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                <title>Festivals - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बठिंडा : त्यौहारों के मद्देनजर पुलिस ने शहर में बढ़ाई सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[दीवाली के त्योहार मौके जिला पुलिस ने बठिंडा जिले में मुस्तैदी बढ़ा दी है।
पता चला है कि पुलिस को किसी हमले की धमकी की सूचना मिली है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/bathinda-police-increased-security-in-the-city-in-view-of-festivals/article-10952"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/alert.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">हमले की धमकी की सूचना मिलने पर बठिंडा पुलिस हुई अलर्ट, गहनता से की जा रही वाहनों की चैकिंग | Alert</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(सच कहूँ/अशोक वर्मा)।</strong> दीवाली के त्योहार मौके जिला पुलिस ने बठिंडा जिले में मुस्तैदी बढ़ा <strong>(Alert)</strong> दी है। पता चला है कि पुलिस को किसी हमले की धमकी की सूचना मिली है। खुफिया एजेंसियों ने इस बाबत इशारा किया गया बताया जा रहा है परंतु इसकी कोई पुष्टि करने को तैयार नहीं है। पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को भांपते शहर में नाकाबंदी कर बाहर से आने वाली गाड़ियों की चैकिंग शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस को बाहर के जिलों व राज्यों से रजिस्टर्ड कारों आदि की जांच के आदेश दिए गए हैं। इन आदेशों के आधार पर शहर की हाजीरतन रोड पर बड़ा नाका लगा दिया गया है जहां हर कार आदि को तलाशी उपरांत ही आगे जाने दिया जा रहा है। किसी असुखद घटना को रोकने के सम्बन्ध में आज पुलिस की ओर से तलाशी अभियान को पूरी गंभीरता से लिया गया परंतु इस दौरान कोई संदिग्ध व्यक्ति या कोई वस्तु पुलिस के हाथ नहीं लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">नाके पर तैनात एएसआई संजीव कुमार और एएसआई इन्द्रजीत सिंह का कहना था कि अधिकारियों की हिदायतों व सुरक्षा को मुख्य रखते तलाशी मुहिम चलाई जा रही है, जिससे कोई असामाजिक तत्व अशांति न फैला सकें। वहीं दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर में दहशतगर्दो की ओर से सेब व्यापारियों और ट्रक चालकों को निशाना बनाने के बाद अहतेहात के तौर पर बठिंडा पुलिस ने थाने की पुलिस को पूरी चौकसी बरतने के लिए कहा है। वीवीआईपी जिला होने के कारण पुलिस किसी भी किस्म के खतरे मोल नहीं लेना चाहती। इसी दौरान सीनियर पुलिस कप्तान बठिंडा ने जिले के पुलिस आधिकारियों को असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी और संवेदनशील स्थानों की निशानदेही करने के आदेश दिए थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बठिंडा खतरे वाले शहरों में शुमार | Alert</h2>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा के लिहाज से बठिंडा शहर खतरे वाले शहरों में शुमार होने लगा है। जिले का बाकी भाग को एक तरफ रख दें तो शहर में दर्जनों की संख्या में कोचिंग विभाग हैं जहां पड़ोसी राज्यों से सैंकड़ों की संख्या में युवा पढ़ते हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन युवाओं की आड़ में असामाजिक तत्व का दाखिला हो सकता है। इसके बिना करीब एक दर्जन पेट्रोल पंप भी शहर की सीमा में हैं । बठिंडा शहर में एशिया की सबसे बड़ी छावनी, राष्ट्रीय खाद कारखाना, नगर निगम की सीमा में तेल कंपनियों के डीपू और देश का बड़ा रेल जक्ंशन भी बठिंडा में है, जिस कारण भी पुलिस को चौकसी बरतनी पड़ रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पुलिस पूरी तरह मुस्तैद: एसएसपी |</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीनियर पुलिस कप्तान बठिंडा डॉ. नानक सिंह का कहना था कि त्योहारों के मद्देनजर </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिले