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                <title>Rafale Deal - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>राफेल सौदे पर कैग की रिपोर्ट से सरकार पर फिर भड़के राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि सच को लाख कोशिश के बाद भी छिपाया नहीं जा सकता। गांधी ने सरकार के राफेल से जुड़ी सूचना कैग को नहीं देने संबंधी एक अखबार में छपी खबर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/rahul-again-angry-on-the-government-from-the-cag-report-on-the-rafale-deal/article-17753"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/modi-is-the-watchman-of-select-industrialists-rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि सच को लाख कोशिश के बाद भी छिपाया नहीं जा सकता। गांधी ने सरकार के राफेल से जुड़ी सूचना कैग को नहीं देने संबंधी एक अखबार में छपी खबर का हवाला देते हुए कहा कि सरकार राफेल घोटाले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है और तथ्य छिपा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ट्वीट किया, ‘राफेल के लिए भारत सरकार के खजाने से पैसा चुराया गया। इसके साथ ही उन्होंने सच को लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के एक कथन का उद्धरण करते हुए लिखा, ‘सच एक है, रास्ते कई हैं। उन्होंने राफेल विमान के चित्र के साथ ही इस संबंध में छपी खबर को पोस्ट किया जिसमें कहा गया है कि नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक-कैग ने राफेल आॅफसेट सौदे को लेकर सरकार को रिपोर्ट सौंपी है जिसमे राफेल पर हुए खर्च का कोई ब्यौरा नहीं है क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने कैग को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2020 16:46:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामला: टिप्पणी को लेकर राहुल को नोटिस दिया</title>
                                    <description><![CDATA[इस मामले में अगली सुनवाई 30 अप्रैल को नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने राफेल मामले में अदालत के फैसले पर टिप्पणी करने (rafale deal) को लेकर मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नोटिस जारी किया। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में श्री गांधी और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rafale-deal-2/article-8685"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/rafale-deal-1.jpg" alt=""></a><br /><h1>इस मामले में अगली सुनवाई 30 अप्रैल को</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने राफेल मामले में अदालत के फैसले पर टिप्पणी करने (rafale deal) को लेकर मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नोटिस जारी किया। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में श्री गांधी और श्रीमती मीनाक्षी लेखी की ओर से दलीलें सुनने के बाद गांधी को नोटिस जारी किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि गांधी ने राफेल मामले को लेकर शीर्ष अदालत में 14 दिसंबर को दायर पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करने के फैसले को लेकर उत्तर प्रदेश के अमेठी में कहा था कि अदालत ने मान लिया है कि ‘चौकीदार (नरेंद्र मोदी) चोर है’। इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता एवं नई दिल्ली से सांसद मीनाक्षी लेखी ने उच्चतम न्यायालय में गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया है। गांधी ने अदालत द्वारा स्पष्टीकरण मांगने पर सोमवार को 19 पृष्ठों का हलफनामा दायर कर कहा था कि चुनावी सरगर्मी के कारण आवेश में आकर उन्होंने अदालती सुनवाई को लेकर टिप्पणी कर दी थी, जिस पर उन्हें खेद है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2019 16:55:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राफेल डील: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की आपत्ति खारिज की</title>
                                    <description><![CDATA[यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार याचिकाएं लगाई थीं नई दिल्ली। राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर मोदी सरकार को झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता द्वारा गोपनीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rafale-deal/article-8459"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/rafale-deal.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार याचिकाएं लगाई थीं</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर मोदी सरकार को झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता द्वारा गोपनीय दस्तावेजों की फोटोकापी के आधार पर जो पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गई हैं उन पर सुनवाई होगी। केंद्र ने कहा था कि विशेषाधिकार वाले गोपनीय दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका का आधार बनाना भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत सबूत नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस आपत्ति पर अपना फैसला 14 मार्च की सुनवाई के बाद सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 के फैसले में राफेल डील को तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था। अदालत ने उस वक्त डील को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने डील के दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने मूल दस्तावेजों की फोटकॉपी का इस्तेमाल किया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">केंद्र की दलील थी- दस्तावेज एक्ट के तहत सुरक्षित, आरटीआई के दायरे से बाहर</h2>
<p style="text-align:justify;">चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा था- जब हम केंद्र की आरंभिक आपत्ति पर फैसला कर लेंगे, तभी हम पुनर्विचार याचिकाओं के दूसरे पहलुओं पर विचार करेंगे। स्पष्ट कर दें कि हम केवल तभी दूसरी जानकारियों पर जाएंगे, जब हम केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दें। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि कोई भी इन दस्तावेजों को बिना संबंधित विभाग की इजाजत के अदालत में पेश नहीं कर सकता। यह दस्तावेज ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत सुरक्षित रखे गए हैं और सेक्शन 8(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार के दायरे से भी बाहर हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भूषण ने केंद्र की दलील पर आपत्ति जताई थी</h2>
