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                <title>सीएम अमरिंदर ने शिअद को केंद्र से गठबंधन तोड़ने की चुनौती दी</title>
                                    <description><![CDATA[कैप्टन अमरिंदर ने जारी बयान में कहा कि शिअद को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होना होगा क्योंकि कानून को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने में शिअद शामिल रहा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cm-amarinder-challenges-siyad-to-break-alliance-with-center/article-12646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/cm-amarinder-captain.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सीएए कानून को पास कराने में शामिल थी शिअद (CM Amarinder Captain)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)</strong>। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के इस दावे को हास्यास्पद करार दिया कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर मतभेदों के कारण वह दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रही और चुनौती दी कि पार्टी केंद्र से संबंध तोड़े। कैप्टन अमरिंदर ने जारी बयान में कहा कि शिअद को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होना होगा क्योंकि कानून को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने में शिअद शामिल रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिअद को सीएए मुस्लिम विरोाी लगता है ते राज्यसभा और लोकसभा में पार्टी ने समर्थन क्यों किया?</h3>
<p style="text-align:justify;">कैप्टन ने अकाली नेताओं से सवाल किया,‘क्यों नहीं केंद्र में मंत्री पद छोड़ कर आप देशवासियों को दिखा देते कि आप सचमुच विभाजनकारी और विनाशकारी सीएए के खिलाफ हैं? मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि शिअद को सीएए मुस्लिम विरोाी लगता है</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ते राज्यसभा और लोकसभा में पार्टी ने समर्थन क्यों किया?</li>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली से पहले शिअद हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी भाजपा से अलग चुनाव लड़ा था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसलिए सीएए पर मतभेदों को कारण बताना स्वीकार्य नहीं है ।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि सच्चाई यही है कि शिअद ने महसूस कर लिया है कि दिल्ली में उनका कोई जनाधार नहीं है ।</li>
<li style="text-align:justify;">पार्टी एक सीट भी नहीं जीत सकती।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">या फिर भाजपा उन्हें मांगी गई संख्या की सीटें देने को तैयार नहीं है जिससे उन्होंने यह निर्णय किया। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल पर सीएए को लेकर विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि अकालियों का राष्ट्रीय महत्व के बड़े मुद्दे पर सैद्धांतिक रुख नहीं है।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2020 16:10:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बीजेपी के साथ दिल्ली में गठबंधन करेगी जेजेपी!</title>
                                    <description><![CDATA[उम्मीद है दोनों पार्टियां दिल्ली में मिलकर चुनाव लड़ेंगी। दिल्ली में दोनों पार्टियों के गठबंधन का कोई ना कोई रास्ता जरुर निकलेगा। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को हराने के लिए सत्ता बीजेपी हासिल करे और उसमें जजपा का सहयोग रहेगा, ऐसा मेरा मानना है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/jjp-will-combine-with-bjp-in-delhi/article-12467"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/alliance.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सीएम खट्टर ने दिए संकेत (Alliance)</h1>
<p><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)।</strong> प्रदेश की नई-नवेली राजनैतिक पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) (Alliance) हरियाणा में भागीदारी में ही सही, लेकिन सत्ता का स्वाद चख रही है। वहीं लोगों से मिल रहे समर्थन को देखते हुए जेजेपी अपने विस्तार में जुट गई है और दिल्ली विधानसभा चुनावों में कूदने की तैयारी कर ली है। जेजेपी के अग्रेसिव स्टेप्स को भांपते हुए बीजेपी के साथ दिल्ली में दोनों का गठबंधन हो सकता है। बता दें कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन के संकेत दिये हैं। कल भी जेजेपी की तरफ से दुष्यंत चौटाला की बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात हुई थी।</p>
