मानसून सत्र: सरकार संसद में हर मुद्दे पर सार्थक बहस के लिए तैयार

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Monsoon Session
नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। संसद के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने आश्वासन दिया कि वह विपक्ष के हर मुद्दे पर सार्थक एवं स्वस्थ चर्चा के लिए तैयार है बशर्ते वह शांतिपूर्ण ढंग से संसदीय परंपरा एवं नियमों के अनुरूप हो। संसदीय सौध में ढाई घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में यह आश्वासन दिया।
सर्वदलीय बैठक के समाप्त होने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में विपक्षी नेताओं ने एक अलग कक्ष में अपनी रणनीति को लेकर बैठक की। सूत्रों के अनुसार किसानों के आंदोलन, महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल डीजल के दाम और कोरोना महामारी के संकट को लेकर विपक्ष के तेवर कड़े हैं और शुरूआत में दोनों सदनों में गतिरोध देखा जा सकता है। गौरतलब हैं कि सोमवार से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है और 13 अगस्त तक चलेगा।

33 दलों के 40 से अधिक नेताओं ने सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लिया

बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने संवाददाताओं से कहा कि मानसून सत्र के मद्देनजर 33 दलों के 40 से अधिक नेताओं ने सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लिया तथा किन विषयों पर चर्चा होनी चाहिए, इसके सुझाव दिये। अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों खासकर विपक्षी सांसदों के सुझाव महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे जमीन से आते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सुझावों को चर्चा में शामिल करने से बहस समृद्ध होती है।

चर्चा शांतिपूर्ण होनी चाहिए

जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चाहा है कि सार्थक और स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए। चर्चा शांतिपूर्ण एवं नियमों के अंतर्गत होनी चाहिए। सदस्य लोकतंत्र की परंपरा को मन में रखते हुए जो मुद्दे उठाना चाहते हैं, सरकार नियम प्रक्रिया से सभी पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोविड महामारी के कारण जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक सवाल पर कहा कि सरकार ने विपक्षी दलों को चर्चा से संबधित मुद्दों पर सुझाव देने को कहा है और उन पर कार्यमंत्रणा समिति में निर्णय लिया जाएगा।

23 नए विधेयक पेश किए जाएंगे

मानसून सत्र में विधायी कामकाज के बारे में पूछे जाने पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि 23 नये विधेयक पेश किये जाएंगे, छह अध्यादेशों के स्थान पर विधेयक आएंगे और दो वित्तीय संकल्प पारित कराने हैं। इस प्रकार से 31 विधेयक पारित कराने का प्रस्ताव है। इनमें वर्ष 2021-22 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों एवं तत्संबंधी विनियोग विधेयक तथा वर्ष 2017-18 अतिरिक्त अनुदान मांगों एवं तत्संबंधी विनियोग विधेयक, ये दो वित्तीय संकल्प हैं।

छह अध्यादेशों के स्थान पर लाये जाने वाले विधेयकों में अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण एवं सेवाशर्त) विधेयक 2021, दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक 2021, आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन विधेयक 2021, भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक 2021 तथा होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक 2021 शामिल हैं।

ये हैं विधेयक?

अन्य विधेयकों में डीएनए टेक्नोलॉजी विधेयक, नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ फूड टेक्नोलॉजी, कोल बियरिंग एरिया विधेयक, चार्टर्ड अकाउंटेंट विधेयक, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप, कंटेनटमेंट विधेयक, सेंट्रल यूनिवर्सिटी विधेयक, इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट विधेयक, विद्युत संशोधन विधेयक, केन्द्रीय विश्वविद्यालय विधेयक 2021, अंतरदेशीय जलयान विधेयक 2021 समेत अन्य कई विधेयक शामिल हैं।

संसद में विपक्ष उठाएंगा किसानों का मुद्दा

सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के मुद्दों के बारे में पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल की श्रीमती हरसिमरत कौर बादल, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने 13 माह से जारी किसानों के आंदोलन के मुद्दे को उठाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में 500 से अधिक किसानों का बलिदान हुआ है। बेनीवाल ने कहा कि हमने सरकार से अपील की है कि वह बड़ा मन रख कर इस पर बात करें और तीनों कृषि कानूनों को रद्द करें। इस मुद्दे पर सरकार को अलग समय निर्धारित करके चर्चा करानी चाहिए। इस सुझाव पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर बेनीवाल ने कहा कि सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया और किसानों का नाम तक नहीं लिया।

आप नेता संजय सिंह ने विद्युत संशोधन विधेयक का किया विरोध

सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने विद्युत संशोधन विधेयक 2021 लाये जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक किसानों के साथ एक धोखा है। सरकार ने किसानों से यह विधेयक नहीं लाने का वादा किया था। सरकार इसके जरिए पूरे देश की बिजली निजी कंपनियों को देकर इसके दाम महंगे करना चाहती है।

सर्वदलीय बैठक के समाप्त होने के बाद विपक्ष के तमाम नेता एक अलग कक्ष में एकत्र हुए जिनमें खड़गे, शरद पवार, डेरेक ओ ब्रायन, सुदीप बंद्योपाध्याय, तिरुची शिवा, संजय राऊत, संजय सिंह, भगवंत मान, प्रो. रामगोपाल यादव आदि करीब 20 नेता शामिल थे। विपक्षी दलों के सूत्रों के अनुसार किसानों के आंदोलन, महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल डीजल के दाम, कोरोना महामारी के संकट को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने के लिए तैयार है और कोई ढील नहीं दी जाएगी।

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