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                <title>Take - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>27 को मुख्&amp;#x200d;यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे हेमंत सोरेन !, आज जेएमएम विधायक दल की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड विधानसभा चुनाव का जनादेश झामुमो-कांग्रेस-राजद महागठबंधन के पक्ष में आया है। स्पष्ट बहुमत के साथ झारखंड के अगले मुख्‍यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन का राजतिलक तय हो गया है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hemant-soren-will-take-oath-as-chief-minister/article-11950"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/hemant.jpg" alt=""></a><br /><h1>कांग्रेस के खाते में  जा सकता है स्पीकर पद |Hemant Soren</h1>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p><strong>रांची (एजेंसी)। </strong> झारखंड विधानसभा चुनाव का जनादेश झामुमो-कांग्रेस-राजद महागठबंधन के पक्ष में आया है। स्पष्ट बहुमत के साथ झारखंड के अगले मुख्‍यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन  (Hemant Soren) का राजतिलक तय हो गया है। इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है। हेमंत सोरेन 27-28 दिसंबर को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इस दौरान जेएमएम के 6, कांग्रेस के 5 और आरजेडी के कोटे से एक मंत्री शपथ लेंगे। यानी हेमंत सोरेन के साथ 12 मंत्री शपथ लेंगे।इसके अलावा कांग्रेस के खाते में स्पीकर पद जा सकता है। इससे पहले मंगलवार को झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन ने पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई है।</p>
<h2>बीजेपी को वोट का घाटा</h2>
<p>बीजेपी की हार के पीछे सुदेश महतो की पार्टी आजसू के साथ गठबंधन न होना भी बताया जा रहा है।महतो जाति ओबीसी कुर्मी जाति की उपजाति है। बिहार और झारखंड में महतो की काफी अच्छी खासी आबादी है। आजसू के साथ गठबंधन न होना, बीजेपी के लिए महतो वोटबैंक में घाटा साबित हुआ है। बिहार में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन में हैं । लेकिन झारखंड में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा जिसका घाटा दोनों को उठाना पड़ा। इससे बीजेपी के ओबीसी वोट बैंक को नुकसान बताया जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कुर्मी जाति से हैं। जेडीयू झारखंड में खाता खोलने में भी विफल रही।</p>
<h2>महागठबंधन की आंधी में सबकी हवा टाइट</h2>
<ul>
<li><strong>महागठबंधन की आंधी ने भाजपा के साथ-साथ आजसू की भी हवा निकाल दी है। </strong></li>
<li><strong>आजसू के खाते में दो सीटें आईं, जबकि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली झारखंड विकास मोर्चा के हिस्से तीन सीटें आईं। </strong></li>
<li><strong>वहीं दो सीटों पर निर्दलीय और एक-एक सीट पर भाकपा माले व एनसीपी को जीत मिली है। </strong></li>
<li><strong>जबकि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. दिनेश उरांव को भी सिसई सीट से हार का सामना करना पड़ा।</strong></li>
<li><strong> इनके अलावा मंत्री लुईस मरांडी, राज पालिवार, रामचंद्र सहिस को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। </strong></li>
<li><strong>वहीं भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ भी चक्रधरपुर से चुनाव हार गए।</strong></li>
</ul>
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<p>Hemant Soren, Take, Oath, Chief Minister</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2019 11:08:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भागवत बोले- मंदिर निर्माण को लेकर 4-6 महीने सब्र करें</title>
