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                <title>Chandigarh - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>राहुल गांधी दिल्ली में बैठकर 'एक्स' पर राजनीतिक बयान देने के बजाय गांव में आकर ज़मीनी हकीकत देखें: बरिंदर कुमार गोयल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस 2017 में चार हफ़्ते में नशा खत्म करने का वादा करके सत्ता में आई थी, फिर उन्होंने 5 साल तक कुछ नहीं किया: बरिंदर कुमार गोयल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/rahul-gandhi-instead-of-sitting-in-delhi-and-giving-political/article-90960"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh13.jpg" alt=""></a><br /><div>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> आम आदमी पार्टी (आप ) पंजाब के सीनियर नेता और कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बुधवार को दिड़बा में हुई हालिया घटना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझने के बजाय एक दुखद घटना पर राजनीति कर रही हैं। राहुल गांधी के सोशल मीडिया पोस्ट पर जवाब देते हुए मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, "राहुल गांधी जी, आपने नशे और नशे के खिलाफ कार्रवाई की बात की है, लेकिन मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि अगर पंजाब में किसी सरकार ने नशों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है, तो वह मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार है। आपकी पार्टी 2017 में चार हफ्तों के अंदर नशे को खत्म करने का वादा करके सत्ता में आई थी। आपकी सरकार पांच साल थी, आपने उन पांच सालों में क्या किया?"</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने नशे के खिलाफ युद्ध स्तर पर अभियान चलाया है और अब इसके ठोस नतीजे सामने आ रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि विपक्ष एक दुखद घटना पर राजनीति क्यों कर रहा है, जबकि उसके पास सरकार के खिलाफ उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा, "पहले आप धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करते थे। अब जब वे मुद्दे फेल हो गए, तो आप लाशों पर राजनीति करने लगे हैं। यह पंजाब की संस्कृति नहीं है।"</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पीड़ित परिवार ने अपनी मर्ज़ी से गुलज़ार सिंह का अंतिम संस्कार करने का फ़ैसला किया था, फिर भी विपक्ष के नेता मौके पर पहुँचे और मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने खुद राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी का विरोध किया और उन्हें जाने के लिए कहा। लोगों ने साफ़ कर दिया कि उन्होंने अपनी कमेटी बना ली है और वे खुद ही मामले को संभाल लेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने आगे कहा कि पंजाब में नशे की समस्या पिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों की गलती है, जबकि मौजूदा आप सरकार नशा तस्करों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जी, पंजाब आइए। उस गाँव में आइए और खुद हालात देखिए। लोगों से बात कीजिए और समझिए कि वे क्या चाहते हैं और क्या कह रहे हैं। दिल्ली में बैठकर बयान देने से ज़मीनी हकीकत सामने नहीं आती।"</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आगे कहा, "जब भी पंजाब में कोई छोटी सी घटना होती है, तो सभी विपक्षी पार्टियों के नेता वहां दौड़े चले आते हैं। उनके पास कोई और मुद्दा नहीं बचता। लेकिन पंजाब के लोगों को इस तरह की राजनीति पसंद नहीं है। पंजाब मिलजुलकर रहने, भाईचारा बनाए रखने और सबकी भलाई में विश्वास रखता है।"</p>
<p style="text-align:justify;">बरिंदर कुमार गोयल ने दोहराया कि न तो आप के किसी मंत्री और न ही किसी विधायक का इस घटना से कोई लेना-देना है। उन्होंने विपक्ष से इस "गंदी राजनीति" से दूर रहने की अपील की।</p>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 15:14:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने फसली अवशेषों के स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सी.आई.आई. के साथ मिलकर काम करने की वकालत की</title>
                                    <description><![CDATA[हमने पंजाब में औद्योगिक विकास, नए निवेश आकर्षित करने और युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने पर व्यापक चर्चा की: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/chief-minister-bhagwant-singh-mann-advocates-working-with-cii-to/article-90956"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज फसली अवशेषों के स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देने, ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान के माध्यम से बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने तथा प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए युवाओं को कुशल बनाने हेतु कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सी.आई.आई.) के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">सी.आई.आई. के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने मालवा क्षेत्र, विशेषकर संगरूर और बरनाला में शुरू की गई पहलों के साथ-साथ लुधियाना में प्रस्तावित मल्टी-स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट तथा जालंधर में अत्याधुनिक प्रयोगशाला से युक्त सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर टेक्निकल टेक्सटाइल्स स्थापित करने सहित नई कौशल विकास एवं प्रौद्योगिकी आधारित पहलों पर भी विचार-विमर्श किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के संबंध में जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा, "आज चंडीगढ़ में मेरी सी.आई.आई. उत्तरी क्षेत्र के चेयरमैन के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के दौरान हमने पंजाब में औद्योगिक विकास, नए निवेश आकर्षित करने और युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के संबंध में व्यापक चर्चा की। हमारी सरकार पंजाब को देश का अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने और कारोबार के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए लगातार काम कर रही है। हम पंजाब की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">सी.आई.आई. के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए पंजाब सरकार और सी.आई.आई. का मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। हमारा ध्यान स्थिरता, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर होना चाहिए। इससे एक ओर किसानों को लाभ मिलेगा और दूसरी ओर पंजाब को स्वच्छ, हराभरा एवं प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।"</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने सी.आई.आई. को मालवा क्षेत्र, विशेष रूप से संगरूर और बरनाला, जहां धान की परमल किस्म की खेती होती है, के साथ-साथ पंजाब के अन्य हिस्सों में भी फसली अवशेषों के निपटारे के प्रयासों को तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "पंजाब फसली अवशेषों के प्रबंधन के लिए टिकाऊ और प्रौद्योगिकी आधारित समाधान अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि किसानों को व्यावहारिक, किफायती और प्रभावी समाधान उपलब्ध करवाए जा सकें तथा प्रदेश स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सके।" मुख्यमंत्री ने सी.आई.आई. एग्रो टेक इंडिया 2026 के दौरान 'वर्ल्ड हॉर्टिकल्चर सेंटर' के भारत दौरे को सुचारू बनाने के लिए सी.आई.आई. को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा, "कृषि और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में ज्ञान एवं विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के माध्यम से पंजाब को ऐसे दौरों से बहुत लाभ मिलेगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब के बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने और प्रदेश के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान तथा प्रौद्योगिकी सहयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कारोबार करने में सुगमता और जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रमुख केंद्रों पर औद्योगिक एवं शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने, लागत कम करने और प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए आधुनिक एवं सुनियोजित बुनियादी ढांचा बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा, "पंजाब सरकार औद्योगिक क्षेत्रों को विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।" भगवंत सिंह मान ने लुधियाना में प्रस्तावित मल्टी-स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एम.एस.टी.आई.) स्थापित करने के लिए सी.आई.आई. को पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए कहा कि ऐसी पहल समय की प्रमुख जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा, "प्रस्तावित मल्टी-स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थानीय उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पंजाब में कुशल मानव संसाधन तैयार करने में मदद करेगा और साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलेगा। औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को बढ़ावा देना पंजाब के आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है।"मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सी.आई.आई. को जालंधर में अत्याधुनिक प्रयोगशाला के साथ पंजाब में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर टेक्निकल टेक्सटाइल' स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध करवाने और प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को और गति देने के लिए रक्षा विनिर्माण उद्योगों हेतु विशेष कौशल केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के दौरान कृषि, फसली अवशेष प्रबंधन, बागवानी, बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में सरकार-उद्योग सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक का साझा उद्देश्य टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना और पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:46:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पंजाब के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में एक वर्ष में दाखिले 164% बढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[दाखिलों में तेज़ वृद्धि उपचार नेटवर्क में बढ़ते विश्वास का प्रमाण: डॉ. बलबीर सिंह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/admissions-in-government-de-addiction-centers-of-punjab-increased-by-164/article-90787"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत भगवंत मान सरकार के नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन केंद्रों में दाखिल होने वाले मरीज़ों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि राज्य के उपचार ढाँचे के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास का मज़बूत संकेत है। सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिलों की संख्या वर्ष 2024 में 9,577 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 25,290 हो गई, इस तरह दाखिलों में 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। यही रुझान वर्ष 2026 में भी जारी रहा और जुलाई तक 14,000 से अधिक लोग सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल हो चुके थे।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि दाखिलों में यह वृद्धि मार्च 2025 में शुरू हुए ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद देखने को मिली है। यह वृद्धि इस बात का मज़बूत संकेत है कि अधिक से अधिक परिवार और व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहे अपने प्रियजनों या स्वयं को कलंक के अंधेरे में रखने के बजाय उपचार केंद्रों तक पहुँचने के लिए आगे आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में इस पहल के बढ़ते प्रभाव का विशेष महत्त्व है, क्योंकि नशे की लत से जूझ रहे कई लोग उपचार की औपचारिक व्यवस्था का सहारा लेने से पहले वर्षों तक इस समस्या से जूझते रहे होंगे। उपचार और रिहैबिलिटेशन सुविधाएँ जैसे-जैसे नशा विरोधी पहल का अधिक दृश्यमान हिस्सा बन रही हैं, वैसे-वैसे ध्यान केवल समस्या की पहचान करने से आगे बढ़कर प्रभावित लोगों को सक्रिय रूप से उपचार से जोड़ने और उनके रिहैबिलिटेशन में सहयोग देने पर केंद्रित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य के रिहैबिलिटेशन नेटवर्क में भी इसी तरह की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी रिहैबिलिटेशन केंद्रों में दाखिलों की संख्या वर्ष 2024 में 2,644 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 8,574 हो गई—यानी 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। जुलाई 2026 तक ही 5,800 से अधिक लोग इन केंद्रों में दाखिल हो चुके थे, जो वर्ष 2025 में दर्ज कुल दाखिलों का लगभग 68 प्रतिशत है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपचार की बढ़ती पहुँच पंजाब के आउटपेशेंट ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) क्लीनिक नेटवर्क के माध्यम से भी दिखाई देती है। नए रजिस्ट्रेशन वर्ष 2024 में 13,033 से बढ़कर वर्ष 2025 में 17,702 हो गए, जबकि इस वर्ष अगस्त तक 12,500 से अधिक नए मरीज़ रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। ये आंकड़े एक ऐसे व्यापक उपचार तंत्र की ओर संकेत करते हैं, जिसमें मादक पदार्थों पर निर्भरता से जूझ रहे लोगों के लिए सहायता प्राप्त करने के कई विकल्प उपलब्ध हैं—इनमें नशा मुक्ति केंद्रों और रिहैबिलिटेशन सुविधाओं से लेकर आउटपेशेंट ट्रीटमेंट तक शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने कानून के तहत उपलब्ध रिहैबिलिटेशन संबंधी प्रावधानों का भी उपयोग किया है। 27 अगस्त 2026 तक 11,000 से अधिक व्यक्तियों को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64A के तहत प्रतिरक्षा प्रदान की जा चुकी है। इस अधिनियम के तहत नशे की लत से पीड़ित अथवा मादक पदार्थों के सेवन या कब्जे के आरोप में नामजद लोगों को कानूनी प्रतिरक्षा प्रदान की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “पंजाब के लिए दाखिलों में तेज़ वृद्धि इस पहल के सबसे उत्साहजनक संकेतकों में से एक साबित हो रही है: लोग लगातार आगे आ रहे हैं, परिवार संस्थागत सहायता की माँग कर रहे हैं और राज्य का उपचार नेटवर्क उन लोगों तक पहुँच रहा है, जो अन्यथा औपचारिक उपचार व्यवस्था से बाहर रह सकते थे।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ तीन स्तंभों पर आधारित है—तस्करों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई, प्रभावित लोगों के लिए उपचार एवं रिहैबिलिटेशन और हमारे बच्चों को नशे से बचाने के लिए रोकथाम, ताकि नशा उन तक पहुँचने से पहले ही उसे रोका जा सके। उपचार और रिहैबिलिटेशन के माध्यम से हमारा प्रयास लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर लाना, परिवारों को फिर से जोड़ना और मादक पदार्थों के दुरुपयोग से जूझ रहे लोगों को स्वास्थ्य सुधार की एक वास्तविक राह प्रदान करना है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
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                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:31:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राज्य सरकार से सलाह किए बिना जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने पर मंत्री हरपाल चीमा ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार से सलाह किए बिना जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने पर मंत्री हरपाल चीमा ने उठाए सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/minister-harpal-cheema-raised-questions-on-making-justice-ashwini-kumar/article-90785"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चंडीगढ़/जालंधर  आम आदमी पार्टी (आप) के सीनियर नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने रविवार को जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को पंजाब सरकार से बिना किसी सलाह के पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह नियुक्ति किया गया है, उससे पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और देश के फेडरल स्ट्रक्चर के प्रति केंद्र के सम्मान पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस दौरान उनके साथ आप नेता तरनप्रीत सिंह सन्नी भी मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जालंधर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि नियुक्ति को अंतिम रूप देने से पहले पंजाब सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने आगे कहा, "जिस तरह से यह नियुक्ति की गई है, उससे पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और देश के फेडरल स्ट्रक्चर के प्रति केंद्र के सम्मान पर बड़े सवाल उठते हैं। नियुक्ति को तय करने से पहले पंजाब सरकार को अपने विचार पेश करने का अवसर नहीं दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने कहा कि यह मामला इसलिए भी बहुत गंभीर है क्योंकि ऐसे नियुक्ति को कंट्रोल करने वाले मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर में संबंधित राज्य सरकार के विचारों को ध्यान में रखने का साफ प्रोविजन है। उन्होंने कहा, “पंजाब के गवर्नर का 12 अगस्त, 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को भेजा गया लेटर और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का लेटर, दोनों में इस संबंधित प्रक्रिया का ज़िक्र था।”</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “नियमों के मुताबिक राज्य सरकार की राय ज़रूरी होने के बावजूद, चीफ जस्टिस की नियुक्ति से पहले पंजाब सरकार से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। यह सिर्फ़ नियुक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पंजाब के अधिकारों और संवैधानिक फेडरल स्ट्रक्चर का मुद्दा है।”उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस समय के सबसे सीनियर जज, जस्टिस जी.एस. संधावालिया के प्रति केंद्र सरकार के पिछले रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया, “सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जुलाई 2024 में जस्टिस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की थी, लेकिन हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त होने से पहले नियुक्ति को दो महीने से ज़्यादा समय तक रोक कर रखा गया।”