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                <title>artificial intelligence - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>AI: एआई तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक अत्यंत उपयोगी सपोर्ट सिस्टम के रूप में उभर रही</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक अत्यंत उपयोगी सपोर्ट सिस्टम के रूप में उभर रही है। विशेष रूप से रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट्स, एमआरआई, सीटी स्कैन, इको और ईसीजी जैसे जांच माध्यमों के विश्लेषण में एआई टूल्स ने 70 से 80 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय सफलता दर्ज की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ai-technology-is-emerging-as-a-very-useful-support-system-in-the-medical-field/article-77315"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/new-delhi-2-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक अत्यंत उपयोगी सपोर्ट सिस्टम के रूप में उभर रही है। विशेष रूप से रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट्स, एमआरआई, सीटी स्कैन, इको और ईसीजी जैसे जांच माध्यमों के विश्लेषण में एआई टूल्स ने 70 से 80 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। इसी प्रकार, ईसीजी के आधार पर एआई तकनीक के माध्यम से भविष्य में संभावित हृदयाघात (हार्ट अटैक) के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने में भी 70 प्रतिशत से अधिक मामलों में सटीक परिणाम प्राप्त हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक, तीव्र और सुलभ बनाने की दिशा में क्रांतिकारी योगदान दे रही है। यह जानकारी वार्क रिसर्च सेंटर सिडनी यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया में साइंटिफिक डायरेक्टर प्रोफेसर क्लारा चाओ ने दी। वे महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में चौथे डॉ के डी गुप्ता ऑरेशन में मुख्य वक्त के तौर पर बोल रही थीं। प्रोफेसर क्लारा ने कहा कि एआई टूल्स के जरिए हार्ट अटैक की संभावना की पूर्व सूचना देने में उल्लेखनीय मदद मिल रही है। इसमें भी 85 प्रतिशत तक मामलों में सूचनाएं सही पाई गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह एक सुखद संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा, रिकॉर्ड रखने, लो रेजोल्यूशन सूचनाओं को हाई रेजोल्यूशन बनाने में भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो रही है। बहुत जल्द ही मोबाइल गैजेट्स में बल्ड प्रेशर, धड़कन तथा श्वास गति आदि की जानकारी के लिए अधिक विश्वसनीय टूल्स आ रहे हैं जो सामाजिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि भारत में भी अब बड़े अस्पतालों में इस तकनीक का प्रयोग बढ़ रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी अस्पताल की अत्याधुनिक सेवाओं की सराहना करते हुए इसे विश्वस्तरीय बताया। Artificial Intelligence</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ विकास स्वर्णकार ने बताया कि महात्मा गांधी अस्पताल में साइबर नाइफ, पैट स्कैन, न्यूरो नेविगेशन, रोबोट आदि में ए आई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। संस्थापक डॉ एम एल स्वर्णकार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को डॉक्टर का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि यह तकनीक भी मानवीय समझ से बनाई जा रही है। और फिर इसे रोगी के लक्षणों, हिस्ट्री आदि के बारे में भी समझना होता है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही महात्मा गांधी अस्पताल को पेपरलेस बनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रोफेसर के डी गुप्ता की स्मृति में आयोजित इस वैज्ञानिक कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर डॉ अचल गुलाटी, डॉ विनय कपूर, डॉ राजीव गुप्ता, डॉ संजीव गुप्ता, श्रीमती मीना स्वर्णकार, डॉ शोभित स्वर्णकार, श्री आर आर सोनी, डॉ एन डी सोनी, श्री प्रदीप पायने, डॉ राजा बाबू पंवार, डॉ नीरज कासलीवाल सहित बड़ी संख्या में डॉक्टर्स मौजूद रहे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="रोडवेज बस स्टेशन पर बदहाल पड़े शौचालय को ठीक कराने की मांग" href="http://10.0.0.122:1245/demand-for-repair-of-toilet-at-kairana-roadways-bus-stand/">रोडवेज बस स्टेशन पर बदहाल पड़े शौचालय को ठीक कराने की मांग</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 20:11:55 +0530</pubDate>
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                <title>Dell terminated 12,500 employees : AI का असर, डेल ने 12,500 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला!</title>
