कंगाली की कगार पर पाकिस्तान

Pakistan on the verge of bankruptcy

2013 में नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री का पद संभालते ही यह बात कही थी कि भारत-पाकिस्तान को आपस में युद्ध करने की बजाए गरीबी, भुखमरी, अनपढ़ता व बीमारियों के खिलाफ लड़ना चाहिए। फिर तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की इमरान सरकार ने सत्ता संभाली तब यह बात इमरान खान ने भी कही लेकिन कोई भी शासक अपनी घोषणा को जमीनी स्तर पर लागू नहीं कर सका। ताजा हालात यह हैं कि पाकिस्तान पर कर्ज उसके कुल घरेलू उत्पादन के बराबर पहुंच गया है, जो देश के लिए खतरे की घंटी है। गरीबी सामाजिक-राजनीतिक कुरीति की जड़ है, जिसमें आतंकवाद भी शामिल है।

आतंकी संगठन भुखमरी का शिकार युवाओं को पैसे का लालच देकर आसानी से हिंसा करने के लिए तैयार कर रहे हैं। दरअसल इन हालातों के लिए नवाज शरीफ व इमरान सहित जरदारी परिवार भी जिम्मेवार है, जो देश को चलाने के लिए स्वतंत्र होकर निर्णय नहीं ले सके। सरकार सेना व आईएसआई की गुलाम होकर चलती रही। पाकिस्तान ने कश्मीर को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल मानकर आतंकी संगठनों को पनाह दी जिसके जाल में पाकिस्तान अब खुद ही फंस गया है। जिन तालिबान आतंकियों को अफगानिस्तान के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया गया वहीं तालिबान श्वात घाटी सहित नार्थ फ्रंटियर को अपना किला बनाकर बैठ गए। पाकिस्तान युवाओं को आतंकवाद की आग में झोंक रहा है।

राष्टÑपति के पद पर रहते हुए आसिफ अली जरदारी ने यह स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने तालिबान आतंकवादियों को किसी उद्देश्य के लिए तैयार किया है। इस बात से नवाज शरीफ सरकार इनकार करती रही। सेना के पूर्व जनरल परवेज मुशर्रफ ने स्वीकार किया था कि पूरी योजनाबंदी से पाकिस्तानी सेना ने कारगिल पर हमला किया था। कश्मीर पर कब्जा करने व चीन जैसे देशों की कूटनीति का हिस्सा बनकर पाकिस्तान ने अपनी कंगाली का रास्ता खुद ही खोला है।

अब इमरान खान अपने नौकरशाहों के साथ बैठक कर उन्हें खर्चें कम करने, भ्रष्टाचार रोकने की नसीहत दे रहे हैं, लेकिन दशकों पुरानी गलतियों से हुए नुक्सान को साल-दो साल में पूरा नहीं किया जा सकता। बेहतर हो यदि पाकिस्तान आतंकवाद के निर्यात को अपनी नीति से निकाल, आर्थिक नीति को महत्व दे। गरीबी व आर्थिक संकट पड़ोसी देश भारत के लिए भी खतरनाक है। पाकिस्तान में वित्तीय संकट से भारत को जागरूक हो जाना चाहिए। अजमल कसाब व उसके जैसे बहुत से युवकों को मुंबई व देश के उच्च शहरों तक ले आई, हमें चौकस रहना होगा।

 

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।