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                <title>Sabarimala - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>तिरुवनंतपुरम: माकपा और भाजपा नेताओं के घर पर बम से हमले, अब तक 1700 गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश का आदेश दिया हिंदू संगठन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, जबकि राज्य की माकपा सरकार पक्ष में भाजपा के स्थानीय नेता ने कहा- मोदी का रविवार को होने वाला केरल दौरा टला तिरुवनंतपुरम (एजेंसी)। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sabarimala-bjp-leaders-and-cpm-houses-attacked-with-bombs/article-7222"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/attacked-.jpg" alt=""></a><br /><h2>सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश का आदेश दिया</h2>
<ul>
<li>हिंदू संगठन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, जबकि राज्य की माकपा सरकार पक्ष में</li>
<li>भाजपा के स्थानीय नेता ने कहा- मोदी का रविवार को होने वाला केरल दौरा टला
<p><strong>तिरुवनंतपुरम (एजेंसी)।</strong> सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ केरल में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों में तेजी आई है। माकपा के थालासेरी विधायक एएन शमसीर के घर पर शुक्रवार देर रात बम से हमला किया गया। इससे पहले भाजपा सांसद वी मुरलीधरन, माकपा के कन्नूर जिला सचिव पी शशि और पार्टी कार्यकर्ता विशक के घरों पर भी बम फेंके गए। हमले में विशक घायल हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने करीब तीन महीने पहले मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। भाजपा और हिंदू संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। वहीं, राज्य की माकपा सरकार कोर्ट के फैसले को लागू कराने के पक्ष में है। माकपा ने अपने नेताओं के घरों पर हुए हमलों के लिए आरएसएस के स्वयंसेवकों को, जबकि भाजपा ने माकपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। राज्य में 1738 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। 1108 मामले दर्ज किए गए हैं।</p></li>
</ul>
<h2>मोदी का केरल दौरा टला</h2>
<p>इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्य में रविवार को होने वाला दौरा टाल दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में भाजपा के एक स्थानीय वरिष्ठ नेता के हवाले से यह जानकारी दी गई। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘पीएम की पठानमथिट्टा यात्रा 6 जनवरी को कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण स्थगित कर दी गई है। इसका मौजूदा स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हम इस स्थिति को और बढ़ाना नहीं चाहते।’’</p>
<h2>800 साल से चली आ रही प्रथा</h2>
<p>28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश देने की इजाजत दी थी। इस फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले यहां 10 से 50 साल उम्र की महिला के प्रवेश पर रोक थी। यह प्रथा 800 साल पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे राज्यभर में विरोध हुआ।</p>
<h2>आदेश के बाद 3 बार खुला मंदिर</h2>
<p>आदेश के बाद 16 नवंबर को तीसरी बार मंदिर खोला गया। मंदिर 62 दिनों की पूजा के लिए खुला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी विरोध के चलते 1 जनवरी तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई थी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jan 2019 11:27:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबरीमाला : 800 साल में पहली बार दो महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश किया</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान अयप्पा की पूजा भी की, सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने पहले सबरीमाला में हर उम्र की महिला को दर्शन की अनुमति दी थी तिरुवनंतपुरम। केरल के सबरीमाला मंदिर में बुधवार तड़के 50 साल(Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) से कम उम्र की दो महिलाओं ने प्रवेश किया। इसके बाद मंदिर को शुद्धिकरण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">भगवान अयप्पा की पूजा भी की, सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने पहले सबरीमाला में हर उम्र की महिला को दर्शन की अनुमति दी थी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>तिरुवनंतपुरम।</strong> केरल के सबरीमाला मंदिर में बुधवार तड़के 50 साल(Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) से कम उम्र की दो महिलाओं ने प्रवेश किया। इसके बाद मंदिर को शुद्धिकरण के लिए बंद कर दिया गया। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने महिला श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट से सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने के लगभग तीन महीने बाद पहली बार महिलाओं ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के दर्शन किए। मंदिर के 800 साल के इतिहास में पहली बार दो महिलाओं ने यहां प्रवेश कर भगवान अयप्पा की पूजा की है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मंदिर में प्रवेश करने वाली बिंदु और कनकदुर्गा की उम्र 40 से 50 साल के बीच, पुलिस सुरक्षा में पहुंचीं मंदिर</h2>
<p style="text-align:justify;">न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के नाम बिंदु और कनकदुर्गा हैं। (Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) उनकी उम्र 40 से 50 साल के बीच बताई जा रही है। दोनों महिलाएं पुलिसकर्मियों के साथ मंदिर में घुसीं और सुबह 3:45 बजे पूजा-अर्चना की। इन दोनों महिलाओं ने पिछले महीने भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दौड़ती हुई मंदिर के अंदर पहुंचीं</h2>
<p style="text-align:justify;">दोनों महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने के सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। वे दौड़ती हुए मंदिर के अंदर (Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) जाती नजर आ रही हैं। दोनों महिलाएं उत्तरी केरल की रहने वाली हैं। उनके परिवारों को एहतियातन सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विजयन ने दोनों महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने की घटना की पुष्टि की। विजय ने कहा कि पहले ये महिलाएं ट्रैकिंग नहीं कर पाई थीं। इस बार वे कामयाब रहीं। बिंदु ने बाद में मीडिया को बताया कि हमने मंगलवार को ही पुलिस से संपर्क साधा था। इसके बाद हमें मदद का आश्वासन दिया गया। वहीं, कनकदुर्गा के भाई भरतन ने कहा कि उनकी बहन पिछले हफ्ते ही किसी काम का बहाना बताकर तिरुवनंतपुरम से निकली थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">एक दिन पहले महिलाओं ने बनाई थी 620 किमी लंबी श्रृंखला</h2>
<p style="text-align:justify;">सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का विरोध करने वालों के खिलाफ महिलाओं ने मंगलवार को 620 किमी लंबी श्रृंखला बनाई थी। यह श्रृंखला कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक बनाई गई। यह 14 जिलों से होकर गुजरी। साथ ही करीब 150 से अधिक सामाजिक संगठन भी शामिल हुए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">800 साल से चली आ रही प्रथा</h2>
<p style="text-align:justify;">28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश देने की इजाजत दी थी। इस फैसले के खिलाफ केरल (Sabarimala 800 Years Two Women Entered The Temple) के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले यहां 10 से 50 साल उम्र की महिला के प्रवेश पर रोक थी। यह प्रथा 800 साल पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे राज्यभर में विरोध हुआ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आदेश के बाद 3 बार खुला मंदिर</h2>
<p style="text-align:justify;">आदेश के बाद 16 नवंबर को तीसरी बार मंदिर खोला गया। मंदिर 62 दिनों की पूजा के लिए खुला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी विरोध के चलते 1 जनवरी तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई थी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jan 2019 13:43:01 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबरीमाला : प्रवेश के लिए 18 सीढ़ी चढ़ना, सिर पर पोटली और 41 दिन का व्रत जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सबरीमाला। भगवान अय्यपा के दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर आने वाले भक्तों के लिए कुछ नियम तय हैं। उन्हें सिर पर इरुमुडी (एक खास पोटली) रखकर मुख्य द्वार की अठारह सीढ़ियां चढ़ना पड़ती हैं। इससे पहले उन्हें 41 दिन व्रत रखना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मंदिर में 10 साल की लड़की से लेकर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sabarimala-18-climbing-stairs-head-bundle-and-41-day-fast-jor-entry/article-6376"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/sabarimala-18-climbing-stairs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सबरीमाला।