<p>सीएम मनोहर लाल ने बताया कि जेजेपी के नेताओं की कल केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात हुई है। उम्मीद है दोनों पार्टियां दिल्ली में मिलकर चुनाव लड़ेंगी। दिल्ली में दोनों पार्टियों के गठबंधन का कोई ना कोई रास्ता जरुर निकलेगा। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को हराने के लिए सत्ता बीजेपी हासिल करे और उसमें जजपा का सहयोग रहेगा, ऐसा मेरा मानना है।</p>
<h3>जेजेपी ने अजय चौटाला पर छोड़ा फैसला</h3>
<p>इस बाबत जेजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने साफ कर दिया था कि बीजेपी के साथ उनके गठबंधन के रास्ते खुले हैं लेकिन इसका अंतिम फैसला पार्टी के संस्थापक अजय चौटाला करेंगे।</p>
<h3>जेजेपी माँग रही 20 सीटें, बीजेपी करेगी 5 आफर</h3>
<ul>
<li>सूत्रों का मानना है कि बीजेपी यदि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए जेजेपी के साथ गठबंधन करती है ।</li>
<li>तो ज्यादा से ज्यादा पाँच सीटें ही जेजेपी को आफर होंगी।</li>
<li>वहीं जेजेपी कम से कम 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में जुटी है।</li>
<li>देखना यह होगा कि यह गठबंधन कितनी सीटों पर तय होगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 20:40:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र की हलचल से प्रभावित होगी गठबंधन की राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के गठबंधन में जो कुछ हुआ उसे सारे देश ने देखा। शिवसेना को कुर्सी की चाहत और महत्वाकांक्षा के चलते गठबंधन तार-तार हो गया। जबकि लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर अच्छी खासी सीटें बटोरी थी। दोनों दल पिछले लगभग तीन दशकों से एक साथ थे। जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/janata-party-and-shiv-sena-alliance/article-11139"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/bjp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="st">महाराष्ट्र</span> में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के गठबंधन में जो कुछ हुआ उसे सारे देश ने देखा। शिवसेना को कुर्सी की चाहत और महत्वाकांक्षा के चलते गठबंधन तार-तार हो गया। जबकि लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर अच्छी खासी सीटें बटोरी थी। दोनों दल पिछले लगभग तीन दशकों से एक साथ थे। जो कुछ भी महाराष्टÑ में हुआ है उसका असर देशभर में गठबंधन की राजनीति पर जरूर पड़ेगा। महाराष्टÑ से जो राजनीतिक संकेत निकलकर बाहर जा रहे हैं, उसके मुताबिक अब गठबंधन के लिए पूर्व की शर्तों का कड़ाई से पालन और उसका लिखित दस्तावेज शायद आने वाले दिनों में अनिवार्य हो जाएगा। गठबंधन की राजनीति की पुरानी परंपरा देश में है।</p>
<p style="text-align:justify;">1990 के दशक में राजनीतिक संघवाद और आर्थिक उदारीकरण के मामले में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में जो परिवर्तन हुए हैं, उनका महत्वपूर्ण पहलू 1989 से नई दिल्ली में मौजूद गठबंधन सरकारें और अल्पमत सरकारें भी हैं। भारत में गठबंधन और अल्पमत सरकारें संसदीय व्यवस्था की उस नाकामी का नतीजा हैं, जिसके तहत वह सरकार बनाने के लिए निचले सदन (लोकसभा) में पूर्ण बहुमत हासिल करने के पैमाने पर खरी नहीं उतर पाती है। 1989 के बाद से कोई भी पार्टी सदन में बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। केवल 2014 और 2019 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 282 बहुमत से भी ज्यादा सीटें हासिल कर पाई। 2019 में एनडीए को ऐतिहासिक बहुमत मिला।</p>
<p style="text-align:justify;"><span class="st">महाराष्ट्र</span> से पूरे देश को यही संकेत मिल रहा है। इसका सीधा असर अभी झारखंड की राजनीति में देखने को मिल रहा है। यहां दोनों परस्परविरोधी खेमा इसी गठबंधन की राजनीति की गांठ सुलझाने में व्यस्त हैं। और यह गांठ हैं कि यह सुलझाने की बजाए और उलझती चली जा रही है। भाजपा विरोधी गठबंधन की बात करें तो इसमें से पहले ही झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष खुद को अलग कर चुके हैं। बदली हुई परिस्थितियों में अचानक ही इस दल के नेता बाबूलाल मरांडी किसी धूमकेतु की तरह झारखंड की राजनीति में चमकने लगे हैं। झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें आज भी याद किया जा रहा है, यह अपने आप में बड़ी बात है। झारखंड विकास मोर्चा को अपने पाले में रखने की भरसक कोशिश की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन जो लोग बाबूलाल मरांडी को जानते हैं, उन्हें अच्छी तरह पता है कि एक बार किसी फैसले पर पहुंचने के बाद वह उससे नहीं डिगते। इस खेमा में असली संघर्ष झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच है। दोनों के बीच अनेक सीटों पर तनातनी है। महाराष्टÑ से जो कुछ निकलकर सामने आया है, उसका बेहतर निष्कर्ष यह है कि बाद में झगड़ा करने के पहले ही वे अपने विवादों को चुनाव से पहले ही निपटा लेना चाहते हैं। यह भी महाराष्टÑ से मिले संकेतों का ही नतीजा है कि राजनीतिक दल अब चुनावी लाभ के साथ साथ भावी परिणामों की चिंता पहले से करने लगे हैं।