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                <title>हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता)। विपक्ष के भारी हंगामे के कारण आज लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन में आज लगातार 11वें दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका और विपक्ष के हंगामे के कारण अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने एक मिनट के अंदर की कार्यवाही दोपहर 12 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lok-sabha-proceedings-adjourned-for-the-day-due-to-agitation/article-3611"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/parliment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता)। </strong>विपक्ष के भारी हंगामे के कारण आज लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन में आज लगातार 11वें दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका और विपक्ष के हंगामे के कारण अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने एक मिनट के अंदर की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर अन्नाद्रमुक और तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य अपनी मांगों के समर्थन में बैनर और प्लेकार्ड लेकर अध्यक्ष के आसन के समीप पहुंच गये और नारेबाजी करने लगे। राष्ट्रीय जनता दल के जयप्रकाश नारायण यादव भी कुछ कागज लहराते हुए आसन के पास पहुंच गये।</p>
<p style="text-align:justify;">शोरशराबे के बीच ही अध्यक्ष ने जरूरी दस्तावेज सदन पटल पर रखवाये। इसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि श्री राजनाथ सिंह कुछ कहना चाहते हैं। श्री सिंह ने खड़े होकर कहा कि जब से बजट सत्र शुरू हुआ सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि वह सत्तापक्ष की तरफ से यह कहना चाहते हैं कि सदस्य जो भी मुद्दे उठायेंगे सरकार उस पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी मिला है और सरकार इस पर भी चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि वे सदन में शांति बनाये रखने में सहयेाग करें ताकि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सके। श्री सिंह की अपील के बाद अध्यक्ष के आसन के समीप इकट्ठा अन्नाद्रमुक और टीआरएस के सदस्य जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे, जिससे कुछ भी सुनायी नहीं दे रहा था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Mar 2018 03:58:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सदन पहुंचे सचिन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रश्नकाल के दौरान पूरे समय तक सदन में रहे मौजूद नई दिल्ली। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जारी मानसून सत्र में पहली बार उच्च सदन की कार्यवाही में भाग लेने गुरुवार को राज्य सभा पहुंचे। पूर्व क्रिकेटर सचिन ने सदन की कार्यवाही में भाग लिया। वह प्रश्नकाल के दौरान पूरे समय तक सदन में मौजूद थे। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sachin-reached-rajya-sabha/article-2851"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sachin.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">प्रश्नकाल के दौरान पूरे समय तक सदन में रहे मौजूद</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जारी मानसून सत्र में पहली बार उच्च सदन की कार्यवाही में भाग लेने गुरुवार को राज्य सभा पहुंचे। पूर्व क्रिकेटर सचिन ने सदन की कार्यवाही में भाग लिया। वह प्रश्नकाल के दौरान पूरे समय तक सदन में मौजूद थे। हालांकि इस दौरान उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा। सचिन के अलावा पांच बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता महिला मुक्केबाज एम सी मैरीकॉम भी राज्य सभा पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि दो दिन पूर्व ही समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने नामित सदस्यों के राज्य सभा से अनुपिस्थित रहने पर सवाल करते हुए कहा था कि सचिन और अभिनेत्री रेखा को राज्य सभा से इस्तीफा दे देना चाहिए। राज्य सभा के लिए मनोनित 12 सदस्यों में से सचिन और रेखा की सदन में उपस्थिति बहुत कम हैं। सचिन राज्य सभा तो पहुंच गए लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें कड़ी आलोचना और मजाक का सामना करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 09:38:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लोकसभा