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                <title>विचार - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Human Body Facts: बिना खाना और पानी के इंसान कितने दिन जिंदा रह सकता है? जानिए शरीर के भीतर क्या होती है खामोश जंग</title>
                                    <description><![CDATA[Human Body Facts: बिना खाना और पानी के इंसान कितने दिन जिंदा रह सकता है? जानिए शरीर के भीतर क्या होती है खामोश जंग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-many-days-can-a-person-survive-without-food-and/article-86113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/human-body-facts.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Human Body Facts:  इंसानी शरीर प्रकृति की सबसे जटिल और अद्भुत रचनाओं में से एक है। यह खुद को बचाने के लिए कई तरह की प्रक्रियाओं को सक्रिय कर सकता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है। जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक भोजन और पानी नहीं मिलता, तो शरीर जीवित रहने के लिए अपनी जमा ऊर्जा का उपयोग करना शुरू कर देता है। हालांकि, भोजन और पानी दोनों की कमी अंततः मौत का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिक और चिकित्सकीय दृष्टि से इंसान बिना खाना और पानी के कितने समय तक जीवित रह सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पानी के बिना ज्यादा दिन जीवित रहना मुश्किल | Human Body Facts</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार, इंसान के लिए भोजन से कहीं अधिक जरूरी पानी होता है। सामान्य परिस्थितियों में एक स्वस्थ व्यक्ति पानी के बिना लगभग 3 से 5 दिन तक ही जीवित रह सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तो डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे खून गाढ़ा होने लगता है और कोशिकाओं तक ऑक्सीजन तथा पोषक तत्वों की आपूर्ति प्रभावित होती है। गंभीर स्थिति में मस्तिष्क, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पानी मिले तो बिना भोजन के कई सप्ताह तक रह सकता है शरीर</h4>
<p style="text-align:justify;">यदि व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में साफ पानी मिलता रहे लेकिन भोजन न मिले, तो शरीर अपेक्षाकृत लंबे समय तक जीवित रह सकता है। मेडिकल अध्ययनों के अनुसार, परिस्थितियों और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति के आधार पर कोई व्यक्ति लगभग 30 से 60 दिनों तक या कुछ मामलों में इससे भी अधिक समय तक जीवित रह सकता है। हालांकि इस दौरान शरीर लगातार कमजोर होता जाता है और चिकित्सकीय जोखिम बढ़ते रहते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भूख लगने पर शरीर कैसे बनाता है ऊर्जा?</h4>
<p style="text-align:justify;">भोजन नहीं मिलने पर शरीर सबसे पहले अपने ग्लूकोज भंडार का उपयोग करता है। इसके खत्म होने के बाद ऊर्जा के लिए शरीर में जमा फैट (चर्बी) को जलाना शुरू करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब फैट का भंडार भी कम हो जाता है, तो शरीर मांसपेशियों में मौजूद प्रोटीन को तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करने लगता है। इसी कारण लंबे समय तक भूखे रहने वाले व्यक्ति का वजन तेजी से घटने लगता है और शरीर बेहद कमजोर दिखाई देने लगता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कब बढ़ जाता है मौत का खतरा?</h4>
<p style="text-align:justify;">लंबे समय तक भोजन की कमी से शरीर में गंभीर कुपोषण विकसित हो सकता है। जैसे-जैसे मांसपेशियां गलती हैं, वैसे-वैसे हृदय सहित कई महत्वपूर्ण अंग कमजोर होने लगते हैं। अत्यधिक कमजोरी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, संक्रमण, अंगों की विफलता और हृदय संबंधी समस्याएं जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ऐसे मामलों में मौत का कारण अक्सर हृदय विफलता या मल्टीपल ऑर्गन फेलियर बनता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हर व्यक्ति के लिए समय सीमा अलग हो सकती है</h4>
<p style="text-align:justify;">यह तय नहीं है कि हर व्यक्ति समान अवधि तक बिना भोजन या पानी के जीवित रह सकेगा। कई कारक इस पर प्रभाव डालते हैं, जैसे:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>उम्र</li>
<li>शरीर का वजन</li>
<li>फैट की मात्रा</li>
<li>स्वास्थ्य की स्थिति</li>
<li>मौसम और तापमान</li>
<li>शारीरिक गतिविधि का स्तर</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में जोखिम अधिक होता है। वहीं अत्यधिक गर्म मौसम में शरीर तेजी से पानी खोता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पानी की कमी से क्यों होती है जल्दी मौत?</h4>
<p style="text-align:justify;">जब शरीर को कई दिनों तक पानी नहीं मिलता, तो किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती। इससे शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। धीरे-धीरे मस्तिष्क, हृदय, किडनी और अन्य अंग प्रभावित होते हैं। मेडिकल भाषा में इसे <strong>मल्टीपल ऑर्गन फेलियर</strong> कहा जाता है। यह स्थिति जानलेवा होती है और तत्काल चिकित्सा सहायता के बिना व्यक्ति का बचना बेहद मुश्किल हो जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 13:08:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>3 in 1 MSG Bhandara: ऐसे बेमिसाल वचन, जिनसे यह साफ जाहिर होता है&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/such-incomparable-words-from-which-it-becomes-abundantly-clear/article-83551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/3-in-1-msg-bhandara-26.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>सतगुरु के वचन मानवता के लिए वरदान होते हैं, जो हर युग की चुनौतियों और जरूरतों के अनुसार रूहानी रहबर मानवता के भले के लिए ऐसे परोपकार करते हैं, जिनकी महिमा और दयालुता के लिए शुक्रिया अदा करने के लिए मानव बुद्धि के पास शब्द नहीं होते। रूहानियत बेहद गहरी होती है और रूहानी रहबर का हर कदम न सिर्फ उनके श्रद्धालुओं/मुरीदों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण कायनात की भलाई के लिए होता है। 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>सच्चे सतगुरु और डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज और सच्चे दाता रहबर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने डेरे के बारे में, साध-संगत और गुरगद्दी के बारे में ऐसे बेमिसाल वचन फरमाए, जिनसे यह साफ जाहिर होता है कि तीनों बॉडियां एक ही रूहानी ज्योत हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां इसी महान परोपकार को थ्री-इन-वन और एमएसजी का नाम देते हैं। वैसे भी रूहानियत का संदेश यह है कि सतगुरु कहीं जाता ही नहीं, वह सदा है, बस चोला बदलता है, ज्योत वही काम करती है।</p>
