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                <title>बड़ा कौन</title>
                                    <description><![CDATA[एक गुरु अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। अचानक एक शिष्य ने सख्त चट्टान को देखकर उनसे प्रश्न किया, ‘‘क्या इससे भी कठोर कुछ हो सकता है?’’ गुरु ने उत्तर नहीं दिया बल्कि यही प्रश्न शिष्य मंडली से पूछने लगे। एक ने कहा, ‘‘लोहा चट्टान से भी कठोर है, जो उसे काट सकता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8/article-17646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/big.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक गुरु अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। अचानक एक शिष्य ने सख्त चट्टान को देखकर उनसे प्रश्न किया, ‘‘क्या इससे भी कठोर कुछ हो सकता है?’’ गुरु ने उत्तर नहीं दिया बल्कि यही प्रश्न शिष्य मंडली से पूछने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ने कहा, ‘‘लोहा चट्टान से भी कठोर है, जो उसे काट सकता है।’’ दूसरे ने कहा, ‘‘लोहे से आग बड़ी है, जो उसे गला सकती है।’’ तीसरे शिष्य ने तुरंत कहा, ‘‘आग से जल बड़ा है, जो आग को देखते ही देखते बुझा देता है।’’ तभी चौथा बोलो, ‘‘जल से तो हवा बड़ी है, जो उसे सुखा कर उड़ा देती है। हवा से बड़ा कौन?’’उसके उत्तर में पाँचवां शिष्य ‘प्राण’ कहने जा रहा था और मेधावी शिष्य श्रेष्ठता की सामर्थ्य का यह क्रम बढ़ाने को तैयार थे। तभी गुरुदेव ने कहा, ‘‘मित्रों, सबसे बड़ा है मनुष्य का संकल्प। इसके होने से ही प्राणी जीता और चट्टान जैसी बाधा हट सकती है।’’</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2020 13:02:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिग्गज कंपनियों में लिवाली से 350 अंक चढ़ा सेंसेक्स</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.69 प्रतिशत, जापान का निक्की 0.74 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग तथा चीन का शंघाई कंपोजिट 0.87 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुये। यूरोप में शुरूआती कारोबार में ब्रिटेन के एफटीएसई 0.25 प्रतिशत और जर्मनी का डैक्स 0.63 प्रतिशत मजबूत हुआ।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/sensex-gained-350-points-due-to-buying-in-big-companies/article-13005"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/sensex.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">एफएमसीजी समूह में करीब दो प्रतिशत की तेजी रही</h1>
<h1 style="text-align:center;">(Domestic shares Market)</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच बैंकिंग, ऊर्जा और एफएमसीजी समूहों की दिग्गज कंपनियों में लिवाली से बुधवार को घरेलू शेयर बाजार करीब तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुँच गये। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स मंगलवार की गिरावट से उबरता हुआ 349.76 अंक यानी 0.85 फीसदी चढ़कर 41,565.90 अंक पर पहुँच गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 93.30 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की बढ़त में 12,201.20 अंक पर बंद हुआ।  यह दोनों सूचकांकों का 24 जनवरी के बाद उच्चतम स्तर है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिग्गज कंपनियों के विपरीत मझौली और छोटी कंपनियों में निवेशक बिकवाल रहे। बीएसई का मिडकैप 0.29 प्रतिशत की गिरावट में 15,788.98 अंक पर और स्मॉलकैप 0.13 प्रतिशत लुढ़ककर 14,731.05 अंक पर बंद हुआ। कोरोना वायरस के नये मामलों में कमी आने से विदेशों में अधिकतर प्रमुख शेयर बाजार हरे निशान में रहे। एशिया में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.69 प्रतिशत, जापान का निक्की 0.74 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग तथा चीन का शंघाई कंपोजिट 0.87 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुये। (Domestic shares Market) यूरोप में शुरूआती कारोबार में ब्रिटेन के एफटीएसई 0.25 प्रतिशत और जर्मनी का डैक्स 0.63 प्रतिशत मजबूत हुआ।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एफएमसीजी समूह में करीब दो प्रतिशत की तेजी रही।</li>
