतनाम जी” ही कर रहे हैं। पूज्य हजूर पिता जी इसी अभेदता को इन शब्दों के माध्यम से भी कलमबद्ध करते हैं:</p>
<h3>”खुद ही सजदा करूं, खुद ही कबूल करूं” | 3 in 1 MSG Bhandara</h3>
<p>इसी तरह, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के वचन पूज्य हजूर पिता जी की दया-मेहर के रूप में स्पष्ट नजर आ रहे हैं। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने यह भी फरमाया कि ”सरसा-नेजिया एक हो जाएगा, संगत ही संगत होगी, थाली फैंकी जाएगी तो थाली नीचे नहीं गिरेगी।” भंडारों के दौरान साध-संगत के इक्ट्ठ से वचन हुबहु पूरे होते देखे जाते हैं।</p>
<p>प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं।यह भी तथ्य हैं कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने पूज्य हजूर पिता जी को गुरगद्दी की बख्शीश से पहले ही स्पष्ट इशारा कर दिया था कि परम पिता जी ही हजूर पिता जी के रूप में काम करेंगे। पूजनीय परम पिता जी को जब यह बताया गया कि श्री गुरुसर मोडिया वाले नंबरदार का लड़का (पूज्य हजूर पिता जी) हर सत्संग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में साध-संगत को लेकर जाता है, तो पूजनीय परम पिता जी ने आप जी से बातचीत करते हुए वचन फरमाए, ”अपना तो फिर काम यही है।’ 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज के बहुत सारे वचन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में पूरे हुए और बहुत सारे वचन पूज्य हजूर पिता जी के रूप में पूरे हो रहे हैं। करोड़ों साध-संगत अपने दाता सतगुरु एमएसजी को थ्री-इन-वन दिवस पर करोड़ों बार सजदा और धन्यवाद करती है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 11:23:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Bhandara: संतों का शुभ आगमन मानवता की तकदीर लिखता है</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: 25 जनवरी का नाम सुनते ही आत्मा आनंद में विभोर हो जाती है। संतों का अवतार दिवस मानवता के लिए वरदान होता है। यह दिवस त्यौहार बन जाता है, क्योंकि संतों का शुभ आगमन मानवता की तकदीर लिखता है। रूहानियत, इन्सानियत और संस्कृति ही किसी राष्टÑ, देश, समाज व क्षेत्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/the-incarnation-of-saints-is-a-blessing-for-humanity/article-80684"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/25-january.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: 25 जनवरी का नाम सुनते ही आत्मा आनंद में विभोर हो जाती है। संतों का अवतार दिवस मानवता के लिए वरदान होता है। यह दिवस त्यौहार बन जाता है, क्योंकि संतों का शुभ आगमन मानवता की तकदीर लिखता है। रूहानियत, इन्सानियत और संस्कृति ही किसी राष्टÑ, देश, समाज व क्षेत्र की खुशहाली, अमन-शान्ति  और भाईचारे रूपी भवन की नींव होते हैं। MSG Bhandara</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">विज्ञान, तकनीक और बुद्धि भौतिक प्रगति तो दे सकती हैं, लेकिन जीवन में संतोष और आनंद रूहानी मार्गदर्शक के नेतृत्व से ही मिलता है। यदि केवल भौतिक प्रगति ही अपने आप में पूर्ण होती, तो दुनिया कब की स्वर्ग बन चुकी होती। रूहानियत के बिना मानव जीवन के उच्चतम आदर्श को प्राप्त नहीं कर सकता।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">सच्चे संत रूहानियत का संदेश देकर जलते-बलते संसार के दुखी लोगों के दिलों में ठंडक भर देते हैं। उनके पावन वचनों को सुनकर निर्दोषों पर तलवार चलाने वालों के हाथ वहीं रुक जाते हैं, पापी भक्त बन जाते हैं, लोगों का खून चूस-चूसकर धन जोड़ने वाले तौबा करके दानी सज्जन बन जाते हैं। दुश्मनियां भाईचारे में बदल जाती हैं और नफरत व ईर्ष्या में फंसे लोग प्रेम के मार्ग पर चल पड़ते हैं। MSG Bhandara</div>
<h3>25 जनवरी के पावन दिवस को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अवतार धारण किया</h3>
<div style="text-align:justify;">25 जनवरी के पावन दिवस को इस धरती पर सच्चे सतगुरु, रूहानी रहबर, दयालुता के पुंज, समाज सुधारक, डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अवतार धारण किया। आप जी ने सभी धर्मों के लोगों को एक जगह पर बैठाकर, ईश्वर, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की भक्ति और मानवता का सच्चा पाठ पढ़ाया। आप जी ने जब पावन गुरुगद्दी संभाली, वह ऐसा दौर था जब दुनिया दो विश्व युद्धों की मार सहने के बाद भी तीसरे युद्ध की तैयारियों में जुटी हुई थी। पूरी दुनिया में नस्ल, रंग, धर्म, जाति के नाम पर झगड़े हो रहे थे।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">तथाकथित आधुनिकता के हावी हाने से भारतीय संस्कृति के महान मूल्यों का पतन शुरू हो गया था। गांव-गांव शराब के ठेके खुलने लगे थे, भ्रष्टाचार जोर पकड़ रहा था, हरामखोरी के अड्डे बढ़ने लगे थे। इस काले दौर में आप जी ने सत्य का ऐसा प्रकाश फैलाया कि लाखों लोग शराब और अन्य नशे छोड़कर सत्संग सुनने और भक्ति के मार्ग पर चल पड़े। दुनिया भर से लोगों ने जब सरसा में रूहानी ज्योति का प्रकाश देखा, तो वे सात समंदर पार से श्रद्धावश सरसा की तरफ खिंचे चले आए।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">आज आप जी का युवा स्वरूप, तीसरी बॉडी पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां  दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा का संदेश फैला रहे हैं और सवा सात करोड़ से ज्यादा लोग नशा और बुराईयां छोड़ कर मानवता की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं। एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, आॅस्ट्रेलिया सहित कोई भी महाद्वीप ऐसा नहीं है, जहां डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु मानवता की सेवा में न जुटे हों। ऐसे महान सतगुरु जी के पावन अवतार दिवस की सारी सृष्टि को कोटि-कोटि बधाई हो। MSG Bhandara</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संपादक</strong></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 23:59:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Shah Satnam Ji: कण-कण में हाजिर