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                <title>Donald Trump - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Donald Trump RSS Feed</description>
                
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                <title>Gaza War Peace Deal: हमास और ट्रम्प के बीच निशस्त्रीकरण का ऐतिहासिक समझौता, गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना</title>
                                    <description><![CDATA[हमास ने गाजा युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 20 सूत्री शांति योजना और ऐतिहासिक निशस्त्रीकरण समझौते को अपनी स्वीकृति दे दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/historic-disarmament-agreement-between-hamas-and-trump-israeli-army-will/article-88995"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/america.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/गाजा (एजेंसी)।</strong> Donald Trump: हमास ने गाजा युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 20 सूत्री शांति योजना और ऐतिहासिक निशस्त्रीकरण समझौते को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस समझौते के तहत गाजा से इजरायली बलों की चरणबद्ध वापसी होगी और हमास सहित क्षेत्र में सक्रिय सभी सशस्त्र समूहों का पूरी तरह से निशस्त्रीकरण किया जायेगा। गाजा के प्रशासनिक हस्तांतरण की तैयारियों को लेकर 'नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन आॅफ गाजा' (एनसीएजी) ने अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है। समिति ने स्पष्ट किया है कि वह 'एक प्राधिकरण, एक कानून और एक सुरक्षा व्यवस्था' के सिद्धांत पर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ महीनों में आवश्यक सेवाओं की बहाली के बाद, अब उसका मुख्य ध्यान प्रशासन को पटरी पर लाने, सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार करने और पुनर्निर्माण के साथ आर्थिक अवसर पैदा करने पर है। समिति ने साफ किया कि इस चरण की सफलता फलस्तीनी राष्ट्रीय साझेदारी पर निर्भर करेगी, जिसके लिए वह 'बोर्ड आॅफ पीस', उच्च प्रतिनिधि के कार्यालय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण सेना के साथ समन्वय बनाकर काम करेगी। हमास ने भी अपनी पुरानी सरकार को भंग कर संयुक्त राष्ट्र समर्थित तकनीकी समिति को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, 'बोर्ड आॅफ पीस' के माध्यम से सामने आये इस समझौते को राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्थायी शांति की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम करार दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर पोस्ट किया, "हमास और अन्य सभी सशस्त्र समूहों के पूर्ण निशस्त्रीकरण के लिए 'बोर्ड आॅफ पीस' ने ऐतिहासिक समझौता कर लिया है।" उन्होंने जोर देकर कहा, "इस समझौते से गाजा का नियंत्रण एक नयी फिलिस्तीनी सरकार के पास होगा, जो बोर्ड आॅफ पीस के साथ मिलकर जनता की सेवा करेगी। इसके साथ ही इजरायल को वह सुरक्षा मिलेगी, जिसकी वह हकदार है और गाजा का इस्तेमाल दोबारा कभी आतंकी हमलों के लिए नहीं होगा।" ट्रम्प ने एक वर्ष पहले की भयावह स्थिति, मानवीय संकट और बंधकों के दर्द का जिक्र करते हुए मिस्र, कतर, तुर्की और अपनी कूटनीतिक टीम का आभार जताया तथा स्पष्ट किया कि सात अक्टूबर जैसी घटना की पुनरावृत्ति किसी भी हाल में नहीं होने दी जायेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह ऐतिहासिक समझौता मिस्र के शर्म अल-शेख में हस्ताक्षर किये गये अमेरिकी मध्यस्थता वाले संघर्ष-विराम के नौ महीने बाद आया है, जिसने गाजा पर इजरायल के दो वर्ष लंबे सैन्य अभियान पर विराम लगाया था। इससे पहले इजरायल-हमास के बीच दूसरे चरण के क्रियान्वयन को लेकर गतिरोध बना हुआ था, जिसमें हमास का निशस्त्रीकरण और गाजा का पुनर्निर्माण मुख्य मुद्दा थे। ट्रम्प की 20 सूत्री योजना के तहत ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में एक नयी तकनीकी फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जायेगा, जो गाजा के पुनरुद्धार की कमान संभालेगी। निशस्त्रीकरण पूरा होने के बाद इजरायली सेना पूरी तरह हट जायेगी और सुरक्षा व्यवस्था की कमान नयी 'अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण सेना' संभालेगी, जो फिलिस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर काम करेगी। अधिकारियों के अनुसार, निशस्त्रीकरण की यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। गाजा पुलिस बल अगले दो हफ्तों के भीतर अपने हथियार 'बोर्ड आॅफ पीस' समर्थित नयी तकनीकी सरकार को सौंप देगा। इस पुलिस बल में हालांकि हमास के लड़ाके और भारी हथियार शामिल नहीं हैं। हमास और 'फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद' जैसे अन्य समूहों के भारी हथियारों को सौंपने और सुरंगों के विशाल नेटवर्क को नष्ट करने की प्रक्रिया में लगभग 200 से 350 दिनों का समय लग सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बातचीत के दौरान अमेरिका ने इजरायल के साथ हर कदम पर सलाह-मशविरा किया है। यद्यपि इजरायल हमास के हथियार डालने की इच्छा पर लगातार संदेह जताता रहा है, लेकिन अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इजरायल को अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं का पालन करते हुए सेना वापस बुलानी होगी और हवाई हमले रोकने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प ने चेतावनी भी दी कि यदि इजरायल समझौते का पालन नहीं करता है तो उन्हें बहुत निराशा होगी। उल्लेखनीय है कि ट्रम्प और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में मुलाकात की थी, जो ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से युद्ध शुरू करने के बाद उनकी पहली आमने-सामने की बैठक थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 73,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और वर्तमान में इजरायली सेना गाजा के आधे से अधिक हिस्से पर काबिज है, जहां लाखों फिलिस्तीनी बदहाल राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/america.jpeg" alt="America" width="629" height="349"></img></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 17:12:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Donald Trump: पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा,  'ईरान के साथ एमओयू अब खत्म'</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अब खत्म हो गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/donald-trump-threat-of-war-increases-again-in-west-asia/article-87783"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/trump-iran-war.