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                <title>Khadi - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>खादी ने किया एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग के खादी ब्रांड ने वित्त वर्ष 2021-22 में रिकार्ड एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार करते हुए देश की सभी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को यहां बताया कि खादी ब्रांड ने एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/khadi-did-a-business-of-one-lakh-crore-rupees/article-32843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/khadi-is-not-only-clothing-but-a-medium-of-thought-self-respect-and-employment.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> खादी और ग्रामोद्योग आयोग के खादी ब्रांड ने वित्त वर्ष 2021-22 में रिकार्ड एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार करते हुए देश की सभी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को यहां बताया कि खादी ब्रांड ने एक ऊंचाई हासिल की है जो देश में सभी एफएमसीजी कंपनियों के लिए एक दूर का लक्ष्य बना हुआ है। उन्होंने बताया कि खादी ने पहली बार 1.15 लाख करोड़ रुपये का भारी कारोबार किया है, जो देश में किसी भी एफएमसीजी कंपनी के लिए अभूतपूर्व है। वित्त वर्ष 2021-22 में, केवीआईसी का कुल कारोबार पिछले वर्ष यानी 2020-21 में 95,741.74 करोड़ रुपये की तुलना में 1,15,415.22 करोड़ रुपये रहा है। इस प्रकार खादी ने वित्त वर्ष 2020-21 से 20.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में, वित्त वर्ष 2021-22 में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्रों में कुल उत्पादन में 172 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान सकल बिक्री में 248 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। खादी का यह बड़ा कारोबार कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण पहले तीन महीनों में यानी वर्ष 2022 में अप्रैल से जून तक देश में लॉकडाउन के बावजूद हुआ है। सक्सेना ने बताया कि पिछले आठ वर्षों वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2021-22 में खादी क्षेत्र में उत्पादन में 191 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि खादी की बिक्री में 332 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अकेले ग्रामोद्योग क्षेत्र में कारोबार वित्त वर्ष 2021-22 में 1,10,364 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 92,214 करोड़ रुपये था। पिछले आठ वर्षों में, 2021-22 में ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन में 172 प्रतिशत और बिक्री में 245 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सक्सेना ने कहा कि खादी के अभूतपूर्व विकास का श्रेय देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंतर किये जा रहे प्रयास को जाता है। ‘स्वदेशी’ और विशेष रूप से ‘खादी’ को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री की बार-बार अपील ने चमत्कार किया है। प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्थानीय के लिए मुखर’ के आह्वान का लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया है। नयी दिल्ली के कनॉट प्लेस में अपने प्रमुख स्टोर पर खादी की एक दिन की बिक्री भी 30 अक्टूबर 2021 को 1.29 करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गई। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में, खादी का मुख्य ध्यान कारीगरों और बेरोजगार युवाओं के लिए स्थायी रोजगार सृजित करना रहा है। बड़ी संख्या में युवाओं ने पीएमईजीपी के तहत स्वरोजगार और विनिर्माण गतिविधियों को अपनाया जिससे ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन में वृद्धि हुई।</p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Apr 2022 14:08:38 +0530</pubDate>
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                <title>खादी केवल वस्त्र नहीं अपितु विचार, स्वाभिमान और रोेजगार का माध्यम</title>
                                    <description><![CDATA[एसीएस उद्योग डॉ. सुबोध अग्रवाल का मानना है कि ऐसे में खादी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर बाजार दिलाने के लिए जयपुर में आयोजित ग्लोबल कॉन्फ्रेंस अपना अलग मायना रखती है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/khadi-is-not-only-clothing-but-a-medium-of-thought-self-respect-and-employment/article-13204"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/khadi-is-not-only-clothing-but-a-medium-of-thought-self-respect-and-employment.jpeg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>पिछले दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर दो दिनी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस आयोजन से इग्लैण्ड, जापान सहित दुनिया के 8 देशों के प्रतिनिधियों और देशभर के जाने माने गांधीवादी विचारकों और खादी से जुड़े विशेषज्ञों ने खादी के भविष्य को लेकर चिंतन मनन किया।