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                <title>देशभर के शिक्षकों को भी मिलेगा सातवें वेतन आयोग का लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[ मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को सांतवे वेतन आयोग का  दिया तोहफा नई दिल्ली(एजेंसी)। इंजीनियरिंग कॉलेज सहित देश भर के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के तहत बढ़ा हुआ वेतन देने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इसे लेकर 1241 करोड़ रुपए भी जारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;"> मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को सांतवे वेतन आयोग का  दिया तोहफा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)</strong>। इंजीनियरिंग कॉलेज सहित देश भर के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के तहत बढ़ा हुआ वेतन देने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इसे लेकर 1241 करोड़ रुपए भी जारी कर दिए है। तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की यह मांग काफी समय से लंबित थी।मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को इसे मंजूरी दिए जाने की जानकारी की।</p>
<h2>सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले करीब 29264 शिक्षकों को मिलेगा लाभ</h2>
<p style="text-align:justify;">साथ ही बताया कि इसका सीधा लाभ सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले करीब 29264 शिक्षकों को मिलेगा। इसके अलावा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के दायरे में आने वाले निजी संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि तकनीकी शिक्षण संस्थानों के गैर-एकेडमिक स्टाफ को सरकार ने पहले ही सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ देने की मंजूरी दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बतादें कि कुछ राज्य अपने यहां सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को पहले ही लागू कर चुके हैं। हाल ही में महाराष्ट्र ने भी सातवें वेतन आयोग की सिफारिश को मंजूरी दी। सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद राज्य सरकार के खजाने पर 21 हजार करोड़ रुपये का अतरिक्त भार आएगा। इस फैसले से तकरीबन राज्य के 17 लाख कर्मचारियों को लाभ पहुंचेगा।इसके साथ ही यूपी सरकार ने भी राजधानी लखनऊ के नगर निगम कर्मचारियों को तोहफा दिया है।</p>
<h2>2019 के पहले रिटायर हो चुके कर्मचारियों को उनकी पेंशन को  तीन गुना तक बढ़ाने का निर्णय लिया</h2>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने 2019 के पहले रिटायर हो चुके कर्मचारियों को उनकी पेंशन को प्रशासन ने लगभग तीन गुना तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। दरअसल, इन सेवानिवृत कर्मियों को अब 7वां वेतन आयोग के हिसाब से पेंशन मिल सकेगी। बतादें कि पहले सेवानिवृत कर्मचारियों को लगभग 3500 रुपये पेंशन के तौर पर मिल रहे थे। जबकि 7वां वेतन आयोग के तहत पेंशन दिए जाने के निर्णय के बाद से इन कर्मचारियों को अब 9000 रुपये पेंशन मिल सकेगी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jan 2019 14:06:38 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पीएनबी की सेवाओं के लिए अब देना होगा अधिक शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक के ग्राहकों को सितंबर से बैंक की दूसरी शाखा में 5,000 रुपए से अधिक नकद जमा करने पर शुल्क का भुगतान करना होगा। अगर शाखा उसी शहर में स्थित में है तो भी शुल्क देना होगा। फिलहाल पीएनबी ग्राहकों को शहर के अंदर दूसरी शाखा में 25,000 रुपए से अधिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/pay-more-for-pnb-services/article-2940"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/pnb.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> पंजाब नेशनल बैंक के ग्राहकों को सितंबर से बैंक की दूसरी शाखा में 5,000 रुपए से अधिक नकद जमा करने पर शुल्क का भुगतान करना होगा। अगर शाखा उसी शहर में स्थित में है तो भी शुल्क देना होगा। फिलहाल पीएनबी ग्राहकों को शहर के अंदर दूसरी शाखा में 25,000 रुपए से अधिक जमा करने पर ही शुल्क देना होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएनबी ने ग्राहकों को भेजी सूचना में कहा कि ऋण के अलावा दूसरे मामलों में शुल्क (जीएसटी शामिल नहीं) संशोधित करने का निर्णय किया गया है। इसके तहत आधार शाखा के अलावा शहर की दूसरी शाखा में 5,000 रुपए से अधिक जमा करने पर शुल्क लगेगा। एक ग्राहक को 5,000 रुपए नकद से उपर प्रति 1,000 रुपए पर एक रुपए शुल्क देना होगा। यह शुल्क इस प्रकार की जमा पर न्यूनतम 25 रुपए होगा। दूसरे शहर की शाखा में एक सितंबर से 5,000 रुपए तक जमा मुफ्त होगा। फिलहाल यह सीमा 25,000 रुपए है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लॉकर सुविधा शुल्क बढ़ाया</h2>
