नेत्रहीनता के बावजूद शैक्षणिक उपलब्धियों की तरफ लगातार आगे बढ़ रही रमनदीप कौर

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यूपीएससी परीक्षा पास कर एक होनहार अधिकारी बनना है रमनदीप कौर का सपना

  • यूट्यूब के सहारे कर रही यूपीएससी की तैयारी
  • यूजीसी नैट की परीक्षा पहली बार में ही कर चुकी है पास

बुढ़लाडा(सच कहूँ/संजीव तायल)। अगर दिल में जुनून हो कुछ कर दिखाने का, तो बड़ी से बड़ी बाधा भी उसकी राह नहीं रोक सकती। आज के वैज्ञानिक युुग में भी कई लोग लड़कियों को बोझ समझते हैं परन्तु कुछ ऐसे माता-पिता भी हैं जो बेटी को भगवान की दी हुई नियामत समझते हुए बेटों के समान अवसर उपलब्ध करवा रहे हैं। जिला मानसा के बुढलाडा शहर के निवासी एक दैनिक वेतन भोगी मजदूर बिल्लू सिंह और शिन्दर कौर भी ऐसे आशावादी लोगों में से एक हैं, जिन्होंने अनेकों परेशानियों के बावजूद अपनी सौ प्रतिशत नेत्रहीन बेटी का पूरे लाड-प्यार से पालन-पोषण ही नहीं किया बल्कि उसको पैरों पर खड़ा करने के लिए उच्च स्तरीय पढ़ाई भी करवाई।

25 वर्षीय नेत्रहीन रमनदीप कौर बेशक यह दुनिया को देखने के योग्य नहीं है परन्तु वह अपने माता-पिता पर गर्व महसूस करती है और उनको ही अपने दोनों नेत्र मानती है, जिनके द्वारा वह आज एमए (राजनीति शास्त्र) और यूजीसी नैट की परीक्षा पास कर इन दिनों ‘जातीवाद और राजनीति’ विषय पर पीएचडी करने के साथ-साथ वह देश की उच्च कोटी की यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही है, वो भी बिना किसी खास सुविधा के सिर्फ यू ट्यूब के सहारे अपनी तैयारी कर रही रमनदीप कौर का कहना है कि वह यूपीएससी परीक्षा पास कर एक होनहार अधिकारी बनना चाहती है, जिससे अपने मुकद्दरों के सहारे बैठे लोगों को बताया जा सके कि यदि आप मेहनत करने का दम रखते हो तो कोई भी बड़ी से बड़ी मुसीबत आपके रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती।

रमनदीप कौर को स्कूलों में नहीं मिला था दाखिला

रमनदीप के पिता बिल्लू सिंह और माता शिन्दर कौर ने बताया कि उनकी बेटी जन्म से ही पूरी तरह नेत्रहीन थी, इस बेटी के 4-5 की होने पर इसका दाखिला करवाने के लिए कुछ स्कूलों में गए परन्तु सभी ने रमनदीप कौर को दाखिला देने से इन्कार कर दिया परन्तु उनके घर के नजदीक सरकारी प्राथमिक स्कूल किला मोहल्ला के उस समय के मुख्य अध्यापिका भरपूर कौर ने हमारी बेटी को पढ़ाने की हामी भर दी और जिन्होंने अपनी मेहनत से रमनदीप कौर को पाँचवी कक्षा पास करवाकर बुढलाडा में ही आठवीं करने उपरांत इसे आगे वाली पढ़ाई के लिए पटियाला में ब्लांईड स्कूल में दाखिल करवा दिया।

यहां से 12वीं पास करने और चण्डीगढ़ के डीएवी कॉलेज से बीए और पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए (राजनीति शास्त्र) पास कर यूजीसी नैट की परीक्षा पहली बार में ही पास करने में सफल हो सकी है। मजदूर बिल्लू सिंह का कहना है कि ऐसे विशेष जरूरतमंद परिवारों को सरकार कम से -कम 10 हजार रुपए महीना खर्च के तौर पर दे, जिससे वह बुढापे में भी अपने दिन आसानी से काट सकें।

 

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