UP Expressway: मुज्जफरनगर, शामली समेत इन जिलों की हो जाएगी मौज, बस तैयार होने वाला है ये एक्सप्रेसवे
UP Expressway: मुज्जफरनगर, शामली समेत इन जिलों की हो जाएगी मौज, बस तैयार होने वाला है ये एक्सप्रेसवे
UP Expressway: अनु सैनी । उत्तर प्रदेश में सड़क और परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाई देने के लिए एक और विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। राज्य में अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले को पूर्वांचल के गोरखपुर और कुशीनगर क्षेत्र से जोड़ेगा। करीब 742 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने का काम करेगी।
करीब 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज और आधुनिक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। अभी तक पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल की यात्रा में लंबा समय लगता है, लेकिन इस परियोजना के पूरा होने के बाद सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा। सरकार और NHAI की योजना के अनुसार यह कॉरिडोर राज्य के कई बड़े जिलों को जोड़ते हुए बिहार और नेपाल की दिशा में जाने वाले ट्रैफिक के लिए भी अहम मार्ग बनेगा।
उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा सड़क प्रोजेक्ट | UP Expressway
शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं में गिना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे हरियाणा सीमा के पास से शुरू होकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसका कुछ हिस्सा उत्तराखंड के हरिद्वार क्षेत्र के नजदीक से भी गुजर सकता है। इस वजह से यह प्रोजेक्ट कई राज्यों के बीच बेहतर संपर्क का मजबूत माध्यम बनने जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिमी यूपी से आने वाले वाहन बिना शहरों की भीड़ में फंसे सीधे पूर्वांचल और बिहार की ओर जा सकेंगे। वर्तमान समय में लंबी दूरी के वाहनों को छोटे शहरों और कस्बों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे ट्रैफिक जाम और समय दोनों की समस्या रहती है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी।
18 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
यह हाई-स्पीड कॉरिडोर प्रदेश के करीब 18 जिलों की तस्वीर बदल सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर जैसे जिले इससे जुड़ेंगे। वहीं पूर्वी हिस्से में लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, संतकबीर नगर, गोरखपुर और कुशीनगर को इस परियोजना का लाभ मिलेगा। इन जिलों में सड़क संपर्क मजबूत होने से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। छोटे शहरों में निवेश आने की संभावना बढ़ेगी और स्थानीय व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी। खासतौर पर कृषि आधारित जिलों को इसका बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि किसानों के उत्पाद बड़े बाजारों तक कम समय में पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत भी घटेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बनेगी।
नेपाल और बिहार कनेक्टिविटी को मिलेगा फायदा
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ उत्तर प्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों और नेपाल के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसका रूट कई जगह भारत-नेपाल सीमा के नजदीक से गुजरेगा। माना जा रहा है कि इससे नेपाल की ओर व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा बिहार के पश्चिम चंपारण क्षेत्र तक जाने वाले वाहनों को भी तेज और बेहतर मार्ग मिलेगा। हरियाणा और दिल्ली से आने वाले वाहन चालक शामली के रास्ते इस एक्सप्रेसवे में प्रवेश कर सकेंगे और पूर्वी यूपी होते हुए बिहार की ओर आसानी से पहुंच पाएंगे। इससे माल परिवहन और लॉजिस्टिक सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस होगा एक्सप्रेसवे
NHAI के अनुसार एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार किया जाएगा। मुख्य मार्ग चार लेन का होगा, जबकि बड़े पुल, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज छह लेन के हिसाब से बनाए जाएंगे ताकि भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर विस्तार में आसानी हो।
इसके अलावा रास्ते में कई एग्जिट और इंटरचेंज बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोग भी इस एक्सप्रेसवे का लाभ उठा सकें। आपातकालीन सेवाओं, पेट्रोल पंप, फूड प्लाजा और वाहन सहायता केंद्र जैसी सुविधाओं की भी योजना तैयार की जा रही है। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सिग्नलिंग और निगरानी व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
*दो हिस्सों में होगा निर्माण कार्य-
इतनी बड़ी परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए इसे दो हिस्सों में बांटा गया है। लगभग 348 किलोमीटर लंबे पश्चिमी हिस्से का काम NHAI वेस्ट रीजन को सौंपा गया है, जबकि 394 किलोमीटर लंबे पूर्वी हिस्से की जिम्मेदारी NHAI ईस्ट रीजन के पास रहेगी। अधिकारियों के मुताबिक कई जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसानों और जमीन मालिकों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तय की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि परियोजना में किसी तरह की देरी न हो और निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जा सके।
रोजगार और निवेश के नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। सड़क संपर्क बेहतर होने से औद्योगिक कॉरिडोर, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। निर्माण कार्य के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के आसपास नए होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप और व्यावसायिक गतिविधियां भी विकसित हो सकती हैं। पर्यटन क्षेत्र को भी इससे फायदा मिलेगा, क्योंकि कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
2030 तक शुरू हो सकता है संचालन
अधिकारियों के अनुसार यदि निर्माण कार्य निर्धारित योजना के अनुसार चलता रहा तो वर्ष 2030 तक इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू की जा सकती है। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल तक का सफर पहले की तुलना में काफी कम समय में पूरा हो सकेगा। सरकार भविष्य में इस नेटवर्क को और विस्तार देने की योजना पर भी काम कर रही है। बताया जा रहा है कि आगे चलकर पूर्वी उत्तर प्रदेश को बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र से जोड़ने वाले नए एक्सप्रेसवे पर भी विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो उत्तर भारत से पूर्वोत्तर भारत तक तेज सड़क संपर्क स्थापित हो सकेगा।
यूपी के विकास को मिलेगी नई दिशा
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं के बाद अब शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे राज्य के विकास में एक और महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण का काम नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक मजबूती, निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय विकास का आधार बन सकती है। बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों का जीवन आसान होगा, उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी और उत्तर प्रदेश देश के सबसे मजबूत सड़क नेटवर्क वाले राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
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