                                    <description><![CDATA[Dell terminated 12,500 employees : नई दिल्ली (एजेंसी)। कंप्यूटर निर्माता कंपनी डेल ने अपने बिक्री प्रभाग के एक बड़े पुनर्गठन की घोषणा करते हुए कंपनी के संचालन को आधुनिक बनाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से कंपनी में बड़े स्तर पर छंटनी की गई है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/impact-of-ai-dell-fired-12500-employees/article-60808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/dell-with-ai-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Dell terminated 12,500 employees : नई दिल्ली (एजेंसी)। कंप्यूटर निर्माता कंपनी डेल ने अपने बिक्री प्रभाग के एक बड़े पुनर्गठन की घोषणा करते हुए कंपनी के संचालन को आधुनिक बनाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से कंपनी में बड़े स्तर पर छंटनी की गई है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने विगत 6 अगस्त को एक आंतरिक ज्ञापन में कर्मचारियों को एआई के इन परिवर्तनों के बारे में सूचित किया, जिसमें बिक्री टीमों को केंद्रीकृत करने और एक नई एआई-केंद्रित बिक्री इकाई बनाने की योजनाओं की रूपरेखा दी गई है। Dell Technologies</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में प्रभावित कर्मचारियों की सही संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अनुमान है कि लगभग 12,500 व्यक्ति या डेल के कार्यबल का लगभग 10% हिस्सा इससे प्रभावित हुआ है।</p>
<h3>अधिकारियों ने लिखा, ‘‘हम कमजोर हो रहे हैं”</h3>
<p style="text-align:justify;">‘ग्लोबल सेल्स मॉडर्नाइजेशन अपडेट’ शीर्षक वाला ज्ञापन वरिष्ठ अधिकारियों बिल स्कैनेल और जॉन बर्न द्वारा भेजा गया था। इसमें प्रबंधन परतों को सुव्यवस्थित करने और निवेशों को पुन: प्राथमिकता देने के कंपनी के इरादों का विवरण दिया गया था। अधिकारियों ने लिखा, ‘‘हम कमजोर हो रहे हैं। हम प्रबंधन के स्तरों को सुव्यवस्थित कर रहे हैं और जहाँ हम निवेश करते हैं, वहाँ पुन: प्राथमिकता तय कर रहे हैं।’’ Dell Technologies</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में छंटनी होने वाले कर्मचारियों की सही संख्या का खुलासा नहीं किया गया है, बिक्री विभाग के कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है या वे ऐसे सहकर्मियों को जानते हैं जो इससे प्रभावित हुए हैं। इन स्रोतों के अनुसार, छंटनी ने मुख्य रूप से प्रबंधकों और वरिष्ठ प्रबंधकों को प्रभावित किया है, जिनमें से कुछ को कंपनी में दो दशकों से अधिक का अनुभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, ‘‘इसमें ज्यादातर प्रबंधक, निदेशक और वीपी शामिल थे। उन्होंने मार्केटिंग और संचालन को भी प्रभावित किया। उन्होंने संगठनों को मिला दिया और प्रबंधकों के लिए अनुपात को भी बढ़ा दिया। अब प्रत्येक प्रबंधक के पास कम से कम 15 कर्मचारी हैं।’’ एक अन्य गुस्साए कर्मचारी ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘कई प्रबंधक जो लंबे समय से यहाँ थे, उन्हें निकाल दिया गया। यह बस आपको दिखाता है कि आप इस नौकरी में कितना भी प्रयास करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जैसे ही यह उनके लाभ में मदद करता है, आप निकाल दिए जाते हैं।’’ Dell Technologies</p>
<p><a title="Farmer found a precious Diamond : किसान की खुली किस्मत, मिली ये बेशकीमती धातु!" href="http://10.0.0.122:1245/farmer-found-a-precious-diamond-in-his-field/">Farmer found a precious Diamond : किसान की खुली किस्मत, मिली ये बेशकीमती धातु!</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 11:40:12 +0530</pubDate>
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                <title>Artificial Intelligence : AI की नई आहट</title>
                                    <description><![CDATA[– Artificial Intelligence – Artificial Intelligence की ताकत को लेकर दुनिया में तमाम तरह की शंकाएं हों, लेकिन एक बात तय है कि भविष्य में बदलाव का सबसे बड़ा कारण एआई ही बनेगी। यह लगातार नई ताकतवर तकनीकों को जन्म दे रही है। इसी कड़ी में एआई तकनीक की गुणवत्ता से लैस सर्च इंजन के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/artificial-intelligence/article-57563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/artificial-intelligence.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Artificial Intelligence –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">Artificial Intelligence की ताकत को लेकर दुनिया में तमाम तरह की शंकाएं हों, लेकिन एक बात तय है कि भविष्य में बदलाव का सबसे बड़ा कारण एआई ही बनेगी। यह लगातार नई ताकतवर तकनीकों को जन्म दे रही है। इसी कड़ी में एआई तकनीक की गुणवत्ता से लैस सर्च इंजन के सामने आने की बात कही जा रही है है। कहा जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित यह सर्च इंजन कालांतर गूगल के सर्च इंजन की बादशाहत को चुनौती दे सकता है। अभी गूगल का सर्च इंजन हर कंप्यूटर और हरेक स्मार्टफोन में मौजूद है, पर जब ओपनएआई का कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाला सर्च इंजन सक्रिय हो जाएगा, तो स्थितियां बदलेंगी। माइक्रोसॉफ्ट समर्थित ओपनएआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अभी सबसे आगे है। चैटजीपीटी भी ओपन एआई का अब तक का सफलतम उत्पाद