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                <title>Grain - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>किसानों का दाना-दाना खरीदेगी सरकार: बराला</title>
                                    <description><![CDATA[चेयरमैन बराला पहुंचे जाखल के कच्चा आढ़ती एसोसिएशन प्रधान ग्रेवाल के संस्थान पर सच कहूँ/तरसेम सिंह, जाखल। हरियाणा सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो चेयरमैन सुभाष बराला शनिवार को जाखल के कच्चा आढ़ती एसोसिएशन प्रधान अमरीक ग्रेवाल के संस्थान पर पहुंचे। जहां उन्होंने किसान एवं भारतीयों के समक्ष गेहूं (Grain) सीजन के दौरान कोई भी परेशानी न आने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/government-will-buy-grain-of-farmers-barala/article-32253"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/barala.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>चेयरमैन बराला पहुंचे जाखल के कच्चा आढ़ती एसोसिएशन प्रधान ग्रेवाल के संस्थान पर</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/तरसेम सिंह, जाखल।</strong> हरियाणा सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो चेयरमैन सुभाष बराला शनिवार को जाखल के कच्चा आढ़ती एसोसिएशन प्रधान अमरीक ग्रेवाल के संस्थान पर पहुंचे। जहां उन्होंने किसान एवं भारतीयों के समक्ष गेहूं (Grain) सीजन के दौरान कोई भी परेशानी न आने देने का भरोसा दिया। इस दौरान आड़तियों की ओर से प्रधान अमरीक अग्रवाल सहित कार्यकारिणी सदस्यों ने उन्हें बताया कि जाखल मंडी में गेहूं के सीजन के दौरान जगह का अभाव रहता है। इसलिए गेहूं गिराए जाने के लिए उचित जगह की व्यवस्था करवाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही उन्होंने खरीद एजेंसियों के द्वारा बारदाना (Grain) उपलब्ध नहीं करवाए जाने की भी समस्या रखी। जिस पर बराला ने तुरंत प्रभाव से अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हुए अधिकारियों एवं किसानों को कोई भी समस्या न आने देने के लिए कहा। प्रधान अमरीक ग्रेवाल, उप प्रधान शंकर लाल गर्ग सहित कार्यकारिणी सचिव रिंकू सिंगला, दीपक सिंगला, किरण शर्मा, सुभाष गुप्ता, गुलशन मदान, अरुण गुप्ता, कांत जैन, जोगिंदर पाल गर्ग, राजीव गोयल, वकील चंद, यादवेंद्र शर्मा, तरसेम सिंगला, सतीश मित्तल, हरीश गर्ग, हरमेश शर्मा, अरूण गुप्ता, बिंदर अवतार, शिवकुमार शिब्बु सहित अन्य कई पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">गेहूं सीजन में किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं आने दी जाएगी</h4>
<p style="text-align:justify;">सुभाष बराला ने कहा कि गेहूं (Grain) सीजन के दौरान सरकार किसी भी तरह से कोई भी परेशानी न आने देने के लिए प्रयासरत है। किसानों का दाना-दाना सरकार द्वारा खरीदा जाएगा। इस दौरान उन्होंने अन्य समस्याओं को भी जल्द सुधारने के लिए दिशा निर्देश दिए। वहीं उन्होंने जाखल मंडी में रुके विकास कार्यों को लेकर पत्रकार वार्ता में कहा कि जल्द ही जाखल मंडी में रुके विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषकर रेलवे अंडरपास के निर्माण कार्य के बारे उन्होंने कहा कि रेलवे अधिकारियों द्वारा जो एस्टीमेट बनाकर भेजा गया था। उसमें कुछ कमियां थी जो अब दोबारा से बनाकर भेजा गया है। इस पर जल्द ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी। एवं रेलवे अंडरपास का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू हो जाएगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Apr 2022 20:13:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कैबिनेट: गरीबों के लिए अतिरिक्त अनाज आवंटन को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत पांच माह के लिए अतिरिक्त अनाज के आवंटन को बुधवार को मंजूरी दे दी। यह आवंटन जुलाई से नवम्बर के लिए किया गया है। प्र्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की यहां हुयी बैठक में आशय के प्रस्ताव को स्वीकृति दी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cabinet-approval-for-allocation-of-additional-food-grains-for-the-poor/article-24656"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/grain.