                                    <description><![CDATA[भागवत ने कहा- 4-6 महीने की उथल पुथल के दौरान कुछ हो गया तो अच्छी बात है प्रयागराज। कुंभ में चल रही विश्व हिंदू परिषद की धर्मसंसद के दूसरे और अंतिम दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा (Bhagwat Says- Take 4-6 Months To Build A Temple) कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर समय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">भागवत ने कहा- 4-6 महीने की उथल पुथल के दौरान कुछ हो गया तो अच्छी बात है</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> कुंभ में चल रही विश्व हिंदू परिषद की धर्मसंसद के दूसरे और अंतिम दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा (Bhagwat Says- Take 4-6 Months To Build A Temple) कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर समय निर्णायक मोड़ में है। उन्होंने कहा- मैं समझता हूं कि 4-6 महीने (चुनावी वक्त) की उथल-पुथल के दौरान कुछ हुआ तो ठीक वरना उसके बाद तो कुछ जरूर होगा। यह हम सब देखेंगे। हालांकि, भागवत की इस बात पर कुछ संत नाराज हो गए और नारेबाजी करने लगे। संतों ने कहा कि अब विहिप और आरएसएस को समय नहीं देंगे। मंदिर निर्माण की तारीख चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संघ प्रमुख ने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो हमें कहना पड़ेगा, अब धैर्य नहीं चलेगा। छह अप्रैल को एक करोड़ लोग विजय मंत्र का जाप करेंगे। भागवत ने कहा कि आगे अगर मंदिर निर्माण से जुड़ा हुआ कोई कार्यक्रम करेंगे तो उसका प्रभाव चुनाव पर पड़ेगा। मंदिर बनाना है तो मंदिर बनाने वालों को चुनना होगा। यह भी देखना होगा कि, मंदिर कौन बनाएंगे, यह मंदिर उद्गम और हिंदू राष्ट्र का वैभवशाली मंदिर होगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मंदिर निर्माण के लिए रखा गया प्रस्ताव</h2>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले धर्मसंसद में महामंडलेश्वर अखिलेशानन्द महाराज ने राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण की बाधाओं को दूर करने (Bhagwat Says- Take 4-6 Months To Build A Temple) के लिए प्रस्ताव रखा। चर्चा के बाद संतों ने मोदी सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण में बाधाओं को दूर करने के लिए अब जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। स्वामी चिन्मयानंद महाराज ने कहा कि कई वर्षों की तपस्या के बाद केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार है। पूरी उम्मीद है पीएम मोदी मंदिर निर्माण में कीर्तिमान स्थापित करेंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शंकराचार्य ने 21 फरवरी को शिलान्यास का किया है ऐलान</h2>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले परमधर्म संसद में धर्मादेश पारित कर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने वसंत पंचमी से अयोध्या कूचकर 21 फरवरी को राम मंदिर के लिए शिलान्यास की घोषणा की है। वहीं, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने भी शंकराचार्य के परम धर्मादेश का स्वागत व समर्थन करते हुए चार फरवरी के बाद अयोध्या कूच करने का निर्णय लिया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सबरीमाला और हिंदुओं के विघटन के इर्द-गिर्द रही धर्मसंसद</h2>
<p style="text-align:justify;">पहले दिन धर्म संसद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश, हिंदू समाज के विघटन, धर्मांतरण, मिशनरी, साम्यवाद, कट्टरवादी इस्लामिक ताकतों के बढ़ते प्रभाव के इर्द-गिर्द रही। संतों ने मंच से देश की बदलती सियासत पर भी हमला बोला। मुस्लिम-दलित, क्षेत्र और जातिगत चुनावी गठबंधन को देश के लिए खतरा बताते हुए विदेशी ताकतों की साजिश बताया।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Feb 2019 13:46:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिनेमाहॉल के अंदर ले जा सकते हैं घर का खाना</title>
                                    <description><![CDATA[गोरखपुर(एजेंसी)। सिनेमाहॉलों में खाने-पीने के सामान बाहर से ले जाने पर कोई रोक नहीं है। कतई जरूरी नहीं कि आप सिनेमाहॉल परिसर के स्टाल से ही सामान खरीदें। सूचना का अधिकार के तहत दी गई जानकारी में कमिश्नर, वाणिज्य कर, उत्तर प्रदेश ने बताया है कि सिनेमाहॉल/ मल्टीप्लेक्स संचालकों को ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर(एजेंसी)।</strong> सिनेमाहॉलों में खाने-पीने के सामान बाहर से ले जाने पर कोई रोक नहीं है। कतई जरूरी नहीं कि आप सिनेमाहॉल परिसर के स्टाल से ही सामान खरीदें। सूचना का अधिकार के तहत दी गई जानकारी में कमिश्नर, वाणिज्य कर, उत्तर प्रदेश ने बताया है कि सिनेमाहॉल/ मल्टीप्लेक्स संचालकों को ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया गया है, जिससे कि वह बाहर से खरीदे हुए खाने-पीने के सामान के प्रयोग पर रोक लगा सकें। यही नहीं चलचित्र नियमावली, 1951 के अंतर्गत दिए लाने वाले लाइसेंस की शर्त में यह भी प्राविधान है कि प्रेक्षागृह के भीतर चाय, कॉफी, दूध, शीतल पेय, या ऐसी कोई भी खाद्य सामग्री, जो मुहर बंद पैकेट में न हो, का विक्रय करने की अनुमति नहीं होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सिनेमाहाल में बाहर से सामान को लाने पर करते हैं मनाही</h2>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर दर्शकों को सिनेमाहॉल/मल्टीप्लेक्स के भीतर बाहर से खरीदे हुए खाने-पीने के सामान को सुरक्षा जांच के नाम पर नहीं ले जाने दिया जाता है। मजबूरी में लोगों को परिसर के भीतर के स्टॉल से ही सामान खरीदना होता है। यहां सामान, खुले बाजार की अपेक्षा ऊंची कीमत पर मिलता है। गोरखपुर के आरटीआइ कार्यकर्ता आनंद रुंगटा ने इस बाबत वाणिज्य कर विभाग से आरटीआइ के तहत जानकारी मांगी थी। कमिश्नर वाणिज्य कर कार्यालय, उत्तर प्रदेश ने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि बाहर से खरीदे हुए वही सामान प्रेक्षागृह के भीतर ले जा सकते हैं, जो सीलबंद पैकेट या बोतल में हो।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राय: सिनेमाहॉलों में खाद्य पदार्थ खुले में मिलते हैं। इन पर एमआरपी भी छपी नहीं होती। उत्तर प्रदेश सिनेमेटोग्राफी (26वां संशोधन) नियमावली 2018 के अनुसार भी सिनेमाहॉल मालिक मुहरबंद पैकेटों में ही सामान बेच सकते हैं। एक अन्य आरटीआइ के जवाब में ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी मुख्यालय, लखनऊ ने बताया है कि सिनेमाहॉल के भीतर खाद्य सामग्री बेचते हुए बिल देना एवं नियमानुसार जीएसटी पंजीयन कराना अनिवार्य है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कमाई का असल जरिया है खान-पान</h2>
<p style="text-align:justify;">सिनेमाहॉल परिसर की कैंटीन से सामान खरीदने पर जोर देने के पीछे दरअसल कमाई का खेल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते वर्ष जुलाई से सितंबर की अवधि में देश के दो बड़े मल्टीप्लेक्स चेन ने फूड एवं वेबरिजेस श्रेणी में क्रमश: 25 और 42 फीसद की बढ़त दर्ज की, यह पिछले नौ माह में सर्वाधिक बढ़त थी। विशेषज्ञों के मुताबिक बॉक्स ऑफिस से होने वाली कमाई पर निर्भर रहने में जोखिम को देखते हुए सिनेमाहॉल फूड एंड वेबरिजेस को आय के अतिरिक्त और मजबूत स्रोत के रूप में विकसित करने पर फोकस कर रही हैं।बीते वर्ष बांबे हाइकोर्ट ने तो सिनेमाहॉल के भीतर इंटरवल में टिफिन ले जाने की भी अनुमति दी थी। हालांकि बाद में इस आदेश को चैलेंज किया गया था, जिस पर सुनवाई होनी शेष है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नियम पालन करना जरूरी</h2>
<p style="text-align:justify;">आरटीआइ कार्यकर्ता आनंद रुंगटा का कहना है कि खाने-पीने के सामान बाहर से ले जाने पर रोक का नियम नहीं है। लोगों को इस संबंध में जागरुक होना चाहिए। सामान लेते समय बिल जरूर लें। सिनेमाहॉल संचालकों को भी इन नियमों का पालन करना चाहिए।</p>
