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                <title>Commendable - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सराहनीय: मृत्युपरांत भोज की बजाय गौशाला में दान किए एक लाख</title>
                                    <description><![CDATA[नाथूसरी चोपटा (सच कहूँ न्यूज)। गांव जोड़कियां में देहडू परिवार ने एक नई रीत का आगाज करते हुए परिवार में मृत्युपरांत भोज या अन्य फिजूल खर्च करने की बजाय गौशाला में एक लाख एक हजार रुपए दान किए। इस कार्य की पूरे गांव में प्रशंसा हो रही है। जोड़कियां गांव निवासी 90 वर्षीय नंदलाल देहडू […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/donated-one-lakh-rupees-to-cowshed/article-41260"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/welfare-work-22.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नाथूसरी चोपटा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> गांव जोड़कियां में देहडू परिवार ने एक नई रीत का आगाज करते हुए परिवार में मृत्युपरांत भोज या अन्य फिजूल खर्च करने की बजाय गौशाला में एक लाख एक हजार रुपए दान किए। इस कार्य की पूरे गांव में प्रशंसा हो रही है। जोड़कियां गांव निवासी 90 वर्षीय नंदलाल देहडू का आकस्मिक निधन हो गया था। उनके पुत्र जगदीश, बृजलाल, हवा सिंह व सतपाल देहडू ने आपसी सलाह से निर्णय लिया कि पिता की तेरहवीं पर प्रतिभोज पर खर्च करने की बजाय उस पैसों को गौशाला में दान दिया जाए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सॉफ्टवेयर पर तैयार होंगी फर्द, नहीं काटने पड़ेंगे पटवारखानों के चक्कर" href="http://10.0.0.122:1245/land-fard-will-be-prepared-on-software-in-haryana/">सॉफ्टवेयर पर तैयार होंगी फर्द, नहीं काटने पड़ेंगे पटवारखानों के चक्कर</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस फैसले पर परिवार के अन्य लोगों ने भी सहमति जताई। गत दिवस दिवंगत आत्मा की याद में तेरहवीं के दिन देहडू परिवार के सदस्यों ने गांव की बाबा गोपालपुरी गौशाला में 101000 रुपए दान दिए। इस मौके पर गौशाला प्रधान ओमप्रकाश चुरनियां ने देहडू परिवार का धन्यवाद किया और उम्मीद जताई कि पूरा गांव इस नई रीत का अनुसरण करेगा, जिससे फिजूल के खर्च पर लगाम लगेगी, वहीं गौशाला में आश्रित 300 गायों की सार-संभाल में सभी की भागीदारी बढ़ेगी।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Dec 2022 16:25:28 +0530</pubDate>
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                <title>पंचायतों की सराहनीय पहल</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा की 700 से ज्यादा पंचायतों ने अपने गांवों से शराब के ठेके बंद करने की मांग की है। पहले भी इस राज्य में शराब पर प्रतिबंध के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला था। पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी शराब के ठेके बंद करने के लिए प्रदर्शन तक किए थे। शराब सामाजिक, आर्थिक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/commendable-initiative-of-panchayats/article-12538"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/panchayats.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">हरियाणा की 700 से ज्यादा पंचायतों ने अपने गांवों से शराब के ठेके बंद करने की मांग की है। पहले भी इस राज्य में शराब पर प्रतिबंध के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला था। पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी शराब के ठेके बंद करने के लिए प्रदर्शन तक किए थे। शराब सामाजिक, आर्थिक व शारीरिक तबाही की जड़ है। मामला अब यहां तक सीमित नहीं होना चाहिए कि शराब पर पाबंदी लगाने वाली पंचायतों के गांवों में शराब की बिक्री बंद हो बल्कि अब समय आ गया है कि सरकार को भी इस विषय में सोचना चाहिए। क्या सरकार पंचायतों की इस पहल से मार्गदर्शन पाकर प्रदेश में शराब पर पाबंदी लगाने संबंधी कदम उठाएगी? आम तौर पर सरकार द्वारा जारी जनहित की योजनाओं को लागू करने के लिए जनता से सहयोग की मांग की जाती है, जहां तक शराब का मामला है जब सैंकड़ों पंचायतें शराबबंदी की स्वंय पहल कर रही हैं तब सरकार को इन पंचायतों का हौसला बढ़ाने के साथ साथ बाकी पंचायतों को भी इस दिशा में आगे आने की अपील करनी चाहिए। गत वर्षों से पंजाब के संगरूर, पटियाला