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                <title>pollution - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>Air Pollution: कैथल पर प्रदुषण की मार, एक्यूआई @391 पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[पराली जलाने के 4 नए मामले आये कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Kaithal News: आंखों में जलन, सांसों में घुटन, नजर और मंजर के बीच धुआं, ये आलम आज कल कैथल जिले में देखने को मिल रहा है। आसमान को प्रदूषण की चादर ने ढक लिया है। कैथल में वायु प्रदुषण अब खतरनाक स्तर पर पहुंच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/pollution-hits-kaithal-four-new-cases-of-stubble-burning-report/article-77680"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/kaithal-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पराली जलाने के 4 नए मामले आये</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)।</strong> Kaithal News: आंखों में जलन, सांसों में घुटन, नजर और मंजर के बीच धुआं, ये आलम आज कल कैथल जिले में देखने को मिल रहा है। आसमान को प्रदूषण की चादर ने ढक लिया है। कैथल में वायु प्रदुषण अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। जिस वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दो दिनों पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स का स्तर कम था, लेकिन शनिवार को एक्यूआइ फिर से बढ़ गया जो रविवार को भी बढ़कर 400 के करीब पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार 200 से ऊपर एक्यूआइ का स्तर खराब माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि शुक्रवार को जिले में एक्युआइ 100 के करीब आ गया था लेकिन रविवार सुबह 350 से शुरू हुआ एक्युआइ शाम होते होते 391 तक चला गया है। इससे पहले दीपावली पर भी 300 से ऊपर एक्युआइ चला गया था जोकि आमजन के लिए दिक्क्कते पैदा कर रहा है। वही कैथल के पडोसी जिले जींद की बात कि जाये तो इसका एक्यूआई भी रविवार को 300 से ऊपर रहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फसल अवशेष जलाने के चार मामले आये | Kaithal News</h3>
<p style="text-align:justify;">एक्यूआइ का स्तर बढने के अनेक कारण है जिनमे धूल का उड़ना, कचरे में आगजनी और धन के अवशेष जलाना मुख्यत होते है। शहर में कई स्थानों पर सरेआम कचरें में आग लगाई जाती हैं लेकिन नगर परिषद की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इसके अलावा जिले में धान के अवशेष जलाने के भी चार मामले सामने आये है, जिनमे एक गुहला, एक कलायत और दो राजौंद में पाए गये है। जिले में अब तक 17 मामले सामने आ चुके है जिनमे 35 हजार से ऊपर जुर्माना लगाया जा चुका है। बता दे कि धान के अवशेष जलाने से रोकने के लिए जिले में 272 टीमें लगाई गयी है जो लगातार किसानों को जागरूक कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण की मार झेल रहे कैथल वासियों ने कहा कि लोगों को प्रदूषण की वजह से कई तरह की परेशानी हो रही हैं. पिछले कुछ दिनों में सांस लेने और गले में संक्रमण के साथ आंखों में जलन ज्यादा हो रही है | हवा में हमेशा धूल और गंदगी रहती है जिस कारण आंखें लाल हो जाती हैं और उनमें जलन होने लगती है | ऐसे में हालात ये है कि अस्पतालों में बड़ी बड़ी लाइन लग रही है। पिछले कुछ दिनों से ओपीडी में वृद्धि हुई है। Kaithal News</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस तरह रहा रविवार को एक्युआइ</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>समय कैथल जींद </strong><br />
सुबह 2 बजे 358 329<br />
सुबह 5 बजे 344 319<br />
सुबह 10 बजे 354 307<br />
दोपहर 12 बजे 318 310<br />
दोपहर 3 बजे 331 311<br />
शाम 5 बजे 391 318</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Fatehabad History: फतेहाबाद को किसने बसाया था, इतिहास जानकर आप भी हैरान हो जाओगे, जानिये" href="http://10.0.0.122:1245/who-founded-fatehabad-you-will-be-surprised-to-know-this-history/">Fatehabad History: फतेहाबाद को किसने बसाया था, इतिहास जानकर आप भी हैरान हो जाओगे, जानिये</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 14:47:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आसमान में छाए धुएं व प्रदूषण ने बढ़ाई परेशानी, सांस में तकलीफ के मरीजों की अस्पतालों में कतारें</title>
                                    <description><![CDATA[हनुमानगढ़। दीपावली के बाद आसमान में छाए धुएं और प्रदूषण ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बच्चों, बुजुर्गांे और सांस संबंधी बीमारियों वाले लोगों वर्तमान मौसम विशेष रूप से खतरनाक है। हनुमानगढ़ जिले की ही बात करें तो गत दिनों देश में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की श्रेणी में हनुमानगढ़ पहले नम्बर पर आ गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/smoke-and-pollution-in-the-sky-increased-the-problem/article-77490"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/air-polluction-hanumangarh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हनुमानगढ़। दीपावली के बाद आसमान में छाए धुएं और प्रदूषण ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बच्चों, बुजुर्गांे और सांस संबंधी बीमारियों वाले लोगों वर्तमान मौसम विशेष रूप से खतरनाक है। हनुमानगढ़ जिले की ही बात करें तो गत दिनों देश में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की श्रेणी में हनुमानगढ़ पहले नम्बर पर आ गया था। हालांकि कुछ दिनों से धीरे-धीरे वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट दर्ज की जा रही है। बदले मौसम का नतीजा यह है कि अस्पतालों में सांस में तकलीफ व आंखों में जलन के मरीजों की कतारें लग रही हैं। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">राजकीय जिला चिकित्सालय के सीनियर स्पेशलिस्ट डॉ. राकेश फगेड़िया ने बताया कि दीपावली के बाद सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या में एकाएक वृद्धि हुई है। ओपीडी के साथ भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे मौसम में उन लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है जिनकी पूर्व में सांस की तकलीफ की दवाइयां चल रही हैं। एलर्जी की समस्या वाले नागरिक भी इस मौसम में सावधान रहें। जब तक वातावरण साफ नहीं होता है तब तक जितना हो सके, घरों में रहें। बाहर जाने से बचें। आवश्यक दवाइयों का नियमित रूप से सेवन करें ताकि इस मौसम में अधिक तकलीफ न हो और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत न आए।</p>
<p style="text-align:justify;">राजकीय जिला चिकित्सालय नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष सोनी ने बताया कि दीपावली के बाद आसमान में छाए धुएं व प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, आंखों से पानी गिरना, आंखें लाल होना के काफी मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं। बचाव के लिए इस तरह के वातावरण से दूर रहना चाहिए। अगर किसी विशेष क्षेत्र में धुआं या प्रदूषण है तो वहां न जाएं। बचाव ही सबसे अच्छा उपाय है। समय-समय पर आंखों को ठण्डे पानी से धोते रहें। अगर फिर भी उक्त समस्या रहती है तो नजदीकी नेत्र चिकित्सक से सलाह लें। उन्होंने बताया कि धुएं व प्रदूषण आदि से बचाव के लिए धूप से बचाव वाले चश्मे का इस्तेमाल किया जा सकता है। Hanumangarh News</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 15:23:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Pollution Crisis of Ganga: गंगा के अस्तित्व पर मंडराता प्रदूषण का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय कृषि और सभ्यता की रीढ़ है गंगा Pollution Crisis of Ganga: भारत की पवित्र और जीवनदायिनी गंगा नदी न केवल एक प्राकृतिक संपदा है, बल्कि देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक आस्था का प्रतीक भी है। हिमालय से निकलकर यह नदी बंगाल की खाड़ी तक अपनी यात्रा में 2510 किलोमीटर का सफर तय करती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/gangas-existence-is-under-threat-due-to-pollution/article-65086"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/ganga-river.jpg" alt=""></a><br /><h3>भारतीय कृषि और सभ्यता की रीढ़ है गंगा</h3>
<p style="text-align:justify;">Pollution Crisis of Ganga: भारत की पवित्र और जीवनदायिनी गंगा नदी न केवल एक प्राकृतिक संपदा है, बल्कि देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक आस्था का प्रतीक भी है। हिमालय से निकलकर यह नदी बंगाल की खाड़ी तक अपनी यात्रा में 2510 किलोमीटर का सफर तय करती है, जिसमें 2071 किलोमीटर भारत के भूभाग से होकर गुजरता है और बाकी का हिस्सा बांग्लादेश में प्रवाहित होता है। गंगा और इसकी सहायक नदियाँ मिलकर दस लाख वर्ग किलोमीटर का एक विशाल उपजाऊ मैदान बनाती हैं, जो भारतीय कृषि और सभ्यता की रीढ़ है। Ganga Pollution Crisis</p>
<p><a title="Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लगेंगी!" href="http://10.0.0.122:1245/yaad-e-murshid-free-eye-camp-3/">Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लग…</a></p>
<p style="text-align:justify;">गंगा नदी भारतीय संस्कृति और धर्म का अभिन्न अंग है। इसे हिंदू धर्म में पवित्र माना गया है और इसके जल का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर अंतिम संस्कार तक किया जाता है। पुराणों, उपनिषदों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में गंगा की महिमा का वर्णन मिलता है। इसके अलावा, विदेशी यात्रियों और विद्वानों ने भी गंगा की महत्ता को अपने साहित्य में स्थान दिया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गंगा का जल अद्वितीय है। इसमें मौजूद बैक्टीरियोफेज नामक जीवाणु इसे शुद्ध बनाए रखते हैं, जिससे यह जल अन्य नदियों की तुलना में अधिक स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक होता है। लेकिन आधुनिक युग में गंगा की यह पवित्रता और महिमा प्रदूषण के कारण खतरे में पड़ गई है।</p>
