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                <title>पंचायती चुनाव: प्रथम चरण के मतदान के लिए मतदान दल रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[पंचायतीराज संस्थाओं के प्रथम चरण का मतदान शुक्रवार को होगा। इसके लिए मतदान दल गुरुवार को जिला मुख्यालय से रवाना हुए। Rajasthan News Aaj Ki Taza Khabar.
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/panchayati-election-polling-party-left-for-first-phase-of-voting/article-12528"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/panchayai-election.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">17 जनवरी को सुबह 8 से शाम 5 बजे होगा तक मतदान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पाली (एजेंसी)।</strong> पंचायतीराज संस्थाओं के प्रथम चरण का मतदान  शुक्रवार को होगा। इसके लिए मतदान दल गुरुवार को जिला मुख्यालय से रवाना हुए। पहले चरण में रोहट, बाली व रानी पंचायत समिति की ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंचों के लिए मतदान होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेशचन्द जैन ने बताया कि मतदान के लिए गुरुवार को बांगड़ महाविद्यालय में मतदान दलों को अंतिम प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद मतदान दलों को इवीएम, मतपेटियों व मतदान सामग्री के साथ वाहनों में बैठाकर रवाना किया गया। मतदान 17 जनवरी को सुबह 8 से शाम 5 बजे तक होगा। मतदान समाप्ति के पश्चात मतगणना होगी। उप सरपंच का निर्वाचन 18 जनवरी को होगा। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी जैन व अन्य अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समरिया पर्यवेक्षक नियुक्त</h3>
<p style="text-align:justify;">जिले में पंचायत चुनाव के प्रथम एवं तृतीय चरण के लिए राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पीयूष समरिया को पर्यवेक्षक लगाया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेशचन्द जैन ने बताया कि समरिया प्रथम चरण में पंचायत समिति रोहट, बाली व रानी तथा तृतीय चरण में जैतारण, मारवाड़ जंक्शन व सुमेरपुर के लिए पर्यवेक्षक होंगे। जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के तकनीकी सहायक डी.के. शर्मा को लाइजनिंग अधिकारी नियुक्त किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तीसरे चरण में होंगे 11 एरिया मजिस्टे्रट</h4>
<p style="text-align:justify;">पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में 11 एरिया मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। पंचायत समिति जैतारण मुख्यालय के लिए रोहट तहसीलदार खीमाराम को आगेवा, गरनिया, पाटवा, बिरोल व निम्बोल, सहायक कलक्टर (प्रशिक्षु) लाखाराम को बलुन्दा, डिगरना, फालना, आनन्दपुर कालू, लाम्बिया व घोडावड़, सहायक कलक्टर (प्रशिक्षु) विनित कुमार सुखाडिय़ा को एरिया मुख्यालय रास के भुम्बलिया, राबडियावास, रास, सेवरिया व कुडक़ी, नायब तहसीलदार रायपुर प्रवीण कुमार को आसरलाई, सांगावास, निमाज व मोहराई, रानी तहसीलदार जितेन्द्र राठौड़ को एरिया मुख्यालय मारवाड़ जंक्शन के जाडन, गादाणा, राणावास, मारवाड़ जंक्शन एवं हेमलियाबास खुर्द जोन में नियुक्त किया गया है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2020 13:17:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस की स्थिति पर लाल बहादुर शास्त्री के बेटे ने कहा- पार्टी को एक गांधी की जरुरत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत के पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे, अनिल शास्त्री ने कांग्रेस पार्टी पर वर्तमान संकट को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि सबसे पुरानी पार्टी को अब एक ‘गांधी’ की जरूरत है। नहीं तो कांग्रेस का हाल भी क्षेत्रीय पार्टियों जैसे टीएमसी, एनसीपी जैसा हो जाएगा। राहुल गांधी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/congress-party-crisis/article-9994"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/rahul-gandhi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारत के पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे, अनिल शास्त्री ने कांग्रेस पार्टी पर वर्तमान संकट को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि सबसे पुरानी पार्टी को अब एक ‘गांधी’ की जरूरत है। नहीं तो कांग्रेस का हाल भी क्षेत्रीय पार्टियों जैसे टीएमसी, एनसीपी जैसा हो