में दिनभर छाया रहा किसान मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यवाही रही स्थगित नई दिल्ली। किसानों से संबंधित मुद्दों एवं भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के नेता पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने वीरवार को लोकसभा में जमकर हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल में विपक्षी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/kisan-issue-in-the-lok-sabha/article-2473"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/lok-sabha1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">कार्यवाही रही स्थगित</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। किसानों से संबंधित मुद्दों एवं भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के नेता पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने वीरवार को लोकसभा में जमकर हंगामा किया,</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल में विपक्षी दलों के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया जिसके कारण अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बारह बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही तीसरी बार शुरू हुई विपक्षी दलों के सदस्य किसानों के मुद्दे पर नारे लगाते हुए सदन के बीचोंबीच आ गए। अध्यक्ष ने हंगामे के बीच जरूरी दस्तावेज सदन पटल पर रखवाए, लेकिन शोर-शराबा बढ़ते देख उन्होंने सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल तथा तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर हंगामा करना शुरू कर दिया। कांग्रेस के कुछ सदस्य जहां किसानों से जुड़े मसलों पर हंगामा कर रहे थे,</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं कुछ सदस्य भाजपा की केरल इकाई के एक नेता द्वारा रिश्वत लेने के आरोपों को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। अध्यक्ष ने हंगामे के बीच प्रश्नकाल शुरू किया, लेकिन हंगामा थमता न देखकर उन्होंने सदन की कार्यवाही 17 मिनट के लिए स्थगित कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2017 08:26:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘समाज विरोधी तत्वों को बख्शेंगे नहीं ’</title>
                                    <description><![CDATA[स्व. राजीव गांधी की प्रतिमा को पहुंचाया नुकसान, मामले की जांच में जुटी पुलिस डीएसपी को दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्यवाही को कहा इससे पहले तीन बार प्रतिमा को किया जा चुका है क्षतिग्रस्त  नाभा(तरुण कुमार)। स्थानीय दुलद्दी गेट के बाहर स्थित एक सार्वजनिक पार्क में कांग्रेसियों के महबूब नेता स्व. राजीव गांधी की प्रतिमा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/anti-social-elements-will-not-spare/article-1625"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/aunty-soical.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">स्व. राजीव गांधी की प्रतिमा को पहुंचाया नुकसान, मामले की जांच में जुटी पुलिस</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>डीएसपी को दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्यवाही को कहा</strong></li>
<li><strong>इससे पहले तीन बार प्रतिमा को किया जा चुका है क्षतिग्रस्त </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नाभा(तरुण कुमार)।</strong> स्थानीय दुलद्दी गेट के बाहर स्थित एक सार्वजनिक पार्क में कांग्रेसियों के महबूब नेता स्व. राजीव गांधी की प्रतिमा के साथ शरारती तत्वों द्वारा तोड़-तोड़ की गई। जानकारी के अनुसार रविवार सुबह शहर निवासियों ने देखा कि इस प्रतिमा की धड़ को नुकसान पहुंचाया हुआ है जिस उन्होंने कांग्रेसियों और प्रशासन को इस बारे में सूचना दी। इस बारे में जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच शुरू कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">जिक्रयोग है कि यह पार्क कांग्रेसियों के महबूब नेता स्व. राजीव गांधी की याद में स्थापित किया गया था जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की ओर से किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद यह पार्क जंगली झाड़ियों और शरारती तत्वों का ठिकाना बन कर रह गया है। इस पार्क की दुदर्शा के बारे में पहले कांग्रेसी धरने और चेतावनी देकर विरोधी अकाली सरकार पर दोष लगाते रहे परंतु अब हलका विधायक के पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद भी इस पार्क की ओर कांग्रेसियों ने मुंह तो क्या करना था बल्कि बीते माह स्व. राजीव गांधी के बलिदान दिवस पर उनको याद करना तक भूल गए थे जबकि अब कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद भी प्रतिमा की हुई तोड़-तोड़ के बाद कौंसिल अधिकारियों की ओर से प्रतिमा को कपड़े के साथ ढक दिया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आरोपी जल्द होंगे गिरफ्तार : एसएचओ</h2>
