पिता की मेहनत से मिला संबल, अब सीए बन गया श्रीगंगानगर का साहिल

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CA Sahil

पूज्य गुरु जी द्वारा दी गई प्रेरणा पर चलते हुए की लक्ष्य की प्राप्ति

श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया द्वारा घोषित सीए फाइनल परीक्षा और फाउंडेशन परीक्षा 2021 के घोषित परिणाम में श्रीगंगानगर का साहिल मिढ़ा भी सीए बन गया है। साहिल के सीए बनने का सफर इतना आसान नहीं जितना समझ लिया जाता है। घर के हालातों से जूझते और मिल रही असफलता से तो एक बार लगा कि वह कभी सीए नहीं बन पाएगा। पर पूज्य गुरू जी की प्रेरणा व अपने पिता का पसीने से लथपथ चेहरा जहन में आते ही फिर से हौंसला कर तैयारी करने लगा तो साहिल आज इस मुकाम पर पहुंच गया।

श्रीगंगानगर के बीआर मॉडल स्कूल से पढ़ाई का सफर शुरू हुआ जो बीआर अम्बेडकर राजकीय कॉलेज से बीकॉम व एमडी कॉलेज से एमकॉम से होता हुआ दिल्ली पहुंच गया। सीपीटी 2012 में आईपीसीसी 2013 में पास करने के बाद 2017 तक दिल्ली में ट्रैंनिग लेने के बाद फाईनली 2021 में साहिल सीए बन गया। साहिल के इस मुकाम तक पहुंचने में सीए संजीव कामरा, लोकेश गोयल, दिल्ली से सीए चांदनी मल्होत्रा व जीएसटी डिपार्टमेंट दिल्ली के दीपक गाबा का विशेष सहयोग रहा जो लगातार साहिल का हौंसला बढ़ाते रहे जिसका परिणाम सबके सामने है।

सुमरिन के साथ लगातार मेहनत करने से मिला परिणाम

साहिल के शब्दों में कहे तो डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की लक्ष्य को आंखों में उतारकर लगातार मेहनत करने व सुमरिन के वचनों को अपने जहन में उतारकर लगातार मेहनत करता रहा। पापा सुखदेव इन्सां एक छोटे से सेल्समेन थे जिन्हें मैं 20 साल से लगातार मेहनत करते देखता रहा। माता सुमन मिढा को कठिन परिस्थितियों से सामंजस्य से घर चलाने की कला को देखा। तो लगा कि मैं कुछ कर पाऊंगा पर जब 2017 का परिणाम आया और मैं असफल रहा तो मैं अंदर से टूट गया जिसके बाद घर के सदस्यों व दोस्तों ने पूज्य गुरू जी के वचनों को स्मरण करने व लगातार मेहनत करने के वचन याद दिलाए तो मैं फिर से मेहनत करने लगा जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

छह साल से कर रहे हैं प्रैक्टिस

लगातार असफलत हो रहा था और मेरा हौंसला टूट रहा था इसी दौरान सीए संजीव कामरा ने मेरा हौंसला बढ़ाया और अपने साथ प्रेक्टिस शुरू करवाई। जिसके बाद मैं इस व्यवसाय में उतर गया। दिनभर आफिस का कार्य फिर शाम 7 बजे से 12 बजे तक पढ़ाई फिर सुबह 5 से 10 बजे तक लगातार पढ़ाई की। सीए कामरा मेरा हौंसला बढ़ाते रहे और मैं अपने मुकाम को हासिल करने में जुटा रहा।

 

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