<h3>गंगा का प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है</h3>
<p style="text-align:justify;">आज गंगा का प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने चेतावनी दी है कि यदि गंगा में सीवेज और औद्योगिक कचरे का गिरना नहीं रोका गया, तो इसका दुष्प्रभाव न केवल पर्यावरण पर पड़ेगा, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालेगा। गंगा में प्रतिदिन लाखों लीटर सीवरेज का पानी और औद्योगिक कचरा गिराया जाता है। साथ ही, धार्मिक अनुष्ठानों और शवदाह के कारण भी गंगा का जल प्रदूषित होता है। इस प्रदूषण का न केवल गंगा के जलीय जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह उन समुदायों को भी प्रभावित करता है जो अपनी आजीविका के लिए गंगा पर निर्भर हैं। Ganga Pollution Crisis</p>
<p style="text-align:justify;">गंगा बेसिन भारत के उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत राज्यों में फैला है। यह क्षेत्र न केवल कृषि और उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी इसकी अहम भूमिका है। फिर भी, यह क्षेत्र विकास और शोषण की मार झेल रहा है। बालू खनन, गाद की समस्या, जलवायु परिवर्तन और अतिक्रमण गंगा के अस्तित्व को लगातार खतरे में डाल रहे हैं। उत्तराखंड के सुरेश भाई जैसे पर्यावरणविदों ने बार-बार गंगा के उद्गम पर मंडराते खतरों की ओर इशारा किया है। उनका मानना है कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो गंगा का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।</p>
<h3>गंगा को बचाने के लिए जन आंदोलन जरूरी</h3>
<p style="text-align:justify;">गंगा मुक्ति आंदोलन के संस्थापक अनिल प्रकाश का कहना है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। वे मानते हैं कि गंगा को बचाने के लिए जन आंदोलन जरूरी है। फरक्का बराज और अन्य बांधों को हटाने की मांग भी तेज हो रही है। इन बांधों ने गंगा की प्राकृतिक धारा को बाधित कर दिया है, जिससे नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पूर्व सांसद अली अनवर ने गंगा की सफाई को राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठाने की अपील की। उन्होंने नमामि गंगे योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना के तहत आवंटित बजट का दुरुपयोग हुआ है। गंगा की सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार और ठेकेदारी ने समस्या को और जटिल बना दिया है। Ganga Pollution Crisis</p>
<p style="text-align:justify;">गंगा को बचाने के लिए यह जरूरी है कि स्थानीय समुदायों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए। गंगा पर निर्भर लोगों की जरूरतों और सुझावों को ध्यान में रखकर ही प्रभावी योजनाएँ बनाई जा सकती हैं। बिहार के पर्यावरणविद घनश्याम सिंह ने बांधों के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई और फरक्का बराज को खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य देशों में जहां बांध तोड़े जा रहे हैं, वहीं भारत में नए बांधों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन को भी प्रभावित करता है।</p>
<h3>2025 में देश भर से गंगा प्रेमी एकत्रित होंगे</h3>
<p style="text-align:justify;">भागलपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय विमर्श में गंगा के सवाल पर विभिन्न राज्यों और नेपाल के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। इस विमर्श में निर्णय लिया गया कि 2025 में गंगा मुक्ति आंदोलन की वर्षगांठ पर देश भर से गंगा प्रेमी एकत्रित होंगे और गंगा की अविरलता और निर्मलता को बहाल करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाने की रणनीति तैयार करेंगे। गंगा को बचाने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संगठनों और आम जनता को मिलकर काम करना होगा। यह केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। गंगा का संरक्षण न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल उपहार भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">गंगा भारत के लिए केवल जल स्रोत नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान, हमारी सभ्यता और हमारे विश्वास की धारा है। इसे बचाने के लिए हमें अपने दृष्टिकोण और विकास की नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो गंगा और उससे जुड़ी भारतीय संस्कृति को बचाना असंभव हो जाएगा। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम सभी गंगा को प्रदूषण और शोषण से मुक्त करने के इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। Ganga Pollution Crisis</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुमार कृष्णन (यह लेखक के अपने विचार हैं) </strong></p>
<p><a title="Agriculture Loan Schemes: किसानों की हो गई बल्ले बल्ले! अब पहले से दोगुना मिलेगा गारंटी मुक्त कृषि लोन!" href="http://10.0.0.122:1245/farmers-will-now-get-double-the-guarantee-free-agricultural-loan-than-before/">Agriculture Loan Schemes: किसानों की हो गई बल्ले बल्ले! अब पहले से दोगुना मिलेगा गारंटी मुक्त कृषि ल…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 09:50:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Electronic Waste : इलेक्ट्रॉनिक कचरे की देन-पारा प्रदूषण </title>
                                    <description><![CDATA[नरेंद्र देवांगन। विद्युत चालित उपकरणों, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने दुनिया का स्वरूप बदल दिया है। इनके कारण लोगों की जीवन शैली और कल-कारखानों की कार्यशैली बदलने के साथ ही बढ़ी है दुनिया की जगमगाहट पर इस जगमगाहट के पीछे एक अंधकार भी है जो अत्यंत खतरनाक है। एक अवधि तक उपयोग के पश्चात ये उपकरण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/electronic-waste-causes-mercury-pollution/article-55900"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/electronic-waste.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नरेंद्र देवांगन।</strong> विद्युत चालित उपकरणों, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने दुनिया का स्वरूप बदल दिया है। इनके कारण लोगों की जीवन शैली और कल-कारखानों की कार्यशैली बदलने के साथ ही बढ़ी है दुनिया की जगमगाहट पर इस जगमगाहट के पीछे एक अंधकार भी है जो अत्यंत खतरनाक है। एक अवधि तक उपयोग के पश्चात ये उपकरण खराब या अनुपयोगी (Electronic Waste) हो जाते हैं। उसके बाद इन्हें कचरे के साथ फैंक दिया जाता है। अनेक देशों में व्यवस्था के कारण या मजबूरी के कारण कुछ हद तक इन्हें अलग किया जाता है या रीसाइकिल करके उससे नए उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बचा कचरा अन्य जैविक कूड़े के साथ पड़ा रहता है। इनमें मौजूद भारी धातुएं व जहरीले रसायन रिस-रिस कर बाहर आते हैं और भूमि व जल के साथ वायु को भी प्रदूषित करते हैं।</div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>खतरनाक इलेक्ट्रॉनिक कचरा || Electronic Waste</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">विभिन्न प्रकार के विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में प्रयुक्त होने वाला पारा यानी मरकरी सबसे खतरनाक तत्व है। मिसाल के तौर पर, लैपटॉप, कंप्यूटर, टेलीफोन, डीवीडी प्लेयर, फैक्स मशीन, फोटो कॉपियर और एलसीडी युक्त उपकरणों में पारे का उपयोग किया जाता है। वैसे तो इनमें मात्र 2 से 10 मिलीग्राम तक ही पारे का उपयोग होता है पर यदि इसे जोड़ा जाए तो विश्व में पारे की कुल खपत का 30 प्रतिशत इन उपकरणों में प्रयुक्त होता है। प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पारा व उसके यौगिक जहां विभिन्न रसायनिक उद्योगों में उत्प्रेरक व अन्य रूपों में प्रयुक्त होते हैं वहीं विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी प्रयोग किए जाते हैं।</div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फ्लोरोसेंट लैंप:-</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ समय से फ्लोरोसेंट लैंप का उपयोग बेहताशा बढ़ रहा है क्योंकि इनसे मिलने वाली रोशनी खूबसूरत लगती है, साथ ही बिजली और पैसे की बचत भी होती है पर इस रोशनी के पीछे छिपे अंधेरे को हम नहीं देख पाते हैं यानी किसी कारणवश फ्लोरोसेंट लैंप टूटता है या खराब होने के बाद इसे फैंक दिया जाता है तो उसके अंदर स्थित पारे की कुल मात्रा का 6 से 8 प्रतिशत तत्काल वायु में मिल जाता है।</div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पारे के यौगिक:-</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">पारा वायु के अन्य अवयवों के साथ मिलकर पारे के यौगिक बनाता है जो वातावरण के लिए बहुत खतरनाक होते हैं। इस तरह भूमि पर फैलने वाला पारा वायु में भी मिल जाता है और भिन्न-भिन्न माध्यमों से होता हुआ जल स्रोतों में भी मिल जाता है। जल में रहने वाले जीव पारे को ग्रहण कर विषैले हो जाते हैं।</div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हानिकारक है पारा:-</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">पारा सामान्य तापमान और दाब पर तरल रूप में रहता है लेकिन 0.3 वायुमंडल दाब व 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही भाप में परिवर्तित हो जाता है। यह वाष्पशील होता है। यह गैस रूप में रंगहीन व गंधहीन होता है, जिससे इसका पता कठिनाई से चल पाता है। यदि पारे की भाप सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है तो भाप का 80 प्रतिशत शरीर की ऊपरी परत को पार कर जाता है और यह रक्त में मिल जाता है। यह मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है। पारे की भाप बच्चों के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के लिए भी हानिकारक होता है।