सौहार्द से हो कृषि समस्याओं का समाधान

Farmers Protest

किसान संगठनों ने 13 फरवरी को दिल्ली कूच करने का ऐलान (Farmers Protest) किया है। वहीं, दिल्ली और हरियाणा पुलिस ने इसके मद्देनजर तैयारी कर ली है। पिछले दिनों केंद्र सरकार के तीन मंत्री चंडीगढ़ में एक बैठक कर चुके हैं और दूसरी मीटिंग की भी बात की गई। यदि दूसरी बैठक में सहमति बनी तो किसान इस आंदोलन को स्थगित कर देंगे। यह आवश्यक है कि इस मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाए। किसानों को भी बातचीत के रास्ते प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के टकराव से बचा जाए। यूं भी विचारों का युग है, यदि तर्क मजबूत है तो वह विचार स्वीकार कर लिया जाता है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि कृषि क्षेत्र बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार को किसानों की मांगों पर विचार कर समाधान निकालना चाहिए। वैसे भी यह नहीं होना चाहिए कि सुधार के लिए आंदोलन की ही नौबत आए। हमारा देश कृषि प्रधान देश है और 60 प्रतिशत से अधिक लोग कृषि पर निर्भर हैं। किसान भी देश का हिस्सा है। सरकार को भी कृषि संबंधी ऐसी नीतियां बनाने और निर्णय लेने की आवश्यकता है जिससे कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता खत्म हो। फसल के दाम कभी बढ़ जाते हैं तो कभी घट जाते हैं, यह भी एक बड़ी समस्या है। इस बार कपास काश्तकारों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ है। दरअसल, चिंतन और विचार-विमर्श से समस्या का समाधान आसानी से और बेहतर तरीके से निकाला जा सकता है। कानून व्यवस्था कायम रहे, इसके लिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी से काम करना होगा।

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