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                <title>राज्य स्तरीय समिति करेगी जीएसटी शिकायतों का निपटारा</title>
                                    <description><![CDATA[सभी राज्यों के मुख्य आयुक्तों एवं आयुक्तों को पत्र भेजकर शिकायत निपटारा समिति बनाने के लिए कहा गया है। इसमें कहा गया है कि जीएसटी के तहत सभी करदाताओं की इससे जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए तंत्र बनायी जानी चाहिए।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/state-level-committee-will-resolve-gst-complaints/article-11988"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/resolve.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">केन्द्र सरकार के पदाधिकारियों के साथ उद्योग, व्यापार और कर सलाहकार शामिल होंगे</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी (resolve) शिकायतों के निपटारे के लिए जोनल / राज्य स्तरीय समिति समिति बनायी जा रही है जिसमें राज्य और केन्द्र सरकार के पदाधिकारियों के साथ उद्योग, व्यापार और कर सलाहकार शामिल होंगे। जीएसटी परिषद की गत 18 दिसंबर को हुयी 38वीं बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर इस संबंध में केन्द्रीय कर एवं जीएसटी से जुड़े सभी प्रमुख मुख्य आयुक्त , सभी राज्यों के मुख्य आयुक्तों एवं आयुक्तों को पत्र भेजकर शिकायत निपटारा समिति बनाने के लिए कहा गया है। इसमें कहा गया है कि जीएसटी के तहत सभी करदाताओं की इससे जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए तंत्र बनायी जानी चाहिए।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसके लिए जीएसटी परिषद ने जोनल/ राज्य स्तर पर शिकायत निपटारा समिति बनाने का अनुमोदन किया है</li>
<li style="text-align:justify;"> केन्द्र और राज्य के अधिकारियों के साथ ही उद्योग और व्यापार से जुड़े प्रतिनिधि और जीएसटी हितधारक शामिल होंगे।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">विभिन्न ट्रेड एसोसिएशन के अधिक 12 प्रतिनिधि होंग</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जोनल प्रमुख मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त केन्द्रीय कर इस समिति के सह अध्यक्ष होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">राज्य कर के मुख्य आयुक्त या आयुक्त भी सह अध्यक्ष होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">विभिन्न ट्रेड एसोसिएशन के अधिक 12 प्रतिनिधि होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">चार्टर्ड अंकाउटें, कर अधिवक्ता, कर पेशेवर जैसे कर के जानकारों के प्रमुख संघों के अधिकतम चार सदस्य होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">इसमें आईटीजीआरसी के केन्द्रीय कर और राज्य कर के नोडल अधिकारी भी शामिल होंगे।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>-राज्य या जोनल स्तर पर जीएसटीएन से जुड़े प्रतिनिधि, सह अध्यक्ष की अनुमति से कोई अन्य सदस्य आदि इस समिति में होंगे। प्रत्एक राज्य में एक राज्य स्तरीय समिति होगी और जिस राज्य में एक से अधिक जोन है वहां जोनल स्तरीय समिति होगी।</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस समिति का कार्यकाल दो वर्षों का होगा और इसी आधार पर प्रत्एक मनोनित सदस्य का कार्यकाल भी दो वर्ष का ही होगा। जो काई भी सदस्य बगैर किसी उचित कारण के समिति की लगातार तीन बैठकों से अनुपस्थित रहेंगें उनकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी और उनके स्थान पर दूसरे सदस्य का मनोनयन किया जाएगा। समिति की हर तिमाही बैठक होगी और सह अध्यक्ष की अनुमति पर अगल से भी बैठक बुलायी जा सकती है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2019 16:40:44 +0530</pubDate>
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                <title>किसानों की आय का हो स्थायी हल</title>
                                    <description><![CDATA[हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में कांग्रेस को सत्ता मिलने के पीछे किसानों की कर्जमाफी की घोषणा ने अहम भूमिका निभाई। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दस दिन में कर्जमाफी का वादा किया था। शपथ ग्रहण के बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/permanent-resolve-of-farmers-income/article-7044"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/kisahn.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में कांग्रेस को सत्ता मिलने के पीछे किसानों की कर्जमाफी की घोषणा ने अहम भूमिका निभाई। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दस दिन में कर्जमाफी का वादा किया था। शपथ ग्रहण के बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा कर दी है। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों का 2 लाख तक का कर्जा माफ किया है, माना जा रहा है कि इस फैसले का असर करीब 30 लाख से ज्यादा किसानों पर पड़ेगा। जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दे विशेषकर किसानों की कर्जमाफी को विधानसभा चुनाव में उठाया उससे इस बात का आभास हो रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के एजेण्डे में किसान केन्द्रीय भूमिका में रहेंगे। किसानों के मुद्दे को उठाने का सियासी लाभ कांग्रेस को मिलते देख भाजपा भी सक्रिय हो गयी है, जिसकी बानगी पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रायबरेली की रैली के दौरान देखने को मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली में सेना के जवान और कर्जदार किसान के मुद्दे उठाते हुए तीखे प्रहार किए। इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारें बनी हैं और जनादेश की बुनियादी वजह किसान कर्जमाफी भी रही है। भूख, गरीबी, कर्ज से किलसते आदमी को और क्या चाहिए? लिहाजा बीते दो सालों के अंतराल में जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें कर्जमाफी ही जीत का प्राथमिक और बुनियादी फार्मूला साबित हुआ है। इन चुनावों में करीब 1.40 लाख करोड़ रुपए के कर्ज माफ करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन करीब 80 हजार करोड़ के कर्ज ही अभी तक माफ किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिजर्व बैंक के मुताबिक किसानों का कर्ज माफ करने के लिए सरकार को अतिरिक्त 2.20 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। यह राशि कहां से आएगी और बजट में किस मद में उसे दिखाया जाएगा? भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी कहा कि चुनावी वादों में कृषि कर्जमाफी की घोषणा नहीं करनी चाहिए थी। खस्ता आर्थिक हालात में इतनी बड़ी रकम 10 दिन में इंतजाम करना कठिन है। साल 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा 36,000 करोड़ का कर्ज माफ करने के बाद सरकार को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा और उसे कर्मचारियों को वेतन देने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। आखिर किसान की आमदनी जीने लायक कब होगी और वह स्थिर कैसे होगी कि किसान को कर्ज ही न लेना पड़े? किसान बरसों बरस से सियासत का मोहरा बनता रहा है, आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर किसानों की समस्याओं पर पर सियासी शोर जोर-जोर से सुनाई देगा लेकिन किसानों की समस्या का स्थायी हल कौन देगा यह अभी कहीं नजर नहीं आ रहा।</p>
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                <pubDate>Wed, 19 Dec 2018 10:39:01 +0530</pubDate>
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