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    Vinoba Bhave

    ज्ञानकोष्ठ : जाने, कोन थे विनोबा भावे

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    विनोबा भावे का जन्म महाराष्ट्र के कोलाबा (अब रायगढ़) जिले के गागोडे गांव में 11 सितंबर 1895 को एक चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम नरहरि शंभू राव और माता का नाम रुक्मणि था। उनकी मां का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव था। वह भगवद्गीता, महा...
    aasha-bhosale

    ज्ञानकोष्ठ : आशा भोसले: 20 भाषाओं में गाए 12 हजार गाने

    प्रसिद्ध गायिका और लोगों के बीच आशा ताई के नाम से मशहूर आशा भोसले मंगलवार को 88 साल की हो गईं। उनका जन्म 8 सितंबर, 1933 को सांगली, महाराष्ट्र में मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था। उन्होंने केवल 10 साल की उम्र में गाना ...
    Indian War

    ज्ञानकोष्ठ: भारतीय अफीम को लेकर युद्ध

    चीन को अक्सर दूसरे देशों की सीमाओं पर कब्जा करने वाला देश समझा जाता है, लेकिन ये चीन एक ऐसा देश भी रहा है जिसने अफीम की वजह से ब्रिटेन के साथ युद्ध लड़ लिया था। 19वीं सदी में हुआ अफीम वॉर को आज भी चीन के जिद्दी रवैये का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। य...
    Designer Pierre Cardin

    जानकोष्ट: जाने, कोन थे डिजाइनर पियरे कार्डिन

    फ्रांस के जाने-माने डिजाइनर पियरे कार्डिन का 98 साल की उम्र में आज ही के दिन निधन हुआ था। कार्डिन अपनी मशहूर स्पेस ऐज स्टाइल के कारण 1960 के दशक में फैशन जगत में प्रसिद्ध हुए थे और उनका नाम अनेक उत्पादों पर अंकित किया गया। कार्डिन का नाम कलाई घड़ी से ...

    महायुद्ध की शुरुआत

    28 अगस्त यानी आज का दिन दुनिया के इतिहास का ऐसा दिन है, जिसे कोई याद नहीं रखना चाहेगा। इसी दिन 1914 में भीषण महायुद्ध की शुरूआत हुई, जिसमें करीब डेढ़ करोड़ लोग मारे गए थे। करीब 48 हजार भारतीय सैनिक भी इस महायुद्ध की भेंट चढ़े थे। जर्मनी, आॅस्ट्रिया-हंगर...

    टाटा स्टील की नींव

    औद्योगिक भारत की नींव जमशेदपुर से ही पड़ी थी, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि इसके प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद रहे। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि जेएन टाटा और विवेकानंद की मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब दोनों एक इतिहास रचने अमेरिका जा रहे थे। जेएन टाटा भारत...

    जब माइकल जॉनसन ने बुरी यादों को पीछे छोड़ा

    माइकल जॉनसन का लक्ष्य अटलांटा 1996 ओलंपिक में इतिहास बनाना था। ओलंपिक के 100 सालों के इतिहास में, किसी भी पुरुष एथलीट ने कभी भी एक ही ओलंपिक में 200 मीटर और 400 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण नहीं जीता था। और जॉनसन को उस उपलब्धि को प्राप्त करने के ल...

    चांद पर कदम रखने वाले नील…

    21 जुलाई, 1969 की वो तारीख, जब इंसान ने चांद पर पहला कदम रखकर इतिहास तो रचा ही था, साथ ही भविष्य में सुदूर अंतरिक्ष तक अपनी पहुंच की संभावनाओं के दरवाजे भी खोल दिए थे। 16 जुलाई 1969 को अपोलो-11 की लॉन्चिंग हुई। 21 जुलाई को 2:56 बजे अमेरिकी अंतरिक्ष य...

    बाइबिल का प्रथम प्रकाशन…

    बाइबिल को कब लिखा गया इस संबंध में मतभेद हैं परंतु 23 अगस्त 1456 में जर्मन वैज्ञानिक योहानेस गुटेनबर्ग द्वारा जर्मनी माइंस शहर में आधुनिक ढंग से बाइबिल को छापा गया था। इसीलिए इस बाइबिल को गुटेनबर्ग बाइबिल कहते हैं। यह आधुनिक ढंग के छापाखाने से मुद्रि...