हजूर&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सच्चे सतगुरु, समाज सुधारक, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने समाज, देश और पूरी मानवता पर ऐसे अनगिनत उपकार किए हैं, जिनका वर्णन करना सूर्य को दीपक दिखाना है। नशे और अन्य बुराइयों के कारण जो घर नरक बन चुके थे, उन्हें आपजी ने फिर से खुशियों से भर दिया। राक्षसी प्रवृत्ति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/he-is-present-in-every-single-particle/article-79141"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/shah-satnam-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सच्चे सतगुरु, समाज सुधारक, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने समाज, देश और पूरी मानवता पर ऐसे अनगिनत उपकार किए हैं, जिनका वर्णन करना सूर्य को दीपक दिखाना है। नशे और अन्य बुराइयों के कारण जो घर नरक बन चुके थे, उन्हें आपजी ने फिर से खुशियों से भर दिया। राक्षसी प्रवृत्ति वाले लोग आपकी शरण में आकर देवतुल्य बन गए। धर्म और जाति के नाम पर एक-दूसरे के शत्रु बने लोग, सब वैमनस्य छोड़कर आपसी प्रेम और भाईचारे के सूत्र में बंध गए। आपजी ने रूहानियत को इतना सरल और सहज बना दिया कि छोटे-छोटे बच्चे भी भक्ति के मार्ग पर चल पड़े। आपजी की रूहानी शिक्षा का ऐसा प्रकाश फैला कि लोग जादू-टोना, तावीज, भूत-प्रेत जैसे अंधविश्वासों और पाखंडों से दूर हो गए। आपजी ने विभिन्न प्रांतों में गाँव-गाँव, शहर-शहर सत्संग लगाकर परमात्मा के नाम का ऐसा संदेश दिया कि चारों ओर राम-नाम की गूंज उठने लगी। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने यह शिक्षा घर-घर पहुंचाई कि परमात्मा एक है- ओम, राम, अल्लाह, वाहिगुरु, गॉड ये सभी उसी एक परमेश्वर के नाम हैं। संपूर्ण सृष्टि उसकी संतान है। कोई ऊँच-नीच नहीं, सब बराबर हैं। परमात्मा की प्राप्ति के लिए बाहरी आडंबर, पाखंड, पैसे-चढ़ावे या धन की आवश्यकता नहीं, बल्कि सच्ची भावना चाहिए। रूहानियत के इतिहास में आपजी का यह महान परोपकार मील का पत्थर साबित हुआ जब आप जी ने वचन फरमाए कि हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे। सामान्यत: सतगुरु का देह रूप में वियोग शिष्य के लिए सबसे असहनीय होता है, परंतु पूजनीय परम पिता जी ने यह स्पष्ट कर दिया कि ‘हम जाएंगे ही नहीं, सदैव तुम्हारे (पूजनीय हजूर पिता जी के) रूप में रहेंगे।’ यह पवित्र वचन साध-संगत के लिए महापरोपकार तथा रूहानियत में अद्वितीय उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमएसजी के रूप में ये वचन साकार हुए। पूजनीय बेपरवाह सांईं शाह मस्ताना जी महाराज व पूजनीय परम पिता जी से नाम प्राप्त करने वाले जीव अपने अनुभव बताते हैं कि उन्हें पूज्य हजूर पिता जी में शाह मस्ताना जी महाराज तथा परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के ही दर्शन होते हैं। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 25 जनवरी 1919 को श्री जलालआणा साहिब की पवित्र धरती पर पूजनीय पिता वरियाम सिंह जी और पूजनीय माता आस कौर जी के घर अवतार धारण किया। बचपन से ही आपजी का सामाजिक और धार्मिक जीवन प्रेरणा-स्त्रोत था। आपजी ने अपने सतगुरु शाह मस्ताना जी महाराज के प्रेम, भक्ति और श्रद्धा में महान बलिदान दिया। अपने सतगुरु जी के हुक्मानुसार अपनी बड़ी हवेली गिराकर संपूर्ण सामान सरसा दरबार ले आए। फिर सांईं जी के हुक्म अनुसार सर्द रात में सारा सामान डेरे के बाहर रख दिया। अगले दिन आपजी ने सारा सामान आई हुई साध-संगत में बाँट दिया। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज जी ने इस महान बलिदान को देखकर अपार कृपा से भरपूर वचन फरमाए और समस्त साध-संगत के सम्मुख आपजी को पवित्र गुरगद्दी बख्शिश की। सांईं मस्ताना जी ने आपजी का नाम स. हरबंस सिंह जी से बदलकर सतनाम सिंह जी रख दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने रूहानियत के इतिहास में नई मिसाल कायम करते हुए 23 सितंबर 1990 को पूजनीय गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को गुरगद्दी की बख्शिश की। आप जी सवा साल तक पूजनीय हजूर पिता जी के साथ स्टेज पर विराजमान रहे। पूजनीय परम पिता जी ने साध-संगत पर दया मेहर करते हुए स्पष्ट वचन फरमाए- ‘पूजनीय शाह मस्ताना जी के रूप में व अब इस शरीर में (पूजनीय परम पिता जी के रूप) में हमने ही साध-संगत की संभाल की और आगे भी संत जी (पूजनीय हजूर पिता जी) के रूप में हम ही संभाल करते रहेंगे।’</p>
<p style="text-align:justify;">परंपरा के अनुसार परमात्मा के हुक्म से संत अपना चोला बदलते हैं। 13 दिसंबर 1991 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपना नूरी चोला बदल लिया। किंतु आपजी पूज्य हजूर पिता जी के रूप में साध-संगत की दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी संभाल कर रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत इस महीने को सेवा माह व 3 इन 1 एमएसजी भंडारे के रूप में मनाती है। 12 से 15 दिसंबर तक प्रतिवर्ष आँखों का मुफ्त शिविर लगाया जाता है, जिसने अब तक हजारों लोगों की अंधेरी जिंदगी में प्रकाश ला दिया है। सेवा की यह मशाल पूरे लौ के साथ जल रही है। सच्चे सतगुरु पालनहार को हमारा करोड़ों बार नमन। Shah Satnam Ji</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 09:03:48 +0530</pubDate>