</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश का चीफ जस्टिस बनाने में देरी क्यों की गई, जबकि जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को पंजाब सरकार से सलाह लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस क्यों नियुक्त किया गया?”उन्होंने कहा, “इससे एक बुनियादी सवाल उठता है: अगर राज्य सरकार की सलाह तय प्रोसेस का हिस्सा है, तो पंजाब की चुनी हुई सरकार से सलाह क्यों नहीं ली गई? मुख्यमंत्री तीन करोड़ पंजाबियों के जनादेश को रिप्रेजेंट करते हैं। चुनी हुई राज्य सरकार को नज़रअंदाज़ करना न केवल मुख्यमंत्री बल्कि पंजाब के लोगों का भी अपमान है।”</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने आगे कहा, “इस मुद्दे पर पंजाब कैबिनेट में तुरंत चर्चा की ज़रूरत थी। इसलिए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस मामले पर चर्चा करने के लिए रविवार शाम 4 बजे एक इमरजेंसी कैबिनेट मीटिंग बुलाई है।”इस नियुक्ति को राज्य के अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बताते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “संविधान एक फेडरल ढांचा बनाता है जिसमें केंद्र और राज्य दोनों के अधिकार साफ तौर पर तय हैं। केंद्र बार-बार राज्यों के अधिकारों में दखल नहीं दे सकता। पंजाब सरकार अपने संवैधानिक अधिकारों और फेडरल ढांचे को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाएगी।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 11:56:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अकाली दल के कार्यालय में बुजुर्ग दलित महिला के साथ मारपीट के खिलाफ आप महिला विंग ने समराला में किया जोरदार विरोध प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीतिक कार्यालय कानून से ऊपर नहीं, दोषियों के खिलाफ हो कानूनी कार्रवाई: डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/aap-womens-wing-staged-a-strong-protest-in-samrala-against/article-90740"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़/समराला।</strong> शिरोमणि अकाली दल के कार्यालय में एक बुजुर्ग दलित महिला के साथ हुई कथित मारपीट और बेइज्जती के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब महिला विंग ने शनिवार को समराला में एसडीएम कार्यालय के बाहर जिला स्तरीय जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिसकी अगुवाई आप महिला विंग पंजाब की प्रधान और मोगा से विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा ने की। लुधियाना की मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर और कई अन्य महिला नेता भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बादल परिवार और घटना में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल का पुतला भी फूंका और इस घटना पर चुप्पी साधने के लिए सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आप पंजाब महिला विंग की प्रधान डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा ने कहा, "सबने वो परेशान करने वाले वीडियो देखे हैं कि कैसे अकाली दल के कार्यालय के अंदर दूसरी महिलाओं द्वारा एक महिला की पिटाई की गई। महिला ने कथित तौर पर सिर्फ एक बात कही थी कि भगवंत सिंह मान उसके बेटे जैसा है। उसे कथित तौर पर कहा गया था कि यह कार्यालय बादलों का है और अगर उसने वहां भगवंत सिंह मान का नाम लिया तो उसकी पिटाई की जाएगी। यह बेहद शर्मनाक रवैया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">आप पंजाब महिला विंग की प्रधान ने कहा, "किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार किसने दिया? चाहे कोई व्यक्ति राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हो या न हो, कानून सभी के लिए बराबर है। अगर महिला से कोई असहमति थी तो पुलिस को बुलाना चाहिए था। उसे कार्यालय में बुलाकर उसके साथ मारपीट नहीं करनी चाहिए थी।" डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा ने कहा, "महिला को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने भगवंत सिंह मान का नाम लिया था। यह दर्शाता है कि बादलों के मन में भगवंत सिंह मान को लेकर कितना डर और बौखलाहट है। मुख्यमंत्री ने पंजाब के लोगों के लिए लगातार काम किया है और ऐसे काम करके दिखाए हैं जो पारंपरिक पार्टियां दशकों के शासन के दौरान भी करने में नाकाम रहीं।"</p>
<p style="text-align:justify;">आप विधायक ने आगे कहा कि शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने राजनीतिक फायदे के लिए बार-बार बांटो और राज करो की राजनीति की है और पंजाब के सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने ऐसी राजनीति को खारिज कर दिया है और वे महिलाओं की बेइज्जती या धमकियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "आप महिला विंग पंजाब की हर महिला के साथ मजबूती से खड़ी है। किसी भी महिला पर हमला, धमकी या बेइज्जती नहीं होनी चाहिए। हम निष्पक्ष जांच और जो भी दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।" डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा ने संबंधित पुलिस कमिश्नर, एसएसपी और अतिरिक्त उपायुक्त से यह सुनिश्चित करने की भी अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 10:56:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री सेहत योजना हुई डिजिटल: पंजाब के लाभार्थी अब घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे अपना ₹10 लाख का हेल्थ कार्ड</title>
                                    <description><![CDATA[ई-केवाईसी के बाद मुख्यमंत्री सेहत योजना के लाभार्थी अब ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे हेल्थ कार्ड]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/mukhyamantri-sehat-yojana-goes-digital--punjab-beneficiaries-can-now-download-their-%E2%82%B910-lakh-health-card-from-home/article-90691"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही है, जिसके तहत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब ने लाभार्थियों को आधिकारिक पोर्टल से अपना हेल्थ कार्ड डिजिटल रूप से डाउनलोड करने में सक्षम बनाया है। इस सुविधा के तहत पात्र लाभार्थियों को अब केवल हेल्थ कार्ड की प्रति प्राप्त करने के लिए किसी केंद्र पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">लाभार्थी का वेरिफिकेशन/ई-केवाईसी और फोटो की प्रतिक्रिया पूरी होने के बाद हेल्थ कार्ड ऑनलाइन देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा, इसे मोबाइल फोन में सुरक्षित रखा जा सकता है या भविष्य में उपयोग के लिए प्रिंट भी किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हेल्थ कार्ड प्राप्त करने के तीन आसान चरण</h4>
<p style="text-align:justify;">1*- *विवरण दर्ज करें*</p>
<p style="text-align:justify;">लाभार्थी अपनी फैमिली आईडी, हेल्थ कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर या आधार नंबर का उपयोग करके अपना पारिवारिक रिकॉर्ड खोज सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">2*- *सुरक्षित ओटीपी सत्यापन*</p>
<p style="text-align:justify;">लाभार्थी पंजीकृत मोबाइल नंबर/आधार विवरण से जुड़े ओटीपी-आधारित वेरिफिकेशन के माध्यम से प्रमाणीकरण पूरा कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">3*- *हेल्थ कार्ड डाउनलोड करें*</p>
<p style="text-align:justify;">सफल प्रमाणीकरण के बाद, वेरीफाई किए हुए हेल्थ कार्ड को देखा और पीडीएफ प्रारूप में डाउनलोड किया जा सकता है। इससे लाभार्थी अपने मोबाइल फोन में इसकी डिजिटल प्रति सुरक्षित रख सकते हैं या प्रिंटेड प्रति प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महत्त्वपूर्ण*: *डाउनलोड करने से पहले ई-केवाईसी पूरा करें*</p>
<p style="text-align:justify;">लाभार्थियों को हेल्थ कार्ड डाउनलोड करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका फोटो-आधारित वेरिफिकेशन/ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से लाभार्थी परिवार के सदस्यों की अपडेट की गई फोटो को वेरीफाई कर सकते हैं और कार्ड जनरेट करने से पहले आवश्यक प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है: आवश्यक वेरिफिकेशन पूरा किए बिना केवल कार्ड डाउनलोड कर लेना लाभार्थी की प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी होने का विकल्प नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">*मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत बड़ी सुविधा*</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल कार्ड की सुविधा मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लाभार्थियों को दी जा रही सुविधाओं में एक और महत्त्वपूर्ण वृद्धि है। पंजाब की यह स्वास्थ्य पहल प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस उपचार कवरेज प्रदान करती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना न केवल परिवारों को बड़े चिकित्सा खर्चों के विरुद्ध वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि इस तरह की पहल स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने की प्रक्रिया को भी परिवारों के लिए आसान बना रही है। मोबाइल फोन के माध्यम से सुरक्षित रूप से हेल्थ कार्ड तक पहुँच होने से काग़ज़ी कार्रवाई कम होगी, अनावश्यक रूप से केंद्रों पर जाने की आवश्यकता घटेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की ज़रूरत के समय आवश्यक दस्तावेज़ तक तेज़ी से पहुँच सुनिश्चित होगी।</p>
<ol style="text-align:justify;">