<p style="text-align:justify;">उपरोक्त घटना संबंधी बात करते हुए नाभा कोतवाली के एसएचओ सब इंस्पेक्टर करनैल सिंह ने कहा कि मामले संबंधी पुलिस टीम का गठन करके जांच तेजी के साथ शुरू कर दी गई है किसी भी दोषी को बाहर नहीं घूमने दिया जाएगा और जल्द ही कानून की पकड़ में होंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">एक साल के भीतर सुधारेंगे शहर के हालात: धर्मसोत</h2>
<p style="text-align:justify;">उपरोक्त घटनाक्रम संबंधी पंजाब के कैबिनेट मंत्री और हलका विधायक साधू सिंह धर्मसोत ने कहा कि यह समाज विरोधी तत्वों का किया काम है और इस संबंधी डीएसपी नाभा को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि मामले को जल्द हल करके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाये। शहर में सार्वजनिक तक पार्कों की देखभाल संबंधी इस्तेमाल की जाती लापरवाही के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास जादू की छड़ी नहीं है, हां एक साल तक शहर के हालातों को सुधारेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2017 00:44:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निराश करती संसदीय कार्यवाहियां</title>
                                    <description><![CDATA[इसी माह देश में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्म दिवस के अवसर पर सुशासन दिवस मनाया जाएगा। चूंकि एक सांसद के रूप में अटल जी का आचरण अविस्मरणीय है लेकिन जिस तरह गत दिनों संसद के शीतकालीन सत्र में जो कुछ हुआ वह अटल जी को जरूर निराश करेगा। गत दिनों शीतकालीन सत्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/parliamentary-proceedings-disappoints/article-557"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/parliament.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इसी माह देश में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्म दिवस के अवसर पर सुशासन दिवस मनाया जाएगा। चूंकि एक सांसद के रूप में अटल जी का आचरण अविस्मरणीय है लेकिन जिस तरह गत दिनों संसद के शीतकालीन सत्र में जो कुछ हुआ वह अटल जी को जरूर निराश करेगा। गत दिनों शीतकालीन सत्र का समापन हो गया, लेकिन संसद के दोनों सदनों की कार्यवाहियां हंगामें की भेंट चढ़ी, जोकि एक गंभीर चिंता का विषय है।<br />
अगर 16वीं लोकसभा के गठन के बाद से संसद के अभी तक के सभी सत्रों पर नजर डाली जाए, तो यह शीतकालीन सत्र सर्वाधिक निराश करने वाला साबित हुआ। 16 नवम्बर से 16 दिसम्बर तक चलने वाले इस सत्र में लोकसभा ने महज 15 फीसदी तो राज्यसभा ने केवल 18 फीसदी काम किया। संसद की उत्पादकता का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार केवल 2 विधेयक ही पारित हो सके जबकि 8 विधेयकों को प्रस्तुत किया गया था। संसद ने नोटबंदी से उभरी तमाम समस्यायों पर कोई चर्चा नहीं की, जम्मू-कश्मीर में आये दिन शहीद हो रहे जवानों पर कोई प्रश्न नहीं खड़ा हुआ, यदि हंगामा हुआ तो सिर्फ इस बात को लेकर कि मोदी संसद में क्यों नहीं बोलते और नोटबंदी पर चर्चा नियम 184 के तहत हो या नियम 193 के तहत।<br />
दरअसल नियम 184 के तहत चर्चा के पश्चात मतदान होता है, जिससे सरकार के प्रति संसद का मिजाज स्पष्ट होता है और सरकार को घेरने का मौका भी मिल जाता है जबकि नियम 193 में सिर्फ चर्चा ही होती है मतदान नहीं। चर्चा किस नियम के अंतर्गत हो इस पर अंतिम निर्णय स्पीकर का ही होता है, परन्तु बहुमत के चलते अप्रत्यक्ष रूप से सरकार निर्णय करने में अपनी भूमिका रखती है। संसद के शीतकालीन सत्र में जो भी हुआ उसका जिम्मेदार आखिरकार कौन है? चाहे उंगलियां विपक्ष पर खड़ी हों या सरकार पर लेकिन अंतत: इससे देश की जनता ही प्रभावित होती है. सरकार पर देश चलाने का जिम्मा होता है और विपक्ष पर पहरेदारी का, देश लाइन में लगा है, नोटबंदी से समस्या विकराल होती चली गयी लेकिन सरकार और विपक्ष चर्चा के लिए किसी सर्वमान्य हल पर ही नहीं पहुंच पाए। संसद के इस रवैय्ये से लालकृष्ण अडवानी भी असहमत दिखे और उन्होंने कहा कि यदि आज अटल जी संसद में होते तो वह काफी निराश होते।<br />