है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब नए सर्च इंजन के आने से ओपन एआई के चैट जीपीटी की क्षमताओं में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे यह वेब से वास्तविक समय में या तत्काल जानकारी प्राप्त कर सकेगा। यह अक्सर कहा जा रहा है कि चैट जीपीटी काफी मशीनी या एकरूपता वाले पाठ पेश कर रहा है, जबकि बाजार में ज्यादा विविधता वाले ऐसे पाठों की जरूरत है, जो मशीनी नहीं, बल्कि ज्यादा मानवीय लगें। सरकारों को मौजूदा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि आज देश की अधिकतर व्यवस्थाएं इंटरनेट पर टिकी हैं। इसके नियमन के लिये सख्त कानून बनाये जाने चाहिए। पश्चिमी जगत के विशेषज्ञ भी मनुष्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के खतरों के लिये तैयार करने की सलाह दे चुके हैं। ऐसे में इस दिशा में सावधानी के साथ चलने की आवश्यकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 10:08:17 +0530</pubDate>
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                <title>Artificial Intelligence : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में रहने की तैयारियां</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका: पीओके को हासिल करने के लिए हमें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी || Artificial Intelligence  राजीव गुप्ता। ज्ञानिक खोज प्रौद्योगिकी और नवाचार मानव जीवन में उथल-पुथल लाती है। व्यक्ति के सोचने और कार्य करने के तौर-तरीकों में बदलाव लाती है। खगोल विज्ञान, चिकित्सा से लेकर पहिए, मोटर गॉड़ी और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/artificial-intelligence-world/article-55794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/artificial-intelligence.jpg" alt=""></a><br /><div>
<h3 style="text-align:center;"><strong>शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका: पीओके को हासिल करने के लिए हमें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी || Artificial Intelligence </strong></h3>
<div style="text-align:justify;"><strong>राजीव गुप्ता।</strong> ज्ञानिक खोज प्रौद्योगिकी और नवाचार मानव जीवन में उथल-पुथल लाती है। व्यक्ति के सोचने और कार्य करने के तौर-तरीकों में बदलाव लाती है। खगोल विज्ञान, चिकित्सा से लेकर पहिए, मोटर गॉड़ी और कंप्यूटर के आविष्कार तक मानव के आविष्कारों ने इस बात को सिद्ध किया है। वर्ष 2016 में हॉलीवुड की फिल्म ‘हिडन फिगर्स’ में एक अश्वेत महिला जॉन ग्लेन का वर्णन किया गया है जो नासा के लिए कार्य करती है तथा जिन्होंने अमरीका के मानव युक्त अंतरिक्ष उडान में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। इस बात की कल्पना करना कठिन है कि आधुनिक कंप्यूटरों के आविष्कार से पूर्व अंतरिक्ष यात्रा के लिए अपेक्षित जटिल और लंबी गणनाओं को व्यक्तियों द्वारा किया जाता था और इसलिए फिल्म में दर्शायी गई इन तीन महिलाओं को मानव कंप्यूटर कहा गया। हम जानते हैं कि इलेक्ट्रोनिक कंप्यूटर के आविष्कार से घर के बजट से लेकर जटिल वैज्ञानिक गणनाओं के तरीकों में पूर्ण बदलाव आया है। एक ऐसी दुनिया में शिक्षा की भूमिका को पूर्णत: स्वीकार किया जाना चाहिए जहां पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) आज इंटरनेट की तरह अनिवार्य हो जाएगी इसलिए शिक्षा के तीन महत्वपूर्ण अवयवों पर विचार किया जाना चाहिए जिनमें पाठयक्रम का डिजाइन, पाठ्य वस्तु का निर्धारण और मूल्यांकन और इन तीनों पहलुओं पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम शिक्षा प्रणाली का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। यदि पाठ्यक्रम छात्रों और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप न हो तो यह महत्वपूर्ण नहीं रह जाता है कि इसे कितने प्रभावी ढंग से पढाया जाता है।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">अतीत में पाठ्यक्रम में मोटे तौर पर तथ्यों, दृष्टिकोणों और विभिन्न कार्यकलापों को करने की विधियों तक सीमित रहना था और अधिकतर मामलों में तथ्य, दृष्टिकोण और विधियां पुरानी हो जाती थी क्योंकि समाज में नए बदलाव आ जाते हैं। पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में विचार करने और सीखने की क्षमता का विकास करना है। इस क्षमता का तात्पर्य है कि छात्रों की भूमिका सूचना प्राप्त करने वालों के स्थान पर शिक्षण प्रक्रिया में सहयोगी और साझीदारी की बन गयी। इसी तरह अध्यापकों की भूमिका भी बदल गयी है। अब उनकी भूमिका ज्ञान के भंडार के बजाय ऐसे व्यक्ति के रूप में हो गयी है जो छात्रों की सर्वोत्तम क्षमताओं का विकास कर सके।