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                <title>Donald Trump - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Donald Trump RSS Feed</description>
                
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                <title>ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की चुनौतियां और विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[Donald Trump: संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रम्प विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता के प्रमुख रहे हैं। लंबे समय तक यह धारणा प्रचलित रही कि ब्रिटेन सबसे पुराना लोकतंत्र है, भारत सबसे बड़ा और अमेरिका सबसे प्रभावशाली। ट्रम्प ने 2017 से 2021 तक अपने पहले कार्यकाल में एक ऐसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/vichar/challenges-and-controversies-of-trumps-second-term/article-83272"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Donald Trump: संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रम्प विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता के प्रमुख रहे हैं। लंबे समय तक यह धारणा प्रचलित रही कि ब्रिटेन सबसे पुराना लोकतंत्र है, भारत सबसे बड़ा और अमेरिका सबसे प्रभावशाली। ट्रम्प ने 2017 से 2021 तक अपने पहले कार्यकाल में एक ऐसे नेता की छवि बनाई, जो परंपरागत राजनीतिक ढांचे से अलग था। कुछ लोगों के लिए वे स्पष्टवादी और निर्णायक नेता थे, जबकि अन्य के लिए उनकी शैली असामान्य और विवादास्पद रही। 2020 के चुनाव में हार के बाद उनके समर्थकों द्वारा संसद भवन पर किया गया आक्रमण लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। दूसरे कार्यकाल में, जो 2025 में आरंभ हुआ, ट्रम्प का व्यक्तित्व और कार्यशैली पहले से अधिक आक्रामक और असंतुलित दिखाई देने लगी। पहले उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता था जो आर्थिक प्रगति और वैश्विक शांति की बात करता है। वे स्वयं यह दावा भी करते रहे कि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त करने में भूमिका निभाई। परंतु वास्तविकता में उनके प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का उनका वादा अधूरा रह गया।ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने उनकी विदेश नीति की सीमाओं को उजागर किया। उन्होंने यह घोषणा की थी कि यह संघर्ष शीघ्र समाप्त हो जाएगा, परंतु स्थिति उलझती चली गई। उनके भाषणों में प्रयुक्त कठोर और असंयमित शब्दों ने कूटनीतिक संतुलन को और कमजोर किया। किसी भी राष्ट्र के प्रमुख से अपेक्षा की जाती है कि वह संयम और संतुलन का परिचय दे, परंतु ट्रम्प के बयान अक्सर उग्र और टकरावपूर्ण रहे। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या उनकी रणनीति वास्तव में स्थिरता लाने की दिशा में थी या केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित थी। ट्रम्प की भाषा और व्यवहार ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित किया। उन्होंने कई अवसरों पर भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर बताया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता। इसी प्रकार, यूरोप के नेताओं के प्रति उनकी टिप्पणियों ने पश्चिमी सैन्य गठबंधन में असहजता पैदा की। नाटो जैसे महत्वपूर्ण संगठन के साथ उनके संबंधों में तनाव स्पष्ट दिखाई दिया। यह स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब ईरान संघर्ष के दौरान सहयोगी देशों ने खुलकर उनका साथ देने से इनकार कर दिया। Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">यूरोपीय देशों ने धीरे-धीरे अपनी रक्षा नीतियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि वे अब अमेरिका पर पूर्ण निर्भरता नहीं रखना चाहते। ग्रीनलैंड को खरीदने जैसी असामान्य मांगों और यूक्रेन नीति में अस्पष्टता ने भी सहयोगी देशों के विश्वास को कमजोर किया। घरेलू स्तर पर भी ट्रम्प को तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने उनकी नीतियों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए। इन आंदोलनों में लाखों लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि अमेरिकी समाज का एक बड़ा वर्ग उनकी कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है। आलोचकों का आरोप है कि उनके निर्णय लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करते हैं और सत्ता के केंद्रीकरण को बढ़ावा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक नीतियों को लेकर भी असंतोष देखा गया। यह कहा गया कि उनकी नीतियां उच्च आय वर्ग के पक्ष में अधिक झुकी हुई हैं, जिससे सामाजिक असमानता बढ़ती है। आव्रजन नीति को लेकर भी व्यापक आलोचना हुई। अमेरिका को लंबे समय से अवसरों की भूमि माना जाता है, जहां विभिन्न देशों के लोग आकर अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसे में कठोर आव्रजन नीतियां इस मूल भावना के विपरीत प्रतीत होती हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर भी ट्रम्प की रणनीतियां कई बार असंगत दिखाई दीं। उनकी जल्दबाजी और आक्रामक रुख ने कई बार तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाया। यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेताओं ने भी उनकी नीतियों पर चिंता व्यक्त की। जनमत सर्वेक्षणों में उनके समर्थन में गिरावट इस असंतोष का स्पष्ट संकेत है। Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रम्प के प्रति समर्थन में कमी आई है। कई देश अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं, परंतु ट्रम्प के नेतृत्व में नहीं। भारत का दृष्टिकोण भी इसी दिशा में देखा जा सकता है। पिछले वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत हुए हैं, विशेषकर रक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में। परंतु व्यापार नीतियों, विशेष रूप से आयात शुल्क के मामले में ट्रम्प के निर्णयों ने असहमति उत्पन्न की। अमेरिकी न्यायालयों द्वारा कुछ शुल्कों को निरस्त किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनकी नीतियां कानूनी चुनौती का सामना कर रही थीं। पहले कार्यकाल में ट्रम्प ने चीन के प्रति कठोर रुख अपनाया और उसे प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना। उन्होंने पाकिस्तान को भी कठघरे में खड़ा किया, जो भारत के हित में था। परंतु बाद के समय में उनकी नीति में बदलाव देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों की चर्चा अक्सर होती रही है, परंतु नीतिगत स्तर पर कई निर्णय भारत के हितों के अनुरूप नहीं रहे। यह विरोधाभास उनके नेतृत्व की जटिलता को दर्शाता है। समग्र रूप से देखा जाए तो ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल विवादों, विरोध और अस्थिरता से घिरा रहा है। उनकी नीतियों और व्यवहार ने न केवल अमेरिका के भीतर असंतोष बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अनिश्चितता को जन्म दिया है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या उनका नेतृत्व भविष्य के लिए उपयुक्त है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि विश्व शांति और स्थिरता के लिए एक संतुलित और संयमित नेतृत्व की आवश्यकता है, जो संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दे। Donald Trump<br />
