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                <title>मेट्रो स्टेशन के नीचे हुआ गहरा गड्ढा, दो वाहन गिरे</title>
                                    <description><![CDATA[हादसे में आठ लोगों को मामूली चोट लगी नई दिल्ली(एजेंसी)। उत्तरी पूर्वी दिल्ली के मौजपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे सोमवार रात को अचानक दिल्ली जल बोर्ड की पाइप लाइन फटने से सड़क धंस गई। हादसे के वक्त सड़क से गुजर रही एक कार व एक ऑटो सड़क पर बने गहरे गड्ढ़े में जा गिरे। सड़क […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>हादसे में आठ लोगों को मामूली चोट लगी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)</strong>। उत्तरी पूर्वी दिल्ली के मौजपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे सोमवार रात को अचानक दिल्ली जल बोर्ड की पाइप लाइन फटने से सड़क धंस गई। हादसे के वक्त सड़क से गुजर रही एक कार व एक ऑटो सड़क पर बने गहरे गड्ढ़े में जा गिरे। सड़क धंसते ही अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों ने बड़ी मुश्किल के बाद ऑटो और कार में बैठी आठ लोगों को गड्ढे से बाहर निकाला। इस हादसे में आठ लोगों को मामूली चोट लगी है। लेकिन जिला पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने किसी के घायल होने की बात से इंकार किया है। यह हादसा गोकलपुरी से सीलमपुर जाने वाली रोड पर बाबरपुर और मौजपुर लाल बत्ती के बीच में हुआ है। हादसे को देखते हुए पुलिस ने इस मार्ग को बंद कर रूट डायवर्ट कर दिया।</p>
<h2>गड्ढे के कारण सड़क पर भीषण जाम</h2>
<p style="text-align:justify;">गड्ढे के कारण सड़क पर भीषण जाम भी लगा रहा। यह गड्ढा मेट्रो के लिए भी खतर की घंटी हो सकता है। पानी की यह पाइन लाइन यहां से दक्षिणी दिल्ली की ओर जा रही है, इस लाइन के फटने से दक्षिणी दिल्ली के बहुत से इलाकों में पानी की किल्लत हो सकती है। स्थानीय लोगों के अनुसार मौजपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे रात करीब 7:45 बजे दिल्ली जल बोर्ड की पाइप लाइन प्रेशर के साथ फटी। जमीन से कई फुट तक पानी की बौछार ऊपर की और उठने लगी। लेकिन लोगों ने सड़क पर वाहनों की आवाजाही जारी रखी, रात करीब 8:15 बजे विक्टर पब्लिक स्कूल के सामने मेट्रो स्टेशन के नीचे अचानक सड़क का एक बड़ा हिस्सा जमीन में धंस गया।</p>
<h2>थाना पुलिस के अलावा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुुंच गए</h2>
<p style="text-align:justify;">वहां से गुजर रही एक डस्टर गाड़ी और सवारी वाला ऑटो गड्ढे में जा गिरा। हादसे के वक्त ऑटो में चालक समेत करीब पांच संवारियां और कार में दो लोग मौजूद थे। लोगों ने बड़ी मुश्किल से उन सभी को गड्ढे से बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही थाना पुलिस के अलावा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुुंच गए। क्रेन के जरिए गड्ढे में गिरी गाड़ियों को बाहर निकाला गया। हादसे के बाद स्थानीय विधायक व दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने दिल्ली बोर्ड के अधिकारियों को पूरी रात काम जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हो सकता है मेट्रो की खोदाई के कारण पाइप लाइन को नुकसान पहुंचा हो, जिसके चलते यह हादसे हुआ।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jan 2019 08:31:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>महिला क्रिकेट का गहराता संकट</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वरिष्ठ खिलाड़ी मिताली राज को पिछले दिनों टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल से बाहर रखे जाने के बाद मचे बवाल के उस वक्त शांत होने की उम्मीदें जगी थी, जब टीम के कोच रमेश पोवार का करार 30 नवम्बर को खत्म होते ही बीसीसीआई द्वारा उनकी इस पद से छुट्टी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/women-cricket-deep-crisis/article-7004"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/women-cricket.