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                <title>मिशन मुस्कुराहट&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Dera Sacha Sauda: आईए समाज के एक और कोने में चलते हैं, जहां कुछ लोग अपने बेटे, पुत्रवधू, पौत्र-पौत्रियों से भरा परिवार होने के बावजूद घर में भी अकेलेपन व तिरस्कार का संताप झेलते हैं और फिर बच्चे उन्हीं माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ आते हैं फिर उनको मिलने तक नहीं जाते!, अगर मिलना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/mission-muskurahat/article-74659"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/dera-sacha-sauda-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Dera Sacha Sauda: आईए समाज के एक और कोने में चलते हैं, जहां कुछ लोग अपने बेटे, पुत्रवधू, पौत्र-पौत्रियों से भरा परिवार होने के बावजूद घर में भी अकेलेपन व तिरस्कार का संताप झेलते हैं और फिर बच्चे उन्हीं माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ आते हैं फिर उनको मिलने तक नहीं जाते!, अगर मिलना ही होता तो बच्चे उनको वृद्ध आश्रम में क्यों छोड़कर आते ? यहां भी फरिश्ते ही पहुंचते हैं। कोई बाईक से उतरता है, तो कोई कार से। हाथ में फल-फ्रूट और खाने-पीने की अन्य सामग्री लिए ये फरिश्ते अनजान बुजुर्गों के पास इस तरह जाते हैं जैसे वे अपने माता पिता के पास ही आए हों। ये फरिश्ते खाने पीने का सामान छोड़ने नही आते, बल्कि अपनत्व की भावना व सत्कार लेकर पहुंचते हैं और उनसे बातें करते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं। इन फरिश्तों से बात कर बुजुर्गों की तन्हाई पंख लगाकर उड़ जाती है। चेहरे पर मुस्कुराहट बिखरने लगती है। बातें कर बुजुर्गों को लगता है कि उनका असली परिवार पहुंच गया है। चेहरे से गम उड़ जाता है, खुशियां पक्का ठिकाना बना लेती हैं। इन फरिश्तों को पूज्य गुरु जी ने अपने मिशन मुस्कुराहट पर भेजा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अअतीत की स्वर्णिम जीवनशैली से कटकर आधुनिक युग की तनावपूर्ण जिदगी में लोग ठहाके लगाकर हँसना तो दूर, मुस्कुराना भी भूल गए हैं। ऐसे माहौल में उदास चेहरों के लिए हँसी एक तोहफा या भगवान की अनमोल देन होती है। पूज्य गुरु जी साध-संगत को आत्मज्ञान देने के साथ-साथ, किसी-न-किसी रूप में हँसाकर, जीवन में हँसी की आवश्यक खुराक पूरी करते हैं। Dera Sacha Sauda</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि अपने बच्चों (मानवता) को खुशियाँ देना और सभी को हँसता देखना ही हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य है। सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक पिता ही अपने बच्चों का सबसे बड़ा हितैषी होता है, जो उनकी उदासी पर चिंतित रहता है। पूज्य गुरु जी द्वारा मानवता को खुशी देने का दायरा अत्यंत विशाल है। रूहानियत का यह महान सत्य है कि पूर्ण सतगुरु जब हँसते हैं, तो रहमतों की बरसात होती है। लेकिन खुशियों की यह दौलत केवल साध-संगत तक सीमित नहीं है। पूज्य गुरु जी कैसे दुखी मानवता में खुशियाँ बाँटते हैं, इसकी कुछ मिसालें यहाँ प्रस्तुत हैं— आप जी का ध्यान समस्त सृष्टि पर है। आप जी उन चेहरों का भी ख्याल रखते हैं, जो अपने प्रियजनों से बिछुड़ने के कारण अत्यधिक दुखी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वह माँ, जिसका लाडला 5-10 वर्षों से घर नहीं लौटा, उसे रोटी भी अच्छी नहीं लगती। उसका बेटा भूखा प्यासा किस हाल में होगा, यही सोचकर रोटी की कोर गले में अटक जाती है। पिता कुछ कहता नहीं, लेकिन अंदर से टूट जाता है। पूज्य गुरु जी के प्रयासों से ऐसे परिवारों में फिर से मुस्कान लौटती है, जब डेरा सच्चा सौदा के सेवादार सैकड़ों किलोमीटर दूर से बिछड़े व्यक्ति को उसके घर पहुँचा देते हैं। अपने जिगर के टुकड़े को गले लगाकर माँ-बाप की आंखों में खुशी के आँसू आते हैं और वहीं से मुस्कान व हँसी का सिलसिला शुरू हो जाता है। संगरूर, संगरिया, केसरी सिंहपुर, मलोट सहित अनेक ब्लॉकों के डेरा श्रद्धालु पूज्य गुरु जी की प्रेरणा से खुशियाँ बाँटने की इन्सानियत मुहिम में सेवा का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं। सेवादार सैकड़ों गुमशुदा व्यक्तियों की देखभाल करते हैं, इलाज करवाते हैं, नहलाते हैं, कपड़े देते हैं, भोजन-पानी उपलब्ध कराते हैं—यह दृश्य तो जैसे सतयुग का प्रतीक है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोजन के बिना कौन खुश रह सकता है? फिर यदि कोई बुजुर्ग, अकेला रह रहा हो या अपंग हो, तो सेवादार जब घर-घर जाकर महीने भर का राशन देते हैं, तो चेहरे पर खुशी आना तय है। दूसरों की खुशी में अपनी खुशी—यही है पूज्य गुरु जी का खुशियाँ बाँटने का मिशन। अन्न से भरे भंडार में यदि कोई भूखा सो जाए, तो यह मानवता के विरुद्ध है। इसी तरह जब मौत के मुँह में पड़ा मरीज रक्त के अभाव में निराश हो जाता है तो चेहरे से रंग उड़ जाते हैं। ऐसे समय में कोई डेरा श्रद्धालु दौड़कर रक्तदान करता है तो किसी की जान बचाने का सुकून पाकर स्वयं सेवादार भी प्रसन्न हो उठता है, और मरीज व उसके परिवार में खुशियों की बहार छा जाती है। सड़क पर आम देखा जाता है कि हादसे में तड़प रहे घायल मौत के डर से और भी व्याकुल हो जाते हैं, जब लोग उनके पास से तेज रफ़्तार में गुजर जाते हैं और कोई मदद नहीं करता।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में फरिश्ते आते हैं, पर वे आसमान से नहीं उतरते, बल्कि आम इंसानों की भीड़ से ही निकलते हैं और बिना देर किए घायल को उठाकर अस्पताल पहुँचा देते हैं। समय पर इलाज मिलने से घायल जीवन की जंग जीत जाते हैं और उनके परिवार के चेहरों पर अनुपम खुशी के भाव साफ नज़र आते हैं। आईए समाज के एक और कोने में चलते हैं, जहां कुछ लोग अपने बेटे, पुत्रवधू, पौत्र-पौत्रियों से भरा परिवार होने के बावजूद घर में भी अकेलेपन व तिरस्कार का संताप झेलते हैं और फिर बच्चे उन्हीं माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ आते हैं फिर उनको मिलने तक नहीं जाते!, अगर मिलना ही होता तो बच्चे उनको वृद्ध आश्रम में क्यों छोड़कर आते ? यहां भी फरिश्ते ही पहुंचते हैं। कोई बाईक से उतरता है, तो कोई कार से। हाथ में फल-फ्रूट और खाने-पीने की अन्य सामग्री लिए ये फरिश्ते अनजान बुजुर्गों के पास इस तरह जाते हैं जैसे वे अपने माता पिता के पास ही आए हों। Dera Sacha Sauda</p>
<p style="text-align:justify;">ये फरिश्ते खाने पीने का सामान छोड़ने नही आते, बल्कि अपनत्व की भावना व सत्कार लेकर पहुंचते हैं और उनसे बातें करते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं। इन फरिश्तों से बात कर बुजुर्गों की तन्हाई पंख लगाकर उड़ जाती है। चेहरे पर मुस्कुराहट बिखरने लगती है। बातें कर बुजुर्गों को लगता है कि उनका असली परिवार पहुंच गया है। चेहरे से गम उड़ जाता है, खुशियां पक्का ठिकाना बना लेती हैं।<br />