दरअसल सवाल यह है कि सत्र-दर-सत्र मजबूत हो रही हंगामे की परिपाटी को कैसे तोड़ा जाए? कैसे संसद को जवाबदेह और किसके लिए जवाबदेह बनाया जाए? संसदीय शासन प्रणाली में सरकार संसद के लिए जवाबदेह होती है, संसद प्रश्न और प्रस्ताव के जरिये उस पर नियंत्रण रखती है लेकिन संसद में विपक्ष और सरकार के अहं का टकराव चरम पर है, जिसका परिणाम सिर्फ और सिर्फ हंगामे के रूप में सामने आता है।<br />
संविधान का अनुच्छेद 122 संसद को न्यायिक समीक्षा से उन्मुक्ति प्रदान करता है। भारत में न्यायिक सक्रियता आज जिस चरम पर है वह कार्यपालिका की निष्क्रियता का ही परिणाम है और अब विधायिका जिस निष्क्रियता पर उतारू है उससे तो यही लगता है कि लोकतान्त्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कहीं न्यायपालिका को संसदीय आचरण पर भी हस्तक्षेप न करना पड़े। क्योंकि यदि संसद में हंगामे की परिपाटी नहीं टूटी तो यह जनतांत्रिक मूल्यों की हत्या होगी और जब संसद ही असंवैधानिक व्यवहार पर उतारू हो जाए तो जनता के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचता क्योंकि वह सिर्फ लोकसभा के सदस्यों को चुनने तक ही अपनी भूमिका रखती है। ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है कि कैसे इस परिपाटी को बदला जाए।<br />
इस सन्दर्भ में बीजद सांसद बैजयन्त पांडा ने एक आलेख के जरिये संसदीय नियमों में परिवर्तन का सुझाव दिया था। उनके सुझाव बेहद प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। पांडा के अनुसार हमारी संसदीय व्यवस्था में कुछ नियम बहुत ही अस्पष्ट प्रतीत होते हैं। यदि स्पीकर की शक्तियों में वृद्धि कर दी जाए व सांसदों द्वारा हंगामे की स्थिति में दंड सम्बन्धी प्रावधान कठोर किये जाएं, तो हंगामे की परिपाटी को तोड़ा जा सकता है। दरअसल स्पीकर को यह शक्ति स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए कि वह हंगामा करने की स्थिति में किसी सदस्य को अनिश्चित कालीन समय के लिए सदन से निलंबित कर सके। और दंड की यह परिपाटी मजबूत की जाए ताकि सदन में अनुशासन स्थापित किया जा सके।<br />
दरअसल हमारी संसदीय व्यवस्था ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से प्रभावित है और आज भी हमारी संसद उन संसदीय नियमों का पालन कर रही है जिन्हें खुद ब्रिटेन की संसद समाप्त कर चुकी है। आज नियम 184 के तहत चर्चा को लेकर जो गतिरोध देखने को मिल रहा है, वह नया नहीं हैं पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में भी ऐसा ही गतिरोध पैदा होता था। चूंकि संसद अपनी प्रक्रियायों के लिए नियम स्वयं बनाती है, इसलिए संसदीय नियमावली में संसद को संसोधन करके स्पष्ट करना चाहिए कि किन मामलों में नियम 184 के तहत चर्चा होगी। या ऐसा भी हो सकता है कि यदि 150 सांसद स्पीकर को लिखित रूप में आवेदन करें, तो उसे नियम 184 के तहत चर्चा कराने के लिए बाध्य होना पड़े। यदि 150 सांसदों के आवेदन सम्बन्धी बाध्यता को लागू कर दिया जाता है तो गतिरोध की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होगी। और तमाम ऐसी प्रक्रियाएं जो कार्यवाहियों में बाधक बनती हैं उन्हें स्पष्ट करना चाहिए।<br />
संसदीय अनुशासन हीनता जहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था की छवि खराब करती है वहीं यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक सिद्ध होती है। संसद कानून बनाकर समाज को भिन्न रूपों में प्रभावित करती है। जिसका सकारात्मक प्रभाव देश की जीडीपी पर पड़ता है। दरअसल विधायन प्रक्रिया से समाज का प्रत्येक वर्ग लाभान्वित होता है। सामान्यत: संसद की कार्यवाहियों का मौद्रिक आंकलन ही किया जाता है लेकिन हम कई ऐसे कदमों का आंकलन नहीं कर पाते जो किसी न किसी रूप में देश के लिए लाभकारी सिद्ध होते। गत शीतकालीन सत्र में जो भी हुआ उसे एक चुनौतीपूर्ण स्थिति मानकर सभी दलों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। क्योंकि इस तरह का असंवैधानिक और असंसदीय आचरण लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिए बहुत घातक सिद्ध होगा। यह देश के छवि और व्यवस्था दोनों के लिए ही चुनोतिपूर्ण है।<br />
पार्थ उपाध्याय</p>
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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2016 00:19:43 +0530</pubDate>
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