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                <title>Horror is the data of deaths due to air pollution - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Horror is the data of deaths due to air pollution RSS Feed</description>
                
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                <title>Air Pollution: जहरीली होती हवा बन रही जानलेवा, जिम्मेवार कौन ?</title>
                                    <description><![CDATA[Air Pollution: जीवन के लिए हवा का होना अनिवार्य है। हवा जब जहरीली हो जाती है तो जीवन के लिए खतरा बन जाती है। यह खतरा किसी एक विशेष के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए होता है, इसमें वो भी नहीं बच सकते जो प्रदूषण फैलाते हैं। इसीलिए प्रदूषण के लिए एक दूसरे को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/poisonous-air-is-becoming-deadly-who-is-responsible/article-54452"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/air-pollution-situation-in-delhi-is-serious-on-friday.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Air Pollution: जीवन के लिए हवा का होना अनिवार्य है। हवा जब जहरीली हो जाती है तो जीवन के लिए खतरा बन जाती है। यह खतरा किसी एक विशेष के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए होता है, इसमें वो भी नहीं बच सकते जो प्रदूषण फैलाते हैं। इसीलिए प्रदूषण के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने की बजाए हर किसी को प्रदूषण न करने का ईमानदारी से प्रयास करना होगा। सरकारों का फर्ज है कि प्रदूषण रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं क्योंकि प्रदूषण कंट्रोल करने की सरकारी संस्थाएं भ्रष्टाचार के अड्डे बन गए हैं। Poisonous Air</p>
<h3>प्रदूषण जांच केंद्र भी मात्र औपचारिकता पूरी करते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">घूस लेकर किसी भी उद्योग को प्रदूषण का सर्टीफिकेट दे दिया जाता है। वाहनों की प्रदूषण जांच केंद्र भी मात्र औपचारिकता पूरी करते हैं, उन्हें अपनी फीस से मतलब होता है। अगर ऐसा नहीं होता तो सड़कों पर धुंआ उगलते वाहन कभी दिखाई ही न दें। फसलों के अवशेष, पराली जलाने की घटनाएं कुछ कम जरूर हुई हैं लेकिन खत्म नहीं हुई। हालांकि सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन योजना के लिए 3333 करोड़ रूपए की राशि भी जारी की है, जिसके तहत किसानों को फसल अवशेष निस्तारण के लिए मशीनों पर सब्सिडी दी जा रही है। जिसका धरातल पर असर भी दिखा है क्योंकि हरियाणा, पंजाब में ही पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी देखी गई।</p>
<h3>विश्व के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 6 शहर</h3>
<p style="text-align:justify;">जो राहत की बात है लेकिन ये घटनाएं 100 प्रतिशत खत्म होनी चाहिए। विश्व के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 6 शहर होना शर्म का विषय है। इन छह शहरों में दिल्ली और गाजियाबाद को छोड़ दें तो चार शहर हरियाणा के हैं जिनमें फरीदाबाद, पलवल, गुड़गांव और हिसार शामिल है। आखिर कब तक हम जहरीली हवा में सांस लेते रहेंगे। कब तक हम अपने खुद के प्राणों के दुश्मन बनते रहेंगे। प्रदूषण नियंत्रण करना सरकारों की भी जिम्मेदारी है लेकिन उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदारी हर इंसान की भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हर इन्सान प्रदूषण के प्रति जागरूक होगा और प्रदूषण नहीं फैलाएगा तब ही हम स्वच्छ हवा में सांस ले सकेंगे। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर किसी को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए सफाई अभियान, पौधारोपण, शौचालय बनवाना, प्रदूषण रहित गाड़ियों का इस्तेमाल करना, फसल अवशेष पराली इत्यादि न जलाना और कम दूरी के लिए मोटर वाहन का इस्तेमाल न करके पैदल या साईकिल का इस्तेमाल करना इत्यादि क्रांतिकारी अभियान चलाए हुए हैं। Poisonous Air</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="प्रदूषण एजेंसियां प्रदूषण के सही आंकड़े नहीं करती प्रकट!" href="http://10.0.0.122:1245/pollution-agencies-do-not-disclose-correct-pollution-figures/">प्रदूषण एजेंसियां प्रदूषण के सही आंकड़े नहीं करती प्रकट!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 21:31:31 +0530</pubDate>
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                <title>डरावने है वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के आंकड़े</title>