    गांधी जी को सत्याग्रह के लिए मनाया था राजकुमार शुक्ल ने

    राजकुमार शुक्ल (जन्म 23 अगस्त 1875) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय बिहार के चंपारण मुरली भराहावा ग्राम के निवासी और स्वतंत्रता सेनानी थे। इस सीधे-सादे लेकिन जिद्दी शख्स ने महात्मा गांधी को अपने इलाके के किसानों की पीड़ा और अंग्रेजों द्वारा उनके शोष...
    Dr.-Shankar-Dayal-Sharma-To

    ज्ञानकोष्ठ : आज भारत के नौवें राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जन्म दिवस है

    आज भारत के नौवें राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जन्म दिवस है। उनका जन्म 19 अगस्त, 1918 को भोपाल में हुआ था। डॉ. शकंरदयाल शर्मा प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। उन्होंने शिक्षा से लेकर राजनीति में जो भी मुकाम हासिल किया अपनी मेहनत से। राष्ट्रपति बनने से ...
    Pin-Code

    ज्ञानकोष्ठ : जाने,पिन कोड की शुरूआत किसने की

    पिन कोड का इस्तेमाल भारतीय डाक विभाग के द्वारा किया जाता है। पिन कोड कितने अंकों का होता है पिन कोड में 6 अंक होते हंै। पिन कोड की शुरुआत भारतीय डाक विभाग में 15 अगस्त 1972 को हुई थी यह पिन कोड संचार मंत्रालय के पूर्व सचिव श्रीराम भिकाजी वेलांकर की द...
    invention of steel

    ज्ञानकोष्ठ : स्टील का अविष्कार

    ऐसा कहा जाता है कि हैरी ब्रियरली (1813-1898) में पहली बार वह बंदूक के बैरल के लिए कुछ ऐसा बनाने की कोशिश कर रहा था, जो पानी से खराब न हो और उस पर कोई रासायनिक प्रभाव न पड़े। तभी प्रक्रिया शुरू हुई और 1872 ई. में, वुड्स और क्लार्क ने स्टील का आविष्कार ...
    Pisa Tower in Italy

    ज्ञानकोष्ठ : 199 साल में बनी पीसा की झुकी हुई मीनार

    पीसा इटली का एक छोटा-सा शहर है जहां विश्व प्रसिद्ध झुकी हुई मीनार है। पीसा की यह झुकी हुई मीनार सैकड़ों सालों से सैलानियों की उत्सकुता का केंद्र बनी हुई है। अपने निर्माण के बाद से ही मीनार लगातार नीचे की ओर झुकती रही है और इसी झुकने की वजह से वह दुनिय...
    Isaac Newton

    न्यूटन की मास्टर डिग्री

    न्यूटन के जीवन की शुरूआत से पूर्व ही इनके पिता की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अपनी दादी माँ के साथ शुरूआती जीवन बिताया, वह कई बार अपनी माँ के साथ सौतेले पति के घर भी जाता था। मगर अपनी माँ द्वारा दूसरी शादी करना कतई पसंद नहीं था। एक बार गुस्सा होकर न्यू...
    sushila-chanu-

    ज्ञानकोष्ट : जाने, भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहला कांस्य पदक कब जीता था?

    भारत ने सुशीला चानू की कप्तानी में जूनियर महिला हॉकी विश्व कप-2013 में इंग्लैंड को 3-2 से पराजित कर कांस्य पदक जीता था। यह पहला अवसर है जब भारतीय महिला टीम ने इस प्रतियोगिता में पदक जीता है। हॉकी इंडिया ने जूनियर हॉकी टीम की प्रत्येक खिलाड़ी के लिए एक...