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत पांच माह के लिए अतिरिक्त अनाज के आवंटन को बुधवार को मंजूरी दे दी। यह आवंटन जुलाई से नवम्बर के लिए किया गया है। प्र्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की यहां हुयी बैठक में आशय के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी । इस योजना के तहत पांच माह तक देश के खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आने वाले 81.35 करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर करीब 64031 करोड़ रुपये के सब्सिडी दिये जाने का अनुमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार इस योजना के लिए पूरी राशि उपलब्ध करा रही है। अनाज के परिवहन तथा डीलर के कमीशन आदि पर करीब 3234.85 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे । इस प्रकार इस योजना पर कुल व्यय 67266.44 करोड़ रुपये होगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग चावल या गेहूं के आवंटन पर निर्णय करेगा । इस योजना के लिए लगभग 204 लाख टन अनाज की जरुरत होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सार्वजनिक क्षेत्र की दो भंडारण कंपनियों का विलय</h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉपोर्रेशन के साथ सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस कंपनी लिमिटेड के विलय की मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। दोनों कंपनियों के विलय के परिणामस्वरूप दक्षता, अधिकतम क्षमता उपयोग, पारदर्शिता, रेलसाइड वेयरहाउसिंग में पूंजी की आवक और रेलसाइड वेयरहाउस परिसर के रोजगार सृजन प्रबंधन व्यय में कमी आने का अनुमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉपोर्रेट कार्यालय के किराये, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक लागतों में कमी के कारण कम से कम पांच करोड़ रुपए की बचत होगी। विलय से माल-शेड स्थानों के पास कम से कम 50 और रेलसाइड गोदाम स्थापित करने में सुविधा होगी। इसके अलावा सीमेंट, उर्वरक, चीनी, नमक और सोडा आदि के भंडारण के लिए अतिरिक्ति स्थान की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे कुशल कामगारों के लिए 36,500 श्रम दिवसों और अकुशल कामगारों के लिए 9,12,500 श्रम दिवसों के बराबर रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। विलय प्रक्रिया आठ महीने के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Jun 2021 15:51:19 +0530</pubDate>
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                <title>अनाज की बहुतायत बनाम भुखमरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने भुखमरी के मसले पर भारत की स्थिति को अभी चिंताजनक बताया है। इस सूचि के अनुसार भारत भुखमरों में 100वें पायदान पर है, जबकि वर्ष 2000 में हालात ठीक थे, तब भारत 87वें पायदान पर था। 15 वर्ष पूर्व भारत में परिस्थितियां ठीक थी। यह मामला जिस तरह ऊपरी तौर पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/abundance-of-grain-vs-starvation/article-3442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/poor1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने भुखमरी के मसले पर भारत की स्थिति को अभी चिंताजनक बताया है। इस सूचि के अनुसार भारत भुखमरों में 100वें पायदान पर है, जबकि वर्ष 2000 में हालात ठीक थे, तब भारत 87वें पायदान पर था। 