इन फरिश्तों को पूज्य गुरु जी ने अपने मिशन मुस्कुराहट पर भेजा होता है। <strong>-संपादक</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Saint MSG: आया दिन खुशियों भरा" href="http://10.0.0.122:1245/aaya-din-khushiyon-bhara/">Saint MSG: आया दिन खुशियों भरा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Aug 2025 10:15:39 +0530</pubDate>
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                <title>Indian Premier League: आईपीएल एक ऐसा मंच, जो खेलों के लिए सबक!</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने पिछले डेढ़ दशक में भारतीय क्रिकेट को एक नया आयाम दिया है। यह केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच बन गया है, जिसने क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और अनगिनत युवा प्रतिभाओं को अवसर प्रदान किया। आईपीएल के कारण भारतीय क्रिकेट को कई नए बल्लेबाज और गेंदबाज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ipl-is-a-platform-which-teaches-a-lesson-for-sports/article-69366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/ipl-2024-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने पिछले डेढ़ दशक में भारतीय क्रिकेट को एक नया आयाम दिया है। यह केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच बन गया है, जिसने क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और अनगिनत युवा प्रतिभाओं को अवसर प्रदान किया। आईपीएल के कारण भारतीय क्रिकेट को कई नए बल्लेबाज और गेंदबाज मिले हैं। चाहे वह जसप्रीत बुमराह की धारदार गेंदबाजी हो, हार्दिक पंड्या का आॅलराउंड प्रदर्शन या सूर्यकुमार यादव की आक्रामक बल्लेबाजी- ये सभी खिलाड़ी आईपीएल के मंच से उभरकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चमके हैं। Indian Premier League</p>
<p style="text-align:justify;">रिंकू सिंह, यशस्वी जायसवाल, उमरान मलिक जैसे नाम आज घर-घर में पहचाने जाते हैं, और इनकी सफलता का श्रेय आईपीएल को जाता है। पहले जहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाने के लिए लंबा इंतजार और रणजी जैसे घरेलू टूनार्मेंटों में लगातार प्रदर्शन जरूरी था, वहीं अब आईपीएल ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया। हालांकि, आईपीएल का प्रभाव केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत एक खेल-प्रधान देश बनने की क्षमता रखता है, लेकिन क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को अभी तक वह महत्व और संसाधन नहीं मिले, जो वे डिजर्व करते हैं।</p>
<h3>भारत के पास अपार प्रतिभा है</h3>
<p style="text-align:justify;">हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, फुटबॉल जैसे खेलों में भी भारत के पास अपार प्रतिभा है, लेकिन इनके लिए आईपीएल जैसा मंच नहीं है। यदि इन खेलों के लिए भी ऐसा टूनार्मेंट शुरू किया जाए, तो नई प्रतिभाएं उभर सकती हैं और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और चमक सकता है। उदाहरण के लिए, हॉकी इंडिया लीग की शुरूआत एक सकारात्मक कदम थी, लेकिन इसे और व्यापक और आकर्षक बनाने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईपीएल की सफलता का मूल मंत्र उसका व्यावसायिक मॉडल, दर्शकों का उत्साह और प्रायोजकों का समर्थन है। अन्य खेलों के लिए भी ऐसा ही ढांचा तैयार करना होगा। सरकार, खेल संगठनों और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना चाहिए ताकि हर खेल को उसका हक मिले। इससे न केवल खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि युवाओं में खेलों के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। Indian Premier League</p>
<p><a title="Boxing World Cup 2025: हितेश ने रचा इतिहास, स्वर्ण संग भारत ने विश्व मुक्केबाज़ी कप में छह पदकों के साथ किया स्वर्णिम समापन" href="http://10.0.0.122:1245/india-finishes-world-boxing-cup-with-six-medals/">Boxing World Cup 2025: हितेश ने रचा इतिहास, स्वर्ण संग भारत ने विश्व मुक्केबाज़ी कप में छह पदकों के …</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/ipl-is-a-platform-which-teaches-a-lesson-for-sports/article-69366</link>
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                <pubDate>Sun, 06 Apr 2025 15:49:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Stock Market Update: शेयर बाजार में उछाल! सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई, (आईएएनएस)। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शानदार तेजी दिखी। भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों पर बुल्स की धूम मची रही, क्योंकि सेंसेक्स में 1,961 अंक से अधिक और निफ्टी में 557 अंक की तेजी आई। Stock Market Update वित्तीय शेयरों में तेजी और यूएस लेबर मार्केट के मजबूत आंकड़ों के कारण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/stock-market-boom-sensex-and-nifty-rise-sharply/article-64575"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/stock-market1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मुंबई, (आईएएनएस)। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शानदार तेजी दिखी। भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों पर बुल्स की धूम मची रही, क्योंकि सेंसेक्स में 1,961 अंक से अधिक और निफ्टी में 557 अंक की तेजी आई। Stock Market Update</p>
<p style="text-align:justify;">वित्तीय शेयरों में तेजी और यूएस लेबर मार्केट के मजबूत आंकड़ों के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। ब्लू-चिप बैंक शेयरों में तेजी ने भी शुक्रवार के कारोबार में बेंचमार्क सूचकांकों को उछालने का काम किया। सेंसेक्स 1,961.32 अंक या 2.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79,117.11 पर बंद हुआ और निफ्टी 557.35 अंक या 2.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,907.25 पर बंद हुआ। शेयर बाजार में 5 जून के बाद की सबसे बड़ी तेजी है, जब बीएसई सेंसेक्स 3.20 प्रतिशत या 2,303.19 अंक बढ़कर 74,382.24 पर पहुंच गया था। जबकि, एनएसई निफ्टी 3.36 प्रतिशत या 735.85 अंक बढ़कर 22,360.25 पर था।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि व्यापक बाजार में सुधार मजबूत बुनियादी बातों और व्यापक आर्थिक दबावों के प्रति लचीलेपन वाले गुणवत्ता वाले शेयरों को इकट्ठा करने के अवसर पैदा कर रहे हैं। आईटी क्षेत्र, अपने हालिया खराब प्रदर्शन के बावजूद, मध्यम अवधि में वैश्विक बाधाओं के कम होने के साथ सुधार के लिए तैयार है। Stock Market Update</p>