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वरिष्ठ खिलाड़ी मिताली राज को पिछले दिनों टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल से बाहर रखे जाने के बाद मचे बवाल के उस वक्त शांत होने की उम्मीदें जगी थी, जब टीम के कोच रमेश पोवार का करार 30 नवम्बर को खत्म होते ही बीसीसीआई द्वारा उनकी इस पद से छुट्टी कर दी गई थी किन्तु अब जिस प्रकार महिला टीम की मौजूदा कप्तान हरमनप्रीत कौर तथा उपकप्तान स्मृति मंधाना सहित प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य और भारतीय महिला टीम की पूर्व खिलाड़ी डायना एडुल्जी भी खुलकर कोच रमेश पोवार के समर्थन में खड़ी हो गई हैं और इतनी फजीहत होने के बावजूद पोवार ने एक बार फिर जिस तरह कोच पद के लिए फिर से आवेदन किया है, उससे महिला क्रिकेट टीम का विवाद और गहरा गया है और महिला टीम के खिलाड़ियों की आपसी लड़ाई खुलकर सामने आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिताली विवाद के बाद टीम से हटाए गए पोवार को ही कोच बनाए रखने के लिए पिछले दिनों हरमनप्रीत तथा मंधाना ने बीसीसीआई को ईमेल भेजी थी लेकिन बीसीसीआई ने कोच पद के लिए विज्ञापन जारी करते हुए एक समिति बना दी। डायना इस समिति के गठन के खिलाफ थी और पोवार को ही कोच बनाए रखने के लिए दबाव बना रही थी किन्तु सीओए प्रमुख विनोद राय द्वारा उनकी अपील खारिज करने के बाद जिस प्रकार डायना द्वारा उनके खिलाफ भी तीखे तेवर अपनाए गए, उससे महिला क्रिकेट के भीतर पनप रही राजनीति का भी पदार्फाश हो गया है</p>
<p style="text-align:justify;">रमेश पोवार ने कोच पद के लिए पुन: आवेदन किया है और इसका कारण बताया है कि वो उनका समर्थन करने वाली वरिष्ठ खिलाड़ियों हरमनप्रीत तथा मंधाना को ‘नीचा गिराये’जाते नहीं देख सकते थे। उनकी इस टिप्पणी से एक बात और साफ हो गई है कि महिला टीम के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। ऐसे में यह गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया है कि हरमनप्रीत टीम की कप्तान हैं जबकि स्मृति उप कप्तान, फिर भला उन्हें कौन नीचे गिरा रहा था? महिला क्रिकेट के भीतर गहराये इस विवाद से टीम के अंदर व्याप्त गुटबाजी के स्पष्ट संकेत मिले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निश्चित रूप से महिला टीम के इस विवाद से टीम की साख बुरी तरह से प्रभावित हुई है। डायना एडुल्जी ने जिस प्रकार सीओए प्रमुख तथा बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी पर निशाना साधा है, उससे भी विवाद और गहरा गया है। डायना ने सीधे-सीधे बीसीसीआई के सीईओ पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पिछले साल जुलाई माह में नियमों का उल्लंघन कर अनिल कुंबले के इस्तीफे के बाद रवि शास्त्री को कोच नियुक्त किया था। डायना का कहना है कि उन्होंने उस वक्त भी इसके लिए विरोध जताया था क्योंकि रवि शास्त्री के लिए बोर्ड ने अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया था और अब वह महिला टीम के नए कोच के लिए समिति बनाए जाने के बोर्ड के फैसले का पुरजोर विरोध कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा प्रकरण इतना विवादित हो गया है कि इसके चलते महिला क्रिकेट की साख पर लगे ग्रहण को मिटा पाना आसान नहीं होगा। इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल से बाहर रखे जाने पर जब मिताली ने बीसीसीआई को लिखे ई-मेल में कोच पोवार तथा डायना एडुल्जी पर बरसते हुए उन प्रकार पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर उनके कैरियर को बर्बाद करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अपने 20 साल के कैरियर में उन्होंने इतना अपमानित कभी महसूस नहीं किया तो खेल जगत में हड़कम्प मच गया। मिताली ने ट्वीट भी किया कि उनकी देशभक्ति पर संदेह जताकर और खेल के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाकर उनकी 20 वर्षों की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कोच पोवार ने मिताली से अपने