<h3>18 अप्रैल, 1960 को पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने मानवता का उद्धार करना शुरू किया</h3>
<p>18 अप्रैल, 1960 को सच्चे मुर्शिदे कामिल पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने नूरी चोला बदलकर पूजनीय बेपरवाह शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में मानवता का उद्धार करना शुरू किया और तीसरी बॉडी के बारे में भी वचन फरमाए कि सात साल (1967) बाद तीसरी बॉडी के रूप में आएंगे। गुरगद्दी की बख्शीश के बाद भी पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ”आपां” और ”आपणा” शब्द ही इस्तेमाल करते थे, न कि ”तुम” या ‘हम”! पूजनीय परम पिता जी ने चोला बदलते समय भी पूज्य हजूर पिता जी की छाती पर अपने पावन कर-कमल बार-बार लगाकर वचन फरमाए, ”हम कहीं नहीं चले, तेरे यहाँ (दिल) रहेंगे।”</p>
<p>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने थ्री-इन-वन के महान परोपकार को ”एमएसजी” का रूप दिया है। आप जी फरमाते हैं कि आज भी सब कुछ ”शाह मस्ताना जी, शाह सतनाम जी” ही कर रहे हैं। पूज्य हजूर पिता जी इसी अभेदता को इन शब्दों के माध्यम से भी कलमबद्ध करते हैं:</p>
<h3>”खुद ही सजदा करूं, खुद ही कबूल करूं” | 3 in 1 MSG Bhandara</h3>
<p>इसी तरह, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के वचन पूज्य हजूर पिता जी की दया-मेहर के रूप में स्पष्ट नजर आ रहे हैं। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने यह भी फरमाया कि ”सरसा-नेजिया एक हो जाएगा, संगत ही संगत होगी, थाली फैंकी जाएगी तो थाली नीचे नहीं गिरेगी।” भंडारों के दौरान साध-संगत के इक्ट्ठ से वचन हुबहु पूरे होते देखे जाते हैं।</p>
<p>प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं।यह भी तथ्य हैं कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने पूज्य हजूर पिता जी को गुरगद्दी की बख्शीश से पहले ही स्पष्ट इशारा कर दिया था कि परम पिता जी ही हजूर पिता जी के रूप में काम करेंगे। पूजनीय परम पिता जी को जब यह बताया गया कि श्री गुरुसर मोडिया वाले नंबरदार का लड़का (पूज्य हजूर पिता जी) हर सत्संग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में साध-संगत को लेकर जाता है, तो पूजनीय परम पिता जी ने आप जी से बातचीत करते हुए वचन फरमाए, ”अपना तो फिर काम यही है।’ 3 in 1 MSG Bhandara</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज के बहुत सारे वचन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के रूप में पूरे हुए और बहुत सारे वचन पूज्य हजूर पिता जी के रूप में पूरे हो रहे हैं। करोड़ों साध-संगत अपने दाता सतगुरु एमएसजी को थ्री-इन-वन दिवस पर करोड़ों बार सजदा और धन्यवाद करती है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 11:23:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की चुनौतियां और विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[Donald Trump: संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रम्प विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता के प्रमुख रहे हैं। लंबे समय तक यह धारणा प्रचलित रही कि ब्रिटेन सबसे पुराना लोकतंत्र है, भारत सबसे बड़ा और अमेरिका सबसे प्रभावशाली। ट्रम्प ने 2017 से 2021 तक अपने पहले कार्यकाल में एक ऐसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/challenges-and-controversies-of-trumps-second-term/article-83272"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Donald Trump: संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रम्प विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता के प्रमुख रहे हैं। लंबे समय तक यह धारणा प्रचलित रही कि ब्रिटेन सबसे पुराना लोकतंत्र है, भारत सबसे बड़ा और अमेरिका सबसे प्रभावशाली। ट्रम्प ने 2017 से 2021 तक अपने पहले कार्यकाल में एक ऐसे नेता की छवि बनाई, जो परंपरागत राजनीतिक ढांचे से अलग था। कुछ लोगों के लिए वे स्पष्टवादी और निर्णायक नेता थे, जबकि अन्य के लिए उनकी शैली असामान्य और विवादास्पद रही। 2020 के चुनाव में हार के बाद उनके समर्थकों द्वारा संसद भवन पर किया गया आक्रमण लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। दूसरे कार्यकाल में, जो 2025 में आरंभ हुआ, ट्रम्प का व्यक्तित्व और कार्यशैली पहले से अधिक आक्रामक और असंतुलित दिखाई देने लगी। पहले उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता था जो आर्थिक प्रगति और वैश्विक शांति की बात करता है। वे स्वयं यह दावा भी करते रहे कि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त करने में भूमिका निभाई। परंतु वास्तविकता में उनके प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का उनका वादा अधूरा रह गया।ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने उनकी विदेश नीति की सीमाओं को उजागर किया। उन्होंने यह घोषणा की थी कि यह संघर्ष शीघ्र समाप्त हो जाएगा, परंतु स्थिति उलझती चली गई। उनके भाषणों में प्रयुक्त कठोर और असंयमित शब्दों ने कूटनीतिक संतुलन को और कमजोर किया। किसी भी राष्ट्र के प्रमुख से अपेक्षा की जाती है कि वह संयम और संतुलन का परिचय दे, परंतु ट्रम्प के बयान अक्सर उग्र और टकरावपूर्ण रहे। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या उनकी रणनीति वास्तव में स्थिरता लाने की दिशा में थी या केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित थी। ट्रम्प की भाषा और व्यवहार ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित किया। उन्होंने कई अवसरों पर भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर बताया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता। इसी प्रकार, यूरोप के नेताओं के प्रति उनकी टिप्पणियों ने पश्चिमी सैन्य गठबंधन में असहजता पैदा की। नाटो जैसे महत्वपूर्ण संगठन के साथ उनके संबंधों में तनाव स्पष्ट दिखाई दिया। यह स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब ईरान संघर्ष के दौरान सहयोगी देशों ने खुलकर उनका साथ देने से इनकार कर दिया। Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">यूरोपीय देशों ने धीरे-धीरे अपनी रक्षा नीतियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि वे अब अमेरिका पर पूर्ण निर्भरता नहीं रखना चाहते। ग्रीनलैंड को खरीदने जैसी असामान्य मांगों और यूक्रेन नीति में अस्पष्टता ने भी सहयोगी देशों के विश्वास को कमजोर किया। घरेलू स्तर पर भी ट्रम्प को तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने उनकी नीतियों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए। इन आंदोलनों में लाखों लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि अमेरिकी समाज का एक बड़ा वर्ग उनकी कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है। आलोचकों का आरोप है कि उनके निर्णय लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करते हैं और सत्ता के केंद्रीकरण को बढ़ावा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक नीतियों को लेकर भी असंतोष देखा गया। यह कहा गया कि उनकी नीतियां उच्च आय वर्ग के पक्ष में अधिक झुकी हुई हैं, जिससे सामाजिक असमानता बढ़ती है। आव्रजन नीति को लेकर भी व्यापक आलोचना हुई। अमेरिका को लंबे समय से अवसरों की भूमि माना जाता है, जहां विभिन्न देशों के लोग आकर अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसे में कठोर आव्रजन नीतियां इस मूल भावना के विपरीत प्रतीत होती हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर भी ट्रम्प की रणनीतियां कई बार असंगत दिखाई दीं। उनकी जल्दबाजी और आक्रामक रुख ने कई बार तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाया। यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेताओं ने भी उनकी नीतियों पर चिंता व्यक्त की। जनमत सर्वेक्षणों में उनके समर्थन में गिरावट इस असंतोष का स्पष्ट संकेत है। Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रम्प के प्रति समर्थन में कमी आई है। कई देश अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं, परंतु ट्रम्प के नेतृत्व में नहीं। भारत का दृष्टिकोण भी इसी दिशा में देखा जा सकता है। पिछले वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत हुए हैं, विशेषकर रक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में। परंतु व्यापार नीतियों, विशेष रूप से आयात शुल्क के मामले में ट्रम्प के निर्णयों ने असहमति उत्पन्न की। अमेरिकी न्यायालयों द्वारा कुछ शुल्कों को निरस्त किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनकी नीतियां कानूनी चुनौती का सामना कर रही थीं। पहले कार्यकाल में ट्रम्प ने चीन के प्रति कठोर रुख अपनाया और उसे प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना। उन्होंने पाकिस्तान को भी कठघरे में खड़ा किया, जो भारत के हित में था। परंतु बाद के समय में उनकी नीति में बदलाव देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों की चर्चा अक्सर होती रही है, परंतु नीतिगत स्तर पर कई निर्णय भारत के हितों के अनुरूप नहीं रहे। यह विरोधाभास उनके नेतृत्व की जटिलता को दर्शाता है। समग्र रूप से देखा जाए तो ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल विवादों, विरोध और अस्थिरता से घिरा रहा है। उनकी नीतियों और व्यवहार ने न केवल अमेरिका के भीतर असंतोष बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अनिश्चितता को जन्म दिया है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या उनका नेतृत्व भविष्य के लिए उपयुक्त है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि विश्व शांति और स्थिरता के लिए एक संतुलित और संयमित नेतृत्व की आवश्यकता है, जो संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दे। Donald Trump<br />
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="स्टारेक्स यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति चल रहा BPT कोर्स, छात्रों ने लगाया शोषण का आरोप" href="http://10.0.0.122:1245/starex-university-is-running-bpt-course-without-permission/">स्टारेक्स यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति चल रहा BPT कोर्स, छात्रों ने लगाया शोषण का आरोप</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:15:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>“मेहनत का सम्मान करें, अगर खरीदने का इरादा नहीं है, तो किसी का समय बर्बाद न करें”</title>
                                    <description><![CDATA[आज के तेज़ रफ्तार जीवन में समय सबसे कीमती चीज़ों में से एक बन चुका है। फिर भी, हैरानी की बात है कि कई लोग दूसरों के समय और मेहनत की कद्र नहीं करते—खासकर दुकानों और शोरूम में। एक आम लेकिन अनदेखी आदत यह है कि लोग दुकानों में जाते हैं, स्टाफ से कई सामान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/respect-hard-work-if-you-have-no-intention-of-buying-do-not-waste-anyones-time/article-82697"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/kota.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज के तेज़ रफ्तार जीवन में समय सबसे कीमती चीज़ों में से एक बन चुका है। फिर भी, हैरानी की बात है कि कई लोग दूसरों के समय और मेहनत की कद्र नहीं करते—खासकर दुकानों और शोरूम में। एक आम लेकिन अनदेखी आदत यह है कि लोग दुकानों में जाते हैं, स्टाफ से कई सामान निकलवाते हैं, सब कुछ बिखेर देते हैं और फिर बिना कुछ खरीदे चले जाते हैं। पहली नज़र में यह सामान्य लग सकता है। आखिरकार, चीज़ें देखना भी खरीदारी का एक हिस्सा है। लेकिन असली और बेवजह की गतिविधि के बीच एक बारीक अंतर होता है। जब ग्राहक बिना खरीदने की मंशा के दुकानदार से ढेर सारे कपड़े निकलवाते हैं, ज्वेलरी दिखवाते हैं या कई प्रोडक्ट्स दिखाने को कहते हैं, तो यह उनके प्रति असम्मान को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर एक सामान के पीछे मेहनत छिपी होती है। दुकानदार और उनका स्टाफ घंटों लगाकर सामान को व्यवस्थित रखते हैं, ताकि ग्राहकों को एक अच्छा अनुभव मिल सके। जब बिना वजह सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया जाता है, तो इससे उनका समय और मेहनत दोनों बर्बाद होते हैं—जो वे किसी वास्तविक ग्राहक की मदद में लगा सकते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, यह व्यवहार शारीरिक और मानसिक रूप से भी थका देने वाला होता है। बार-बार कपड़े तह करना, शेल्फ़ ठीक करना और पूरे दिन बिखराव संभालना काफी मुश्किल हो जाता है। खासकर छोटे व्यापारियों के लिए, हर मिनट और हर संभावित ग्राहक बहुत महत्वपूर्ण होता है। एक जिम्मेदार और समझदार ग्राहक बनना बहुत आसान है। अगर आप सच में कुछ खरीदना चाहते हैं, तो बेझिझक देखें, सवाल पूछें और समय लें। लेकिन अगर आपका खरीदने का कोई इरादा नहीं है, तो बेहतर है कि आप स्टाफ को बेवजह परेशान न करें। उनकी मेहनत का सम्मान करें, उनके समय की कद्र करें और उनके काम की गरिमा बनाए रखें। अच्छे संस्कार केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार में दिखते हैं। एक छोटी सी समझदारी किसी के दिन को बेहतर बना सकती है। अंत में, सम्मान दो-तरफा होता है। जब हम दूसरों के समय और मेहनत की कद्र करते हैं, तो हम एक अधिक संवेदनशील, सभ्य और जिम्मेदार समाज की ओर कदम बढ़ाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">“एक छोटा सा कदम—दूसरों के समय और मेहनत का सम्मान—पूरी दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है।<br />