<p style="text-align:justify;">बैंक ने चैक वापस लोटने को लेकर भी शुल्क में संशोधन किया है। इसके तहत एक करोड़ रूपए से अधिक भुगतान वाले चैक की वापसी पर 2,000 रुपए तथा उसके बाद चैक बाउंस होने पर 2,500 रुपए शुल्क लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएनबी ने महानगरों में विभिन्न प्रकार की लॉकर सुविधा शुल्क बढ़ाया है। लॉकर किराए में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके तहत महानगरों में छोटे, मझाले एवं बड़े और अधिक बड़े आकार के लॉकर के लिए शुल्क क्रमश: 1500 रुपए, 3,500 रुपए, 5,500 रुपए तथा 10, रुपए होगा। इससे पहले ये शुल्क 1,200, 2,800, 4,500 और 8,000 रुपए थे। इसके अलावा पीएनबी 22 शाखाओं में 25 प्रतिशत प्रीमियम शुल्क लागएगा। इन 22 शाखाओं में 19 दिल्ली में और एक गुड़गांव और दो फरीदाबाद में हैं। इन शुल्कों पर 18 प्रतिशत जीएसटी और लगेगा। पहले इन सेवाओं पर कर की दर 15 प्रतिशत थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Aug 2017 08:38:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>GST: छोटे कारोबारियों को भरने होंगे 37 रिटर्न</title>
                                    <description><![CDATA[फॉर्म और टैक्स भरे जाएंगे ऑनलाइन नई दिल्ली: गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को एक जुलाई से लागू करने के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट भले अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन छोटे कारोबारी बेचैन हैं। उन्हें पहले से भी ज्यादा कागजी और कानूनी फॉर्मेलिटीज पूरी करनी होंगी। नए टैक्स सिस्टम के लागू होने के बाद न […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/gst-small-businesses-will-have-to-pay-37-returns/article-1102"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/gst-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">फॉर्म और टैक्स भरे जाएंगे ऑनलाइन</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को एक जुलाई से लागू करने के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट भले अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन छोटे कारोबारी बेचैन हैं। उन्हें पहले से भी ज्यादा कागजी और कानूनी फॉर्मेलिटीज पूरी करनी होंगी। नए टैक्स सिस्टम के लागू होने के बाद न सिर्फ इंडस्ट्री, अकाउंटेंट्स बल्कि बैंकों का काम भी बढ़ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, नए सिस्टम में छोटे कारोबारियों को 37 टैक्स रिटर्न भरने होंगे। जबकि अभी सालभर में सिर्फ 13 टैक्स रिटर्न भरने पड़ते हैं। उधर, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने संसदीय पैनल को इन्फॉर्म किया है कि उसके मेंबर बैंक अभी भी GST अप्लाई करने के लिए तैयार नहीं हैं। नियम के मुताबिक, अब सभी तरह के फॉर्म और टैक्स ऑनलाइन भरे जाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कानून को 1 जुलाई से लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध</h2>
<p style="text-align:justify;">टीवी और अखबारों में आजकल ‘एक देश एक कर’ नाम का लोकलुभावन विज्ञापन दिखता है। यह विज्ञापन गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के बारे में है। 1 जुलाई, 2017 से लागू होने जा रही जीएसटी पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन छोटे कारोबारी इससे बेचैन हैं। उनके परेशान होने की वजह पहले से भी ज्यादा कागजी और कानूनी फॉरमलिटीज हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद अब छोटे कारोबारियों को 37 टैक्स रिटर्न्स भरने होंगे। इंडस्ट्री के लिए बल्कि अकाउंटेंट्स और बैंकों के लिए अतिरिक्त काम बढ़ जाएगा। इंडियास्पेंड के एक विश्लेषण के मुताबिक यह बात सामने आई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार वस्तु एवं सेवा कर कानून को 1 जुलाई से लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jun 2017 23:04:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनिल अंबानी को कर्ज चुकाने के लिए सात माह की मोहलत</title>
                                    <description><![CDATA[कंपनी पर कुल 45,000 करोड़ रुपये कर्ज मुंबई। कर्ज के बोझ से दबी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को बैंकों से कर्ज की अदायगी करने के लिए सात महीने की मोहलत मिल गई है। बैंकों ने रणनीतिक पुनर्गठन योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सात महीने तक कंपनी को कर्ज की किस्त नहीं चुकानी होगी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/anil-ambani-gets-seven-months-for-pay-the-loan/article-847"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/ambani.