<li style="text-align:justify;">ऊर्जा, बैंकिंग, आईटी, टेक और आॅटो समूहों के सूचकांक भी बढ़त में रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">सेंसेक्स की कंपनियों में हिंदुस्तान यूनिलिवर के शेयर पाँच प्रतिशत चढ़े।</li>
<li style="text-align:justify;">भारतीय स्टेट बैंक में करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट रही।</li>
</ul>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2020 18:07:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में भूचाल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा दबाव  | Big Fall मुंबई (एजेंसी)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक स्तर इसका असर दिखने लगा है। सोमवार को दबाव की वजह से घरेलू शेयर बाजार में भी भूचाल (Big Fall) आ गया। जिसके कारण बीएसई का सेंसेक्स 690 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/big-fall-in-stock-market/article-12264"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/big-fall.jpg" alt=""></a><br /><h2>अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा दबाव  | <span lang="en" xml:lang="en">Big Fall</span></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक स्तर इसका असर दिखने लगा है। सोमवार को दबाव की वजह से घरेलू शेयर बाजार में भी भूचाल <strong>(<span lang="en" xml:lang="en">Big Fall</span>)</strong> आ गया। जिसके कारण बीएसई का सेंसेक्स 690 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 200 अंकों से अधिक उतर गया। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1.66% गिर गया। यह 40,737.86 अंक के निचले स्तर तक उतर गया। वहीं एनएसई का निफ्टी 202.10 अंक से अधिक गिरकर 12007 के निचले स्तर पर आ गया। इस दौरान बीएसई का मिडकैप 2.04 प्रतिशत लुढ़ककर 14,806.59 अंक पर आ गया। स्मॉलकैप 1.83 प्रतिशत उतरकर 13,731.48 अंक तक उतर गया। बीएसई में सभी समूहों में बिकवाली देखी गई। जिसमें धातु में सबसे अधिक 2.48 प्रतिशत की गिरावट रही।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong><strong>बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 690 अंक गिरा। </strong></strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>40,737.86 अंक के निचले स्तर पर पहुंचा</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एनएसई का निफ्टी 202.10 अंक से अधिक गिरा</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>12007 अंक के स्तर तक पहुंचा</strong></li>
<li><strong>हर सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई। </strong></li>
<li><strong>बीएसई सेंसेक्स, मिडकैप, स्मॉलकैप में 2 फीसदी की गिरावट देखी गई। </strong></li>
<li><strong>बैंक, फाइनेंस, मेटल, आयल ऐंड गैस, रियल्टी और आॅटो सेक्टर में 2 फीसदी की गिरावट देखी गई।</strong></li>
</ul>
<h3>कच्चा तेल मजबूत</h3>
<p style="text-align:justify;">सभी सूचकांक लाल निशान में दिख रहे हैं। पीएसयू बैंकिंग में 3 फीसदी और मीडिया शेयरों में 2 फीसदी की गिरावट देखी गई। कच्चे तेल में तेजी की वजह से दुनिया भर के बाजार लाल निशान में दिख रहे हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 3 फीसदी चढ़कर 70.59 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसी तरह अमेरिकी क्रूड चढ़कर 64.22 डॉलर तक पहुंच गया है।</p>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2020 13:55:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्लम बस्तियां हरियाणा पर बड़ा बोझ</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के 75 टाउन में 3 लाख 32 हजार 697 स्लम हाउसहोल्ड Slums अश्वनी चावला/सच कहूँ चंडीगढ़। 21वीं सदी की तरफ बढ़ रहे देश में हरियाणा एक ऐसा राज्य है, जहां पर स्लम बस्तियां (Slums) खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। हालांकि केन्द्र सरकार ने स्लम बस्तियों के स्लम बस्तियों को खत्म […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/slums-are-a-big-burden-on-haryana/article-11868"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/slums-in-haryana.jpg" alt=""></a><br /><h2><strong> प्रदेश के 75 टाउन में 3 लाख 32 हजार 697 स्लम हाउसहोल्ड Slums<br />