आज से शुरुआत करें, क्योंकि बदलाव हमेशा हमसे ही शुरू होता है।”</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. माधवी बोरसे सिंह इन्सां</strong><br />
<strong>अंतराष्ट्रीय शिक्षाविद </strong><br />
<strong>कोटा, राजस्थान।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:22:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Healthy Sleep Diet: अच्छी डाइट अच्छी नींद लाने में होती है कारगर, संतुलित भोजन से तन-मन दोनों को मिलता है आराम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली में काम का दबाव, डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग और अनियमित दिनचर्या के कारण बड़ी संख्या में लोग नींद से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। देर रात तक मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग करना, तनाव और असंतुलित भोजन की आदतें धीरे-धीरे नींद के प्राकृतिक चक्र को प्रभावित करती हैं। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/a-good-diet-is-effective-in-inducing-good-sleep-a-balanced-diet-provides-rest-to-both-body-and-mind/article-82222"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/good-sleep.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली में काम का दबाव, डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग और अनियमित दिनचर्या के कारण बड़ी संख्या में लोग नींद से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। देर रात तक मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग करना, तनाव और असंतुलित भोजन की आदतें धीरे-धीरे नींद के प्राकृतिक चक्र को प्रभावित करती हैं। इसके कारण कई लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी देर तक सो नहीं पाते और सुबह उठने पर थकान महसूस करते हैं। Healthy Sleep Diet</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद केवल आराम के लिए ही नहीं बल्कि शरीर और मस्तिष्क के समुचित कार्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद से शरीर की ऊर्जा पुनः प्राप्त होती है, दिमाग तरोताजा रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। यदि लगातार नींद पूरी न हो तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और शारीरिक संतुलन पर दिखाई देने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारे खान-पान का नींद की गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो शरीर को शांत करने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं। यदि इनका सेवन सही समय पर किया जाए तो नींद आने में आसानी हो सकती है और गहरी नींद भी प्राप्त होती है।</p>
<h3>सोने से पहले दूध पीने की आदत लंबे समय से प्रचलित</h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय परंपरा में सोने से पहले दूध पीने की आदत लंबे समय से प्रचलित रही है। आयुर्वेद में भी इसे लाभकारी माना गया है। दूध में पाए जाने वाले कुछ पोषक तत्व शरीर में ऐसे रसायनों के निर्माण में सहायता करते हैं जो मस्तिष्क को शांत करते हैं और नींद की प्रक्रिया को सहज बनाते हैं। कई लोग हल्दी मिलाकर गुनगुना दूध पीते हैं, जिसे शरीर को आराम देने और मांसपेशियों को शिथिल करने में उपयोगी माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा फाइबर से भरपूर आहार भी नींद के लिए लाभदायक माना जाता है। साबुत अनाज, दालें, फल और हरी सब्जियां पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं। जब पाचन प्रणाली सही तरीके से काम करती है तो शरीर हल्का महसूस करता है और रात में बेहतर नींद आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोटीन युक्त भोजन भी शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। दाल, पनीर, दही, अंडा और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि रात का भोजन हल्का और संतुलित होना चाहिए। अत्यधिक तैलीय या मसालेदार भोजन से अपच और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे नींद प्रभावित होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त विश्राम को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए तो नींद की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। Healthy Sleep Diet</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 16:00:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Grapes Benefits: जानिए हरे और काले अंगूर में से कौन से हैं ज्यादा पौष्टिक? क्या कहता है आयुर्वेद?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सर्दी के अंत और गर्मी की शुरुआत के बीच आने वाले फरवरी और मार्च के महीनों में बाजारों में अंगूर की भरपूर उपलब्धता रहती है। मौसम में हल्की ठंड और बढ़ती गर्मी के कारण लोग ठंडक देने वाली चीजें खाने-पीने की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे समय में प्रकृति का दिया हुआ अंगूर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/find-out-which-is-more-nutritious-green-or-black-grapes-what-does-ayurveda-say/article-82031"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/grapes-benefits.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। सर्दी के अंत और गर्मी की शुरुआत के बीच आने वाले फरवरी और मार्च के महीनों में बाजारों में अंगूर की भरपूर उपलब्धता रहती है। मौसम में हल्की ठंड और बढ़ती गर्मी के कारण लोग ठंडक देने वाली चीजें खाने-पीने की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे समय में प्रकृति का दिया हुआ अंगूर एक ऐसा फल है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर को शीतलता और ऊर्जा भी प्रदान करता है। Grapes Benefits</p>
<p style="text-align:justify;">अंगूर केवल एक साधारण फल नहीं, बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर प्राकृतिक औषधि के रूप में भी जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे द्राक्षा कहा गया है और इसे शरीर को ठंडक देने तथा ताकत बढ़ाने वाला माना जाता है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी अंगूर में कई प्रकार के विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरे अंगूर के लाभ | Grapes Benefits</h3>
<p style="text-align:justify;">हरे अंगूर स्वाद में मीठे और पचने में हल्के होते हैं। आयुर्वेदिक दृष्टि से यह पित्त को शांत करने में सहायक माने जाते हैं। गर्मी के मौसम में यह शरीर में पानी की कमी को दूर करने और शरीर को तरोताजा बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा हरे अंगूर पेट में होने वाली जलन को कम करने में भी उपयोगी माने जाते हैं। तेज गर्मी या लू के मौसम में इनका सेवन शरीर को ठंडक प्रदान कर सकता है और थकान को भी कम करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">काले अंगूर के फायदे</h3>