15 वर्ष पूर्व भारत में परिस्थितियां ठीक थी। यह मामला जिस तरह ऊपरी तौर पर गंभीर दिख रहा है, सरकार को इस दशा की बारीकी से छानबीन करनी चाहिए कि क्यों देश में भुखमरी बढ़ रही है। देश के अनाज भण्डार इतने ज्यादा भरे हुए हैं कि देश से अनाज संभाला नहीं जा रहा। पिछले वर्षों में प्रतिवर्ष हजारों टन अनाज बर्बाद हो रहा है। यहां तक कि गत वर्ष उच्चतम न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि अनाज को सड़ने न दिया जाए, बल्कि गरीबों में बांट दिया जाए। अफसोस सरकार अदालत के निर्देशों की पालना नहीं कर पा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में केन्द्र व राज्य सरकारों ने कुपोषण मिटाने के लिए सस्ता अनाज, सस्ती दाल व भोजन उपलब्ध कराने की योजनाएं चला रखी हैं। यह प्रशासनिक विफलता ही कही जाएगी कि देश में उक्त योजनाओं व अनाज की भरपूर उपलब्धता के बावजूद भी भुखमरी की डरावनी तस्वीर बनी हुई है। स्कूलों में संचालित मिड-डे-मील योजना एवं सस्ता राशन उपलब्ध करवाने वाली योजनाओं का यदि अक्षरश: पालन हो जाता है, तब देश तेजी से भुखमरी व्यक्त करने वाले आंकड़ों से अपना पिंड छुड़ा सकता है। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही भोजन उपलब्धता योजनाओं, अनाज भण्डारण की योजनाओं में खामियां रह जाती हैं, जबकि यह सब पात्र लोगों के हिस्से आना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">आम नागरिकों में भी सरकार की पौष्टिक भोजन योजनाओं को लेकर गंभीरता अभी शत्-प्रतिशत नहीं बनी हैं। लाखों परिवार ऐसे हैं, जो सस्ता राशन पाने की योजनाओं, आंगनबाड़ी केन्द्र में उपलब्ध सुविधाओं, मिड-डे-मील योजनाओं की सुविधाओं से अनभिज्ञ हैं व वंचित हैं। देश में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र चल रहे हैं। यहां बच्चों को राज्यवार प्रचलित भोजन दाल, चावल, चपाती उपलब्ध करवाई जा रही है, साथ ही विटामिन-ए भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लेकिन विभिन्न चरणों में नागरिकों की उदासीनता का अवैध लाभ भ्रष्ट लोग उठा रहे हैं।केन्द्रीय व राज्य प्रशासन को भोजन उपलब्ध करवाने वाली योजनाओं की कमियों को तेजी से दूर करने के प्रयास करने होंगे। अभी डिजीटल इंडिया के दौर में योजनाओं को मूर्त रूप लेने में वक्त लग रहा है। तेजी से तरक्की कर रही अर्थव्यवस्था के लिए यह देरी चुनौती हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/abundance-of-grain-vs-starvation/article-3442</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2017 04:42:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदलाव की मांग कर रहा कृषि संकट</title>
                                    <description><![CDATA[आज देश में अनाज का भंडार इतना बढ़ गया कि संभल ही नहीं रहा है। कैग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2016 तक 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का अनाज बर्बाद हो गया। हर साल लगभग 100 करोड़ से ज्यादा का अनाज खराब हुआ। अनाज की बहुतायत उपलब्धि बनने की बजाए समस्या बनती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/seeking-of-agricultural-crisis-change/article-2933"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/farmers-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज देश में अनाज का भंडार इतना बढ़ गया कि संभल ही नहीं रहा है। कैग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2016 तक 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का अनाज बर्बाद हो गया। हर साल लगभग 100 करोड़ से ज्यादा का अनाज खराब हुआ। अनाज की बहुतायत उपलब्धि बनने की बजाए समस्या बनती जा रही है। किसान अनाज के अंबार लगाकर भी खुदकुशियां कर रहा है। अनाज के अधिक उत्पादन के बावजूद किसान की जेब खाली की खाली और कर्जदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में सरकार, विशेषज्ञ और किसान तीनों को विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है। बहुतयात की कभी भी पूछ नहीं होती। अपने पेशे को बदल पाना मुश्किल व जोखिम भरा निर्णय है, लेकिन इसके बिना गुजारा भी नहीं। जब अनाज की पूछ नहीं तो किसान की इज्जत कैसे होगी? किसान को ऐसी परिस्थितियां बनानी होंगी कि