जाएगा। राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में बनें नहीं रहना चाहते, पार्टी को वर्तमान में नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<h2>प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए</h2>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए क्योंकि उनके अलावा कोई और 100 प्रतिशत स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी और को सुप्रीमो बनाया जाता है और संगठन का एक वर्ग उसे स्वीकार नहीं करता है, तो पार्टी के टूटने की संभावना है। देखें यहां ममता कांग्रेस (TMC), शरद पवार कांग्रेस (NCP), जगनमोहन कांग्रेस (वाईएसआरसी) है। इसलिए यदि कोई मजबूत नेतृत्व नहीं है, तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा यदि क्षेत्रीय कांग्रेस राज्यों में उभरती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रियंका गांधी के अलावा कोई और नहीं है जो अधिक स्वीकार्य होगा। मेरा यह भी मानना ​​है कि वह पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ ले जाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच भी उनकी कुछ खासियत है। तो एक शक्तिशाली नेता, जो सभी के लिए स्वीकार्य हो कांग्रेस को उसकी आवश्यकता है। अगर हम ऐसे व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं, तो गांधी परिवार के सदस्यों के अलावा कोई नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">शास्त्री ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी की ऐसी स्थिति है कि गांधी परिवार के बिना इसके अस्तित्व पर सवालिया निशान लग जाएगा। ” राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के 50 दिन बाद, लोकसभा चुनावों में अपमानजनक हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए। सबसे पुरानी पार्टी को अपना नया अध्यक्ष निर्धारित करना बाकी है। यह कहते हुए कि पार्टी को मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस राहुल की भावनाओं का सम्मान करती है। मैं भी उनका सम्मान करता हूं। कांग्रेस पार्टी को नेतृत्व की आवश्यकता है। जिस स्थिति से कांग्रेस अभी गुजर रही है, मेरा मानना ​​है कि पार्टी को जल्द से जल्द एक अध्यक्ष मिलना चाहिए।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2019 09:50:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बच्चों के अधिकार किसी दल की प्राथमिकता क्यों नहीं?</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, बाल मजदूरी और अंधविश्वास बचपन के बैरी तो हैं ही साथ में कुबेर तंत्र बनती राजनीति भी बचपन के दुश्मन ही बन गए हैं, क्योंकि सरकारी नीतियां बचपन को बचाने और सही दिशा देने में नाकाफी साबित हो रहीं हैं। सड़कों पर घूमते बच्चे बदलते भारत की तस्वीर है, जिस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-childrens-rights-are-not-the-priority-of-any-party/article-3488"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/child.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत में गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, बाल मजदूरी और अंधविश्वास बचपन के बैरी तो हैं ही साथ में कुबेर तंत्र बनती राजनीति भी बचपन के दुश्मन ही बन गए हैं, क्योंकि सरकारी नीतियां बचपन को बचाने और सही दिशा देने में नाकाफी साबित हो रहीं हैं। सड़कों पर घूमते बच्चे बदलते भारत की तस्वीर है, जिस ओर एयरकंडीशन में बैठी हमारी लोकतांत्रिक राजशाही व्यवस्था शायद देखना नहीं चाहती।</p>
<p style="text-align:justify;">इनका अपना कोई ठिकाना भी नहीं होता, कभी कोई फुटपाथ जिन बच्चों का बिस्तर, फ्लाईओवर जिनका छत और किसी तरह भूख शांत करना जिनका दैनिक उद्देश्य होता है, उनकी तरफ शायद हमारी व्यवस्था ने कानून बनाने के बाद कभी झांकने की कोशिश की ही नहीं। यह बदलते देश का नया वर्तमान है? बिता लोकतांत्रिक भूतकाल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पढ़ने-लिखने की उम्र में कचरे के ढ़ेर से कचरा उठाते बच्चे, अखबार, फूल, कलम बेचते बच्चे, कलाबाजियां दिखाता भारत का भविष्य वर्तमान में कहीं भी दिख जाएगा। केवल पेट भरने के सिवाय अन्य जिम्मेदारियों से उनके माता-पिता भी मजबूरीवश पल्ला झाड़ लेते हैं, तो सरकारें भी अच्छे दिन बहुरने का वादा कर अपने सामाजिक कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में लगता यही है, क्या लोकतंत्र में इन बच्चों के लिए कोई जगह नहीं क्या। ऐसे में सवालों की फेहरिस्त फिर लंबी हो जाती है, क्योंकि दिमागी बुखार, निमोनिया, डायरिया और अन्य बीमारियों