दूसरे खेमा में भारतीय जनता पार्टी और अल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के बीच सीटों की खींचतान है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं झारखण्ड में एनडीए के सहयोगी रामविलास पासवान की लोकशक्ति जन पार्टी ने भी गठबंधन से अलग होकर अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है। पार्टी 81 में से 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लोजपा प्रत्याशियों की पहली सूची जारी भी कर चुकी है। मतलब साफ है कि महाराष्टÑ की तर्ज पर गठबंधन के दल सारी स्थिति साफ करना चाहते हैं, ताकि बाद में कोई विवाद की स्थिति पैदा न हो। भाजपा इस मुद्दे पर महाराष्टÑ से मिले झटके से उबर नहीं पायी है, लिहाजा वह सरकार चलाने के लिए दोबारा से आजसू पर तो कतई निर्भर नहीं रहना चाहती। अंदरखाने से यह संकेत मिल चुके हैं कि भाजपा ने आजसू के कम सीट देकर अपने बल पर बहुमत हासिल करने की रणनीति पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। इससे गठबंधन की गाड़ी को भले ही झटका लगे लेकिन भारतीय राजनीति को एक बदलाव की तरफ ले जाना भी अच्छी बात है। जिस तरीके से महाराष्टÑ से विवाद के राष्टÑीय निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, उससे गठबंधन की राजनीति पहले के मुकाबले और परिपक्व होगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बदलती राजनीतिक तस्वीर के बीच एक पार्टी के प्रभुत्व वाली बहुदलीय व्यवस्था के बजाय राजनीतिक बहुलवाद कायम हो गया। विविधता भरी भारतीय जनता को देखते हुए यह स्वाभाविक भी था। क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्तिक स्तर पर आकांक्षाएं जगीं, कई प्रकार की राजनीतिक और सामाजिक विविधता सामने आई, जिसने नस्ली, जातीय, धार्मिक और ऐसे ही अन्य पहलुओं को स्वर दिया। क्षेत्रीय चेतना ने कई नई राजनीतिक पार्टियों को बढ़ावा दिया। क्षेत्रीय चेतना हरेक राज्य में अलग-अलग थी और गठबंधन व्यवस्था ही इकलौती व्यवस्था थी, जिसमें क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों को आराम से जगह मिल सकती थी।गठबंधन की राजनीति की बात करें तो उत्तर प्रदेश में यह प्रयोग लोकसभा में भी विफल साबित हुआ है जबकि बसपा और सपा के एकसाथ चुनाव लड़ने के बाद भी दोनों के वोट बैंक एक दूसरे की झोली में नहीं गये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार में नीतीश कुमार को भाजपा से ज्यादा कुछ उम्मीद नहीं है। दरअसल देश की राजनीति में जिस तरीके से क्षेत्रीय मुद्दे प्रभावी हो रहे हैं, उसी अनुपात में क्षेत्रीय दलों की ताकत भी बढ़ती जा रही है। वैसे यह शाश्वत सत्य है कि जब किसी राजनीतिक पार्टी की ताकत बढ़ती है तो उसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी बढ़ती जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि गठबंधन काल से निकली भारतीय राजनीतिक पार्टियां इतनी परिपक्व या प्रतिबद्घ नहीं हो पाई हैं कि वे संसदीय लोकतंत्र की जरूरतों को पूरा कर सकें। कई राज्य स्तरीय पार्टियां नई हैं और बचकाना व्यवहार करती हैं। लोकतंत्र की खातिर सहिष्णुता, समझदारी, सलाह-मशविरे और समझौते की भावना उनके भीतर कतई नहीं है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-डॉ़ श्रीनाथ सहाय</strong></p>
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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2019 14:58:17 +0530</pubDate>
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                <title>4 साल बाद एनडीए का हिस्सा बना जदयू</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने दी मंजूरी पटना। बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड (जदयू) करीब चार साल के बाद भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर शनिवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/jdu-becomes-nda-part-after-4-years/article-3257"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/nitish-kumar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने दी मंजूरी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड (जदयू) करीब चार साल के बाद भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर शनिवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी ने राजग में शामिल होने का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। बैठक में पंजाब और झारखंड समेत कई अन्य राज्यों के जदयू के प्रदेश अध्यक्ष भी मौजूद थे। पार्टी के इस फैसले के साथ ही चार