</div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा साफ्ट स्किल्स पर बल दिए जाने की आवश्यकता है। जिस पर आज अधिक ध्यान नहीं दिया जा सकता है। इन साफ्ट स्किल में क्रिटिकल थिंकिंग स्किल, कप्यूनिकेशन, कोलोबोरेशन आदि शामिल हैं। क्रिटिकल थिंकिंग स्किल प्रश्न पूछने, विश्लेषण करने, व्याख्या करने और निर्णय करने की क्षमता है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) के माध्यम से तथ्यों तक पहुंच आसान हो जाएगी इसलिए सूचना का विश्लेषण और उपयोग करने की क्षमता का विकास करने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के विकास करने वाले चाहे कोई भी दावा करें, किए जाने वाले कार्यों के बारे में जिनमें निर्णय निकट भविष्य में भी मानव प्रयासों से ही किए जाएंगे। संप्रेषण कौशल लोगों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए आवश्यक है। किंतु शिक्षा में वर्तमान नेतृत्व इन छात्रों में इन कौशलों के विकास में शिक्षा की भूमिका को नहीं देख पाते हैं जिसमें बदलाव लाया जाना चाहिए। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के समक्ष समस्याएं और जटिल बन गयी है इसलिए आवश्यक हो गया है कि हम अन्य लोगों के साथ सहयोग करना सीखें तथापि हमारी शिक्षा प्रणाली में व्यक्तिगत कार्य निष्पादन और विकास पर बल दिया जाता है इसलिए आवश्यक कौशल के विकास में अंतर रह जाता है और इस अंतर को दूर किए जाने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा का दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए वह सामग्री को उपलब्ध कराना है। परंपरागत रूप से अध्यापकों को सभी सूचनाओं का स्रोत मााना जाता था जहां पर अध्यापक व्याख्यान देते और छात्र कक्षाओं में निष्क्रिय होकर सीखते। शिक्षा के इस मॉडल मे छात्र सक्रिय साझीदार नहीं होते और पाठ्यक्रम समाप्त होने के बाद छात्र पाठ्य वस्तु को भूल जाते थे। इस बात के र्प्याप्त साक्ष्य हैं कि यदि छात्र अपनी सीखने की प्रक्रिया के दौरान भागीदारी करते हैं तो वे पाठ्य सामग्री को लंबे समय तक याद रखते हैं। इसका तात्पर्य है कि अध्यापकों की भूमिका सर्वज्ञ गुरू से बदलकर ऐसे व्यक्ति के रूप में होनी चाहिए जो छात्रों के साथ संवाद करे और उन्हें सीखने में मदद करे।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा का तीसरा महत्वपूर्ण तत्व मूल्यांकन है। पिछले कुछ दशकों में मूल्यांकन की दिशा में कुछ प्रगति हुई है। सत्र के अंत में परीक्षा के माध्यम से एकल मूल्यांकन का स्थान अब आवधिक मूल्याकनों ने ले लिया है और इसके लिए प्रतियोगिताएं, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट आदि का सहारा लिया जाता है किंतु इसमें और प्रगति की आवश्यकता है। मूल्यांकन अभी भी मूलत: किसी विशेष कार्य के पूर्ण होने पर उसमें दक्षता पर आधारित है। छात्रों की क्षमताओं के मूल्यांकन के लिए बेहतर विधियों की आवश्यकता है जो उनके कार्य स्थल पर उनके लिए उपयोगी सिद्ध हों।</div>
<div style="text-align:justify;">हमारी शिक्षा प्रणाली में ग्रेड और मूल्यांकन गहरे समाए हुए हैं और इसमें बदलाव के लिए एक दूरदृष्टि नेतृत्व की आवश्यकता है। तथापि भावी छात्रों के लिए आवश्यक है कि वे नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने में क्षमताएं विकसित करें। इस लेख का उद्देश्य भावी दुनिया के लिए छात्रों को तैयार करने हेतु वर्तमान शिक्षा प्रणाली के कुछ पहलुओं में बदलाव की आवश्यकता पर बल देना है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षा प्रणाली में बडे बदलाव लाने में समय लगता है इसलिए हमें अभी से शुरूआत करनी चाहिए। <strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)।</strong></div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Mar 2024 10:56:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Sam Altman Sacked: ऑल्टमैन बाहर, ओपन एआई शोधकर्ताओं की बोर्ड को चेतावनी: सूत्र</title>
                                    <description><![CDATA[Sam Altman Sacked: नई दिल्ली। ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के चार दिनों के निर्वासन से पहले, कई स्टाफ शोधकर्ताओं ने निदेशक मंडल को एक शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता खोज की चेतावनी देते हुए एक पत्र लिखा था, जिसके बारे में उन्होंने कहा था कि इससे मानवता को खतरा हो सकता है। सूत्रों का कहना है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/altman-out-open-ai-researchers-warn-board-sources/article-55151"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/sam-altman.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sam Altman Sacked: नई दिल्ली।</strong> ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के चार दिनों के निर्वासन से पहले, कई स्टाफ शोधकर्ताओं ने निदेशक मंडल को एक शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता खोज की चेतावनी देते हुए एक पत्र लिखा था, जिसके बारे में उन्होंने कहा था कि इससे मानवता को खतरा हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि बोर्ड द्वारा जेनरेटिव एआई के पोस्टर चाइल्ड ऑल्टमैन को बाहर करने से पहले पहले से रिपोर्ट न किए गए पत्र और एआई एल्गोरिदम प्रमुख विकास थे। मंगलवार देर रात उनकी विजयी वापसी से पहले, 700 से अधिक कर्मचारियों ने अपने बर्खास्त नेता के साथ एकजुटता दिखाते हुए नौकरी छोड़ने और माइक्रोसॉफ्ट में शामिल होने की धमकी दी थी। OpenAI</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों ने पत्र को बोर्ड द्वारा शिकायतों की एक लंबी सूची के बीच एक कारक के रूप में प्रकाशित किया, जिसके कारण व्यावसायीकरण पर चिंताएं जताते हुए ऑल्टमैन को निकाल दिया गया। रॉयटर्स पत्र की एक प्रति की समीक्षा करने में असमर्थ था। पत्र लिखने वाले कर्मचारियों ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया।</p>