जिला सहित एक दर्जन के करीब जिलों ने शराब के ठेके हटाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन शराब के व्यापारी कोई न कोई चाल चल पंचायतों शराबबंदी के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। बेहतर होगा यदि हरियाणा सरकार पंचायतों की इस पहल को शुभ समझकर राज्य में शराब के खिलाफ मुहिम चलाए। शराब बहुत बड़ी सामाजिक समस्या है लेकिन केंद्र से लेकर राज्य सरकारें इस समस्या पर दोहरा रवैया अपना रहीं हैं। सरकार नशे की रोकथाम के लिए सैकड़ों-करोड़ों रुपये खर्च करती है लेकिन विडंबना है कि सरकार शराब को नशा ही नहीं मान रही, तभी इसकी आम बिक्री के लिए ठेके दे रही है। फिर हद तब हो जाती है जब सरकार शराब से कमाई पर अपनी पीठ थपथपाती है, जोकि भारतीय धर्मों और संस्कृति के विरुद्ध है। गुजरात जैसे राज्य भी हैं जहां शराबबन्दी लागू करने के बावजूद तरक्की हुई है। बिहार जैसा गरीब राज्य भी शराबबन्दी के खिलाफ डटा हुआ है और वहां अपराधिक घटनाओं का ग्राफ भी नीचे आया है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को भी शराब की कमाई का लालच त्याग छोड़कर जनता के हितों के लिए काम करना चाहिए।</h4>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2020 20:37:10 +0530</pubDate>
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                <title>पराली पर पंजाब की सराहनीय पहल</title>
                                    <description><![CDATA[आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पंजाब सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को वित्तीय मदद देने की घोषणा करते हुए इस समस्या को सुलझाने की पहल की है। प्रदेश सरकार पांच एकड़ तक की जमीन के मालिक किसानों को 2500 रुपए देगी। भले ही यह रकम बहुत कम है फिर भी शुरूआत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/punjab-commendable-initiative-on-parali/article-11140"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/parali.jpg" alt=""></a><br /><p>आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पंजाब सरकार ने पराली न जलाने वाले किसानों को वित्तीय मदद देने की घोषणा करते हुए इस समस्या को सुलझाने की पहल की है। प्रदेश सरकार पांच एकड़ तक की जमीन के मालिक किसानों को 2500 रुपए देगी। भले ही यह रकम बहुत कम है फिर भी शुरूआत अच्छी है। हालांकि पंजाब व हरियाणा की सरकार ने पराली को समेटने वाले कृषि यंत्रों पर सब्सिडी भी मुहैया करवाई थी, गांवों में जागरूकता रैलियां व कृषि विभाग ने जागरूकता कैंप लगाकर भी पराली समस्या से निपटने की पहल की थी।</p>
<p>प्रदेश सरकार ने केंद्र से प्रति क्विंटल पराली 100 रुपए मांगे थे, यदि यह निर्णय धान की कटाई से दो माह पूर्व लिया जाता तब इसके अच्छे परिणाम आ सकते थे। पराली जलाने से दिल्ली सहित हरियाणा के चार पांच जिलों की हवा बहुत खतरनाक हो जाती है। हरियाणा के कई जिलों में स्कूलों में छुट्टियां भी करनी पड़ी हैं। यदि केंद्र सरकार राज्य की आर्थिक मदद करे तब कई अन्य राज्य भी पंजाब जैसी घोषणा कर सकते हैं। पंजाब सरकार की योजना के पीछे यह तर्क भी वाजिब है कि कि छोटे किसानों पर पराली को समेटने के लिए खर्च का बोझ नहीं पड़ना चाहिए। कोई भी समस्या ऐसी नहीं, जिसका समाधान नहीं हो सकता। नि:संदेह सही समय पर काम करने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए।</p>
<p>केंद्र व राज्य सरकारें लोगों के स्वास्थ्य के लिए अरबों रुपए का बजट आरक्षित रखती हैं। यदि बजट का छोटा सा हिस्सा किसानों पर खर्च किया जाए तब यह ‘एक पंथ-दो काज’ वाली बात होगी। दरअसल कृषि पहले ही घाटे का सौदा बन चुकी है और विशेष तौर पर छोटे किसान पराली समेटने के लिए महंगी मशीनरी खरीदने में असमर्थ हैं। किसानों को वित्तीय मदद देना ही पराली की समस्या का एकमात्र समाधान है। कुछ प्राईवेट संस्थाएं भी पराली का समाधान निकालने के लिए प्रयत्नशील हैं। सरकार इन संस्थाओं के साथ मिलकर समस्या का का स्थायी समाधान निकाल सकती हैं। बेहतर हो यदि केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय मदद देकर किसानों के बोझ को हलका करे। मुकदमे दर्ज करने से समस्या का समाधान संभव नहीं, बल्कि यह किसानों पर अत्याचार होगा। कृषि की स्थिति सरकारों से छिपी हुई नहीं। खाद, बीज व कीटनाशकों की कीमतों में वृद्धि होने से किसानों पर बोझ बढ़ा है। यही बेहतर पहल होगी यदि वातावरण की शुद्धता में पूरा देश अपनी जिम्मेदारी निभाए और अपना आर्थिक योगदान दे।</p>