के सभी ही थानों की पुलिस को पूरी चौकसी बरतने के आदेश दिए गए हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसके साथ ही अधिकारियों को असामाजिक तत्वों की खास निगरानी रखने के लिए भी कहा है </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने कहा कि पुलिस किसी भी तरह की अशांति फैलाने वालों के साथ कड़े हाथों से निपटेगी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> एसएसपी ने आम लोगों से अपील की कि वह अफवाहों पर विश्वास न करें </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>किसी भी लावारिस पड़ी वस्तु संबंधी पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दें,</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> जिससे किसी घटना को घटने से रोका जा सके।</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">सहारा जनसेवा की ओर से भी तैयारियां पूरी</h2>
<p style="text-align:justify;">शहर की समाजसेवी संस्था सहारा जनसेवा ने भी दीवाली के त्योहार मौके चलाए जाने वाले पटाखों और आतिशबाजियों कारण किसी अगजनी की घटना आदि को मुख्य रखते प्राथमिक सहायता मुहैया करवाने के लिए तैयारियां कर ली हैं। सहारा जनसेवा के प्रधान विजय गोयल का कहना था कि संस्था के वॉलिंटियरों को हंगामी हालातों के साथ निपटने व हादसों में जख़्मी होने की संभावनाओं को देखते एम्बूलैंसों व अन्य सामान के साथ लैस कर तैयार बर तैयार रहने के लिए कहा गया है। उन्होंने अपील की कि जरूरत पड़ने पर लोग किसी भी समय सहारा दफ़्तर के साथ संपर्क कर सकते हैं।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Oct 2019 18:27:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>त्यौहार, लोग और सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[दीवाली में पटाखों पर सुनवाई करना सुप्रीम कोर्ट की एक सराहनीय कदम है। एक समय अंतराल तक ही पटाखे फोड़ना पर्यावरण के सेहत में कम असर पड़ेगा। देश में वायु प्रदूषण को गंभीर समझना जरूरी हो चला है। आज पर्यावरण का बिगड़ता स्वास्थ्य काफी गंभीर समस्या बनती जा रही है। लगातार हरियाली में कमी आने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/festivals-people-and-supreme-court/article-6536"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/sc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
दीवाली में पटाखों पर सुनवाई करना सुप्रीम कोर्ट की एक सराहनीय कदम है। एक समय अंतराल तक ही पटाखे फोड़ना पर्यावरण के सेहत में कम असर पड़ेगा। देश में वायु प्रदूषण को गंभीर समझना जरूरी हो चला है। आज पर्यावरण का बिगड़ता स्वास्थ्य काफी गंभीर समस्या बनती जा रही है। लगातार हरियाली में कमी आने के कारण अनुकूल रहने वाला मौसम आज दिन प्रतिदिन बिगड़ रहा है। हवा में घुल चुका प्रदूषण रूपी जहर मानव की सेहत के लिए काफी हानिकारक बनता जा रहा है। इन दिनों प्रदूषण से बचने के लिए सरकार भी गंभीर दिख रही है।लेकिन हालत ज्यादा खराब होने के कारण पर्यावरण में फैल रहे इस जहर को रोकना एक चुनौती बन गई है।शहरों में हालत और ज्यादा नाजुक हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण आज इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि देश का राजधानी दिल्ली में सांस लेना भारी पड़ रहा है। सिर्फ भारत की राजधानी दिल्ली में नही बल्कि देश भर में प्रदूषण की समस्या तेजी से बढ़ रही है।अब तो हालत इतना नाजुक हो चुका है की बढ़ते वायु प्रदूषण हमारी सेहत ही नहीं बल्कि हमारी उम्र को भी घटाने में जिम्मेदार है।वैज्ञानिकों की ओर से कराए गए एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि हवा में घुल चुके प्रदूषण से औसत भारतीय की उम्र डेढ़ साल तक कम हो रही है।वायु प्रदूषण से हर वर्ग के लोग प्राभवित हैं। बूढ़े हो या युवा हो या बच्चे हो।