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंकारा। पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अब खत्म हो गया है। कुछ सप्ताह पहले तक ईरान के नेतृत्व को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख रखने वाले राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बार तेहरान के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने कहा, "उनमें कुछ गड़बड़ है। वे बीमार हैं और गंदा खेल खेलते हैं।" हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह अपने वार्ताकारों को बातचीत जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि "वो लोग (ईरान) केवल समय बर्बाद कर रहे हैं।" Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">ये बयान यूएस सेंट्रल कमांड और ईरान की आईआरजीसी के बीच हुए हमले के तनावपूर्ण माहौल में सामने आया है। इस बीच यूएई के वरिष्ठ राजनयिक अनवर गर्गश का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में कतर और सऊदी अरब के कमर्शियल टैंकरों पर ईरान के हमले और बहरीन और कुवैत के खिलाफ बार-बार की आक्रामकता यह दिखाती है कि तेहरान तनाव कम करने और "युद्ध का अध्याय समाप्त करने" की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है। यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार गर्गश ने बुधवार को एक्स पोस्ट में कहा, "खाड़ी के अरब देश, तनाव बढ़ाने और समझदारी, स्थिरता व शांति के रास्ते के बीच ईरान के बदलते रुख का निशाना नहीं बन सकते।"</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को यूएस सेंटकॉम की ओर से ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे के बाद आईआरजीसी ने भी अमेरिका के 85 बेस पर जवाबी कार्रवाई की बात कही। ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने दक्षिणी ईरान पर अमेरिका के हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों को निशाने पर लेते हुए ड्रोन हमला किया। सेना ने कहा कि अमेरिका द्वारा युद्धविराम का बार-बार और खुलेआम उल्लंघन करने के गंभीर परिणाम होंगे और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब सैन्य ड्रोन हमलों के वैध लक्ष्य होंगे। Donald Trump</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 14:53:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Right to Repair in US: अमेरिका में वाहन मरम्मत सस्ता व आसान, ट्रम्प ने किए‘राइट टू रिपेयर’ आदेश पर हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक राष्ट्रपति ज्ञापन (प्रेसिडेंशियल मेमोरेन्डम) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य वाहन मरम्मत को सस्ता और आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों को अपनी कारों की मरम्मत खुद करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, बिना अनावश्यक सरकारी प्रतिबंधों या बढ़ी हुई लागतों का सामना किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/right-to-repair-in-us-vehicle-repair-in-america-is/article-87385"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/right-to-repair.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Right to Repair in US: वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक राष्ट्रपति ज्ञापन (प्रेसिडेंशियल मेमोरेन्डम) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य वाहन मरम्मत को सस्ता और आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों को अपनी कारों की मरम्मत खुद करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, बिना अनावश्यक सरकारी प्रतिबंधों या बढ़ी हुई लागतों का सामना किए। US News</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित एक राष्ट्रपति ज्ञापन (प्रेसिडेंशियल मेमोरेन्डम) के तहत अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) को निर्देश दिया गया है कि वह वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियाँ स्वयं ठीक करने के अधिकार को बढ़ावा दे और आफ्टरमार्केट पार्ट्स उद्योग में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करे। इस पहल का उद्देश्य वाहन रखरखाव और मरम्मत की लागत को कम करना बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प ने हस्ताक्षर से पहले कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है, इससे आपकी कार की कीमत कम होगी। आपकी कार को ठीक कराने की लागत भी कम होगी। यह वहनीयता से जुड़ा मुद्दा है।” उन्होंने कहा कि यह मुद्दा तब उनके सामने आया जब उन्हें पता चला कि लोग अपनी गाड़ियों की मरम्मत करने पर सरकारी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। US News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “यह मेरे ध्यान में इसलिए आया क्योंकि मैंने देखा कि लोग अपनी कार ठीक करने पर गिरफ्तार किए जा रहे थे। यह बात विश्वास करने योग्य भी नहीं है।” ट्रम्प ने आगे कहा, “यह ‘राइट टू रिपेयर’ है और मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से सामान्य समझ (कॉमन सेंस) की बात है।” उन्होंने यह भी कहा कि कई वाहन मालिकों के पास पेशेवर मैकेनिकों से भी बेहतर कौशल होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “कुछ लोग तो इतने अच्छे मैकेनिक होते हैं कि वे दुकान के मैकेनिक को बताते हैं कि उनकी कार या ट्रक कैसे ठीक करना है।” ईपीए प्रमुख ली जेल्डिन ने कहा कि यह आदेश फरवरी में कृषि उपकरणों के लिए लाई गई ‘राइट टू रिपेयर’ नीति को आगे बढ़ाता है और अब इसे यात्री वाहनों तक विस्तारित करता है। US News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “यह एक प्रेसिडेंशियल मेमो है जो मरम्मत के अधिकार का समर्थन करता है। अमेरिकी नागरिकों को अपनी गाड़ी ठीक करने का अधिकार है। राष्ट्रपति ट्रम्प इस पर जोर देते हैं। हम उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे जो अपनी गाड़ी खुद ठीक करते हैं, जैसा कि पिछली सरकारें करती थीं।”</p>