<p><a title="WhatsApp’s New Feature: वॉट्सऐप ने पेश किया नया फीचर, यूज़र्स को दी ये सुविधा!" href="http://10.0.0.122:1245/whatsapp-introduced-a-new-feature-gave-this-facility-to-users/">WhatsApp’s New Feature: वॉट्सऐप ने पेश किया नया फीचर, यूज़र्स को दी ये सुविधा!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 16:59:50 +0530</pubDate>
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                <title>Haryana Assembly: हरियाणा को चंडीगढ़ में अलग विधानसभा के लिए जमीन देने के मामले ने पकड़ा तूल</title>
                                    <description><![CDATA[Haryana Assembly separate Land Case: चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा के बीच राजधानी चंडीगढ़ का मामला तकनीकी पेंच में फंस गया है, ताजा मामला केंद्र द्वारा हरियाणा को चंडीगढ़ में अलग विधानसभा के लिए जमीन देने का है, हालांकि चंडीगढ़ फिलहाल दोनों राज्यों की राजधानी है। हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों की स्थापना 1 नवंबर 1966 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-issue-of-giving-land-to-haryana-for-a-separate-assembly-in-chandigarh-has-gained-momentum/article-64373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/haryana-legislative-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Haryana Assembly separate Land Case: चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा के बीच राजधानी चंडीगढ़ का मामला तकनीकी पेंच में फंस गया है, ताजा मामला केंद्र द्वारा हरियाणा को चंडीगढ़ में अलग विधानसभा के लिए जमीन देने का है, हालांकि चंडीगढ़ फिलहाल दोनों राज्यों की राजधानी है। हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों की स्थापना 1 नवंबर 1966 को हुई थी और उस समय से दोनों की राजधानी चंडीगढ़ में रखी गई थी, पंजाब से हिंदी भाषी क्षेत्रों को हटाकर हरियाणा को एक अलग राज्य बनाया गया था, फिर भी यह शहर सामाजिक केंद्र है दोनों राज्यों का एक मजबूत सांस्कृतिक बंधन आधार है। यह एक जिस्म और दो जान वाली बात है, लेकिन जब भी राजधानी या एसवाईएल का मुद्दा उठता है तो राजनीति गरमा जाती है। Haryana Assembly</p>
<p style="text-align:justify;">अब पंजाब ने हरियाणा को विधानसभा के लिए जमीन देने के फैसले का विरोध किया है। राजनीतिक स्थिति भी आश्चर्यजनक है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही बड़ी पार्टियां हैं और दोनों ही राज्यों में इन पार्टियों की इकाइयां अपने-अपने राज्य के पक्ष में खड़ी हैं। राजनीतिक स्तर पर इस मसले के सुलझने के आसार कम हैं, क्योंकि ताजा मामला राजधानी के तकनीकी पहलुओं से भी जुड़ा है। कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जहां या तो कानून काम करता है या परंपरा, लेकिन जिस मुद्दे को लेकर कानून और परंपरा दोनों की मिसाल कम हो तो मामला उलझ जाता है। Haryana Assembly</p>
<p><a title="Jhansi Hospital Accident: अस्पताल में आग, 10 नवजात जिंदा जले! राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने जताया शोक" href="http://10.0.0.122:1245/fire-in-jhansi-hospital-10-newborns-burnt-alive-president-prime-minister-expressed-condolences/">Jhansi Hospital Accident: अस्पताल में आग, 10 नवजात जिंदा जले! राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने जताया शोक</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
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                <pubDate>Sat, 16 Nov 2024 12:01:33 +0530</pubDate>
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                <title>Happy Father&amp;#8217;s Day : एक ऐसा &amp;#8216;शब्द&amp;#8217; जिसके बिना किसी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती!</title>
                                    <description><![CDATA[Happy Father’s Day : किसी के भी जीवन में पिता की क्या भूमिका होती है, इसे शब्दों में बयां करने की भी जरूरत नहीं है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/father-without-whom-one-cannot-even-imagine-life/article-58716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/fathers-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Happy Father’s Day : किसी के भी जीवन में पिता की क्या भूमिका होती है, इसे शब्दों में बयां करने की भी जरूरत नहीं है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस यानी फादर्स डे मनाया जाता है। Happy Father’s Day</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन और विविध परंपराओं के कारण उत्साह एवं उमंग से यह दिवस मनाया जाता है। हिन्दू परंपरा के मुताबिक पितृ दिवस भाद्रपद महीने की सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है। पिता एक ऐसा शब्द जिसके बिना किसी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक ऐसा पवित्र रिश्ता जिसकी तुलना किसी और रिश्ते से नहीं हो सकती।</p>
<h3>ग्रन्थों में माता-पिता और गुरु तीनों को ही सर्वोपरि माना गया</h3>
