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                <title>Political Violence in West Bengal - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Political Violence in West Bengal RSS Feed</description>
                
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                <title>हिंसा के चरम पर पश्चिम बंगाल</title>
                                    <description><![CDATA[West Bengal: पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा लोकतंत्र का सबसे घिनौना रुप है। चुनावी हिंसा के मामले में हमेशा से ही पश्चिम बंगाल सुर्खियों में रहा है। शनिवार को पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के दौरान हुई हिंसा में राज्य के विभिन्न हिस्सों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष दोनों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/west-bengal-at-the-peak-of-violence/article-49772"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/political-violence-in-west-bengal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">West Bengal: पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा लोकतंत्र का सबसे घिनौना रुप है। चुनावी हिंसा के मामले में हमेशा से ही पश्चिम बंगाल सुर्खियों में रहा है। शनिवार को पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के दौरान हुई हिंसा में राज्य के विभिन्न हिस्सों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष दोनों के प्रति निष्ठा रखने वाले 12 लोगों की मौत हो गई। हिंसा की घटनाओं में एक उम्मीदवार सहित तृणमूल कांग्रेस के सात कार्यकर्ता मारे गए, भाजपा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के दो-दो तथा कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, राजनैतिक हिंसा अब पश्चिम बंगाल की संस्कृति बन गई है। वहां अधिकतर चुनाव हिंसा के बिना सिरे ही नहीं चढ़ते। शुरुआत में सभी राजनीतिक दल एक दूसरे पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाते हैं, जिसमें आम जनमानस को भारी नुक्सान झेलना पड़ता है। कारोबार के साथ-साथ शिक्षा व अन्य कई प्रकार की व्यवस्थाओं में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। क्यों विकास चुनावों का एजेंडा नहीं बन पा रहा। भारतीय लोकतंत्र में पश्चिम बंगाल सबसे बदनुमा दाग है। क्या हिंसा राज सत्ता का एक मात्र विकल्प है। Political Violence in West Bengal</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यही हाल रहा तो पश्चिम बंगाल में जनता का पार्टियों से विश्वास उठ जाएगा और लोग वोट डालना ही बंद कर देंगे। देश में कानून है, लोकतंत्र है, इस पर विश्वास कीजिए और राजनीति कीजिए। लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। हम अभिव्यक्ति का गला घोंटकर अच्छे समाज का निर्माण नहीं कर सकते हैं। हमें विचारधाराओं की लड़ाई लड़नी चाहिए, हिंसा की नहीं। अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगा कर जनता की विचारधारा को नहीं मोड़ा जा सकता है। क्योंकि लोकतंत्र में जनता और उसका जनाधार सबसे शक्तिशाली होता हैं। West Bengal</p>
<p style="text-align:justify;">किसी सरकार या नेता का काम देश की भलाई करना होना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को हिंसा का रास्ता त्याग एकजुट होकर राज्य की खुशहाली के लिए प्रयास करने चाहिए। साथ ही चुनाव आयोग को सख्ती बरतनी चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए किसी कंलक से कम नहीं है। हिंसा पर हमारी चुप्पी भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है। Editorial Hindi</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2023 17:46:51 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिमी बंगाल में राजनैतिक हिंसा का रुझान खतरनाक</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी बंगाल में वही सब कुछ हो रहा है, जिस डर की कुछ दिन पहले आशंका प्रकटाई गई थी। वहां राजनैतिक बदलेखोरी हिंसा का रूप धारण करने लगी है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्याजीत बिस्वास की हत्या हो गई है। पुलिस ने इस मामले में भाजपा विधायक मुकुल राय के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पश्चिमी बंगाल में वही सब कुछ हो रहा है, जिस डर की कुछ दिन पहले आशंका प्रकटाई गई थी। वहां राजनैतिक बदलेखोरी हिंसा का रूप धारण करने लगी है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्याजीत बिस्वास की हत्या हो गई है। पुलिस ने इस मामले में भाजपा विधायक मुकुल राय के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दरअसल केंद्र व राज्य सरकार के बीच बढ़ रहा तनाव केवल समाचारों तक सीमित नहीं होता बल्कि यह नफरत की वह दीवार खड़ी कर जाता है जो हिंसा पर जाकर ही समाप्त होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व केरल व अन्य राज्यों में टकराव दुखांतक रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी व भाजपा नेता एक दूसरे पर शब्दिक प्रहार कर रहे हैं। ममता सीबीआई का दुरुपयोग के आरोप लगा रही है दूसरी तरफ भाजपा नेता तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्ट बता रहे हैं। साकारात्मक बहस का युग समाप्त हो गया है। राजनीति एक बुराई का रूप धारण कर चुकी है जहां वोट के लिए कुछ भी किया जा सकता है। स्थिति का दुखांत यह है कि लोकतंत्र का हनन कौन नहीं कर रहा, इस बात को समझना कठिन है।</p>
<p style="text-align:justify;">आम तौर पर राजनैतिक बदलेखोरी का शब्द तब इस्तेमाल किया जाता है जब एक पक्ष सत्ता में और दूसरा विपक्ष हो लेकिन कोलकाता का मामला एक अलग उदाहरण है जहां दोनों पक्ष सत्ता में हैं। एक केंद्र में है और दूसरी राज्य में। दोनों के पास अपनी संस्थाओं को इस्तेमाल करने के रूप में ताकत है। केंद्र के पास सीबीआई है जिसके द्वारा उसने ममता सरकार को घेरने की कोशिश की, दूसरी तरफ ममता के पास बंगाल की पुलिस है, वह सीबीआई के पूर्व अधिकारियों व भाजपा नेता के खिलाफ पूरे जोर-शोर से इस्तेमाल कर रही है। पॉवर का दुरुपयोग में किसी एक को क्लीन चिट्ट देना मुश्किल है। पुलिस व सीबीआई को दोनों पक्ष खुलकर दुरुप्रयोग कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मामला थम जाएगा, लेकिन बढ़ रही हिंसा से लग रहा है कि पार्टियां इस घटनाक्रम से सबक लेने के लिए तैयार नहीं। केंद्र व पश्चिम बंगाल सरकार दोनों को चाहिए कि वह संयम रखें।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Feb 2019 20:28:13 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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