सरकार व निजी कंपनियां उनके साथ फसलों की बिजाई संबंधी लिखित करार करें। फिलहाल किसान को अच्छी कीमत के लिए खरीददार को ताकना पड़ता है। कपड़े की दुकान पर मूल्य दुकानदार ही बताता है और ग्राहक को खरीदना होता है। ग्राहक अपनी मर्जी का मूल्य नहीं देता। किसान के लिए ऐसा नहीं। यह तभी संभव होगा यदि उत्पादन सीमित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर लाखों टन अनाज खराब हो जाने के बावजूद कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। कारण यही है कि देश में अनाज की कमी नहीं। यदि अनाज खराब होने से भुखमरी का संकट पैदा होगा तो कार्रवाई का स्तर भी बदल जाएगा।किसान नई फसलों की तरफ ध्यान दें और अपनी फसल का पूरा मूल्य प्राप्त करें। किसानों को आत्म चिंतन करने की भी जरूरत है। जब उत्पादन कम था, तब किसान खुशहाल था। उत्पादन बढ़ा तो किसान परेशान हो गया। किसान का संकट पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का नहीं, बल्कि उपभोक्ता संस्कृति की भी देन है। पश्चिम से चली दिखावे की रुचि ने सभी बड़े-छोटों को सोच के राजा-महाराजा बना दिया। यह तो पैसों की कमी है, अन्यथा सोच यही बन गई है कि हर कोई लड़के-लड़की का विवाह करने के लिए करोड़ों खर्चने के लिए तैयार है। इससे किसान भी नहीं बच सका।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के एक ही राज्य में यदि हर साल 100 करोड़ से ज्यादा का अनाज मिट्टी में मिल जाए तो किसान खुशहाल कैसे होंगे? आखिर इतने बड़े स्तर पर फसल खेतों में पैदा होकर मंडी में पहुंचती है उसकी अदायगी भी होती है फिर भी किसान कर्ज में डूबा है। कर्ज केवल कृषि में घाटे का नहीं बल्कि अन्य कारणों का भी है। सरकारें हर बार यह कह देती हैं कि सारा कर्ज नहीं केवल कृषि के लिए लिया कर्ज माफ करेंगे। यह मामला किसी एक पक्ष की बयानबाजी से हल होने वाला नहीं बल्कि सभी पक्षों द्वारा किसान पूरी ईमानदारी, सच्चाई और वचनबद्धता से हल करने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Aug 2017 05:05:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>‘मोटे अनाज के समर्थन मूल्य पर खोले जाए खरीद केन्द्र’</title>
                                    <description><![CDATA[JaiPur, SachKahoon News:  पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रदेश के किसानों को मोटे अनाज के समर्थन मूल्य के क्रय केन्द्र नहीं खुलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्री गहलोत ने कहा कि केन्द्रीय पूल हेतु मोटे अनाज को समर्थन मूल्य पर खरीद का कार्य राज्य सरकार के स्तर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/coarse-grain-support-price-to-be-set-at-purchase-center/article-563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/ashok-gehlot.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>JaiPur, SachKahoon News:</strong>  पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रदेश के किसानों को मोटे अनाज के समर्थन मूल्य के क्रय केन्द्र नहीं खुलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्री गहलोत ने कहा कि केन्द्रीय पूल हेतु मोटे अनाज को समर्थन मूल्य पर खरीद का कार्य राज्य सरकार के स्तर पर किया जाता है, किन्तु राज्य सरकार द्वारा अब तक केन्द्र को प्रस्ताव नहीं भेजने से इस बारे में यथोचित निर्णय नहीं हुआ है। किसानों द्वारा इस बारे में की जा रही मांग की लगातार अनदेखी की जा रही है जिससे उनका कृषि उत्पाद उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार को मोटे अनाज की खरीद समर्थन मूल्य पर करने के लिए क्रय केन्द्र खोलने की दिशा में तत्परता से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में केवल मूंग 4800 रुपये क्विंटल के समर्थन मूल्य पर क्रय करने के केन्द्र खोले गए है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2016 01:46:05 +0530</pubDate>
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