<li>अपना कार्ड तैयार रखें* — *कभी भी, कहीं भी</li>
<li>डाउनलोड किए गए हेल्थ कार्ड को लाभार्थी:</li>
<li> अपने मोबाइल फोन में सुरक्षित रख सकते हैं</li>
<li> अपने रिकॉर्ड के लिए इसकी प्रिंटेड प्रति रख सकते हैं</li>
<li> आवश्यकता पड़ने पर परिवार के सदस्यों के साथ इसकी प्रति साझा कर सकते हैं</li>
<li> पात्र स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते समय कार्ड प्रस्तुत कर सकते हैं</li>
</ol>
<p style="text-align:justify;">मानवीय प्रभाव वाली डिजिटल स्वास्थ्य पहल*</p>
<p style="text-align:justify;">यह कदम मुख्यमंत्री सेहत योजना के व्यापक उद्देश्य को दर्शाता है: स्वास्थ्य सुरक्षा को न केवल व्यापक बनाना, बल्कि इसे लोगों के लिए अधिक सुलभ भी बनाना। ₹10 लाख के वार्षिक पारिवारिक स्वास्थ्य कवरेज से लेकर आसान डिजिटल कार्ड-एक्सेस सुविधा तक, पंजाब की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था सेवा वितरण में सुविधा और पहुँच को लगातार केंद्र में रख रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आधिकारिक एसएचए पंजाब पोर्टल पर पहुँचें</p>
<p style="text-align:justify;">लाभार्थियों को इस सेवा के लिए केवल राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:15:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'खेडां वतन पंजाब दियां' में तीन पीढ़ियां एक साथ हिस्सा ले सकती हैं, 38 खेलें, 9 आयु वर्ग और 4 पैरा-स्पोर्ट्स शामिल हैं: बलतेज पन्नू</title>
                                    <description><![CDATA[भगवंत मान सरकार पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में स्पोर्ट्स को सेंटर में रख रही है; विलेज डिफेंस कमेटियां और स्पोर्ट्स युवाओं के लिए बना रहे हैं एक नई दिशा: बलतेज पन्नू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/fourth-season-of-khedaan-watan-punjab-diyan-starts-from-bathinda/article-90688"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ / बठिंडा।</strong> आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शुक्रवार को कहा कि 'खेडां वतन पंजाब दियां' का चौथा सीज़न कल बठिंडा से शुरू होने जा रहा है, जिसके उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान शामिल होंगे। इस समारोह में गुरदास मान और कुलविंदर बिल्ला समेत जाने-माने पंजाबी कलाकार परफॉर्म करेंगे। उन्होंने पूरे पंजाब के लोगों से इन खेलों में हिस्सा लेने, उन्हें सपोर्ट करने और राज्य के युवा खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि बठिंडा दूसरी बार 'खेडां वतन पंजाब दियां ' के लॉन्च की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चौथे सीज़न में पूरे पंजाब से खिलाड़ियों का रिकॉर्ड हिस्सा देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, "'खेडां वतन पंजाब दियां ' एक अनोखी पहल है क्योंकि यह अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों को जोड़ती है। दादा-दादी, माता-पिता और पोते-पोतियों सभी को हिस्सा लेने और मुकाबला करने का मौका मिलता है। यह सिर्फ़ एक स्पोर्ट्स समारोह नहीं है, बल्कि एक मूवमेंट है जो पंजाबियों को स्पोर्ट्स से जोड़ रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ्य माहौल बना रहा है।"</p>
<p style="text-align:justify;">'आप' के मीडिया इंचार्ज ने कहा, "चौथे सीज़न में, 9 आयु वर्गां के अधीन14 साल से 70 साल और उससे ज़्यादा उम्र के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। 38 स्पोर्ट्स में मुकाबले करवाए जाएंगे और 4 पैरा-स्पोर्ट्स को भी शामिल किया गया हैं। हम खिलाड़ियों की मांग मानते हुए लड़के और लड़कियों दोनों के लिए गांव स्तर पर टेनिस-बॉल क्रिकेट प्रदर्शनी मुकाबले भी करवा रहे हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">बलतेज पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि खिलाड़ियों को बिना किसी देरी के उनकी इनामी राशि मिले। उन्होंने कहा, "जब भी कोई खिलाड़ी 'खेडां वतन पंजाब दियां ' में जीतता है, तो इनामी राशि सीधे उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत को रिप्रेजेंट करने वाले एथलीटों को समय पर फाइनेंशियल मदद भी सुनिश्चित की है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "जब हमारे खिलाड़ी देश को रिप्रेजेंट करने की तैयारी कर रहे हों, तो उन्हें पैसे की चिंता नहीं करनी चाहिए। इसीलिए कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स के लिए चुने गए एथलीटों को मुकाबलों में जाने से पहले ही उनकी तैयारी के लिए वित्तीय मदद दी जाती है।"</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय हॉकी टीम को सरकार से मिली मदद को याद करते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा, "जब भारतीय हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीतकर लौटी, तो पंजाब सरकार ने वादे के मुताबिक खिलाड़ियों को तुरंत 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। केंद्र से इनाम की रकम बाद में आई, लेकिन पंजाब ने हमारे खिलाड़ियों को इंतज़ार नहीं कराया। यह मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का खिलाड़ियों के प्रति कमिटमेंट दिखाता है।"</p>
<p style="text-align:justify;">बलतेज पन्नू ने बताया, "पूरे पंजाब में 3,100 से ज़्यादा गांव-स्तर के स्पोर्ट्स स्टेडियम चालू किए जा रहे हैं। इन ग्राउंड्स में फ्लडलाइट्स और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। बच्चे शाम को वॉलीबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट और दूसरे गेम खेलने के लिए इन ग्राउंड्स का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा कर रहे हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">स्पोर्ट्स के प्रति उत्साह को सरकार के चल रहे 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान से जोड़ते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा कि स्पोर्ट्स युवाओं को नशों का एक अच्छा विकल्प देते हैं। "स्पोर्ट्स हमारे युवाओं को एक सही दिशा और क्रिएटिव विकल्प देते हैं। युद्ध नशेआं विरुद्ध सिर्फ सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती। 'विलेज डिफेंस कमेटियों' (गांव की सुरक्षा समितियों) के ज़रिए आम नागरिकों को भी इस जंग में शामिल किया गया है। सरकारी मशीनरी के ज़रिए मिली जानकारी की जांच की जाती है और उसके हिसाब से कार्रवाई की जाती है।"</p>
<p style="text-align:justify;">बलतेज पन्नू ने खिलाड़ियों के सम्मान और सहयोग के लिए सरकार के प्रयत्नों पर रोशनी डाली। बलतेज पन्नू ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे खिलाड़ियों को पता हो कि पंजाब उनके साथ खड़ा। मई महीने में, 85 खिलाड़ियों को महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जबकि 11 जाने-माने खिलाड़ियों को पीसीएस और डीएसपी की नौकरी दी गई है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि हमारे खिलाड़ी पैसे की अनिश्चितता के दबाव के बिना अपने स्पोर्ट्स करियर पर ध्यान दे सकें।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पंजाब अक्टूबर-नवंबर में मोहाली और जालंधर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी टूर्नामेंट की भी मेज़बानी करने वाला है। “अक्टूबर-नवंबर में मोहाली और जालंधर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी होस्ट करना पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक पल है। यह एक ऐसा राज्य है जिसने भारत के कुछ बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी दिए हैं, और यहां एक इंटरनेशनल स्तर का हॉकी टूर्नामेंट ऑर्गनाइज़ करने से देश के ‘स्पोर्ट्स पावरहाउस’ के तौर पर पंजाब की पहचान और मज़बूत होती है।”</p>
<p style="text-align:justify;">बलतेज पन्नू ने कहा, "12 अगस्त से, 'मशाल' पूरे पंजाब में घूम रही है और इसे लोगों और जाने-माने खिलाड़ियों से ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। इसने 'खेल पंजाब की मातृभूमि हैं' का मैसेज राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाया है और लोगों को इस स्पोर्ट्स मूवमेंट का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित किया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">बलतेज पन्नू ने अपील की, "मैं हर पंजाबी से अपील करता हूं कि वे खेलों में हिस्सा लें, हमारे खिलाड़ियों को बढ़ावा दें और एक हेल्दी और मज़बूत पंजाब बनाने का हिस्सा बनें। सभी को मुख्यमंत्री भगवंत मान के 'रंगला पंजाब' के सपने को पूरा करने में अपना योगदान देना</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:02:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सबूत पेश करने के बजाय, ईडी पत्र, लीक और मीडिया रिपोर्ट के ज़रिए आप लीडरशिप को बदनाम कर रही है: अमन अरोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा का मकसद अराजकता पैदा करना, रानीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई पंजाब सरकार ठीक से काम न कर सके: अमन अरोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/instead-of-presenting-evidence-aman-arora-is-defaming-aap-leadership/article-90600"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong>  आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रेसिडेंट और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बुधवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) पर निशाना साधते हुए कहा