पूज्य गुरु जी ने साध-संगत के लिए फेसबुक पर भेजा कुछ खास, जल्दी देखें…

Ram Rahim
पूज्य गुरु जी ने साध-संगत के लिए फेसबुक पर भेजा कुछ खास, जल्दी देखें...

बरनावा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने समस्त साध-संगत को फेसबुक के माध्यम से एमएसजी महा रहमोकरम माह की बधाई दी है। पूज्य गुरु जी ने फेसबुक पर लिखा, ‘मौज मस्तानी लेकर आई, माह फरवरी में खुशियाँ अपार, लेकर आए खुद रूप खुदा का, जिन्हें जपता रहा संसार, जिनके सहारे खड़े खंड-ब्रह्मण्ड, सब सूरज चांद सितारे, प्रकट किए शाह सतनाम जी दाता, हमारे रहबर जी प्यारे। MSG महा रहमोकरम माह के आगाज़ की आप सभी को बहुत मुबारकबाद। हर दिन आपके लिए अपार खुशियाँ लेकर आए, और आप नेकी की राह पर बढ़ते ही जाएं। बहुत आशीर्वाद

मालिक को पाने के लिए अंदर तड़प बनाओ: पूज्य गुरु जी

 सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सच्चे मुर्शिदे-कामिल शाह सतनाम जी दाता, रहबर के प्यार-मोहब्बत की चर्चा जब शुरु होती है तो ऐसा लगता है कि यह चर्चा कभी खत्म न हो और कभी खत्म होगी भी नहीं, क्योंकि उसके प्यार में जो मस्ती, नशा है वो अपने-आप आप सिर चढ़कर बोलता है। फिर अपने पीरो, मुर्शिदे-कामिल के बिना, उसकी परम मीठी आवाज के बिना किसी की आवाज अच्छी नहीं लगती।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि एक मुरीद के कानों में अपने सतगुरु, मालिक के पाक-पवित्र वचन, प्यार-मोहब्बत की बातें गूंजती रहती हैं। मालिक से प्यार करने वाली जीवात्मा तड़प कर कहती है कि हे मेरे मौला! तू मेरी मोहब्बत है। तू दोनों जहां में मेरा बनकर रहना। तू साया नहीं बल्कि मेरे अंदर समाया है और मुझे ऐसे ही पकड़ कर रखना। जिस तरह कुम्हार एक हाथ को मटके के अंदर रखता है और मटके को सही करने के लिए बाहर से मटके पर हाथ मारता है। हे मेरे रहबर सार्इं! उसी तरह तेरा हाथ अंदर है, तो काल के तिनके जैसे हाथों की क्या परवाह। जब तेरा रहमो-कर्म अंदर है, कण-कण, रोम-रोम में तू बसा हुआ है तो किसी की क्या मजाल जो रोम से तेरे नाम को, तेरे प्यार को निकाल सके।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो लोग मालिक से प्यार, मोहब्बत किया करते हैं वो छोटी-छोटी बातों का गिला-सिकवा नहीं किया करते। वो बुलंद हौसला रखते हैं कि हे मेरे अल्लाह, वाहेगुरु, राम तुझे पाना है और 7 दिन, महीना नहीं बल्कि ताउम्र सुमिरन करूंगा। अगर तू फिर भी नहीं मिला तो अगला जन्म लूंगा, फिर भी न मिला तो जन्म पर जन्म लेता रहूंगा और तुझे पा कर रहूंगा। जिन लोगों के इतने बुलंद हौसलें होते हैं तो काल या किसी और की क्या मजाल कि मालिक से मिलाप न हो।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के प्यार में इन्सान की ऐसी तड़प होनी चाहिए, जैसे 24 घंटे की भूख के बाद इन्सान को कैसा भी भोजन मिल जाए, वह भी 36 प्रकार के भोजन जैसा लगता है। उसी तरह अगर तड़प बन जाए, तो हो ही नहीं सकता कि सतगुरु दर्शन न दे। इसलिए अपनी तड़प को बरकरार रखो और मालिक के प्यार-मोहब्बत के जख्म को ठंडा न होने दो। आपके अंदर अगर तड़प लगी है तो वो राम प्रकट जरूर होगा। यह अलग बात है कि भीलनी को कितना समय लगा था। लेकिन यह कलियुग है और वह युग और था। वहां सारी उम्र की भक्ति लगती थी तो यहां कुछ महीनों की भक्ति से आप मालिक को पा सकते हैं। हमने सभी धर्मों में पढ़ा है कि कलियुग में काल का जोर जोरों पर है तो राम, अल्लाह, मालिक, ईश्वर का जोर उससे भी बढ़कर जोरों पर है। तब अगर सैकड़ों साल भक्ति करनी पड़ती थी तो कलियुग में कुछ घंटे, कुछ महीनों की भक्ति भी उससे बढ़कर हो सकती है और मालिक के दर्शन करवा सकती है।

कोई आदमी पूछता है कि मैं भगवान के दर्शन क्यों करूं, मैंने भगवान से क्या लेना है? इस बारे में आप जी ने फरमाया कि मान लो आपको कोई बीमारी आने वाली है। उस बीमारी की वजह से आप 1 साल तक चारपाई पर पड़े रहो। लाखों रुपए लग जाएं, शरीर तंदरूस्त होते हुए 5-7 साल लग जाएं। अगर ऐसी बीमारी आने से पहले ही आपको एक खरोंच लग कर कट जाए तो कैसा हो? लोग कहते हैं कि जी ऐसा कैसे हो सकता है? तो ऐसा हो सकता है। आप सुबह-शाम राम का नाम जपो तो वो मालिक पहाड़ जैसे कर्म को कंकर में बदल देगा। सूली से सूल बना देगा और गम, चिंता, परेशानियों को पल में उड़ा देगा। इसलिए सुमिरन करो। इससे बढ़कर लाभ का सौदा कोई नहीं है। जिस तरह हर रोज भोजन लेते हो उसी तरह हर रोज सुमिरन करो तो यकीनन पहाड़ जैसे कर्मों को भगवान कंकर में बदल देंगे। सतगुरु से यही दुआ करते हैं हे मालिक! सबको खुशियों से नवाज, दया-मेहर, रहमत बरसाता रह।