साल बाद जदयू की राजग में वापसी हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले लोकसभा चुनाव से पूर्व भाजपा की ओर से नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के विरोध में जदयू जून 2013 को राजग से अलग हो गया था। इसके बाद लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद जदयू ने राष्ट्रीय जनता दल(राजद) और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर वर्ष 2015 का विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें महागठबंधन को दो तिहाई से भी अधिक सीटों पर सफलता मिली। इस अपार जनसमर्थन के बल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने करीब 20 माह तक महागठबंधन की सरकार चलाई, लेकिन 26 जुलाई को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। कुमार इस्तीफे के 24 घंटे के अंदर ही भाजपा से नाता जोड़कर फिर से मुख्यमंत्री बन गए। इसके बाद कुमार जब पहली बार दिल्ली गए तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महागठबंधन अमानत, मजबूत विपक्ष का प्रयास रहेगा जारी : शरद</h3>
<p style="text-align:justify;">जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समानांतर बैठक में महागठबंधन को अमानत बताते हुए कहा कि संकट से घिरे देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए मजबूत विपक्ष जरूरी हैै। उन्होंने कहा कि बिहार में महागठबंधन बनना अमानत के समान था लेकिन यह बिखर गया। महागठबंधन का बिखरना काफी दुखद है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2017 08:47:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>इंदिरागांधी के पैटर्न पर राजनीति नहीं करती भाजपा : शाह</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ। गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर उठ रही उंगलियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि उनकी पार्टी या सरकार इंदिरा गांधी के पैटर्न पर राजनीति नहीं करती। तीन दिवसीय लखनऊ दौरे के अंतिम दिन सोमवार को शाह ने संवाददाताओं से कहा कि यदि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर उठ रही उंगलियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि उनकी पार्टी या सरकार इंदिरा गांधी के पैटर्न पर राजनीति नहीं करती। तीन दिवसीय लखनऊ दौरे के अंतिम दिन सोमवार को शाह ने संवाददाताओं से कहा कि यदि कोई भाजपा में शामिल होना चाहता है या गठबंधन कर सरकार बनाना चाहता है तो पार्टी उसे क्यों रोकेगी। स्वेच्छा से कोई मिलना चाहता है तो उसका स्वागत है, लेकिन एक बात तय है कि भाजपा या उसकी सरकारें इंदिरागांधी के पैटर्न पर राजनीति नहीं करती।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> गठबंधन से अलग होकर भाजपा से नाता जोड़ा</h2>
<p style="text-align:justify;">बिहार में आए राजनीतिक बदलाव में नीतिश कुमार का पक्ष लेते हुए उन्होंने कहा कि कुमार ने किसी को मंत्रिमंडल से निकाला नहीं और न ही कोई दल तोड़ा। उन्होंने स्वेच्छा से गठबंधन से अलग होकर भाजपा से नाता जोड़ा। इसमें भाजपा या नीतिश कुमार कहां गलत हो गए। गुजरात में कांग्रेस विधायकों को लालच देने के आरोपों को भाजपा अध्यक्ष ने बेबुनियाद बताया और सवाल किया कि बंगलुरु में तो कांग्रेस की सरकार है, वहां विधायकों को कमरे में क्यों रखा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शाह ने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होने वाले कई नेताओं को चुनाव लड़वाया गया। वह जनादेश से जनप्रतिनिधि चुने गए। भाजपा ने किसी दल को तोड़कर लोगों को नहीं शामिल किया था। जनता ने शामिल होने वालों को चुनकर उन्हें राजनीतिक मान्यता भी दे दी। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य राज्य में ही बने रहेंगे। उन्होंने मौर्य के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अटकलों को सिरे से खारिज किया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘भाजपा अध्यक्ष पद छोड़ने का सवाल ही नहीं’</h2>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा में जाने की स्थिति में भाजपा अध्यक्ष पद छोड़ने की अटकलों को विराम देते हुए अमित शाह ने कहा कि उनके पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं है और वह अपनी जिम्मेदारी को पूरी खुशी और तन्मयता से निभा रहे हैं। शाह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा का सदस्य बनने की स्थिति में भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफे के प्रश्न पर कहा कि कोई सवाल नहीं है। नरेन्द्र मोदी को आजादी के बाद देश का सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री करार देते हुए शाह ने कहा कि मोदी ने देश का सम्मान दुनिया में बढ़ाया है।</p>