</strong></h2>
<p><strong>अश्वनी चावला/सच कहूँ</strong><br />
चंडीगढ़। 21वीं सदी की तरफ बढ़ रहे देश में हरियाणा एक ऐसा राज्य है, जहां पर स्लम बस्तियां (Slums) खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। हालांकि केन्द्र सरकार ने स्लम बस्तियों के स्लम बस्तियों को खत्म करने के साथ-साथ इनकी रिहैबिलिटेशन के भी आदेश दिए हैं। परंतु पिछले 10 सालों में राज्य सरकार इस दिशा में ज्यादा अच्छा काम नहीं कर पाई है। इसके साथ ही इन बस्तियों में रहने वालों की तादाद निरंतर बढ़ रही है।<br />
केन्द्र सरकार के अनुसार हरियाणा में इस समय 75 से ज्यादा टाउनों में स्लम बस्तियां हैं। हरियाणा के इन टाउनों 3 लाख 32 हजार 697 से ज्यादा घर कच्चे बन चुके हैं। वहीं स्लम बस्तियों में 16 लाख 62 हजार 305 लोग रह रहे हैं।</p>
<h3>नागरिकता भी खड़ा हो सकता है सवाल Slums</h3>
<p>हरियाणा की इन स्लम बस्तियों में रह रहे लोगों की नागरिकता पर भी एक बड़ा सवाल उठता नजर आ रहा है। क्योंकि देश में लागू हुए नागरिकता संशोधन कानून के तहत नागरिकता तो दी जानी है। परंतु स्लम बस्तियों में रहने वाले लोगों का पुराना कोई रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है। ये लोग कहां से आए हैं और कब आकर हरियाणा में बसे हैं। हालांकि इन लोगों ने अब राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवाना शुरू कर दिया है। लेकिन कुल संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा बहुत कम है। इसलिए जिन लोगों के राशन कार्ड और आधार कार्ड नहीं बने हैं, उनकी नागरिकता पर सवाल उठ सकता है। इस मामले में ज्यादा स्थिति नागरिकता संशोधन कानून के बाद एनआरसी में स्पष्ट हो पाएगी। क्योंकि देखना दिलचस्प होगा कि इन लोगों में से कितने लोगों को नागरिकता मिलेगी।</p>
<p><strong>किस जिले की स्लम बस्तियों में कितने लोग</strong><br />
<strong>जिला                                                    जनसंख्या</strong></p>
<p>महेंद्रगढ़                                            9 हजार 18<br />
मेवात                                                15 हजार 928<br />
पलवल                                              20 हजार 646<br />
पानीपत                                             22 हजार 188<br />
सिरसा                                               30 हजार 291<br />
पंचकूला                                             49 हजार 247<br />
फतेहाबाद                                          53 हजार 620<br />
रोहतक                                              55 हजार 985<br />
भिवानी                                             61 हजार 66<br />
रिवाड़ी                                               64 हजार 904<br />
कुरुक्षेत्र                                              69 हजार 23<br />
अम्बाला                                            69 हजार 303<br />
झज्जर                                              75 हजार 876<br />
करनाल                                             82 हजार 257<br />
कैथल                                                93 हजार 960<br />
यमुनानगर                                        94 हजार 453<br />
सोनीपत                                            1 लाख 18 हजार 208<br />
जींद                                                  1 लाख 21 हजार 270<br />