तनावपूर्ण रिश्तों को स्वीकार करते हुए मिताली पर कोचों पर दबाव डालने, उन्हें ब्लैकमेल करने, पारी की शुरूआत करने का अवसर नहीं दिए जाने पर दौरा बीच में छोड़ने की धमकी देने, टीम के बजाय अपने निजी रिकॉर्ड के लिए खेलने, टीम प्लान को नहीं मानने के आरोप मढ़े थे। उनका कहना था कि खराब स्ट्राइक रेट के कारण मिताली को इंग्लैंड के खिलाफ मैच से बाहर किया गया क्योंकि टीम प्रबंधन पिछले मैच में जीत दर्ज करने वाली टीम को ही कायम रखना चाहता था लेकिन पोवार इस बात का कोई जवाब नहीं दे सके कि आयरलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मैचों में मिताली का स्ट्राइक रेट आड़े क्यों नहीं आया?</p>
<p style="text-align:justify;">उन दोनों मैचों में मिताली ने अर्धशतक जड़े थे और उन्हें प्लेयर आॅफ द मैच चुना गया था। मिताली के इस आरोप का भी किसी के पास कोई जवाब नहीं था कि अंतिम एकादश की घोषणा प्राय: एक दिन पहले ही की जाती है जबकि मिताली को टॉस से ठीक पहले बताया गया कि वो टीम का हिस्सा नहीं है। पोवार के आरोप हैरान करने वाले इसलिए भी लगे क्योंकि उनसे पहले किसी ने भी मिताली पर इस तरह के आरोप नहीं लगाए। मिताली जैसी सीनियर खिलाड़ी को दो बार प्लेयर आॅफ द मैच बनने, विश्व कप में खेले तीन मैचों में 103 रन के स्ट्राइक रेट तथा 53.5 की औसत से दो अर्धशतक के साथ 127 रन बनाने और पूरी तरह फिट होने के बाद भी अचानक सेमीफाइनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है और टीम बुरी तरह से मैच हार जाती है तो कोच सहित चयनकतार्ओं पर भी सवाल तो उठने ही थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मिताली हों या हरमनप्रीत, दोनों ही महिला टीम की दिग्गज खिलाड़ी हैं और टीम की जान हैं, इसलिए अगर ऐसी प्रतिभाशाली वरिष्ठ खिलाड़ियों में किसी को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव किया जाता है तो यह टीम के सुखद भविष्य के लिए उचित नहीं। बेहतर होता कि कोच एक वरिष्ठ खिलाड़ी को बेवजह टीम से बाहर रखने के बजाय टीम की वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच पनपते मतभेदों तथा गुटबाजी को दूर करने की कोशिश करते ताकि भारतीय महिला क्रिकेट पूरी दुनिया में अपना परचम लहराता रहता। इस प्रकार के विवादों से न टीम का कोई भला हो सकता है और न ही विवादों में घिरी ऐसी टीम के प्रति खेल प्रेमियों का जुनून बरकरार रह सकता है। इसलिए जरूरत है कि सीओए तथा बीसीसीआई अब ऐसे सख्त कदम उठाएं, जिससे भारतीय महिला क्रिकेट में गहराये इस संकट का तत्काल कोई समाधान संभव हो और भविष्य में इस प्रकार के विवाद न पनपने पाएं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>योगेश कुमार गोयल</strong></p>
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                <pubDate>Sun, 16 Dec 2018 20:22:30 +0530</pubDate>
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                <title>नदियों पर गहराता संकट</title>
                                    <description><![CDATA[प्राचीन समय में भारत अपनी कई महान नदियों के कारण विश्व विख्यात था। प्राचीनकाल में नदियों (Deep crisis on rivers) के किनारे ही हमारी मानव सभ्यताओं का जन्म व विकास हुआ था। नदियां केवल धरती के प्राण ही नहीं हैं बल्कि मानव संस्कृतियों की जननी भी हैं। हमारे पूर्वजों के मन में नदियों के प्रति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/deep-crisis-on-rivers/article-6862"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/rivar.jpg" alt=""></a><br /><h2>प्राचीन समय में भारत अपनी कई महान नदियों के कारण विश्व विख्यात था।</h2>
