महिलाओं की भावनाओं के साथ राजनीतिक खिलवाड़

Political Play

हमारे देश की राजनीति में एक परम्परा और पैंतरेबाजी रही है कि किसी भी घटना पर सत्तापक्ष व विपक्ष अपने-अपने हितों की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक आरोप-प्रत्यारोप लगा सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी ऐसी ब्यानबाजी करते हैं जैसे एक पार्टी ने तो समस्या का समाधान कर दिया और दूसरी पार्टी उस मामले में बिल्कुल नाकाम रही है। हाथरस व होशियारपुर में घटित दुराचार की घटनाएं कांग्रेस व भाजपा के बीच राजनीतिक जंग का मैदान बन गई हैं। हैरानी की बात यह है कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह ने एक-दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। कांग्रेस हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाने साध रही है और दूसरी तरफ भाजपा ने होशियारपुर में घटित घटना पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को घेरना शुरू कर दिया है।

बड़े दुख की बात है कि महिलाओं व बच्चियों पर अत्याचार की घटनाएं देश में घट रही हैं, कांग्रेस-भाजपा दोनों पार्टियों की सरकारें सत्तापक्ष में हैं, जो शर्मनाक व निंदनीय घटना है। राजनीतिक पार्टियों ने ऐसी गंभीर घटनाओं को विपक्ष पार्टी को नीचा दिखाने का हथकंडा बना लिया है। यह चलन महिलाओं का अपमान है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि दुराचार की घटनाओं पर नेताओं द्वारा अपने स्वार्थ के लिए घटिया बयानबाजी करने से भी परहेज नहीं किया जाता। दरअसल महिलाओं का अपमान किसी भी राज्य में पीड़ितों की पारिवारिक स्थिति के कारण है। यदि पुलिस प्रबंध व प्रशासन स्वतंत्र हो तब दोषियों के खिलाफ सही समय पर कार्रवाई कर उन्हें सजा दिलाई जा सकती है।

राजनीतिक दखलअंदाजी के कारण प्रशासन और पुलिस निष्पक्ष जांच की बजाय सत्तापक्ष के इशारों पर चलते हैं। प्रशासन और पुलिस भी मामले को दबाने और रफा-दफा करने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। यदि देखा जाये तब दुराचार जैसी घटनाएं प्रशासन और पुलिस का विषय है, राजनीति ऐसे मामलों को उलझा देती है। राजनीतिक पार्टियां को ऐसे मामलों में अपने हित साधने की बजाय पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए काम करने की आवश्यकता है। पुलिस को ईमानदारी से निष्पक्षता से काम करने की छूट दी जाए। महिलाओं के अधिकारों की राजनीतिक आवाज उठाने के नाम पर राजनीतिक हितों की पूर्ति करना महिलाओं का अपमान है। नारी अपमान की इस दुष्प्रवृति को रोका जाना चाहिए।

 

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