कि पक्के सबूत पेश करने के बजाय, सेंट्रल जांच एजेंसी बार-बार पत्र, मीडिया लीक और अस्पष्ट आरोपों के ज़रिए आप लीडरशिप को बदनाम कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस पहले ही एजेंसी से पूरे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांग चुकी है, लेकिन ईडी साफ और काम के सबूत देने में नाकाम रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप पंजाब के प्रदेश प्रधान अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि भाजपा का मुख्य मकसद अराजकता पैदा करना, राजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई पंजाब सरकार ठीक से काम न कर सके। अमन अरोड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सीबीआई की जो बुराई की थी, वह सही थी, और आज ईडी और सीबीआई "भाजपा के तोते" बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बात करते हुए, आप पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “ईडी की तरफ से पंजाब डीजीपी को बार-बार भेजे गए पत्र, जिसमें सेक्शन 66(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग वाला ताजा पत्र भी शामिल है, भाजपा की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार की ‘बदतमीज़ी और हताशा’ दिखाते हैं। पंजाब पुलिस ने आरोपो के समर्थन में पूरे दस्तावेजी और इलेक्ट्रोनिक सबूत मांगने के लिए 28 अगस्त को ही ईडी को पत्र लिखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">आप प्रधान ने बताया कि पंजाब पुलिस ने ईडी को स्पष्ट तौर पर कहा है कि अब तक दी गई सामग्री अस्पष्ट है और रेड के दौरान ज़ब्त किए गए पूरे सबूत, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा दिया जाए ताकि सही जांच की जा सके। ईडी को 1 सितंबर को ज़रूरी सामग्री के साथ एक ऑफिसर भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन ऐसा कोई ऑफिसर पेश नहीं हुआ।”</p>
<p style="text-align:justify;">सेंट्रल एजेंसियों के कामकाज पर तंज कसते हुए, अमन अरोड़ा ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने सीबीआई को केंद्र सरकार का “तोता” कहा था। उन्होंने कहा, "आज मैं नरेंद्र मोदी की उस बात से 100% सहमत हूं। चाहे ईडी हो, सीबीआई हो या दूसरी सेंट्रल एजेंसियां, ये सभी भाजपा सरकार के तोतों की तरह काम कर रही हैं।"अमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी बिना किसी गड़बड़ी के साबित किए मीडिया में संजीव अरोड़ा, लाल चंद कटारूचक और आप नेताओं के नाम बिना कोई गलत काम साबित किए उछाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुराने दोस्त गौरव धीर के ज़रिए उन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले के फैक्ट्स बताते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि ऑल्ट प्रोजेक्ट से जुड़े चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ (सीएलयू) के लिए छह बार मंज़ूरी दी गई, लेकिन आप सरकार के समय में एक भी सीएलयू नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “17 नवंबर 2000, 14 मई 2012, 25 जून 2013, 17 फरवरी 2018, 7 मार्च 2018 और 7 मार्च 2022 की मंज़ूरी पिछली कांग्रेस या अकाली-भाजपा सरकारों के समय दी गई थी।”</p>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि लेआउट प्लान 2011 से 2025 के बीच में कई बार बदले गए, जिनमें से ज़्यादातर पिछली सरकारों के समय में किए गए। अमन अरोड़ा ने कहा, “अगर ईडी को लगता है कि ये मंज़ूरी और बदलाव गैर-कानूनी थे, तो उसे पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिए, न कि सिर्फ़ आप सरकार को टारगेट करना चाहिए।”</p>
<p style="text-align:justify;">अमन अरोड़ा ने डेवलपर्स के लिए 25% लैंड ओनरशिप पॉलिसी पर ईडी के फोकस पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी 2012 में अकाली-भाजपा सरकार के समय शुरू हुई थी और 2025 में आप सरकार ने इसमें सुधार किया। उन्होंने दावा किया, "आप सरकार ने पॉलिसी में बदलाव किया है और डेवलपर्स के लिए लाइसेंस और सीएलयू लेने के लिए 100% ज़मीन का मालिकाना हक होना ज़रूरी कर दिया है, जिससे पहले की गलत पॉलिसी ठीक हो गई है।"</p>
<p style="text-align:justify;">अमन अरोड़ा ने मामले से जुड़ी एफआईआर पर ईडी के भरोसे पर भी सवाल उठाया और कहा कि संबंधित एफआईआर को हाई कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। उन्होंने पूछा, "अगर एफआईआर ही रद्द कर दी गई है, तो ईसीआईआर का क्या आधार है?"</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी को मौजूदा सरकार को चुनकर निशाना बनाने के बजाय उस पूरे समय की जांच करनी चाहिए, जब ये मंज़ूरियां और पॉलिसी से जुड़े फ़ैसले लिए गए थे। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री सुखबीर सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह सरकारिया का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, "अगर आपकी जांच सच्ची है, तो सबकी जांच करें। 2012 के बाद जो भी जिम्मेदार रहे हैं, उन्हें बुलाएं, तभी सच्चाई सामने आएगी।"</p>
<p style="text-align:justify;">गौरव धीर का नाम अपने साथ जोड़कर पॉलिटिकल नैरेटिव बनाने की कोशिशों को खारिज करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि उनकी दोस्ती का किसी भी कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, "गौरव कल भी मेरा दोस्त था, आज भी मेरा दोस्त है और कल भी मेरा दोस्त रहेगा। अगर ईडी के पास अमन अरोड़ा के खिलाफ कोई सबूत है, तो मुझ तक पहुंचने के लिए किसी और का नाम इस्तेमाल करने के बजाय, उन्हें सीधे अमन अरोड़ा से बात करनी चाहिए।"</p>
<p style="text-align:justify;">अमन अरोड़ा ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से भी अपील की कि वे खबर छापने से पहले ईडी के लगाए गए आरोपों को खुद से वेरिफाई करें और संबंधित आप नेताओं का पक्ष लें। उन्होंने कहा कि बेबुनियाद आरोपों को बार-बार छापने से इमेज खराब हो रही है और इससे प्रभावित लोग बदनामी के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर मजबूर हो सकते हैं। अमन अरोड़ा ने कहा, “यह जांच से भागने का मामला नहीं है। हम फैक्ट्स और सबूतों के आधार पर बिना किसी भेदभाव के जांच का स्वागत करते हैं। लेकिन सेलेक्टिव टारगेटिंग, मीडिया लीक और कैरेक्टर एसेसिनेशन की कोशिशें सबूत का विकल्प नहीं हो सकतीं।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भाजपा की बड़ी रणनीति भ्रम पैदा करना, राजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई सरकार ठीक से काम न कर सके। “पंजाब के लोग समझते हैं कि क्या हो रहा है। भाजपा के पास गवर्नेंस और डेवलपमेंट पर कोई जवाब नहीं है, इसलिए वह डर और अफरा-तफरी का माहौल बनाना चाहती है।”</p>
<p style="text-align:justify;">अमन अरोड़ा ने दोहराया कि अगर ईडी के पास पक्के सबूत हैं, तो उसे मांग के मुताबिक पंजाब पुलिस को सौंप देना चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर सबूत हैं, तो पेश करें। जांच ठीक से होने दें। लेकिन सेलेक्टिव नोटिस और अखबारों की हेडलाइन की यह पॉलिटिक्स नहीं चलेगी।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 14:14:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा कृषि विश्वविद्यालय में हॉर्टिकल्चर नॉलेज सेंटर को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[पी.ए.यू. लुधियाना में बनाया जाएगा हॉर्टिकल्चर नॉलेज सेंटर : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/chief-minister-bhagwant-singh-mann-approves-horticulture-knowledge-center-in/article-90596"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> पंजाब में फसली विविधता को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने और प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए बड़ी पहल के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना में एक हॉर्टिकल्चर नॉलेज सेंटर स्थापित करने को मंजूरी दी। यह पहल 1300 करोड़ रुपये की परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बागवानी का विस्तार करना, वैल्यू चेन को मजबूत करना और किसानों की आय को बढ़ाना है। उल्लेखनीय है कि पंजाब ने 2036 तक बागवानी के तहत क्षेत्र को 16 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।</p><p style="text-align:justify;">बागवानी विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "परियोजना का मुख्य उद्देश्य बागवानी के तहत क्षेत्र का विस्तार और मजबूत वैल्यू चेन बुनियादी ढांचे के माध्यम से बागवानी फसलों को बढ़ावा देना है। यह न केवल फसली विविधता लाकर किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाने और पानी के संरक्षण के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर भी प्रोत्साहित करेगा।"</p><p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा, "पंजाब में इस समय 41.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र खेती के अधीन है, जिसमें से 5.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बागवानी के तहत है, जिसका उत्पादन 106.10 लाख मीट्रिक टन है।" मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "बागवानी में फल, सब्जियाँ, मसाले और सुगंधित पदार्थ, फूल और अन्य वस्तुओं की खेती की जाती है। इसमें मुख्य फल किन्नू और अमरूद हैं, जबकि मुख्य सब्जियाँ आलू और मटर हैं। इसके अलावा मधुमक्खी पालन और मशरूम की खेती भी बागवानी का ही हिस्सा है।"