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">खादी केवल वस्त्र नहीं अपितु यह विचार, स्वाभिमान, अधिक लोगों को रोेजगार का माध्यम है। आज खादी से जुड़े उद्यमियों और विशेषज्ञों को तकनीक में बदलाव, बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने और नित नए प्रयोगों की और ध्यान देना जरुरी हो गया है। आजादी के बाद संभवत: यह पहला मौका होगा जब खादी को लेकर केन्द्र या किसी राज्य सरकार द्वारा खादी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर लाने के ठोस प्रयास करते हुए ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर मंथन किया गया हो।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पिछले दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर दो दिनी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस आयोजन से इग्लैण्ड, जापान सहित दुनिया के 8 देशों के प्रतिनिधियों और देशभर के जाने माने गांधीवादी विचारकों और खादी से जुड़े विशेषज्ञों ने खादी के भविष्य को लेकर चिंतन मनन किया। खास बात यह रही कि यह आयोजन केवल और केवल सरकारी आयोजन ना होकर सीआईआई जैसी संस्था और खादी से जुड़े लोगों और फैशन डिजायनरों की सहभागिता से उपादेय बन गया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आजादी के आंदोलन में स्वदेशी और स्वाभिमान का प्रतीक बनी खादी आज अधिक प्रासंगिक हो गई है तो खादी की ताकत को पहचान कर आज भी ग्राम स्वराज का सपना साकार हो सकता है। इको फ्रैण्डली होने से आज दुनिया के देशों में खादी की मांग बढ़ी है। खादी- मार्केटिंग, एक्सपोर्ट पोंटेंशिएल, लो कॉस्ट और प्रोडक्शन केपेसिटी सेशन में कहा गया कि खादी को फैशन से जोड़ना आज की आवश्यकता है तो खादी में इनोवेशन, डायवर्सिफिकेशन, मार्केट इंटेलिजेंस पर ध्यान रखना होगा। पर्यावरण प्रदूषण और पानी की कमी से जूझ रही देश दुनिया के सामने खादी एक सशक्त विकल्प है। इकोफ्रैण्डली होने के साथ ही अधिक लोगों को रोजगार, सभी मौसम में प्रकृति अनुकूल है खादी। खादी क्या और क्यों को चंद शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। खादी मतलब ऑनेस्टी, सिंसिएरिटी, स्वदेशी, जीरो कार्बन फूट प्रिन्ट, जल संरक्षण, इकोफैण्डली सहित ना जाने कितने ही प्रेरणास्पद बहुआयामी मायने रखती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आज खादी जन-जन की पहचान बनती जा रही है। खादी वस्त्रों पर 50 प्रतिशत छूट और इस तरह के ग्लोबल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य सरकार की पहल इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाती है कि आज विदेशों में इकोफ्रैण्डली परिधानों की मांग हो रही है। यह अच्छी बात है कि खादी में नवाचार किए जा रहे हैं। आईटीईएन्स के सहयोग से उन्नत चरखे तैयार किए जा रहे हैं वहीं डिजाइनरों को इससे जोड़ा जा रहा है। क्योंकि आज यह उभर कर आ गया है कि पर्यावरण का बचाना है तो खादी को अपनाना ही होगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आज देश में 20 लाख गांठ कपास उत्पादन में से बड़ी मात्रा में बांग्लादेश को कपास का निर्यात होता है और वहां से अपेरल तैयार होकर दुनिया के देषों को निर्यात हो रहे हैं। हमारे पास कच्चा माल होते हुए भी हम सही मायने में वेल्यू एडिशन नहीं कर पा रहे। सम्मेलन में खादी मंत्री परसादी लाल मीणा और संयोजक गिरधारी सिंह बाफना की सक्रिय भागीदारी में जाने माने फैशन डिजायनरों रीतू बेरी, पूजा जैन, परेश लांबा, पूजा गुप्ता, अदिती जैन, रुमा देवी के साथ ही भारतीय शिल्प कला संस्थान की निदेशक डॉ. तूलिका गुप्ता ने फैशन की दुनिया में हो रहे प्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की और एक स्वर में कहा कि आज खादी परिधानों को ग्लोबल फैशन शो में प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा रहा है। खादी में रंग संयोजन, नए-नए प्रयोग होने से अब खादी पसंद बनती जा रही है। आयोजन समिति के संयोजक गिरधारी सिंह बाफना, राजस्थान के एसीएस उद्योग डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कॉन्फ्रेंस को बहुआयामी और उपादेय बनाते हुए सभी संबंधित को मंथन का मंच उपलब्ध कराया। आयुक्त उद्योग मुक्तानंद अग्रवाल व अन्य अधिकारियों ने सक्रिया भूमिका निभाई जिसका परिणाम रहा कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब पहली बार खादी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तैयार किया गया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">एक समय था जब गांवों में घर-घर में चरखा होता था तो बच्चों को स्कूलों में तकली से कताई सिखाई जाती थी। हांलाकि आज वस्त्र की दुनिया में तेजी से बदलाव आया है पर इको फ्रैण्डली होने के कारण देश विदेश में खादी की तेजी से मांग बढ़ती जा रही है। कातिनों और बुनकरों को मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिलने से धीरे-धीरे गांवों में घरों से चरखे गायब हो गए तो आज की पीढ़ी ने धीरे धीरे इस काम से मुंह मोड़ लिया। खादी की प्रासंगिकता आज और अधिक हो गई है। आवश्यकता है तकनीक में सुधार की, बाजार की मांग के अनुसार खादी वस्त्रों को आकार देने की। आजादी के समय खादी वस्त्र ही नहीं होकर विचार के साथ ही स्वाभिमान का प्रतीक रही है। ऐसे में खादी के वैश्वीकरण के लिए इस क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी लोगों के साथ ही फैशन डिजाइनरों को नई तकनीक और एग्रेसिव मार्केटिंग के साथ आगे आना होगा। यह आयोजन सीधे स्वदेशी अपनाने का आग्रह है तो दूसरी और खादी से जुड़े लाखों कामगारों को रोजगार के बेहतर अवसर, बेहतर तकनीक और उत्साहित करने में सहायक रहा।  