<p style="text-align:justify;">हमारे ग्रन्थों में माता-पिता और गुरु तीनों को ही सर्वोपरि माना गया है। इनकी सेवा और भक्ति में कसर रह जाए तो फिर ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं। और अगर हमने इनकी सेवा पूरे मन से की तो भगवान स्वयं कच्चे धागे से बंधे भक्त के पीछे-पीछे चल पड़ते हैं। आखिर श्रवण कुमार में ऐसा क्या खास था कि किसी भी भगवान से उनकी अहमियत कम नहीं है। माता-पिता की भक्ति और सेवा ने उसे भक्त प्रह्लाद और धु्रव के बराबर का आसन दिलाया है। पिता चाहे कैसे भी वचन बोले, कैसा भी बर्ताव करे, संतान को उनके प्रति श्रद्धा और विनम्रता से आज्ञाकारी होना ही चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">केवल इतना सूत्र भर साध लेने से हम उस ईश्वर के राज्य के अधिकारी बन जाते हैं, जिसे पाने के लिए जाने कितने तपस्वियों ने शरीर गलाया, बरसों साधना की। कन्धे पर माता-पिता को लेकर तीर्थ कराने निकला श्रवण जब उनकी प्यास बुझाने के लिए पानी भरते हुए राजा दशरथ का एक तीर लग जाने से प्राण त्यागता है, तब वह अन्तिम इच्छा में यही कहता है-‘मेरे माता-पिता प्यासे हैं, आप उन्हें जाकर पानी पिला दें।’ प्राण त्यागते हुए भी जिसे अपने माता-पिता का ध्यान रहे, वह संतान उस युग में ही नहीं, इस युग में भी धन्य है। उसे किसी काल की परिधि में नहीं बांध सकते।</p>
<h3>मानवीय रिश्तों में दुनिया में सबसे बड़ा स्थान मां को दिया जाता है</h3>
<p style="text-align:justify;">मानवीय रिश्तों में दुनिया में सबसे बड़ा स्थान मां को दिया जाता है, लेकिन एक बच्चे को बड़ा और सभ्य बनाने में उसके पिता का योगदान कम करके नहीं आंका जा सकता। बच्चे को जब कोई खरोंच लग जाती है तो जितना दर्द एक मां महसूस करती है, वही दर्द एक पिता भी महसूस करते हैं। यह अलग बात है कि बेटे को चोट लगने पर मां पुचकार देती है, चोट लगी जगह पर फूंक की ठंडक देती है, वहीं पिता अपने बेटे की चोट पर व्यथित तो होता है लेकिन उसे बेटे के सामने मजबूत बने रहना है। Happy Father’s Day</p>
<p style="text-align:justify;">ताकि बेटा उसे देख कर जीवन की समस्याओं से लड़ने का पाठ सीखे, सख्त एवं निडर बनकर जिंदगी की तकलीफों का सामना करने में सक्षम हो। माँ ममता का सागर है पर पिता उसका किनारा है। माँ से ही बनता घर है पर पिता घर का सहारा है। माँ से स्वर्ग है माँ से बैकुंठ, माँ से ही चारों धाम है पर इन सब का द्वार तो पिता ही है। उन्हीं पिता के सम्मान में पितृ दिवस मनाया जाता है। आधुनिक समाज में पिता-पुत्र के संबंधों की संस्कृति को जीवंत बनाने की अपेक्षा है।</p>
<h3>19 जून 1910 को पहली बार फादर्स डे मनाया गया</h3>
<p style="text-align:justify;">सोनेरा डोड जब नन्ही-सी थी, तभी उनकी मां का देहांत हो गया। पिता विलियम स्मार्ट ने सोनेरो के जीवन में मां की कमी नहीं महसूस होने दी और उसे मां का भी प्यार दिया। एक दिन यूं ही सोनेरा के दिल में ख्याल आया कि आखिर एक दिन पिता के नाम क्यों नहीं हो सकता? इस तरह 19 जून 1910 को पहली बार फादर्स डे मनाया गया। 1924 में अमेरिकी राष्ट्रपति कैल्विन कोली ने फादर्स डे पर अपनी सहमति दी। फिर 1966 में राष्ट्रपति लिंडन जानसन ने जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाने की आधिकारिक घोषणा की।</p>
<p style="text-align:justify;">पिता आंसुओं और मुस्कान का एक समुच्चय है, जो बेटे के दुख में रोता तो सुख में हंसता है। उसे आसमान छूता देख अपने को कद्दावर मानता है तो राह भटकते देख अपनी किस्मत की बुरी लकीरों को कोसता है। पिता गंगोत्री की वह बूंद है जो गंगा सागर तक एक-एक तट, एक-एक घाट को पवित्र करने के लिए धोता रहता है। पिता वह आग है जो घड़े को पकाता है, लेकिन जलाता नहीं जरा भी। वह ऐसी चिंगारी है जो जरूरत के वक्त बेटे को शोले में तब्दील करता है। वह ऐसा सूरज है, जो सुबह पक्षियों के कलरव के साथ धरती पर हलचल शुरू करता है, दोपहर में तपता है और शाम को धीरे से चांद को लिए रास्ता छोड़ देता है।</p>
<h3>पिता वह पूनम का चांद है जो बच्चे के बचपने में रहता है</h3>
<p style="text-align:justify;">पिता वह पूनम का चांद है जो बच्चे के बचपने में रहता है, तो धीरे-धीरे घटता हुआ क्रमश: अमावस का हो जाता है। पिता समंदर के जैसा भी है, जिसकी सतह पर असंख्य लहरें खेलती हैं, तो जिसकी गहराई में खामोशी ही खामोशी है। वह चखने में भले खारा लगे, लेकिन जब बारिश बन खेतों में आता है तो मीठे से मीठा हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बचपन में चॉकलेट, खिलौने दिलाने से लेकर युवावर्ग तक बाइक, कार, लैपटॉप और उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने तक संतान की सभी मांगों को पिता ही पूरा करते रहते हैं लेकिन एक समय ऐसा आता है जब भागदौड़ भरी इस जिंदगी में बच्चों के पास अपने पिता के लिए समय नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखकर पितृ दिवस मनाने की परंपरा का आरम्भ हुआ। Happy Father’s Day</p>
<p style="text-align:right;"><strong>ललित गर्ग</strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><a title="कल्याण नगर व नाथूसरी चौपटा के शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर विंग के सेवादार नहर में उतरे और…" href="http://10.0.0.122:1245/the-volunteers-of-shah-satnam-ji-green-s-welfare-wing-took-out-the-body-from-the-canal/">कल्याण नगर व नाथूसरी चौपटा के शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर विंग के सेवादार नहर में उतरे और…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jun 2024 17:16:25 +0530</pubDate>
