Dogs: आपके घर में है पालतू कुत्ता तो ये खबर ध्यान से पढ़ लो …..

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Dogs: आपके घर में है पालतू कुत्ता तो ये खबर ध्यान से पढ़ लो .....

Street Dogs: कुत्तों के काटने की लगातार होने वाली घटनाओं के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने खतरनाक कुत्तों को रखने के मुद्दे पर अहम आदेश दिया है। पिटबुल-टेरियर-अमेरिकन बुलडॉग और रॉटविलर जैसे खतरनाक कुत्तों की नस्लों को रखने के लाइसेंस पर प्रतिबंध लगाने और रद्द करने के मुद्दे पर अदालत ने केंद्र सरकार को तीन माह के अंदर निर्णय लेने के लिए कहा है। अदालत ने अक्टूबर माह में याचिकाकर्ता लॉ-फर्म द्वारा दिए गए प्रतिवेदन पर जल्द से जल्द विचार करने को कहा है। दरअसल बीते दिनों देश में लगातार कुत्ते के काटने व हमला करने से कई लोगों की जानें गई है। कुछ लोग तो बिना लाइसेंस के ही खतना नस्ल के कुत्तों को पाल रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि ऐसी नस्ल के कुत्तों द्वारा अपने मालिकों सहित लोगों पर हमला करने की कई घटनाएं हुई हैं। टाइम मैगजीन के अनुसार अमेरिका में पिटबुल और टेरियर्स की संख्या कुत्तों की आबादी का केवल छह प्रतिशत है लेकिन वर्ष 1982 से कुत्तों द्वारा किए गए जाने वाले 68 प्रतिशत हमलों और कुत्तों से संबंधित 52 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। याचिका के अनुसार आम तौर पर पिट बुल एंड टेरियर्स अन्य कुत्तों के प्रति आक्रामक होते हैं।Dogs

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पिटबुलए रॉटवीलर टेरियर्स, बैंडोग अमेरिकन बुलडॉग, जापानी टोसा, बैंडोगनियपोलिटन मास्टिफ वुल्फ डॉग-बोअरबो-लप्रेसा कैनारियो फिला ब्रासील-रो-टोसा इन-केन कोरसो-गो अर्जेंटीनो जैसे कुत्तों को प्रतिबंधित करना और उनके पालन-पोषण के लाइसेंस को रद्द करना समय की मांग है। याचिका में दावा किया गया था कि यह केंद्र और राज्य सरकार का कर्तव्य है कि लोगों के हित में काम करे और ऐसे खतरनाक नस्लों के कुत्तों के काटने की किसी भी बड़ी घटना के जोखिम से नागरिकों के जीवन को बचाने के लिए पूर्वव्यापी कार्रवाई करें। दरअसल दोनों तरह के कुत्तों से मानव जीवन पर प्रहार हो रहा है चूंकि जो लोग खतरनाक नस्ल पालते हैं उनसे दूसरो को खतरा होता लेकिन अपनी जान का भी खतना बना होता है वहीं स्ट्रीट डॉग से बाहरी लोगों का लगातार खतरा रहता है। Dogs

कुत्तों की लगातार वृध्दि होने से मानव जीवन पर संकट आ गया है। बिना वजह लोगों का मरना एक चिंता विषय बन चुका है जिसके लिए कोर्ट संज्ञान लेते हुए इस पर सरकार को एक्शन लेने को कहा है। जहां कुछ लोग अपनी सुरक्षा के हवाले से कुत्तों को पालने के लिए आवेदन देते हैं वही कुछ अपने स्टैंडर्ड को को मेंटेन करने के लिए लोग इन नस्लों को पालते हैं।कुत्ता काटने के कारण हुई मौतों में करीब 36 फीसदी लोगों की मौत रेबीज की वजह से होती है जिनमें से अधिकांश मामले तो रिपोर्ट ही नहीं होते। भारत में सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते हैं व हमारे यहां ऐसा कानून है कि आवारा कुत्तों को मारा नहीं जा सकता जिसके वजह से इनकी संख्या में लगातार वृद्धि होना जारी है और इससे मानव जीवन पर संकट बना हुआ है।