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                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Jan 2019 13:34:22 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अब कौन लेगा किसानों की सुध</title>
                                    <description><![CDATA[देश की अर्थव्यवस्था मजबूत आंकड़ों के साए में भी सहमी सी दिख रही है। निर्यात घटने और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंकाएं सामने खड़ी मुंह चिढ़ा रही हैं। पांच साल पहले जो काम 60 महीने यानी 2018 तक किए जाने थे, अब वे 2022 तक किए जाएंगे। इतना ही नहीं, जो काम सबसे पहले होना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">देश की अर्थव्यवस्था मजबूत आंकड़ों के साए में भी सहमी सी दिख रही है। निर्यात घटने और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंकाएं सामने खड़ी मुंह चिढ़ा रही हैं। पांच साल पहले जो काम 60 महीने यानी 2018 तक किए जाने थे, अब वे 2022 तक किए जाएंगे। इतना ही नहीं, जो काम सबसे पहले होना चाहिए था, वह कार्यकाल के अंतिम दिनों में बताया जा रहा है कि हम जल्द करेंगे। देश में खेती और किसान की हालत देखकर कृषि नीति ही सबसे पहले आनी चाहिए, उस पर अब केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कह रहे हैं कि सरकार जल्द ही नई कृषि निर्यात नीति पेश करेगी। इसके तहत निर्यात बढ़ाने के लिए कई विशेष कृषि क्षेत्र स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही कृषि निर्यात को मौजूदा तीस अरब डॉलर से बढ़ाकर 2022 तक साठ अरब डॉलर तक पहुंचाने और भारत को कृषि निर्यात से संंबंधित दुनिया के दस प्रमुख देशों में शामिल कराने का लक्ष्य रखा जाएगा। यदि यही किसानों को संकट से उबारने का तरीका है और अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार है तो फिर यह काम पहले क्यों नहीं किया गया? देश की यही विडम्बना है कि यहां जो सबसे महत्वपूर्ण है, वही प्राथमिकताओं से गायब है। किसान धरती को चीरकर अनाज उगाता है, उसके उत्पादन पर सरकारें पुरस्कार जीतती हैं, अपनी पीठ ठोकती हैं, फिर भी किसान मामूली से कर्ज के पीछे अपनी जान दे देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्तीय वर्ष 2017-18 में देश में रिकॉर्ड कृषि उत्पादन हुआ। इस समय देश में 6.8 करोड़ टन गेहूं-चावल का भंडार है। यह जरूरी बफर स्टॉक से दोगुना है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है। भारत का फलों और सब्जियों के उत्पादन में दुनिया में दूसरा स्थान है। देश में फलों और सब्जियों का उत्पादन मूल्य 3.17 लाख करोड़ रुपए वार्षिक हो गया है। दूध उत्पादन आबादी बढ़ने की दर से चार गुना तेजी से बढ़ रही है। चीनी का उत्पादन चालू वर्ष में 3.2 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जबकि खपत 2.5 करोड़ टन है। दावा यह है कि यह सब इसलिए संभव हुआ, क्योंकि सरकार ने उदार कृषि निर्यात प्रोत्साहन को बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन सवाल यह है कि इसका लाभ किसे मिला? यदि किसानों को लाभ मिला होता तो वे सड़कों पर नहीं उतरते, दिन-रात मेहनत करके जो फसल उगाई उसे सड़कों पर नहीं फेंकते, दुग्ध उत्पादक दूध सड़कों पर नहीं बहाते। जाहिर तौर पर इसका लाभ किसानों के बजाय कहीं और गया है। सरकार की मुनाफे वाली नीति के चक्र में किसान कहां गायब हो जाता है, यह बड़ा रहस्य बन चुका है। हर सरकार किसानों के लिए सब कुछ करने का दावा करती है, लेकिन तिजोरियां किसी और की भरती हैं।</p>
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                <pubDate>Wed, 02 Jan 2019 13:58:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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