                                    <description><![CDATA[सियासी राजनीति के शोर में देश में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के आंकड़े न केवल चिंताजनक अपितु बेहद डरावने हैं। एक ही साल में 12 लाख से अधिक मौतें चौंकाने वाली है। इसका साफ मतलब है देशवासी वायु प्रदूषण के जानलेवा खतरे से अभी तक सावचेत नहीं हुए है। वायु प्रदूषण को लेकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/horror-is-the-data-of-deaths-due-to-air-pollution/article-6906"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/horror-is-the-data-of-deaths-due-to-air-pollution.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सियासी राजनीति के शोर में देश में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के आंकड़े न केवल चिंताजनक अपितु बेहद डरावने हैं। एक ही साल में 12 लाख से अधिक मौतें चौंकाने वाली है। इसका साफ मतलब है देशवासी वायु प्रदूषण के जानलेवा खतरे से अभी तक सावचेत नहीं हुए है। वायु प्रदूषण को लेकर हाल ही में जारी एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारत में वायु प्रदूषण के कारण 12.4 लाख लोगों की मौत हो गयी जो कि 70 वर्ष से कम उम्र के थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण के कारण लोगों की औसत आयु करीब 1.7 वर्ष घट गयी है। विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश हैं जहां पीएम 2.5 का लेवल हर वर्ष विश्व स्तर पर सबसे ज्यादा होता है । भारत का एक भी ऐसा राज्य नहीं था जहां पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से कम हो।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल वायु प्रदूषण के कारण देश में 12.4 लाख लोगों की जान चली गई, जिसमें से 12,322 दिल्ली में थीं। दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर सबसे ज्यादा रहा, वहीं इसके बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश रहा और फिर बिहार, हरियाणा और राजस्थान। शोध के मुताबिक 6.7 लाख मौतें घर के बाहर वायु प्रदूषण के कारण हुईं, वहीं 4.8 लाख लोगों ने घर में वायु प्रदूषण के कारण अपनी जान गंवाई। दुनिया की कुल आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है और भारत में वायु प्रदूषण से समय से पहले मृत्यु और सेहत में गिरावट 26 प्रतिशत लोगों में हुई। वायु प्रदूषण का बड़ा स्रोत पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम को माना गया है, जिसमें सल्फेट, नाइट्रेट और काले कार्बन जैसे प्रदूषक – इसमें घरों, उद्योग, कृषि और परिवहन द्वारा ऊर्जा का अक्षम उपयोग शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, धरती पर 10 लोगों में से नौ लोग प्रदूषित हवा सांस के रूप में लेते हैं, और इससे हर साल 7 मिलियन लोगों की मौत होती है. इसमें एशियाई और अफ्रीकी देशों में ज्यादा मामले आते हैं। हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर से लगभग एक चैथाई मौत की वजह वायु प्रदूषण ही होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण का खतरा अब घर-घर मंडराने लगा है। इसने जल्द ही संक्रामक महामारी का रूप धारण कर लिया है । सरकारी जागरूकता के अभाव में वायु प्रदूषण से देश भर में लाखों लोग पीड़ित हो रहे हैं और सैंकड़ों अकाल मौत के शिकार हो गए हंै। एक ताजा सर्वे रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले चार सालों में चार करोड़ से भी अधिक लोग तेज साँस के संक्रमण के शिकार हो रहे है। इस अवधि में 12 हजार 200 लोग वायु प्रदूषण से जूझते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए मगर सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार सरकारों को चेताया मगर सरकार की कुम्भकर्णी निंद्रा भंग नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कमजोर दिल वालों के लिए वायु प्रदूषण नुकसानदायक साबित हो रहा है। वायु प्रदूषण दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों की जान भी ले सकता है। एक नये अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण की वजह से इंसानों में गुर्दे की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है और गुर्दे खराब भी हो सकते हैं। देश की राजधानी दिल्ली में हवा मानक स्तर से ज्यादा है। दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 हमारे देश के हैं। भारत में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण दिल्ली में है। दिल्ली में सांस के रोगियों की संख्या और इससे मरने के मामले सर्वाधिक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय ने भी प्रदूषण पर अपनी चिंता जाहिर की है।<br />
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते खतरे के कारण दिवाली पर पटाकों की बिक्री पर रोक लगाई थी हालाँकि इस रोक का कोई ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। पर्यावरण के नष्ट होने और औद्योगीकरण के कारण प्रदूषण की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है जिसके फलस्वरूप मानव जीवन दूभर हो गया है। महानगरों में वायु प्रदूषण अधिक फैला है। वहां चौबीसों घंटे कल-कारखानों और वाहनों का विषैला धुआं इस तरह फैल गया है कि स्वस्थ वायु में सांस लेना दूभर हो गया है। यह समस्या वहां अधिक होती हैं जहां सघन आबादी होती है और वृक्षों का अभाव होता है।</p>
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                <pubDate>Mon, 10 Dec 2018 19:57:07 +0530</pubDate>
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