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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 06:18:45 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शरद यादव को RJD महागठबंधन में आने के लिए लालू का न्योता</title>
                                    <description><![CDATA[पटना। बिहार में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की नई सरकार बनने के बाद आरजेडी चीफ लालू यादव ने नया दांव चला है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बीजेपी से हाथ मिलाने को लेकर नाराज चल रहे जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव को मनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि शरद की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/lalu-invite-sharad-for-join-major-alliance/article-2710"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/lalu3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की नई सरकार बनने के बाद आरजेडी चीफ लालू यादव ने नया दांव चला है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बीजेपी से हाथ मिलाने को लेकर नाराज चल रहे जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव को मनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि शरद की नाराजगी बरकरार है। ऐसे में अब आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अब उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश में जुट गए हैं। उन्होंने शरद से आरजेडी जॉइन करने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि नीतीश कुमार आरजेडी-कांग्रेस के महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी की मदद से छठी बार सीएम बने हैं। शनिवार को उनके 26 मंत्रियों मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लालू ने जीतन राम को फोन किया</h3>
<p style="text-align:justify;">नई सरकार से नाराज चल रहे पूर्व सीएम जीतन राम मांझी से भी लालू ने बात की। सूत्रों की मानें तो लालू ने उन्हें भी महागठबंधन में आने का न्योता दिया है। जल्द ही दोनों की मुलाकात भी हो सकती है। बता दें कि मांझी को हटाकर नीतीश सीएम बने थे।</p>
<p style="text-align:justify;">लालू प्रसाद ने गुजारिश की है कि शरद यादव देशभर की गैर-बीजेपी पार्टियों को एकजुट करने में उनकी मदद करें। आरजेडी चीफ ने दावा किया- ”नए गठबंधन के लिए शरद यादव से कोई राय नहीं ली गई। इसके चलते वो नाराज हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा लालू ने सोशल मीडिया पर भी शरद यादव से साथ आने की अपील की। लालू ने इसे लेकर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ‘गरीब, वंचित और किसान को संकट/आपदा से निकालने के लिये हम नया आंदोलन खड़ा करेंगे। शरद भाई, आइये सभी मिलकर दक्षिणपंथी तानाशाही को नेस्तनाबूद करें।’ एक दूसरे ट्वीट में लालू ने लिखा, ‘हमने और शरद यादव जी ने साथ लाठी खाई है, संघर्ष किया है। आज देश को फिर संघर्ष की जरूरत है। शोषित और उत्पीड़ित वर्गों के लिए हमें लड़ना होगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2017 03:27:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी ने नीतीश कुमार पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अपने स्वार्थी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए साम्प्रदायिक ताकतों के पास लौट गए हैं। गांधी ने कहा कि उन्हें पता था कि इसकी योजना पिछले तीन-चार महीनों से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/rahul-gandhi-comment-on-nitish-kumar/article-2656"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/rahul-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अपने स्वार्थी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए साम्प्रदायिक ताकतों के पास लौट गए हैं। गांधी ने कहा कि उन्हें पता था कि इसकी योजना पिछले तीन-चार महीनों से बन रही थी। राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी बिहार में उस महागठबंधन का हिस्सा थी जिससे कुमार की जदयू बुधवार को अलग हो गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गांधी ने कहा कि</h2>
<p style="text-align:justify;">गांधी ने कहा कि उन्होंने (नीतीश ने) साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में हमसे हाथ मिलाया था, लेकिन अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ के लिए उन्होंने उनसे हाथ मिला लिया जिनके खिलाफ वे लड़े थे। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में यही समस्या है। गांधी से जब बिहार की राजनीति में हुए बदलाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि राजनीति में आपको यह पता चल जाता है कि लोगों के दिमाग में क्या चल रहा है। स्पष्ट रूप से, मैं जानता था कि नीतीश जी यह योजना बना रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2017 06:05:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>तेजस्वी नहीं देंगे इस्तीफा, नीतीश को बोझ लगता है तो वह समझें : लालू</title>