सब उम्र के वर्ग इनसे गहरा प्राभवित होता है। लेकिन बच्चों की बात करें तो उनमें श्वास संबधी रोग ज्यादा है। वायु प्रदूषण के कारण संभावित बच्चों में जन्मदर कम होने के साथ साथ अस्थमा व निमोनिया जैसे अन्य कई श्वास रोग होने की संभावना बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली जैसे त्योहार पर पटाखों पर पूरी पाबंदी ना करते हुए एक समय अंतराल तक ही पटाखों को फोड़ने की अनुमति दी है ताकि भारतीय त्योहारों और धार्मिक उत्सव में ज्यादा खलल ना पड़े। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने ज्यादा छेड़छाड़ ना करते हुए इस मामले की सुनवाई की है,क्योंकि भारत में धार्मिक मामलों में संवैधानिक रूप से कई छूट है। दीवाली आने में अभी सप्ताह बाकी है इसके पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई कर दी है अब देखने वाली बात होगी कि पूरे देश में यह किस तरह लागू होती है।भारत में त्योहारों की धूम तो बनते ही देखा जाता है।दीवाली भी एक मुख्य त्योहार है जिसको बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।सम्पूर्ण भारत मे इनकी धूम देखी जा सकती है।लेकिन इस त्योहार में वायु प्रदूषण को बढ़ावा भी कहीं ना कहीं दिया जाता है। सम्पूर्ण देश में व्यापक रूप से पटाखे फोड़े जाते हैं जो उच्च ध्वनि के साथ वायु को प्रदूषित कर वायुमंडल में जहर घोलने का कार्य करते हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">
सिर्फ दीवाली को देखते हुए ही वायु प्रदूषण पर विचार करना उपाय नही है बल्कि यह एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।दीवाली में जो प्रदूषण बढ़ेगा वो तो है ही लेकिन तात्कालित समय में ही वायु प्रदूषण गहराया जा रहा है।हालात यह है कि पर्यावरण आज इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि देश की राजधानी दिल्ली में सांस लेना भारी पड़ रहा है।सिर्फ दिल्ली ही नही भारत के कई राज्यों में वायु प्रदूषण व्यापक रूप से फैली हुई है।बढ़ती विकास की रफ्तार में हम इतने मगन हो गए हैं कि पर्यावरण और अपनी सेहत के प्रति उदासीन दिखते हैं। कुछ ही दिन पहले भारत प्रदूषण फैलाने वालों की सूची में अव्वल आया था। बढ़ते उद्योगों और परिवहन के कारण शहर की हरियाली पूरी तरह तबाह हो चुकी है। लोग खुली और स्वक्ष हवा लेने के लिए तरस गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हवाओं में फैली इस जहर के कारण कई रोगों का जन्म होता है। जिनसे कई लोग जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। जिनका प्रतिकूल प्रभाव सभी उम्र के लोगों पर पड़ता है। लेकिन बच्चे सबसे ज्यादा प्राभवित होते हैं। आजकल सांसों का बढ़ता रोग प्रदूषण के कारण ही जोर पकड़ा हुआ है। ऐसा पहली मर्तबा है कि लोगों को पर्यावरण के प्रति चेताया गया है। हर बार विश्व संगठन लोगों को चेताने का काम करता है। लेकिन लोगों में जरा सी चेतना नही नजर आती है। जिसका अंजाम इतना बुरा होगा कि मानव को संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा।भारत ही नही बल्कि दुनिया के बहुत सारे देश है जो वायु प्रदूषण को झेल रहा है। खास कर ऐसा देश जो विकाशील हो वहां प्रदूषण की मार ज्यादा है। गौरतलब है कि भारत भी विसकशील देशों की गिनती में आता है। जहाँ विकास को प्राथमिक मानते हुए प्रदूषण को अनदेखा किया जाता है। हालांकि भारत मे भी जागरूकता फैलाई जा रही है।कई बड़े बड़े आयोजन के जरिये भी लोगों को संदेश देने का काम करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन विडंबना यह है कि ऐसे संदेश बस मंच तक ही सीमित रह जाते हैं। लोगों की चेतना नही होने के कारण आज प्राकृतिक आपदा अपना उग्र रूप दिखाती है। प्रदूषण का बेहद खराब स्तर यह देखने के लिए काफी है कि दिल्ली में बुधवार को ही प्रदूषण का धुंध छाया रहा।बीते दिन में राजधानी के पांच इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर दर्ज किया गया है।