<p style="text-align:justify;">पुनर्विचार याचिका के पक्ष में भूषण ने दलील दी थी- केंद्र की आपत्ति के संबंध में दलील बेहद अपुष्ट और दुर्भावनापूर्ण है। सरकार ऐसे दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा नहीं कर सकती है, जो पहले से ही प्रकाशित हो चुके हों और सामने आ चुके हों। धारा 123 के तहत केवल वही दस्तावेज सुरक्षित माने जाते हैं, जिनका प्रकाशन ना किया गया हो।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/rafale-deal/article-8459</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Apr 2019 13:06:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rafale Deal: सुप्रीम कोर्ट में सरकार की आपत्तियां खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[तीन दस्तावेजों को माना सुबूत नई दिल्ली (एजेंसी)।। सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राफेल डील से संबंधित तीन दस्तावेजों को सुबूत के तौर पर स्वीकर करने की अनुमति प्रदान कर दी है। सरकार पहले याचिका में शामिल सभी दस्तावेजों को विशेषाधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताकर कोर्ट में प्रस्तुत करने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>तीन दस्तावेजों को माना सुबूत</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong>। सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राफेल डील से संबंधित तीन दस्तावेजों को सुबूत के तौर पर स्वीकर करने की अनुमति प्रदान कर दी है। सरकार पहले याचिका में शामिल सभी दस्तावेजों को विशेषाधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताकर कोर्ट में प्रस्तुत करने और सार्वजनिक करने का विरोध कर रही थी।</p>
<h2>इस मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई पूरी कर चुका है।</h2>
<p>राफेल डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट आज मामले में केंद्र सरकार के विशेषाधिकार पर अहम फैसला सुना सकता है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई पूरी कर चुका है। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा हुआ है। लिहाजा, आज इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद है। 14 दिसंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे पर सुनवाई करते हुए, डील के खिलाफ दायर की गई सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की गईं हैं।</p>
<p>मालूम हो कि राफेल डील पर केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेजों पर सरकार का विशेषाधिकार है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी संबंधित विभाग की अनुमति के बगैर सौदे से जुड़े दस्तावेजों को प्रस्तुत या सार्वजनिक नहीं कर सकता है। मामले में अटार्नी जनरल ने दलील दी थी कि कोई भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक नहीं कर सकता। राष्ट्र की सुरक्षा सबसे ऊपर है।</p>
<p>अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिका खारिज करने की मांग की थी। दलील दी गई थी कि तीनों याचिकाओं में जिन दस्तावेजों का प्रयोग हुआ है, उस पर सरकार का विशेषाधिकार है। लिहाजा उन दस्तावेजों को याचिका से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को ये भी बताया था कि याचिका में संलग्न दस्तावेज, मूल दस्तावेजों की फोटो कॉपी हैं। इन्हें गैर-अधिकृत तरीके से तैयार किया गया है। इसकी जांच चल रही है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/rafale-deal-governments-objections-rejected-in-supreme-court/article-8453</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Apr 2019 11:10:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद: कैग की रिपोर्ट में दावा- 126 के बदले 36 राफेल विमानों की डील कर भारत ने 17.08% पैसा बचाया</title>
                                    <description><![CDATA[नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश हुई नई दिल्ली। वायुसेना की खरीद से जुड़ी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट बुधवार को राज्यसभा में पेश कर दी गई। इस ( India Has Shown 17.08% Money Dealing 36 Rafale Claim-126 CAG Report ) रिपोर्ट में राफेल डील से जुड़े विवरण भी शामिल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश हुई</h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> वायुसेना की खरीद से जुड़ी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट बुधवार को राज्यसभा में पेश कर दी गई। इस ( India Has Shown 17.08% Money Dealing 36 Rafale Claim-126 CAG Report ) रिपोर्ट में राफेल डील से जुड़े विवरण भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 126 विमानों की पुरानी डील से तुलना करें तो 36 राफेल विमानों का नया सौदा कर भारत 17.08% पैसा बचाने में कामयाब रहा है। वहीं, पुरानी डील के मुकाबले नई डील में 18 विमानों की डिलीवरी का समय बेहतर है। शुरुआती 18 विमान भारत को पांच महीने जल्दी मिल जाएंगे।</p>
<h2>मीडिया रिपोर्ट में कैग से विपरीत दावे, राहुल ने इसी को मुद्दा बनाया</h2>
<p>अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के तीन वरिष्ठ अफसरों की टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि मोदी सरकार की राफेल डील यूपीए सरकार के समय मिले ऑफर से बेहतर नहीं है। मोदी सरकार ने 36 तैयार राफेल लड़ाकू विमानों की डील है। जबकि यूपीए के समय दैसो कंपनी ने 126 राफेल विमानों का ऑफर दिया था। भारतीय वार्ताकारों के दल में शामिल इन तीनों अफसरों ने 1 जून 2016 को वार्ताकार दल के प्रमुख और डिप्टी चीफ एयर स्टाफ को सौंपे नोट में ये बातें कही थीं।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘अफसरों ने कहा था कि नई डील में 36 में से 18 राफेल विमानों की डिलिवरी भी पुराने ऑफर के तहत मिलने वाले 18 विमानों से धीमी रहेगी। ड्राफ्ट सौदे में फ्लायअवे विमानों की डिलिवरी का समय 37 से 60 महीने के बीच तय किया गया था। लेकिन फ्रांस ने बाद में डिलिवरी का वक्त 36 से 67 महीने तय कर दिया। वहीं, यूपीए सरकार के समय फ्रांस सरकार ने 18 राफेल विमानों की डिलिवरी का समय 36 से 53 महीने के बीच तय किया था।’’</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Feb 2019 12:23:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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