<p style="text-align:justify;">काले अंगूर पोषक तत्वों के मामले में काफी समृद्ध माने जाते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को कई प्रकार के आंतरिक नुकसान से बचाने में सहायक होते हैं। नियमित रूप से काले अंगूर खाने से शरीर में रक्त की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और कमजोरी दूर करने में भी मदद मिलती है। त्वचा और बालों के लिए भी काले अंगूर लाभकारी बताए जाते हैं। इनमें पाए जाने वाले विटामिन-सी और विटामिन-ई त्वचा की चमक बढ़ाने तथा बालों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। साथ ही यह शरीर की थकान को दूर कर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फल खाने का सही समय जानना भी उतना ही जरूरी है जितना कि उनका सेवन करना। अंगूर का सेवन सुबह या दोपहर के समय करना अधिक लाभकारी माना जाता है। हालांकि इसे खाली पेट खाने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार अंगूर में विटामिन-सी की मात्रा होती है, इसलिए खाली पेट खाने पर कुछ लोगों को पेट में जलन या असहजता महसूस हो सकती है। बेहतर परिणाम के लिए इसे भोजन के बीच या हल्के नाश्ते के साथ लेना उपयुक्त माना जाता है। Grapes Benefits</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:19:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Water Quality: यहाँ नल का पानी ही है मिनरल वाटर जैसा, बिना फिल्टर लोग सीधे पीते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[Water Quality: भारत समेत दुनिया के कई देशों में लोग पानी को उबालकर या फिल्टर लगाकर पीते हैं। लेकिन कुछ देशों में घर के नल से निकलने वाला पानी इतना साफ और सुरक्षित होता है कि उसे सीधे पीना संभव है। ऐसे देशों में बोतलबंद पानी खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ती। संयुक्त राष्ट्र और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/here-the-tap-water-is-like-mineral-water-people-drink-it-directly-without-filtering/article-81961"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/water-quality.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Water Quality: भारत समेत दुनिया के कई देशों में लोग पानी को उबालकर या फिल्टर लगाकर पीते हैं। लेकिन कुछ देशों में घर के नल से निकलने वाला पानी इतना साफ और सुरक्षित होता है कि उसे सीधे पीना संभव है। ऐसे देशों में बोतलबंद पानी खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ती। संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, धरती पर मौजूद कुल पानी का सिर्फ 2.5% से 3% हिस्सा ही मीठा पानी है। इसमें से भी बहुत कम हिस्सा सीधे पीने योग्य है। यही वजह है कि साफ और सुरक्षित पेयजल आज एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई देशों में पानी की गुणवत्ता खराब है, जबकि कुछ देशों में यह विश्व स्तर पर बेहतरीन है।</p>
<p style="text-align:justify;">पानी की गुणवत्ता मापने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय सूचकांक मौजूद हैं। इनमें प्रमुख है Environmental Performance Index (EPI), जिसे Yale University और Columbia University द्वारा जारी किया जाता है। EPI में पानी की स्वच्छता, सीवेज ट्रीटमेंट और जल प्रबंधन जैसे मानकों के आधार पर देशों को अंक दिए जाते हैं। हालिया रिपोर्ट्स में यूरोप और नॉर्डिक देशों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>स्विट्ज़रलैंड:</strong> ग्लेशियर, पहाड़ों और झीलों से आने वाला पानी यहाँ बेहद साफ है। सरकार ने जल गुणवत्ता पर सख्त नियम लागू किए हैं, और नल का पानी नियमित रूप से जांचा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>फिनलैंड:</strong> हजारों झीलों से आने वाला पानी प्राकृतिक रूप से साफ है। EPI में फिनलैंड को जल गुणवत्ता में उच्च अंक मिले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नॉर्वे:</strong> पहाड़ी और बर्फ से पिघलने वाला पानी, सरकारी नियंत्रण और कम औद्योगिक प्रदूषण की वजह से बेहद साफ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आइसलैंड:</strong> ज्वालामुखीय चट्टानों से होकर गुजरने वाला पानी प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करता है। यहां बोतलबंद पानी की खपत बहुत कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा ऑस्ट्रिया, ग्रीस, आयरलैंड, माल्टा, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम के नलों का पानी भी सीधे पीने लायक है। इस प्रकार, यदि आप भविष्य में किसी सफर पर जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि कहां का नल का पानी पीना सुरक्षित है, तो यूरोप और नॉर्डिक देश इस मामले में सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 10:46:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Medicinal Plants: इन पौधों का हो घर में सहारा, त्वचा और पेट संबंधी रोगों से मिलेगा छुटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[घर को हरियाली से सजाने के लिए लगाए गए पौधे केवल सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। आयुर्वेद में अनेक ऐसे पौधों का उल्लेख मिलता है, जिनकी पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। यहां तीन ऐसे पौधों की जानकारी दी जा रही है, जिन्हें घर में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/support-these-three-plants-at-home-to-relieve-skin-and-stomach-ailments/article-81771"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/medicinal-plants.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/medicinal-plants.jpg" alt="Medicinal-Plants" width="526" height="291"></img>घर को हरियाली से सजाने के लिए लगाए गए पौधे केवल सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। आयुर्वेद में अनेक ऐसे पौधों का उल्लेख मिलता है, जिनकी पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। यहां तीन ऐसे पौधों की जानकारी दी जा रही है, जिन्हें घर में आसानी से लगाया जा सकता है और जिनके पत्ते विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी माने जाते हैं। Medicinal Plants</p>
<h3 style="text-align:justify;">नीम के पत्ते: प्राकृतिक शुद्धिकारक</h3>
<p style="text-align:justify;">नीम का वृक्ष भारतीय परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी पत्तियां, छाल, फल और टहनियां सभी उपयोगी हैं, परंतु पत्तियों का महत्व विशेष है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संभावित लाभ:</h3>