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="स्टारेक्स यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति चल रहा BPT कोर्स, छात्रों ने लगाया शोषण का आरोप" href="http://10.0.0.122:1245/starex-university-is-running-bpt-course-without-permission/">स्टारेक्स यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति चल रहा BPT कोर्स, छात्रों ने लगाया शोषण का आरोप</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:15:14 +0530</pubDate>
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                <title>Stock Market: ट्रंप के बयान के बाद शेयर बाजारों में गिरावट, सेंसेक्स 1,500 अंक लुढ़का</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। Share Market: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनोल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर जारी बयान के बाद गुरुवार को दुनिया भर में शेयर बाजारों में गिरावट देखी गयी और घरेलू स्तर पर बीएसई का सेंसेक्स 1,500 अंक से ज्यादा लुढ़क गया। सेंसेक्स 872.27 अंक की गिरावट में 72,262.05 अंक पर खुला और कुछ ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/stock-markets-fall-after-trumps-statement/article-82991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/stock-market.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> Share Market: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनोल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर जारी बयान के बाद गुरुवार को दुनिया भर में शेयर बाजारों में गिरावट देखी गयी और घरेलू स्तर पर बीएसई का सेंसेक्स 1,500 अंक से ज्यादा लुढ़क गया। सेंसेक्स 872.27 अंक की गिरावट में 72,262.05 अंक पर खुला और कुछ ही मिनट में लगभग 1,525 अंक टूटकर 71,608.05 अंक तक उतर गया। खबर लिखे जाते समय यह 1,473.37 अंक (2.01 प्रतिशत) की गिरावट में 71,660.95 अंक पर रहा। Stock Market</p>
<p style="text-align:justify;">श्री ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ मिशन में अपने मुख्य लक्ष्य हासिल कर लिये हैं, लेकिन अगले दो-तीन सप्ताह में हमले और तेज किये जायेंगे। उनके इस बयान के बाद जल्द युद्ध समाप्ति की उम्मीद लगाये बैठे निवेशकों को निराशा हुई और शेयर बाजारों में बिकवाली देखी गयी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 296 अंक गिरकर 22,383.40 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 460.70 अंक यानी 2.03 प्रतिशत नीचे 22,218.70 अंक पर था। शेयर बाजार में फिलहाल चौतरफा बिकवाली देखी जा रही है। बैंकिंग, फार्मा, स्वास्थ्य, रियलटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, आॅटो, वित्त, धातु, मीडिया, तेल एवं गैस और रसायन समूहों पर ज्यादा दबाव है। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां अभी गिरावट में हैं। विमान सेवा कंपनी इंडिगो और दवा बनाने वाली सनफार्मा के शेयर चार फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहे हैं। अडानी पोर्ट्स, एलएंडटी, इटरनल और टाट स्टील के शेयर तीन से चार प्रतिशत फिसल चुके हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एक लाख का इनामी बदमाश गिरफ्तार, डकैती और डबल मर्डर केस से जुड़ा है मामला" href="http://10.0.0.122:1245/criminal-with-a-reward-of-one-lakh-arrested/">एक लाख का इनामी बदमाश गिरफ्तार, डकैती और डबल मर्डर केस से जुड़ा है मामला</a></p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 10:55:43 +0530</pubDate>
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                <title>India-US Relations: ईरान से युद्ध के बीच ट्रंप बोले- &amp;#8216;आई लव मोदी एंड आई लव इंडिया&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[India-US Relations: नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच भारत को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। Donald Trump ने भारत और प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रति अपने सकारात्मक भाव व्यक्त किए हैं। यह संदेश नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave के दौरान पढ़कर सुनाया गया। यह संदेश अमेरिकी दक्षिणपंथी कार्यकर्ता Laura […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/amid-war-with-iran-trump-says-i-love-modi-and-i-love-india/article-82310"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/modi-with-trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India-US Relations: नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच भारत को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। Donald Trump ने भारत और प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रति अपने सकारात्मक भाव व्यक्त किए हैं। यह संदेश नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave के दौरान पढ़कर सुनाया गया। यह संदेश अमेरिकी दक्षिणपंथी कार्यकर्ता Laura Loomer ने सम्मेलन के मंच से साझा किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में आने से पहले उनकी ट्रंप से बातचीत हुई थी और उसी दौरान उन्होंने भारत के लिए यह संदेश दिया। Donald Trump News</p>