</div>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बचने के उपाय || Electronic Waste</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पारे युक्त पदार्थों का उपयोग करते समय कर्मियों को बचाव जैसे मास्क, दस्तानों, गॉगल्स, सुरक्षात्मक कपड़े (एप्रन) आदि का प्रयोग करना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">वायु प्रवाह तंत्र को सुरक्षित तथा प्रभावी बनाना चाहिए। पारेयुक्त वायु को सीधे बाहर छोड़ने के स्थान पर फिल्टर के माध्यम से छोड़ा जाना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">अवैध रूप से चल रहे पारायुक्त उपकरणों की मरम्मत और रिसाइक्लिंग उद्योग को वैधानिक दायरे में लाना चाहिए तथा शिक्षा और नियमों के माध्यम से उन्हें इस बात के लिए बाध्य किया जाना चाहिए कि वे सुरक्षित तरीकों को ही अपनाएं।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2024 10:35:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AQI Delhi: अगरबत्ती बैन तो बीड़ी-सिगरेट पर छूट क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[AQI Delhi: दुनिया के एक बड़े क्षेत्र में हमने फिर से बाजी मार ली है। इसके लिए हम किसी को बधाई तो नहीं दे सकते, लेकिन सोचने के लिए मजबूर जरूर हो सकते हैं। अब जिस क्षेत्र में हम पूरे विश्व भर में अव्वल रहे हैं, वह क्षेत्र है वायुमंडलीय प्रदूषण। बदलते मौसम के कारण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-is-there-a-ban-on-incense-sticks-and-exemption-on-beedis-and-cigarettes/article-54804"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/say-no-drugs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">AQI Delhi: दुनिया के एक बड़े क्षेत्र में हमने फिर से बाजी मार ली है। इसके लिए हम किसी को बधाई तो नहीं दे सकते, लेकिन सोचने के लिए मजबूर जरूर हो सकते हैं। अब जिस क्षेत्र में हम पूरे विश्व भर में अव्वल रहे हैं, वह क्षेत्र है वायुमंडलीय प्रदूषण। बदलते मौसम के कारण बनी परिस्थितियों हो या फिर खुद मानव द्वारा ऐसी स्थिति बना दी गई हो। पर आज हम प्रदूषण के मामले में नंबर वन बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिवाली के एक दिन बाद दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 999 तक पहुंचना किसी विश्व रिकॉर्ड से कम नहीं है। ऐसा भी तब हुआ जब पूरे देश भर में ग्रीन पटाखे को छोड़कर सभी प्रकार के पटाखे बनाने बेचने व फोड़ने पर पाबंदी लगी थी। लेकिन जरा सोचिए क्या ऐसा किया गया? जवाब मिलेगा नहीं। पटाखे फोड़ने वालों पर कितनी कार्रवाई हुई? इस पर भी अभी चुप्पी है। Air Quality Index</p>
<h3>वायु गुणवत्ता सूचकांक 999 रहा</h3>
<p style="text-align:justify;">हाँ इस दौरान पराली जलाने वाले किसानों पर जरूर कार्रवाई हुई है। यहां एक बात समझ में नहीं आ रही की पराली सिरसा में जलाई जा रही थी और वायु का गुणवत्ता स्तर दिल्ली का खराब हुआ। वह भी गंभीर स्थिति से कहीं ऊपर उठकर@999। पर्यावरण विज्ञान व मेडिकल साइंस भी यह कह रही है कि यदि वायु गुणवत्ता सूचकांक 500 से ऊपर है तो वह गंभीर श्रेणी में आता है तो जिस क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक 999 रहा, वहाँ के लोग कैसे जी पाए? कैसे उन्होंने सांस लिया होगा? सोचने की बात है। पर यहाँ यह बात भी ध्यान रहे मीडिया में जो दिखाया जाता है या छपता है, वह जिस वक्त वायु गुणवत्ता सूचकांक अधिकतम होता है। उस वक्त के आंकड़े बताए हुए छापे जाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बदलता रहता है वायु गुणवत्ता सूचकांक</h3>
<p style="text-align:justify;">भौगोलिक प्रक्रिया के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक कभी भी स्थिर नहीं रहता। वह एक मिनट के अंतराल में बदलता रहता है। यदि इतनी गंभीर स्थिति जहरीली हवा की स्थाई रूप से 24 घंटे भी बन जाए तो मानव जीवन खतरे में पड़ जाएगा। लेकिन मंथन इस विषय पर करने की जरूरत है कि आखिर प्रदूषण बढ़ क्यों रहा है? सरकारों से लेकर देश के सुप्रीम कोर्ट तक इस विषय पर चिंता जाहिर कर चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद भी वायुमंडलीय प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा। इसकी वास्तविक स्थिति पर शोध करने की जरूरत है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वायुमंडलीय प्रदूषण पर हो चुके शोध | Air Quality Index</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत का आईआईटी कानपुर व यूएसए के विश्वविद्यालय इस दिशा में शोध भी कर चुके हैं, लेकिन उस शोध में जो सामने आया उस पर काम करने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा। भारत में सरकारी विभागों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन प्रदूषण रोकने की दिशा में काम कर रही है। पर उनका यह काम कागजों से बाहर निकले तब जाकर बात बने।</p>
<p style="text-align:justify;">नहीं तो यह वायु प्रदूषण इसी प्रकार से बढ़ता रहेगा और मानव जीवन इसी प्रकार खतरे में पड़ता रहेगा। यदि ऐसा ही रहा तो भविष्य में भारत में अस्थमा व श्वांस के रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जाएगी। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण पर भी इस वायु प्रदूषण का सीधा असर पड़ेगा। यही कारण है कि दिल्ली सरकार ने एक एडवाइजरी जारी कर मॉर्निंग में इवनिंग वॉक सहित फिजिकल एक्सरसाइज भी न करने की सलाह दी है। विशेष कर गर्भवती महिलाओं को अपने घरों में ही रहने के लिए कहा गया है। लेकिन ऐसा कब तक होगा?</p>
<h3 style="text-align:justify;">आमजन को समझना होगा | Air Quality Index</h3>
<p style="text-align:justify;">जब तक आमजन नहीं समझेगा, तब तक भारत में प्रदूषण इसी प्रकार फैलता रहेगा। इस दिशा में जहाँ भारत सरकार के प्रदूषण नियंत्रण विभाग व राज्य सरकारों के प्रदूषण नियंत्रण विभाग को काम करने की जरूरत है। सिर्फ नियम बनाने से काम नहीं चलने वाला, बल्कि से मूर्त रूप से कड़ाई से लागू करना होगा। ऐसा कब तक होता रहेगा कि देश का सुप्रीम कोर्ट आदेश देता रहेगा और तब जाकर सरकारें जागती रहेंगी। दिल्ली की केजरीवाल सरकार का सबसे बड़ा उदाहरण सामने है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पर प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए जब केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि हमें सिर्फ आपके आदेशों का इंतजार है।</p>
<p style="text-align:justify;">तब सुप्रीम कोर्ट ने फिर से टिप्पणी करनी पड़ी कि हमारे आदेशों का ही इंतजार क्यों? सरकार अपने स्तर पर खुद भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए आगे बढ़ सकती है। इस बात में कोई दो राय नहीं देश की राजधानी दिल्ली में जिस क्षेत्र में केंद्रीय मंत्रालय, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन तथा मंत्रियों व सांसदों के निवास स्थान है, वहाँ इतनी स्वच्छता रहती है कि कहने सुनने से पर की बात है। यदि इतनी ही व्यवस्था सभी स्थानों पर की जाए तो प्रदूषण का नामों-निशान तक मिट सकता है। पर इसके लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति का होना व ब्यूरोक्रेसी में उस कानून को लागू करने की चाहत होनी जरूरी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तम्बाकू का कहीं जिक्र नहीं!</h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे खास व चिंता की बात है कि सरकार ने अगरबत्ती व मच्छर भगाने वाली क्वायल जलाने पर तो रोक लगा दी। लेकिन जिस धूम्रपान से (बीड़ी, सिगरेट व तंबाकू से खतरनाक प्रदूषण फैल रहा है, उसका कहीं जिक्र नहीं है। क्या बीड़ी सिगरेट में विभिन्न प्रकार का तंबाकू ऑक्सीजन देता है? ऐसा नहीं है। पर यह सब सरकार को रेवेन्यू प्रदान करते हैं। आखिर इन पर रोक लगे भी कैसे? बीड़ी-सिगरेट का स्वास्थ्य विभाग से लेकर सरकारों को भी पता है कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ प्रदूषण फैलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तम्बाकू कैंसर को बढ़ावा देता है | Air Quality Index</h3>
<p style="text-align:justify;">सिगरेट के पैकेट पर सिर्फ यह लिख देने से कि तंबाकू के सेवन से कैंसर होता है, क्या प्रदूषण रुक जाता है? क्या इसे गंभीर बीमारियां रुक जाती हैं? ऐसा भी नहीं है। आखिर इसके पीछे वजह क्या है? इस पर गंभीर मंथन करने की जरूरत है। जब अगरबत्ती पर रोक लगा सकती है तो बीड़ी सिगरेट व तंबाकू पर क्यों नहीं? यह सबसे बड़ा सोचने का सवाल है?</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ संदीप सिंहमार।</strong><br />
<strong>व्यंग्य लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Bhai dooj 2023 Date: भाई दूज कब है, असमंजस बरकरार! जानें, सही तिथि!" href="http://10.0.0.122:1245/when-is-bhai-dooj-confusion-exact-date/">Bhai dooj 2023 Date: भाई दूज कब है, असमंजस बरकरार! जानें, सही तिथि!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Nov 2023 10:20:50 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट का 5 राज्यों को पराली जलाने को रोकने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ‘जानलेवा’ प्रदूषण (Pollution) के मद्देनजर मंगलवार को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों को पराली जलाने पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने संबंधित सरकारों से कहा कि उसे या तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-orders-five-states-to-stop-stubble-burning/article-54638"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/supreme-court-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ‘जानलेवा’ प्रदूषण (Pollution) के मद्देनजर मंगलवार को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों को पराली जलाने पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने संबंधित सरकारों से कहा कि उसे या तो बलपूर्वक कार्रवाई करके या प्रोत्साहन के जरिए पराली जलाने से रोकना होगा। पीठ ने पराली जलाने पर रोक के अमल के लिए स्थानीय थाना प्रमुख को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और मुख्य सचिव की निगरानी में निर्देश को लागू करने के लिए जिम्मेदार बनाया। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह, गोपाल शंकरनारायणन और न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह तथा अन्य की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘पराली जलाना प्रदूषण का बड़ा हिस्सा है। इसे रोकना चाहिए। यह एक प्रमुख मुद्दा और प्रदूषण के लिए जिम्मेवार है। धान की खेती एक समस्या है। तुरंत कुछ किया जाना चाहिए। यह फसल राज्य के जल स्तर को भी नष्ट कर रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य की वजह से दूसरे राज्यों से अनाज की तस्करी हो रही है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि इस मुद्दे को कल सुलझा लिया जाए, ताकि अगले साल इसकी पुनरावृत्ति न हो। पीठ ने यह भी कहा कि पराली जलाने और वाहन प्रदूषण के अलावा समस्या के कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने बुधवार को सभी हितधारकों की एक बैठक बुलाने का आदेश दिया। वजह यह कि अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को करने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, ‘दिल्ली के निवासी पीड़ित हैं क्योंकि हम इस अवधि में गंभीर समस्या का समाधान ढूंढने में विफल रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा,‘यह पांच साल से चल रहा है। अब कुछ करने का समय है। इस मामले पर तत्काल ध्यान देने और अदालत की निगरानी की जरूरत है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत के समक्ष पंजाब सरकार ने कहा कि किसानों को संबंधित मशीन खरीदने के लिए वह 25 फीसदी लागत वहन करने के लिए तैयार है। इतनी ही राशि दिल्ली द्वारा वहन किया जा सकता है और केंद्र को 50 फीसदी प्रदान करना चाहिए। इसमें कहा गया है कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि लागत केंद्र द्वारा वहन न की जाए। मेहता ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के सुझाव का जिक्र किया कि कोई ऐसा घोल छिड़का जा सकता है जो पराली को उर्वरक में बदल दे। उन्होंने कहा,‘उन्हें यह बताने दीजिए कि यह प्रभावी है या नहीं। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों को गन्ने के भाव बढ़ाकर दीपावली पर दी सौगात" href="http://10.0.0.122:1245/haryana-government-increased-the-prices-of-sugarcane/">हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों को गन्ने के भाव बढ़ाकर दीपावली पर दी सौगात</a></p>
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                <pubDate>Tue, 07 Nov 2023 18:33:08 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर आप नेता ने हरियाणा सरकार पर लगाये ये आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। आम आदमी पार्टी(आप) ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण (Pollution) के लिए हरियाणा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सोनीपत, पानीपत और रोहतक में जल रही पराली का धुंआ दिल्ली में आ रहा है। आप की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर आज कहा कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/aap-leader-accused-haryana-government-of-increasing-pollution-in-delhi/article-54584"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/pollution-and-corona-double-hit-in-delhi.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आम आदमी पार्टी(आप) ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण (Pollution) के लिए हरियाणा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सोनीपत, पानीपत और रोहतक में जल रही पराली का धुंआ दिल्ली में आ रहा है। आप की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर आज कहा कि देश में अरविंद केजरीवाल इकलौते नेता हैं जो प्रदूषण के खिलाफ लगातार लघु और दीर्घकालिक कदम उठाते हैं और उसको लागू करवाते हैं। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">इसी वजह से इस साल दिल्ली में पिछले 08 सालों में सबसे बेहतर हवा थी। आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में इस बार 31 फीसदी प्रदूषण कम हुआ है। केंद्र सरकार को भी संसद पलट पर रखे गए अपने आर्थिक सर्वे 2022-23 में स्वीकारना पड़ा है कि दिल्ली में इस बार पिछले 08 सालों में सबसे बेहतर हवा थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुश्री कक्कड़ ने कहा कि सीएक्यूएम के आंकड़े दिखाते हैं कि पंजाब में पिछले साल के मुकाबले इस साल 50-67 फीसद पराली कम जली है। पंजाब में वर्तमान में जो पराली जल रही है, वो दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर दूर है और हरियाणा में जल रही पराली 100 किलोमीटर दूर है। दिल्ली के सबसे करीब हरियाणा है। इसकी समीक्षा करना जरूरी है कि 2014 से खट्टर सरकार ने प्रदूषण को लेकर हरियाणा में क्या कदम उठाए? उन्होंने कहा कि अब जाकर हरियाणा सरकार 100 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने पर विचार कर रही है, अभी ली नहीं है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा में अभी भी दिल्ली में प्रतिबंधित ईंधन वाली बसें चल रही हैं। वहां सभी बसें बीएस-3 और बीएस-4 की हैं। हरियाणा से बीएस-3 और बीएस-4 बसें दिल्ली में प्रवेश कर रही हैं। इसी तरह हरियाणा सरकार 2023 में भी अपने नागरिकों को 24 घंटे बिजली देने में असमर्थ रही है। हरियाणा में पावर कट बहुत लंबे होते हैं और लोगों को डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में उद्योगों की क्या हालत होगी, समझा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप प्रवक्ता ने कहा कि 2014 में आई खट्टर सरकार अभी तक पराली का भी कोई समाधान नहीं निकाल पाई है। अगर पंजाब सरकार एक साल में ही पराली जलने में 50-67 फीसदी की कमी लाकर दिखाया है तो हरियाणा की खट्टर सरकार 2014 से यह करने में विफल क्यों रही है? उन्होंने कहा कि ग्रीन कवर के मामले में दिल्ली में पूरे देश में पहले स्थान पर है। दिल्ली में 23.6 फीसदी ग्रीन कवर है और 2025 तक इसे बढ़ाकर 27 फीसदी तक करने का लक्ष्य है। केजरीवाल सरकार ने दिल्लीवालों के साथ मिलकर ग्रीन कवर को बढ़ाया है। वहीं, हरियाणा में ढेरों पेड़ काटे गए हैं और वहां केवल 3.6 फीसदी ही ग्रीन कवर है। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="काम के आधार पर विधायक चुने जनता" href="http://10.0.0.122:1245/working-people-should-be-made-mlas/">काम के आधार पर विधायक चुने जनता</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 16:28:47 +0530</pubDate>
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                <title>Delhi Odd-Even Rule: प्रदूषण के चलते दिल्ली की सड़कों पर ये गाड़ी हुई बैन, जानें केजरीवाल सरकार के नए नियम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Delhi Odd-Even Rule: बढ़ते प्रदूषण के कारण केजरीवाल सरकार ने एक बार फिर ऑड-ईवन लागू करने का फैसला किया है। यह ऑड-ईवन 13 से 20 नवंबर तक लागू रहेगा। दिल्ली सरकार के फैसले के मुताबिक, दिल्ली में बीएस 3 पेट्रोल और बीएस 4 डीजल कार पर बैन जारी रहेगा और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/due-to-increasing-pollution-kejriwal-government-has-decided-to-implement-odd-even/article-54581"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/new-delhi-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Delhi Odd-Even Rule: बढ़ते प्रदूषण के कारण केजरीवाल सरकार ने एक बार फिर ऑड-ईवन लागू करने का फैसला किया है। यह ऑड-ईवन 13 से 20 नवंबर तक लागू रहेगा। दिल्ली सरकार के फैसले के मुताबिक, दिल्ली में बीएस 3 पेट्रोल और बीएस 4 डीजल कार पर बैन जारी रहेगा और किसी भी तरह का निर्माण नहीं होगा। इसके अलावा दिल्ली में अब 6वी, 7वी, 8वी, 9वी, और 11वी की फिजिकल क्लास 10 नवंबर तक बंद रहेंगी। उधर आॅड- ईवन के दौरान आने वाले दिन 1, 3, 5, 7 और 9 नंबर वाली गाड़ियां (जिनके लास्ट में ये नंबर हैं) वहीं चलेंगी। ईवन वाले दिन जिन गाड़ियों के नंबर के लास्ट में 0, 2, 4, 6 और 8 नंबर हैं वो गाड़ियां चलेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि वर्ष 2016 की जनवरी में जब वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मुश्किलें आ रही थीं, तब दिल्ली सरकार पहली बार ऑड-ईवन नियम लागू किया था। आपको जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली के अंदर आवश्यक सेवाएं वाले ट्रक और सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स अलावा सभी ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। अब दिल्ली में सभी कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन पर पूरी तरह से बंद होंगे। वहीं आपको बता दें दिल्ली सरकार ने 10 नवंबर तक सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए है।</p>
<h4>दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में</h4>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषक तत्वों की मोटी परत जमी हुई है और हवा की गुणवत्ता सोमवार को लगातार पांचवें दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर सुबह पूर्वाह्न 11:30 बजे 432 था। दिल्ली विश्वविद्यालय में यह 473 दर्ज किया गया, जबकि टर्मिनल 03 पर हवाई अड्डे पर एक्यूआई 559, नोएडा में 616, आईआईटी दिल्ली में 517 और गुरुग्राम में 516 दर्ज किया गया। सफर डेटा के अनुसार, सभी ‘गंभीर’ श्रेणी में थे।</p>
