<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/swine-flu-in-rajasthan/tag-11314" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Swine flu in Rajasthan - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/11314/rss</link>
                <description>Swine flu in Rajasthan RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजस्थान में स्वाईन फ्लू का कहर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में स्वाईन फ्लू की बीमारी कहर बरपा रही है। अब तक 48 मौतें स्वाईन फ्लू से होने की खबर है और एक हजार से अधिक मरीज इस रोग से पीड़ित बताए जा रहे हैं। यह बीमारी सर्दियों में फैलती है। ठंड से इसका वायरस अधिक फैलता है। चाहे राजस्थान सरकार ने चौकसी बरतते हुए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">राजस्थान में स्वाईन फ्लू की बीमारी कहर बरपा रही है। अब तक 48 मौतें स्वाईन फ्लू से होने की खबर है और एक हजार से अधिक मरीज इस रोग से पीड़ित बताए जा रहे हैं। यह बीमारी सर्दियों में फैलती है। ठंड से इसका वायरस अधिक फैलता है। चाहे राजस्थान सरकार ने चौकसी बरतते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी हैं परंतु मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल जागरूकता ईलाज की अपेक्षा कहीं बेहतर व सस्ती है। चाहे स्वाईन फ्लू पिछले कई सालों से देश के विभिन्न राज्यों में मरीजों की मौत का कारण बन बन रहा है परंतु इस संबंधी जागरूकता बढ़ने की बजाय कम हुई है। शुरूआत में लोगों में इस बीमारी संबंधी काफी भय था व राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभागों ने भी काफी प्रचार किया परंतु धीरे-धीरे यह प्रचार धीमा पड़ गया। यह मौसमी बीमारी है, जब मौसम के बदलने से बीमारी का हमला घटता है तो स्वास्थ्य विभाग की सरगर्मियां भी धीमी पड़ जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में काम करने का कल्चर ही सही नहीं है कोई सख़्त कदम केवल तभी उठाया जाता है जब पानी सिर के ऊपर से गुजर जाता है। स्वाईन फ्लू संबंधी भी अधिकतर सरकारें तब नींद से जागती हैं जब काफी नुक्सान हो चुका होता है। यदि किसी मौसम के आने से काफी समय पहले बीमारी संबंधी जागरूकता फैलाई जाये तो बुरे हालात पैदा ही न हों। राजस्थान की स्वाईन फ्लू की बीमारी कारण देशभर में चर्चा है। इसी तरह गर्मी के मौसम में जीका की बीमारी के कारण भी यह राज्य चर्चाओं में रह चुका है। आबादी दूर-दराज बसी होने, संचार-साधनों की कमी, गरीबी व अनपढ़ता के कारण भी राज्य में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पैदा करने में परेशानियां आती हैं। मौसमी बीमारियों से जागरूक होने से बचा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार अन्य कार्याें के विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर देती है वहीं स्वास्थ्य प्रति जागरूकता के लिए बजट में वृद्धि की जा सकती है। केंद्र सरकार को भी इस मामले में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। केंद्र की ओर से ‘आयूशमान भारत’ के अंतर्गत गरीबों को पांच लाख की बीमा योजना दी जा रही है। ऐसीं योजनाओं के चलते डेंगू, स्वाईन फ्लू, जैसी बीमारियों के साथ मौतें होना सरकारों की स्वास्थ्य संबंधी नीतियों व प्रबंधों की खामियों की तरफ उंगली करती हैं। अरबों रूपये की लागत से बनी सरकारी अस्पताल की इमारतों की सार्थिकता इसी बात में है कि आम आदमी को कम से कम उन बीमारियों से जरूर बचाया जाए, जिनसे केवल जागरूकता के साथ ही बचा जा सकता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/swine-flu-in-rajasthan-2/article-7414</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/swine-flu-in-rajasthan-2/article-7414</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Jan 2019 20:17:27 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान स्वाइन फ्लू की गिरफ्त में</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में नए साल में एक बार फिर स्वाइन फ्लू ने लोगों को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। राज्य में बढ़ती कड़ाके की ठंड के साथ स्वाइन फ्लू का कहर भी बढ़ता जा रहा है। मौसम के बदलाव से बीमारियों का होना लगा रहता है। यह भी कहा जा सकता है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">राजस्थान में नए साल में एक बार फिर स्वाइन फ्लू ने लोगों को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। राज्य में बढ़ती कड़ाके की ठंड के साथ स्वाइन फ्लू का कहर भी बढ़ता जा रहा है। मौसम के बदलाव से बीमारियों का होना लगा रहता है। यह भी कहा जा सकता है कि बीमारियां मौसम बदलने का इंतजार करती है और जैसे ही मौसम बदलता है कि ये मानव को अपनी चपेट में ले लेती हैं। स्वाइन फ्लू भी इनमें से एक बीमारी है। बदलते मौसम से बीमारी और भी खतरनाक हो जाती है। आपको मौसम