<p style="text-align:justify;">लूमर के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि उन्हें भारत से विशेष लगाव है और वह भारतीय लोगों के प्रति सम्मान और स्नेह रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रभावशाली नेता हैं और उनके साथ उनकी मित्रता मजबूत है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वह निकट भविष्य में भारत की यात्रा करने की योजना बना सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान वैश्विक राजनीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े कई विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इसी बीच ट्रंप के संदेश ने उपस्थित लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। लूमर ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक स्तर पर अच्छा तालमेल रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत-अमेरिका संबंधों की चर्चा | Donald Trump News</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग, व्यापार और रक्षा साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। ट्रंप और मोदी की मुलाकातें अक्सर वैश्विक मंचों पर चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसा ही एक बड़ा कार्यक्रम Namaste Trump था, जो वर्ष 2020 में आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद स्थित Narendra Modi Stadium में विशाल जनसभा को संबोधित किया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। ट्रंप का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक राजनीति कई चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में भारत के प्रति उनके सकारात्मक संकेत को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Donald Trump News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:00:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान की अगली बैठक से पहले ट्रंप ने दे डाली एक और चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने बातचीत करने वाले हैं। स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10 बजे प्रस्तावित इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रारंभिक योजना के अनुसार वार्ता तुर्किये में होनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/ahead-of-the-next-us-iran-meeting-trump-issued-another-warning/article-80991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/trump-today.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने बातचीत करने वाले हैं। स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10 बजे प्रस्तावित इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रारंभिक योजना के अनुसार वार्ता तुर्किये में होनी थी, किंतु ईरान की आपत्ति के बाद स्थान बदलकर ओमान तय किया गया। Donald Trump News</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख दोहराया। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पुनः सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई गई है और ईरानी नेतृत्व को इस परिस्थिति का आकलन करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ सप्ताहों से ट्रंप प्रशासन ईरान पर नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहा है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि वार्ता केवल परमाणु गतिविधियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय समूहों को समर्थन तथा मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, ईरान ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित वार्ता का दायरा मुख्यतः परमाणु विषयों तक सीमित रखा जाए। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने सामाजिक मंच पर पुष्टि की कि मस्कट में निर्धारित समय पर वार्ता आयोजित की जाएगी और मेजबानी के लिए ओमान का आभार व्यक्त किया।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के संबंधों में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। जहां एक ओर बयानबाजी और सैन्य संकेतों ने तनाव को बढ़ाया है, वहीं प्रत्यक्ष वार्ता की पहल से समाधान की संभावनाएं भी खुली हैं। आने वाले दिनों में इस संवाद की दिशा और परिणाम पर वैश्विक समुदाय की निगाहें टिकी रहेंगी। Donald Trump News</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 13:55:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>US Immigration: व्हाइट हाउस इमिग्रेशन कानून को लेकर हुआ सख्त! ट्रंप प्रशासन ने डाला राज्यों पर दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[US Immigration: वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने तथाकथित ‘सैंक्चुरी नीतियों’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों और स्थानीय प्रशासन से संघीय आव्रजन कानूनों के पालन में पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (आईसीई) […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/white-house-cracks-down-on-immigration-laws-trump-administration-pressures-states/article-80731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/caroline-levitt-us.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">US Immigration: वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने तथाकथित ‘सैंक्चुरी नीतियों’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों और स्थानीय प्रशासन से संघीय आव्रजन कानूनों के पालन में पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (आईसीई) को अपने दायित्वों के निर्वहन में किसी प्रकार की बाधा न आए। US News</p>
<p style="text-align:justify;">लेविट ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों और नगर प्रशासन द्वारा आईसीई के साथ सहयोग से इनकार करना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से मिनेसोटा के कुछ जनप्रतिनिधियों पर संघीय कानूनों की अनदेखी करने और अधिकारियों के कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ने मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज से बातचीत कर स्पष्ट किया है कि स्थानीय पुलिस द्वारा पकड़े गए अवैध प्रवासियों को संघीय एजेंसियों को सौंपा जाना चाहिए, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को हिरासत में स्थानांतरित किया जाना चाहिए तथा प्रवर्तन कार्यवाही में किसी प्रकार की अड़चन नहीं डाली जानी चाहिए।</p>
<h3>अधिकांश राज्यों में इस प्रकार का समन्वय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रेस सचिव ने कहा कि अधिकांश राज्यों में इस प्रकार का समन्वय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, किंतु जहां सहयोग नहीं मिला है, वहां गंभीर परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति कांग्रेस से आग्रह कर रहे हैं कि ऐसे विधेयक पर विचार किया जाए, जिससे ‘सैंक्चुरी सिटीज’ की व्यवस्था को समाप्त किया जा सके। US News</p>