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भगवान अय्यपा के दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर आने वाले भक्तों के लिए कुछ नियम तय हैं। उन्हें सिर पर इरुमुडी (एक खास पोटली) रखकर मुख्य द्वार की अठारह सीढ़ियां चढ़ना पड़ती हैं। इससे पहले उन्हें 41 दिन व्रत रखना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मंदिर में 10 साल की लड़की से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश की हाल ही में अनुमति दी है। हालांकि, बुधवार को मंदिर के पट खुलने के बाद से अभी तक विरोध की वजह से यहां इस उम्र वर्ग की कोई भी लड़की या महिला प्रवेश नहीं कर पाई है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य द्वार की 18 सीढ़ियों से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार पहली पांच सीढ़ियां पांच इंद्रियों का प्रतीक हैं। अगली आठ मनुष्य के आठ भावों के प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद तीन सीढ़ियां तीन गुणों को दर्शाती हैं और आखिरी दो सीढ़ियां विद्या और अविद्या की प्रतीक हैं। इन सीढ़ियों को 18 पुराणों, सबरीमाला के आसपास के 18 पहाड़ों, अयप्पा के 18 शस्त्रों, 18 सिद्ध पुरुषों, 18 देवताओं और 18 गुणों से भी जोड़ा जाता है। इन पर चढ़ने के नियम भी कठिन हैं। 18 सीढ़ियों को पतिनेत्तामपदी कहा जाता है। ये ग्रेनाइट से बनी हैं। 1985 में इन्हें सोना, चांदी, तांबा, लोहा और टिन के मिश्रण से ढंक दिया गया। ये सीढ़ियां सबरीमाला मंदिर को बाकी के स्वामी अयप्पा मंदिरों से अलग बनाती हैं।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/sabarimala-18-climbing-stairs-head-bundle-and-41-day-fast-jor-entry/article-6376</link>
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                <pubDate>Sun, 21 Oct 2018 15:45:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिलाओं के विरोध में सबरीमाला के कनिष्ठ पुजारियों का प्रदर्शन, रोकी पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[सबरीमाला मंदिर के इतिहास में यह पहला मौका है जब पुजारियों ने इस तरह के प्रदर्शनों का आयोजित किया | Sabarimala कोच्चि (एजेंसी)। विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला (Sabarimala) मंदिर में महिलाओं को भगवान अयप्पा की पूजा करने की इजाजत देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। इन प्रदर्शनों में अब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/demonstration-of-junior-priests-of-sabarimala-in-protest-of-women/article-6339"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/sabriwala.jpg" alt=""></a><br /><h2>सबरीमाला मंदिर के इतिहास में यह पहला मौका है जब पुजारियों ने इस तरह के प्रदर्शनों का आयोजित किया | Sabarimala</h2>
<p><strong>कोच्चि (एजेंसी)।</strong> विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला <strong>(Sabarimala)</strong> मंदिर में महिलाओं को भगवान अयप्पा की पूजा करने की इजाजत देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। इन प्रदर्शनों में अब मंदिर के पुजारी भी उतर आए हैं। सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारियों या थांथ्रियों की सहायता करने वाले कनिष्ठ पुजारियों ने अब पूजा संबंधी गतिविधियों में हिस्सा लेने से मना कर दिया है।</p>
<p>मंदिर के मुख्य पुजारी या थांथ्रि तथा पुजारियों के अन्य प्रमुख हालांकि प्रत्यक्ष रूप से इस विरोध प्रदर्शन में भाग नहीं ले रहे हैं लेकिन उनके सहायक पुजारियों ने पूजा छोड़ दी है तथा सरनम मंत्रों का जाप करने वालों के साथ धरने पर बैठ गए हैं। इनका कहना है कि किसी भी सूरत में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं दी जाएगी।</p>
<p>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अगर कोई महिला शन्निधानम में प्रवेश करती, तो मंदिर के दरवाजे को बंद कर दिया जाएगा और सभी तरह की पूजा रोक दी जाएगी। पंडलम राजपरिवार ने इस तरह के निर्देश थांथ्री को दिये हैं। पुजारियों के विरोध को देखते हुए पुलिस ने मंदिर के समीप दो महिलाओं को हिरासत में सुरक्षा प्रदान की लेकिन इन दोनों को नादापांथाल में अय्यप्पा भक्तों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। सबरीमाला मंदिर के इतिहास में यह पहला मौका है जब पुजारियों ने इस तरह के प्रदर्शनों का आयोजित किया है जिसके कारण ‘घी अभिषेकम’ सहित सभी तरह की पूजा को रोक दिया गया है।</p>
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<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 19 Oct 2018 16:34:01 +0530</pubDate>
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