<p style="text-align:justify;">पाचन तंत्र में हानिकारक जीवाणुओं को नियंत्रित करने में सहायक।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्त शोधन में उपयोगी माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">त्वचा रोगों में पत्तियों का लेप लाभकारी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्नान के जल में पत्तियां डालने से त्वचा संक्रमण में राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीम को आंगन में लगाया जा सकता है या पत्तियों को सुखाकर सुरक्षित भी रखा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मदार के पत्ते: दर्द व सूजन में उपयोगी</p>
<p style="text-align:justify;">मदार का पौधा प्रायः खुले स्थानों में सहज उपलब्ध होता है। इसके पत्तों में औषधीय गुण पाए जाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संभावित लाभ:</h3>
<p style="text-align:justify;">जोड़ों के दर्द में पारंपरिक रूप से प्रयोग किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर हल्का गरम कर प्रभावित स्थान पर रखने से आराम मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूजन कम करने में सहायक माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">(नोट: मदार का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि इसका रस त्वचा पर तीव्र प्रभाव डाल सकता है।)</p>
<p style="text-align:justify;">बेहया के पत्ते: चर्म रोगों में लाभकारी</p>
<p style="text-align:justify;">बेहया एक बारहमासी पौधा है, जिसे गमले में भी उगाया जा सकता है। इसके पत्ते और पुष्प दोनों औषधीय उपयोग में आते हैं।</p>
<h3>संभावित लाभ: | Medicinal Plants</h3>
<p style="text-align:justify;">दाद, खुजली और अन्य त्वचा विकारों में लेप के रूप में प्रयोग।</p>
<p style="text-align:justify;">जोड़ों के दर्द और सूजन में पारंपरिक उपयोग।</p>
<p style="text-align:justify;">ध्यान रहे कि बेहया के पत्तों का सेवन सामान्यतः नहीं किया जाता; इसका उपयोग बाह्य रूप से ही उचित माना जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सावधानी आवश्यक</h3>
<p style="text-align:justify;">इन पौधों का प्रयोग पारंपरिक ज्ञान पर आधारित है। किसी भी प्रकार के सेवन या उपचार से पूर्व आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है। Medicinal Plants</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 15:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्र आत्महत्या और समाज की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. प्रियंका सौरभ। कोटा में एक और छात्रा की आत्महत्या होना शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक सोच और उस तथाकथित ‘सफलता मॉडल’ पर गहरी चोट है, जिसे हमने वर्षों से बिना प्रश्न किए स्वीकार कर लिया। आत्महत्या करने वाली छात्रा कृति का सुसाइड नोट पूरे समाज के सामने एक आईना है। यह आईना माता-पिता, कोचिंग संस्थानों, स्कूलों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/student-suicide-and-societys-responsibility/article-81387"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/suicide.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डॉ. प्रियंका सौरभ। कोटा में एक और छात्रा की आत्महत्या होना शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक सोच और उस तथाकथित ‘सफलता मॉडल’ पर गहरी चोट है, जिसे हमने वर्षों से बिना प्रश्न किए स्वीकार कर लिया। आत्महत्या करने वाली छात्रा कृति का सुसाइड नोट पूरे समाज के सामने एक आईना है। यह आईना माता-पिता, कोचिंग संस्थानों, स्कूलों और नीति-निर्माताओं तक को अपनी जिम्मेदारी देखने के लिए मजबूर करता है। कृति ने अपने सुसाइड नोट में सरकार से अपील की कि यदि वास्तव में बच्चों की जान बचानी है, तो कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण जरूरी है। उसका कहना था कि ऐसे संस्थान बच्चों को भीतर से तोड़ देते हैं। यह वाक्य किसी क्षणिक भावनात्मक आवेग का परिणाम नहीं था। यह उस मानसिक दबाव की आवाज थी, जिसे आज लाखों छात्र रोज महसूस करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भारत में कोचिंग संस्थान शिक्षा के सहायक माध्यम नहीं रह गए हैं। वे एक बड़े व्यावसायिक उद्योग का रूप ले चुके हैं। कोटा, सीकर, हैदराबाद, दिल्ली और पटना जैसे शहर अब ‘एजुकेशन हब’ कहलाते हैं, जहां हर साल हजारों किशोर अपने माता-पिता की उम्मीदों का बोझ लेकर पहुंचते हैं। इन उम्मीदों का केंद्र कुछ सीमित शब्दों में सिमट गया है- आईआईटी, नीट, एम्स, रैंक और सेलेक्शन। इस व्यवस्था में छात्र को लगातार यह महसूस कराया जाता है कि चयन नहीं हुआ तो वह जीवन में असफल है। सफलता की यह परिभाषा इतनी संकीर्ण हो चुकी है कि औसत छात्र के लिए उसमें सम्मानजनक स्थान ही नहीं बचता।</p>
<p style="text-align:justify;">कृति का यह कथन कि ‘90 से अधिक अंक लाने वाली लड़की भी आत्महत्या कर सकती है’ हमारे समाज की उस गलत धारणा को तोड़ता है, जिसमें हम मानते हैं कि मानसिक संकट केवल कमजोर छात्रों को होता है। आज दबाव केवल परीक्षा पास करने का नहीं, बल्कि हर समय श्रेष्ठ साबित होने का बन गया है। बच्चा अपने भीतर एक आदर्श छात्र की छवि ढोता रहता है, जिसमें वह रोज हारता है। अच्छे अंक भी अब मानसिक शांति नहीं दे पा रहे, क्योंकि समस्या पढ़ाई की नहीं, उस वातावरण की है जो पढ़ाई के नाम पर तैयार किया गया है। कृति द्वारा अपनी मां के लिए लिखी पंक्तियों में कहा कि उसे विज्ञान पढ़ने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उसकी रुचि अंग्रेजी साहित्य और इतिहास में थी। माता-पिता कई बार यह भूल जाते हैं कि बच्चा उनकी अधूरी महत्वाकांक्षाओं का विस्तार नहीं, एक स्वतंत्र व्यक्तित्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज स्कूल और कोचिंग संस्थान बच्चों को गणित के सूत्र और परीक्षा की रणनीतियां तो सिखा रहे हैं, पर जीवन जीने की समझ नहीं दे पा रहे। वे बच्चों को यह नहीं सिखा रहे कि असफलता से कैसे उबरें, तनाव को कैसे पहचानें और मदद मांगना कमजोरी नहीं है। रैंक लिस्ट, मॉक टेस्ट और लगातार तुलना बच्चों के मन में हीनभावना भर देती है। वे खुद को केवल अंकों और चयन के चश्मे से देखने लगते हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि हम सफलता को किस रूप में परिभाषित करते हैं। क्या मानसिक रूप से स्वस्थ रहना, संतोष के साथ जीवन जीना और अच्छा इंसान बनना सफलता नहीं है? यदि हमने अब भी नहीं सोचा, तो हम ऐसी पीढ़ी तैयार करेंगे जो योग्य तो होगी, पर भीतर से टूटी हुई होगी। कृति का सुसाइड नोट एक सामाजिक चेतावनी है। अब भी नहीं बदले, तो सवाल यह नहीं रहेगा कि अगला बच्चा कौन होगा, सवाल यह होगा कि क्या हम किसी बच्चे को बचा भी पाएंगे।<br />
(यह लेखक के अपने विचार हैं)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/student-suicide-and-societys-responsibility/article-81387</link>