<p style="text-align:justify;">लेविट ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, किंतु कानून प्रवर्तन की कार्यवाही में बाधा डालना अपराध की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता उन विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करना है, जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप सिद्ध हुए हैं। हाल के अभियानों में आईसीई द्वारा हमले, घरेलू हिंसा, वित्तीय धोखाधड़ी और नशे में वाहन चलाने जैसे मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति कानून का पालन करने वाले नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के समर्थक हैं, परंतु उन्होंने आगाह किया कि प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष हथियार लेकर उपस्थित होना जोखिमपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकता है। यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है, जब कुछ डेमोक्रेट-शासित राज्यों और शहरों ने संघीय आव्रजन नीतियों पर असहमति व्यक्त की है। ट्रंप प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर आईसीई के साथ तालमेल को अपनी सुरक्षा नीति का प्रमुख अंग बताया है। US News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:33:28 +0530</pubDate>
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                <title>India-US Trade Deal: ट्रंप की टैरिफ नीति से रिपब्लिकन खेमे में घमासान, सीनेटर टेड क्रूज ने व्हाइट हाउस पर लगाए गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[India-US Trade Deal: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और भारत-अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब भी अधर में लटकी हुई है। इस बीच अमेरिका के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर सियासी उथल-पुथल तेज़ होती दिख रही है। एक ताज़ा खुलासे ने रिपब्लिकन पार्टी के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/the-much-awaited-india-us-trade-deal-remains-in-limbo/article-80716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/india-us-trade-deal.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India-US Trade Deal: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और भारत-अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब भी अधर में लटकी हुई है। इस बीच अमेरिका के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर सियासी उथल-पुथल तेज़ होती दिख रही है। एक ताज़ा खुलासे ने रिपब्लिकन पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को उजागर कर दिया है, जिसमें खुद एक वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर ने ट्रंप प्रशासन को बातचीत में देरी का जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ट्रेड डील में देरी के लिए ट्रंप और उनके करीबी जिम्मेदार?</h3>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने निजी बातचीत में आरोप लगाया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की राह में सबसे बड़ी रुकावट खुद ट्रंप प्रशासन के भीतर मौजूद लोग हैं। लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग में क्रूज ने व्हाइट हाउस के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो, उप-राष्ट्रपति जेडी वैंस और कई मौकों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया गया है कि क्रूज ने अपने समर्थकों और दानदाताओं से कहा कि वह भारत के साथ व्यापार समझौता सुनिश्चित करने के लिए व्हाइट हाउस से “जंग” लड़ रहे हैं, जबकि भारतीय निर्यात पर अमेरिका की ओर से 50% तक का भारी टैरिफ अब भी लागू है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लीक ऑडियो क्लिप से मचा सियासी बवाल | India-US Trade Deal</h3>
<p style="text-align:justify;">बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह बातचीत एक निजी फोन कॉल के दौरान हुई थी, जिसकी ऑडियो क्लिप अब वायरल हो चुकी है। हालांकि, इस रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसके सामने आने से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जारी अनिश्चितता और गहरी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि बीते करीब पाँच महीनों से भारत पर 50% टैरिफ लागू है, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता फरवरी 2025 में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। इसके बाद मार्च-अप्रैल में औपचारिक बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ट्रंप के दावों पर उठे सवाल</h3>
<p style="text-align:justify;">यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से भरोसा जताया था कि भारत और अमेरिका “एक शानदार डील” की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ भी की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, लीक ऑडियो क्लिप ट्रंप के इन दावों पर सवाल खड़े करती है और यह संकेत देती है कि प्रशासन के भीतर ही ट्रेड पॉलिसी को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">टैरिफ से चुनावी नुकसान की आशंका</h3>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सीनेटर क्रूज ने ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति के राजनीतिक और आर्थिक जोखिमों को लेकर चेतावनी दी थी। ऑडियो में क्रूज कथित तौर पर कहते हैं कि उन्होंने और कई रिपब्लिकन सीनेटरों ने अप्रैल में घोषित ‘मुक्ति दिवस टैरिफ’ को रोकने की कोशिश की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका मानना है कि ऊंचे टैरिफ से महंगाई बढ़ेगी, अमेरिकियों के रिटायरमेंट फंड पर असर पड़ेगा और इसका सीधा नुकसान 2026 के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘डेमोक्रेट्स सत्ता में आ सकते हैं’</h3>
<p style="text-align:justify;">सीनेटर क्रूज ने यहां तक चेतावनी दी कि यदि टैरिफ नीति के नकारात्मक असर ऐसे ही जारी रहे, तो रिपब्लिकन पार्टी व्हाइट हाउस और सीनेट दोनों पर अपना नियंत्रण खो सकती है और डेमोक्रेट्स दोबारा सत्ता में लौट सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रिपब्लिकन पार्टी में बढ़ती दरार</h3>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, इस ऑडियो क्लिप के वायरल होने से रिपब्लिकन पार्टी के भीतर गहरे मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति को लेकर अब उनकी ही पार्टी के नेता असहज नजर आ रहे हैं और आने वाले चुनावों में इसके सियासी नतीजों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। India-US Trade Deal</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Punjab News: पंजाब पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलेगा सम्मान, डीजीपी यादव ने दी बधाई" href="http://10.0.0.122:1245/punjab-police-officers-and-employees-will-be-honored-dgp-yadav-congratulated/">Punjab News: पंजाब पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलेगा सम्मान, डीजीपी यादव ने दी बधाई</a></p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 26 Jan 2026 10:03:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेगा अमेरिका : ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[दावोस । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो अमेरिका को कोई रोक नहीं पायेगा। ट्रंप ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में अपनी 70 मिनट की स्पीच में ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/the-us-will-not-use-force-to-acquire-greenland-trump/article-80586"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/donald-trump1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दावोस ।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो अमेरिका को कोई रोक नहीं पायेगा। ट्रंप ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में अपनी 70 मिनट की स्पीच में ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने के उनके इरादे और इस मुद्दे को लेकर यूरोपीय संघ के साथ उनके मतभेद पर रोशनी डाली। उन्होंने अपने भाषण में कई बार ग्रीनलैंड को आइसलैंड कहकर भी संबोधित किया। उन्होंने नाटो के खर्च पर कहा, “हमने कभी (नाटो से) कुछ नहीं मांगा, न ही हमें कभी कुछ मिला। अगर हम अपनी ताकत और बल का प्रयोग नहीं करते तो हमें कुछ मिलेगा भी नहीं। अगर ऐसा होता है तो हमें रोकने वाला कोई नहीं होगा, लेकिन मैं ऐसा करूंगा नहीं।”</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की प्रक्रिया में सेना के इस्तेमाल को खारिज नहीं किया था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड का स्वामित्व चाहता है क्योंकि अगर वह पट्टे पर होगा तो उसकी रक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “कोई भी भला किसी लाइसेंस समझौते या पट्टे पर मिली ज़मीन की रक्षा क्यों करना चाहेगा?” उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और वह नाटो का एक सहयोगी देश है। नाटो का अनुच्छेद-5 कहता है कि एक नाटो देश पर हमला सभी पर हमला माना जायेगा। अब तक इस अनुच्छेद का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका के संबंध में हुआ है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अगर अमेरिका को ज़रूरत पड़ती है तो नाटो उनके बचाव के लिये आगे आयेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने नाटो के साथ डेनमार्क के कम सुरक्षा खर्च की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ़ अमेरिका ही ग्रीनलैंड की रक्षा कर सकता है। उन्होंने ग्रीनलैंड के विकास और सुधार की बात भी उठाई। श्री ट्रंप ने अमेरिका के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के बारे में बात करने के लिये “तुरंत” बातचीत का आह्वान किया, हालांकि यूरोपीय अधिकारी कई बार इस प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर यूरोप के रुख़ को हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा, “हमें दुनिया की रक्षा करने के लिये बर्फ का एक टुकड़ा चाहिये, लेकिन वह हमें इसे नहीं दे सकते। हमने कभी कुछ नहीं मांगा। हम चाहते तो खुद ही ज़मीन का वह टुकड़ा ले सकते थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “यूरोप के पास एक विकल्प है। आप चाहें तो हां कह सकते हैं और हम इसका बहुत सम्मान करेंगे। आप चाहें तो ना भी कह सकते हैं और फिर हम याद रखेंगे कि मजबूत नाटो के बिना मज़बूत और सुरक्षित अमेरिका नहीं बन सकता। यही एक वजह है कि मैं हमारी सेना को बहुत मजबूत बनाने के लिये काम कर रहा हूं।” इस बीच, ट्रंप ने पड़ोसी मुल्क कनाडा की ओर रुख़ करते हुए कहा कि अमेरिका की वजह से ही कनाडा सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ हवाई रक्षा प्रणाली कनाडा की भी रक्षा करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “कनाडा को हमारी तरफ से काफी चीजें मुफ्त मिल जाती हैं। उन्हें इसके लिये शुक्रगुज़ार होना चाहिये, लेकिन ऐसा नहीं है। मैंने आपके प्रधानमंत्री (मार्क कार्नी) को कल देखा। वह बहुत शुक्रगुज़ार नज़र नहीं आये। कनाडा, उन्हें हमारे प्रति शुक्रगुज़ार होना चाहिये। कनाडा ज़िन्दा है अमेरिका की वजह से।” इस बीच, यूरोपीय संघ के विधायी निकाय ने बुधवार को उसे व्यापार समझौते की औपचारिक मंज़ूरी पर काम रोक दिया, जो उसने पिछली गर्मियों में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ की थी। यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति के चेयरमैन बर्न्ड लांगे ने कहा, “ग्रीनलैंड, डेनमार्क और उनके यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ टैरिफ सहित लगातार बढ़ते सभी खतरों को देखते हुए हमारे पास समझौते पर काम रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।” लांगे ने एक बयान में कहा, “जब तक अमेरिका टकराव के बजाय सहयोग के रास्ते पर फिर से आने का फैसला नहीं करता, तब तक समझौते को आगे बढ़ाने के लिये कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।”</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:46:08 +0530</pubDate>
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                <title>Donald Trump: राष्ट्रपति ट्रम्प ने पीएम मोदी को दिया ये न्योता, जानकर आप भी रह जाओगे दंग</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन/नई दिल्ली (एजेंसी)। Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस निमंत्रण की पुष्टि की और राष्ट्रपति ट्रम्प का लिखा गया पत्र साझा किया। इस बोर्ड का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/you-will-be-stunned-to-learn-about-the-invitation-president-trump-extended-to-pm-modi/article-80477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/washington-news-1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस निमंत्रण की पुष्टि की और राष्ट्रपति ट्रम्प का लिखा गया पत्र साझा किया। इस बोर्ड का गठन गाजा में स्थायी शांति लाने, वहां की शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में किया गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने पत्र में इस पहल को मध्य पूर्व में शांति को पुख्ता करने और वैश्विक संघर्ष को सुलझाने का एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया है। Washington News</p>
