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                <title>insult - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कश्मीर पर चीन की किरकरी</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में चीन की एक बार फिर किरकिरी हुई है। कश्मीर मामले को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस ने चीन का सहयोग नहीं दिया। अपनी किरकरी होने के बाद अब चीन दुहाई दे रहा है कि भारत-पाक संबंधों को ठीक रखने के लिए उसने संयुक्त राष्ट्र में मुद्दा उठाया है। दरअसल यह चीन की चाल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/chinas-insult-on-kashmir-case/article-12636"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/kashmir-case.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र में चीन की एक बार फिर किरकिरी हुई है। कश्मीर मामले को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस ने चीन का सहयोग नहीं दिया। अपनी किरकरी होने के बाद अब चीन दुहाई दे रहा है कि भारत-पाक संबंधों को ठीक रखने के लिए उसने संयुक्त राष्ट्र में मुद्दा उठाया है। दरअसल यह चीन की चाल है कि वह दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव कायम रखने के लिए भारत विरोधी देशों के साथ मित्रता को सुदृढ़ करने के प्रयास कर रहा है दूसरी तरफ भारत के विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद ने चीन को स्पष्ट किया है कि भारत-चीन को मिलकर चलने के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं है। अमेरिका के साथ आर्थिक जंग में चीन के लिए भारत बड़ा बाजार है। चीन के साथ सटी सीमाओं पर हुए विवादों के बावजूद भारत ने संयम रखा, जिससे यह स्पष्ट है कि भारत अपने पड़ोसी देश चीन की महत्वता को समझता है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">आतंकवाद को छोड़कर भारत का पाकिस्तान के साथ कोई विरोध ही नहीं है जहां तक कश्मीर मामले का सम्बन्ध है शिमला समझौता और लाहौर घोषणा-पत्र इस बात के प्रमाण हैं कि पाकिस्तान भी इस मुद्दे को दो देशों का आपसी मुद्दा ही समझता है। इन समझौतों के बावजूद चीन कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, जो इस मुद्दे को सुलझाने की बजाय उलझाएगा। यदि चीन को भारत-पाक सम्बंधों में अमन-शान्ति की चिंता है तब भी भारत का पलड़ा भारी है। भारत सरकार ने कश्मीर सहित हर मुद्दे पर बातचीत के लिए पहली शर्त ही आतंकवाद को समाप्त करने की शर्त रखी है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">लोकतंत्र व विकास के युग में गरीब से गरीब देश भी किसी हिंसा के सामने झुकने को तैयार नहीं। आतंकवादी हिंसा के चलते बातचीत शुरू करने का सीधा सा मतलब आतंकवाद के आगे झुकना है, जो भारत के सिद्धांतों के विपरीत है। दरअसल चीन का रवैया अमन की चिंता वाला कम व तनाव बढ़ाने वाला ज्यादा है। नि:संदेह चीन का कश्मीर मामले में दोगला राग चीन के लिए लाभप्रद हो सकता है लेकिन युद्ध उस व्यापार और आर्थिकता के खिलाफ है जिसके लिए चीन अमेरिका जैसे देशों के साथ जूझ रहा है। चीन ने न केवल कश्मीर मामले में बल्कि आतंकवाद के मामले में भी पाकिस्तान का बचाव किया है लेकिन हालात यह हैं कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद का समर्थन या बचाव करना अब आसान बात नहीं रहा। आतंकवाद को संरक्षण देने पर पाकिस्तान के बाद अब पाकिस्तान का साथ देने पर चीन की भी किरकिरी होने लगी है। चीन दोहरी नीति पर चलने की बजाय स्पष्ट व ठोस दृष्टिकोण अपनाए।</h4>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2020 20:58:53 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय लोकतंत्र के मंदिरों को अपमानित नहीं करें मायावती</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री कु. मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर एक बार पुन: अपने-आपको दलित मसीहा के तौर पर स्थापित करने की जद्दोजहद छेड़ दी है। जब से देश में राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा तत्पश्चात कांगे्रस ने दलित उम्मीदवारों पर दांव खेला है, दलित कार्ड खेलने वाले अन्य कई नेता व दल बेचैन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री कु. मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर एक बार पुन: अपने-आपको दलित मसीहा के तौर पर स्थापित करने की जद्दोजहद छेड़ दी है। जब से देश में राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा तत्पश्चात कांगे्रस ने दलित उम्मीदवारों पर दांव खेला है, दलित कार्ड खेलने वाले अन्य कई नेता व दल बेचैन हो गए हैं। देश की आजादी के बाद संविधान निर्माण के वक्त संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भारत के शोषित, दबे-कुचले लोगों के लिए कुछ विशेष अवसर जोड़ने के लिए संविधान में आरक्षण की नीति को तैयार किया। चूंकि डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्वयं एक दबे-कुचले परिवार में जन्मे थे, उन्हें अहसास था कि तब के भारतीय समाज में शोषित व दबा-कुचला होना कितना बड़ा अभिशाप था।