<h3>ओपनएआई एजीआई को स्वायत्त प्रणालियों के रूप में परिभाषित करता है</h3>
<p style="text-align:justify;">लोगों के अनुसार, रॉयटर्स द्वारा संपर्क किए जाने के बाद, ओपनएआई ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कर्मचारियों को एक आंतरिक संदेश में क्यू * नामक एक परियोजना और सप्ताहांत की घटनाओं से पहले बोर्ड को एक पत्र में स्वीकार किया। ओपनएआई के एक प्रवक्ता ने कहा कि लंबे समय से कार्यकारी मीरा मुराती द्वारा भेजे गए संदेश ने कर्मचारियों को उनकी सटीकता पर टिप्पणी किए बिना कुछ मीडिया कहानियों के प्रति सचेत किया। ओपनएआई में कुछ लोगों का मानना है कि क्यू* (उच्चारण क्यू-स्टार) स्टार्टअप की उस खोज में एक सफलता हो सकता है जिसे कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता (एजीआई) के रूप में जाना जाता है। ओपनएआई एजीआई को स्वायत्त प्रणालियों के रूप में परिभाषित करता है जो अधिकांश आर्थिक रूप से मूल्यवान कार्यों में मनुष्यों से आगे निकल जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशाल कंप्यूटिंग संसाधनों को देखते हुए, नया मॉडल कुछ गणितीय समस्याओं को हल करने में सक्षम था, व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर कहा क्योंकि व्यक्ति कंपनी की ओर से बोलने के लिए अधिकृत नहीं था। सूत्र ने कहा, हालांकि केवल ग्रेड-स्कूल के छात्रों के स्तर पर गणित का प्रदर्शन करते हुए, ऐसे परीक्षणों में उत्तीर्ण होने से शोधकर्ता क्यू* की भविष्य की सफलता के बारे में बहुत आशावादी हो गए।</p>
<h3>इसे नवीन वैज्ञानिक अनुसंधान पर लागू किया जा सकता है</h3>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ता गणित को जेनेरिक एआई विकास की सीमा मानते हैं। वर्तमान में, जेनरेटिव एआई सांख्यिकीय रूप से अगले शब्द की भविष्यवाणी करके लेखन और भाषा अनुवाद में अच्छा है, और एक ही प्रश्न के उत्तर व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं। लेकिन गणित करने की क्षमता पर विजय प्राप्त करना – जहां केवल एक ही सही उत्तर है – का अर्थ है कि एआई में मानव बुद्धि के समान अधिक तर्क क्षमताएं होंगी। उदाहरण के लिए, एआई शोधकर्ताओं का मानना है कि इसे नवीन वैज्ञानिक अनुसंधान पर लागू किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक कैलकुलेटर के विपरीत जो सीमित संख्या में आॅपरेशनों को हल कर सकता है, एजीआई सामान्यीकरण कर सकता है, सीख सकता है और समझ सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अत्यधिक बुद्धिमान मशीनें कंप्यूटर वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का विषय | OpenAI</h3>
<p style="text-align:justify;">बोर्ड को लिखे अपने पत्र में, शोधकर्ताओं ने एआई की शक्ति और संभावित खतरे को चिह्नित किया, सूत्रों ने पत्र में उल्लिखित सटीक सुरक्षा चिंताओं को निर्दिष्ट किए बिना कहा। अत्यधिक बुद्धिमान मशीनों द्वारा उत्पन्न खतरे के बारे में कंप्यूटर वैज्ञानिकों के बीच लंबे समय से चर्चा होती रही है, उदाहरण के लिए क्या वे यह निर्णय ले सकते हैं कि मानवता का विनाश उनके हित में है।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘एआई वैज्ञानिक’’ टीम के काम को भी चिह्नित किया है, जिसके अस्तित्व की कई स्रोतों ने पुष्टि की है। लोगों ने कहा कि पहले की ‘‘कोड जेन’’ और ‘‘मैथ जेन’’ टीमों को मिलाकर बनाया गया समूह यह पता लगा रहा था कि मौजूदा एआई मॉडल को कैसे अनुकूलित किया जाए ताकि उनकी तर्क क्षमता में सुधार हो और अंतत: वैज्ञानिक कार्य किया जा सके। ऑल्टमैन ने चैटजीपीटी को इतिहास में सबसे तेजी से बढ़ते सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों में से एक बनाने के प्रयासों का नेतृत्व किया और एजीआई के करीब पहुंचने के लिए माइक्रोसॉफ्ट से आवश्यक निवेश और कंप्यूटिंग संसाधन प्राप्त किए। OpenAI CEO</p>
<p style="text-align:justify;">इस महीने एक प्रदर्शन में कई नए उपकरणों की घोषणा करने के अलावा, ऑल्टमैन ने पिछले हफ्ते सैन फ्रांसिस्को में विश्व नेताओं के एक शिखर सम्मेलन में चिढ़ाया कि उनका मानना ​​है कि बड़ी प्रगति नजर आ रही है। उन्होंने एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘ओपनएआई के इतिहास में अब तक चार बार, सबसे हालिया समय पिछले कुछ हफ्तों में था, मैं उस कमरे में था, जब हम अज्ञानता के पर्दे को पीछे धकेलते हैं और खोज की सीमा को आगे बढ़ाते हैं, और ऐसा करना जीवन भर का पेशेवर सम्मान है।’’ ऐसा कहने के एक दिन बाद, बोर्ड ने ऑल्टमैन को निकाल दिया। OpenAI</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rajasthan Election 2023: आज शाम 6 बजे थमेगा प्रचार-प्रसार, ये हिदायतें हुई जारी!" href="http://10.0.0.122:1245/propaganda-will-stop-at-six-pm-today-guidelines-issued/">Rajasthan Election 2023: आज शाम 6 बजे थमेगा प्रचार-प्रसार, ये हिदायतें हुई जारी!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Nov 2023 10:24:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नौकरियां भी देगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस</title>