<p style="text-align:justify;">जेल्डिन ने यह भी कहा कि प्रशासन “सस्ते नकली आफ्टरमार्केट पार्ट्स” के आयात को सीमित करने और कैलिफ़ोर्निया की आफ्टरमार्केट पार्ट्स प्रमाणन में एकाधिकार भूमिका को समाप्त करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, “केवल सीएआरबी (कैलिफोर्निया एयर रिसोर्स बोर्ड) ही इन पार्ट्स का थर्ड-पार्टी सर्टिफायर है, जो कि पिछड़ा हुआ और त्रुटिपूर्ण सिस्टम है।” उन्होंने कहा, “हम इस एकाधिकार को खत्म करेंगे और अब सीएआरबी एकमात्र प्रमाणन संस्था नहीं रहेगा।” प्रशासन के अनुसार, इस कदम से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, वाहन मरम्मत की लागत कम होगी और स्वतंत्र मैकेनिकों तथा छोटे व्यवसायों को फायदा मिलेगा। US News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:23:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान जंग के बीच ट्रंप की टीम में दरार? सनी जॉय नेल्सन के इस्तीफे से बढ़ीं चर्चाएं</title>
                                    <description><![CDATA[Donald Trump के प्रशासन में लगातार हो रहे बदलावों और वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों के बीच अब उनकी करीबी सहयोगी Sonny Joy Nelson ने भी व्हाइट हाउस छोड़ने का फैसला किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-is-a-rift-in-trumps-team-amid-iran-war/article-85716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/donald-trump.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>Donald Trump के प्रशासन में लगातार हो रहे बदलावों और वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों के बीच अब उनकी करीबी सहयोगी Sonny Joy Nelson ने भी व्हाइट हाउस छोड़ने का फैसला किया है। नेल्सन राष्ट्रपति ट्रंप की स्पेशल असिस्टेंट और व्हाइट हाउस की मीडिया अफेयर्स डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने जनवरी 2025 में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p><p style="text-align:justify;">अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios की रिपोर्ट के अनुसार, सनी जॉय नेल्सन अब अपनी नई मीडिया और कम्युनिकेशन कंसल्टिंग कंपनी Cornerstone Strategics शुरू करने जा रही हैं। इस फर्म का फोकस टीवी, रेडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए मीडिया बुकिंग और कम्युनिकेशन रणनीति तैयार करने पर रहेगा।</p><p style="text-align:justify;">नेल्सन ट्रंप के 2024 चुनावी अभियान की शुरुआती कम्युनिकेशन टीम का हिस्सा थीं और बाद में व्हाइट हाउस में मीडिया अफेयर्स डायरेक्टर बनीं। उन्होंने प्रशासन की मीडिया रणनीति को मजबूत बनाने और विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। MAGA (Make America Great Again) आंदोलन में भी उन्हें प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है।</p><p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार उनका व्हाइट हाउस में आखिरी कार्य दिवस था। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर भी इस खबर की पुष्टि की। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि नेल्सन राजनीति जगत की सबसे प्रभावशाली मीडिया बुकर्स में से एक हैं और मीडिया जगत में उनके व्यापक संपर्क हैं।</p><p style="text-align:justify;">नेल्सन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन में कई बड़े बदलाव और उच्च-स्तरीय अधिकारियों के प्रस्थान की खबरें सामने आ रही हैं।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/donald-trump.jpeg" alt="Donald Trump" width="767" height="434"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 13:27:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की चुनौतियां और विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[Donald Trump: संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रम्प विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता के प्रमुख रहे हैं। लंबे समय तक यह धारणा प्रचलित रही कि ब्रिटेन सबसे पुराना लोकतंत्र है, भारत सबसे बड़ा और अमेरिका सबसे प्रभावशाली। ट्रम्प ने 2017 से 2021 तक अपने पहले कार्यकाल में एक ऐसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/challenges-and-controversies-of-trumps-second-term/article-83272"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Donald Trump: संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रम्प विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता के प्रमुख रहे हैं। लंबे समय तक यह धारणा प्रचलित रही कि ब्रिटेन सबसे पुराना लोकतंत्र है, भारत सबसे बड़ा और अमेरिका सबसे प्रभावशाली। ट्रम्प ने 2017 से 2021 तक अपने पहले कार्यकाल में एक ऐसे नेता की छवि बनाई, जो परंपरागत राजनीतिक ढांचे से अलग था। कुछ लोगों के लिए वे स्पष्टवादी और निर्णायक नेता थे, जबकि अन्य के लिए उनकी शैली असामान्य और विवादास्पद रही। 2020 के चुनाव में हार के बाद उनके समर्थकों द्वारा संसद भवन पर किया गया आक्रमण लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। दूसरे कार्यकाल में, जो 2025 में आरंभ हुआ, ट्रम्प का व्यक्तित्व और कार्यशैली पहले से अधिक आक्रामक और असंतुलित दिखाई देने लगी। पहले उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता था जो आर्थिक प्रगति और वैश्विक शांति की बात करता है। वे स्वयं यह दावा भी करते रहे कि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त करने में भूमिका निभाई। परंतु वास्तविकता में उनके प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का उनका वादा अधूरा रह गया।ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने उनकी विदेश नीति की सीमाओं को उजागर किया। उन्होंने यह घोषणा की थी कि यह संघर्ष शीघ्र समाप्त हो जाएगा, परंतु स्थिति उलझती चली गई। उनके भाषणों में प्रयुक्त कठोर और असंयमित शब्दों ने कूटनीतिक संतुलन को और कमजोर किया। किसी भी राष्ट्र के प्रमुख से अपेक्षा की जाती है कि वह संयम और संतुलन का परिचय दे, परंतु ट्रम्प के बयान अक्सर उग्र और टकरावपूर्ण रहे। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या उनकी रणनीति वास्तव में स्थिरता लाने की दिशा में थी या केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित थी। ट्रम्प की भाषा और व्यवहार ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित किया। उन्होंने कई अवसरों पर भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर बताया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता। इसी प्रकार, यूरोप के नेताओं के प्रति उनकी टिप्पणियों ने पश्चिमी सैन्य गठबंधन में असहजता पैदा की। नाटो जैसे महत्वपूर्ण संगठन के साथ उनके संबंधों में तनाव स्पष्ट दिखाई दिया। यह स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब ईरान संघर्ष के दौरान सहयोगी देशों ने खुलकर उनका साथ देने से इनकार कर दिया। Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">यूरोपीय देशों ने धीरे-धीरे अपनी रक्षा नीतियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि वे अब अमेरिका पर पूर्ण निर्भरता नहीं रखना चाहते। ग्रीनलैंड को खरीदने जैसी असामान्य मांगों और यूक्रेन नीति में अस्पष्टता ने भी सहयोगी देशों के विश्वास को कमजोर किया। घरेलू स्तर पर भी ट्रम्प को तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने उनकी नीतियों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए। इन आंदोलनों में लाखों लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि अमेरिकी समाज का एक बड़ा वर्ग उनकी कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है। आलोचकों का आरोप है कि उनके निर्णय लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करते हैं और सत्ता के केंद्रीकरण को बढ़ावा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक नीतियों को लेकर भी असंतोष देखा गया। यह कहा गया कि उनकी नीतियां उच्च आय वर्ग के पक्ष में अधिक झुकी हुई हैं, जिससे सामाजिक असमानता बढ़ती है। आव्रजन नीति को लेकर भी व्यापक आलोचना हुई। अमेरिका को लंबे समय से अवसरों की भूमि माना जाता है, जहां विभिन्न देशों के लोग आकर अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसे में कठोर आव्रजन नीतियां इस मूल भावना के विपरीत प्रतीत होती हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर भी ट्रम्प की रणनीतियां कई बार असंगत दिखाई दीं। उनकी जल्दबाजी और आक्रामक रुख ने कई बार तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाया। यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेताओं ने भी उनकी नीतियों पर चिंता व्यक्त की। जनमत सर्वेक्षणों में उनके समर्थन में गिरावट इस असंतोष का स्पष्ट संकेत है। Donald Trump</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रम्प के प्रति समर्थन में कमी आई है। कई देश अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं, परंतु ट्रम्प के नेतृत्व में नहीं। भारत का दृष्टिकोण भी इसी दिशा में देखा जा सकता है। पिछले वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत हुए हैं, विशेषकर रक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में। परंतु व्यापार नीतियों, विशेष रूप से आयात शुल्क के मामले में ट्रम्प के निर्णयों ने असहमति उत्पन्न की। अमेरिकी न्यायालयों द्वारा कुछ शुल्कों को निरस्त किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनकी नीतियां कानूनी चुनौती का सामना कर रही थीं। पहले कार्यकाल में ट्रम्प ने चीन के प्रति कठोर रुख अपनाया और उसे प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना। उन्होंने पाकिस्तान को भी कठघरे में खड़ा किया, जो भारत के हित में था। परंतु बाद के समय में उनकी नीति में बदलाव देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों की चर्चा अक्सर होती रही है, परंतु नीतिगत स्तर पर कई निर्णय भारत के हितों के अनुरूप नहीं रहे। यह विरोधाभास उनके नेतृत्व की जटिलता को दर्शाता है। समग्र रूप से देखा जाए तो ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल विवादों, विरोध और अस्थिरता से घिरा रहा है। उनकी नीतियों और व्यवहार ने न केवल अमेरिका के भीतर असंतोष बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अनिश्चितता को जन्म दिया है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या उनका नेतृत्व भविष्य के लिए उपयुक्त है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि विश्व शांति और स्थिरता के लिए एक संतुलित और संयमित नेतृत्व की आवश्यकता है, जो संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दे। Donald Trump<br />
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="स्टारेक्स यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति चल रहा BPT कोर्स, छात्रों ने लगाया शोषण का आरोप" href="http://10.0.0.122:1245/starex-university-is-running-bpt-course-without-permission/">स्टारेक्स यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति चल रहा BPT कोर्स, छात्रों ने लगाया शोषण का आरोप</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:15:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Stock Market: ट्रंप के बयान के बाद शेयर बाजारों में गिरावट, सेंसेक्स 1,500 अंक लुढ़का</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। Share Market: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनोल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर जारी बयान के बाद गुरुवार को दुनिया भर में शेयर बाजारों में गिरावट देखी गयी और घरेलू स्तर पर बीएसई का सेंसेक्स 1,500 अंक से ज्यादा लुढ़क गया। सेंसेक्स 872.27 अंक की गिरावट में 72,262.05 अंक पर खुला और कुछ ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/stock-markets-fall-after-trumps-statement/article-82991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/stock-market.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> Share Market: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनोल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर जारी बयान के बाद गुरुवार को दुनिया भर में शेयर बाजारों में गिरावट देखी गयी और घरेलू स्तर पर बीएसई का सेंसेक्स 1,500 अंक से ज्यादा लुढ़क गया। सेंसेक्स 872.27 अंक की गिरावट में 72,262.05 अंक पर खुला और कुछ ही मिनट में लगभग 1,525 अंक टूटकर 71,608.05 अंक तक उतर गया। खबर लिखे जाते समय यह 1,473.37 अंक (2.01 प्रतिशत) की गिरावट में 71,660.95 अंक पर रहा। Stock Market</p>