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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 14:21:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana Pension: बुजुर्गों की पेंशन बंद करने से बुजुर्गों की आंखों में नमी&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी बुजुर्ग की लाठी न टूटने पाए…. Haryana Pension: सुरेश। आज हरियाणा सरकार की गलत नीतियों और प्रायोजित षड्यंत्र के तहत बुजुर्गों की पेंशन बंद करने से बुजुर्गों की आंखों में नमी और चेहरों पर मायूसी छाई हुई है चौधरी देवीलाल जी ने बुढ़ापा पेंशन को एक सपना देखते हुए शुरू किया था जिसमें […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-suspension-of-senior-citizens-pension-has-brought-tears-to-their-eyes-and-disappointment-to-their-faces/article-80895"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/haryana-pension.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">किसी भी बुजुर्ग की लाठी न टूटने पाए….</h3>
<p style="text-align:justify;">Haryana Pension: <strong>सुरेश।</strong> आज हरियाणा सरकार की गलत नीतियों और प्रायोजित षड्यंत्र के तहत बुजुर्गों की पेंशन बंद करने से बुजुर्गों की आंखों में नमी और चेहरों पर मायूसी छाई हुई है चौधरी देवीलाल जी ने बुढ़ापा पेंशन को एक सपना देखते हुए शुरू किया था जिसमें उनकी सोच थी कि किसी भी बुजुर्ग की लाठी न टूटने पाए और किसी को अपनी छोटी-छोटी जरूरत के लिए औलाद के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़े। उनका मानना था कि बुढ़ापे में जब इंसान कमाने लायक नहीं रहता तो उसे अपनी छोटी-छोटी जरूर के लिए अपने बच्चों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है वह चाहते थे कि हर बुजुर्ग की जेब में अपना पैसा हो ताकि उसे किसी के आगे झुकना ना पड़े, उनका मानना था कि जिस की जेब में पैसा होगा, उसका जग में सम्मान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ताऊ देवीलाल जी ने यह योजना बुजुर्गों को भीख देने के लिए नहीं बल्कि उनको मान और सम्मान प्रदान करने की योजना के विचार से बुढ़ापा पेंशन शुरू की थी। सरकारों ने निरंतर अपने समय में इसको आगे बढ़ाया और पिछली सरकार में जब जननायक जनता पार्टी की यानि हमारी सरकार में भागीदारी थी तब इस वृद्धा पेंशन को 3000 तक पहुंचाया था।पिछली सरकार में भी एक बार बीजेपी ने षड्यंत्र के तहत बुजुर्गों को पेंशन काटने की कोशिश की थी, लेकिन जननायक जनता पार्टी की सत्ता में भागीदारी से और लगातार विरोध करने से बीजेपी को अपने इस विचार को बैक फुट पर लाना पड़ा था। लेकिन इस बार बीजेपी की अपनी सरकार है और अपने वायदे के अनुसार वह बुजुर्गों को पेंशन बढ़ा कर देने से तो पीछे हटी ही, लेकिन एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने बुजुर्गों की पेंशन काटने का काम शुरू कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बुढ़ापा पेंशन आपके द्वारा दिया दान नहीं है बल्कि यह हरियाणा सरकारों के द्वारा वृद्ध लोगों के सम्मान के लिए शुरू की गई है बुजुर्गों ने अपनी जवानी प्रदेश के निर्माण में लगाई है जब उनकी पेंशन रूकती है तो केवल उनका पैसा नहीं रुकता बल्कि उनका आत्म सम्मान भी प्रभावित होता है जिससे वह अपना छोटा-मोटा खर्चे चलाते हैं। हरियाणा में बुजुर्गों की बुढ़ापा सम्मान पेंशन काटे जाने का जननायक जनता पार्टी कड़ी निंदा करती हैं। पेंशन बुजुर्गों के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा होती है और इसे बिना किसी ठोस कारण के बंद करना उनके साथ अन्याय है सरकार को चेतावनी है कि सरकार इस फैसले पर तुरंत रोक लगाए और सभी प्रभावित बुजुर्गों की पेंशन दोबारा शुरू करे। अगर सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो हम इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर के जन आंदोलन शुरू कर सरकार को इस फैसले से पीछे हटाने का काम करेंगे। Haryana Pension</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="New Income Tax Act: इस तारीख से लागू होगा नया इनकम टैक्स, निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान" href="http://10.0.0.122:1245/the-new-income-tax-law-will-come-into-effect-from-april-one-announced-nirmala-sitharaman/">New Income Tax Act: इस तारीख से लागू होगा नया इनकम टैक्स, निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 17:42:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Bhandara: संतों का शुभ आगमन मानवता की तकदीर लिखता है</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: 25 जनवरी का नाम सुनते ही आत्मा आनंद में विभोर हो जाती है। संतों का अवतार दिवस मानवता के लिए वरदान होता है। यह दिवस त्यौहार बन जाता है, क्योंकि संतों का शुभ आगमन मानवता की तकदीर लिखता है। रूहानियत, इन्सानियत और संस्कृति ही किसी राष्टÑ, देश, समाज व क्षेत्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-incarnation-of-saints-is-a-blessing-for-humanity/article-80684"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/25-january.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: 25 जनवरी का नाम सुनते ही आत्मा आनंद में विभोर हो जाती है। संतों का अवतार दिवस मानवता के लिए वरदान होता है। यह दिवस त्यौहार बन जाता है, क्योंकि संतों का शुभ आगमन मानवता की तकदीर लिखता है। रूहानियत, इन्सानियत और संस्कृति ही किसी राष्टÑ, देश, समाज व क्षेत्र की खुशहाली, अमन-शान्ति  और भाईचारे रूपी भवन की नींव होते हैं। MSG Bhandara</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">विज्ञान, तकनीक और बुद्धि भौतिक प्रगति तो दे सकती हैं, लेकिन जीवन में संतोष और आनंद रूहानी मार्गदर्शक के नेतृत्व से ही मिलता है। यदि केवल भौतिक प्रगति ही अपने आप में पूर्ण होती, तो दुनिया कब की स्वर्ग बन चुकी होती। रूहानियत के बिना मानव जीवन के उच्चतम आदर्श को प्राप्त नहीं कर सकता।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">सच्चे संत रूहानियत का संदेश देकर जलते-बलते संसार के दुखी लोगों के दिलों में ठंडक भर देते हैं। उनके पावन वचनों को सुनकर निर्दोषों पर तलवार चलाने वालों के हाथ वहीं रुक जाते हैं, पापी भक्त बन जाते हैं, लोगों का खून चूस-चूसकर धन जोड़ने वाले तौबा करके दानी सज्जन बन जाते हैं। दुश्मनियां भाईचारे में बदल जाती हैं और नफरत व ईर्ष्या में फंसे लोग प्रेम के मार्ग पर चल पड़ते हैं। MSG Bhandara</div>
<h3>25 जनवरी के पावन दिवस को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अवतार धारण किया</h3>