<p style="text-align:justify;">प्राचीनकाल में नदियों <strong>(Deep crisis on rivers)</strong> के किनारे ही हमारी मानव सभ्यताओं का जन्म व विकास हुआ था। नदियां केवल धरती के प्राण ही नहीं हैं बल्कि मानव संस्कृतियों की जननी भी हैं। हमारे पूर्वजों के मन में नदियों के प्रति अपार श्रद्धा व सम्मान का भाव विद्यमान था। वे नदियों को देवी-देवता मानकर उनकी पूजा किया करते थे। नदियों की महानता से प्रसन्न होकर ऐतिहासिक काल में कई महर्षियों ने नदी पुराण व ग्रंथों की रचना भी की हैं। उस समय नदियों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं मानी जाती थी। क्योंकि प्राचीनकाल में नदियों का केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व ही नहीं था बल्कि ये सामाजिक और आर्थिक महत्व को भी समेटे हुए थी। इन्हीं महत्वों को उजागार करने के लिए कई मेलों व त्योहारों का आयोजन भी नदियों को केंद्र में रखकर किया जाता था। प्राचीन समय में भारत अपनी कई महान नदियों के कारण विश्व विख्यात था।</p>
<h2>देश की 62 फीसदी नदियां भयंकर रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं।</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत की धरती पर कई नदियां खेला करती थी और उनके जल से हजारों खेतों में फसलें खिला करती थीं। प्राचीन भारत को सोने की चिड़िया का गौरव भी इन्हीं नदियों की बदौलत हासिल था। लेकिन बदलते दौर में नदियों के मूल्यों और अस्मिता के साथ छेड़छाड़ हुई। उनके निर्मल व पवित्र जल में जहर घोला गया और उन्हें मृतप्राय सा बनाकर छोड़ दिया गया। यही कारण है कि आज देश में तकरीबन 223 नदियों का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि उनके पानी में नहाने या पीने पर बीमारी का खतरा हो सकता है। देश की 62 फीसदी नदियां भयंकर रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं। इनमें गंगा और यमुना समेत इनकी सहायक नदियां भी शामिल हैं। निश्चित ही शहरीकरण और औद्योगीकरण ने नदियों के प्राण हरने का कार्य किया है। कृषि अपशिष्ट, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक ने नदियों के जल को सर्वाधिक क्षति पहुंचायी है।</p>
<h2>परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक अपशिष्ट, भारी धातु, प्लास्टिक की थैलियां व ठोस अपशिष्ट के साथ ही पूजा का सामान, फूल, मालाओं जैसी वस्तुओं के कारण नदियों की अविरल धारा में रुकावट आयी है। वहीं नदियों के किनारे धार्मिक अनुष्ठान करने, पशुओं के नहाने, मानव द्वारा मल-मूत्र त्यागने के कारण नदियां का जल प्रदूषित हुआ है। आज देश में नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए तो कई योजनाएं और परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं पर नदियों को प्रदूषित करने वाले कारकों पर किसी तरह की रोक लगाने को लेकर प्रयास होते नहीं दिख रहे हैं। इसी वजह से जहां एक ओर नदियां साफ हो रही हैं तो दूसरी ओर डाला जा रहा कचरा उन्हें फिर से गंदा भी कर रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> नदियों में औषधीय गुण फिर आएं इसके लिए किनारों पर औषधीय पेड़ रोपित किये जाएं</h2>
<p style="text-align:justify;">जनाओं के बूते देश की नदियों का जल स्वच्छ हो जाएगा? हमारे लिए नदी प्रबंधन का सिद्धांत यह होना चाहिए कि नदी को कोई खराब ही नहीं करें। यदि ऐसा होगा तो नदी को स्वच्छ करने के नाम पर करोड़ों का धन व्यय करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नदियों में जैव विविधता लौटाने के लिए नदियों के पानी में जैव आॅक्सीजन की मांग घटानी होगी ताकि नदियों को साफ करने वाले जलीय जीव जिंदा रह सकें। नदियों में औषधीय गुण फिर आएं इसके लिए किनारों पर औषधीय पेड़ रोपित किये जाएं। इसके अतिरिक्त खेती और घरों में डिटर्जेंट आदि में इस्तेमाल हो रहे खतरनाक रसायन और कीटनाशक से नदियों को बचाना होगा। अस्तित्व के लिए जूझ रही नदियों को जीवित नदी का दर्जा देने से अधिक जरूरी है उन्हें जीवित रखना। यह काम केवल खानापूर्ति से नहीं होगा बल्कि इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति व ईमानदारी से प्रयास करने की जरूरत है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/deep-crisis-on-rivers/article-6862</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Dec 2018 08:35:54 +0530</pubDate>
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