West Bengal SIR Case: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने सुनवाई करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायालय का उद्देश्य वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशना है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की गई है। West Bengal News
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से वंचित नहीं होना चाहिए। न्यायालय ने आयोग को निर्देश दिया कि यदि नामों में त्रुटि या असंगति के आधार पर नोटिस भेजे जा रहे हैं, तो उसमें अत्यंत सावधानी बरती जाए।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्कों में कहा गया कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से पूर्व सीमित समय शेष है और बड़ी संख्या में लोगों को नाम में मामूली वर्तनी भिन्नता के कारण नोटिस जारी किए गए हैं। यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ दस्तावेजों को स्वीकार न किए जाने से नागरिकों को कठिनाई हो रही है तथा लंबी कतारों में प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुईं और उन्होंने पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। उनका कहना था कि प्रक्रिया के दौरान भेदभाव की आशंका उत्पन्न हो रही है, विशेषकर उन मामलों में जहां विवाह के बाद उपनाम में परिवर्तन हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में प्रशासनिक दबाव की स्थिति बनी हुई है।
निर्वाचन आयोग की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया विधिसम्मत प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जा रही है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि आवश्यक प्रशासनिक सहयोग के संबंध में राज्य सरकार को अवगत कराया गया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार कर संतुलित और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करेगा। आयोग से विस्तृत उत्तर मांगा गया है, जिसके आधार पर आगामी सुनवाई में आगे की दिशा तय होगी। West Bengal News