<div style="text-align:justify;">25 जनवरी के पावन दिवस को इस धरती पर सच्चे सतगुरु, रूहानी रहबर, दयालुता के पुंज, समाज सुधारक, डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अवतार धारण किया। आप जी ने सभी धर्मों के लोगों को एक जगह पर बैठाकर, ईश्वर, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की भक्ति और मानवता का सच्चा पाठ पढ़ाया। आप जी ने जब पावन गुरुगद्दी संभाली, वह ऐसा दौर था जब दुनिया दो विश्व युद्धों की मार सहने के बाद भी तीसरे युद्ध की तैयारियों में जुटी हुई थी। पूरी दुनिया में नस्ल, रंग, धर्म, जाति के नाम पर झगड़े हो रहे थे।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">तथाकथित आधुनिकता के हावी हाने से भारतीय संस्कृति के महान मूल्यों का पतन शुरू हो गया था। गांव-गांव शराब के ठेके खुलने लगे थे, भ्रष्टाचार जोर पकड़ रहा था, हरामखोरी के अड्डे बढ़ने लगे थे। इस काले दौर में आप जी ने सत्य का ऐसा प्रकाश फैलाया कि लाखों लोग शराब और अन्य नशे छोड़कर सत्संग सुनने और भक्ति के मार्ग पर चल पड़े। दुनिया भर से लोगों ने जब सरसा में रूहानी ज्योति का प्रकाश देखा, तो वे सात समंदर पार से श्रद्धावश सरसा की तरफ खिंचे चले आए।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">आज आप जी का युवा स्वरूप, तीसरी बॉडी पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां  दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा का संदेश फैला रहे हैं और सवा सात करोड़ से ज्यादा लोग नशा और बुराईयां छोड़ कर मानवता की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं। एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, आॅस्ट्रेलिया सहित कोई भी महाद्वीप ऐसा नहीं है, जहां डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु मानवता की सेवा में न जुटे हों। ऐसे महान सतगुरु जी के पावन अवतार दिवस की सारी सृष्टि को कोटि-कोटि बधाई हो। MSG Bhandara</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संपादक</strong></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
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                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 23:59:24 +0530</pubDate>
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                <title>Lal Bahadur Shastri: भारतीय राजनीति के अमूल्य रत्न: लाल बहादुर शास्त्री</title>
                                    <description><![CDATA[श्वेता गोयल। Lal Bahadur Shastri: भारत के इतिहास में ऐसे अनेक नेता हुए हैं जिन्होंने अपने जीवन से देशवासियों को प्रेरित किया। उनमें से एक नाम है लाल बहादुर शास्त्री, जो अपनी ईमानदारी, सादगी और नैतिकता के लिए आज भी याद किए जाते हैं। 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे शास्त्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/priceless-gem-of-indian-politics-lal-bahadur-shastri/article-80230"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/lal-bahadur-shastri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्वेता गोयल। </strong>Lal Bahadur Shastri: भारत के इतिहास में ऐसे अनेक नेता हुए हैं जिन्होंने अपने जीवन से देशवासियों को प्रेरित किया। उनमें से एक नाम है लाल बहादुर शास्त्री, जो अपनी ईमानदारी, सादगी और नैतिकता के लिए आज भी याद किए जाते हैं। 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे शास्त्री जी ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया और बाद में देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। उनकी पुण्यतिथि 11 जनवरी को हमें यह अवसर देती है कि हम उनके जीवन और आदर्शों को फिर से स्मरण करें।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री बनने से पहले शास्त्री जी विदेश मंत्री, गृहमंत्री और रेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके थे। हर पद पर उन्होंने अपनी सादगी और ईमानदारी से लोगों का विश्वास जीता। जब वे प्रधानमंत्री बने, तो उन्हें सरकारी आवास और इंपाला शेवरले कार मिली। परंतु उन्होंने उस कार का उपयोग केवल राजकीय अतिथियों के स्वागत के समय ही किया। एक बार उनके बेटे सुनील शास्त्री ने निजी कार्य के लिए वही कार ले ली। जब शास्त्री जी को यह पता चला तो उन्होंने तुरंत ड्राइवर से दूरी पूछी और रिकॉर्ड में लिखवाया कि चौदह किलोमीटर निजी उपयोग हुआ है। इसके बाद उन्होंने पत्नी ललिता को निर्देश दिया कि सात पैसे प्रति किलोमीटर की दर से सरकारी कोष में राशि जमा कर दी जाए।  प्रधानमंत्री बनने के बाद जब वे पहली बार अपने घर काशी लौटे, तो प्रशासन ने स्वागत की तैयारियां महीनों पहले शुरू कर दीं। उनके घर तक जाने वाली गलियां संकरी थीं, इसलिए प्रशासन ने उन्हें चौड़ा करने का निर्णय लिया। शास्त्री जी को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने स्पष्ट संदेश भेजा कि किसी भी मकान को तोड़ा न जाए, वे पैदल ही घर जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में लाला लाजपत राय की संस्था ‘सर्वेंट्स आॅफ इंडिया सोसायटी’ गरीब स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को आर्थिक मदद देती थी। उस समय शास्त्री जी जेल में थे। उन्होंने अपनी पत्नी को पत्र लिखकर पूछा कि क्या उन्हें संस्था से समय पर पैसे मिल रहे हैं और क्या वह पर्याप्त हैं। पत्नी ने उत्तर दिया कि उन्हें पचास रुपये मिलते हैं, जिनमें से चालीस रुपये ही खर्च होते हैं और दस रुपये बच जाते हैं। यह सुनकर शास्त्री जी ने संस्था को पत्र लिखकर कहा कि उनके परिवार को केवल चालीस रुपये ही भेजे जाएं और शेष राशि किसी अन्य जरूरतमंद को दी जाए।  रेल मंत्री रहते हुए शास्त्री जी ने यात्रियों की समस्याओं को समझने के लिए जनरल डिब्बे में सफर किया। वहां उन्होंने देखा कि यात्रियों को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तुरंत निर्णय लिया कि जनरल डिब्बों में भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। पहली बार जनरल डिब्बों में पंखे लगवाए गए और यात्रियों के लिए खानपान की व्यवस्था करने हेतु पैंट्री सेवा शुरू की गई। Lal Bahadur Shastri</p>
<p style="text-align:justify;">11 जनवरी 1966 को रूस यात्रा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना पूरे देश के लिए गहरा आघात थी, परंतु उनका जीवन प्रेरणादायक बन गया। वे आज भी अपने आदर्शों और नेतृत्व क्षमता के कारण अमर हैं।  लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व केवल सत्ता में बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है। उनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की भावना आज भी हमारे लिए प्रेरणा है। उनकी पुण्यतिथि पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके पदचिन्हों पर चलकर देश और समाज की सेवा करेंगे। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।<br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 14:20:33 +0530</pubDate>
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