<p style="text-align:justify;">श्री ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ मिशन में अपने मुख्य लक्ष्य हासिल कर लिये हैं, लेकिन अगले दो-तीन सप्ताह में हमले और तेज किये जायेंगे। उनके इस बयान के बाद जल्द युद्ध समाप्ति की उम्मीद लगाये बैठे निवेशकों को निराशा हुई और शेयर बाजारों में बिकवाली देखी गयी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 296 अंक गिरकर 22,383.40 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 460.70 अंक यानी 2.03 प्रतिशत नीचे 22,218.70 अंक पर था। शेयर बाजार में फिलहाल चौतरफा बिकवाली देखी जा रही है। बैंकिंग, फार्मा, स्वास्थ्य, रियलटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, आॅटो, वित्त, धातु, मीडिया, तेल एवं गैस और रसायन समूहों पर ज्यादा दबाव है। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां अभी गिरावट में हैं। विमान सेवा कंपनी इंडिगो और दवा बनाने वाली सनफार्मा के शेयर चार फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहे हैं। अडानी पोर्ट्स, एलएंडटी, इटरनल और टाट स्टील के शेयर तीन से चार प्रतिशत फिसल चुके हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एक लाख का इनामी बदमाश गिरफ्तार, डकैती और डबल मर्डर केस से जुड़ा है मामला" href="http://10.0.0.122:1245/criminal-with-a-reward-of-one-lakh-arrested/">एक लाख का इनामी बदमाश गिरफ्तार, डकैती और डबल मर्डर केस से जुड़ा है मामला</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 10:55:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>India-US Relations: ईरान से युद्ध के बीच ट्रंप बोले- &amp;#8216;आई लव मोदी एंड आई लव इंडिया&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[India-US Relations: नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच भारत को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। Donald Trump ने भारत और प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रति अपने सकारात्मक भाव व्यक्त किए हैं। यह संदेश नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave के दौरान पढ़कर सुनाया गया। यह संदेश अमेरिकी दक्षिणपंथी कार्यकर्ता Laura […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/amid-war-with-iran-trump-says-i-love-modi-and-i-love-india/article-82310"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/modi-with-trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India-US Relations: नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच भारत को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। Donald Trump ने भारत और प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रति अपने सकारात्मक भाव व्यक्त किए हैं। यह संदेश नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave के दौरान पढ़कर सुनाया गया। यह संदेश अमेरिकी दक्षिणपंथी कार्यकर्ता Laura Loomer ने सम्मेलन के मंच से साझा किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में आने से पहले उनकी ट्रंप से बातचीत हुई थी और उसी दौरान उन्होंने भारत के लिए यह संदेश दिया। Donald Trump News</p>
<p style="text-align:justify;">लूमर के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि उन्हें भारत से विशेष लगाव है और वह भारतीय लोगों के प्रति सम्मान और स्नेह रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रभावशाली नेता हैं और उनके साथ उनकी मित्रता मजबूत है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वह निकट भविष्य में भारत की यात्रा करने की योजना बना सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान वैश्विक राजनीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े कई विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इसी बीच ट्रंप के संदेश ने उपस्थित लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। लूमर ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक स्तर पर अच्छा तालमेल रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत-अमेरिका संबंधों की चर्चा | Donald Trump News</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग, व्यापार और रक्षा साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। ट्रंप और मोदी की मुलाकातें अक्सर वैश्विक मंचों पर चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसा ही एक बड़ा कार्यक्रम Namaste Trump था, जो वर्ष 2020 में आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद स्थित Narendra Modi Stadium में विशाल जनसभा को संबोधित किया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। ट्रंप का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक राजनीति कई चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में भारत के प्रति उनके सकारात्मक संकेत को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Donald Trump News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:00:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान की अगली बैठक से पहले ट्रंप ने दे डाली एक और चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने बातचीत करने वाले हैं। स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10 बजे प्रस्तावित इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रारंभिक योजना के अनुसार वार्ता तुर्किये में होनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ahead-of-the-next-us-iran-meeting-trump-issued-another-warning/article-80991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/trump-today.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने बातचीत करने वाले हैं। स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10 बजे प्रस्तावित इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रारंभिक योजना के अनुसार वार्ता तुर्किये में होनी थी, किंतु ईरान की आपत्ति के बाद स्थान बदलकर ओमान तय किया गया। Donald Trump News</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख दोहराया। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पुनः सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई गई है और ईरानी नेतृत्व को इस परिस्थिति का आकलन करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ सप्ताहों से ट्रंप प्रशासन ईरान पर नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहा है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि वार्ता केवल परमाणु गतिविधियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय समूहों को समर्थन तथा मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, ईरान ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित वार्ता का दायरा मुख्यतः परमाणु विषयों तक सीमित रखा जाए। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने सामाजिक मंच पर पुष्टि की कि मस्कट में निर्धारित समय पर वार्ता आयोजित की जाएगी और मेजबानी के लिए ओमान का आभार व्यक्त किया।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के संबंधों में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। जहां एक ओर बयानबाजी और सैन्य संकेतों ने तनाव को बढ़ाया है, वहीं प्रत्यक्ष वार्ता की पहल से समाधान की संभावनाएं भी खुली हैं। आने वाले दिनों में इस संवाद की दिशा और परिणाम पर वैश्विक समुदाय की निगाहें टिकी रहेंगी। Donald Trump News</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 13:55:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>US Immigration: व्हाइट हाउस इमिग्रेशन कानून को लेकर हुआ सख्त! ट्रंप प्रशासन ने डाला राज्यों पर दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[US Immigration: वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने तथाकथित ‘सैंक्चुरी नीतियों’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों और स्थानीय प्रशासन से संघीय आव्रजन कानूनों के पालन में पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (आईसीई) […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/white-house-cracks-down-on-immigration-laws-trump-administration-pressures-states/article-80731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/caroline-levitt-us.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">US Immigration: वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने तथाकथित ‘सैंक्चुरी नीतियों’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों और स्थानीय प्रशासन से संघीय आव्रजन कानूनों के पालन में पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (आईसीई) को अपने दायित्वों के निर्वहन में किसी प्रकार की बाधा न आए। US News</p>
<p style="text-align:justify;">लेविट ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों और नगर प्रशासन द्वारा आईसीई के साथ सहयोग से इनकार करना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से मिनेसोटा के कुछ जनप्रतिनिधियों पर संघीय कानूनों की अनदेखी करने और अधिकारियों के कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ने मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज से बातचीत कर स्पष्ट किया है कि स्थानीय पुलिस द्वारा पकड़े गए अवैध प्रवासियों को संघीय एजेंसियों को सौंपा जाना चाहिए, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को हिरासत में स्थानांतरित किया जाना चाहिए तथा प्रवर्तन कार्यवाही में किसी प्रकार की अड़चन नहीं डाली जानी चाहिए।</p>
<h3>अधिकांश राज्यों में इस प्रकार का समन्वय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रेस सचिव ने कहा कि अधिकांश राज्यों में इस प्रकार का समन्वय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, किंतु जहां सहयोग नहीं मिला है, वहां गंभीर परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति कांग्रेस से आग्रह कर रहे हैं कि ऐसे विधेयक पर विचार किया जाए, जिससे ‘सैंक्चुरी सिटीज’ की व्यवस्था को समाप्त किया जा सके। US News</p>
<p style="text-align:justify;">लेविट ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, किंतु कानून प्रवर्तन की कार्यवाही में बाधा डालना अपराध की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता उन विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करना है, जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप सिद्ध हुए हैं। हाल के अभियानों में आईसीई द्वारा हमले, घरेलू हिंसा, वित्तीय धोखाधड़ी और नशे में वाहन चलाने जैसे मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति कानून का पालन करने वाले नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के समर्थक हैं, परंतु उन्होंने आगाह किया कि प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष हथियार लेकर उपस्थित होना जोखिमपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकता है। यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है, जब कुछ डेमोक्रेट-शासित राज्यों और शहरों ने संघीय आव्रजन नीतियों पर असहमति व्यक्त की है। ट्रंप प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर आईसीई के साथ तालमेल को अपनी सुरक्षा नीति का प्रमुख अंग बताया है। US News</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:33:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>India-US Trade Deal: ट्रंप की टैरिफ नीति से रिपब्लिकन खेमे में घमासान, सीनेटर टेड क्रूज ने व्हाइट हाउस पर लगाए गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[India-US Trade Deal: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और भारत-अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब भी अधर में लटकी हुई है। इस बीच अमेरिका के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर सियासी उथल-पुथल तेज़ होती दिख रही है। एक ताज़ा खुलासे ने रिपब्लिकन पार्टी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-much-awaited-india-us-trade-deal-remains-in-limbo/article-80716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/india-us-trade-deal.