इससे ग्रामीण स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिल सकेगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यह आयोजन इसलिए सामयिक हो जाता है कि बुनकरों की माली हालत दिन प्रतिदिन गिरती जा रही है। पुश्तेनी धंधे को छोड़कर बेरोजगार होते जा रहे हैं। जबकि सरकार द्वारा बुनकरों के कल्याण की अनेक योजनाएं चलाई जा रही है। एसीएस उद्योग डॉ. सुबोध अग्रवाल का मानना है कि ऐसे में खादी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर बाजार दिलाने के लिए जयपुर में आयोजित ग्लोबल कॉन्फ्रेंस अपना अलग मायना रखती है। आयोजन को इसलिए अहम माना जा सकता है कि विचारक, इस क्षे़त्र से जुड़े विशेषज्ञ और ब्यूरोक्रेसी की प्रतिवद्धता की झलक देखने को मिली। खादी में नवचार और बाजार मिलने से इन ग्रामोद्योगों से जुड़े लोगों की आय में इजाफा होगा। ऐसे में अब बारी आती है खादी से जुड़े कामगरों और इससे जुड़े अधिकारियों व कार्मिकों की। एक और हमें प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए खादी उत्पादों को जनता की मांग के अनुकूल बनाना होगा, फैशनेवल व आकर्षक बनाने का शोध कार्य जारी रखना होगा वहीं विपणन कला का उपयोग भी करना होगा। उत्पाद की गुणवत्ता तो पहली शर्त है ही। यदि ऐसा होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब खादी अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बन जाएगी।</h6>
<h6 style="text-align:right;"><em>डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</em></h6>
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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2020 23:22:44 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश के हर जिले में खुलेंगे खादी स्टोर</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी पहुंची हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की चेयरपर्सन ने दी जानकारी | Khadi Stores भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। भिवानी पहुंची खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्डÞ की चेयरपर्सन गार्गी कक्कड़ ने कहा कि भाजपा से पहले किसी भी सरकार ने इस बोर्ड़ को बढ़ावा देने के लिए प्रयास नहीं किए। अब खादी और बोर्डÞ को बढ़ावा देकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/khadi-stores-will-open-in-every-district-of-the-state/article-6736"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/30bwn01.jpg" alt=""></a><br /><h2>भिवानी पहुंची हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की चेयरपर्सन ने दी जानकारी | Khadi Stores</h2>
<p><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भिवानी पहुंची खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्डÞ की चेयरपर्सन गार्गी कक्कड़ ने कहा कि भाजपा से पहले किसी भी सरकार ने इस बोर्ड़ को बढ़ावा देने के लिए प्रयास नहीं किए। अब खादी और बोर्डÞ को बढ़ावा देकर रोजगार बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही हर जिला में बोर्डÞ का स्टोर खुलेगा (Khadi Stores) और फैशन शो करवाकर युवाओं को खादी से जोड़ा जाएगा।</p>
<p>बता दें कि खादी एवं ग्रोमोद्योग बोर्डÞ की चेयरमपर्सन गार्गी कक्कड़ पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस में मीडिया से रूबरू हुई। इस दौरान उन्होंने अपने बोर्ड़ के 50 साल पूरे होने पर शुरू की जाने वाली नई योजनाओं की जानकारी दी। साथ ही आरोप लगाया कि अब से पहले किसी भी सरकार ने बोर्डÞ को बढ़ावा देने के लिए एक भी प्रयास नहीं किया। गार्गी ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले पंचकूला में बोर्ड ने अपना स्टोर खोला है। साथ ही जल्द ही हर जिला स्तर पर बोर्ड अपने एक-एक स्टोर खोलेगा।</p>
<h2>जेलों में बंद महिलाओं की मद्द लेगा खादी बोर्ड</h2>
<p>खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की चेयरपर्सन ने बताया कि प्रदेश में लोगों को रोजगार देने व खादी को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड जेलों में बंद महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हं रोजगार देने की नई पहल शुरु करेगा। इस दौरान उन्होंने खादी बोर्ड के माध्यम से रोजगार शुरू करने पर मिलने वाली सब्सिडी जीएसटी के बाद नामात्र या सब्सिडी से भी ज्यादा होने के सवाल पर कहा कि बोर्ड ने सरकार को खादी बोर्ड से जीएसटी हटाने के लिए प्रस्ताव भेजा है और उम्मीद है कि जल्द ही ये प्रस्ताव पास होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि युवा खादी के प्रति आकर्षित है, लेकिन चकाचौंद में विश्वास करता है। ऐसे में बोर्ड जल्द ही खादी पर चर्चा और उसके बाद फैशन शो शुरु करेगा, ताकि खादी को बढ़ावा और लोगों को रोजगार मिले।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Nov 2018 18:03:29 +0530</pubDate>
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