<p style="text-align:justify;">यह बोर्ड पिछले वर्ष 29 सितंबर को घोषित ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना का हिस्सा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी अपने प्रस्ताव 2803 के माध्यम से समर्थन दिया है। इस योजना के तहत अब गाजा में शांति और समृद्धि के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दुनिया के सम्मानित नेताओं को एक साथ लाया जा रहा है। इस ‘बोर्ड आॅफ पीस’ में शामिल होने के लिए भारत के अलावा इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना सहित लगभग 50 देशों को आमंत्रित किया गया है। यह बोर्ड गाजा में जारी संघर्ष विराम के दूसरे चरण की निगरानी करेगा, जिसमें नई फिलिस्तीनी समिति का गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास का विसैन्यीकरण और युद्ध से प्रभावित क्षेत्र का पुनर्निर्माण शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">सदस्यों की आधिकारिक सूची की घोषणा आने वाले दिनों में दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान होने की संभावना है। व्हाइट हाउस ने बोर्ड के विजन को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति की भी घोषणा की है। इस समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यह समूह गाजा के पुनर्निर्माण और वहां एक सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के निर्माण की दिशा में कार्य करेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Weather News: बिगड़ सकता है दो दिन बाद मौसम! भारी बारिश-बर्फबारी के भी आसार" href="http://10.0.0.122:1245/weather-may-worsen-after-two-days-heavy-rain-and-snowfall-also-expected/">Weather News: बिगड़ सकता है दो दिन बाद मौसम! भारी बारिश-बर्फबारी के भी आसार</a></p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 14:27:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Donald Trump: किसी भी वक्त हो सकता है विश्व युद्ध! ट्रम्प ने ईरान को दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा जायेगा तो इसका बहुत कड़ा जवाब दिया जायेगा। ‘द ह्यू हेविट शो’ को दिये एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिंसा की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/world-war-could-break-out-anytime-trump-warns-iran/article-80164"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/washington-news.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा जायेगा तो इसका बहुत कड़ा जवाब दिया जायेगा। ‘द ह्यू हेविट शो’ को दिये एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिंसा की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं जैसा कि वे अक्सर दंगों के दौरान करते हैं, तो उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे। उन्होंने कहा कि तेहरान को यह संदेश बहुत स्पष्ट शब्दों में दे दिया गया है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें भारी कीमत चुकानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प (Donald Trump) के अलावा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका उन लोगों के साथ खड़ा है, जो शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए विरोध कर रहे हैं। वेंस ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि ईरान के लिए आगे बढ़ने का सबसे अच्छा रास्ता उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन के साथ गंभीर बातचीत करना है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार वेंस ने कहा कि वास्तविक बातचीत करना तेहरान के लिए सबसे समझदारी भरा काम होगा। वहीं अमेरिका ने रूस के जहाज पर कब्जा कर लिया है और रूस ने भी अमेरिका को चेतावनी दे दी है। हालाता इस समय ऐसे है कि किसी भी वक्त विश्व युद्ध हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बढ़ने के बाद अधिकारियों ने देशव्यापी इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। गिरती अर्थव्यवस्था और कड़े सुरक्षा उपायों के खिलाफ ईरान के बड़े शहरों से लेकर दूरदराज के इलाकों तक लोग सड़कों पर उतरकर शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। पिछले दो सप्ताह से जारी इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह बढ़ती मुद्रास्फीति और मुद्रा के मूल्य में भारी गिरावट है, जिससे लाखों लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन प्रदर्शनों की शुरूआत 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई थी, जो धीरे-धीरे पूरे देश के बाजारों और विश्वविद्यालयों तक फैल गये। यह विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब राष्ट्रीय मुद्रा का मूल्य डॉलर के मुकाबले गिरकर साढ़े 13 लाख ईरानी मुद्रा के पार पहुंच गया। एक मानवाधिकार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 38 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें सुरक्षा बलों के चार सदस्य भी शामिल हैं। रिपोर्ट में दर्जनों लोगों के घायल होने और 2,200 से अधिक गिरफ्तारियों की जानकारी दी गयी है। सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार अशांति के दौरान 568 पुलिस अधिकारी और अर्धसैनिक बल के 66 सदस्य भी घायल हुए हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="गृह मंत्रालय के सामने धरना दे रहे आठ तृणमूल कांग्रेस सांसद हिरासत में" href="http://10.0.0.122:1245/eight-trinamool-congress-mps-protesting-in-front-of-the-home-ministry-were-detained/">गृह मंत्रालय के सामने धरना दे रहे आठ तृणमूल कांग्रेस सांसद हिरासत में</a></p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 15:14:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Donald Trump: क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं, वह खुद ही बर्बाद हो रहा है: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। Washington News: वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अन्य मध्य अमेरिकी देश क्यूबा पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं, क्योंकि वह देश खुद ही बर्बाद हो रहा है। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/no-need-for-military-action-against-cuba-it-is-self-destructing-trump/article-80047"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/washington-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> Washington News: वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अन्य मध्य अमेरिकी देश क्यूबा पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं, क्योंकि वह देश खुद ही बर्बाद हो रहा है। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान क्यूबा पर सवाल पूछे जाने पर कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह देश अपने आप ही गिरता हुआ लग रहा है। उन्होंने कहा, “क्यूबा गिरने के लिए तैयार है। ऐसा लग रहा है जैसे क्यूबा बस गिरने ही वाला है।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “क्यूबा के पास अब आय का कोई जरिया नहीं है। उन्हें अपनी सारी आय वेनेजुएला से, वेनेजुएला के तेल से मिलती थी। अब उन्हें उसमें से कुछ भी नहीं मिल रहा है। क्यूबा सचमुच गिरने के कगार पर है।” इस बीच, वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान मारे गये 32 क्यूबाई नागरिकों के सम्मान में क्यूबा में दो दिवसीय राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गयी है। Washington News</p>