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                <title>Fake Degree : फर्जी डिग्रियों का काला कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[– Fake Degree – फर्जी डिग्री (Fake Degree) बेचने और फर्जी डिग्री से नौकरी पाने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इस मामले में राजस्थान सबसे आगे है जहां 23 लोग फर्जी डिग्री से पुलिस अधिकारी बन गए थे। इसी तरह बिहार में भी फर्जी डिग्री से शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/fake-degree/article-56136"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/fake-birth-and-death-certif.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Fake Degree –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">फर्जी डिग्री (Fake Degree) बेचने और फर्जी डिग्री से नौकरी पाने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इस मामले में राजस्थान सबसे आगे है जहां 23 लोग फर्जी डिग्री से पुलिस अधिकारी बन गए थे। इसी तरह बिहार में भी फर्जी डिग्री से शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आया है। पंजाब में भी फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र प्राप्त कर नौकरी पाने के मामले सामने आए हैं। आखिर जांच उपरांत फर्जी डिग्री वाले कर्मचारी बर्खास्त किए गए। यह काला कारोबार दो तरह से व्यवस्था और समाज के साथ अन्याय है। एक फर्जी डिग्री उन लाखों सक्षम लोगों के लिए धोखाधड़ी है, जिन्होंने कड़ी मेहनत, समर्पण और ईमानदारी से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, जब अयोग्य व्यक्ति जिम्मेदारी का पद संभालते हैं, तो वे अपनी अक्षमता के कारण अपनी सेवाएं देने में विफल साबित हो जाते हैं, इससे आम व्यक्ति को परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक अयोग्य डॉक्टर मरीज के जीवन के लिए खतरा ही होगा। वहीं एक शिक्षक जो राष्ट्रपति का नाम तक नहीं जानता वह पता नहीं कितने छात्रों का भविष्य बर्बाद कर देगा। चिंताजनक बात यह है कि फर्जी डिग्री का मामला सामने आने पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन भविष्य में कोई फर्जी डिग्री नहीं बेच सकेगा और फर्जी डिग्री के आधार पर कोई नौकरी नहीं पा सकेगा, इसके लिए कोई ठोस नीति या घोषणा नहीं हो सकी। इस संबंध में हर राज्य अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहा है। तकनीक का लाभ उठाकर देश की राष्ट्रीय नीति बनाई जा सकती है। तकनीक के युग में इस तरह की धोखाधड़ी को रोकना असंभव नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 08 Apr 2024 09:55:31 +0530</pubDate>
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                <title>तर्कसंगत हो चुनावी घोषणा-पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[Election Manifesto लोकसभा चुनाव के प्रचार के साथ ही चुनावी घोषणा-पत्र (Election Manifesto) जारी होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। वास्तव में घोषणा-पत्र देरी से जारी किए जा रहे हैं, फिर भी पार्टी की राजनीति, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मामलों के प्रति समझ व कार्यक्रम इन पत्रों से ही सामने आते हैं। अच्छा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/election-manifesto-should-be-logical/article-56074"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/politics-election-manifesto-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>Election Manifesto</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव के प्रचार के साथ ही चुनावी घोषणा-पत्र (Election Manifesto) जारी होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। वास्तव में घोषणा-पत्र देरी से जारी किए जा रहे हैं, फिर भी पार्टी की राजनीति, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मामलों के प्रति समझ व कार्यक्रम इन पत्रों से ही सामने आते हैं। अच्छा होगा यदि घोषणा-पत्र चुनाव की घोषणा से कुछ महीने पूर्व जारी हों। वास्तव में, देरी करना एक रणनीति है। पार्टियां अपना चुनाव घोषणा-पत्र एक दूसरे के बाद जारी करने के प्रयास में रहती हैं ताकि दूसरी पार्टी के दावों का तोड़ निकाला जा सके या उससे ज्यादा वायदे किए जा सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनावी घोषणा-पत्र की एक बड़ी कमजोरी यह है कि पार्टियां बड़े-बड़े वायदे करती हैं, विशेष तौर पर लुभावने वायदे, जिन्हें वास्तविक्ता में बदलना बेहद मुश्किल होता है। पार्टियां सरकार में आने के बाद चुनावी घोषणा पत्र में किए अधिकतर वायदे ही भूल जाती है। कई वायदे ऐसे भी हैं जिन्हें पूरा करना मतलब अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना है। ऐसे लुभावने वायदों के कारण ही कई राज्य कंगाल हो गए हैं, इसलिए चर्चा होती रही है कि चुनावी घोषणा-पत्र पर कानून बनना चाहिए, ताकि इसे तर्कसंगत बनाया जा सके। इसलिए पार्टियों के पदाधिकारियों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे जीतने की चाहत में आर्थिक नियमों की अनदेखी न करें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Apr 2024 10:32:33 +0530</pubDate>
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                <title>Punjab Govt vs Governor: राज्यपाल-मुख्यमंत्री के बीच टकराव, राज्यपाल की जिद्द गलत!</title>
                                    <description><![CDATA[Punjab Govt vs Governor: आखिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पंजाब सरकार के पक्ष को सही माना गया और चुनी हुई राज्य सरकार के साथ राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित की जिद्द को गलत करार दिया गया। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि राज्यपाल ने बिलों पर मुहर उस वक्त लगाई जब सरकार सुप्रीम कोर्ट में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/clash-between-governor-and-chief-minister-governors-insistence-is-wrong/article-54605"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/maan-governor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Punjab Govt vs Governor: आखिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पंजाब सरकार के पक्ष को सही माना गया और चुनी हुई राज्य सरकार के साथ राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित की जिद्द को गलत करार दिया गया। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि राज्यपाल ने बिलों पर मुहर उस वक्त लगाई जब सरकार सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि राज्य सरकारें विधानसभा से पारित बिलों को राज्यपाल से पास कराने के लिए बार-बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाती हैं। वास्तव में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच पिछले छह महीने से टकराव चल रहा था। Punjab News</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, राज्यपाल ने बजट सत्र की मंजूरी नहीं दी थी और आखिरकार सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा और अदालत ने भी बजट सत्र को जरूरी बताया। इस घटनाक्रम के बाद भी राज्यपाल ने पत्र लिखकर पंजाब सरकार के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हुए विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर मोहर नहीं लगाई। सवाल उठता है कि यदि राज्यपाल जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी नहीं देते हैं, तो विधायकों को चुनने या करोड़ों रुपये के खर्च पर चलने वाले सदन के लिए चुनाव कराने का क्या फायदा है। Punjab News</p>