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने भी तब ऐसे करोड़ों भारतीयों को हरिजन कहकर पुकारा था। भारतीय समाज में पुरानी शासन व अर्थव्यवस्था जाति आधारित थी, जहां किसी भी व्यक्ति के लिए जन्म पूर्व ही निर्धारित था कि किसे क्या काम करना है एवं उसके अधिकार कर्त्तव्य क्या रहेंगे। निश्चित रूप से भारत के संविधान में ऐसे शोषित व दबे-कुचले वर्ग के लिए कुछ विशेष स्थान, अवसर उपलब्ध करवाया जाना निहायत ही जरूरी था। परंतु डॉ. भीमराव अंबेडकर की इस स्वस्थ सोच, एवं व्यवस्था परिवर्तन की नीति को सत्ता लोलुप नेताओं ने अपने वोट बैंक का अचूक अस्त्र बना लिया, जिसे कि अब ये नेता भारतीय राजनीति में हर मंच पर, हर चुनाव में अपने लिए एक ढाल की तरह अजमाने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कु. मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया कि वह दलितों एवं पीड़ितों के लिए आवाज उठाना चाहती हैं, क्योंकि देश की संसद उसे महज तीन मिनट का ही समय दे रही है, यह दलितों के साथ ज्यादती है वगैरह-वगैरह। यहां इस्तीफा देकर मायावती साफ-साफ राजनीतिक नौटंकी कर रही हैं। पूरे देश से पहले उत्तरप्रदेश की ही बात कर ली जाए, जहां कु.मायावती को राज्य के दलितों सहित अन्य वर्गों ने एक नहीं, तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, वहां दलितों के लिए ये नेता इतना भी नहीं कर पाई कि लोग दो जून की रोटी को सम्मानजनक ढंग से कमा कर खा पाएं। 15 वर्ष के करीब इस दलित नेता पूरा शासन चलाने का समय दिया गया, फिर भी वह महज तीन मिनट की दुहाई दे रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं, भारतीयों ने अपने सर्वोच्चय पद के लिए दलित नेताओं को उम्मीदवार बनाया, जिनमें एक अब भारत के राष्ट्रपति होंगे, ऐसे में मायावती का यह आरोप कि उन्हें दलितों की बात रखने के लिए राज्यसभा में वक्त नहीं दिया जा रहा, महज राजनीतिक पैंतरा ही कहा जा सकता है। कु. मायावती की असलियत यह है कि दलित राजनीति के नाम पर इस नेता ने करोड़ों रुपए का चंदा इकट्ठा किया है। गरीबों के चंदे से एवं गरीबों द्वारा अपना नेता चुन लिए जाने पर भी मायावती ने उनके लिए कुछ नहीं किया और स्वयं राजसी जीवन जी रही हैं। कु. मायावती को यदि अपना खोया हुआ राजनीतिक जनाधार पाना है, तब वह इसके लिए ईमानदार होकर सड़कों एवं सदन में दलित वर्ग के लिए संघर्ष करें, न कि भारतीय लोकतंत्र के पवित्र मंदिरों लोकसभा व राज्यसभा को अपमानित करें, जिनमें कि सवा सौ करोड़ भारतीयों की आस्था है, जोकि भारत के गौरव का प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2017 05:41:20 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘तीन तलाक महिलाओं का सबसे बड़ा अपमान’</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री ने पठानकोट में किया संबोधित PathanKot, SachKahoon News:  केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने कहा कि हमारे देश में जहां महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाता है वहीं देश में समाज का एक वर्ग फोन पर ही तीन बार तलाक-तलाक-तलाक बोल कर महिला को तलाक दे देता है। यह महिलाओं का सबसे बड़ा अपमान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/biggest-insult-of-three-divorced-women/article-583"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/07-1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>केंद्रीय मंत्री ने पठानकोट में किया संबोधित</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>PathanKot, SachKahoon News:</strong>  केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने कहा कि हमारे देश में जहां महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाता है वहीं देश में समाज का एक वर्ग फोन पर ही तीन बार तलाक-तलाक-तलाक बोल कर महिला को तलाक दे देता है। यह महिलाओं का सबसे बड़ा अपमान है। निरंजन ज्योति भाजपा के महिला मोर्चा के सम्मेलन को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि भाजपा में महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाता है। केंद्र सरकार महिला उत्थान के लिए कई योजनाएं चला रही है। सम्मेलन में पंजाबभर से महिला कार्यकर्ता पहुंची हैं।</p>
<p><strong>भाजपा राज में होगा उत्थान</strong><br />
महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि देश में महिलाओं की संख्या 50 फीसद है। इसके बावजूद महिलाएं पीछे हैैं। कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला उत्थान के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता व महिला सशक्तीकरण पर अटल व मोदी की सरकार के अलावा किसी भी सरकार ने कोई भी काम नहीं किया है। महिलाओं व बेटियों के संरक्षण व सम्मान के लिए मोदी सरकार दर्जनों योजनाएं चला रही है। यदि महिलाओं के आंसू पोंछने का काम किसी ने किया है तो वह प्रधानमंत्री मोदी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Dec 2016 22:53:38 +0530</pubDate>
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