की वजह से आजादी के सत्तर साल बाद भी हर वर्ष सैकड़ों बच्चे मारे जाते हैं। लेकिन इन मौतों के बावजूद सरकारें सबक सीखने को तैयार नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में शायद नीति-नियंत्रणकर्ता ही इन प्रश्नों के उत्तर ढूढ़ने की कोशिश नहीं करते, क्योंकि वोटबैंक की राजनीति के वे बच्चे हिस्सेदार नहीं होते। वरना शायद उनकी मलिन दशा और दिशा देखकर भारतीय राजनीति को शर्म आती, और उनके लिए भी कोई न कोई सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन होता। जैसा कि लैपटॉप, और मोबाइल रूपी लॉलीपॉप 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए बांटा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में गरीबी के कारण भी बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की 2014 में आई रिपोर्ट के अनुसार विश्व के बेहद गरीब 120 करोड़ लोगों में से लगभग एक तिहाई बच्चे हमारे देश के हैं। यह आज की स्थिति है, फिर वर्तमान राजनीति से क्या उम्मीद की जाए। 1959 में बाल अधिकारों की घोषणा को स्वीकारने में लगभग पचास साल लग लगें।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पता चलता है, कि लोकतंत्र में सियासतदारों ने बच्चों के भविष्य और जीवन को कितना अहमियत दिया है। सड़क पर जीवन बिताने वाले बच्चों की संख्या मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दस लाख, तो वहीं गैर सरकारी संगठनों डॉन बॉस्को नैशनल फोरम और यंग एट रिस्क की ओर से देश के 16 शहरों में 2013 में कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार महानगरों में सबसे ज्यादा बच्चे फुटपाथों पर रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिनके अनुसार दिल्ली में सबसे ज्यादा 69976 बच्चे , मुंबई में 16059, कोलकाता में 8287 ,चेन्नई में 2374 और बेंगलूरु में 7523 बच्चे फुटपाथ पर रहते हैं। ये चंद उदाहरण हैं, यह स्थिति पूरे देश की शायद है ही नहीं। स्थितियां इससे बदत्तर होगी। बाल अधिकार के तहत जीवन का अधिकार, पहचान, भोजन, पोषण, स्वास्थ्य, और शिक्षा शामिल है। फिर जब देश के बच्चें सड़कों पर जीवन जीने को विवश हैं, फिर उन्हें क्या पहचान राजनीति दिला सकी, और फिर किस संवैधानिक स्वतंत्र और समानता की बात की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बड़ा प्रश्न है। बच्चे तो आजादी से ही इन अधिकारों से वंचित दिखते हैं। क्या इनको अपने अधिकारों के हिस्से का 5 फीसद भी हक देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल्यों की बात करने वाली रहनुमाई व्यवस्था दिला पाई। बच्चा कोई भी हो, चाहे गरीब या अमीर। वह देश की अनमोल धरोहर होता है, जिसके कंधों पर ही देश का भविष्य अड़िग होता है, लेकिन अफसोस कि वास्तविक परिदृश्य में आजादी के सत्तर वर्षों में राजनीति ने इन बच्चों के लिए शायद शून्य बाटे सन्नाटा के बराबर ही काम कर सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कहते हैं न, भूखे पेट भजन न हो गोपाला, जब देश से भुखमरी, और कुपोषण मिट ही नहीं रहा। फिर शिक्षा के अधिकार से क्या मिला, वह इस कहावत से समझा जा सकता है। हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे कर्तव्यों से मुख तो हमारा समाज भी मोड़ रहा है, वह इन बच्चों को रुपए एक की भीख देकर ही अपनी सामाजिक और नैतिक जिम्मेवारियों से छुटकारा पा लेता है, यह रवायत भी उचित नहीं। अब जब चुनावी धुन भले ही राज्य चुनावों की बज चुकी है, तो क्या राजनीति बच्चों के अधिकारों के बारे में बात करने की सार्थक पहल करेगी। यह देखने वाला विषय होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे बीते समय की राजनीति और नेशनल सेम्पल सर्वे की रिपार्ट देखकर लगता नहीं, कि राजनीति बच्चों के अधिकारों को लेकर सचेत होने वाली है, क्योंकि एक रिपोर्ट के मुताबिक दो तिहाई लोग पोषण के सामान्य मानक से कम खुराक प्राप्त कर पाते हैं। वहीं गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट के अनुसार कुपोषित और कम वजन के बच्चों की आबादी का लगभग 40 फीसद हिस्सा विश्व में भारत से ही आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो बच्चों के अधिकारों की हवाई किला बनाने वाली व्यवस्था की नीतियों पर सवालिया प्रश्न खड़ी करती है, कि अगर बच्चों के भविष्य को सँवारने के लिए कदम उठाए जा रहें हैं, फिर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट को किस विकास के पैमाने से नापे। जिसके अनुसार झारखंड में पांच वर्ष तक के 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर खनिज संपदा से भरे