इसके अलावा आवारा पशुओं की वजह से हर रोज कई लोगों की जान जा रही है और इसके बचाव लिए सरकारों के पास कोई भी प्लान नही हैं। ज्ञात हो कि बीते दिनों वाघ बकरी के मालिक पराग देसाई रोजाना आवारा कुत्तों की वजह से मौत की खबर अभी शांत नही हुई थी कि इतमें ऐसी कुछ खबरें और भी आ गई। पराग देसाई की मौत पर देश भर में चर्चा हो रही है चूंकि यह एक हाई प्रोफाइल व्यक्ति से जुड़ा हुआ मामला है लेकिन बता दिया जाए कि हमारे देश में हर रोज ऐसी सैकड़ों मौतें होती हैं। इस मामले को लेकर कई बार केन्द्र व राज्य सरकारों को अवगत भी कराया जा चुका लेकिन जब भी कोई घटना होती है उसके हफ्ते भर ही शासन.प्रशासन एक्शन में आता है और फिर वैसी ही स्थिति हो जाती है। कुछ समय पहले भी दिल्ली में एक प्रोफेसर को कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला था।

दरअसल ऐसी मौते किसी के द्वारा की गई हत्या नही मानी जाती लेकिन यदि इसकी गंभीरता को समझा जाए तो यह संबंधित विभाग द्वारा यह हत्या ही माननी चाहिए चूंकि आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए एक अच्छा खासा बजट होता है लेकिन फिर भी इस पर काम नही होता। कई बार तो ऐसी खबरें सामने आती है कि छोटे बच्चों को भी कुत्तों ने नोच कर खा लिया। मानव जीवन की अप्राकृतिक हानि बहुत तकलीफ देती है लेकिन हम इसके लिए न जाने क्यों गंभीर नही हैं। कई जगह तो ऐसी हैं जहां स्ट्रीट डॉग्स की वजह से लोगों ने उस रास्ते से जाना ही बंद कर दिया और ऐसे कई वर्षों से चल रहा है लेकिन बावजूद इसके निगम इस पर कोई भी एक्शन लेने को तैयार नही है।

एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स के एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा आवारा कुत्तों के हमले भारत में होते हैं। इस मामले लगी याचिका में याचिकाकर्ता बैरिस्टर लॉ.फर्म ने आरोप लगाया था कि खतरनाक नस्लों के कुत्ते भारत सहित 12 से अधिक देशों में प्रतिबंधित हैं, लेकिन दिल्ली नगर निगम अभी भी इनका पंजीकरण पालतू जानवर के रूप में कर रहा है। लेकिन वहीं दूसरी खतरनाक कुत्तों को बेचने व पालने वालों को भी यह समझना होगा कि वह इन नस्लों को आगे न बढ़ाए और पालें।

दरअसल देशभर में कई लोगों ने खतरनाक कुत्तों को प्रजनन करके उनको बेचने का व्यापार बना रखा है। यदि सरकार खतरनाक कुत्तों को रखने के लिए लाइसेंल नही भी देगी तो वह चोरी से इनको रखेगें। दरअसल सरकार को इसके लिए एक विशेष अतिरिक्त विभाग बनाकर इस मामले पर बडा काम करना होगा चूंकि जितना आसान लग रहा है उतना है नही। सबसे पहले तो इसके प्रजनन पर प्रतिबंध लगाना होगा चूंकि जब से नस्ल आगे बढ़ेगी नही तो यह खत्म हो जाएगी दूसरा इसकी खरीद-फिरोख्त पर पूर्णत प्रतिबंध लगा देने चाहिए और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान कर देना चाहिए जिससे कोई कानून के विपरीत न जाए।
(यह लेखक के अपने विचार हैं)
योगेश कुमार सोनीवरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार