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                <title>Play Store - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>गूगल ने प्ले स्टोर से पेटीएम को हटाया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। गूगल ने ‘जुएबाजी को प्रोत्साहित करने’ के आरोप में ई-वॉलिट पेटीएम ऐप को अपने प्ले स्टोर से हटा दिया है। प्लेस्टोर एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए मोबाइल ऐप का सर्वसुलभ भंडार है। गूगल ने प्लेस्टोर से सिर्फ पेटीएम ऐप को हटाया है जो ई-वॉलिट की तरह काम करता है। पेटीएम के अन्य ऐप अब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/google-removed-paytm-from-play-store/article-18548"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/google-removed-paytm-from-play-store.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। गूगल ने ‘जुएबाजी को प्रोत्साहित करने’ के आरोप में ई-वॉलिट पेटीएम ऐप को अपने प्ले स्टोर से हटा दिया है। प्लेस्टोर एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए मोबाइल ऐप का सर्वसुलभ भंडार है। गूगल ने प्लेस्टोर से सिर्फ पेटीएम ऐप को हटाया है जो ई-वॉलिट की तरह काम करता है। पेटीएम के अन्य ऐप अब भी प्लेस्टोर पर उपलब्ध हैं। यहाँ यह भी उललेखनीय है कि गूगल ने ‘गूगलपे’ के नाम से खुद का ई-वॉलिट ऐप भी लॉन्च किया है जो पेटीएम के प्रतिस्पर्द्धी के रूप में उभरा है। गूगल इंडिया ने पेटीएम का जिक्र किए बिना शुक्रवार को एक ब्लॉग स्पॉट में लिखा है, ‘हम ऑनलाइन कसिनो की इजाजत नहीं देते और न ही जुए बाजी से जुड़े अनियमित ऐप को समर्थन देते हैं जिस पर खलों से जुड़े सट्टेबाजी होती है। हमारी नीति उन ऐप के लिए भी यही है जो ग्राहकों को किसी ऐसे वेबसाइट पर ले जाता है जहाँ वे पैसे देकर किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं और नकद इनाम या पैसा जीत सकते हैं। इस कार्रवाई के बाद पेटीएम ने अपने ट्विटर हैंडल पर ग्राहकों को संबोधित करते हुए लिखा है कि पेटीएम का एंड्रॉयड ऐप अस्थायी रूप से गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड या अपडेट नहीं किया जा सकेगा। जल्द वापसी की उम्मीद करते हुए उसने लिखा, ‘आपका पैसा हमारे पर पूरी तरह सुरक्षित है और आप अपने पेटीएम ऐप का इस्तेमाल हमेशा की तरह जारी रख सकते हैं।</h6>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Sep 2020 17:13:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्ले स्टोर में है फर्जी एप का जाल, रहें बचके</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल एप संबंधी विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा करना पड़ सकता है महंगा अपने स्मार्टफोन में मोबाइल एप संबंधी आने वाले विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा करके उन्हें डाऊनलोड करना आपको महंगा पड़ सकता है क्योंकि डाटा चोरी की अनेक घटनाएं अब तक सामने आ चुकी हैं। अब कोई थर्ड पार्टी एप डाउनलोड करते समय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">मोबाइल एप संबंधी विज्ञापनों पर आंख मूंदकर<br />
भरोसा करना पड़ सकता है महंगा</h1>
<p style="text-align:justify;">अपने स्मार्टफोन में मोबाइल एप संबंधी आने वाले विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा करके उन्हें डाऊनलोड करना आपको महंगा पड़ सकता है क्योंकि डाटा चोरी की अनेक घटनाएं अब तक सामने आ चुकी हैं। अब कोई थर्ड पार्टी एप डाउनलोड करते समय हम दुविधा में रहते हैं कि एप डाउनलोड करें या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज हम आपको मोबाइल एप संबंधी कुछ जरूरी बातें बताने जा रहे हैं जो आपके बेहद काम आएंगी। किसी भी थर्ड पार्टी एप को डाउनलोड करते समय अगर हम सामान्य बातों का ख्याल रखेंगे तो थर्ड पार्टी एप के खतरों से बच सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी एप्लीकेशन को डाउनलोड करते समय उस एप के नाम पर विशेष ध्यान दें। अधिकतर देखा जाता है कि फर्जी एप का नाम किसी लोकप्रिय एप के नाम की नकल करके रखा जाता है। इससे ऐसी एप के डाउनलोड किए जाने की संभावना बढ़ जाती है। एन के नाम की स्पेलिंग, एप के लोगों के रंग और डिजायन पर ध्यान दें, कई बार फर्जी एप और असली एप के डिजायन में बेहद मामूली अंतर होता है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">डेवलपर के नाम को पढ़ें</h1>
<p style="text-align:justify;">एक ही नाम की एक से अधिक एप गूगल स्टोर पर मिल जाएंगी। ऐसे में अगर आप एप को डाउनलोड करना चाहते हैं तो बड़ी दुविधा होती है कि कौन सी एप्लीकेशन असली है। इसके लिए एप के डिस्क्रप्रशन में जाकर डेवलपर के नाम को ध्यान से पढ़ें। कई फर्जी एप बनाने वाले डेवलपर तो असली एप के डेवलपर के नाम की भी नकल कर लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए ध्यान दें कि कहीं डेवलपर के नाम के आगे कोई विशेष संकेत या अक्षर न लिखा हो। साथ ही अक्षरों के बीच में गैप न दिया गया हो। अगर ऐसा है तो संभावना है कि नकली एप बनाने वाले डेवलपर ने यूजर्स को धोखा देने के लिए यह किया हो।</p>
<h1 style="text-align:justify;">रिव्यू और रेटिंग पर दें ध्यान</h1>
<p style="text-align:justify;">प्ले स्टोर पर मौजूद सभी एप्लीकेशन पर पब्लिक फीडबैक सिस्टम होता है, यानी आम यूजर उस एप पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। आप जब भी कोई नई एप डाउनलोड करना चाहते हैं तो पहले रिव्यू को ध्यान से पढ़ें। अगर रिव्यू सकारात्मक हों तब ही एप को डाउनलोड करें।</p>
<h1 style="text-align:justify;">एंटीवायरस का करें प्रयोग</h1>
<p style="text-align:justify;">अपने फोन को किसी भी फर्जी एप के खतरे से दूर रखने के लिए किसी विश्वसनीय एंटीवायरस का प्रयोग करें। एंटीवायरस होने पर फोन उस एप को डाउनलोड करने पर आपको चेतावनी देगा।</p>
<h1 style="text-align:justify;">थर्ड पार्टी एप स्टोर से रहें दूर</h1>
<p style="text-align:justify;">जब भी आपको कोई एप डाउनलोड करनी हो तो किसी भी थर्ड पार्टी एप स्टोर से उसे डाउनलोड करने से बचें। अगर आप एंड्रायड यूजर हैं तो गूगल प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करें, क्योंकि वहां सभी एप की स्क्रूटिनिंग की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/play-store-has-fake-app/article-7942</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Mar 2019 15:35:03 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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