</p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "बागवानी में विविधता लाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जेआईसीए के सहयोग वाली इस 1300 करोड़ी परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना में मशीनरी, बुनियादी ढांचे, मार्केटिंग, बीज और अनुसंधान में निवेश की संभावना है, जिसके तहत 2036 तक बागवानी के अधीन क्षेत्र को 16 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाना है, जो वर्तमान स्तर से लगभग 300 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है।"</p><p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी मुख्य प्राथमिकता एक टिकाऊ बागवानी वैल्यू चेन विकसित करना, बागवानी के तहत क्षेत्र का विस्तार और किसानों को प्रोत्साहित करना है ताकि उच्च-गुणवत्ता वाली एवं लाभकारी पौधों से नर्सरियों की विविधता और सुधार को बढ़ावा दिया जा सके। इसके साथ ही कटाई के बाद प्रबंधन बुनियादी ढांचे के विकास, बाजार पहुंच में सुधार, विस्तार सेवाओं को मजबूत करने, तकनीकी सहायता प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।"</p><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में हॉर्टिकल्चर नॉलेज सेंटर व्यापक एवं महत्वपूर्ण पहल है, जो अनुसंधान, तकनीकी ज्ञान, क्षमता निर्माण और नवीनतम बागवानी पद्धतियों को अपनाने के लिए संस्थागत सहायता प्रदान करेगा।"</p><p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "इस पहल से बेहतर पौधों और खेती से लेकर कटाई के बाद के प्रबंधन, मार्केटिंग और बाजार पहुंच तक संपूर्ण बागवानी परिवेश को मजबूत करने की उम्मीद है, जिससे टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए किसानों की अर्थव्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त अवसर पैदा होंगे।" बैठक में मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, कृषि विभाग के सचिव अरशदीप सिंह थिंद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 14:07:40 +0530</pubDate>
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                <title>*किशोरावस्था का मूड स्विंग या किसी बड़े ख़तरे का शुरुआती संकेत? पंजाब ने अभिभावकों से नशे की लत हावी होने से पहले नशीले पदार्थों के सेवन के संकेत पहचानने की अपील की*</title>
                                    <description><![CDATA[देखभाल, संवेदनशीलता और संवाद से हर बच्चे को नशे की लत से बचाया जा सकता है: डॉ. बलबीर सिंह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/adolescent-mood-swings-or-an-early-sign-of-major-danger/article-90497"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत अब नशे की आपूर्ति पर रोक लगाने के साथ-साथ नशे की चपेट में आने की आशंका को शुरुआती स्तर पर पहचानने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उस समय ही मदद मिल जाए, जब कभी-कभार या प्रयोग के तौर पर किया जाने वाला नशीले पदार्थों का सेवन आगे चलकर नशे पर निर्भरता या लत में न बदल पाए। ऐसे में अभिभावकों के सामने एक सीधा सवाल है: क्या परिवार के सदस्य ऐसे संकेतों को पहचान सकते हैं, जिनके आधार पर समय रहते हस्तक्षेप कर बच्चे को नशे की लत में जाने से रोका जा सके? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संकेत मौजूद होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा, “देखभाल, संवेदनशीलता और संवाद के माध्यम से हर बच्चे को नशे की लत से बचाया जा सकता है। परिवार, देखभाल करने वालों और पूरे समाज के रूप में हमें अपनी आँखें, कान और दिल खुले रखने होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “यदि आपको अपने किसी करीबी व्यक्ति के व्यवहार में कुछ चिंताजनक बदलाव दिखाई दें, तो उन पर ध्यान दें और संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया दें।”</p>
<h4 style="text-align:justify;">शुरुआती संकेतों की पहचान</h4>
<p style="text-align:justify;">नशे की लत हमेशा किसी बड़े या स्पष्ट चेतावनी संकेत के साथ सामने नहीं आती। अक्सर इसकी शुरुआत बहुत चुपचाप होती है—जैसे व्यवहार में बदलाव, पुराने दोस्तों की जगह नए दोस्तों का आ जाना, किसी गोपनीय या छिपे हुए समूह का हिस्सा बन जाना, घंटों बाथरूम या अंदर से बंद कमरे में रहना, या उन गतिविधियों और शौकों में अचानक रुचि खत्म हो जाना, जो पहले बच्चे के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण हुआ करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अभिभावक बच्चे से बात करें तो उन्हें गुस्से के दौर, भावनात्मक उबाल जैसे व्यावहारिक बदलाव नज़र आ सकते हैं। स्कूल या शिक्षकों की ओर से बार-बार शिकायतें मिलना भी एक संकेत हो सकता है। नींद में बदलाव भी महत्त्वपूर्ण संकेत है। पूरी रात जागते रहना, असामान्य समय पर सोना या दिनचर्या में अचानक बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि कुछ ठीक नहीं है। इसी तरह, बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार पैसे माँगना और यह न बता पाना कि पैसा कहाँ ख़र्च हुआ, या घर में पैसे गायब होना भी चिंता का कारण हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूप-रंग और व्यक्तिगत स्वच्छता की उपेक्षा, भूख कम होना या वजन घटना तथा खान-पान की आदतों में बदलाव भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ शारीरिक संकेत भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे आँखों का लाल या बुझा-बुझा दिखना, पुतलियों के आकार में असामान्य बदलाव, अत्यधिक उनींदापन या बार-बार थकान महसूस होना, बेचैनी, हाथ-पैर काँपना, बोलने में अस्पष्टता, शरीर के तालमेल में कमी, बार-बार चोट के निशान या गंभीर मामलों में इंजेक्शन लगाने के निशान।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक संकेत के आधार पर नशीले पदार्थों के सेवन की पुष्टि नहीं की जा सकती। किशोर का कभी-कभार देर रात तक जागना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि कोई बच्चा लगातार ख़ुद को अलग-थलग रखने लगे, अत्यधिक गोपनीय व्यवहार करे, अपने आसपास की चीज़ों के प्रति उदासीन नज़र आए और मामूली सवाल पूछने पर भी रक्षात्मक हो जाए, तो इन संकेतों के एक साथ दिखाई देने पर इसे एक व्यवहारिक पैटर्न के रूप में देखा जाना चाहिए। ऐसे समय में अभिभावकों को विशेषज्ञ की मदद लेने पर विचार करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ज़िला नोडल मनोचिकित्सक, संगरूर, डॉ. ईशान प्रकाश ने कहा, “परिवारों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलतियों में से एक है मदद लेने से पहले इंतजार करते रहना। बच्चा नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है, यह साबित करने के लिए बातचीत शुरू करने या किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने से पहले पुख्ता सबूत का इंतज़ार करना ज़रूरी नहीं है।हमारे समाज में कई अभिभावकों की सामाजिक कलंक या ‘लोग क्या कहेंगे’ जैसी चिंता ,युवा को समय पर सहायता मिलने में बाधा बन सकती है। किसी युवा के गंभीर परेशानी में पहुँचने का इंतज़ार करने के बजाय समय रहते मार्गदर्शन लेना हमेशा बेहतर होता है।” उन्होंने कहा, “एक देखभाल करने वाला अभिभावक नशे की लत के ख़िलाफ़ पहली सुरक्षा पंक्ति है। बच्चों के लिए ऐसा सुरक्षित सहारा बनें कि नशा उनके लिए कभी बचने का रास्ता न बने।”</p>
<h4 style="text-align:justify;">समय रहते हस्तक्षेप</h4>
<p style="text-align:justify;">एक बार व्यवहार में किसी तरह का पैटर्न नज़र आने लगे, तो उसे पहचानने के साथ-साथ अभिभावक की प्रतिक्रिया भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण हो जाती है। बच्चे को भाषण देने या डाँटने के बजाय खुले सवाल पूछना, शांत और निष्पक्ष रवैया अपनाना तथा बच्चे की बात को वास्तव में ध्यान से सुनना अधिक प्रभावी होता है। उदाहरण के लिए, “हमें लगता है कि कोई बात तुम्हें परेशान कर रही है। क्या तुम बताना चाहोगे कि इन दिनों स्कूल में क्या चल रहा है?” जैसे सरल सवाल सीधे आरोप लगाने की तुलना में बातचीत के लिए कहीं अधिक बेहतर माहौल बना सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि अभिभावकों को पता चलता है कि बच्चा नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है, तो स्वाभाविक रूप से कड़ी प्रतिक्रिया देने का मन हो सकता है, लेकिन ऐसा करना अक्सर स्थिति को और बिगाड़ सकता है। भावनात्मक रूप से तनावपूर्ण टकराव बच्चे को और अधिक गोपनीयता की ओर धकेल सकता है। ऐसे में बेहतर तरीका है कि अभिभावक पहले खुद को शांत करें और फिर बच्चे के साथ निजी और शांतिपूर्ण बातचीत करें, जिसका उद्देश्य उसके व्यवहार के पीछे के कारणों को समझना हो। यदि नशीले पदार्थों के सेवन का संदेह हो या बच्चा स्वयं इसकी जानकारी दे, तो अभिभावकों को उसे शर्मिंदा करने, धमकाने, किसी नकारात्मक नाम या लेबल से संबोधित करने अथवा केवल सज़ा पर निर्भर रहने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे तरीके बच्चे को मदद माँगने से हतोत्साहित कर सकते हैं। इसके बजाय, अभिभावकों को उसकी बात ध्यान से सुननी चाहिए, अपनी चिंता और परवाह व्यक्त करनी चाहिए तथा बच्चे के साथ मिलकर उसके लिए उचित सहायता और उपचार का रास्ता तलाशना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आप अपने बच्चे को लेकर चिंतित हैं या यह समझ नहीं पा रहे हैं कि शुरुआत कहाँ से करें, तो आपको यह सब अकेले करने की ज़रूरत नहीं है। परिवार टेली-मानस हेल्पलाइन 1800-89-14416 पर संपर्क कर गोपनीय और विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 