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India-US Trade Deal: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और भारत-अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब भी अधर में लटकी हुई है। इस बीच अमेरिका के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर सियासी उथल-पुथल तेज़ होती दिख रही है। एक ताज़ा खुलासे ने रिपब्लिकन पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को उजागर कर दिया है, जिसमें खुद एक वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर ने ट्रंप प्रशासन को बातचीत में देरी का जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ट्रेड डील में देरी के लिए ट्रंप और उनके करीबी जिम्मेदार?</h3>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने निजी बातचीत में आरोप लगाया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की राह में सबसे बड़ी रुकावट खुद ट्रंप प्रशासन के भीतर मौजूद लोग हैं। लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग में क्रूज ने व्हाइट हाउस के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो, उप-राष्ट्रपति जेडी वैंस और कई मौकों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया गया है कि क्रूज ने अपने समर्थकों और दानदाताओं से कहा कि वह भारत के साथ व्यापार समझौता सुनिश्चित करने के लिए व्हाइट हाउस से “जंग” लड़ रहे हैं, जबकि भारतीय निर्यात पर अमेरिका की ओर से 50% तक का भारी टैरिफ अब भी लागू है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लीक ऑडियो क्लिप से मचा सियासी बवाल | India-US Trade Deal</h3>
<p style="text-align:justify;">बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह बातचीत एक निजी फोन कॉल के दौरान हुई थी, जिसकी ऑडियो क्लिप अब वायरल हो चुकी है। हालांकि, इस रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसके सामने आने से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जारी अनिश्चितता और गहरी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि बीते करीब पाँच महीनों से भारत पर 50% टैरिफ लागू है, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता फरवरी 2025 में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। इसके बाद मार्च-अप्रैल में औपचारिक बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ट्रंप के दावों पर उठे सवाल</h3>
<p style="text-align:justify;">यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से भरोसा जताया था कि भारत और अमेरिका “एक शानदार डील” की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ भी की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, लीक ऑडियो क्लिप ट्रंप के इन दावों पर सवाल खड़े करती है और यह संकेत देती है कि प्रशासन के भीतर ही ट्रेड पॉलिसी को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">टैरिफ से चुनावी नुकसान की आशंका</h3>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सीनेटर क्रूज ने ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति के राजनीतिक और आर्थिक जोखिमों को लेकर चेतावनी दी थी। ऑडियो में क्रूज कथित तौर पर कहते हैं कि उन्होंने और कई रिपब्लिकन सीनेटरों ने अप्रैल में घोषित ‘मुक्ति दिवस टैरिफ’ को रोकने की कोशिश की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका मानना है कि ऊंचे टैरिफ से महंगाई बढ़ेगी, अमेरिकियों के रिटायरमेंट फंड पर असर पड़ेगा और इसका सीधा नुकसान 2026 के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘डेमोक्रेट्स सत्ता में आ सकते हैं’</h3>
<p style="text-align:justify;">सीनेटर क्रूज ने यहां तक चेतावनी दी कि यदि टैरिफ नीति के नकारात्मक असर ऐसे ही जारी रहे, तो रिपब्लिकन पार्टी व्हाइट हाउस और सीनेट दोनों पर अपना नियंत्रण खो सकती है और डेमोक्रेट्स दोबारा सत्ता में लौट सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रिपब्लिकन पार्टी में बढ़ती दरार</h3>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, इस ऑडियो क्लिप के वायरल होने से रिपब्लिकन पार्टी के भीतर गहरे मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति को लेकर अब उनकी ही पार्टी के नेता असहज नजर आ रहे हैं और आने वाले चुनावों में इसके सियासी नतीजों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। India-US Trade Deal</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Punjab News: पंजाब पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलेगा सम्मान, डीजीपी यादव ने दी बधाई" href="http://10.0.0.122:1245/punjab-police-officers-and-employees-will-be-honored-dgp-yadav-congratulated/">Punjab News: पंजाब पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलेगा सम्मान, डीजीपी यादव ने दी बधाई</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-much-awaited-india-us-trade-deal-remains-in-limbo/article-80716</link>
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                <pubDate>Mon, 26 Jan 2026 10:03:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेगा अमेरिका : ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[दावोस । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो अमेरिका को कोई रोक नहीं पायेगा। ट्रंप ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में अपनी 70 मिनट की स्पीच में ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-us-will-not-use-force-to-acquire-greenland-trump/article-80586"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/donald-trump1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दावोस ।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिये बल का प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो अमेरिका को कोई रोक नहीं पायेगा। ट्रंप ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में अपनी 70 मिनट की स्पीच में ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने के उनके इरादे और इस मुद्दे को लेकर यूरोपीय संघ के साथ उनके मतभेद पर रोशनी डाली। उन्होंने अपने भाषण में कई बार ग्रीनलैंड को आइसलैंड कहकर भी संबोधित किया। उन्होंने नाटो के खर्च पर कहा, “हमने कभी (नाटो से) कुछ नहीं मांगा, न ही हमें कभी कुछ मिला। अगर हम अपनी ताकत और बल का प्रयोग नहीं करते तो हमें कुछ मिलेगा भी नहीं। अगर ऐसा होता है तो हमें रोकने वाला कोई नहीं होगा, लेकिन मैं ऐसा करूंगा नहीं।”