                                    <description><![CDATA[Artificial Intelligence : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से हुई मुलाकात में सुरक्षित और भरोसेमंद साइबर स्पेस, हाई-टेक वैल्यू चेन, जेनरेटिव एआई, 5जी और 6जी टेलीकॉम नेटवर्क जैसे विषयों को रणनीतिक महत्व मिला है। दोनों देश निर्यात नियंत्रण और उच्च-प्रौद्योगिकी वाणिज्य को बढ़ाने के तरीकों का पता लगाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/artificial-intelligence-will-also-give-jobs/article-49327"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/artificial-intelligence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Artificial Intelligence : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से हुई मुलाकात में सुरक्षित और भरोसेमंद साइबर स्पेस, हाई-टेक वैल्यू चेन, जेनरेटिव एआई, 5जी और 6जी टेलीकॉम नेटवर्क जैसे विषयों को रणनीतिक महत्व मिला है। दोनों देश निर्यात नियंत्रण और उच्च-प्रौद्योगिकी वाणिज्य को बढ़ाने के तरीकों का पता लगाने के लिए नियमित प्रयास करने पर भी सहमत हुए हैं। साथ ही भारत और अमेरिका ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग से लेकर अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की संपूर्ण श्रृंखला तक के क्षेत्रों में सहयोग के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया है। दोनों देशों की सरकारें उन नीतियों और विनियमों को अपनाने के लिए काम करेंगी जो अमेरिकी और भारतीय उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच अधिक प्रौद्योगिकी साझाकरण, सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों को सुविधाजनक बनाती हैं। इस मुलाकात के बाद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अब और भी प्रगति देखने को मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव से हम सभी भली-भांति परिचित हैं। आज इशारे, बोली या चेहरे के संकेतों से बहुत कुछ कर गुजरने की क्षमता हासिल होती जा रही है। इसमें दो राय नहीं कि 21वीं सदी का यह दौर एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है। हालांकि इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई। लेकिन निर्णायक मुकाम तक पहुंचने में थोड़ा वक्त लगा। इसका मतलब ये नहीं कि यह एकाएक पैराशूट से आ गिरा और दुनिया में छा गया। एआई 1970 के दशक में लोकप्रिय होने लगी थी जब जापान इसका अगुवा बना। 1981 के आते-आते सुपर कम्प्यूटर के विकास की 10 वर्षीय रूपरेखा तथा 5वीं जनरेशन की शुरुआत ने रफ्तार दी। जापान के बाद ब्रिटेन भी चेता उसने एल्बी प्रोजेक्ट तो यूरोपीय संघ ने भी एस्पिरिट की शुरुआत की। अधिक गति देने या तकनीकी रूप से विकसित करने के लिए 1983 में कुछ निजी संस्थानों ने एआई के विकास के लिए माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी संघ बना डाला।</p>
<h3>कृत्रिम बुद्धि की दौड़ इंसानी बुद्धि पर भारी | Artificial Intelligence</h3>
<p style="text-align:justify;">सच तो यही है कि एआई की कहां-कहां और कैसी दखल होगी जिसकी न तो कोई सीमा है और न अंत। हर दिन नए-नए फीचरों के साथ करिश्माई तकनीक पहले से बेहतर विकल्पों के साथ परिवर्तित, सुधारित या विकसित होकर सामने होती है। दुनिया सबसे पहले इसके सहज रूप रोबोट से रू-ब-रू हुई जो सबकी पहुंच में नहीं रहा। लेकिन इस तकनीक ने घर-घर दस्तक देकर अपनी निर्भरता खूब बढ़ाई। अब साल भर में मोबाइल, टीवी, गैजेट्स आउटडेटेड लगने लगते हैं। आगे क्या होगा अकल्पनीय है। सच है कि कृत्रिम बुद्धि की दौड़ इंसानी बुद्धि पर भारी दिखने लगी है। एआई ने व्यापार के पूरे तौर तरीके बदल दिए। हरेक उद्योग, व्यापार इसके बिना अधूरा और अनुपयोगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि या फिर नागरिक शासन प्रणाली सब में जबरदस्त दखल बेइंतहा है। आसमान में सैटेलाइट, उड़ता हवाई जहाज, पटरी पर दौड़ती रेल-मेट्रो सभी कृत्रिम मेधा के नियंत्रण में हैं। घर में साफ-सफाई से लेकर खाना बनाना, टीवी आॅन-आॅफ करना, चैनल बदलना, एसी चालू-बंद करने जैसे काम एआई आधारित होते जा रहे हैं। कल सुरक्षा व्यवस्थाएं भी मानव रहित तकनीक पर आधारित होकर अधिक चाक चौबंद होना तय है। भारत में डीआरडीओ सहित कई स्टार्टअप पर काम चल रहा है। स्वचलित स्वायत्तता के एआई वाले दौर में कल्पना से भी बेहतर उपकरण होंगे जो ज्यादा प्रभावी, आक्रामक तथा सटीक यानी चूक रहित होंगे। एआई से जनसंवाद भी आसान हुआ और लोगों को जल्द समाधान भी मिलने लगा। अब सच्चाई यह है कि जन शिकायतों और निपटारे के बीच इंसान नहीं सिर्फ निष्पक्ष तकनीक है।</p>
<h3>अब एआई सपोर्टेड मशीनें आएंगी | Artificial Intelligence</h3>