11:09:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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                <title>ABVP की जीत पर AAP/ASAP का बड़ा सवाल: विवादित दस्तावेज़ों और चुनावी पात्रता पर हाईकोर्ट जाएगी टीम, PU प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को दी थी पूरी जानकारी, कार्रवाई का आश्वासन मिला; चुनाव करा दिया गया, अब अदालत में चुनौती देगी ASAP: “नियमों को ताक पर रखकर हुआ चुनाव तो परिणाम भी सवालों के घेरे में”]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/aapasaps-big-question-on-abvps-victory-team-will-go-to/article-90495"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> पंजाब यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ चुनाव के बाद जहां ABVP उम्मीदवार अंकित बिधान की जीत की खबर सामने आ रही है, वहीं आम आदमी पार्टी से जुड़ी छात्र टीम ASAP ने इस पूरे चुनाव और विशेष रूप से ABVP उम्मीदवार की चुनावी पात्रता को हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। ASAP का कहना है कि चुनाव से पहले ही उसने पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को उम्मीदवार की पात्रता, उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड, कथित Unfair Means (UMC) मामले, चुनाव लड़ने की योग्यता और दस्तावेज़ों से जुड़े गंभीर सवालों से लिखित/औपचारिक रूप से अवगत कराया था। प्रशासन की ओर से मामले पर संज्ञान लेने का भरोसा भी दिया गया, लेकिन चुनाव संपन्न होने तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">ASAP के अनुसार, अब इस पूरे मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा और यह सवाल उठाया जाएगा कि जब किसी उम्मीदवार की चुनाव लड़ने की पात्रता पर गंभीर आपत्तियां पहले से विश्वविद्यालय के संज्ञान में थीं, तो उन पर निर्णय लिए बिना उसे चुनाव लड़ने की अनुमति किस आधार पर दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">“जिस उम्मीदवारी पर चुनाव से पहले सवाल उठे, उसके परिणाम को बिना जांच के कैसे वैध माना जा सकता है?” ASAP का आरोप है कि अंकित बिधान के शैक्षणिक एवं अनुशासनात्मक रिकॉर्ड को लेकर गंभीर तथ्य हैं, जिनका उल्लेख चुनावी प्रक्रिया में किया जाना आवश्यक था। टीम के मुताबिक, बिधान पंजाब यूनिवर्सिटी में LL.B. की पढ़ाई के दौरान कई परीक्षाओं में असफल रहा और उसके खिलाफ Unfair Means का मामला भी सामने आया, जिसके चलते उसे वर्ष 2023 से 2025 तक विश्वविद्यालय से debar किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">ASAP का यह भी कहना है कि इसके बावजूद बाद में गुजरात की Sabarmati University से प्राप्त MA डिग्री के आधार पर पंजाब यूनिवर्सिटी में PhD में प्रवेश लिया गया। इसी प्रवेश की पात्रता और संबंधित दस्तावेज़ों की वैधता को लेकर भी टीम ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ASAP का दावा है कि उम्मीदवार की शैक्षणिक पात्रता और दस्तावेज़ों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक थी, लेकिन इन सवालों के बावजूद उसे चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">Lingdoh Committee के नियमों का भी हवाला</h4>
<p style="text-align:justify;">ASAP ने छात्र चुनावों के लिए लागू Lyngdoh Committee recommendations का हवाला देते हुए कहा है कि चुनावी पात्रता के संबंध में विश्वविद्यालय को उम्मीदवार के अनुशासनात्मक और अकादमिक रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए थी। टीम का कहना है कि यदि किसी छात्र को अनुशासनात्मक कारणों से विश्वविद्यालय से debar किया गया हो या उसके academic/disciplinary मामलों को लेकर गंभीर स्थिति हो, तो उसकी चुनावी पात्रता की जांच महज औपचारिकता नहीं हो सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">“हमारा सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से है। अगर नियम सभी छात्रों के लिए समान हैं, तो वे किसी राजनीतिक संगठन के उम्मीदवार के लिए अलग कैसे हो सकते हैं?” — ASAP</p>
<h4 style="text-align:justify;">चुनाव से पहले प्रशासन को बताया, फिर भी चुनाव करा दिया गया: अब कोर्ट में जवाब मांगेगी टीम</h4>
<p style="text-align:justify;">ASAP ने कहा कि सबसे गंभीर प्रश्न पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका को लेकर है। टीम ने दावा किया कि चुनाव से पहले ही प्रशासन को इन सभी आपत्तियों और दस्तावेज़ों से संबंधित सवालों की जानकारी दे दी गई थी और प्रशासन ने मामले को देखने की बात कही थी। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी और मतदान संपन्न हो गया। ASAP का कहना है कि अब प्रशासनिक स्तर पर जवाब नहीं, बल्कि न्यायिक स्तर पर जवाब मांगा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम जल्द ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर यह मांग रखेगी कि उम्मीदवार की चुनावी पात्रता, उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों और उसके कथित disciplinary record की निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि चुनावी नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो चुनाव परिणाम की वैधता पर भी उचित कानूनी निर्णय लिया जाए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">“जीत का जश्न बाद में, पहले दस्तावेज़ और पात्रता की जांच हो”</h4>
<p style="text-align:justify;">ASAP ने स्पष्ट किया कि उसका संघर्ष किसी छात्र संगठन की जीत या हार तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय के छात्र चुनावों में नियम सभी पर बराबर लागू होंगे या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर कुछ उम्मीदवारों को अलग मानदंड दिए जाएंगे। ASAP ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार की पात्रता पर चुनाव से पहले ही गंभीर सवाल विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रख दिए गए थे, तो उनका निपटारा किए बिना चुनाव करवाना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। “अगर दस्तावेज़ सही हैं तो जांच से डरने की जरूरत नहीं है। अगर पात्रता सही है तो कोर्ट में भी वह साबित हो जाएगी। लेकिन जांच से पहले ही जीत को अंतिम सत्य मान लेना स्वीकार नहीं किया जा सकता।”</p>
<p style="text-align:justify;">ASAP ने कहा कि वह इस मामले को पूरी मजबूती के साथ कानूनी मंच पर ले जाएगी और विश्वविद्यालय चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमों के समान अनुपालन की लड़ाई जारी रखेगी। “जिस मुद्दे को चुनाव से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को देखना चाहिए था, अब वही मुद्दा अदालत के सामने जाएगा। चुनाव खत्म हुआ है, सवाल खत्म नहीं हुए।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 11:00:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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                <title>पंजाब में दशकों बाद पहली बार भूजल स्तर में वृद्धि दर्ज की गई: बरिंदर कुमार गोयल</title>
                                    <description><![CDATA[भूजल दोहन की दर वर्ष 2022 के 164 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2026 में 152.22 प्रतिशत हुई; अति-शोषित ब्लॉकों की संख्या 117 से घटकर 110 और सुरक्षित ब्लॉकों की संख्या 17 से बढ़कर 20 हुई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/rise-in-groundwater-level-recorded-for-the-first-time-in/article-90494"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-09/chandigarh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज बताया कि राज्य के भूजल स्तर में बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा जारी 2026 के ताजा आकलन के अनुसार दशकों बाद पहली बार राज्य में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि भूजल के दोहन की दर वर्ष 2022 के 164 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2026 में 152.22 प्रतिशत रह गई है, जबकि आकलन किए गए अति-शोषित ब्लॉकों की संख्या 117 से घटकर 110 हो गई है और सुरक्षित ब्लॉकों की संख्या 17 से बढ़कर 20 हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां पंजाब भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, "केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा जारी ताजा आकलन में दर्ज किया गया सुधार, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा नहरी पानी को खेतों तक पहुंचाकर भूजल संरक्षण के लिए किए जा रहे ठोस प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।"</p>