प्रदेश की यह स्थिति है। ऐसे में अन्य प्रदेशों की हालत कितनी पतली होगी, इसका सहज आंकलन किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे झारखंड में हैं। वहीं एक साल तक के बच्चों की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश पूरे देश में पहले नंबर पर है। फिर बच्चों का भविष्य किस दल की प्राथमिकता में है, यह समझना कोई दूर की कौड़ी नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक महेश तिवारी</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Nov 2017 04:09:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शरद यादव के सपोर्टर का दावा: जेडीयू तोड़कर जल्द बनाई जाएगी नई पार्टी</title>
                                    <description><![CDATA[पटना: बिहार में महागठबंधन (कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू) (JDU) में टूट से खफा जेडीयू सांसद शरद यादव बगावत की राह पर हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि वे 19 अगस्त को पटना में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी से दो दिन पहले 17 को दिल्ली में सांप्रदायिकता पर सेमिनार करेंगे। विपक्षी एकता दिखाने के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/new-party-soon-jdu/article-2812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/jdu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना:</strong> बिहार में महागठबंधन (कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू) <strong>(JDU)</strong> में टूट से खफा जेडीयू सांसद शरद यादव बगावत की राह पर हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि वे 19 अगस्त को पटना में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी से दो दिन पहले 17 को दिल्ली में सांप्रदायिकता पर सेमिनार करेंगे। विपक्षी एकता दिखाने के लिए इस सेमिनार में कांग्रेस, एनसीपी, वाम दलों के साथ आरजेडी को न्योता दिया है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">हमेशा नीतीश को ही चुनेंगे शरद: त्यागी | JDU</h1>
<p style="text-align:justify;">जेडीयू के सीनियर नेता और राष्ट्रीय महासचिव त्यागी ने कहा शरद यादव को जब कभी नीतीश कुमार और लालू यादव में से किसी एक को चुनना होगा, तो वे नीतीश कुमार को ही चुनेंगे। मुझे आशा है कि शरद जल्द अपना फैसला ले लेंगे। उन्होंने ही सबसे पहले लालू के करप्शन का विरोध करना शुरू किया था।</p>
<h1 style="text-align:justify;">नीतीश की राजनीति यूज एंड थ्रो की : तेजस्वी | JDU</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सीएम तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर ‘यूज एंड थ्रो’ की राजनीति करने का आरोप लगाया है।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने मांग की कि एफिडेविट दें कि बीजेपी के साथ सरकार पूरा करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">विपक्ष के नेता के हैसियत से विधानसभा में कही गई अधिकांश बातों को दोहराते हुए कहा कि नीतीश जी कुर्सी प्रेमी हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने सीएम पद के लिए 4 साल में 4 सरकार बनाकर बिहार का विनाश किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने वर्तमान मंत्रिमंडल में शामिल 75 फीसदी मंत्रियों पर दागी होने का आरोप लगाया।</li>
<li style="text-align:justify;">कहा कि सभी मंत्रियों का पर्दाफाश करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि जदयू के 75 फीसदी सांसद भी दागी हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">सीएम पर उन्होंने दूसरी बार मंडलवादियों को धोखा देने का आरोप लगाया।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया में चल रही जांच | JDU</h1>
<p style="text-align:justify;">तेजस्वी ने पनामा कांड में रमन सिंह के बेटे, अमिताभ बच्चन और अडानी के बड़े भाई का भी नाम होने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश पीएम से इनकी भी जांच कराएं। इस आरोप में दो देश के पीएम को हटना पड़ा है तो ऑस्ट्रेलिया में जांच चल रही है। उन्होंने व्यापम घोटाले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच की मॉनिटरिंग पीएम से करने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 22:41:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस के नेता शंकर सिंह बोले: मुझे 24 घंटे पहले ही पार्टी से निकाल दिया</title>