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कंपनी पर कुल 45,000 करोड़ रुपये कर्ज</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> कर्ज के बोझ से दबी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को बैंकों से कर्ज की अदायगी करने के लिए सात महीने की मोहलत मिल गई है। बैंकों ने रणनीतिक पुनर्गठन योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सात महीने तक कंपनी को कर्ज की किस्त नहीं चुकानी होगी। कंपनी पर कुल 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। कंपनी की क्रेडिट रेटिंग नीचे किए जाने के बाद आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त करने करने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">अनिल अंबानी ने घोषणा की कि सितंबर तक कारोबार की बिक्री के दो सौदों से मिले धन की मदद से कंपनी अपने कर्ज के बोझ को घटाकर 20,000 करोड़ रुपये करेगी। बैंकों ने कंपनी को एक दिन पहले इसके लिए दिसंबर तक की समयसीमा दी है। अंबानी ने कहा कि इसके अलावा कर्ज को और कम करने के लिए कंपनी अपने वैश्विक कारोबार की रणनीतिक बिक्री पर विचार करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2017 09:04:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब नकद नहीं मिलेगा वेतन</title>
                                    <description><![CDATA[चैक या बैंक खाते में जाएंगे पैसे केन्द्रीय कैबिनेट का अहम फैसला New Delhi: केन्द्र ने बुधवार को वेतन भुगतान कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है। इसके तहत कंपनियां और औद्योगिक प्रतिष्ठान वेतन का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके या चेक से कर सकेंगे। एक सूत्र ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वेतन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/no-longer-will-pay-cash/article-603"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/baithak.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>चैक या बैंक खाते में जाएंगे पैसे</strong></li>
<li><strong>केन्द्रीय कैबिनेट का अहम फैसला</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>New Delhi: </strong>केन्द्र ने बुधवार को वेतन भुगतान कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है। इसके तहत कंपनियां और औद्योगिक प्रतिष्ठान वेतन का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके या चेक से कर सकेंगे। एक सूत्र ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वेतन भुगतान कानून, 1936 में संशोधन के लिए अध्यादेश का रास्ता चुना। इसके जरिए नियोक्ता तथा कुछ उद्योग वेतन का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके या चेक से कर सकेंगे। इसके अलावा नियोक्ताओं के पास वेतन का भुगतान नकद में करने का भी विकल्प होगा। सरकार आमतौर पर नए नियमों को तत्काल क्रियान्वित करने के लिए अध्यादेश लाती है। अध्यादेश छह माह के लिए वैध होता है। इस अवधि में सरकार को इसे संसद में पारित कराने की जरूरत होती है। वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2016 के तहत मूल कानून की धारा छह में संशोधन का प्रस्ताव है, जिससे नियोक्ता अपने कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान चेक से या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से उनके बैंक खाते में डालकर कर सकेंगे। पिछले दिनों नोटबंदी पर हंगामे के बीच श्रम<br />
मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने संसद में यह विधेयक पेश किया था। इसके तहत राज्य सरकारें ऐसे उद्योग या प्रतिष्ठान तय कर सकती हैं, जो वेतन देने के लिए नकदीरहित तरीके का इस्तेमाल करते हैं। विधेयक में कहा गया है कि यह नई प्रक्रिया डिजिटल और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था के उद्देश्य को पूरा करती है। यह कानून 23 अप्रैल, 1936 को अस्तित्व में आया था। इसके तहत वेतन का भुगतान सिक्के और मुद्रा नोटों या दोनों में किया जा सकता है। इसमें वेतन का भुगतान चेक या बैंक खाते के जरिए करने के प्रावधान को 1975 में शामिल किया गया। फिलहाल इस कानून के दायरे में प्रतिष्ठानों के कुछ श्रेणियों के वे कर्मचारी आते हैं, जिनका वेतन 18,000 रुपये मासिक से अधिक नहीं है। केन्द्र सरकार वेतन भुगतान के बारे में रेलवे, हवाई परिवहन सेवाओं, खान, तेल क्षेत्र और स्वयं के प्रतिष्ठानों के मामले में नियम बना सकती है। अन्य मामलों में राज्यों को फैसला करना होता है। कानून में राज्य स्तर पर संशोधन के जरिए आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, केरल और हरियाणा ने पहले ही चेक और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वेतन भुगतान का प्रावधन कर दिया है। फिलहाल कर्मचारी से लिखित में लेकर उसका वेतन चेक के जरिए या उसके खाते में सीधे डाला जा सकता है। <em>Agency</em></p>
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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2016 16:59:42 +0530</pubDate>
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