<p style="text-align:justify;">हां तकनीक का मतलब सिर्फ यह भी नहीं कि लोग इंटरनेट और डिजिटल टेक्नोलॉजी तक सीमित रहें। अब एआई सपोर्टेड ऐसी मशीनें आएंगी जो इंसानी भावनाओं को भी पहचानेंगी। आगे रोबोट और ड्रोन युद्ध के मैदान तथा अस्पतालों के आॅपरेशन थियेटर में काम करते दिखें तो हैरानी नहीं होगी। एआई पढ़ाने से लेकर भाषण, एंकरिंग से लेकर किचन व घरों की साफ-सफाई और तमाम कामों में सक्षम हो रही है। इसके फायदे और भविष्य सबको समझ आने लगे हैं। कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों तथा उर्वरकों का दुरुपयोग रोकने व पशु-पक्षियों से फसल बचाव की क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। शायद ही कोई क्षेत्र बचे जो इससे अछूता रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">खेल के मैदानों में एक-एक मूवमेंट और माइक्रो सेकण्ड तक हुई गतिविधियों की रिकॉर्डिंग से साफ-सुथरे फैसलों का दौर सामने है। कार्पोरेट सेक्टर, रियल स्टेट, विनिर्माण या मशीनों का संचालन यानी सब कुछ एआई आश्रित होकर कामयाब हो रहे हैं। एआई की बैंकों, वित्तीय संस्थानों के डेटा को व्यवस्थित, सुरक्षित और प्रबंधित करने के साथ-साथ तमाम स्मार्ट और डिजिटल कार्डों के सफल संचालन के साथ समुद्र के गहरे गर्भ में खनिज, पेट्रोल, ईंधन की पतासाजी और खुदाई में भूमिका जबरदस्त है। सबने देखा दिल्ली की चालक रहित मेट्रो या दुनिया में बिना ड्राइवर की आॅटोपायलट कार के भविष्य की शुरुआत और टेस्ला को लेकर उत्साह।</p>
<p style="text-align:justify;">एआई तकनीक से जल्द ही चौक-चौराहों पर बिना पुलिस के अचूक स्मार्ट पुलिसिंग की पहरेदारी दिखेगी। अनेकों खूबियों से लैस 360 डिग्री घूमने में सक्षम कैमरे जो हरेक गतिविधियों को भांपने, पहचानने में दक्ष तथा कंट्रोल रूम में तैनात टीम को चुटकियों में सूचना साझा कर मौके पर पहुंचाने में मददगार होंगे। वहीं सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वरदान बन हरेक वाहन में ऐसी सेंसर प्रणाली विकसित भी हो सकेगी जो खुद-ब-खुद सामने वाली गाड़ी की स्थिति, संभावित चूक या गड़बड़ी को रीड कर स्वत: नियंत्रित हो जाए तो भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।</p>
<h3>आईआरएएसटीई तकनीक ड्राइवरों को सचेत करेगी | Artificial Intelligence</h3>
<p style="text-align:justify;">इस पर भारत में भी काम चालू है। नागपुर में हैदराबाद की एक संस्था के साथ प्रोजेक्ट इंटेलिजेंट सॉल्यूशंस फॉर रोड सेफ्टी थ्रू टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग यानी आईआरएएसटीई तकनीक वाहन चलाते समय संभावित दुर्घटना वाले परिदृश्यों को पहचानेगी और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी एडीएएस की मदद से ड्राइवरों को सचेत करेगी। भारतीय सड़कों के लिए लेन रोडनेट यानी एलआरनेट से लेन के निशान, टूटे डिवाइडर, दरारें, गड्ढे यानी आगे खतरे की पहले ही जानकारी ड्राइवर को हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जेनरेटिव एआई कंपनियों के आंतरिक वित्त विभागों में भी भूमिका निभाएगा। वित्तीय विश्लेषण, मॉडलिंग और पूर्वानुमान जैसी भूमिकाएँ प्रभावित होने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब बड़ी मात्रा में डेटा को संसाधित करने और संभावित परिदृश्य और विनियमन रिपोर्ट बनाने की बात आती है तो एआई के पास बढ़त है। अध्ययन में कहा गया है कि विशेष रूप से, एआई के उपयोग के विस्तार का मतलब नौकरी का नुकसान नहीं हो सकता है, लेकिन यह इन नौकरियों के कुछ हिस्सों को कैसे निष्पादित किया जाता है, इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। गूगल और आॅपनएआई (चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी) खुद कहते हैं कि इससे अतिरिक्त नौकरियां पैदा होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">त्वरित इंजीनियरों और सिस्टम सलाहकारों जैसी नई भूमिकाओं की मांग होगी। एआई को लेकर डर वैसा ही है जैसा हमने 1980 के दशक में कंप्यूटर आने पर देखा था। ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस का उदाहरण सामने है, जो हमें आसमान से धरती की अनजान जगह पर बिना किसी से पूछे सुरक्षित रास्ते से पहुंचाता है। लोकेशन शेयर करने पर मूवमेण्ट की जानकारी देने जैसा सारा कुछ एआई की ही देन है। भारत सहित दुनिया का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, बिग डाटा इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, रियल टाइम डाटा और क्वांटम कम्युनिकेशन में शोध, प्रशिक्षण, मानव संसाधन और कौशल विकास, स्मार्ट मोबिलिटी, स्मार्ट हेल्थकेयर, स्मार्ट कंसट्रक्शन जैसे स्टार्टअप्स को लेकर जबरदस्त होड़, निवेश और क्षमताएँ विकसित करने पर ध्यान केंद्रित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे तकनीक क्षेत्र में अत्याधिक रोजगार बढ़ेगा तो कई दूसरे क्षेत्रों में कुछ बुरा असर भी दिखेगा। इसको समझने, सीखने और दक्ष होने खातिर साक्षरता भी तो बढ़ेगी। जब ज्यादातर इंसानी जरूरतें जो इंसान पूरा करते थे, मशीनें पूरी करने लगेंगी तो ज्यादा आबादी वाले देशों में नई बहस तय है। सही भी है जो तमाम धार्मिक ग्रंथों में किसी न किसी रूप में लिखा है और जिसका सार यही कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है। कह सकते है कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी उसी का एक हिस्सा है