                                    <description><![CDATA[गांधीनगर: गुजरात कांग्रेस के नेता शंकर सिंह वाघेला का शुक्रवार को जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर बुलाए गए सम संवेदना सम्मेलन में उन्होंने कहा आरएसएस के लोगों ने हमें पब्लिक लाइफ सिखाई। कांग्रेस ने तो मुझे 24 घंटे पहले ही पार्टी से निकाल दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि गुजरात में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/congress-leader-shankar-singh-said-i-was-thrown-out-of-the-party-24-hours-ago/article-2496"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/shanker-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गांधीनगर:</strong> गुजरात कांग्रेस के नेता शंकर सिंह वाघेला का शुक्रवार को जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर बुलाए गए सम संवेदना सम्मेलन में उन्होंने कहा आरएसएस के लोगों ने हमें पब्लिक लाइफ सिखाई।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने तो मुझे 24 घंटे पहले ही पार्टी से निकाल दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि गुजरात में प्रेसिडेंट इलेक्शन के दौरान वाघेला ने क्रॉस वोटिंग कराई। इससे पहले कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों से कहा कि वे वाघेला के इस सम्मलेन में ना जाएं। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- इसमें मैं क्या कहूं? आना है तो आएं, नहीं आना है तो कोई नहीं। पार्टी (कांग्रेस) को अपने वर्कर्स को रोकने का हक है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> खुलकर सामने आए वाघेला</h2>
<p style="text-align:justify;">अपने जन्मदिन कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं के आने पर रोक से गुस्साए वाघेला खुलकर सामने आ गए हैं। वाघेला ने कहा- पार्टी को राइट है अपने वर्कर को रोकने का और वर्कर का राइट है आए या ना आए । ये एक्शन बहुत समय पहले लेना चाहिए था। हमने क्रॉस वोटिंग नहीं करवाई है। मैंने दो एनसीपी के विधायकों को लाकर वोट कराया। दो बजे जन्मदिन कार्यक्रम में पहुंचूंगा। वहीं पर सब बातें होंगी। कांग्रेस के 57 एमएलए के वोट मैंने करवाए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कांग्रेस को भारी नुकसान हो सकता है</h2>
<p style="text-align:justify;">वाघेला कांग्रेस छोड़ते हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होगा। उनके साथ पार्टी के कुछ विधायक भी अलग हो सकते हैं। बता दें कि कांग्रेस के पास 57 विधायक हैं। बता दें गुजरात में 8 कांग्रेस विधायकों ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ गोविंद के फेवर में वोट किया था। इस पर वाघेला ने शुक्रवार को कहा कि मेरा काम कांग्रेस विधायकों को एक साथ लाना था। उन्होंने वोट किसे दिया, इस पर कार्रवाई का फैसला आलाकमान को करना है।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jul 2017 03:50:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विराट की पार्टी में माल्या को देख सकपकाई टीम इंडिया</title>
                                    <description><![CDATA[विवाद से बचने को दूर भागते रहे खिलाड़ी समय से पूर्व कार्यक्रम छोड़ बाहर निकले नई दिल्ली (एजेंसी)। बैंकों से 9 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेकर देश से ‘फरार’ विजय माल्या भारत-पाक मैच के बाद मंगलवार को कैप्टन विराट कोहली के फाउंडेशन के एक चैरिटी कार्यक्रम में भी जा पहुंचे। अनचाहे मेहमान की एंट्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">विवाद से बचने को दूर भागते रहे खिलाड़ी</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>समय से पूर्व कार्यक्रम छोड़ बाहर निकले</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> बैंकों से 9 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेकर देश से ‘फरार’ विजय माल्या भारत-पाक मैच के बाद मंगलवार को कैप्टन विराट कोहली के फाउंडेशन के एक चैरिटी कार्यक्रम में भी जा पहुंचे। अनचाहे मेहमान की एंट्री से टीम इंडिया असहज नजर आई और विराट और बाकी टीम के खिलाड़ी उनसे बचते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस इवेंट में कैप्टन कोहली समेत टीम इंडिया के अधिकतर खिलाड़ी मौजूद थे। इससे सकपकाए टीम इंडिया के खिलाड़ी उनसे दूरी बनाते नजर आए। यहां तक कि माल्या के चलते किसी विवाद से बचने के लिए टीम इस इवेंट से तय समय से पहले ही निकल गई। बता दें कि माल्या को इससे पहले ब्रिटेन में जारी चैंपियंस ट्रोफी के भारत और पाकिस्तान के मैच के दौरान देखा गया था। वह फिलहाल इंग्लैंड में रह रहे हैं और भारत सरकार इंग्लैंड के साथ बातचीत के जरिए माल्या के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि माल्या आईपीएल में खेलने वाली टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के मालिक हैं और विराट कोहली उसके कप्तान हैं। बीसीसीआई के सूत्र ने बताया, ‘देखिए, विराट या उनके फाउंडेशन ने माल्या को नहीं बुलाया। लेकिन इस तरह के चैरिटी डिनर में जो टेबल खरीदता है, वह अपने मेहमान भी बुला सकता है। जिसने टेबल खरीदी होगी हो सकता है उसने माल्या को बुलाया हो।’ माल्या फिलहाल देश में 9000 करोड़ रूपये के कर्ज को लेकर जांच के घेरे में हैं और ब्रिटेन में रह रहे हैं जिनके प्रत्यर्पण की कोशिश में भारत सरकार लगी हुई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चैंपियंस ट्राफी में भारत का हर मैच देखने जाऊंगा: माल्या</h3>
<p style="text-align:justify;">विजय माल्या के पीछे भले ही कई जांच एजेंसियां लगी हों, लेकिन ब्रिटेन में चैंपियंस ट्राफी में भारत-पाकिस्तान के बीच स्टेडियम में मैच देखने के बाद उन्होंने बाकी मुकाबलों में भी मौजूद रहने की बात कही है। माल्या ने ट्विटर पर आलोचनात्मक अंदाज में दिये अपने संदेश में कहा ‘एजबस्टन में भारत-पाकिस्तान मैच में मेरी उपस्थिति पर मीडिया में काफी बड़ी कवरेज हुई। लेकिन मैं तो भारत के हर मैच में ही अपनी टीम को चीयर करने के लिये आना चाहता हूं।’</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/mallya-in-party-of-virat/article-949</link>
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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 07:29:15 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टिकट की चाह में छोड़ी पार्टी, कांग्रेस में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[तीन महीने तक रहे आम आदमी पार्टी में GurdasPur, SachKahoon News:  विधानसभा हलका कादियां से टिकट न मिलने से खफा आम आदमी पार्टी के नेता व मार्केट कमेटी के चेयरमैन वजीर सिंह लाली ने कांग्रेस का दामन थाम दिया है। लाली ने प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस का दामन थामा। लाली इससे पूर्व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/seeking-tickets-left-party-involve-in-congress/article-571"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/02-23.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>तीन महीने तक रहे आम आदमी पार्टी में</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>GurdasPur, SachKahoon News:</strong>  विधानसभा हलका कादियां से टिकट न मिलने से खफा आम आदमी पार्टी के नेता व मार्केट कमेटी के चेयरमैन वजीर सिंह लाली ने कांग्रेस का दामन थाम दिया है। लाली ने प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस का दामन थामा। लाली इससे पूर्व टिकट की चाह में अकाली दल छोड़कर आप में शामिल हुए थे। वजीर सिंह लाली अकाली दल बादल के सरगर्म वर्कर होने के कारण गांव संगर के सरपंच बनने के साथ ही ब्लॉक समिति धारीवाल के चेयरमैन बने। पार्टी की तरफ से उन्हें सर्कल प्रधान भी बनाया गया था। इसके अलावा उनकी पत्नी भी जिला परिषद सदस्य हैं। अकाली दल की नीतियों से नाराज होकर वह करीब तीन माह पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे और विधानसभा हलका कादियां से आप की ओर से टिकट के दावेदारों की अग्रिम सूची में शामिल हो गए, लेकिन आखिरी समय में आप द्वारा पगड़ी संभाल जट्टा लहर से जुड़े कंवलप्रीत सिंह काकी को टिकट दे दिया गया। इससे नाराज होकर लाली ने अब कांग्रेस का दामन थामते हुए अपने साथियों सहित कांग्रेसी उम्मीदवार फतेह जंग सिंह बाजवा के समर्थन का फैसला लिया है।</p>
<p><strong>नाराजगी के बाद छोड़ी पार्टी</strong><br />
उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया है, जिसके पास पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी नहीं है। इस बात को खुद काकी भी मान गए थे कि उनके पास पार्टी सदस्यता नहीं है। लाली समर्थकों को उम्मीद थी कि शायद उनके विरोध को देखते हुए पार्टी अपना फैसला बदल लेगी, लेकिन जब उन्हें ऐसा होता दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने आप को हमेशा के लिए अलविदा कहते हुए कांग्रेस का दाम थाम लिया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Dec 2016 00:59:10 +0530</pubDate>
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