लघुकथा : पानी भी सुखाकर पीया कीजिए

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थोड़े दिन हुए एक सज्जन हमारे यहां आकर ठहरे। अपना भोजन वह स्वयं ही पकाते थे। एक दिन उन्होंने कच्ची सब्जी बाजार से लाकर धूप में सुखाने के लिए रख दी। हम सब को बहुत ही आश्चर्य हुआ। उनसे पूछा तो बोले, ‘‘धूप में सुखाने से कीटाणु मर जाएंगे, और मैं जीवित कीटाणुओं को खान से बच जाऊंगा।’’
इस पर छोटी मुन्नी बोल उठी, ‘‘फिर तो आप पानी भी सुखा कर पिया कीजिए, उस में भी तो कीटाणु होते हैं।’’
-स. विश्वनाथ

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