<p style="text-align:justify;">क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने रविवार को जानकारी दी कि ये 32 लोग वेनेजुएला के अनुरोध पर वहां तैनात किये गये थे और क्यूबा के रिवोल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेज तथा गृह मंत्रालय की ओर से मिशन का संचालन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये सभी नागरिक अमेरिकी हमले का विरोध करते समय मारे गये। इनमें से कुछ सीधे मुकाबले और कुछ बमबारी में मारे गये थे। ट्रंप ने बातचीत के दौरान एक अन्य मध्य अमेरिकी देश कोलंबिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोलंबिया और वेनेजुएला दोनों ‘बहुत बीमार’ देश हैं। उन्होंने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो का जिक्र करते हुए कहा कि कोलंबिया को ‘एक बीमार व्यक्ति चला रहा है, जो कोकीन बनाना और उसे अमेरिका को बेचना पसंद करता है।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “और मैं आपको बता दूँ, वह बहुत लंबे समय तक ऐसा नहीं कर पाएगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका कोलंबिया के खिलाफ किसी अभियान की योजना बना रहा है, तो उन्होंने कहा, “यह मुझे सुनने में अच्छा लग रहा है।” मेक्सिको पर सवाल पूछे जाने पर श्री ट्रंप ने कहा कि मेक्सिको को अपनी व्यवस्था सुधारने की जरूरत है क्योंकि उस देश के रास्ते मादक पदार्थों की बाढ़ आ रही है और अमेरिका को इस बारे में कुछ करना होगा। उन्होंने मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम को एक शानदार व्यक्ति बताया। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि जब भी क्लाउडिया शिनबाम से नकी बात हुई है, उन्होंने मेक्सिको में सेना भेजने की पेशकश की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मेक्सिको की सरकार इस मुद्दे को सुलझाने में सक्षम है, लेकिन दुर्भाग्य से मेक्सिको में ‘कार्टेल’ (ड्रग माफिया) बहुत मजबूत हैं। Washington News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शाहपुर नई सड़क पर रात के अंधेरे में अवैध खनन, सरकार को लाखों की चपत" href="http://10.0.0.122:1245/illegal-mining-in-the-dark-of-night-on-shahapur-new-road/">शाहपुर नई सड़क पर रात के अंधेरे में अवैध खनन, सरकार को लाखों की चपत</a></p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 16:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Donald Trump: ट्रंप ने खेला नया कूटनीतिक दांव: G7 से हटकर &amp;#8216;C5 ग्रुप&amp;#8217; का प्रस्ताव, भारत साथ-साथ चीन-रूस भी होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[Trump’s C5 Group: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूक्रेन–रूस युद्ध में शांति स्थापना के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके हैं। इसी पृष्ठभूमि में वॉशिंगटन की नीति-निर्माण गलियारों में एक नया और परंपरागत ढांचे से अलग विचार चर्चा में है। इस प्रस्ताव के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली देशों को एक नए मंच “कोर–5” […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/trump-plays-a-new-diplomatic-card-proposes-a-c5-group-as-an-alternative-to-the-g7-including-india-along-with-china-and-russia/article-79155"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/donald-trump-trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Trump’s C5 Group: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूक्रेन–रूस युद्ध में शांति स्थापना के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके हैं। इसी पृष्ठभूमि में वॉशिंगटन की नीति-निर्माण गलियारों में एक नया और परंपरागत ढांचे से अलग विचार चर्चा में है। इस प्रस्ताव के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली देशों को एक नए मंच “कोर–5” के अंतर्गत जोड़ा जा सकता है, जिसमें चीन और रूस जैसे देश भी शामिल होंगे। यह अवधारणा मौजूदा जी–7 समूह से पूरी तरह भिन्न बताई जा रही है। Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों का मानना है कि भले ही यह विचार पहली नज़र में असंभव प्रतीत हो, लेकिन इसमें ट्रंप की विशिष्ट कूटनीतिक शैली की झलक मिलती है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने अपने राजनीतिक जीवन में पारंपरिक विरोधियों से संवाद और समझौते की राह अपनाने की कई बार कोशिश की है। इनमें चीन को उन्नत एआई तकनीक से जुड़ी चिप्स की बिक्री को अनुमति देना तथा अपने करीबी प्रतिनिधियों के माध्यम से रूसी नेतृत्व से सीधी बातचीत जैसे कदम शामिल बताए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस में कार्य कर चुके एक पूर्व अधिकारी ने, पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर, कहा कि अमेरिका, चीन, भारत, जापान और रूस को साथ लाने वाले इस संभावित मंच का विचार पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं था। उनके अनुसार, उस समय यह महसूस किया जा रहा था कि जी–समूह या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसी संस्थाएं बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं कर पा रही हैं। Donald Trump</p>
<h3>“कोर–5” जैसी अवधारणा ट्रंप के विश्व-दृष्टिकोण से मेल खाती है”</h3>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, इस नए समूह की परिकल्पना हाल ही में तैयार की गई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के एक प्रारंभिक और सार्वजनिक न किए गए मसौदे में सामने आई थी। हालांकि, व्हाइट हाउस ने ऐसे किसी दस्तावेज़ के अस्तित्व से इनकार किया है और कहा है कि आधिकारिक योजना के अलावा कोई अन्य गुप्त या वैकल्पिक प्रारूप मौजूद नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी, कई राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि “कोर–5” जैसी अवधारणा ट्रंप के विश्व-दृष्टिकोण से मेल खाती है। उनका दृष्टिकोण वैचारिक सीमाओं से अधिक शक्ति-संतुलन, प्रभाव क्षेत्रों और प्रमुख नेताओं के साथ प्रत्यक्ष संवाद पर केंद्रित रहा है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि ऐसा कोई मंच बनता है और उसमें यूरोप को स्थान नहीं मिलता, तो इससे यह संकेत जा सकता है कि अमेरिका रूस को यूरोप में प्रभाव रखने वाली एक प्रमुख शक्ति के रूप में देखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ पूर्व नीति सलाहकारों ने इस विचार को ट्रंप की पहले की चीन नीति से उलट बताया है। उनके अनुसार, पहले कार्यकाल में अमेरिका ने महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा के ढांचे को अपनाया था, जबकि यह नई सोच सहयोग और साझा मंच की ओर इशारा करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक शक्ति संरचना में बदलाव पर विचार हुआ हो। इससे पहले भी अमेरिका–चीन के बीच शीर्ष स्तर की बैठकों और संभावित नए द्विपक्षीय प्रारूपों ने अमेरिकी राजनीति में बहस को जन्म दिया था। ऐसे में “कोर–5” की अवधारणा को वैश्विक राजनीति में उभरते नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। Donald Trump</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 13:04:57 +0530</pubDate>