<h3>राज्यपाल ने विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर मोहर नहीं लगाई</h3>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार, राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही दो धन विधेयक पारित कर दिए। मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच टकराव दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्यपाल ने विधान सभा के विशेष सत्र को भी अवैध घोषित करार दिया और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दरअसल, संविधान निर्माताओं ने केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए राज्यपाल का पद बनाया था, न कि किसी राजनीतिक टकराव के लिए। राज्यपाल के लिए पद संभालने के बाद दलगत राजनीति से ऊपर उठना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन देश में ऐसे कई उदाहरण हैं जब राज्यपालों ने अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि के अनुसार कार्य करते हुए किसी पार्टी विशेष के पक्ष में निर्णय लिए। राज्यपाल का पद सरकार का नेतृत्व करना है न कि खुद सरकार चलाने लगे और न ही सरकार में बाधा पैदा करना है। राज्यपाल को किसी राज्य को सीधे तौर पर तभी संभालना होता है जब सरकार अपना बहुमत खो देती है या सरकारी मशीनरी पूरी तरह से विफल हो जाती है। विपक्षी दलों ने जिस प्रकार सरकार का सहयोग किया, उससे यह स्पष्ट हो गया था कि राज्यपाल की भूमिका सही नहीं है। Punjab News</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 20:46:13 +0530</pubDate>
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                <title>Air Pollution: जहरीली होती हवा बन रही जानलेवा, जिम्मेवार कौन ?</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/poisonous-air-is-becoming-deadly-who-is-responsible/article-54452"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/air-pollution-situation-in-delhi-is-serious-on-friday.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Air Pollution: जीवन के लिए हवा का होना अनिवार्य है। हवा जब जहरीली हो जाती है तो जीवन के लिए खतरा बन जाती है। यह खतरा किसी एक विशेष के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए होता है, इसमें वो भी नहीं बच सकते जो प्रदूषण फैलाते हैं। इसीलिए प्रदूषण के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने की बजाए हर किसी को प्रदूषण न करने का ईमानदारी से प्रयास करना होगा। सरकारों का फर्ज है कि प्रदूषण रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं क्योंकि प्रदूषण कंट्रोल करने की सरकारी संस्थाएं भ्रष्टाचार के अड्डे बन गए हैं। Poisonous Air</p>
<h3>प्रदूषण जांच केंद्र भी मात्र औपचारिकता पूरी करते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">घूस लेकर किसी भी उद्योग को प्रदूषण का सर्टीफिकेट दे दिया जाता है। वाहनों की प्रदूषण जांच केंद्र भी मात्र औपचारिकता पूरी करते हैं, उन्हें अपनी फीस से मतलब होता है। अगर ऐसा नहीं होता तो सड़कों पर धुंआ उगलते वाहन कभी दिखाई ही न दें। फसलों के अवशेष, पराली जलाने की घटनाएं कुछ कम जरूर हुई हैं लेकिन खत्म नहीं हुई। हालांकि सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन योजना के लिए 3333 करोड़ रूपए की राशि भी जारी की है, जिसके तहत किसानों को फसल अवशेष निस्तारण के लिए मशीनों पर सब्सिडी दी जा रही है। जिसका धरातल पर असर भी दिखा है क्योंकि हरियाणा, पंजाब में ही पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी देखी गई।</p>
<h3>विश्व के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 6 शहर</h3>
<p style="text-align:justify;">जो राहत की बात है लेकिन ये घटनाएं 100 प्रतिशत खत्म होनी चाहिए। विश्व के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 6 शहर होना शर्म का विषय है। इन छह शहरों में दिल्ली और गाजियाबाद को छोड़ दें तो चार शहर हरियाणा के हैं जिनमें फरीदाबाद, पलवल, गुड़गांव और हिसार शामिल है। आखिर कब तक हम जहरीली हवा में सांस लेते रहेंगे। कब तक हम अपने खुद के प्राणों के दुश्मन बनते रहेंगे। प्रदूषण नियंत्रण करना सरकारों की भी जिम्मेदारी है लेकिन उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदारी हर इंसान की भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हर इन्सान प्रदूषण के प्रति जागरूक होगा और प्रदूषण नहीं फैलाएगा तब ही हम स्वच्छ हवा में सांस ले सकेंगे। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर किसी को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए सफाई अभियान, पौधारोपण, शौचालय बनवाना, प्रदूषण रहित गाड़ियों का इस्तेमाल करना, फसल अवशेष पराली इत्यादि न जलाना और कम दूरी के लिए मोटर वाहन का इस्तेमाल न करके पैदल या साईकिल का इस्तेमाल करना इत्यादि क्रांतिकारी अभियान चलाए हुए हैं। Poisonous Air</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="प्रदूषण एजेंसियां प्रदूषण के सही आंकड़े नहीं करती प्रकट!" href="http://10.0.0.122:1245/pollution-agencies-do-not-disclose-correct-pollution-figures/">प्रदूषण एजेंसियां प्रदूषण के सही आंकड़े नहीं करती प्रकट!</a></p>
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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 21:31:31 +0530</pubDate>
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