का बदलना सुहाता हो, लेकिन मौसम का यह बदलाव अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है। स्वाइन फ्लू और जलवायु परिवर्तन के बीच गहरा संबंध है। गर्मी और सर्दी के आते ही बीमारियां भी अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे जैसे दिन और रात के तापमान में गिरावट होगी, वैसे ही स्वाइन फ्लू के मामले सामने आते रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान सरकार ने स्वाइन फ्लू की रोकथाम, जागरूकता के लिए गांव के स्तर तक अभियान चलाने के निर्देश दिए है। सरकार ने स्वास्थ्य महकमें को अलर्ट करने के साथ आम लोगों से भी स्वाइन फ्लू की रोकथाम में मदद की अपील की है ताकि मिलजुलकर इस खतरनाक बीमारी पर काबू पाया जा सके। स्वाइन फ्लू के खतरे का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है की इस खतरनाक वायरस ने प्रदेश के मुख्य सचिव की पत्नी वीनू गुप्ता जो खुद भी वरिष्ठ आई ए एस अधिकारी है को भी अपनी चपेट में ले लिया है। आंकड़ों पर नजर डाले तो नए साल के प्रथम 6 दिनों में ही 10 लोग इसके शिकार होने के साथ लगभग 180 मरीज इस बीमारी में पॉजीटिव पाए गए है। पिछले साल लगभग ढाई हजार लोग इस बीमारी के विषाणु से संक्रमित पाए गए थे जिनमें से 225 की मृत्यु हो गयी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल देश के आम लोगों में स्वाइन फ्लू का कहर होता है। नए साल की शुरूआत में ही इस बीमारी ने लोगों को अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया है। इस समय स्वाइन फ्लू का प्रकोप समूचे देश में फेल रहा है। दिल्ली सहित उत्तर भारत के अनेक राज्यों में कई जनों को यह बीमारी लील चुकी है। सैंकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती है। देश में इन दिनों हर तरफ स्वाइन फ्लू की ही चर्चा है। हर व्यक्ति चिंतित है कि कहीं उसे भी स्वाइन फ्लू न हो जाये। देश के कई प्रदेशों में इन दिनों स्वाइन फ्लू का कहर बरपा हुआ है। गरीब से अमीर तक इसकी चपेट में आ रहे है। डॉक्टरों के समझ में नहीं आरहा है कि आखिर इस बीमारी से कैसे निपटे। देश के बड़े अस्पतालों में जाँच और उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध है मगर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यह सुविधा सुलभ नहीं होने से मरीजों की अकाल मौत की खबरें आरही है।<br />
स्वाइन फ्लू- वायरल बुखार है जो वायरस से फैलता है। ठंड की वजह से स्वाइन फ्लू का वायरस और घातक हो जाता है। वातावरण में नमी बढ़ने के साथ ही ये ज्यादा तेजी से फैलने लगता है। यही वजह है कि मौसम के बदलने के साथ एकाएक इसके मामलों की बाढ़ सी आ गई लग रही है। यदि ठंड के मौसम में आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो तुरंत एच1एन1 की जांच कराएं। जब लोग स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित होते हैं, तो उनके लक्षण आमतौर पर मौसमी इन्फ्लूएंजा के समान ही होते हैं। इसमें बुखार, थकान, और भूख की कमी, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू उन्हीं व्यक्तियों में होता है, जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। साथ ही प्रभावित व्यक्ति पहले से बीमार चल रहे हो। अगर घर में कोई सदस्य स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया हो तो, घर के बाकी लोगों को भी इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेकर दवा खा लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वाइन फ्लू के लक्षण साधारण फ्लू की तरह ही होते हैं। इसका असर 15 दिनों तक या उससे अधिक भी रह सकता है। स्वाइन फ्लू से निमोनिया का खतरा होता है, जिसका समय पर इलाज मुमकिन है। हालांकि ज्यादातर लोग दवा दुकान से सर्दी-जुकाम के लक्षण के अनुसार दवा खा लेते हैं ऐसे में जब स्वाइन फ्लू के वायरस पूरी तरह जकड़ने लगते हैं, तब लोग उसका इलाज कराने अस्पताल में पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से मस्तिष्क, नाक, गला, फेफड़ा, किडनी, लिवर आदि को नुकसान पहुंचाता है। जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक डिजीज जैसे- डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, हाइ या लो ब्लड प्रेशर या अस्थमा आदि हो उन पर इस वायरस का असर ज्यादा खतरनाक होता है. उनका इम्यून सिस्टम पहले से कमजोर होता है और इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण उनकी तबीयत और खराब होने लगती है। स्वाइन फ्लू से बचाव ही इसे रोकना का सबसे बड़ा उपाय है। आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर उपाय है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/swine-flu-in-rajasthan/article-7259</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/swine-flu-in-rajasthan/article-7259</guid>
                <pubDate>Mon, 07 Jan 2019 18:57:02 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        