                                    <description><![CDATA[महागठबंधन की सरकार पांच वर्ष तक चलेगी पटना। बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे और महागठबंधन की सरकार पांच वर्ष तक चलेगी लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यदि बोझ लगता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/lalu-prasad-yadav-comment-on-nitish-kumar/article-2626"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/lalu2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">महागठबंधन की सरकार पांच वर्ष तक चलेगी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे और महागठबंधन की सरकार पांच वर्ष तक चलेगी लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यदि बोझ लगता है तो वह समझें। राजद अध्यक्ष ने यहां उनके 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास पर पार्टी विधानमंडल दल की हुई बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुख्यमंत्री एवं महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार ने उप मुख्यमंत्री यादव से इस्तीफा नहीं मांगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महागठबंधन मजबूती के साथ पांच वर्ष तक चलेगा, लेकिन यदि कुमार को बोझ लगता है तो वह समझें। जदयू की ओर से उप मुख्यमंत्री के इस्तीफा की मांग पर राजद अध्यक्ष ने अपने चिरपरिचित लहजे में कहा, ‘जदयू कोई पुलिस नहीं है, मुझे और तेजस्वी को जहां बोलना होगा, वहां बोलेंगे।’</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Jul 2017 06:57:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>गठजोड़ को विधान सभा चुनावों में मिलेगा लाभ!</title>
                                    <description><![CDATA[ChandiGarh, SachKahoon News: नगर निगम चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए भी भाजपा-अकाली गठबंधन में उत्साह भर दिया है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के कदम पर सिटी ब्यूटीफुल के लोगों की मुहर माना जा रहा है। भाजपा और अकाली नेताओं को उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/assembly-elections-will-benefit-the-alliance/article-585"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/modi-and-badal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ChandiGarh, SachKahoon News:</strong> नगर निगम चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए भी भाजपा-अकाली गठबंधन में उत्साह भर दिया है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के कदम पर सिटी ब्यूटीफुल के लोगों की मुहर माना जा रहा है। भाजपा और अकाली नेताओं को उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव में भी इसका उन्हें फायदा मिलेगा। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी करारी हार को तो स्वीेकार कर लिया है, लेकिन वह इसे नोटबंदी का असर मानने को तैयार नहीं है। कांग्रेस नेता पंजाब विधानसभा चुनाव पर इसका असर पड़ने की बात को भी खारिज कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मोदी मैजिक से सफलता</strong><br />
चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन किया है। जनता ने नोटबंदी और कालाधन खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री के कदमों को व्यापक समर्थन दिया है। चंडीगढ़ की जनता के फैसले ने पूरे देश और पंजाब के लोगों के रुख को स्पष्ट किया है।</p>
<p><strong>कांग्रेस ने मानी हार</strong><br />
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने नगर निगम चुनाव हार मानते हुए इसकी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि जनता का फैसला स्वीकार है और अपनी हार व चुनाव परिणाम की समीक्षा कर अपनी कमियों को ठीक करेंगे। बंसल ने कहा कि लोकतंत्र में हार और जीत तो होती रहती है। यह फैसला शिरोधार्य है और हम आगे भी लोगों की बेहतर सेवा कर वापसी करेंगे।</p>
<p><strong>कांग्रेस की वोटबंदी</strong><br />
पूर्व सांसद सतपाल जैन ने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले पर मुहर लगाने के साथ कांग्रेस की वोटबंदी कर दी है। चंडीगढ़ ने कांग्रेस मुक्त भारत की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम को आगे बढ़ाया है। इसका आने वाले चुनावों पर व्यापक असर पड़ेगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Tue, 20 Dec 2016 23:14:08 +0530</pubDate>
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