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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2019 15:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विद्यार्थियों को पुरानी विरासत से अवगत करवाना प्रशंसनीय प्रयास: आईजी</title>
                                    <description><![CDATA[विरासती उत्सव के तीसरे दिन लोगों ने की विरासती स्थानों की सैर पटियाला (खुशवीर सिंह तूर)। पंजाब के सांस्कृतिक व पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन की ओर से इंडियन ट्रस्ट फार रुरल हेरिटेज एंड डिवैल्पमैंट के सहयोग से करवाए जा रहे पटियाला हेरिटेज फेस्टिवल -2019 के तीसरे दिन वीरवार को पटियाला की युवा पीढ़ी को शहर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>विरासती उत्सव के तीसरे दिन लोगों ने की विरासती स्थानों की सैर</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (खुशवीर सिंह तूर)। </strong>पंजाब के सांस्कृतिक व पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन की ओर से इंडियन ट्रस्ट फार रुरल हेरिटेज एंड डिवैल्पमैंट के सहयोग से करवाए जा रहे पटियाला हेरिटेज फेस्टिवल -2019 के तीसरे दिन वीरवार को पटियाला की युवा पीढ़ी को शहर के विरासती स्थानों का दौरा करवाने के लिए पटियाला फाउंडेशन की ओर से एक विरासती सैर (हेरिटेज वॉक) का आयोजन किया गया। विरासती सैर को आईजी पटियाला एएस राय ने शाही समाधियों से झंडी दिखाकर रवाना किया। उनके साथ एडीसी पूनमदीप कौर, एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू, एसडीएम समाना नमन मड़कण और पटियाला फाउंडेशन के चीफ फंक्शनरी रवि आहलूवालिया व अन्य गणमान्यजन मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विरासती सैर ने पटियाला की शाही समाधियों से किला मुबारक तक शहर के अंदर बने हुए विरासती रास्ते से होते हुए पुराने शहर की सैर की। इस विरासती सैर के काफिले में सरकारी महेन्द्रा कालेज, सरकारी कॉलेज लड़कियां, स्टेट कॉलेज आॅफ एजुकेशन, एमएम मोदी कॉलेज, बिक्रम कॉलेज आॅफ कॉमर्स, सरकारी माध्यमिक स्कूल घास मंडी, सरकारी हाई स्कूल सनौरी अड्डा, ढुड्याल खालसा स्कूल, बूढ़ा दल पब्लिक स्कूल, यादविन्द्रा पब्लिक स्कूल, पटियाला स्कूल फार ब्लायंड, दी ब्रिटिश को एड स्कूल सहित अन्य कई स्कूलों और कालेजों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों सहित शहर निवासियों ने शिरकत की।</p>
<h3 style="text-align:left;">स्थानीय निवासियों ने विरासती सैर का  किया भव्य स्वागत</h3>
<p style="text-align:justify;">विरासती सैर शाही समाधियों से शुरू होकर हवेली मोहल्ला छत्ता नानूंमल, बर्तन बाजार, मिश्री बाजार, रूप चंद मोहल्ला, सांपों वाली गली, राजेश्वरी शिव मंदिर, कोतवाली, दर्शनीय ड्यूडी से होती हुई किला मुबारक में जाकर समाप्त हुई। इस दौरान रवि आहलूवालिया ने इस सैर में शामिल हुए विद्यार्थियों व अन्य गणमान्यजनों को इस रास्ते में आए हर स्थान का महत्व बताया गया। सबसे पहले शाही समाधियों संबंधी जानकारी दी गई कि यहां पटियाला रियासत के संस्थापक बाबा आला सिंह सहित पटियाला रियासत के अन्य पारिवारिक सदस्यों की समाधियां स्थित हैं। इस विरासती सैर का स्थानीय निवासियों ने भव्य स्वागत भी किया।</p>
<h3>पूनमदीप कौर ने समूह पटियालावासियों को विरासती उत्सव में भारी तादाद में पहुंचने का दिया न्योता</h3>
<p style="text-align:justify;">आईजी एएस राय ने कहा कि विरासती उत्सव मौके जिला प्रशासन की ओर से पटियाला फाउंडेशन के सहयोग से किया गया विरासती सैर का प्रयास प्रशंसनीय कदम है, इसके साथ विद्यार्थियों को अपने शहर की 256 सालों से भी पुराने विरासती अस्तित्व का पता चला है और इन्होंने आज उन स्थानों को देखा और इसका इतिहास जाना है, जिससे सभी लोग जानकार नहीं होते। पूनमदीप कौर ने समूह पटियालावासियों को विरासती उत्सव में भारी तादाद में पहुंचने का खुला न्योता दिया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/it-is-commendable-to-make-the-students-aware-of-the-old-heritage-ig/article-7800</link>
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                <pubDate>Fri, 22 Feb 2019 11:02:29 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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