गुरुग्राम                                            1 लाख 69 हजार 549<br />
हिसार                                               1 लाख 70 हजार 462<br />
फरीदाबाद                                         2 लाख 15 हजार 53</p>
<h3>फरीदाबाद में अव्वल</h3>
<p>हरियाणा के साफ-सुथरे शहरों में शुमार फरीदाबाद स्लम बस्तियों के मामले में भी सबसे आगे है। इस समय राज्य की 12.94 फीसदी स्लम बस्तियों के साथ-साथ इन बस्तियों में रहने वाली जनसंख्या भी सबसे ज्यादा है। राज्य के 16 लाख 62 हजार लोगों में से 2 लाख 15 हजार 53 लोग फरीदाबाद की स्लम बस्तियों में ही रह रहे हैं।</p>
<h3>प्रधानमंत्री आवास योजना का सहारा</h3>
<p>स्लम बस्तियों के कच्चे घरों में रहने वाले लोगों को रिहैबिलिटेशन के लिए कई योजनाएं है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी इन लोगों को लाभ मिल सकता है। इसके लिए राज्य सरकार के पास आवेदन करना होगा। इसमें इन्हें अपनी नागरिकता के सुबूत के साथ सालाना आय डेढ़ लाख से कम होने का प्रमाण देना होगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2019 11:59:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जन्मदिन विशेष: बैडमिंटन की बड़ी खिलाड़ी थीं किरण खेर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा किरण खेर ने अपने करियर की शुरुआत चंडीगढ़ में थिएटर शोज से की। यहां पर अपनी कला और टैलेंट को निखारने के बाद वह मुंबई आ गईं और यहां काम की तलाश में लग गईं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि किरण एक हुनरमंद अभिनेत्री होने के साथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/birthday-special-badmintons-big-player-was-kiran-kher/article-4150"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kiran.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा किरण खेर ने अपने करियर की शुरुआत चंडीगढ़ में थिएटर शोज से की। यहां पर अपनी कला और टैलेंट को निखारने के बाद वह मुंबई आ गईं और यहां काम की तलाश में लग गईं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि किरण एक हुनरमंद अभिनेत्री होने के साथ एक कामयाब बैडमिंटन खिलाड़ी भी रही हैं। किरण ने दीपिका पादुकोण के पिता प्रकाश पादुकोण के साथ नेशनल लेवल बैडमिंटन खेला है।</p>
<p style="text-align:justify;">काम की तलाश में वह मुंबई आईं और यहां आने के बाद उन्होंने बिजनेसमैन गौतम बेरी से शादी कर ली, लेकिन उनकी शादी ज्यादा लंबी नहीं चली और उनका तलाक हो गया। उधर अनुपम खेर की शादी भी लंबी नहीं चली थी। एक सफर में जब अनुपम और किरण साथ थे तब अनुपम ने किरण के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और कुछ वक्त बाद दोनों ने शादी कर ली। किरण और अनुपम का बैकग्राउंड अलग रहा है लेकिन फिर भी यह शादी कामयाब रही। किरण का जन्म 14 जून 1955 को पंजाब में हुआ था। किरण खेर ने चंडीगढ़ से अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी। किरण के पहले पति गौतम बेरी मुंबई के एक अमीर बिजनेसमैन थे। दोनों का एक बेटा भी हुआ जिसका नाम सिकंदर खेर रखा।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 08:45:19 +0530</pubDate>
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                <title>छोटी सोच के बड़े मसीहा</title>
                                    <description><![CDATA[कोस कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी’। इस पंक्ति का प्रयोग हम अक्सर भारत की विभिन्नताओं को दर्शाने के लिए करते हैं और पूरी दुनिया को ये दिखाने का प्रयास करते हैं कि कैसे हम जाति, धर्म, स्थान विशेष से अलग होने के बावजूद एक ही हैं, पर कहते हैं न कि ‘हाथी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">कोस कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी’। इस पंक्ति का प्रयोग हम अक्सर भारत की विभिन्नताओं को दर्शाने के लिए करते हैं और पूरी दुनिया को ये दिखाने का प्रयास करते हैं कि कैसे हम जाति, धर्म, स्थान विशेष से अलग होने के बावजूद एक ही हैं, पर कहते हैं न कि ‘हाथी के दांत दिखाने के कुछ और, खाने के कुछ और ही होते हैं।’ उसी तरह हम पूरी दुनिया को दिखाते कुछ और हैं और वास्तविक सच्चाई कुछ और ही होती है।<br />
