Kisan Andolan: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

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Kisan Andolan: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

Punjab and Haryana High Court: डॉ. संदीप सिंहमार। किसान आंदोलन को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसान तो सिर्फ आपके रास्ते से गुजर रहे हैं, आप उनका रास्ता कैसे रोक सकते हैं? इस दौरान पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए पंजाब,हरियाणा व केंद्र सरकार को नोटिस दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान केंद्र ने हाईकोर्ट में कहा कि वह किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बातचीत को लेकर तैयार है। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र हरियाणा और पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब, हरियाणा व केंद्र सरकार को आपस में मिलकर इस मामले को सुलझाना चाहिए। हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। किसी भी सूरत में कानून व्यवस्था खराब ना हो। Kisan Andolan

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बॉर्डर बंद करने व इंटरनेट बंद करने के मुद्दे पर हुई सुनवाई | Kisan Andolan

हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर एडवोकेट उदय प्रताप ने बॉर्डर बंद करने और इंटरनेट बंद करने के आदेश को चुनौती दी है। एडवोकेट उदय प्रताप ने कहा कि किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करना है। इसके बावजूद भी हरियाणा सरकार ने पंजाब से लगते बॉर्डर सील कर दिए हैं। इसके अलावा 15 जिलों में धारा 144 लगाई गई है। वहीं सात जिलों में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है। एडवोकेट उदय प्रताप सिंह ने दलील देते हुए कहा कि बॉर्डर बंद करने व इंटरनेट बंद करने से लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। अपनी जनहित याचिका में एडवोकेट उदय प्रताप ने तर्क दिया कि पुलिस द्वारा बल के अनुचित उपयोग और डराने धमकाने की रणनीति के साथ इस तरह की कार्रवाई न केवल मौलिक अधिकारों का हनन करती है, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन के सिद्धांतों को भी कमजोर करती है। उन्होंने हाई कोर्ट से इस जनहित मुद्दे पर हरियाणा सरकार के किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाए गए सभी कदमों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
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सार्वजनिक मार्गों पर कब्जा नहीं किया जा सकता | Kisan Andolan

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि विरोध प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक मार्गो पर कब्जा नहीं किया जा सकता और प्रशासन को सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण या अवरोधों से मुक्त रखना चाहिए। उन्होंने कहा हरियाणा के अधिकारियों द्वारा किसी के विरोध करने के अधिकार को दबाने का प्रयास को दर्शाता है, जो लोकतंत्र और अभिव्यक्ति के खिलाफ है।

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