</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की प्रक्रिया में सेना के इस्तेमाल को खारिज नहीं किया था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड का स्वामित्व चाहता है क्योंकि अगर वह पट्टे पर होगा तो उसकी रक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “कोई भी भला किसी लाइसेंस समझौते या पट्टे पर मिली ज़मीन की रक्षा क्यों करना चाहेगा?” उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और वह नाटो का एक सहयोगी देश है। नाटो का अनुच्छेद-5 कहता है कि एक नाटो देश पर हमला सभी पर हमला माना जायेगा। अब तक इस अनुच्छेद का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका के संबंध में हुआ है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अगर अमेरिका को ज़रूरत पड़ती है तो नाटो उनके बचाव के लिये आगे आयेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने नाटो के साथ डेनमार्क के कम सुरक्षा खर्च की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ़ अमेरिका ही ग्रीनलैंड की रक्षा कर सकता है। उन्होंने ग्रीनलैंड के विकास और सुधार की बात भी उठाई। श्री ट्रंप ने अमेरिका के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के बारे में बात करने के लिये “तुरंत” बातचीत का आह्वान किया, हालांकि यूरोपीय अधिकारी कई बार इस प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर यूरोप के रुख़ को हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा, “हमें दुनिया की रक्षा करने के लिये बर्फ का एक टुकड़ा चाहिये, लेकिन वह हमें इसे नहीं दे सकते। हमने कभी कुछ नहीं मांगा। हम चाहते तो खुद ही ज़मीन का वह टुकड़ा ले सकते थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “यूरोप के पास एक विकल्प है। आप चाहें तो हां कह सकते हैं और हम इसका बहुत सम्मान करेंगे। आप चाहें तो ना भी कह सकते हैं और फिर हम याद रखेंगे कि मजबूत नाटो के बिना मज़बूत और सुरक्षित अमेरिका नहीं बन सकता। यही एक वजह है कि मैं हमारी सेना को बहुत मजबूत बनाने के लिये काम कर रहा हूं।” इस बीच, ट्रंप ने पड़ोसी मुल्क कनाडा की ओर रुख़ करते हुए कहा कि अमेरिका की वजह से ही कनाडा सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ हवाई रक्षा प्रणाली कनाडा की भी रक्षा करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “कनाडा को हमारी तरफ से काफी चीजें मुफ्त मिल जाती हैं। उन्हें इसके लिये शुक्रगुज़ार होना चाहिये, लेकिन ऐसा नहीं है। मैंने आपके प्रधानमंत्री (मार्क कार्नी) को कल देखा। वह बहुत शुक्रगुज़ार नज़र नहीं आये। कनाडा, उन्हें हमारे प्रति शुक्रगुज़ार होना चाहिये। कनाडा ज़िन्दा है अमेरिका की वजह से।” इस बीच, यूरोपीय संघ के विधायी निकाय ने बुधवार को उसे व्यापार समझौते की औपचारिक मंज़ूरी पर काम रोक दिया, जो उसने पिछली गर्मियों में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ की थी। यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति के चेयरमैन बर्न्ड लांगे ने कहा, “ग्रीनलैंड, डेनमार्क और उनके यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ टैरिफ सहित लगातार बढ़ते सभी खतरों को देखते हुए हमारे पास समझौते पर काम रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।” लांगे ने एक बयान में कहा, “जब तक अमेरिका टकराव के बजाय सहयोग के रास्ते पर फिर से आने का फैसला नहीं करता, तब तक समझौते को आगे बढ़ाने के लिये कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।”</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:46:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>Donald Trump: राष्ट्रपति ट्रम्प ने पीएम मोदी को दिया ये न्योता, जानकर आप भी रह जाओगे दंग</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन/नई दिल्ली (एजेंसी)। Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस निमंत्रण की पुष्टि की और राष्ट्रपति ट्रम्प का लिखा गया पत्र साझा किया। इस बोर्ड का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/you-will-be-stunned-to-learn-about-the-invitation-president-trump-extended-to-pm-modi/article-80477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/washington-news-1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस निमंत्रण की पुष्टि की और राष्ट्रपति ट्रम्प का लिखा गया पत्र साझा किया। इस बोर्ड का गठन गाजा में स्थायी शांति लाने, वहां की शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में किया गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने पत्र में इस पहल को मध्य पूर्व में शांति को पुख्ता करने और वैश्विक संघर्ष को सुलझाने का एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया है। Washington News</p>
<p style="text-align:justify;">यह बोर्ड पिछले वर्ष 29 सितंबर को घोषित ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना का हिस्सा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी अपने प्रस्ताव 2803 के माध्यम से समर्थन दिया है। इस योजना के तहत अब गाजा में शांति और समृद्धि के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दुनिया के सम्मानित नेताओं को एक साथ लाया जा रहा है। इस ‘बोर्ड आॅफ पीस’ में शामिल होने के लिए भारत के अलावा इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना सहित लगभग 50 देशों को आमंत्रित किया गया है। यह बोर्ड गाजा में जारी संघर्ष विराम के दूसरे चरण की निगरानी करेगा, जिसमें नई फिलिस्तीनी समिति का गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास का विसैन्यीकरण और युद्ध से प्रभावित क्षेत्र का पुनर्निर्माण शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">सदस्यों की आधिकारिक सूची की घोषणा आने वाले दिनों में दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान होने की संभावना है। व्हाइट हाउस ने बोर्ड के विजन को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति की भी घोषणा की है। इस समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यह समूह गाजा के पुनर्निर्माण और वहां एक सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के निर्माण की दिशा में कार्य करेगा।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 14:27:37 +0530</pubDate>
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