<p style="text-align:justify;">जल संसाधन मंत्री ने कहा कि ताजा भूजल आंकड़े हमारे प्रयासों के महत्व को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, "भूजल निकालने की वार्षिक दर वर्ष 2022 के 28.02 बिलियन क्यूबिक मीटर (बी.सी.एम.) से घटकर वर्ष 2026 में 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर (बी.सी.एम.) रह गई है, जबकि भूजल के समग्र स्तर में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है।" मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, "यह पंजाब के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। दशकों से भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही थी। यह पहली बार है कि हमने इसमें वृद्धि दर्ज की है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पंजाब में भूजल संबंधी 153 ब्लॉकों को सुरक्षित, अर्ध-गंभीर, गंभीर और अति-शोषित ब्लॉकों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने बताया, "ताजा आकलन के अनुसार पहले अति-शोषित और गंभीर श्रेणी में आने वाले कई ब्लॉकों में पानी के स्तर में सुधार हुआ है और वे बेहतर श्रेणियों में आ गए हैं।" पानी के स्तर में हुए सुधार के बारे में जानकारी देते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 की तुलना में 14 ब्लॉक बेहतर श्रेणी में आ गए हैं, जिनमें से चार ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में आए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार फाजिल्का का अर्नीवाला शेख सुभानपुर अर्ध-गंभीर से सुरक्षित श्रेणी में आ गया है और इस क्षेत्र में वर्ष 2025 के दौरान भूजल निकालने की दर 73.34 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2026 में 64.38 प्रतिशत हो गई है। फिरोजपुर का मखू अर्ध-गंभीर से सुरक्षित श्रेणी में आ गया है और यहां भूजल निकालने की दर 77.85 प्रतिशत से घटकर 66.82 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह होशियारपुर का हाजीपुर अर्ध-गंभीर से सुरक्षित श्रेणी में आ गया है और यहां पानी निकालने की दर 81.67 प्रतिशत से घटकर 62.16 प्रतिशत रह गई है, जबकि पठानकोट का नरोट जैमल सिंह अर्ध-गंभीर से सुरक्षित श्रेणी में आ गया है और यहां पानी निकालने की दर 70.94 प्रतिशत से घटकर 66.47 प्रतिशत रह गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह बाकी 10 ब्लॉकों के वर्गीकरण में भी सुधार दर्ज किया गया है। फिरोजपुर गंभीर से अर्ध-गंभीर श्रेणी में आ गया है और यहां भूजल निकालने की दर 94.49 प्रतिशत से घटकर 76.66 प्रतिशत रह गई है; ममदोट गंभीर से अर्ध-गंभीर श्रेणी में आ गया है, जिसमें भूजल निकालने की दर 99.85 प्रतिशत से घटकर 86.59 प्रतिशत रह गई है; गुरदासपुर अति-शोषित से गंभीर श्रेणी में आ गया है और यहां भूजल की निकासी 110.70 प्रतिशत से घटकर 92.93 प्रतिशत हो गई है तथा काहनूवान अति-शोषित से गंभीर श्रेणी में आ गया है और यहां भूजल निकालने की दर 101.04 प्रतिशत से घटकर 98.01 प्रतिशत रह गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह श्री हरगोबिंदपुर में पानी निकालने की दर 95.53 प्रतिशत से घटकर 75.54 प्रतिशत होने से यह 'गंभीर' से 'अर्ध-गंभीर' श्रेणी में आ गया है; भुंगा 92.14 प्रतिशत से घटकर 84.17 प्रतिशत होने के साथ गंभीर से अर्ध-गंभीर; <a href="https://www.google.com/maps/search/%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-2?entry=gmail&amp;source=g">होशियारपुर-2</a> 97.81 प्रतिशत से घटकर 78.53 प्रतिशत होने के साथ गंभीर से अर्ध-गंभीर; माहिलपुर 109.86 प्रतिशत से घटकर 92.23 प्रतिशत होने से 'अति-शोषित' से गंभीर; कोट ईसे खां (धर्मकोट, मोगा) 114.32 प्रतिशत से घटकर 97.67 प्रतिशत होने से अति-शोषित से गंभीर और एस.बी.एस. नगर का औड़ ब्लॉक 90.84 प्रतिशत से घटकर 89.91 प्रतिशत होने के साथ गंभीर से अर्ध-गंभीर श्रेणी में आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि अन्य 95 ब्लॉकों में भी विभिन्न स्तरों पर सुधार देखने को मिला है। परिणामस्वरूप भूजल की स्थिति के संबंध में राज्य के कुल 153 आकलन किए गए ब्लॉकों में से 109 ब्लॉकों में सुधार दर्ज किया गया है, जिसे उन्होंने राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। इन 95 ब्लॉकों में से तीन ब्लॉकों में 30 प्रतिशत से अधिक सुधार दर्ज किया गया है, सात में 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत के बीच, 23 में 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच, जबकि 62 ब्लॉकों में 0 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच सुधार दर्ज किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जल संसाधन मंत्री ने कहा कि पंजाब में भूजल की स्थिति में यह सुधार भूजल रिचार्ज में वृद्धि और पानी निकालने की दर में कमी के संयुक्त प्रयासों के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा, "नहरी पानी के बेहतर उपयोग, सिंचाई ढांचे के नवीनीकरण और विस्तार, जल संरक्षण तथा रिचार्जिंग उपायों ने सामूहिक रूप से इस सकारात्मक बदलाव में योगदान दिया है।" उन्होंने कहा कि नहरों की बड़े स्तर पर बहाली और नवीनीकरण, खालों की मरम्मत और विस्तार, पाइपलाइन बिछाने तथा टेलों पर स्थित हर खेत तक नहरी पानी पहुंचाना सुनिश्चित करने से राज्य के भूजल संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, "हमारा उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था: नहरी पानी को खेतों तक पहुंचाना ताकि किसानों को पूरी तरह भूजल पर निर्भर न रहना पड़े। यह केवल सिंचाई से जुड़ा कदम नहीं है; यह आने वाली पीढ़ियों के लिए पंजाब के जल भंडारों को सुरक्षित करने का भी एक प्रयास है।" उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों के दौरान भूजल की स्थिति काफी चिंताजनक हो गई थी क्योंकि पंजाब में भूजल स्तर लगातार गिर रहा था। उन्होंने आगे कहा, "इसलिए पंजाब सरकार ने उपलब्ध नहरी पानी के उपयोग को बढ़ाने और पूरे राज्य में नहरी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ठोस रणनीति अपनाई।"</p>
<p style="text-align:justify;">जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि नहरी पानी का उपयोग, जो वर्ष 2022 तक केवल लगभग 26 प्रतिशत था, अब बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा, "इस बड़े बदलाव को लाने के लिए पंजाब सरकार ने लगभग 7,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और हजारों किलोमीटर खालों तथा अन्य सिंचाई ढांचे का निर्माण और सुदृढ़ीकरण किया गया है।" उन्होंने कहा कि राज्य के जल भंडारों में जमा पंजाब के हिस्से के पानी के उचित उपयोग को भी मुख्य प्राथमिकता बनाया गया। उन्होंने आगे कहा, "पंजाब में 1117 नहरें और माइनर हैं, जिनका उपयोग पहले उनकी मूल क्षमता से काफी कम हो रहा था।"</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि हालांकि नहरी प्रणाली की पानी ले जाने की क्षमता लगभग 36,000 क्यूसेक है, लेकिन पंजाब इस वर्ष 1 जून से नियमित रूप से लगभग 39,000 क्यूसेक नहरी पानी की आपूर्ति कर रहा है। उन्होंने कहा, "नहरी पानी की बढ़ी हुई उपलब्धता ने कई क्षेत्रों के किसानों को ट्यूबवेलों के माध्यम से भूजल निकालने के बजाय नहरी पानी के उपयोग से धान की खेती करने में सक्षम बनाया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि नहरी पानी को सीधे खेतों तक पहुंचाने से भूजल बचाने और बिजली की खपत कम करने में एक साथ मदद मिली है, जिससे भूजल निकालने पर निर्भरता कम होने के कारण राज्य में बिजली की लगभग 16 प्रतिशत बचत दर्ज की गई है। कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, "जब नहरी पानी किसान के खेत तक पहुंचता है तो इससे न केवल भूजल की बचत होती है, बल्कि पंपिंग पर खर्च होने वाली बिजली की खपत भी कम होती है। यह किसान और पंजाब के जल संसाधनों, दोनों के लिए अधिक लाभकारी साबित हुआ है।" जल संसाधन मंत्री ने बताया कि किसानों को अब फसलों के लिए नहरी पानी की उपलब्धता में सुधार के माध्यम से बड़े स्तर पर लाभ हो रहा है और इसके साथ ही भूजल निकालने के लिए बिजली की होने वाली खपत भी कम हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भूजल रिचार्ज में हुई वृद्धि ने भी इस सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके तहत पूरे राज्य में 510 से अधिक रिचार्ज योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा, "इनमें तालाबों, नहरों पर आधारित रिचार्ज ढांचे और खंबाती कुओं के माध्यम से रिचार्ज शामिल हैं। इन योजनाओं ने मिलकर लगभग 38 लाख घन मीटर भूजल के रिचार्ज में योगदान दिया है, जो सिसवां बांध की भंडारण क्षमता से अधिक है।" कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से भूजल के संरक्षण को और मजबूती मिलेगी और आने वाले वर्षों में भूजल निकालने की दर को कम करने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भूजल का संरक्षण पंजाब के लिए केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, "पंजाब केंद्रीय अन्न भंडार में बड़ा योगदान देता है और इसने ऐतिहासिक रूप से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए भूजल की रक्षा करना सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा की रक्षा से जुड़ा हुआ कदम है।" उन्होंने कहा कि यदि भूजल का चिंताजनक ह्रास बिना रोक-टोक जारी रहता तो यह न केवल पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता था। उन्होंने आगे कहा, "इसलिए पंजाब सरकार ने आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य के जल संसाधनों के संरक्षण हेतु निर्णायक कदम उठाए हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">जल संसाधन मंत्री ने कहा कि भूजल के ताजा आंकड़े पंजाब के लिए उत्साहजनक हैं और नहरी सिंचाई तथा भूजल संरक्षण के उपायों को और बढ़ाने के सरकार के संकल्प को मजबूत करते हैं। उन्होंने आगे कहा, "मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार टिकाऊ जल प्रबंधन और राज्य के कृषि भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।" इस अवसर पर शेर सिंह, मुख्य अभियंता (नहर एवं भूजल), मनोज बांसल, निगरान अभियंता (भूजल) सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 10:55:26 +0530</pubDate>
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