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                <title>Trump Gold Card: भारतीय विद्यार्थियों के लिए ट्रंप ने की &amp;#8216;ट्रंप गोल्ड कार्ड&amp;#8217; की घोषणा, इन विद्यार्थियों को होगा फ़ायदा</title>
                                    <description><![CDATA[Trump Gold Card: वाशिंगटन। अमेरिका ने विदेशों से आने वाले मेधावी छात्रों, विशेषकर भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। अब वहां की कंपनियां विश्वविद्यालयों के शीर्ष स्नातकों को पढ़ाई पूरी होने के बाद भी अपने यहां काम पर रख सकेंगी। इसी उद्देश्य से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/students-who-complete-their-studies-will-benefit-and-will-be-able-to-work-in-the-us/article-79059"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/trump-gold-card.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Trump Gold Card: वाशिंगटन। अमेरिका ने विदेशों से आने वाले मेधावी छात्रों, विशेषकर भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। अब वहां की कंपनियां विश्वविद्यालयों के शीर्ष स्नातकों को पढ़ाई पूरी होने के बाद भी अपने यहां काम पर रख सकेंगी। इसी उद्देश्य से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसके माध्यम से अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च रैंकिंग के साथ स्नातक करने वाले विदेशी छात्रों को देश में रोके रखने का रास्ता खुल जाएगा। US News</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा कि कई प्रतिभाशाली छात्र अपने-अपने देशों—जैसे भारत, चीन और फ्रांस—से अमेरिका आते हैं, पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने पर उन्हें वापस लौटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न तो छात्रों के अनुकूल है और न ही अमेरिकी उद्योगों के लिए लाभकारी। नए कार्यक्रम से वैज्ञानिक, तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में दक्ष विद्यार्थियों को लंबे समय तक इमिग्रेशन संबंधी बाधाओं से राहत मिलेगी और कंपनियों को भी योग्य जनशक्ति उपलब्ध रहेगी।</p>
<h3>यह कदम एप्पल के सीईओ टिम कुक-से हुई वार्ता के बाद उठाया गया</h3>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप के अनुसार, यह कदम तकनीकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों—विशेषकर एप्पल के सीईओ टिम कुक—से हुई वार्ता के बाद तैयार किया गया। कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत करते हुए हावर्ड लटनिक ने बताया कि ‘गोल्ड कार्ड’ दो प्रकार से प्राप्त किया जा सकेगा—एक, व्यक्तिगत आवेदक के रूप में; दूसरा, कंपनियों के लिए उच्च शुल्क वाले विकल्प के रूप में। कंपनी के पास यह अधिकार होगा कि वह अपने चयनित विदेशी कर्मचारी को लंबे समय तक अमेरिका में कार्यरत रख सके। US News</p>
<p style="text-align:justify;">लटनिक ने यह भी बताया कि गोल्ड कार्ड प्राप्त करने के लिए कड़ी सरकारी जांच प्रक्रिया होगी, जिसकी लागत 15,000 डॉलर तय की गई है। स्वीकृति के बाद विदेशी कर्मचारी को पांच वर्षों के भीतर अमेरिकी नागरिकता का मार्ग मिल सकता है, और उसी कार्ड के आधार पर कंपनी आगे किसी अन्य कर्मचारी को भी नियुक्त कर सकेगी। इस प्रकार यह कार्ड स्थायी निवास जैसी घूर्णन प्रणाली की तरह काम करेगा। लटनिक ने इसे अमेरिका की वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा को सशक्त करने वाला कदम बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम से सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने दावा किया कि इससे अरबों डॉलर तक की आय संभव है। अभी तक वीजा संबंधी अनिश्चितताओं के कारण कई कंपनियों को अपने कर्मचारियों को कनाडा जैसे देशों में भेजना पड़ता था, परंतु अब यह समस्या दूर होगी। US News</p>
<h3>इमिग्रेशन सुधार, आधुनिक तकनीक में निवेश और अमेरिकी कार्यबल को मजबूत बनाने के प्रयास</h3>
<p style="text-align:justify;">इस नीति पर चर्चा करने के लिए आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में डेल टेक्नोलॉजीज के माइकल डेल, आईबीएम के अरविंद कृष्णा, क्वालकॉम के क्रिस्टीआनो अमोन तथा एचपी और हेवलेट पैकर्ड एंटरप्राइज के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक को प्रशासन ने इमिग्रेशन सुधार, आधुनिक तकनीक में निवेश और अमेरिकी कार्यबल को मजबूत बनाने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने एआई और चिप निर्माण क्षेत्रों में हुए निवेश की सराहना की और कहा कि अमेरिका का लक्ष्य इन तकनीकों में अग्रणी बने रहना है। माइकल डेल ने ऊर्जा उपलब्धता और लागत को एआई तथा सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। वहीं आईबीएम के अरविंद कृष्णा ने पूर्ण एआई स्टैक—सेमीकंडक्टर से लेकर सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन तक—को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। US News</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड कार्ड कार्यक्रम भारतीय छात्रों और उच्च कौशल वाले भारतीय पेशेवरों के लिए पिछले एक दशक में सबसे बड़ा इमिग्रेशन सुधार साबित हो सकता है। भारत, अमेरिका में दूसरे सबसे बड़े विदेशी छात्र समूह के रूप में मौजूद है और एच-1बी वीजा प्राप्तकर्ताओं में भी भारतीयों की संख्या सर्वाधिक है। ऐसे में यह कार्यक्रम भारतीय टेक एवं एआई क्षेत्र के पेशेवरों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लंबे समय से रोजगार-आधारित आव्रजन सुधार अमेरिकी प्रशासन के लिए चुनौती रहा है। वीजा कोटे और संसदीय गतिरोध के कारण कंपनियां और विदेशी कर्मचारी वर्षों से कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। तकनीकी कंपनियां लगातार कहती रही हैं कि अनिश्चित वीजा प्रक्रियाएं अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को घटाती हैं। ट्रंप का गोल्ड कार्ड कार्यक्रम इन्हीं समस्याओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। US News</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 10:02:37 +0530</pubDate>
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