<p style="text-align:justify;">सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार पूसा और लोधी रोड जैसे क्षेत्रों में एक्यूआई का स्तर क्रमशः 407 और 450 दर्ज किया गया, दोनों को ‘गंभीर’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में यह 409 दर्ज किया गया। इस बीच, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोकने के लिए रविवार को तत्काल प्रभाव से पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के चौथे चरण को लागू किया। इस चरण के तहत, आवश्यक सेवाओं के लिए छूट के साथ, अन्य राज्यों से केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस 5- अनुपालक वाहनों को प्रवेश की अनुमति है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग ने दिल्ली और एनसीआर राज्यों को भी प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया, जिसमें रैखिक सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबंध और सरकारी और निजी कार्यालय के 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देना शामिल है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा किए गए एक विश्लेषण के अनुसार, राजधानी में एक नवंबर से 15 नवंबर के बीच प्रदूषण का उच्चतम स्तर देखा गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिगड़ती वायु गुणवत्ता के कारण शहर के बिगड़ते वायु प्रदूषण संकट पर चर्चा के लिए आज एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय और सभी संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिल्ली की तर्ज पर अब हरियाणा के स्कूल होंगे बंद!</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजधानी दिल्ली के बाद अब दिल्ली एनसीआर से लगते हरियाणा के जिलों में भी स्कूल बंद हो सकते हैं। शिक्षा निदेशालय पंचकूला हरियाणा में इस संबंध में एनसीआर जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर स्कूल बंद करने या खुले रखने के संबंध में शक्तियां प्रदान की हैं। इसके साथ ही इस पत्र में कहा गया है कि प्रदूषण के स्तर को देखते हुए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल बंद करने के संबंध में अलग-अलग फैसले भी लिए जा सकते हैं। इसका मतलब साफ तौर पर जाहिर हो चुका है कि प्रदूषण को देखते हुए सरकार वर्तमान में स्कूल बंद करना तो चाहती है, लेकिन उसका माध्यम डीसी को बना दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सरकार में शिक्षा विभाग इस एडवाइजरी के बाद स्कूल बंद हुए तो प्राइमरी मिडिल और सेकेंडरी स्तर के स्कूल ही बंद होंगे। जबकि सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में कक्षाएं पहले की तरह जारी रहेगी। स्कूल बंद होने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई पर किसी भी प्रकार का असर न पड़े उसके लिए आॅनलाइन शिक्षा व्यवस्था शुरू रहेगी। पर यह आॅनलाइन शिक्षा व्यवस्था किस प्रकार करवाई जाएगी इसका इस पत्र में कोई जिक्र नहीं किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन जिलों पर होना है फैसला | Delhi Odd-Even Rule</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा निदेशालय की एडवाइजरी में दिल्ली एनसीआर में शामिल हरियाणा के करनाल, जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, भिवानी, चरखी-दादरी, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नूंह और पलवल शामिल है। ध्यान रहे कि दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा के गुरुग्राम में फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर स्थिति में चल रहा है। गुरुग्राम जिले के जिलाधीश ने कूड़ा जलाने को लेकर भी धारा 144 लागू की है ताकि बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सके। यदि प्रदूषण की यही स्थिति रही तो हरियाणा के इन 14 जिलों के अलावा पूरे हरियाणा प्रदेश में भी शिक्षण संस्थान बंद किया जा सकते हैं। सरकार इस विषय पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सभापति ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दाखिल किया नामांकन" href="http://10.0.0.122:1245/chairman-filed-nomination-as-an-independent-candidate/">सभापति ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दाखिल किया नामांकन</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 16:12:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Air Pollution: ये है गंभीर आबोहवा की असली वजह, अकेली पराली जिम्मेदार नहीं, बढ़ती आबादी व बदलता मौसम बनता है कारण</title>
                                    <description><![CDATA[Air Pollution: गर्मी के मौसम के बाद हर बार जब भी सर्दी का प्रवेश होता है। तभी बढ़ते प्रदूषण को लेकर देश की राजधानी दिल्ली से लेकर अरब देशों तक हाहाकार मच जाता है। दिल्ली व उत्तर प्रदेश में तो सामान्य दिनों में भी लोग खुले आसमान में तारे भी नहीं देख पाते। इसका मतलब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/this-is-the-real-reason-for-severe-climate-stubble-alone-is-not-responsible/article-54545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/air-pollution.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Air Pollution: गर्मी के मौसम के बाद हर बार जब भी सर्दी का प्रवेश होता है। तभी बढ़ते प्रदूषण को लेकर देश की राजधानी दिल्ली से लेकर अरब देशों तक हाहाकार मच जाता है। दिल्ली व उत्तर प्रदेश में तो सामान्य दिनों में भी लोग खुले आसमान में तारे भी नहीं देख पाते। इसका मतलब यहाँ सामान्य दिनों में भी प्रदूषण इतना ही होता है,जितना वर्तमान में चल रहा है। फर्क सिर्फ यह है कि तब प्रदूषण वायुमंडल की ऊपरी परत में मौजूद रहता है। जबकि अब निचली परत में है। इस क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व अधिक होने के कारण लोगों की जीवन शैली इतनी दूषित हो चुकी है कि बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए खुद जिम्मेदार हैं। बढ़ते प्रदूषण के लिए हर बार केवल किसानों को जिम्मेदार ठहरना उचित नहीं है। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग से लेकर बदलता मौसम व बढ़ती जनसंख्या के अलावा और भी अन्य कारक हैं जो इसके जिम्मेदार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन पर कभी भी खुलकर विचार नहीं किया जाता। हालांकि इस विषय पर भारतीय रिसर्च संस्थाओं से लेकर अमेरिकन विश्वविद्यालय ने भी शोध किए हैं और शोध में यह सिद्ध भी हो चुका है कि इसके लिए प्रदूषण के विभिन्न कारक जिम्मेदार होते हैं। लेकिन दोष हर बार सिर्फ किसानों की पराली जलाने की घटना को दिया जाता है। हालांकि किसानों को भी पराली जलाने की अपेक्षा सरकार द्वारा निर्धारित किए गए तरीकों को अपनाना चाहिए। पराली जलाने से जहां एक तरफ वायु प्रदूषण होता है तो दूसरी तरफ भूमि की उर्वरक शक्ति को भी नुकसान होता है। इसके अलावा दशहरे से दिवाली के बीच पटाखों को लेकर भी सियासत होतीं है। लेकिन जब तक प्रदूषण के असली कारकों व भौगोलिक परिस्थितियों को नहीं समझा जाएगा, तब तक बदलते प्रदूषण में वायु प्रदूषण इसी तरह गंभीर स्थिति में पहुंचता रहेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भी भारत में 32 अत्यधिक प्रदूषित शहर है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/this-juice-is-nectar-for-sugar-patients-diabetes-soon-becomes-normal/">Juice For Diabetes: शुगर के मरीजों के लिए ये जूस है अमृत, डायबिटीज जल्द ही हो जाता है नॉर्मल</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह व नवंबर की शुरुआत में प्रदूषण बढ़ने के कारण</h3>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर अक्तूबर माह को उत्तर पश्चिम भारत में मानसून के लौटने के तौर पर जाना जाता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान हवाओं के बहने की दिशा पूर्व की ओर होती है, इस दौरान बंगाल की खाड़ी की ओर से आने वाली ये हवाएं अपने साथ नमी लेकर आती हैं। जिससे परत दर परत पूरे देश भर में बारिश होती है। पर जब मानसून लौटता है तो हवाओं के बहने की दिशा पूर्व से बदलकर उत्तर-पश्चिम हो जाती है। मानसून के पीछे हटने या लौट जाने को मानसून का निवर्तन कहा जाता है। मॉनसून इस दौरान उत्तर-पश्चिमी भारत से मानसून पीछे हटने लगता है और मध्य अक्तूबर तक यह दक्षिण भारत को छोड़ शेष समस्त भारत से वापिस लौट जाता है। लौटती हुई मानसून हवा बंगाल की खाड़ी से जलवाष्प ग्रहण करके उत्तर – पूर्वी मानसून के रूप में तमिलनाडु में वर्षा करती है। कई बार लौटता हुआ या मानसून तमिलनाडु सहित संपूर्ण भारत में भारी वर्षा करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लौटते मॉनसून की 28 फीसदी हवा के साथ आता है जहर | Air Pollution</h3>
<p style="text-align:justify;">नई स्टडी के मुताबिक, सर्दियों में दिल्ली सहित उत्तर भारत मे 72 प्रतिशत हवा उत्तर पश्चिम से आती है, जबकि शेष 28 प्रतिशत सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों से आती है। उत्तर-पश्चिम से आने वाली इन हवाओं के साथ राजस्थान और यहाँ तक कि कभी-कभी पाकिस्तान और अफगानिस्तान की धूल-मिट्टी भी दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में पहुँच जाती है।<br />
यही कारण है कि वर्ष 2017 में इराक, सऊदी अरब और कुवैत में आए एक तूफान ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता को काफी प्रभावित किया था। वर्तमान में भी मौसम की ऐसी परिस्थितियां जिम्मेदार है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तापमान में गिरावट आने से प्रदूषण वायुमंडल की निचली सतह पर बना रहता है</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा दूसरा प्रमुख कारण नवंबर के महीने में मौसम ठंडा होने लगता है।तापमान में गिरावट भी दिल्ली,हरियाणा, पंजाब व आस-पास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करती है। जिसमें राजस्थान के साथ रखते पाकिस्तान के राज्य भी शामिल है। जैसे-जैसे तापमान में गिरावट आती है, तापीय व्युत्क्रमण के चलते एक परत बन जाती है, जिससे प्रदूषक वायुमंडल की ऊपरी परत में मिल नहीं हो पाते हैं। ऐसा होने पर वायु में प्रदूषकों की मात्रा वायुमंडल के निचली सतह पर बढ़ जाती है। सामान्य परिस्थितियों में ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान घटता जाता है। जिस दर से यह तापमान कम होता है, इसे सामान्य ह्रास दर कहते हैं। परंतु कुछ विशेष परिस्थितियों में ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान घटने की बजाय बढ़ने लगता है। इस प्रकार ऊँचाई के साथ ताप बढ़ने की प्रक्रिया को तापमान व्युत्क्रमण कहते हैं। इस तापमान व्युत्क्रमण के दौरान धरातल के समीप ठंडी वायु और उसके ऊपर गर्म वायु होती है। भूगोल में ऐसे वायु दाब के नाम से जाना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, प्रदूषकों को फैलाने के लिए उच्च गति वाली हवाएँ बहुत प्रभावी होती हैं, लेकिन ग्रीष्म ऋतु की तुलना में शीत ऋतु में हवा की गति में कमी आती है। इन मौसम संबंधी कारकों के संयोजन से यह क्षेत्र प्रदूषण का शिकार हो जाता है। जब पराली के धुएँ और धूल के कण जैसे कारक शहर में पहले से व्याप्त प्रदूषण के स्तर में जुड़ जाते हैं, तो वायु की गुणवत्ता में ओर अधिक गिरावट आती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बायोमास जलाना भी प्रदूषण का कारण | Air Pollution</h3>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी-कानपुर के शोधार्थियों ने दिल्ली व आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर आयोजित एक अध्ययन में यह भी पाया कि सर्दियों में दिल्ली में पर्टिकुलर मैटर में 17 से 26 प्रतिशत की वृद्धि बायोमास के जलने के कारण होती है। पिछले कुछ वर्षों में, वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली ने दिल्ली के वायु प्रदूषण में वृद्धि हेतु पराली के योगदान की गणना करने के लिए एक प्रणाली विकसित की है। इसी के तहत अब भी गणना की जाती है।<br />
पराली जलाने के चरम समय में वायु प्रदूषण में इसका योगदान 40 फीसदी तक बढ़ गया था। पिछले कुछ दिनों में यह 2 से 4 प्रतिशत हो गया है। इस अध्ययन का विश्लेषण किया जाए तो वायु की गुणवत्ता में गिरावट के हेतु केवल पराली जलाना ही ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि अन्य कारक भी इसमें शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फरवरी तक प्रदूषित रहती है दिल्ली एनसीआर |</h3>
<h3 style="text-align:justify;">Air Pollution</h3>
<p style="text-align:justify;">पराली जलाने का समय सामान्य रूप लगभग 45 दिनों का होता है। किंतु दिल्ली में वायु, फरवरी माह तक प्रदूषित रहती है। क्या इसके लिए भी किसान जिम्मेदार है? उत्तर होगा नहीं। पर भौगोलिक स्थिति ग्लोबल वार्मिंग और मॉनसून के चक्कर को समझने की जरूरत है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अक्टूबर से जून तक बारिश न होना</h4>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली सहित हरियाणा में हवा की निम्न गुणवत्ता के लिए धूल और वाहनों का प्रदूषण दो सबसे बड़े कारण हैं। अक्तूबर और जून के बीच वर्षा की अनुपस्थिति के चलते शुष्क ठंड का मौसम होता है। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में धूल का प्रकोप बढ़ जाता है। धूल PM 10 में 56 प्रतिशत और PM 2.5 में 38 प्रतिशत की वृद्धि हेतु ज़िम्मेदार है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वाहनों की भीड़ सबसे बड़ी बजह</h4>
<p style="text-align:justify;">सर्दियों में प्रदूषण का दूसरा सबसे बड़ा कारण वाहनों का प्रदूषण है। यदि अकेले दिल्ली का जिक्र किया जाए तो यहां भारत के अन्य महानगरों से चार गुना अधिक वाहनों का प्रवेश होता है। जो वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक बनता है। सर्दियों में PM 2.5 का 20 फीसदी वाहन प्रदूषण से आता है। सामान्य रूप से वायु प्रदूषण प्राकृतिक एवं मानवीय दोनों कारकों द्वारा होता है। प्राकृतिक कारकों में ज्वालामुखी क्रिया,वनों में आगजनी की घटना,कोहरा, परागकण,उल्कापात आदि शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्राकृतिक स्रोतों से उत्पन्न प्रदूषण कम नुकसानदायक</h3>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक स्रोतों से उत्पन्न वायु प्रदूषण कम खतरनाक होता है, क्योंकि प्रकृति में स्व-नियंत्रण की क्षमता होती है। मानवीय क्रियाकलापों में पेड़ों की कटाई, कारखाने,परिवहन,ताप विद्युत गृह, कृषि कार्य, खनन,रासायनिक पदार्थो का प्रयोग तथा आतिशबाजी द्वारा वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मनुष्य से लेकर पशु-पक्षियों पर भी होता है असर</h3>
<p style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण हवा में अवांछित गैसों की उपस्थिति से मनुष्य, पशुओं तथा पक्षियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे दमा, सर्दी, अंधापन, श्रवण शक्ति कमज़ोर होना, त्वचा रोग आदि बीमारियाँ पैदा होती हैं।<br />
वायु प्रदूषण के कारण अम्लीय वर्षा का खतरा बढ़ा है, क्योंकि वर्षा के पानी में सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड आदि ज़हरीली गैसों के घुलने की संभावना बढ़ी है,जिससे पेड़-पौधे,भवनों व ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुँचा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">धरती पर बढ़ता जा रहा तापमान,भविष्य के लिए खतरनाक</h4>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते हुए वायु प्रदूषण को देखते हुए वातावरण में कार्बन-डाइऑक्साइड की मात्रा के दोगुनी होने की संभावना है। इस वृद्धि से पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि होगी जिसके परिणामस्वरूप ध्रुवीय बर्फ, ग्लेशियर आदि पिघलेंगे। इसके परिणामस्वरूप तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि होगी, इससे भविष्य में कई तटीय देशों और राज्यों के डूबने की संभावना से भी नकारा नहीं जा सकता। यदि वर्षा के परिसंचरणमें बदलाव हुआ तो इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होगा। मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ व पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस बार हिमाचल व उत्तराखंड में देखा गया कुदरत का कहर</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बार हिमाचल व उत्तराखंड में ऐसा हुआ भी है। जिस वजह से भूस्खलन की घटनाएं देखने को मिली। पहाड़ के पहाड़ दरक गए। हिमाचल में उत्तराखंड में कई स्थानों पर इतनी मूसलाधार बारिश हुई की राष्ट्रीय राजमार्गों तक बह गए। यह सब वायुमंडल के बिगड़ते तापमान व प्रदूषण की वजह से ही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत मे श्वास संबंधी रोग दुनिया भर में अग्रणी</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन के की रिपोर्ट के अनुसार भारत देश श्वास संबंधी बीमारियों और अस्थमा से होने वाली मौतों के मामले में दुनिया में अग्रणी है। कम दृश्यता, अम्ल वर्षा और ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर ओज़ोन की उपस्थिति के माध्यम से भी वायु प्रदूषण पर्यावरण को प्रभावित करता है। पर इस दिशा में कब और किसने ध्यान दिया? यह सोचने की बात है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शहरों से दूर हो कारखाने</h3>
<p style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए कारखानों को शहरी क्षेत्र से दूर स्थापित किया जाना चाहिए। कारखानों की चिमनियों की अधिक ऊँचाई व इनमें फिल्टरों के उपयोग की अनिवार्यता आवश्यक है। साथ ही साथ किसी भी कारखाने की स्थापना के वक्त से लेकर हर वर्ष प्रदूषण किस तरह का अनापत्ति प्रमाण पत्र जांच के बाद ईमानदारी से जारी किया जाए। जनसंख्या के मामले में विश्व में पहले स्थान पर पहुंच चुके भारत देश की जनसंख्या की वृद्धि को स्थिर करने की आवश्यकता है ताकि खाद्य व आवास के लिए पेड़ों व वनों को न काटना पड़े। बल्कि ऐसे प्रयास जमीनी स्तर पर किए जाने चाहिए जिससे पेड़ों की संख्या बढ़े। साथ ही आम जनता को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों का ज्ञान कराना भी ज़रूरी है, जिससे वे स्वयं प्रदूषण नियंत्रण के सार्थक उपायों को अपनाकर इसे नियंत्रित करने में योगदान दे सकें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रदूषण नियंत्रण के लिए जागरूकता जरूरी | Air Pollution</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी प्रकार के प्रचार माध्यमों का उपयोग करना चाहिए। प्रचार व प्रसार तथा जागरूकता के लिए केंद्रीय स्तर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय व राज्य स्तर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा सकती है। गाडि़यों एवं दुपहिया वाहनों की ट्यूनिंग की जानी आवश्यक है। ताकि अधजला धुआँ बाहर आकर पर्यावरण को दूषित न करे। साथ ही सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। धुँआ रहित चूल्हा व सौर ऊर्जा की तकनीक को प्रोत्साहित करना चाहिए। इसमें केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना को जोड़ा जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">‘युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध’ अभियान पर देना होगा जोर | Air Pollution</h4>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली सरकार ने हाल ही में बड़े स्तर पर एक प्रदूषण विरोधी अभियान शुरू किया है, जिसे ‘युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध’ नाम दिया गया है। इसके अंतर्गत पेड़ों के प्रत्यारोपण की नीति, कनॉट प्लेस (दिल्ली) में एक स्मॉग टॉवर का निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और पराली को जलाने से रोकना जैसी मुहिम शामिल हैं। इससे दिल्ली सहित आसपास के राज्यों में खराब वायु गुणवत्ता का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। जो सर्दियों के मौसम में और भी अधिक खराब हो जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मेगा एयर प्यूरीफायर के रूप में काम करेगा स्मॉग टॉवर</h3>
<p style="text-align:justify;">एक स्मॉग टॉवर, जो एक मेगा एयर प्यूरीफायर के रूप में काम करेगा, को दिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिये गए सर्वोच्च न्यायालय के नवंबर 2019 के आदेश के अनुसार स्थापित किया गया है। पर यह कितना काम कर रहा है। इस पर भी गौर करने की जरूरत है। नीदरलैंड, चीन, दक्षिण कोरिया और पोलैंड के शहरों में हाल के वर्षों में स्मॉग टावरों का प्रयोग किया गया है। नीदरलैंड के रॉटरडैम में वर्ष 2015 में ऐसा पहला टॉवर बनाया गया था। जिसका नतीजा सकारात्मक दिखाई दे रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा एयर-प्यूरिफाइंग टॉवर शीआन, चीन में है। टॉवर प्रदूषित वायु के प्रदूषकों को ऊपर से सोख लेगा और नीचे की तरफ से स्वच्छ वायु छोड़ेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ाना होगा | Air Pollution</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार का लक्ष्य वर्ष 2024 तक राजधानी में पंजीकृत कुल नए वाहनों में से एक-चौथाई वाहनों के लिये ईवीएस खाता बनाना है। इलेक्ट्रिक वाहन के लक्ष्य को इन वाहनों की खरीद हेतु प्रोत्साहन द्वारा, पुराने वाहनों पर मार्जिन लाभ देने, अनुकूल ब्याज पर ऋण देने और सड़क करों में छूट देने आदि के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। हाल ही में दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति को अधिसूचित किया जो ईवीएस के साथ निजी चार पहिया वाहनों के बजाय दोपहिया वाहन, सार्वजनिक परिवहन,सांझा वाहनों और माल-वाहक द्वारा प्रतिस्थापन पर सबसे अधिक ज़ोर देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
इन कदमों के अलावा सरकार दिल्ली में थर्मल प्लांटों और ईंट भट्टों के साथ-साथ आस-पास के राज्यों में जलने वाली पराली से उत्पन्न प्रदूषण के रासायनिक उपचार पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सिर्फ आरोप- प्रत्यारोपण से काम नहीं चलने वाला। बीएस VI (क्लीनर) ईंधन की शुरूआत, इलेक्ट्रिक वाहनों हेतु प्रोत्साहन, आपातकालीन उपाय के रूप में ऑड-ईवन का प्रयोग दिल्ली सरकार द्वारा वायु प्रदूषण हेतु उठाए गए अन्य कदम हैं। जिन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोविड-19 के दौरान वायु की गुणवत्ता में हुआ था सुधार | Air Pollution</h3>
<p style="text-align:justify;">याद होगा वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौर में जब भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों में लॉकडाउन लगा तब वाहनों का आवागमन कम होने औद्योगिक क्षेत्र बंद होने के कारण वायु की गुणवत्ता में बहुत सुधार हुआ था। वह एक समय ऐसा था बेशक पूरी दुनिया कोरोनावायरस नाम की बीमारी से जूझ रहा था। लेकिन उसे वक्त वायु की गुणवत्ता शुद्ध थी। इसका मतलब यह साफ हो जाता है की वायु की गुणवत्ता के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार जीवन जीने का अधिकार में शुद्ध वायु का भी जिक्र है। भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ-साथ यूनाइटेड नेशन भी चिंता जाता चुका है। पर इस दिशा में अब भारत सरकार व राज्य सरकारों को सियासत छोड़कर जलवायु विज्ञान के क्षेत्र में उचित कदम उठाने होंगे ताकि आम लोगों को जीवन जीने का अधिकार से वंचित न होना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. संदीप सिंहमार वरिष्ठ लेखक,जलवायु विज्ञान के जानकार व टिप्पणीकार।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/every-hair-will-turn-black-from-the-root/">White To Black Hair: एक-एक बाल जड़ से होगा काला! बस इन तीन Remedy का करें इस्तेमाल</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Nov 2023 14:21:54 +0530</pubDate>
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                <title>Delhi Air Pollution LIVE : आसमान में छायी धुएं की परत, एयर कवालिटी इंडेक्स 381 पर</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi Air Pollution LIVE : सादुलशहर (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली की एयर क्वालिटी इंडेक्स की हालत बहुत ही नाजुक है। वहीं बात करें राजस्थान की तो दिल्ली से कहीं अधिक राजस्थान के सादुलशहर (Sadulshahar) की वायु बहुत अधिक प्रदूषित है। यहां दिल्ली से कहीं ज्यादा एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया है। जिसके कारण बढ़ रहा वायु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/layer-of-smoke-in-the-y/article-54493"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/air-pollution-raj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Delhi Air Pollution LIVE : <strong>सादुलशहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिल्ली की एयर क्वालिटी इंडेक्स की हालत बहुत ही नाजुक है। वहीं बात करें राजस्थान की तो दिल्ली से कहीं अधिक राजस्थान के सादुलशहर (Sadulshahar) की वायु बहुत अधिक प्रदूषित है। यहां दिल्ली से कहीं ज्यादा एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया है। जिसके कारण बढ़ रहा वायु प्रदूषण लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। शहर में सर्दी के आगमन के साथ साथ वायु प्रदूषण का भी आगमन हो गया है। Air Quality Index</p>
<p style="text-align:justify;">आसमान में धुएं की परत छायी हुई है और एयर कवालिटी इंडेक्स 381 तक पहुँच गया है जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से लोगो को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। स्मोग और धुएं का असर इतना है कि दिन में भी हल्का अँधेरा दिखने लगा है। शुक्रवार सुबह की शुरुआत ऐसी हुई कि आसमान में छाई परत ने धुप को निकलने नहीं दिया और ऐसा लगने लगा कि आसमान में कोहरा छा गया है। हर साल सर्दी के आगमन से पहले आमजन को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। Sadulshahar</p>
<p style="text-align:justify;">पडोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से भी वायु प्रदूषित होती है हालाँकि इस बार पंजाब में सरकार ने इस पर रोक लगाई है लेकिन आसमान में स्मोग बुरी तरह छाया हुआ है। वहीँ यदि एयर कवालिटी इंडेक्स की बात करें तो 0 से 50 के बीच यह सामान्य होता है और 201 से 300 की बीच की स्थिति खराब मानी जाती है और यदि इंडेक्स 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है तो यह बेहद खराब श्रेणी में माना जाता है। Air Quality Index</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="लिंक भेजकर ऑनलाइन ठगे गए 71 हजार 232 रुपए की राशि रिकवर" href="http://10.0.0.122:1245/online-defrauded-money-recovered/">लिंक भेजकर ऑनलाइन ठगे गए 71 हजार 232 रुपए की राशि रिकवर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 10:00:33 +0530</pubDate>
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                <title>Haryana Roadways: खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स की चिंता अब हरियाणा रोड़वेज को भी सताने लगी</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी (इन्द्रवेश)। हरियाणा प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिले इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण (Air Pollution) से गुजर रहे है। जहां पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से 400 के बीच है जो प्रदूषण की दृष्टि से हानिकारक स्तर रखता है। इसके पीछे जहां पराली को मुख्य कारण माना जाता है, वही वाहनों से निकलने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-roadways-is-also-worried-about-poor-air-quality-index/article-54476"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/pollution.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (इन्द्रवेश)।</strong> हरियाणा प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिले इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण (Air Pollution) से गुजर रहे है। जहां पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से 400 के बीच है जो प्रदूषण की दृष्टि से हानिकारक स्तर रखता है। इसके पीछे जहां पराली को मुख्य कारण माना जाता है, वही वाहनों से निकलने वाले धुएं की भी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इसी के चलते हरियाणा रोड़वेज (Haryana Roadways) की सैंकड़ों बसें प्रतिदिन हरियाणा व दिल्ली में यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाती है। इनको लेकर भी प्रदूषण की बात जरूर चलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भिवानी के रोड़वेज जनरल मैनेजर नेत्रपाल खत्री से जब रोड़वेज  (Haryana Roadways) से होने वाले प्रदूषण के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स जहां 400 से ऊपर चला गया है, वही हरियाणा प्रदेश में भी एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब स्तर तक पहुंच गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि हरियाणा रोड़वेज की सभी बसों में वायु प्रदूषण रोकने के लिए बीएस-6 मापदंडों को अपनाया गया है, जो वाहनों से निकलने वाले धुएं की रोकथाम के लिए आधुनिकतम तकनीक है। इसी आधुनिकत्तम तकनीक को हरियाणा रोड़वेज अपनाएं हुए है। उन्होंने कहा कि हरियाणा रोड़वेज की भिवानी डिपो से 26 गाड़ियां प्रतिदिन दिल्ली के लिए जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिनमें 20 गाड़िया भिवानी डिपो से, चार गाड़ियों तोशाम सब डिपो से, दो गाड़ियों लोहारू सब डिपो से दिल्ली की तरफ यात्रियों को ले जाने व लाने का कार्य करती है। इन सभी गाड़ियों में बीएस-6 तकनीक का प्रयोग वायु प्रदूषण को रोकने के लिए किया गया गया है। ऐसे में उनका मानना है कि वाहनों से निकलने वाले पाल्यूशन में रोड़वेज की बहुत बड़ी भूमिका नहीं है। फिर भी यदि राज्य सरकार या दिल्ली सरकार इस संबंद्ध में कोई दिशा-निर्देश जारी करते है तो वे दिल्ली की तरफ गाड़ियां ले जाने को लेकर विचार-विमर्श कर सकते है। फिलहाल दिल्ली की तरफ जाने वाली रोड़वेज बसों में कोई व्यवधान नहीं है तथा पूर्व की तरफ सभी गाड़ियां दिल्ली की तरफ जा रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Lava Blaze 2 5G: लावा ने लाँच किया ब्लेज 2 5जी स्मार्टफोन, जानें कीमत और फीचर्स" href="http://10.0.0.122:1245/lava-launches-blaze-2-5g-smartphone/">Lava Blaze 2 5G: लावा ने लाँच किया ब्लेज 2 5जी स्मार्टफोन, जानें कीमत और फीचर्स</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Nov 2023 16:29:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्रदूषण एजेंसियां प्रदूषण के सही आंकड़े नहीं करती प्रकट!