    जब सतगुरु ने जान बख्शकर नौ बर नौ कर दी थी आँखों की रोशनी

    डेरा सच्चा सौदा दरबार सरसा से सत् ब्रह्मचारी सेवादार गुरबख्श सिंह जी अपने सतगुरु प्यारे की अपार बख्शिश का एक प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार ब्यान करता है। सन् 1969 में मुझे नाम की बख्शिश हुई। उन दिनों मैं रतिया में अपने घर में रहा करता था। सन् 1970 में ...
    Ruhani-Karishma

    ‘‘पूर्ण सतगुरू अपने मुरीदों का साथ कभी नहीं छोड़ता’’

    बल्ले-बल्ले हो जाएगी 12 दिसम्बर, 1985 की बात है। मैंने अपनी लड़की की शादी रखी हुई थी। एक दिन मैं पूजनीय परम पिता जी के पास आया। तेरावास के बाहर खड़े हुए सत्ब्रह्मचारी सेवादार से कहा कि मुझे पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी से मिलना है। उसने कहा कि क्...
    gurmeet ram rahim singh ji insan

    सच्चे सतगुरू जी ने दया-मेहर रहमत से अपने शिष्य को भयानक रोगों से छुटकारा दिलाया

    श्री हरभजन लाल पुत्र श्री सोहन राम गांव बरूवाली-1 जिला सरसा, पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमतों का वर्णन इस प्रकार करता है:- सन् 1992 की बात है, मैंने तथा मेरी पत्नी ने डेरा सच्चा सौदा पहुंचकर पूजनीय हजूर पिता जी का सत्...

    …जब सोमनाथ को मौत के मुंह से निकाल लाए सतगुरू

    अक्सर हम छोटी-मोटी परेशानियों में घिर कर हिम्मत हार बैठते हैं। कई लोग तो बुरे वक्त के ख्याल भर से काँप उठते हैं। लेकिन अगर मुश्किलों का डटकर सामना किया जाए तो उन्हें भी खुद पीछे हटना पड़ता है। आज की साखी एक ऐसे ही शख़्स के जीवन से जुड़ी सच्ची घटना पर आध...
    Guru-ji

    दु:खों से घिरी बहन को पूज्य गुरु जी ने बख्शा खुशहाल जीवन

    सतगुरु की रजा, रमज और रहमत की कोई सीमा नहीं होती और न ही इसे कोई समझ सकता है। उनका हर कर्म सृष्टि के भले के लिए होता है। वे अपने बच्चों के भारी कर्मों को काटकर उनके जीवन को खुशियों से महका देते हैं। आज की साखी ऐसे ही जीवन के सत्य अनुभव पर आधारित है। ...
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    जब सतगुरु ने मोड़ दिया था काल का मुंह

    नवम्बर, 1982 की बात है। भंडारे से दो दिन पहले हमने अपनी एक रिश्तेदारी में सरसा आना था। हमने कार्यक्रम बनाया कि भंडारे का सत्संग भी सुनकर आएंगे। हमारे साथ कुछ बहन भाई और भी तैयार हो गए, जिनमें से आठ नामदान लेने वाले जीव भी थे। उन दिनों पंजाब में उग्रव...
    Mastana Balochistani - Sach Kahoon

    जब पुलिस अफसरों के कर्मों का भार साईं जी ने अपने शरीर पर लिया

    संतों का जीवन परहित को समर्पित होता है। सच्चा गुरू, किसी जीव को नामदान देकर उसे अपना शिष्य बनाने से पूर्व उसके बुरे कर्मों को नष्ट करता है और उसकी सारी बलाएं (कष्ट) खुद के शरीर पर ले लेता है। ऐसे ही एक प्रत्यक्ष नजारे का जिक्र करते हुए गांव कंवरपुरा ...
    When Ishwar Chand Vidyasagar became the support of the hungry

    जब भूखे का सहारा बने ईश्वर चंद विद्यासागर

    स्वतंत्रता सेनानी ईश्वरचंद्र विद्यासागर का जन्म आज ही के दिन 26 सितंबर, 1820 को मेदिनीपुर में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ठाकुरदास बंद्योपाध्याय एवं माता का नाम भगवती देवी था। वे एक दार्शनिक, अकादमिक शिक्षक, लेखक, अनुवादक, समाज सुधार...
    Swami-Vivekananda

    घमंड कभी न करने का ज्ञान

    तो बात उस समय की है, जब स्वामी विवेकानंद अपने लोकप्रिय शिकागो धर्म सम्मेलन के भाषण के बाद भारत वापस आ गये थे। अब उनकी चर्चा विश्व के हर देश में हो रही थी। सब लोग उन्हें जानने लगे थे। स्वामी जी भारत वापस आकर अपने स्वभाव अनुरूप भ्रमण कर रहे थे। इस समय...