Successful Story: पिता-पुत्र का प्लास्टिक वेस्ट से 12 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर

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Successful Story: प्लास्टिक की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह किसी अन्य तत्व या जैविक चीजों की तरह पर्यावरण में घुलता नहीं, बल्कि सैकड़ों साल तक वैसे ही बना रहता है। साथ ही प्लास्टिक जिस जगह पर पड़ा रहता है उस जगह को अपने केमिकल से जहरीला भी बनाता जाता है। जिस मिट्टी में यह प्लास्टिक जाता है, उसे बंजर बना देता है। पानी में जाता है, तो पानी को न केवल जहरीला बनाता है, बल्कि जलीय जीवों के लिए मौत का कारण बन जाता है। Successful Story

बीते 50 वर्ष में हमने जितना उपयोग प्लास्टिक का बढ़ाया है, किसी अन्य चीज का इतनी तेजी से नहीं बढ़ाया। 1960 में दुनिया में 50 लाख टन प्लास्टिक बनाया जा रहा था, आज यह बढ़कर 300 करोड़ टन के पार हो चुका है। यानी हर व्यक्ति के लिए करीब आधा किलो प्लास्टिक हर वर्ष बन रहा है।

ऐसे में तमिलनाडु के पिता-पुत्र की जोड़ी के. शंकर और सेंथिल शंकर अपनी कंपनी श्री रेंगा पॉलिमर्स में हर दिन प्लास्टिक की 15 लाख बोतलों को रीसाइकल करते हैं। आमतौर पर ये बोतलें इस्तेमाल के बाद लैंडफिल में पहुंच जाती हैं। इस गंभीर मुद्दे के समाधान का उन्होंने शानदान तरीका खोज निकाला है। वे अपनी कंपनी में इस वेस्ट से फैशनेबल कपड़े बना रहे हैं। के. शंकर ने आईआईटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई सालों तक विदेश में नौकरी की। साल 2008 में भारत लौट आए और प्लास्टिक वेस्ट की समस्या पर काम करने लगे।

कई सालों तक उन्होंने प्लास्टिक रीसायकल किया। अब उनके बेटे सेंथिल शंकर एक कदम और आगे बढ़कर प्लास्टिक वेस्ट को सस्टेनेबल फैशन में बदल रहे हैं। सेंथिल ने साल 2021 में इकोलाइन नाम से एक क्लोथिंग ब्रांड लॉन्च किया। इसमें वो देशभर में कूड़ा उठाने वाले 50 हजार लोगों से प्लास्टिक की खाली बोतलें जमा करके टी-शर्ट, पेंट्स और ब्लेजर जैसी चीजें बना रहे हैं।

इस तरह से उन्होंने अब तक प्लास्टिक की करीब 50 लाख बोतलों को लैंडफिल में जाने से बचाया है। वो प्लास्टिक की 8 बोतलें इस्तेमाल करके एक शर्ट और करीबन 20 बोतलों से एक जैकेट बनाते हैं। उनका यह ब्रांड ज्यादा मशहूर तब हुआ जब फरवरी 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सस्टेनेबल ब्रांड ‘इकोलाइन’ को बढ़ावा देने के लिए संसद में उनकी बनाई जैकेट पहनी। उस जैकेट को प्लास्टिक की 25 बोतलों को रीसायकल करके बनाया गया था। प्रधानमंत्री ने इसे संसद के साथ-साथ जापान और ऑस्ट्रेलिया में भी पहना था।

सेंथिल कहते हैं, ‘हमें बहुत खुशी है कि हमने जिस ब्रांड के लिए इतनी कड़ी मेहनत की, उसके लिए हमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।’ फिलहाल उनके बनाए प्रोडक्ट्स की कीमत 500 से 6000 रुपये के बीच है। वहीं आज वह हर महीने 20,000 ऑर्डर के जरिए 12 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर कमा रहे हैं। Successful Story

देवेन्द्रराज सुथार, स्वतंत्र एवं युवा लेखक