हमारे समाज में जाति एंव धर्म के नाम पर बहुत पहले से ही लड़ाईयां होती आ रही हैं और कभी-कभी उम्मीद भी कम ही लगती है कि ये लड़ाई कभी खत्म हो पाएंगी। लेकिन इन सबके बीच भी जो एक बड़ा भेदभाव आज भी दिख रहा है, वे है प्रादेशिक आधार पर किया जाने वाला भेदभाव। समाज का बड़ा और पढ़ा-लिखा तबका आज भी इस भेदभाव को करने में पीछे नहीं है।<br />
पूर्वोत्तर के राज्यों से आने वाले लोगों को समाज में आज भी नेपाली या चीनी कहकर बुलाया जाता है, जबकि उनकी नागरिकता भी इसी देश की होती है और उनकी देशभक्ति भी इसी देश के प्रति ही होती है। देशभक्ति के मामले में तो कई बार इनकी देशभक्ति तथाकथित देशभक्तों से ज्यादा ही देखने को मिल जाती है। पूर्वोत्तर राज्यों पर चीन अपनी नजर गड़ाए किस तरह बैठा रहता है, ये बात किसी से छुपी नहीं है, केन्द्र सरकार की अधिकांश योजनाओं से अछूते रहने वाले ये लोग फिर भी अपने देश के प्रति देशभक्ति रखते, और शायद ही देश की कभी सार्वजनिक रुप से बुराई करते हैं। लेकिन उत्तर भारत समाज का एक बड़ा तबका ऐसा भी है, जो राह चलते अपने देश की अन्य देशों से तुलना कर देश की कमियों की बौछार बताने लगता हैं। भेदभाव का सामना सिर्फ पूर्वोत्तर भारत के लोग ही नहीं करते, बल्कि इस भेदभाव का सामना दक्षिण के राज्यों को भी करना पड़ता है और अगर आप बिहार से या बंगाल से हैं, तो कुछ जगह तो बकायदा आपके लिए स्लोगन भी बनाकर रखे जाते हैं, जिसके जरिए आपको नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता है।<br />
इस तरह का भेदभाव अगर समाज का अशिक्षित वर्ग करे, तो एकबार को दु:ख भी कम होता है, क्योंकि समझा जा सकता है कि शिक्षा के अभाव में वे ऐसा बोल रहे हैं, लेकिन जब यही भेदभावपूर्ण बातें उच्च शिक्षित और बौद्धिक वर्ग के लोग करते हैं, तो बुरा लगता है। देश का भविष्य कहे जाने वाले युवा भी भेदभाव करने के मामले में पीछे नहीं है, बल्कि वे तो इस मामले में इन तथाकथित बौद्धिक वर्ग से कुछ ज्यादा ही आगे हैं। क्योंकि दोस्तों के बीच होने वाले मजाक और लड़ाई में कई बार ये लोग क्षेत्रीय पहचान को आधार बनाकर एक-दूसरे का मजाक बनाने लगते हैं।<br />
कहने को बड़ी आसानी से कह दिया जाता है कि क्षेत्रीय भेदभाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है और ये भी कह दिया जाता है कि ये प्रयास बहुत हद तक सफल भी हुए हैं, लेकिन फिर क्यों हर बार अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर के लोगों को यह कहना पड़ता और साबित करना पड़ता है कि वे नेपाली और चीनी नहीं है। आखिर क्यों हर बार एक बिहारी को संकोच होता है ये बताने में की, वे बिहार से है?<br />
देश भले ही चांद पर पहुंच जाए, लेकिन क्षेत्रीय भेदभाव की सोच अभी तक जमीन से ऊपर उठने का नाम नहीं ले रही। हालांकि समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो भेदभाव से परे समानता का व्यवहार करते हैं। इसीलिए सबको एक ही तराजू में तोलना भी उचित नहीं होगा, लेकिन देश क्या करे, जब भेदभाव करने वालों का पलड़ा, न करने वालों पर भारी पड़ जाए? समाज की इस सोच में एकाएक बदलाव आना सम्भव नहीं है और न ही किसी एक व्यक्ति से ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि वह बदलाव ला देगा। इसके लिए व्यक्तिगत तौर पर पहले अपनी सोच को अगर बदला जाए, तो धीरे-धीरे समाज में भी बदलाव आ ही जाएगा और जब तक समाज में ये व्यापक बदलाव नहीं आता, तब तक देश सही मायनों में पूर्व से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिण तक एक नहीं हो पाएगा। <em>सुप्रिया सिंह</em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2016 00:22:41 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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