बस उफान देखना बाकी है। US President Joe Biden</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ (ईटी) की रिपोर्ट के अनुसार, जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से भारत के 5.4 मिलियन आईटी कर्मचारियों में से लगभग एक प्रतिशत प्रभावित होने की संभावना है। शुरूआत में इसका असर सेल्स और सपोर्ट रोल में काम करने वालों पर पड़ सकता है। एक नए अध्ययन के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि जेनरेटिव एआई से आईटी क्षेत्र में 2-3 अरब डॉलर की अतिरिक्त राजस्व क्षमता पैदा होने की भी उम्मीद है। मौजूदा स्थिति के अनुसार, 245 अरब डॉलर के तकनीकी सेवा उद्योग में 3,00,000 कर्मचारी बिक्री और सहायक भूमिकाओं में काम कर रहे हैं। हालांकि,अगले तीन से पांच वर्षों में एआई तकनीक के कारण लगभग 50,000 कर्मचारियों के काम पर असर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-ऋषभ मिश्रा</strong><br />
<strong>असिस्टेंट प्रोफेसर, स्तंभकार एवं प्रेरक वक्ता </strong><br />
<strong>मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2023 15:54:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कृत्रिम बुद्धिमत्ता को व्यापक पैमाने पर अपनाने का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[समूची वैश्विक अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपनाए जाने के तीन कारक रहे हैं। व्यापक स्तर पर समानांतर (Time to adopt artificial intelligence on a wider scale) अभिकलन संसाधनों की उपलब्धता, एआई की गतिविधि से सामंजस्य बिठाने वाली बेहतर कंप्यूटर प्रणाली का विकास और इंटरनेट से संबंधित प्रचुर आंकड़ों की उपलब्धता का एआई के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">समूची वैश्विक अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपनाए जाने के तीन कारक रहे हैं। व्यापक स्तर पर समानांतर (Time to adopt artificial intelligence on a wider scale) अभिकलन संसाधनों की उपलब्धता, एआई की गतिविधि से सामंजस्य बिठाने वाली बेहतर कंप्यूटर प्रणाली का विकास और इंटरनेट से संबंधित प्रचुर आंकड़ों की उपलब्धता का एआई के तीव्र विकास में खास योगदान रहा है। इनके सम्मिलित असर से इमेज लेबलिंग में त्रुटि की दर 2010 के 28.5 फीसदी से घटकर महज 2.5 फीसदी पर आ चुकी है। पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2030 तक विश्व अर्थव्यवस्था में एआई का योगदान 15.7 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा जो चीन एवं भारत के मौजूदा साझा आउटपुट से भी अधिक होगा। वहीं एक्सेंचर की रिपोर्ट रीवायर फॉर ग्रोथ में कहा गया है कि एआई के चलते भारत की वार्षिक वृद्धि दर में वर्ष 2035 तक 1.3 फीसदी की उछाल आ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका मतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में 957 अरब डॉलर की अतिरिक्त रकम आ जाएगी जो भारत के मौजूदा सकल (Time to adopt artificial intelligence on a wider scale) मूल्य संवर्द्धन का 15 फीसदी होगा। विकासशील देशों में भारत एआई का अधिकतम लाभ उठा पाने की स्थिति में है। तकनीक के मोर्चे पर हमारी मजबूत स्थिति, अनुकूल जनांकिकीय परिदृश्य और समुन्नत आंकड़ों की उपलब्धता में संरचनात्मक लाभ होने से भारत एआई के लिए कहीं बेहतर तैयार है। दरअसल वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं के लिए भारत के संदर्भ में आंकड़ों की विविधता एक बड़ी बाधा रही है क्योंकि एआई की मौजूदा गणना-पद्धतियों को र्इंधन देने का काम आंकड़े ही करते हैं। भारत एआई-आधारित स्टार्टअप की संख्या के मामले में वर्ष 2016 में जी-20 देशों के बीच तीसरे स्थान पर था। इस तरह के स्टार्टअप भी वैश्विक स्तर से अधिक वर्ष 2011 के बाद 86 फीसदी बढ़ गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग इस तरह के कई प्रोजेक्ट चला रहा है। नमओपनमाइंड डॉट आॅर्ग एक ऐसा ही प्रोजेक्ट है जो प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए कूटबद्ध एवं अनाम आंकड़ों के इस्तेमाल का जरूरी टूल बनाने में लगा है। इस तरह निजी आंकड़े पूरी तरह निजी बने रहेंगे लेकिन मशीनी गणना पद्धति उनसे सबक हासिल कर सकेगी। एआई को अक्सर सरकारें सुदूर भविष्य वाली तकनीक की तरह देखती हैं। पहला, आयोग इसरो और आईबीएम के साथ मिलकर फसलों की उपज बढ़ाने और मृदा स्वास्थ्य को बेहतर करने में एआई समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों और सरकार के पास उपलब्ध अन्य आंकड़ों की मदद से यह किया जा रहा है। इसके असर और सटीकता को जांचने के लिए शुरूआत में इसे देश के 25 जिलों में लागू किया जाएगा। हालांकि यूपीआई और आधार जैसे नवाचार और मोबाइल फर्स्ट उपयोग के चलते अब हमारे स बहुत सारे विशिष्ट आंकड़े भी मौजूद हैं। हमारी जरूरतें भी खास तरह की हैं। हमें निजता के संदर्भ में नया नजरिया अपनाना चाहिए ताकि कूटबद्ध बहुपक्षीय गणना जैसी मशीनी सीख को संरक्षित रखा जा सके।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Jan 2019 19:56:59 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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