गौरतलब है कि अभी भी दीवाली आने में सप्ताह बाकी है और प्रदूषण स्तर इतना उच्च है तो दो घंटे में ही हवा कितनी जहरीली हो जाएगी? इनका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही लोगों को इससे बचना जरूरी नहीं है बल्कि खुद के स्वास्थ्य और देश की राजधानी समेत पूरे देश में बढ़ रहे प्रदूषण रूपी मानवी जहर हो रोकना होगा तभी त्योहारों के मजे लिए जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>नीलेश मेहरा</strong></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Nov 2018 10:04:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुफ्त डाटा व त्यौहार</title>
                                    <description><![CDATA[देश में त्यौहारों का दौर जारी है। दशहरा पर्व भी निकल गया और दीपावली आने वाली है। भारतीय युवा पीढ़ी विशेष तौर पर मध्य वर्ग इन दिनों त्यौहारों की महत्वता से दूर होकर मोबाइल फोन पर फ्री व सस्ते मोबाइल डाटा के आॅफरों में व्यस्त है। त्यौहारों के संदेश को देखते हुए लग ही नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/free-data-and-festivals/article-6355"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/offar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में त्यौहारों का दौर जारी है। दशहरा पर्व भी निकल गया और दीपावली आने वाली है। भारतीय युवा पीढ़ी विशेष तौर पर मध्य वर्ग इन दिनों त्यौहारों की महत्वता से दूर होकर मोबाइल फोन पर फ्री व सस्ते मोबाइल डाटा के आॅफरों में व्यस्त है। त्यौहारों के संदेश को देखते हुए लग ही नहीं रहा कि कोई त्यौहार आ रहा है। दशहरा व दीपावली पवित्र त्यौहार हैं जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उपभोक्ता कल्चर ने दीपावली को डिस्काउंट का त्यौहार बनाकर रख दिया। भारतीय युवाओं की हालत यह है कि महत्व समझने की बजाए इंटरनेट डाटा को ही आदर्श मान लिया है। निजी कंपनियों के लिए भारतीय त्यौहार आय का स्त्रोत बन गए हैं, दूसरी तरफ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं, संस्कृति जैसे क्षेत्र दयनीय दौर से गुजर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारों की नाकामी के कारण, वैश्वीकरण व निजीकरण ने ऐसा जाल बिछाया है कि देश में मुख्य मुद्दों व समस्याओं से ध्यान हटाया जा रहा है। सस्ते इंटरनेट को ही विकास की पहचान बनाकर पेश किया जा रहा है। इसी तरह लगता है कि जैसे सरकारों ने यही सोच लिया है कि 24 घंटे मोबाइल प्रयोग करने वाले युवा ही मजबूत भारत की पहचान होंगे। बेरोजगारी के सताए युवा विदेशों में जाने के लिए मजबूर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज का युवा चिंतन से निकल अपनी चिंता को मिटाने के लिए मोबाइल फोन में आंखों गढ़ाकर बैठा है। राजनेताओं की गतिविधियां केवल सत्ता प्राप्त करने तक सीमित हैं। राजनेता वोट बटोरने के लिए जादूगरी भाषणों से मुद्दों का प्रयोग करते हैं, मुद्दों का हल नहीं निकालते। नशा बहुत बड़ी समस्या है जिस पर राजनैतिक जुमलेबाजी तो होती है लेकिन रोकने के लिए नेता पहल नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात बिल्कुल गरीबी की तरह है। व्यंग्य के तौर पर यही कहा जाता है कि यदि गरीबी न रही तो राजनीति के पास मुद्दा क्या रहेगा। उसी तरह नशा भी राजनीति के लिए मनोरंजन बन गया। दीपावली के अवसर पर सब मुद्दे गायब हैं, सब समस्याएं गायब हैं क्योंकि भारतीय युवाओं पर मुफ्त इंटरनेट का भूत सवार है, यही बात राजनीति चाहती है। दिशाहीन युवाओं का अपनी समस्याओं से मुंंह फेर चुप कर बैठना किसी संतुष्टि का नहीं बल्कि गिरावट का प्रमाण है। दीपावली से कोई संदेश लेने की कोशिश नहीं हो रही। दीपावली अब महज कंपनियों की कमाई का जरिया बनकर रह गई है।</p>
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                <pubDate>Sat, 20 Oct 2018 09:33:33 +0530</pubDate>
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