</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण से भारत में गरीब सर्वाधिक प्रभावित हैं। विनिर्माण, उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों, सेवाओं, परिवहन और अन्य कार्यकलापों को प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से जोड़ा जा रहा है और इन पर कर लगाए जा रहे हैं जिससे महंगाई और जीवन की लागत में वृृद्धि हो रही है। इसके अलावा दिल्ली में प्रदूषण एजेंसियों द्वारा प्रदूषण के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pollution-agencies-do-not-disclose-correct-pollution-figures/article-54444"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/air-pollution-reduces-life-expectancy.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रदूषण से भारत में गरीब सर्वाधिक प्रभावित हैं। विनिर्माण, उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों, सेवाओं, परिवहन और अन्य कार्यकलापों को प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से जोड़ा जा रहा है और इन पर कर लगाए जा रहे हैं जिससे महंगाई और जीवन की लागत में वृृद्धि हो रही है। इसके अलावा दिल्ली में प्रदूषण एजेंसियों द्वारा प्रदूषण के संबंध में आंकड़ों को प्रकट न करने से भी अनेक प्रश्न उठ रहे हैं। इसलिए यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या सरकारें अर्थव्यवस्था पर अनावश्यक लागत थोप रही है। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण अपने आप में एक बड़ा व्यवसाय बन गया है और इससे गरीब सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है। अकेले पेट्रोल पर लगभग 13.6 लाख करोड़ के उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाए जा रहे हैं ताकि इसकी खपत में कमी हो। इसके पूर्व के पांच वर्षों में इससे 13 लाख करोड़ रूपए संग्रहित किए गए। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">प्रश्न यह भी उठता है कि इन प्रमुख प्रदूषण पर निगरानी रखने वाली एजेंसियां आईआईटी, कानपुर आदि ने प्रदूषण के मामले में आंकड़े जारी करने बंद क्यों कर दिए हैं। इसका कारण यह है कि नौकरशाही और दिल्ली सरकार में टकराव चल रहा है। जिसके चलते ऐसा लगता है कि वे इन आंकड़ों के बारे में स्वयं आश्वस्त नहंी है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि संपूर्ण विश्व में प्रदूषण लागत बढाने का एक औजार बन गया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की सरकारों ने इस संबंध में एक और तरीका निकाला है। वह यह कहकर लोगों की कारें जब्त कर रही हैं कि कार का जीवन समाप्त हो गया है और इस तरह लोगों को प्रताड़ित कर रही हैं कि वे इस संबंध में सामाजिक लागत पर भी ध्यान नहंी दे रही हैं। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में नेशनल ग्रीन एयर कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2022 तक अल्ट्रा फाइन पार्टिकुलेट के स्तर में 20 से 30 प्रतिशत की कमी करने का लक्ष्य रखा गया। केन्द्र सरकार द्वारा सितंबर 2022 में इस लक्ष्य को वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत करने का विस्तार किया गया किंतु वर्ष 2022 में भी कुछ शहरों में प्रदूषण का स्तर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वार्षिक औसत सुरक्षित सीमा से अधिक रहा है। दुकानदारों को दोष दिया जा रहा है कि वे प्लास्टिक के माध्यम से प्रदूषण फैला रहे हैं। किसानों को पराली जलाने के नाम पर प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: बड़े कारपोरेट बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो शीतल पेयों का विनिर्माण करते हैं वे सबसे बड़ी प्लास्टिक प्रदूषक हैं और इसमें अन्य उद्योग तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर भी शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कारों और ट्रैक्टरों से 8 प्रतिशत ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्टी के अनुसार वायु प्रदूषण में उद्योगों का हिस्सा 51 प्रतिशत है और इसकी लागत लगभग 7 लाख करोड़ हैं क्योंकि इससे श्रमिकों की उत्पादकता और राहत प्रभावित होते हैं। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: भारत ने वर्ष 2070 तक प्रदूषण के मामले में पश्चिमी मानदंडों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है किंतु उसे गरीब लोगों की कारों और टैज्क्टरों के बारे में उदारता से सोचना चाहिए। प्रत्येक नई कार या ट्रैक्टर के निर्माण और पुरानी कारों को नष्ट करने से अधिक प्रदूषण होता है और इससे गरीब लोग और गरीब लोग हो रहे हैं क्योंकि इससे उनकी गतिशीलता प्रभावित होती है और इससे अधिक प्रदूषण बढ़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: बड़े अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय हर जगह सबसे बड़े प्रदूषक हैं। भारत की शीर्ष 12 कंपनियां जिनमें एक सरकारी कंपनी भी हैं, उन्हें सर्वाधिक प्रदूषण करने वाला घोषित किया गया है। ब्रेक फ्री फ्राम प्लास्टिक द्वारा 2022 में किए गए एक ऑडिट के अनुसार भारत में पाया जाने वाला सबसे आम प्लास्टिक उत्पाद फूड पैकेजिंग, घरेलू उत्पाद और अन्य पैकेजिंग मैटेरियल हैं। उत्तर भारत में चीनी मिलें और अन्य उद्योग सर्वाधिक जल और वायु प्रदूषण पैदा करती हैं। वे खुलेआम नदियों में प्रदूषक छोड़ रहे हैं और केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड के मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">तथाकथित कठोर मानदंडों से किराया बढा है, पार्किंग शुल्क बढ़ा है और यह समझ नहंी आता है कि शुल्क बढ़ाकर किस तरह से प्रदूषण पर नियंत्रण लगता है। सेन्टर फोर पालिसी रिसर्च ने वर्ष 2019 में कहा था कि पर्यावरणीय विनियामक तंत्र को मानदंडों के पालन और कार्यान्वयन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इंडिया स्पेंड ने वर्ष 2014 से वर्ष 2017 तक प्रदूषण के बारे में रिपोर्टों और आंकड़ों का विश्लेषण किया और यह बताता है कि केन्द्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकारों ने पर्यावरण विनियमनों का कड़ाई से पालन नहीं कराया है और वे इस मामले में उदासीन रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जेएसडब्ल्यू स्टील 2020 में चुनावी ट्रस्टों को चंदा देने वाला सबसे बडा चंदादाता था। टाटा समूह की प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने अपना 75 प्रतिशत चंदा सत्तारूढ दलों को दिया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने 206 प्रदूषण करने वाले उद्योगों में से 146 उद्योगों को सामान्य जांच से छूट दी है और उन्हें स्वत: निगरानी तथा तृतीय पक्ष प्रमाण का विकल्प दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्र की बिजनेस रिफोर्म एक्शन प्लान जिसे वर्ष 2014 से लागू किया जा रहा है, उसने उद्योगों के संबंध में पर्यावरण संरक्षण कम करने के लिए प्रोत्साहन दिया है। विश्व बैंक का कहना है कि विकास के नाम पर अनियमित औद्योगिकीकरण के कारण लोग अनेक तरह से प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोग, आदिवासी समुदायों का बलपूर्वक विस्थापन हो रहा है और स्थानीय पर्यावरण तथा आजीविका के स्रोतों के प्रदूषण के कारण उन्हे खराब स्थितियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में विश्व के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 10 शहर हैं और भारत में विश्व में सर्वाधिक वायु प्रदूषण है। यह तथ्य विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उजागर किया है। भारत के पूर्व आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु की राय है कि इनमें से अनेक समस्याओं का मुख्य कारण बड़े व्यवसायों के अनुकूल नीतियां अपनाना है। इसका तात्पर्य यह है कि उद्योगों का लाभ बढ रहा है और उसकी कीमत गरीब लोगों पर विभिन्न तरह के प्रभारों के रूप में थोपा जा रहा है और यह सब कुछ प्रदूषण को निंयत्रित करने के नाम पर किया जा रहा है और इसके चलते मुद्रा स्फीति निरंतर बढती जा रही है। अर्थात गरीब लोगों पर भारी लागत थोपी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 15 माह से मुद्रा स्फीति की दर बढती रही है और इससे लोगों की वित्तीय व्यवस्था डगमगाई है। भारतीय रिजर्व बैंक भी मुद्रा स्फीति के बारे में अत्यधिक चिंतित है। डालर के मुकाबले रूपया लगभग 83 रूपए है और यदि रूपया कमजोर होता गया जो जीवन की लागत बढती जाएगी। बैटरी और विंड पैनल अपशिष्ट भी एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। 8 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया कि सरकारें महत्वाकांक्षी सामुहिक वचन-वायदे कर रही हैं किंतु वे इस संबंध में सही कदम नहीं उठा रहे है। जिसके चलते ये सामुहिक वायदे और संकल्पों का कार्यान्वयन नहीं किया जा रहा है।Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यूरोप इस संबंध में 1979 से इस संबंध में कदम उठा रहा है किंतु यूनान और स्पेन सर्वाधिक प्रदूषक देश रहे हैं। प्रदूषण बढता जा रहा है और किसी तरह इस पर अंकुश लगाने के लिए लोगों पर अधिक लागत थोपी जा रही है। प्रदूषण के सबसे बड़े राजस्व संग्राहक होने के बावजूद इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। विश्व समुदाय को इस संबंध में अपनी विफलता स्वीकार करनी चाहिए और गरीबों को अच्छे दिन दिखाने के नाम पर उन पर थोपी गयी लागत को हटाना चाहिए। Pollution</p>
<p style="text-align:right;"><strong>शिवाजी सरकार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार<br />
(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 19:36:16 +0530</pubDate>
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